शेयर बाजार पर अगले हफ्ते बड़ा असर, ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली

 भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Outlook) के लिए अगला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल निर्धारित करेंगे। आने वाले सत्रों में निवेशकों की निगाहें अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर होंगी। दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है।
वहीं, ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया प्लान पेश करने वाला है। दूसरी तरफ अमेरिका भी ईरान के लेकर आक्रामक बना हुआ है। कच्चे तेल पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं।

तेल के दाम उछले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों और जब्ती को रोकने के लिए संभावित समझौते की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं।
इस सप्ताह के दौरान, ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड में 7.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि डब्ल्यूटीआई में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

विदेशी निवेशक भी खफा
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अहम होने वाले हैं। एफआईआई ने इस महीने में अब तक (16 मई तक) 27,177 करोड़ रुपए की बिकवाली की है। वहीं, 2026 में अब तक 2,31,486 करोड़ रुपए सेकेंडरी इक्विटी बाजार से निकाल चुके हैं। वहीं, प्राइमरी बाजार के माध्यम से वर्ष के दौरान कुल निवेश 12,468 करोड़ रुपए रहा है।
इस वर्ष एफपीआई द्वारा की गई कुल बिक्री पिछले वर्ष दर्ज की गई कुल निकासी को पार कर चुकी है। दूसरी तरफ घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 21 मई को एचएसबीसी पीएमआई का डेटा जारी होगा। वहीं, 22 मई को बैंक लोन, बैंक डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े जारी होंगे। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता नुकसान वाला रहा।

कैसा रहा पिछला हफ्ता?
पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक या 2.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,237 और निफ्टी 532 अंक या 2.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,643 पर बंद हुआ। इस दौरान सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 8.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप गेनर था।
निफ्टी आईटी 5.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.71 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 4.36 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.16 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 4.12 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 3 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 2.18 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.17 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

 

पावर ग्रिड के तिमाही नतीजे: मुनाफे में 9.7% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली

 सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने तिमाही नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने दी जानकारी में कहा है कि सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट 9.7 प्रतिशत बढ़ा है। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान इस कंपनी का कुल नेट प्रॉफिट 4546 करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 4143 करोड़ रुपये रहा था। बता दें, कंपनी ने तिमाही नतीजों के साथ-साथ डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

रेवन्यू में गिरावट
पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के रेवन्यू में गिरावट दर्ज की गई है। मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का कुल रेवन्यू 11666 करोड़ रुपये रहा था। एक साल पहले मार्च क्वार्टर में 12275 करोड़ रुपये कंपनी का रेवन्यू रहा था।

कंपनी के EBITDA में भी मार्च तिमाही के दौरान 11.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का EBITDA जनवरी से मार्च क्वार्टर के दौरान 9066 करोड़ रुपये रहा था। साल भर पहले इसी तिमाही में यह 10224 करोड़ रुपये रहा था।

तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने 5000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दे दी है।

कितना डिविडेंड दे रही है कंपनी
सरकारी कंपनी ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले एक शेयर पर योग्य निवेशकों को 1.25 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी इससे पहले फरवरी के महीने में एक्स-डिविडेंड ट्रेड की थी। तब योग्य निवेशकों को एक शेयर पर 3.25 रुपये का डिविडेंड मिला था

शेयरों का प्रदर्शन कैसा?
शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय पर पावर ग्रिड कारपोरेशन के शेयर 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 305.85 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले 6 महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली है। वहीं, एक साल में यह स्टॉक पोजीशनल निवेशकों को 2 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 324.80 रुपये और 52 वीक लो लेवल 250.05 रुपये है। इस कंपनी का मार्केट कैप 2.84 लाख करोड़ रुपये का है।

तीन साल में Power Grid के शेयरों की कीमतों में 67 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, 5 साल में पीएसयू स्टॉक का भाव 137 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, बीते 10 साल में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों का भाव 276 प्रतिशत बढ़ा है।

कंपनी में सरकार की कितनी हिस्सेदारी?
Trendlyne के डाटा के अनुसार इस कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 51.30 प्रतिशत थी। वहीं, सिंगापुर सरकार के पास 2.1 प्रतिशत हिस्सा है।

टाटा पंच का फ्लेक्स फ्यूल अवतार जल्द, इथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली

भारत में फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) से चलने वाली कारें जल्द ही हकीकत बन सकती हैं। टाटा मोटर्स (Tata Motors) उच्च इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के अनुकूल प्रोडक्शन-रेडी मॉडल पेश करने वाले पहले बड़े कार निर्माताओं में शामिल होने की तैयारी कर रही है। उद्योग जगत की चर्चाओं के अनुसार, टाटा मोटर्स इस साल के आखिर तक टाटा पंच का एक फ्लेक्स फ्यूल वर्जन लॉन्च कर सकती है। इस कॉम्पैक्ट एसयूवी को पहले फ्लेक्स फ्यूल रूप में प्रदर्शित भी किया जा चुका है। जो इस उभरते वैकल्पिक ईंधन सेगमेंट में प्रवेश करने के कंपनी के इरादे को दर्शाता है।

टाटा पंच का नया मॉडल किस तरह के ईंधन को सपोर्ट करेगा?

यह आगामी मॉडल देश के ईंधन आयात खर्च को कम करने की सरकारी नीति के अनुकूल तैयार किया जा रहा है:

    E85 ईंधन का सपोर्ट: इस नए पंच फ्लेक्स फ्यूल मॉडल से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर चलने की उम्मीद है, जिसे आमतौर पर E85 कहा जाता है।

    रणनीतिक उद्देश्य: सरकार पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करने और ईंधन आयात लागत में कटौती करने के प्रयासों को तेज कर रही है। जिसमें यह तकनीक सहायक होगी।

पंच की फ्लेक्स फ्यूल रणनीति और इंजन में क्या बदलाव होंगे?

टाटा पंच इस समय कई पावरट्रेन विकल्पों के साथ आती है। जिसमें अब एक नया विकल्प जुड़ने जा रहा है:

    पावरट्रेन का विस्तार: टाटा पंच पहले से ही पेट्रोल और सीएनजी विकल्पों में उपलब्ध है। फ्लेक्स फ्यूल वेरिएंट के आने से इस मॉडल की ईंधन अनुकूलता का और विस्तार होगा।

    इंजन में बड़े बदलाव: सूत्रों के अनुसार, उच्च इथेनॉल मिश्रण को सपोर्ट करने के लिए एसयूवी के 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। इन बदलावों में इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) और अन्य महत्वपूर्ण इंजन पुर्जों को अपडेट करना शामिल है।

    विशेष इंजीनियरिंग: फ्लेक्स फ्यूल वाहन विशेष रूप से काफी अधिक इथेनॉल सांद्रता वाले ईंधन को संभालने के लिए तैयार किए जाते हैं। जबकि मानक पेट्रोल कारें आमतौर पर E85 जैसे मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन नहीं की जाती हैं।

भारत के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहन क्यों महत्वपूर्ण हैं?

देश के ऊर्जा और पर्यावरण लक्ष्यों के लिहाज से इस तकनीक के कई मायने हैं:

    आयात बिल में कमी: सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश के ईंधन बिल में कटौती करने की अपनी रणनीति के तहत इथेनॉल सम्मिश्रण (इथेनॉल ब्लेंडिंग) को दृढ़ता से बढ़ावा दे रही है।

    स्वच्छ गतिशीलता: घरेलू स्तर पर उत्पादित बायोफ्यूल (जैव ईंधन) का उपयोग करते हुए इसे स्वच्छ गतिशीलता समाधानों को समर्थन देने के एक तरीके के रूप में भी देखा जा रहा है।

    ऊर्जा संक्रमण: उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को संतुलित कर रहा है।

बाजार में इस नई तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है:

    रेस में कई कंपनियां: टाटा मोटर्स फ्लेक्स फ्यूल तकनीक तलाशने वाली एकमात्र कंपनी नहीं है। कई कार निर्माताओं ने पहले ही अपने फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए हैं। और वे इस सेगमेंट में अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश कर रहे हैं।

    तकनीकी बाधा: विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं और अनुकूल इंजनों की जरूरत के कारण व्यापक स्तर पर फ्लेक्स फ्यूल को अपनाना आसान नहीं होगा। सामान्य पेट्रोल वाहन बड़े इंजीनियरिंग बदलावों के बिना E85 या E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रणों पर कुशलतापूर्वक काम नहीं कर सकते हैं। जिससे समर्पित फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का विकास आवश्यक हो जाता है।

 

रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से चमकी TVS Motor Company, 47,270 करोड़ रेवेन्यू और 59 लाख यूनिट्स की बिक्री

 नई दिल्ली

टीवीएस मोटर (TVS Motor) के लिए वित्तवर्ष 2026 बेहतरीन रहा है. कंपनी ने लगभग हर सेगमेंट में पॉजिटिव नंबर्स के साथ सेल्स को क्लोज किया है. बात करें ब्रांड के थ्री व्हीलर बिजनेस की, तो कंपनी ने 2.19 लाख यूनिट्स को बेचा है, जो 63 परसेंट की ग्रोथ है. दो साल पहले कंपनी इस नंबर की सिर्फ कल्पना कर सकती थी। 

कंपनी का रेवेन्यू 47,270 करोड़ पहुंच गया है, जो टीवीएस के इतिहास में पहली बार हुआ है. पिछले वित्तवर्ष से ये आंकड़ा 30 फीसदी ज्यादा है. 2025 फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने 36,251 करोड़ का कुल रेवेन्यू हासिल किया था. वहीं इस साल कंपनी ने सेल्स और रेवेन्यू के पुराने सभी आंकड़ों को तोड़ दिया है। 

कितनी बाइक और कितने स्कूटर बिकें? 
बीते वित्तवर्ष में कंपनी ने कुल 59 वाहन बेचे हैं. इसमें टू-व्हीलर्स और थ्री व्हीलर्स दोनों ही शामिल हैं. कंपनी ने 27.13 लाख मोटरसाइकिलें वित्तवर्ष 2026 में बेची हैं, जो 2025 में 21.95 लाख यूनिट्स थी. यानी ब्रांड ने 24 फीसदी की बढ़त हासिल की है. इसी दौरान ब्रांड ने 24.13 लाख स्कूटर्स बेचे हैं. जो वित्तवर्ष 2025 के 19.04 लाख के मुकाबले 27 फीसदी ज्यादा हैं। 

कंपनी की बेहतरीन सेल में अपाचे नेमप्लेट का बड़ा योगदान रहा है. वहीं टीवीएस रेडर 125 ऐसी बाइक है, जिसे लोगों ने काफी ज्यादा पसंद किया है. सिर्फ पेट्रोल इंजन वाले ही नहीं बल्कि कंपनी ने ईवी बिजनेस में भी कमाल किया है. ब्रांड के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सेल 33 फीसदी की बढ़त के साथ 3.71 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई है। 

वित्तवर्ष 2025 में ये संख्या 2.79 लाख यूनिट्स की थी. ब्रांड की आईक्यूब सीरीज बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में से एक है. बात करें रेवेन्यू की तो कंपनी ने जनवरी-मार्च 2026 वाली तिमाही में 12,808 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है। 

TVS Raider की बंपर सेल
टीवीएस रेडर 125 कंपनी की सफल मोटरसाइकिलों में से एक है. लॉन्च के बाद से इस बाइक की 19 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं. घरेलू मार्केट में इसकी 16.21 लाख यूनिट्स अब तक बिकी हैं, जबकि एक्सपोर्ट का आंकड़ा 2.86 लाख तक पहुंच गया है. यानी ओवर ऑल कंपनी ने इसकी 19 लाख से ज्यादा यूनिट्स को बेच दिया है। 

वित्तवर्ष 2022 में कंपनी ने इसकी सिर्फ 76,742 यूनिट्स को भारत में बेचा था. वहीं वित्तवर्ष 2024 बाइक के लिए अब तक का बेहतरीन साल रहा है. इस साल कंपनी ने 4.78 लाख यूनिट्स बाइक की बिकी हैं. पिछले वित्तवर्ष में इस बाइक की 4.26 लाख यूनिट्स घरेलू मार्केट में सेल हुई हैं। 

भौकाली लुक और दमदार इंजन के साथ लॉन्च हुई सबसे छोटी Toyota Land Cruiser, फीचर्स देख रह जाएंगे दंग

 नई दिल्ली

टोयोटा की जब भी बात होती है, तो हमारे दिमाग में फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसी बड़ी गाड़ियां आती हैं. कंपनी भारतीय बाजार में एक बेहद खास कार को लाने वाली है. फिलहाल इस कार को कंपनी ने अपने घरेलू मार्केट यानी जापान में लॉन्च किया है. ये ब्रांड की सबसे छोटी लैंड क्रूजर है। 

हम बात कर रहे हैं लैंड क्रूजर एफजे (Land Cruiser FJ) की, जिसे कंपनी ने पहले थाईलैंड और अफ्रीका में लॉन्च किया था. इस कार का भारत आना भी लगभग कन्फर्म है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी इस कार की मैन्युफैक्चरिंग अपनी अपकमिंग प्रोडक्शन फैसिलिटी में करेगी, जो महाराष्ट्र में होगी. इससे भारत में कार की कीमत कम भी रखी जा सकेगी। 

कितनी है कार की कीमत? 
इस कार को कंपनी ने जापान में 4,500,100 जापानी येन (लगभग 27.24 लाख रुपये) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. इसके साथ स्पेशल एक्सेसरीज पैकेज भी मिलेगा. यानी इस कार को आप अपनी जरूरत से हिसाब से आधिकारिक एक्सेसरीज इस्तेमाल करके मॉडिफाई भी कर सकेंगे. फुल एक्सेसरीज पैकेज के साथ इसकी कीमत 7,154,890 जापानी जेन (लगभग 43.31 लाख रुपये) तक जाती है। 

इस कार के साथ ही अलग-अलग एक्सेसरीज पैकेज ऑफर हो रहे हैं. इसमें से एक मोडेलिस्टा है, जिसमें कार की प्राइमरी स्टाइलिंग और इंटीरियर पर फोकस किया गया है. ये एक्सेसरीज पैकेज उन लोगों के लिए है, जो प्रीमियम या स्पोर्टी एस्थेटिक्स चाहते हैं. इसके अलावा कंपनी ऑफ रोडिंग कैपेबिलिटी के लिए अलग एक्सेसरीज ऑफर करती है। 

क्या है SUV में खास?
भले ही ये एसयूवी सबसे छोटी लैंड क्रूजर हो, लेकिन इसकी लंबाई 4 मीटर से ज्यादा है. ये कार 4.56 मीटर लंबी है, जो 5 सीटर वर्जन में आती है. इसमें 7 एयरबैग, लेवल 2 ADAS, 360 डिग्री कैमरा, 7-inch डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, 12.3 इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम और डुअल जोन क्लाइमेट कंट्रोल मिलता है। 

ये कार 2.7 लीटर के नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ आती है, जो 164 बीएचपी की पावर और 245 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है. ये पावर चारों पहियों तक पहुंचती है. इसके लिए कार में 6 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन दिया गया है. हालांकि, कार में डीजल इंजन नहीं मिलता है, जो कई लोगों के लिए निराश करेगा। 

पीएम की अपील के बाद सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए MP में आज के ताजा रेट

इंदौर 

 भारतीय सराफा बाजार से इस अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश में सोने और चांदी की खरीदी पर साल भर के लिए रोक लगाने की अप्रत्याशित अपील के बाद स्थानीय सराफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। पीएम मोदी के इस फैसले ने न केवल आम खरीदार बल्कि बड़े निवेशक और कारोबारियों को भी हैरान-परेशान कर दिया है। सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट की खबर सुनते ही बाजार में खरीदारों की होड़ मच गई है। वहीं इस भारी गिरावट ने हर किसी को चौंका कर रख दिया है।

चांदी 9.3 फीसदी टूटी, सोना भी औंधे मुंह गिरा
स्थानीय बाजार से मिले आंकड़ों के मुताबिक बाजार खुलते ही चांदी की कीमत में अब तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी 9.3 फीसदी टूटकर सीधे 2,58,000 रुपए प्रतिकिलोग्राम पर आ गई। शनिवार सुबह जैसे ही सराफा बाजार खुला चांदी बीते दिन शुक्रवार के मुकाबले 2000 रुपए सस्ती बिकी। वहीं दूसरी ओर 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 3 फीसदी तक सस्ता हो गया। इस गिरावट के बाद शुद्ध सोने का भाव 1,54,000 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अब कारोबारियों का कहना है कि किसी एक ही दिन में इतनी उठापटक से वे हैरान हैं।

एक्सपर्ट ने बताया क्यों आई भारी गिरावट

सराफा बाजार में सोना-चांदी के भाव में इतनी गिरावट और बाजार के सेंटीमेंट होने पर मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी निर्मल वर्मा ‘घुघरू’ ने इस पर विस्तृत बात की। उन्होंने बताया कि इस गिरावट के पीछे केवल घरेलू घोषणा नहीं, बल्कि वैश्विक कारण भी हैं।

1- डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई मजबूती
वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही अमेरीकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी निवेशकों का रुझान सोने से हट गया है। वे डॉलर की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

2- भारी मुनाफा वसूली
पिछले कई दिनों से सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर थीं। इस तेजी के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफा काटा है। इससे बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ी और कीमतें धड़ाम से गिरी हैं।

3- सख्त मौद्रिक नीति भी एक वजह हो सकती है
घुंघरू बताते हैं कि लगातार महंगाई की चिंताओं ने वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक नीति यानी कड़ी ब्याज दरें की उम्मीद बढ़ा दी है। जब भी ब्याज दरें बढ़ने की आशंका होती है, तो कीमती धातुओं पर इसका सीधे तौर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वैश्विक बाजारों में हाहाकार
घरेलू या स्थानीय बाजार ही नहीं अब अंतरराष्ट्रीय या वैश्विक बाजार भी बेहाल हो चुके हैं। वैश्विक स्तर पर हाजिर सोना 104 डॉलर की भारी गिरावट के साथ 4,548,46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी 5.26 डॉलर टूटकर 75.21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।

बाजार विश्वलेषकों का कहना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सराफा बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है। उनका कहना है कि बाजार में स्थिरता आने में थोड़ा समय लग सकता है।

सोना चांदी के आज के भाव (Gold Silver Price Today)
24 कैरेट सोना- 16,300 (1 ग्राम)

22 कैरेट सोना- 14,500 (1 ग्राम)

18 कैरेट सोना- 11,870 (1 ग्राम)

चांदी- 2,75,000 रुपए प्रति किलो

सराफा महासंघ भोपाल के महामंत्री और प्रवक्त नवनीत अग्रवाल कहते हैं। आभूषण खरीदते समय इन भावों में 3 फीसदी GST और लेबर चार्ज भी अतिरिक्त देना होगा। 

अभी ₹3 की बढ़ोतरी ने बढ़ाई टेंशन, जल्द और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल!

 नई दिल्‍ली

शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, लेकिन ये सिलसिला अब आगे भी जारी रह सकता है. पेट्रोल और डीजल के दाम को लेकर एक्‍सपर्ट्स बड़ी चेतावनी दे दी है. अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहत हैं तो अगले 3 से 4 महीनों में ईंधन की कीमतें बढ़ती रह सकती हैं। 

यह वॉर्निंग ऐसे समय में आई है, जब वेस्‍ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में रुकावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 110 डॉलर प्रति बैर के करीब पहुंच गईं। 

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 4 साल में पहली बार 15 मई को बढ़ोतरी की गई, क्‍योंकि कच्‍चे तेल की बढ़ती लागत के कारण सरकार तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों (OMC) पर दबाव बढ़ा जा रहा था. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो हालिया बढ़़ोतरी से तेल और अन्‍य कारोबारी कंपनियों को हो रहे नुकसान की आंशिक तौर से भरपाई हो पाएगी। 

क्‍यों 3 से 4 महीने तक बढ़ोतरी रह सकती है जारी? 
मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर गुरमीत सिंह चावला ने इंडिया टुडे डॉट इन को बताया कि ईंधन की कीमतों में संशोधन कुछ हद तक अपेक्षित था क्योंकि तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियां हाई एनर्जी प्राइस को वहन करते हुए अपनी सीमाओं को बढ़ा रही हैं। 

उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है, ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90-100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर बनी रहती है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। 

फ्यूल प्राइस में कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? 
चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट ने भी कहा कि मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को केवल आंशिक राहत ही मिलती है. इंडिया टुडे को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीर तक की मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी स्‍वामित्‍व वाली तेल और डीजल कंपनियों पर पड़ रहे मुनाफे के दबाव से कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन मौजूदा घाटे की भरपाई की मात्रा काफी ज्‍यादा बनी हुई है। 

पोपट के अनुसार, ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों के कुल सालाना EBITDA में लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि हालिया बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को सालाना करीब 45,000-48,000 करोड़ रुपये की कमाई का लाभ मिल सकता है. हालांकि, पोपट ने चेतावनी दी कि अगर ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो और ज्‍यादा प्राइस बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। 

नुकसान की भरपाई के लिए कितने रुपये की बढ़ोतरी संभव 
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, अगर ग्‍लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की गतिविधियों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। 

तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव 
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है, जबतक की रिटेल फ्यूल की कीमतों में और बदलाव नहीं किया जाता है। 

इकोनॉमिस्‍ट ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी धीरे-धीरे महंगाई और घरेलू बजट पर असर डाल सकती है, क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों में परिवहन और रसद की लागत बढ़ जाएगी. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

भारत पर मंडराया ईंधन संकट! सिर्फ एक दिन बाद रुक सकता है रूसी तेल, पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी चिंता

मुंबई 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में पिछले 75 दिनों से जारी व्यवधान और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच भारत ने एक बार फिर अमेरिका से संपर्क किया है। भारत ने रूसी तेल आयात पर मौजूदा प्रतिबंधों से छूट की अवधि को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। अमेरिका ने इस साल मार्च में पहली बार इस विशेष व्यवस्था को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में विस्तारित किया गया। वर्तमान छूट की समय सीमा 16 मई रात 12:01 बजे तक निर्धारित है। इस छूट का प्राथमिक उद्देश्य अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर वैश्विक बाजारों को स्थिर करना था।

रूसी तेल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को से रियायती दरों पर की जा रही खरीदारी को कम करे।

28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में शुरू हुए संकट के लगातार गहराने के कारण भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने चेतावनी दी है कि तेल बाजारों में निरंतर अस्थिरता के व्यापक आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। अप्रैल में जारी किए गए ताजा लाइसेंस के तहत उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति दी गई थी, जो उस तारीख तक जहाजों पर लोड किए जा चुके थे।

आयात में रिकॉर्ड इजाफा
छूट की समय सीमा समाप्त होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियां तेजी से खरीदारी कर रही हैं। केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, मई में अब तक रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया है। पूरे महीने का औसत 19 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है।

रूसी कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी के बावजूद, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने उन रूसी LNG (तरल प्राकृतिक गैस) कार्गो को लेने से इनकार कर दिया है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। इस फैसले के कारण रूस से जुड़ा कम से कम एक LNG शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास अटका हुआ है।

इस विषय पर 30 अप्रैल को रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने नई दिल्ली में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। वे जून में फिर से वार्ता के लिए आ सकते हैं।

भारत के पास कितना है सुरक्षित स्टॉक?
केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सीआईआई (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में बोलते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत के ऊर्जा भंडार की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में 69 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है।

पुरी ने कहा कि इन स्टॉक स्तरों के कारण तत्काल आपूर्ति बाधित होने का कोई खतरा नहीं है। तनाव को देखते हुए सरकार ने LPG के दैनिक उत्पादन को 36,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है ताकि घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रहे।

Gold-Silver Rate: दूसरे दिन भी चढ़ा सोना, लेकिन चांदी 5700 रुपये टूटी

मुंबई 
सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में सरकार के इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के ऐलान के बाद बुधवार को धुआंधार तेजी देखने को मिली थी. एक ही दिन में एमसीएक्स पर सोना 11000 रुपये, जबकि चांदी 22000 रुपये चढ़ गई थी. लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी सोना महंगा हुआ है, हालांकि इसमें बीते कारोबारी दिन जैसी तेजी नहीं दिखी. वहीं दूसरी ओर MCS Silver Price की बात करें, तो एक दिन की उछाल के बाद ये धड़ाम हो गई हैं. गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही चांदी 5700 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई। 

सोना आज भी हुआ महंगा
सबसे पहले बताते हैं सोने की कीमत के बारे में, तो बुधवार को ये 11000 रुपये तक उछला था, लेकिन अंत में 8000 रुपये के आसपास की बढ़त लेकर क्लोज हुआ था. वहीं गुरुवार को भी कीमती पीली धातु के दाम में तेजी देखने को मिली है. शुरुआती कारोबार में 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.63 लाख रुपये के पार निकल गया. सरकार के इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के फैसले के बाद दो दिन में सोना अब तक 9613 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है और इसकी कीमत 1,53,442 रुपये से उछलकर 1,63,055 रुपये पर पहुंच गई है। 

चांदी की तेजी पर अचानक ब्रेक 
दूसरी ओर चांदी की कीमत की बात करें, तो इसकी कीमत में बुधवार को आई धुआंधार तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया और ये कीमती धातु भरभराकर टूटी. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी एक झटके में 5788 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई. दरअसल, बीते कारोबारी दिन इसका भाव 3,00,238 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुआ था और गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही ये गिरकर 2,94,450 रुपये प्रति किलो पर आ गई। 

हाई से अब कितना सस्ता Gold-Silver? 
सोने की कीमत में इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के बाद भले ही दो दिन से तेजी देखने को मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद कीमती पीली धातु अपने हाई लेवल से काफी सस्ती बनी हुई है. वायदा कारोबार में 5 जून की एक्सपायरी वाले सोने की हाई लेवल 2,02,984 रुपये है और ताजा रेट से तुलना करें, तो 10 Gram 24 Karat Gold Rate 39,929 रुपये सस्ता मिल रहा है।  

चांदी ने भी एमसीएक्स पर इस साल जनवरी महीने में रिकॉर्ड तोड़े थे और पहली बार 4 लाख के पार निकली थी. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम है और इस लेवल से अब ये कीमती धातु 1,62,878 रुपये कम कीमत पर मिल रही है। 

महंगाई का नया झटका! आज से अमूल-मदर डेयरी का दूध महंगा, जानें ताजा रेट

नई दिल्ली

आज से आम आदमी की रसोई का बजट फिर बढ़ गया है. देश की दो बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं. दोनों कंपनियों ने अपने अलग-अलग दूध वैरिएंट्स पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गई हैं. कंपनियों का कहना है कि किसानों से दूध खरीद की लागत बढ़ने और उत्पादन खर्च ज्यादा होने की वजह से कीमतों में बदलाव करना पड़ा है। 

Amul Milk Price Hike: अमूल दूध हुआ महंगा
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने अमूल दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं. कंपनी के मुताबिक नई कीमतें पूरे भारत में लागू होंगी और सभी प्रमुख वैरिएंट्स महंगे हो जाएंगे.अब अमूल का फुल क्रीम दूध 68 रुपये की जगह 70 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. इसके अलावा कंपनी ने अपने कई दूसरे वैरिएंट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। 

कौन-कौन से Amul Milk Products हुए महंगे?

आप इस लिस्ट में देख सकते हैं कि अमूल के किन दूध वैरिएंट्स की कीमत बढ़ी हैं…

    अमूल फुल क्रीम मिल्क (Amul Full Cream Milk)
    अमूल गोल्ड (Amul Gold)
    अमूल स्टैंडर्ड मिल्क (Amul Standard Milk)
    अमूल बफेलो मिल्क (Amul Buffalo Milk)
    अमूल स्लिम एंड ट्रिम (Amul Slim & Trim)
    अमूल ताज़ा (Amul Taaza)
    अमूल काउ मिल्क (Amul Cow Milk)
    अमूल टी स्पेशल मिल्क (Amul Tea Special Milk)

कंपनी ने बताया कि आखिरी बार मई 2025 में दूध की कीमतें बढ़ाई गई थीं. उस समय भी प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। 

Mother Dairy Milk Price Hike: मदर डेयरी ने भी बढ़ाए दूध के दाम

अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी अपने लिक्विड मिल्क वैरिएंट्स की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी ने कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीद की कीमत करीब 6% बढ़ी है, जिसकी वजह से लागत बढ़ी है.मदर डेयरी के मुताबिक कंपनी अपनी कुल कमाई का करीब 75-80% हिस्सा किसानों और दूध खरीद पर खर्च करती है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ असर ग्राहकों पर डालना जरूरी हो गया था। 

अब कितना महंगा मिलेगा Mother Dairy दूध?

दिल्ली-NCR में मदर डेयरी के नए रेट (Mother Dairy New Price List) इस तरह होंगे… 

    Token Milk अब 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर हो गया है.
    Full Cream Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
    Toned Milk अब 58 रुपये की जगह 60 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.
    Double Toned Milk (Live Lite) की कीमत 52 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
    Cow Milk अब 60 रुपये की जगह 62 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.
    Pro Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

मदर डेयरी ने बताया कि आखिरी बार अप्रैल 2025 में कीमतों में बदलाव किया गया था.
क्यों बढ़ रहे हैं दूध के दाम?

दूध कंपनियों के मुताबिक कई वजहों से लागत बढ़ी है…

    किसानों से महंगे दाम पर दूध खरीद
    पशु चारे की बढ़ती कीमतें
    ट्रांसपोर्ट और सप्लाई लागत में इजाफा
    गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन पर असर

इन्हीं वजहों से दूध कंपनियों ने दूध की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है। 

आम आदमी के बजट पर कितना पड़ेगा असर?
दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के मासिक बजट पर पड़ सकता है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज होने की वजह से अब परिवारों को हर महीने ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर होगा जहां रोजाना 2 से 5 लीटर तक दूध इस्तेमाल होता है.चाय, कॉफी, मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स की लागत भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती है.

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