पूरी रात रोई, तब शुभेंदु अधिकारी ने दिया साथ’—क्या महुआ मोइत्रा छोड़ेंगी ममता का हाथ?

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रही हैं। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस में बागियों की झरी लग गई। हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी विधायकों और अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी को उनकी ही बनाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से बेदखल कर दिया। इस बीच उनकी सबसे करीबी सांसद और टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने भी चौंकाने वाला बयान दिया है।

महुआ मोइत्रा (TMC) और शुभेंदु अधिकारी (BJP) मौजूदा समय में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। हालांकि, उनका यह बयान ममता की चिंता बढ़ा सकती है।

महुआ मोइत्रा ने बीते 22 जून को बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की है। उन्हें एक अच्छा दोस्त बताया और पुराने दिनों को याद किया जब शुभेंदु ने उनकी मदद की थी।

शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त
महुआ कहती हैं, “शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त हैं। जब हम एक पार्टी में थे तो उन्होंने मेरा काफी साथ दिया। जब मैं करीमपुर से चुनाव लड़ी थी तो सिर्फ वही मेरे लिए प्रचार करने के लिए आए थे। मुझे जो भी मदद चाहिए होता था वह मुझे भेजते थे। जब 2014 में मुझे लोकसभा का टिकट मिलने वाला था और नहीं मिला। मैं पूरी रात रोई थी। उस समय सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ने ही मेरा साथ दिया था। उन्होंने मुझसे कहा था- नहीं बहन, मैं हूं न। ये सारे भावनात्मक कनेक्शन रहते हैं। आज हम दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। बात नहीं होती है। यह अलग बात है।”

आपको बता दें कि उस समय शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में हुआ करते थे और ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। महुआ इस समय अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद कर रही थीं।

2016 में लड़ी थी विधानसभा चुनाव
महुआ मोइत्रा ने साल 2016 में पश्चिम बंगाल की करीमपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था और जीता था। उस समय शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के कद्दावर संगठनकर्ता और नदिया जिले के पार्टी पर्यवेक्षक हुआ करते थे। महुआ उसी दौर का जिक्र कर रही हैं कि जब संगठन के अन्य नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया, तब शुभेंदु अधिकारी ने जमीन पर उतरकर उनके लिए चुनाव प्रचार किया था।

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महुआ मोइत्रा कृष्णानगर सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन शुरुआती चर्चाओं में जब उन्हें टिकट मिलने में संशय था तब वे भावुक हो गई थीं। उस समय शुभेंदु ने एक सीनियर सहकर्मी के नाते उन्हें ढांढस बंधाया था। बाद में महुआ को कृष्णानगर से टिकट मिला और वे जीतकर संसद पहुंचीं।

बहुमंजिला भवनों, कोचिंग संस्थानों, होटलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का होगा विशेष ऑडिट

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बहुमंजिला आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कोचिंग संस्थानों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और विशेष ऑडिट के निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नागरिकों, विद्यार्थियों और आमजन की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी विषय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव विकास शील ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, अग्निशमन विभाग तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को विशेष निरीक्षण अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के अंतर्गत बहुमंजिला आवासीय भवनों, कोचिंग सेंटरों, ट्यूशन कक्षाओं, होटल, लॉज, मॉल, व्यावसायिक परिसरों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संबंधित संस्थानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, वैध फायर एनओसी, आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, विद्युत वायरिंग एवं उपकरणों की स्थिति, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, प्राथमिक उपचार सुविधा, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही भवनों की क्षमता के अनुरूप लोगों की संख्या, पार्किंग व्यवस्था तथा आपदा की स्थिति में निकासी एवं राहत प्रबंधन की तैयारियों का भी परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के संबंध में संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिए जाएं तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक कर सकेंगे विद्यार्थी

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक कर सकेंगे विद्यार्थी

स्पर्श पोर्टल के माध्यम से होगा आवेदन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया

भोपाल 

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक किये जा सकेंगे। योजना के प्रभावी संचालन के लिए एनआईसी मध्यप्रदेश के सहयोग से स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है, जिसके माध्यम से पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकेंगे।

योजना के अंतर्गत अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थी पात्रतानुसार स्वयं स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही जिला कार्यालयों में प्राप्त ऑफलाइन आवेदनों को भी संयुक्त अथवा उप संचालक, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।

ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का परीक्षण जिला स्तर पर किया जाएगा। पात्रता एवं नियमानुसार आवेदनों को स्वीकृत किया जाएगा तथा अपात्र पाए जाने वाले आवेदनों को अस्वीकृत किया जाएगा। विद्यार्थियों से आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण एवं स्वीकृति-अस्वीकृति की प्रक्रिया 15 सितम्बर 2026 तक पूर्ण की जाएगी।

योजना के तहत स्वीकृत हितग्राहियों को उनकी पात्रतानुसार सामग्री का वितरण विश्व दिव्यांग दिवस 3 दिसम्बर 2026 के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रमों में किया जाएगा।

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने सभी पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राओं से निर्धारित समय-सीमा में आवेदन करने का आग्रह किया। जिला अधिकारियों से योजना के ऑनलाइन क्रियान्वयन की समस्त प्रक्रिया का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।

 

श्रावण मास से बदल सकती है कालभैरव मंदिर की दर्शन व्यवस्था, सामान्य-सशुल्क और प्रोटोकॉल के लिए अलग लाइन

 उज्जैन
श्रावण महीने की शुरुआत से कालभैरव मंदिर में दर्शन व्यवस्था बदल सकती है। मंदिर प्रबंध समिति अभी से तैयारी कर रही है।कुछ दिनों पहले ही मंदिर में 500 रुपए सशुल्क वीआईपी दर्शन की व्यवस्था भी शुरू की गई है। ऐसे में अभी मंदिर में निःशुल्क सामान्य व सशुल्क दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग दो कतार लगाई जा रही है। इनमें से सशुल्क दर्शन वाली कतार में ही प्रोटोकॉल व वीआईपी वाले श्रद्धालुओं को भी दर्शन करवाए जा रहे हैं। इससे सुविधा बनाने में मुश्किलें हो रही हैं, क्योंकि इस कतार वाले सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन करवाने होते हैं। अगले महीने 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में समिति यहां की दर्शन व्यवस्था को और भी सरल बनाने की तैयारी कर रही है।

यह है समिति की प्लानिंग
दर्शन की नई प्लानिंग यह की जा रही है कि दो की बजाय दर्शन के लिए तीन कतार का प्रबंध किया जाएगा। इनमें से पहली कतार निःशुल्क सामान्य दर्शनार्थियों के लिए रहेगी। दूसरी कतार 500 रुपए सशुल्क वाले दर्शनार्थियों के लिए और तीसरी कतार प्रोटोकॉल- वीआईपी वाले श्रद्धालुओं के लिए। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एलएन गर्ग पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि व्यवस्थाओं में परिवर्तन करेंगे और ऑनलाइन पर भी जोर देंगे।

श्रावण में बढ़ेगी भीड़
श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद अधिकांश श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में इस मंदिर में भी भीड़ का दबाव रहता है।
महाकाल दर्शन रूट पर भी बदलाव की तैयारी

श्रावण माह की शुरुआत और महाकाल लोक में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को ट्रैफिक डीएसपी दिलीपसिंह परिहार और थाना प्रभारी इंद्रपाल सिंह की उपस्थिति में ऑटो व ई-रिक्शा संघ के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक में सर्वसम्मति बनी है कि बेगमबाग-हरिफाटक से नीलकंठ मार्ग पर लगने वाले जाम से मुक्ति के लिए अब इस रूट पर ऑटो और ई-रिक्शा का प्रवेश बंद करना जरूरी है। डीएसपी परिहार ने बताया कि इस प्रस्ताव को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर के समक्ष अंतिम नोटिफिकेशन के लिए रखा जाएगा।

मंदिर जाने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग तय (साइड बॉक्स)

    रूट नंबर 1: हरिफाटक- बेगमबाग के बजाय ऑटो व ई-रिक्शा गऊघाट और यंत्र महल के रास्ते होते हुए श्रद्धालुओं को नृसिंह घाट छोड़ेंगे।

    रूट नंबर 2: हरिफाटक ब्रिज टी-पॉइंट से इंटरप्रिटेशन सेंटर होते हुए ई-रिक्शा सीधे चारधाम तक जा सकेंगे।

(नोट- यदि किसी श्रद्धालु या स्थानीय नागरिक को ई-रिक्शा व ऑटो से गोपाल मंदिर की तरफ जाना है, तो ऑटो व ई-रिक्शा चालक दौलतगंज के रास्ते का उपयोग कर तोपखाना होते हुए जा सकेंगे।)

सागर वालों के लिए रेलवे का तोहफा, अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस से दिल्ली का सफर आसान

सागर
 सागर में रेल सुविधाओं के विस्तार के प्रयासों के चलते एक और सौगात सागर शहर को मिली है. अब अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन सागर से होकर गुजरेगी. लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 

रेलवे बोर्ड द्वारा गाड़ी संख्या 22407/22408 अंबिकापुर–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस की फ्रीक्वेंसी को साप्ताहिक से बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन संचालित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”उन्होंने सागर लोकसभा क्षेत्र की जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों एवं नौकरीपेशा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मांग को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने प्रमुखता से रखा था. रेल मंत्रालय द्वारा इस जनहितकारी मांग को स्वीकार किया जाना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। 

व्यापारियों और स्टूडेंट्स के लिए दिल्ली का सफर हुआ आसान
सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”ये ट्रेन सागर के यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक होगी. दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से रात लगभग 11 बजे चलकर ये ट्रेन अगले दिन सुबह 8:30 बजे सागर पहुंचती है, जिससे यात्रियों को रातभर में आरामदायक यात्रा कर सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलती है। 

उन्होंने बताया कि, ”अब तक दिल्ली जाने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारी गोंडवाना एक्सप्रेस पर निर्भर थे, जिसके लिए उन्हें ट्रेन पकड़ने हेतु दोपहर लगभग 3 बजे ही स्टेशन के लिए निकलना पड़ता था. इससे उनके पूरे दिन का समय प्रभावित होता था. नई व्यवस्था से व्यापारियों का समय बचेगा, यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी तथा व्यवसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। 

प्रधानमंत्री और रेलमंत्री का माना आभार
डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि, ”इस निर्णय से सागर, दमोह, कटनी एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, व्यापारियों तथा नौकरीपेशा लोगों को दिल्ली आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी.” इस सौगात के लिए सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, ”केंद्र सरकार निरंतर जनभावनाओं के अनुरूप रेल सुविधाओं का विस्तार कर रही है और सागर क्षेत्र के विकास के लिए वे आगे भी इसी प्रकार प्रयासरत रहेंगी। 

उच्च शिक्षा विभाग की पहल : नए सत्र में महाविद्यालयों में होंगे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम

भोपाल

उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में इंडक्शन (अभिमुखीकरण) कार्यक्रम के दौरान “मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम” आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें तनाव, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से प्रारंभ होने वाले नवप्रवेशित विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच, ध्यान एवं जीवन कौशल जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग एवं सहायता सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग नियमों, शिकायत निवारण तंत्र, मेंटर-मेंटी प्रणाली, साइबर बुलिंग से बचाव तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के संबंध में भी जागरूक किया जाएगा। महाविद्यालयों में उपलब्ध काउंसलर, मेंटर, एंटी-रैगिंग समिति, आंतरिक शिकायत समिति एवं अन्य सहायता तंत्रों की जानकारी भी विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया है कि कार्यक्रम के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित प्रतिवेदन, फोटोग्राफ्स, वीडियो एवं समाचार प्रकाशन की प्रतियां विभाग को निर्धारित समय सीमा में भेजी जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि यह पहल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित नेशनल टास्‍क फोर्स की अनुशंसाओं के अनुरूप की जा रही है। विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण हो सके।

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने में महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण : मंत्रीपरमार

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की सशक्त संस्कृति विकसित होने से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्राप्त होगी तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

उच्च शिक्षा मंत्रीपरमार बुधवार को भोपाल स्थित अपने निवास कार्यालय में शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन कर अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्रीपरमार ने कहा कि शोध पत्रिकाएं एवं जर्नल ज्ञान के सृजन, संरक्षण एवं प्रसार के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे प्रकाशनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों को व्यापक मंच प्रदान करने का अवसर मिलता है तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारपरक, शोधोन्मुख एवं समाजोपयोगी बनाना है।

मंत्रीपरमार ने महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में ऐसे प्रयास प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा “रोजगारपरक शिक्षा के विविध आयाम” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया था। इस वेबिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा को रोजगारपरक बनाने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जागरूक करने तथा शिक्षण संस्थानों, शोध एवं उद्योग जगत के मध्य समन्वय स्थापित करना था। वेबिनार में देशभर के विभिन्न शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही तथा 54 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन्हें समीक्षित एवं संकलित कर शोध जर्नल के रूप में प्रकाशित किया गया।

इस अवसर पर शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता मोदी, समन्वयक डॉ. अलका प्रधान, डॉ. आर. एस. रघुवंशी, शोध एवं प्रकाशन समिति के सदस्य डॉ. चन्द्रभान माकोड़े, डॉ. उमाशंकर पटेल, डॉ. नीतू शर्मा तथा डॉ. एल.एन. गौड़ सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

 

अब 2 मिनट में पहुंचेगी डायल 112, देरी होने पर भोपाल में अफसरों को मिलेगा अलर्ट

भोपाल 

मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में पुलिस की आपकालीन सेवा डायल- 112 में कुछ जिलों में रिस्पांस में देरी की शिकायतों के बाद व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। पुलिस रेडियो मुख्यालय द्वारा अब डायल-112 के आपातकालीन वाहनों के सिस्टम से जिले के जिम्मेदार पुलिस अफसरों को जोड़ा गया है।

यानी की अब डायल 112 में घटना की सूचना आने के बाद यदि वाहन दो मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना नहीं होता है तो सीधे एडिशनल एसपी के पास अलर्ट जाएगा। जिसमें वाहन नंबर और थाना क्षेत्र भी होगा। दरअसल इस व्यवस्था से पहले सभी जिलों के एसपी को जोड़ा गया था। लेकिन बाद में परिवर्तन करते हुए यह जिम्मेदारी एडिशनल एसपी को दी गई है।

2 मिनट के भीतर करना होगा पायलट को एनरूट
फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) यानी डायल- 112 के पायलट के पास जैसे ही कोई इवेंट आता है तो सबसे पहले उसे एकनॉलेज करना होता है यानी की उसे इवेंट की जानकारी प्राप्त हो गई है। उसके बाद उसे घटनास्थल रवाना होने से पहले एनरूट करना होता है यानी की वो मौके के लिए रवाना हो गया है। अब इस प्रक्रिया को एफआरवी का पायलट 2 मिनट तक नहीं करते है तो सिस्टम सीनियर अधिकारियों को देरी का अलर्ट देने लगेगा।

78 लाख लोगों ने मांगी 9 माह में मदद
डॉयल 112 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिंतबर 2025 ले 26 मई 2026 तक यानी नौ माह में 78 लाख लोगों ने फोन कर आपातकालीन सेवा से मदद मांगी। जिसमें 21 लाख से ज्यादा जगहों पर एफआरवी वाहन मदद के लिए भेजे गए। जिसमें सबसे ज्यादा साइबर क्राइम, महिला अपराध से जुड़े है।

रिस्पांस टाइम बढ़ने की शिकायतों के बाद बदलाव
पुलिस रेडियो मुख्यालय की मॉनिटरिंग में यह शिकायत लगातार सामने आ रही थी कि एफआरवी समय से कई जगहों पर मूवमेंट नहीं मूवमट कर रही है, जिस कारण रिस्पांस टाइम बढ़ रहा है। पड़ताल में पता चला कि पायलट गाड़ी खड़ी कर किसी अन्य काम में लग जाता था। जिस कारण इवेंट आने पर घटनास्थल पर पहुंचने में समय लगता था। खामी सामने आने के बाद सिस्टम में ही बदलाव कर दिया है।

सीएम ने दी थी सौगात
जानकारी के लिए बता दें कि एमपी में साल 2025 में एमपी पुलिस को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आधुनिक सुविधाओं और तकनीकों से लैस 1200 नई महिंद्रा स्कॉर्पियो और बोलोरो गाड़ियों की सौगात दी इसी के साथ पुलिस सहायता का नंबर भी डायल-100 के बजाए डायल-112 किया गया।

यानी पुलिस सहायता के लिए आपको 112 पर कॉल करना होगा। कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया थी। बीते स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों को ये नए तकनीकी डायल-112 के वाहन सौंपे गए। इन अत्याधुनिक वाहनों के माध्यम से पुलिस रिस्पॉन्स टाइम को कम करने और आमजन तक त्वरित सहायता पहुंचाने में उल्लेखनीय सुधार होने का दावा किया गया। इसी पर अब काम किया जा रहा है।

भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब, 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

नई दिल्ली

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने कैपिटल हिल में आयोजित ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाना है. इस रणनीति को ‘मिशन 500’ का नाम दिया गया है। 

परिणाम-उन्मुख संबंधों पर जोर
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देश अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका ध्यान सीधे परिणामों पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में की गई आधिकारिक घोषणा के बाद से दोनों देशों की टीमों ने इस पर दिन-रात काम किया है. इस समझौते के लागू होने से अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारत का 140 करोड़ (1.4 बिलियन) उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार पूरी तरह खुल जाएगा, जो दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। 

क्या है समझौते की प्रमुख बातें?
500 अरब डॉलर की भारतीय खरीद: इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है। 

ऊर्जा साझेदारी में उछाल: दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार 2025 से तेजी से बढ़ा है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. साथ ही नए ‘शांति अधिनियम’ के तहत दोनों देश नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने की राह तलाश रहे हैं। 

रिकॉर्ड भारतीय निवेश: आर्थिक मोर्चे पर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में हुए ‘SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट’ में भारतीय कंपनियों द्वारा 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं जताई गईं, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी निवेश घोषणाओं में से एक है। 

टैरिफ नीति में बदलाव के बाद नए सिरे से बातचीत
हाल ही में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में आए बड़े बदलावों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते के ढांचे को फिर से समायोजित किया जा रहा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी मुख्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समझौते के आखिरी हिस्सों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की कोशिश है कि 24 जुलाई 2026 से पहले (जब अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ समाप्त हो रहा है) एक अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर दिया जाए. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने यानी जुलाई के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में होंगे। 

व्यापार संतुलन और शिक्षा का योगदान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली बढ़त के साथ 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत का आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष जो पहले 40.89 अरब डॉलर था, वह घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. व्यापार के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र भी इस रिश्ते को मजबूती दे रहा है; वर्तमान में 3,30,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 14 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। 

बांग्लादेश की सेना में बढ़ रहा चीन का दखल, J-10CE डील से भारत को घेरने की तैयारी?

ढाका
 साउथ एशिया के डिफेंस मार्केट में इन दिनों तगड़ी हलचल है. पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश भी चीन का लड़ाकू विमान J-10CE को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है. बांग्लादेश वायु सेना चीन से ऐसे 24 फाइटर जेट्स खरीदने की डील के बेहद करीब है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस लड़ाकू विमान के फुस्स हो जाने के बावजूद, ड्रैगन ने उल्टा नैरेटिव सेट करके इस जेट को जी-जान से प्रमोट किया. अब ढाका उसके जाल में फंस गया है. करीब 40 मिलियन डॉलर कीमत वाला ये सौदा अगर पक्का हुआ तो भारत की दोनों सरहदों पर चीनी हथियारों का पहरा मजबूत हो जाएगा। 

बांग्लादेश में चीन का डिफेंस जाल
बांग्लादेश की सेनाएं पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी हथियारों पर निर्भर हैं. चीन धीरे-धीरे बांग्लादेश के तीनों सेनाओं में घुस चुका है. थल सेना की बात करें तो बांग्लादेश का पूरा टैंक बेड़ा चीनी मूल का है, उनकी एयर डिफेंस और आर्टिलरी में भी चीनी उपकरणों की भरमार है. नौसेना के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने चीन से ही पनडुब्बी हासिल की थीं। 

अब इस प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए बांग्लादेशी वायु सेना को भी पूरी तरह चीनी रंग में रंगने की तैयारी है. बांग्लादेश के पास फिलहाल रूसी मिग-21 का चीनी वर्जन F-7 फाइटर्स है, जिसे वो काफी समय से बदलने की कोशिश में था. हालांकि उसने यूरोफाइटर जैसी पश्चिमी तकनीकों पर भी विचार किया लेकिन चीन ने नई चाल चल दी. चीन ने बांग्लादेश को कम कीमत और आसान शर्तें ऑफर कीं और आखिरकार पासा चीन के पक्ष में झुकता दिख रहा है। 

J-10CE, जिसे चीन में ‘विगोरस ड्रैगन’ के नाम से जाना जाता है, कोई साधारण विमान नहीं है. ये चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का सबसे भरोसेमंद फाइटर जेट है. ये विमान चीन की खतरनाक PL-15 मिसाइलों से लैस होता है। 

चीन का गिरता एक्सपोर्ट और तीन देशों का खतरनाक नेक्सस
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है. ऐसे में चीन के लिए ये डील संजीवनी की तरह है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन जितने भी हथियार एक्सपोर्ट करता है, उसका 80% हिस्सा एशिया में ही आता है। 

भारत के लिए क्या बदलेगा?
चीन के कुल सैन्य निर्यात का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ तीन देश खरीदते हैं- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और पूर्व डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के मुताबिक, चीन ने भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक खतरनाक मिलिट्री नेक्सस बना लिया है, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी। 

अगर बांग्लादेश-चीन की ये डील फाइनल होती है तो भारत के पश्चिमी बॉर्डर यानी पाकिस्तान और पूर्वी बॉर्डर यानी बांग्लादेश दोनों तरफ चीनी फाइटर जेट्स तैनात हो जाएंगे यानी चीन की एंट्री हो जाएगी. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि संकट के समय भारत को दोतरफा हवाई खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में चीनी तकनीशियनों और सैन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी बढ़ेगी जो भारतीय सीमा के बेहद करीब रहकर खुफिया कूटनीति और निगरानी को अंजाम दे सकते हैं। 

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