अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाए, व्यापार में मिली बड़ी राहत।

नई दिल्ली
 भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जल्दी ही सहमति बन सकती है। बताया जा रहा है कि यह फाइनल स्टेज में है। इससे पहले अमेरिका की ओर से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने अपनी उस पाबंदी सूची से चार भारतीय कंपनियों के नाम हटा दिए हैं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीक और उपकरण सप्लाई करने के आरोप लगे थे।

अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। इन कंपनियों को अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की विशेष रूप से नामित नागरिकों और अवरुद्ध व्यक्तियों (SDN) की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
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कौन सी हैं ये 4 भारतीय कंपनियां?
प्रतिबंधों की सूची से हटाए गए नामों में दो कंपनियां हैदराबाद की, एक अहमदाबाद की और एक नई दिल्ली की है। इन चारों के नाम इस प्रकार हैं:

    आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद)
    लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद)
    गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद)
    शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली)

इन कंपनियों पर क्या थे आरोप?
साल 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के आरोप में इन कंपनियों पर पाबंदियां लगाई थीं। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ये कंपनियां रूस को दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक भेज रही थीं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड: अक्टूबर 2024 में इस कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने रूसी संस्थाओं को रोलर बियरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दर्जनों संवेदनशील सामान निर्यात किए थे।
शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेजने का आरोप था।
आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने ब्लैकलिस्टेड रूसी फर्म आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक की 100 से अधिक खेप भेजी थीं।
लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस कंपनी पर विभिन्न रूसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दर्जनों मशीन टूल्स निर्यात करने का आरोप लगाया गया था।

क्या हैं इस फैसले के मायने?
अमेरिकी सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों को सूची से हटाने की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा लगातार अमेरिकी प्रशासन के साथ किए गए कूटनीतिक संवाद और भारतीय कंपनियों द्वारा निर्यात नियमों के कड़ाई से पालन के आश्वासनों के बाद यह कदम उठाया गया है।

कंपनियों के लिए बड़ी राहत
अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में होने के कारण इन कंपनियों के वैश्विक व्यापार, बैंक लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक वित्तीय प्रणालियां काफी हद तक अमेरिकी डॉलर और वहां के नियमों से जुड़ी हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य रूप से अपना बिजनेस दोबारा शुरू कर सकेंगी।

LPG Price Cut: जुलाई के पहले दिन बड़ी राहत, सस्ता हुआ LPG सिलेंडर, जानें आपके शहर के नए रेट

 नई दिल्ली

LPG Price Cut: जुलाई महीने की शुरुआत हो गई है और ये राहत भरी है. दरअसल, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है. LPG Cylinder Price Cut 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर किए गए हैं. ताजा रेट्स की बात करें, तो दिल्ली में 3,113 रुपये का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपये का रह गया है. इस हिसाब से गैस सिलेंडर की कीमत 183 रुपये घटाई गई है. हालांकि, इस बार भी घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 Kg LPG Cylinder Price को स्थिर रखा गया है। 

राहत भरी जुलाई की शुरुआत 
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं और जुलाई महीने की शुरुआत राहत भरी रही है. बीते कुछ समय में मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ताबड़तोड़ इजाफा किया गया था. अब 1 जुलाई 2026 को दिल्ली समेत अन्य शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट कम कर दिया गया है. बता दें कि साल 2026 में ये पहली बार है जबकि तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटाए हैं। 

19 Kg LPG Cylinder की कीमत पर इस साल लगभग हर महीने महंगाई का बम फूटा था. शुरुआती महीने जनवरी में इसी कीमत 1691 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो कि लगातार बढ़ोतरी के बाद महंगा होता चला गया. बीते दो महीनों में देखें, तो मई ये 993 रुपये महंगा होकर पहली बार 3000 रुपये के पार पहुंचा था और जून की शुरुआत में भी ये 42 रुपये महंगा हुआ था. इसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3113.50 रुपये पहुंच गई थी। 

कोलकाता से लखनऊ तक अब ये रेट 
राजधानी दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए गए बदलाव की बात करें, तो कोलकाता में अब ये कमर्शियल  सिलेंडर 3255.50 रुपये से घटकर 3,081.50 रुपये का हो गया है. इसके अलावा अन्य शहरों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3,052.50 रुपये रह गया है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में नई कीमत 3,227 रुपये पर आ गई है. सिलेंडर की नई कीमतें 1 जुलाई से लागू कर दी गई हैं। 

घरेलू गैस सिलेंडर के नहीं बदले दाम 
जहां एक ओर तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती करते हुए राहत दी है. तो वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) के दाम यथावत बने हुए हैं, यानी इनमें कोई चेंज नहीं किया गया है. दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर का दाम 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये है. तो वहीं मुंबई में 14 किलो वाला सिलेंडर 941.50 रुपये, जबकि चेन्नई में ये 957.50 रुपये का मिल रहा है। 

सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल, गोल्ड ₹8500 तक महंगा; जानें आज के ताजा रेट

नई दिल्ली
 सोने और चांदी में लगातार तीन हफ्तों से जारी गिरावट के बाद मंगलवार, 30 जून को अचानक उछाल (gold silver price) आया। दोपहर दो बजे के आसपास गोल्ड-सिल्वर में तेजी आई, जो वैश्विक बाजार कॉमेक्स और भारतीय घरेलू बाजार MCX पर भी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 2.60 डॉलर उछलकर 4040 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया। जबकि चांदी में 1.52 फीसदी की तेजी आई और कीमत 60 डॉलर के करीब पहुंच गई।

MCX पर कहां पहुंचे गोल्ड-सिल्वर के दाम?
वहीं एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1952 रुपए उछलकर 1,42,402 रुपए के दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया। इस दौरान सोना 1,42,384 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,42,402 रुपए (gold rate today) पर क्लोज हुआ था।

चांदी की बात करें जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में 8500 रुपए का जोरदार उछाल आया। खबर लिखे जाने तक चांदी 2.05 फीसदी यानी 4493 रुपए उछलकर 2,23,899 रुपए प्रति किलोग्राम (silver rate today) पर ट्रेड कर रही थी। इस दौरान इसका हाई लेवल 2,27,980 रुपए और लो लेवल 2,17,333 रुपए (silver price today) रहा। पिछले दिन यह 2,19,406 रुपए पर क्लोज हुई थी। यानी पिछले क्लोज और आज के हाई लेवल की तुलना करें चांदी में 8,574 रुपए महंगी हो गई।

Gold-Silver Price Today: जून में सोना-चांदी हुए सस्ते, जानें कितने गिरे भाव और नए रेट्स

 नई दिल्‍ली
ग्‍लोबल दबाव के बीच, शेयर बाजार से लेकर कमोडिटी मार्केट तक में भारी गिरावट देखने को मिली है. सोना और चांदी के दाम भी तेजी से नीचे आए हैं. सोमवार को भी सोना और चांदी के दाम टूट गए. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने की कीमतों में 1000 रुपये तक की गिरावट आई है। 

MCX पर सोमवार को सोना 1022 रुपये या 0.71% गिरकर 1,43,140 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं चांदी की कीमत करीब 1900 रुपये या 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरकर 2,19,522 रुपये प्रति किलो पर थी. सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट की वजह, फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मानी जा रही है। 

फेडरल रिजर्व बैंक द्वारा रेट में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ने के कारण डॉलर इंडेक्‍स में तेजी आई है, जिस कारण कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दे रहा है. वहीं महंगाई बढ़ने का भी खतरा बना हुआ है. अगर रेट में बढ़ोतरी होती है, तो ग्‍लोबल स्‍तर पर महंगाई बढ़ने की उम्‍मीद है। 

जून में सोना और चांदी में बड़ी गिरावट 
जून का महीना शुरू होने के बाद से ही सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट हुई है. एमसीएक्‍स पर 29 मई को चांदी की कीमत 2.67 लाख रुपये पहुंच गई थी, लेकिन अब 2.19 लाख रुपये पर कारोबार कर रही है. ऐसे में चांदी के भाव में 48000 रुपये या 18 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं गोल्‍ड की बात करें तो 29 मई को एमसीएक्‍स पर सोना 1.61 लाख रुपये पर पहुंच गया था, लेकिन यहां से 18,000 रुपये या 11 फीसदी गिरकर यह 1.43 लाख रुपये पर आ चुका है। 

इंटरनेशनल स्‍तर पर सोने-चांदी का भाव 
ग्‍लोबल मार्केट में भी सोने-चांदी का भाव गिरकर कारोबार कर रहा है. सोना 26 डॉलर प्रति औंस या 0.67 फीसदी टूटकर 4,062 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है. वहीं चांदी की बात करें तो यह 2 डॉलर प्रति औंस या 2 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। 

क्‍या अभी सोना और चांदी खरीदना चाहिए? 
एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप सोने और चांदी में निवेश का प्‍लान बना रहे हैं तो अभी इसमें निवेश करने का सही मौका है, लेकिन आपको ग्‍लोबल सेंटिमेंट को लेकर सतर्क भी रहना चाहिए. किसी भी गिरावट पर आप थोड़ा-थोड़ा करके सोने-चांदी की खरीदारी कर सकते हैं और लॉन्‍ग टर्म नजरिए के साथ सोने-चांदी में निवेश जारी रख सकते हैं. हालांकि, आपको अपने पोर्टफोलियो का 20 फीसदी से ज्‍यादा सोने-चांदी में एक्‍सपोजर नहीं रखना चाहिए, वरना किसी भी निगेटिव सेंटिमेंट पर आपके पोर्टफोलियो में दबाव बढ़ सकता है। 

आज क्यों टूटा शेयर बाजार? मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भारी बिकवाली, 24,000 पर फिसला निफ्टी

मुंबई 

अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को फिर से जंग शुरू हो गई थी, जिसके बाद तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. इनका असर एशिया समेत भारतीय बजार में दिखाई दे रहा है. भारतीय बाजार में गिरावट आई है. सेंसेक्‍स 200 अंक से ज्‍यादा टूट चुका है, जबकि निफ्टी भी फ्लैट कारोबार कर रहा है. सबसे ज्‍यादा दर्द मिडकैप और स्‍मॉल कैप में है, जो क्रमश: 0.34 फीसदी और 0.55 फीसदी तक गिर चुके हैं। 

बीएसई के टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 17 शेयरों में तेजी है और 13 शेयर गिरकर कारोबार कर रहे हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट कोटक महिंद्रा बैंक में 3 फीसदी की रही है, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा, अडानी पोर्ट और कुछ अन्‍य शेयरों में 1 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है। 

9.30 बजे तक सेंसेक्‍स करीब 200 अंक गिरकर 76,910.61 पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी 40 अंक गिरकर  24,020 पर था. निफ्टी बैंक में 200 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट देखने को मिली. ग्‍लोबल तनाव के साथ ही कई अन्‍य वहजों से मार्केट में गिरावट आई है. आइए जानते हैं… 

क्‍यों आई शेयर बाजार में गिरावट? 

    सबसे बडी वजह तेल कीमतों में तेजी देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड वायदा 0.85% बढ़कर 72.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1% से अधिक बढ़कर 70.01 डॉलर प्रति बैरल हो गया। 

    एशिाई बाजारों में भी दबाव दिखाई दे रहा है. निक्केई 1 फीसदी गिर चुका है और कोस्‍पी में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट आई है. वहीं ग्‍लोबल मार्केट में भी दबाव बना हुआ है। 

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और आशंका है कि कहीं शांति समझौता बीच में ही ना टूट जाए। 

    फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से अगली बैठक में ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. इस अनुमान के कारण शेयर बाजारों में दबाव दिखाई दे रहा है। 

124 शेयरों में लोअर सर्किट
बीएसई पर आज ट्रेड करने वाले 3,768 शेयरों में से 1,543 शेयरों में तेजी है और 2,002 शेयर गिरे हुए हैं. 223 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वहीं 86 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर हैं और 46 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर कारोाबर कर रहे हैं. 96 शेयरों में अपर सर्किट है और 124 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है। 

अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर, ट्रेड डील से लेकर कच्चे तेल तक पर रहेगी नजर

 नई दिल्ली
 भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। उनका यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद आया था।

दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद
इस प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर स्ट्राइक की थी।
इसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट पर मालवाहक जहाज को निशाना बनाना था। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है। घरेलू आर्थिक डेटा भी बाजार की चाल को प्रभावित करेगा।

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा आएगा
29 जून को इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा जारी होगा। 30 जून को मई का राजकोषीय घाटे और व्यापार संतुलन, 1 जुलाई को जीएसटी, ऑटो सेल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और 2 जुलाई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आएगा।

बीता हफ्ता शेयर बाजार के लिए कैसा रहा?
इस हफ्ते सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों के कारण इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ।
हालांकि, निवेशक यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क बने रहे, क्योंकि इससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है।

 

केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: FD मैच्योरिटी पर बैंक को 12% ब्याज समेत भुगतान का आदेश

नई दिल्ली
अगर आपने भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई लोग मानते हैं कि FD सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प है, लेकिन अगर बैंक ही मैच्योरिटी के बाद आपकी रकम लौटाने में आनाकानी करे तो क्या होगा? ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी 5 लाख रुपये की FD की रकम पाने के लिए लगभग 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार, अदालत ने बैंक को कड़ी फटकार लगाते हुए न केवल पूरी रकम लौटाने, बल्कि 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

यह मामला केरल के त्रिशूर निवासी सेतुमाधवन का है। उन्होंने बैंक में 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थी, जिसकी मैच्योरिटी 2 जून 2015 को पूरी हो गई थी। जब वे अपनी जमा राशि लेने बैंक पहुंचे, तो बैंक ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान करने से इनकार कर दिया। काफी प्रयासों के बावजूद जब पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता आयोग ने सभी की जांच के बाद 31 दिसंबर 2021 को बैंक को आदेश दिया कि वह सेतुमाधवन को 5 लाख रुपये के साथ 12% सालाना ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा व मुकदमे का खर्च भी अदा करे। लेकिन, बैंक ने इस आदेश का पालन करने के बजाय अदालत में चुनौती देने का फैसला किया।

बैंक ने पहले केरल हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वह भी 825 दिन की देरी से। बैंक का तर्क था कि उस दौरान उसका प्रबंधन एक प्रशासक के अधीन था, इसलिए समय पर अपील नहीं की जा सकी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया और उपभोक्ता आयोग के फैसले को सही ठहराया।

इसके बाद भी बैंक पीछे नहीं हटा और मामले को हाईकोर्ट की बड़ी बेंच के सामने ले गया। इस बार बैंक ने दलील दी कि वह एक सहकारी बैंक है और इसलिए इस विवाद का निपटारा उपभोक्ता आयोग नहीं, बल्कि सहकारी समिति कानून के तहत होना चाहिए। हालांकि, 2 जून 2026 को केरल हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने भी बैंक की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया खास कानून है और यह अन्य कानूनों के अतिरिक्त लागू होता है। इसलिए कोई भी बैंक या संस्था उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र से बच नहीं सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता का पैसा रखने वाले बैंक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समय पर ग्राहकों को उनका पैसा लौटाना है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब बैंक खुद यह नहीं नकार रहा कि जमा राशि लौटानी है, तब केवल तकनीकी बहानों के आधार पर ग्राहक को परेशान करना बेहद निंदनीय है। अदालत ने कहा कि बैंक जैसे संस्थानों को जनता का विश्वास बनाए रखना चाहिए, न कि ग्राहकों को सालों तक न्याय के लिए भटकाना चाहिए।

हालांकि, सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से 6 महीने का समय मांगा गया, ताकि वह भुगतान कर सके। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए बैंक को 6 महीने के भीतर पूरी राशि, 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का अंतिम मौका दिया।

यह फैसला देशभर के करोड़ों FD निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा मैच्योरिटी के बाद भी आपकी जमा राशि नहीं लौटाई जाती है, तो आप उपभोक्ता आयोग या अदालत का सहारा ले सकते हैं। अदालतों ने कई बार स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के साथ लापरवाही करने वाले बैंकों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।

एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करेगा। साथ ही यह भी साबित करता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं, भले ही उसमें थोड़ा समय क्यों न लगे।

 

LPG सिलेंडर के दाम स्थिर, घरेलू उपभोक्ताओं को नहीं मिली कोई राहत या बढ़ोतरी

 नई दिल्ली
एक तरफ कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में लगातार गिर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ एलपीजी सिलेंडर दे दाम स्थिर है। युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दो बार इजाफा किया गया था। पहली बार सिलेंडर का रेट 7 मार्च 2026 को बढ़ा था। तब एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, दूसरी बार कीमतों में 7 जून को इजाफा हुआ था। तब दाम 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। बता दें, आज रविवार को एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। कीमतें पुराने स्तर पर ही हैं।

कॉमर्शियर सिलेंडर की कीमतों में युद्ध के शुरू होने के बाद तेज इजाफा दर्ज किया है। मौजूदा समय में देश के कई बड़े शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट 3100 रुपये को क्रॉस कर गया।

घरेलू सिलेंडर का क्या है दाम? (LPG Cylinder Rates)
नई दिल्ली – 942 रुपये

कोलकाता – 968 रुपये

मुंबई – 941.50 रुपये

चेन्नई – 957.50 रुपये

गुरुग्राम – 950.50 रुपये

नोएडा – 939.50 रुपये

बेंगलुरू – 944.50 रुपये

भुवनेश्वर – 968 रुपये

चंडीगढ़ – 951.50 रुपये

हैदराबाद – 994 रुपये

जयपुर – 945.50 रुपये

लखनऊ – 979.50 रुपये

पटना – 1031.50 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 951 रुपये

कॉमर्शियल सिलेंडर का क्या है रेट?
नई दिल्ली – 3113.50 रुपये

कोलकाता – 3255.50 रुपये

मुंबई – 3067.50 रुपये

चेन्नई – 3283 रुपये

गुरुग्राम – 3130 रुपये

नोएडा – 3113.50 रुपये

बेंगलुरू – 3198 रुपये

भुवनेश्वर – 3290 रुपये

चंडीगढ़ – 3136 रुपये

हैदराबाद – 3367 रुपये

जयपुर – 3141 रुपये

पटना – 3400 रुपये

लखनऊ – 3236 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 3152 रुपये

स्थिति में हो रहा है सुधार
केंद्र सरकार ने बीते दिनों इंडस्ट्री को सप्लाई किए जाने वाले एलपीजी सिलेंडर की लिमिट को हटा लिया है। यानी अब उनके डिमांड के हिसाब से एलपीजी सिलेंडर मिलेंगे। सरकार ने कहा कि हालिया स्तर पर एलपीजी की बेहतर स्थिति के बाद यह फैसला लिया गया है। बता दें, युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने इंडस्ट्रीयल एलपीजी सिलेंडर पर कैप लगा दिया था

भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तक हिस्सा कतर सहित कई अन्य अरब देशों से मंगाता है। लेकिन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई थी। जिसके बाद देश में एलपीजी की किल्लत देखने को मिली। सरकार ने स्थिति को देखते हुए इंडस्ट्रीयल सप्लाई पर सीमा लगा दिया। वहीं, शहरों और गांवों में बुकिंग एक निश्चित दिन तय कर दिए। इन सबके अलावा केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने का भी निर्देश ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दिया था।

जीएसटी के 10 साल: सरकार एआई आधारित टैक्स सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है

 नई दिल्ली
 देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सिस्टम लागू होने के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार का ध्यान केवल कर संग्रह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एआई आधारित अनुपालन, तेज रिफंड, डेटा इंटीग्रेशन और टैक्स प्रोसेस को सरल बनाने पर केंद्रित हो गया है। इसका उद्देश्य कारोबार क्षेत्रों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अनुपालन लागत कम करना और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है ताकि जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सके, टैक्स चोरी की पहचान आसान हो और मैन्युअल हस्तक्षेप कम किया जा सके।

सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिनती
एआई और डेटा विश्लेषण के जरिये अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एफिशिएंट बनाया जा रहा है। जीएसटी को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, करदाताओं का दायरा बढ़ाया है, अनुपालन को मजबूत किया है और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
एक जुलाई, 2017 को आधी रात में संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरुआत की थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बताते हुए कहा था कि इससे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।

‘एक राष्ट्र, एक टैक्स’ की अवधारणा
जीएसटी लागू करने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 प्रकार के कर तथा 13 तरह के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी में इन्हें समाहित कर पूरे देश के लिए एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को बल मिला।
इस व्यापक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए लंबी बातचीत की थी। जेटली ने इसे दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक के पुनर्गठन की बड़ी उपलब्धि बताया था।

टैक्स रेट में बदलाव
जीएसटी लागू होने के समय देश में पंजीकृत करदाताओं की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। इसे अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में जीएसटी में चार कर स्लैब-5, 12, 18 और 28 प्रतिशत थे।
वहीं विलासिता वाली वस्तुओं और अहितकर उत्पादों मसलन तंबाकू आदि पर 28 प्रतिशत के कर के अलावा अतिरिक्त उपकर भी लगाया गया। बाद में कर प्रणाली में सुधार के तहत 22 सितंबर, 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई।
इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को पांच प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया। वहीं केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक नकदी बच रही है।

एवरेज जीएसटी कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपये
वित्त मंत्री निमला सीतारमण के अनुसार नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना है। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी परिषद करती है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के समय औसत मासिक जीएसटी संग्रह 89,700 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये प्रति माह पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था।

पेट्रोलियम उत्पादों पर चर्चा जारी
वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी संविधान संशोधन के तहत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाएगा।

हालांकि, यह फैसला जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया था कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस को किस तारीख से जीएसटी के तहत लाया जाए। इस संबंध में जीएसटी परिषद में विमान ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर कुछ चर्चा हुई थी, लेकिन राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ऐसे में इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर फिलहाल राज्यों की पहल का इंतजार कर रही है। यानी जब तक राज्य इस संबंध में प्रस्ताव नहीं लाते, तब तक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।

 

8वें वेतन आयोग पर बड़ी चर्चा: फिटमेंट फैक्टर से तय होगी सरकारी कर्मचारियों की सैलरी

 नई दिल्ली
8वां पे कमीशन इस समय लगातार कर्मचारी और उनके संगठनों से बातचीत कर रहा है। सबसे अधिक किसी एक बात पर निगाह है तो वह फिटमेंट फैक्टर्स है। अधिक फिटमेंट फैक्टर होने की स्थिति में बेसिक पे उतना ही बढ़ जाएगा। जिसकी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार अधिक फिटमेंट फैक्टर की डिमांड कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई भी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। आइए जानते हैं कि फिटमेंट फैक्टर कैसे सैलरी को प्रभावित करेगा।

फिटमेंट फैक्टर कैसे प्रभावित करेगा सैलरी
मौजूदा समय में लेवल एक के अधिकारियों का बेसिक पे 18000 रुपये है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2 रहता है तब की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 36000 रुपये हो सकता है। वहीं, 2.5 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 45000 रुपये बेसिक पे पहुंच जाएगा। वहीं, फिटमेंट फैक्टर तीन रहने की स्थिति में बेसिक पे 54000 रुपये हो सकता है।

वहीं, लेवल 13 के कर्मचारी जिनका बेसिक पे इस समय 123100 रुपये है। 2 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति बेसिक पे 246200 रुपये हो सकता है। फिटमेंट 2.5 रहने की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 307750 रुपये हो सकता है।

8वां वित्त आयोग लगातार कर रहा है मीटिंग
पे कमीशन की तरफ से देश के अलग-अलग शहरों में मीटिंग हो रही है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और फिर उसके बाद उत्तर प्रदेश में 8वे वित्त आयोग की मीटिंग हो चुकी है। आगे बंगाल और उड़ीसा में 8वें पे कमीशन की मीटिंग प्रस्तावित है। बता दें, 8वें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2025 किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय पर है। इस दौरान कंपनी को रिपोर्ट जमा कर देना है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर उम्मीद जताई जा रही है
8वें पे कमीशन को कर्मचारी सगंठनों की तरफ से जमा किए गए मेमोरेंडम में 4 के करीब फिटमेंट फैक्टर भी रखने की मांग हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा मार्केट के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों और बेहतर सैलरी मिलनी चाहिए। अब देखना है कि आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर तय करता है।

फिटमेंट फैक्टर के अलावा कर्मचारी संगठनों की तरफ से मौजूदा डीए कैलकुलेशन का फॉर्मूले भी बदलाव की डिमांड की जा रही है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल में किया जाता है।

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