PM मोदी और शहबाज शरीफ को लिखी 100 हस्तियों की चिट्ठी पर BJP का हमला, जानें किन नेताओं के नाम शामिल

 नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से शांति और कूटनीतिक संबंध बहाल करने की मांग को लेकर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी नेताओं व सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है।

हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आते ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन नेताओं को ‘आतंकी समर्थक’ करार दिया है। इस अपील का समन्वय नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के प्रमुख ओ.पी. शाह ने किया है। चिट्ठी में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत और सहयोग की बहाली के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

चिट्ठी में की गई हैं ये मुख्य मांगें

  • पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाने की वकालत की गई है।
  •     पूर्ण कूटनीतिक संबंधों को फिर से बहाल करना और नई दिल्ली व इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति करना।
  •     सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना और जम्मू-कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत शुरू करना।
  •     2004-2007 के कश्मीर फ्रेमवर्क पर पुनर्विचार करते हुए दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सैन्य वापसी।
  •     साथ ही व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर को फिर से खोलना।
  •     श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, लाहौर-दिल्ली बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करना।
  •     कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर यात्रा की अनुमति देना।
  •     कमर्शियल उड़ानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र फिर से खोलना और मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस देना।
  •     करतारपुर साहिब कॉरिडोर और नीलम घाटी (पाकिस्तान) स्थित शारदा पीठ को फिर से खोलना। मीडिया और पत्रकारों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना।

किन प्रमुख चेहरों ने किए हस्ताक्षर?
भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व रॉ चीफ ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, प्रो. सैफुद्दीन सोज और प्रो. अपूर्वानंद आदि ने इस पर साइन किए हैं।

पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, शिक्षाविद परवेज हुदभॉय, पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर, बीना सरवर, सलीमा हाशमी और ए.एच. नय्यर आदि ने साइन किए हैं।

‘ पहले आतंकियों का समर्थन बंद करे पाकिस्तान’
प्रेम शुक्ला ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले बयान पर साफ कहा, ‘पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करना बंद कर दे तो बातचीत शुरू हो जाएगी.’ हाल ही में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को ‘पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं.’ हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए। 

भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने लिखा ओपन लेटर
भारत-पाक के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग को लेकर भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख लोगों ने संयुक्त शांति प्रस्ताव के तहत पत्र पर साइन किया है. इसमें भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर समेत 61 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं. डिजिटल फॉर्मेट पर नेताओं ने हस्ताक्षर किया है। 

सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे गए ओपन लेटर में भारत-पाक के बीच बातचीत, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग की है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आवाजाही को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है। 

ये रहे 61 भारतीय जिन्होंने लेटर पर साइन किए हैं- 

क्रमांक साइन करने वाले भारतीयों के नाम
1. डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2. मीरवाइज उमर फारूक
3. महबूबा मुफ्ती
4. मणिशंकर अय्यर
5. प्रो. मनोज झा
6. ए.एस. दुलत
7. जवाहर सरकार
8. मोहम्मद यूसुफ तारिगामी
9. आगा सैयद हसन मोसावी
10. शाहिद सिद्दीकी
11. रीता मनचंदा
12. संदीप पांडे
13. प्रो. सैफुद्दीन सोज़
14. आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी
15. इमरान अहमद हसन
16. डॉ. जॉन दयाल
17. ललिता रामदास
18. हुमायूं कबीर
19. जयंत घोषाल
20. प्रो. अपूर्वानंद
21. मुजफ्फर शाह
22. दया सिंह
23. एम.एम. अंसारी
24. डॉ. फुआद अली हलीम
25. जफर मिन्हास
26. बिलाल गनी लोन
27. अरविंद सहारन
28. आई.डी. खजूरिया
29. बी.एल. सराफ
30. फादर सुनील रोसारियो
31. सैयद इरफान शेर
32. डॉ. मुस्लिम जान
33. गोपा मुखर्जी
34. डॉ. रमेश रैना
35. कुमार प्रशांत
36. एन.डी. पंचोली
37. प्रह्लाद गोयनका
38. सुभाष कालरा
39. रीता चक्रवर्ती
40. रूबी अरुण
41. के.एस. सुब्रमण्यम
42. सज्जाद अजहर
43. बलकार सिंह
44. सैयद सलीम गिलानी
45. बिमल शर्मा
46. मालती सुब्रमण्यम
47. अनिल हेब्बार
48. अमिताव दत्ता
49. डॉ. सुनीलम
50. सलीम इंजीनियर
51. सुजादा बशीर
52. बिन्नी यादव
53. रुमान मेक्की
54. तौसीफ अहमद खान
55. संतोष खजूरिया
56. एडवोकेट यासमीन
57. राकेश यादव
58. कुणाल बनर्जी
59. रोहिणी सिंह
60. सुनील वट्टल
61. ओ.पी. शाह

मीरवाइज ने किया बचाव- जब अमेरिका-ईरान बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस अपील का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी संवाद करना चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते, केवल बातचीत ही कश्मीर समेत अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान कर सकती है।

 बीजेपी का करारा प्रहार- ‘शहीदों का अपमान कर रहे हैं ये नेता’

इस कदम के बाद बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन नेताओं को ‘आतंक का समर्थक’ बताते हुए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब ‘पहलगाम आतंकी हमले’ के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपना रहा है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा। पूनावाला ने सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने के भारत के फैसले को याद दिलाते हुए कहा कि ‘नया भारत’ आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना और आतंक के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय, ये नेता बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, “ये वही लोग हैं जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए थे। इनका यह नया कदम देश के शहीदों और सशस्त्र बलों का सीधा अपमान है।”

 

देशभर में लागू हुई G RAM G योजना, कितनी मिलेगी मजदूरी? जानें मनरेगा से ज्यादा या कम

नई दिल्ली

आज यानि 1 जुलाई से पूरे देश में नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट 2025 (VB-G RAM G) को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के जमीन पर उतरते ही सालों से चली आ रही मनरेगी व्यवस्था से यह योजना काफी बेहतर नजर आ रही है. इसके तहत न केवल मजदूरों के हाथों में आने वाली रोज की दिहाड़ी बढ़ा दी गई है, बल्कि साल भर में मिलने वाले काम के दिनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. चलिए इसके बारे में और समझते हैं। 

अब जेब में आएगी ज्यादा मजदूरी
केंद्र सरकार के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाली औसतन दैनिक मजदूरी में करीब 10 फीसदी से ज्यादा का इजाफा किया गया है. जहां पहले मनरेगा के तहत मजदूरों को देशभर में औसतन 298.8 रुपये प्रतिदिन मिलते थे, वहीं अब G RAM G योजना के तहत यह राशि बढ़कर 327.4 प्रतिदिन है. यानि मजदूरों को अब हर दिन के काम के बदले औसतन 28.6 रुपये ज्यादा ही मिलेंगे. देश के सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस नई दर को लागू कर दिया गया है। 

नई योजना के तहत कितने दिन मिलेगा काम?
इस नई योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका कानूनी दायरा है. नए कानून के तहत अब पात्रा ग्रामीण परिवारों को साल में मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. यानि अब मजदूरों को 25 दिन का अतिरिक्त काम भी मिलेगा. इसके साथ ही सरकार ने देशभर के लिए 300 रुपये प्रतिदिन की एक न्यूनतम मजदूरी सीमा तय कर दी है. इसका मतलब है कि देश के किसी भी कोने में अब किसी भी मजदूर को 300 रुपये से कम की मजदूरी नहीं दी जा सकती है। 

हर राज्य को कितनी फायदा?
मंत्रालय के अनुसार देश के 21 राज्यों में मजदूरी को नई न्यूनतम सीमा यानी 300 रुपये तक पहुंचा दिया गया है. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी की पुरानी दरों में 15 से 25 फीसदी तक का बड़ा उछाल देखने को मिलेगा. वहीं पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में सबसे बंपर बढ़ोतरी हुई है, जहां मजदूरी दरें लगभग 24.5 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. इस बदलाव से इन राज्यों के पिछड़े ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। 

हरियाणा और सिक्किम की कमाई
जिन राज्यों में पहले ही मजदूरी दर अधिक थी, वहां भी इस योजना के तहत बढ़ोतरी जारी रखी गई है. अब नई दरों के बाद हरियाणा में मजदूरों को 409, गोवा में 406, केरल में 401 और सिक्किम के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सबसे ज्यादा 450 रुपये प्रतिदिन की कमाई होगी. सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की भारी-भरकम अंतरिम राशि भी जारी कर दी है। 

एनएमडीसी ने पहली तिमाही की अब तक की सर्वाधिक मात्रा दर्ज की, 60 एमटी लक्ष्य के लिए गति बनाई

हैदराबाद

 भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक और जिम्मेदार खनिक एनएमडीसी ने स्थापना के बाद से अपनी पहली तिमाही का अबतक का सर्वोच्च उत्पादन और बिक्री दर्ज करके वित्त वर्ष 27 की शुरुआत की है, जिससे भारत की इस्पात मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हुई है ।

कंपनी ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान 15.10 एमटी लौह अयस्क का उत्पादन किया, जो वर्ष-दर-वर्ष 26% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि बिक्री 11.75 एमटी हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2% की वृद्धि दर्शाती है । यह रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन निरंतर घरेलू मांग, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में अपने खनन परिसरों में परिचालन उत्कृष्टता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कंपनी के निरंतर ध्यान को दर्शाता है ।

तिमाही को और अधिक गतिशील बनाते हुए एनएमडीसी ने 5.15 एमटी के उत्पादन और 3.98 एमटी की बिक्री के साथ जून माह में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया, जो वर्ष-दर-वर्ष क्रमशः 44% और 11% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है । 
इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने कहा, “बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र में भारत का निरंतर निवेश लौह अयस्क की मांग को मजबूत करता है, और एनएमडीसी इस आवश्यकता को पैमाने, दक्षता और जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रहा है । हमारी अब तक की सबसे मजबूत पहली तिमाही हमारे संचालन की सुस्थिरता, हमारे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और घरेलू इस्पात उद्योग द्वारा हम पर रखे गए विश्वास को दर्शाती है । जैसे-जैसे हम खनन क्षमताओं का विस्तार करते हैं, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करते हैं और अपने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करते हैं, हम एक वैश्विक खनन पावरहाउस बनने की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं ।”

इस्पात की मजबूत घरेलू मांग और सरकार के बुनियादी ढांचे के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर, एनएमडीसी अपने खनन कार्यों के चरणबद्ध संवर्धन, रणनीतिक खदान विकास और आधुनिक निकासी बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से अपनी क्षमता-विस्तार रोडमैप में तेजी ला रहा है । यह पहलें लगातार कंपनी की उत्पादन क्षमताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह अपने महत्वाकांक्षी 100 एमटी क्षमता के दृष्टिकोण पर दृढ़ता से आगे बढ़ रही है, साथ ही भारत के दीर्घकालिक इस्पात विकास का समर्थन करने के लिए लौह अयस्क की एक विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाली आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है । 

रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन ने वित्त वर्ष 27 के लिए मजबूत गति प्रदान की है, जिससे एनएमडीसी को अपने दीर्घकालिक 100 एमटी विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ाते हुए अपने 60 एमटी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी ।

GST कलेक्शन से सरकार की बल्ले-बल्ले, जून में ₹1.94 लाख करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

नई दिल्ली

 सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है। 

कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई? 
कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए। 

GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है।

सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य
जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया।

घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई।
यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है।

खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला।

राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?

    महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.
    कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है। 

    बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया। 
    तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई। 

कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया ट्विस्ट, पुणे पुलिस को किस बात का है डर? 27 गुण मिलने के बाद हुई थी शादी

 पुणे 

पुणे केतन अग्रवाल मर्डर मामला एक मिस्ट्री बनता जा रहा है. राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह ही इसमें भी एक के बाद एक ट्विस्ट सामने आ रहे हैं. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सिया गोयल के सोनम रघुवंशी से भी ज्यादा शातिर होने की आशंका हो रही है. पुणे पुलिस के सामने चुनौती बनते जा रहे इस मामले में डर भी सता रहा है, यही वजह है कि पुलिस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। 

जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केतन अग्रवाल मर्डर केस पूरी तरह परिस्थितिजन्य सबूतों (circumstantial evidence) पर टिका हुआ है. इतने दिन की जांच के बाद भी पुलिस के हाथ कोई सीधा सुराग नहीं लगा है जिससे केतन की हत्या के आरोपी का साफ-साफ पता चल सके. लिहाजा पुलिस हर छोटे-बड़े सबूत को जोड़कर देख रही है और साबित करने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने ही हत्या की है और इसमें कोई शक नहीं बचता। 

बता दें कि पुणे ग्रामीण पुलिस इस मामले में बेहद सावधानी से चार्जशीट तैयार कर रही है. पुलिस नहीं चाहती कि सोनम रघुवंशी मामले की तरह कोई कानूनी या प्रक्रिया संबंधी गलती हो, जिससे आरोपी को राहत मिल जाए और पीड़ित की न्याय की आवाज दब जाए। 

यही वजह है कि पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती है. हालांकि भारत में पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट सीधे कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होती. लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कई नए सुराग मिल सकते हैं और असल सबूतों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। 

पुलिस मानती है कि पूछताछ के दौरान संभव है कि सिया अनजाने में कोई ऐसा क्लू बता दे जो आगे की जांच को बढ़ा दे और आरोपी तक पहुंचा दे. पुलिस यह देखना चाहती है कि क्या उसने पहले लोहागढ़ किले की ऊंचाई गूगल पर सर्च की थी, या फोन में कोई ऐसी डिजिटल गतिविधि की थी जिसके बारे में पुलिस को अभी पता नहीं है, तो पुलिस बाद में उस डिजिटल सबूत जैसे ब्राउज़र हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीटेड सर्च को कानूनी तरीके से जुटा सकती है. ऐसे डिजिटल सबूत कोर्ट में मान्य भी हो सकते हैं। 

फिलहान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है. ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसने सिया और चेतन को केतन को पहाड़ी से धक्का देते देखा हो. इसके अलावा घटना का कोई CCTV फुटेज भी नहीं मिला है. लिहाजा यह मामला जटिल हो गया है। 

जो CCTV फुटेज मिला है, उसमें सिर्फ सह-आरोपी चेतन चौधरी घटनास्थल के पास हूडी पहने नजर आता है. लेकिन सिर्फ इससे हत्या साबित नहीं होती। 

27 गुण मिलने पर तय हुई थी सिया और केतन की शादी

गोयल और अग्रवाल परिवार  ने इस रिश्ते को ‘परफेक्ट मैच’ माना था. कुंडली मिलाई गई, 27 गुण मिले, परिवार के ज्योतिषी ने इसे सफल और आदर्श विवाह बताया और फिर पूरे रीति-रिवाज के साथ सगाई भी हो गई. लेकिन कुछ ही महीनों बाद वही रिश्ता अब देश के सबसे चर्चित हत्या मामलों में बदल चुका है और घर-घर इसी की चर्चा हो रही है। 

परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में केतन अग्रवाल और सिया गोयल का रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले दोनों परिवारों ने पारंपरिक तरीके से कुंडली मिलवाई थी. इसके लिए परिवार के ज्योतिषी को बुलाया गया था. बताया गया कि दोनों की कुंडलियों में 36 में से 27 गुण मिले थे, जिसे विवाह के लिए अच्छा माना गया. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ बताया गया था. परिवार के ज्योतिषी ने इसे अनुकूल संबंध बताते हुए कहा था कि यह विवाह सफल हो सकता है. इसी के बाद दोनों परिवारों ने रिश्ते को अंतिम रूप दिया। 

 रिश्ते की शुरुआत, फिर बदला माहौल
पुलिस जांच के अनुसार, फरवरी में पुणे के एक होटल में दोनों की सगाई हुई. शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था. दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए और नवंबर 2026 में विवाह की योजना बनाई गई. इसी बीच पुलिस सूत्रों का दावा है कि सगाई के बाद करीब दो महीने तक सिया ने नए रिश्ते को अपनाने की कोशिश की. हालांकि बाद में चेतन चौधरी फिर से उसकी जिंदगी में आया और यहीं से परिस्थितियां बदलने लगीं. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरानहत्या की साजिश बनी. हालांकि अभी इन सभी आरोपों की पुष्टि  होना बाकी है। 

सिया के भाई साहिल गोयल ने क्या बताया
सिया के भाई साहिल गोयल ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उसे इस बात की जानकारी थी कि सिया और चेतन एक-दूसरे को जानते थे और दोस्त थे. हालांकि उसके अनुसार, सगाई के बाद सिया बार-बार यही कहती थी कि अब उसका चेतन से कोई संपर्क नहीं है.  जांच के दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे ने शादी तय होने के बाद कई बार सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी.  पुलिस की जांच के अनुसार, केतन ने परिवार से पूछा था कि क्या सिया के बारे में पूरी तरह जानकारी लेने के बाद ही रिश्ता तय किया गया है. उसने यह भी बताया था कि कई बार जब वह सिया को फोन करता था तो उसका फोन व्यस्त मिलता था. बातचीत के दौरान सिया अक्सर चेतन चौधरी का नाम भी लेती थी, जिससे उसके मन में संदेह पैदा हुआ. हालांकि परिवार ने उसे समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। 

क्राइम सीन भी किया रीक्रिएट
पुलिस ने घटना को समझने के लिए डमी (नकली शरीर) से क्राइम सीन रीक्रिएट भी किया, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इसकी कानूनी अहमियत बहुत कम है. डमी कैसे गिरेगी, यह उसके वजन, एंगल और स्पीड पर निर्भर करता है. इससे यह साबित नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को धक्का दिया गया था या वह खुद फिसल गया। 

इसलिए अभियोजन पक्ष अब मोटिव (हत्या की वजह) और डिजिटल सबूतों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है. पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची, क्योंकि सिया कथित तौर पर केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। 

जांच एजेंसियां अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत खंगाल रही हैं ताकि हत्या की पहले से बनाई गई योजना साबित की जा सके। 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर सबूतों की इस कड़ी में एक भी महत्वपूर्ण लिंक टूट गया, तो पूरा केस कमजोर पड़ सकता है और आरोपियों को फायदा मिल सकता है। 

हिमाचल में मॉनसून का कहर: जिस्पा में बादल फटा, मंडी में भूस्खलन से महिला की मौत

शिमला
 हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री के साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हुई है. इस वजह से कई सड़कें बंद हो गई हैं. वहीं, लाहौल स्पीति के जिस्पा में बीती रात को बादल फटलने से लेह मनाली नेशनल हाईवे बंद हो गया. इस वजह से सैंकड़ों गाड़ियां फंस गई। 

मनाली की ओर से जाने वाले वाहनों को केलांग के पास ही रोक दिया गया था.  मंडी जिले के औट में शनि मंदिर के पास नालागढ़ की एक महिला पर पत्थर गिरने से मौत हो गई. एएसपी मंडी अभिमन्यू ने मौत की पुष्टि की और बताया कि सभी से अनुरोध है, सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन रोकें और सुरक्षित यात्रा करें। 

धराली-हर्षिल में पूरी रात जागकर नदी को ताक रहे लोग
बीते साल वर्ष अगस्त में उत्तराखंड के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा की भयावह यादें अभी ताजा हैं. उस आपदा में खीर गंगा से न केवल धराली बाजार और आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मची थी, बल्कि हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी मलबे और बाढ़ की चपेट में आ गया था. कई सैनिक लापता हुए थे और बाद में कुछ जवानों के शव भी बरामद हुए. इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से एक बार फिर पूरे हर्षिल क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। 

इसी गंभीर चिंता को लेकर हर्षिल क्षेत्र के आठ ग्राम प्रधानों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की। 

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल के ऊपर बनी अस्थायी झील और भागीरथी नदी की बदलती धारा लगातार खतरा पैदा कर रही है. हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने से जीएमवीएन का टीनशेड बह गया, कई बड़े पेड़ नदी में समा गए और कटाव लगातार बढ़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि अब जीएमवीएन परिसर, पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, आवासीय भवन, होटल और होमस्टे सीधे खतरे की जद में हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि रात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों को पूरी रात चौकसी करनी पड़ रही है। 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हर्षिल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 की धराली-हर्षिल आपदा में भारी जन-धन की क्षति हुई थी. अनेक होटल, मकान, सड़कें और अन्य ढांचे मलबे में समा गए थे. इस भीषण त्रासदी में लोगों की जानें गईं, बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी आपदा की चपेट में आ गया, जहां राहत कार्य के लिए तैयार सैनिक भी मलबे में फंस गए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह बुधवार को हर्षिल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य शीघ्र शुरू कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। 

बुधवार सुबह शिमला के मेहली शोघी रोड पर हैप्पी होम के पास लैंडस्लाइड से रोड़ बंद हो गई है। 

जानकारी के अनुसार, बीते रोज मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के सात जिलों में मॉनसून की एंट्री हुई और फिर बीती रात को प्रदेशभर में मूसलाधार बारिश देखने को मिली.जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गई. यहां पर लगातार बारिश के कारण पागोला नाला के पास भूस्खलन और मलबा आने से बंद हो गई है और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है. सलूणी उपमंडल की ग्राम पंचायत लनोट के लनोट और फगड़ोग गांवों में मूसलाधार बारिश के कारण मलबा और पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 

जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गया। 

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जिस्पा में बादल फटने की जानकारी दी. हालांकि, इससे कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लेह मनाली हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही थम गई. गौर रहे कि जिस्पा मनाली से करीब 100 किमी दूर है। 

इसके अलावा, मंडी जिले के धर्मपुर में भारी बारिश की वजह से सिद्धपुर धर्मपुर रोड हाजरी क्रशर के पास और धर्मपुर-जोगिन्द्रनगर सड़क भंडारी मिक्सर प्लांट के पास अवरुद्ध हो गया है. कांढापतन–रखेड़ा मार्ग पर सड़क पर मलबा गिरा है और आवागमन प्रभावित हुआ है। 

फिलहाल, सड़कों की बहाली की कोशिश की जा रही है. वहीं, मंडी जिले में ब्य़ास नदी का जलस्तर बढ़ गया है. लगातार बर्फ पिघलने और बारिस की वजह से पानी का लेवल बढ़ा है और लोगों को नदी नालों के पास ना जाने की अपील की गई है. लाहौल स्पीति के जाहलमा नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लोगों को रस्सी डालकर पार करवाया जा रहा है. इस वजह से किसानों की मटर और गोभी की फसलें फंस गई हैं. लाहौल की पंचायत रानिका के पढ़ाक गांव में बाढ़ से लगभग 5 बीघा गोभी की फसल तबाह हो गई है. इससे पहले, मंगलवार को शिमला के चक्कर बाइपास के पास लैंडस्लाइड हुआ था। 

पहली ही बारिश में 45 रोड बंद

हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन ने बुधवार रिपोर्ट में बताया कि बारिश की वजह से 30 जून को 45 सड़कें बंद हो गई थी. इसमें सबसे अधिक 28 रोड मंडी, कुल्लू में 12, ऊना में दो और लाहौल स्पीति में एक रोड बंद थे, हालांकि, अब 16 रोड ही बहाल होने से बची हैं और बारिश की वजह से 84 ट्रांसफार्मर बंद हैं. उधर, बरसात का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में धान की रिपोई का काम भी शुरू हो गया है। 

ऊना में स्कूलों की टाइमिंग बदली

ऊना जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक जुलाई से सामान्य समय के अनुसार पढ़ाई होगी. डीसी जतिन लाल ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं और भीषण गर्मी के मद्देनज़र पांच मई को स्कूलों के समय में किए गए बदलाव संबंधी आदेश भी वापस ले लिए गए हैं. अब जिले के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, मिडिल और सेकेंडरी स्कूल अब सुबह 9 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक खुलेंगे. डीसी ने एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के संशोधित समय के अनुरूप बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 

मौसम विभाग ने अगले छह दिन के लिए भारी बारिश का अनुमान लगाया है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून सामान्य से करीब एक सप्ताह की देरी से प्रदेश पहुंचा है. सामान्य तौर पर शिमला में मानसून 22 जून के आसपास पहुंच जाता है, जबकि 24 से 25 जून तक पूरे प्रदेश को कवर कर लेता है. इस बार 30 जून तक ही मानसून प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुंच पाया है। 

संदीप शर्मा ने बताया कि सोमवार को शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों, सिरमौर के कुछ इलाकों, कांगड़ा के बड़ा भंगाल क्षेत्र और शिमला जिला के आसपास के कुछ हिस्सों में मानसून का आगमन हो चुका है. वहीं शिमला के ऊपरी क्षेत्र, नारकंडा सहित अन्य हिस्सों के अलावा चंबा, किन्नौर, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और प्रदेश के अन्य शेष क्षेत्रों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून पहुंचने की संभावना है. परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और जल्द ही पूरा हिमाचल मानसून से कवर हो जाएगा। 

उन्होंने बताया कि इस बार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. केवल कांगड़ा और एक अन्य जिले में सामान्य के आसपास वर्षा हुई, जबकि बाकी 10 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई. मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन के दौरान भी प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य से कम रह सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई से बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी और 6 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। 

विभाग ने 1 जुलाई के लिए ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. 2 जुलाई को चंबा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट, जबकि ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 3 जुलाई को बिलासपुर और कांगड़ा में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा, जबकि ऊना, मंडी, शिमला और सिरमौर में बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 4 जुलाई को भी कांगड़ा, मंडी, शिमला, कुल्लू, ऊना और हमीरपुर सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके बाद 5 और 6 जुलाई को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है. संदीप शर्मा ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी मानसून 29 जून के आसपास हिमाचल पहुंचा था. वहीं सबसे अधिक देरी वर्ष 2010 में हुई थी, जब मानसून ने 5 जुलाई को प्रदेश में प्रवेश किया था. यानी वर्ष 2026 में मानसून का आगमन वर्ष 2010 के बाद सबसे देर से हुआ है। 

प्री मॉनसन में भी 128 लोगों की मौत

राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से जारी प्री-मानसून सीजन (1 मार्च से 30 जून 2026) की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण 128 लोगों की मौत, 398 लोग घायल हुए हैं, जबकि 354 पशुओं की भी जान गई. इसके अलावा प्रदेशभर में निजी और सरकारी संपत्तियों को मिलाकर करीब 29.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं में 75 लोगों की मौत पेड़ या चट्टान गिरने, 30 लोगों की डूबने, 5 लोगों की करंट लगने, 4 मौतें आग, 2 सर्पदंश, 1 व्यक्ति की आकाशीय बिजली गिरने और 11 लोगों की अन्य कारणों से मौत हुई है. इस दौरान सड़क हादसों में 270 लोगों की जान गई.  शिमला में सबसे अधिक 7.32 करोड़ रुपये, सोलन में 4.64 करोड़ रुपये, कुल्लू में 4.26 करोड़ रुपये और मंडी में 2.63 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 

 

Mumbai Rain Alert: नहीं थम रही बारिश, अंधेरी सबवे बंद, ठाणे समेत कई इलाकों के लिए IMD का अलर्ट

मुंबई 

मुंबई में मॉनसून पूरी तरह एक्टिव है. पिछले कई दिनों से लगातार मुंबई में दिन की शुरुआत बारिश के साथ हो रही है. बारिश से हुए जलभराव के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ी है. हालांकि, लोकल ट्रेन सामान्य रूप से चल रही हैं. भारत मौसम विभाग (IMD) ने अंधेरी, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और मुंबई के कई हिस्सों में बारिश को लेकर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 

मुंबई में जारी बारिश की वजह से कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है. सड़कें तालाब बन गई हैं और कई इलाकों में जलभराव की वजह से ट्रैफिक ठप है. वहीं, कुछ जगहों पर बारिश की वजह से सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार सुस्त है। 

लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे, मालाड, जोगेश्वरी, कुरला, मुलुंड और कांजुरमार्ग जैसे इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने जलभराव वाले इलाकों से बचने की सलाह दी है। 

वहीं, अंधेरी सबवे (अंडरपास) में फिर इतना पानी भर गया है कि आज सुबह 8 बजे के करीब उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं लेकिन मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में इतना जलजमाव होता है कि इसे बंद करना पड़ता है। 

मौसम विभाग ने बुधवार, 1 जुलाई को भी मुंबई समेत महाराष्ट्र के अधिकतर इलाकों में मध्यम से बारिश की अनुमान जताया है. आसमान में बादल छाए हैं और कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो रही है. IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मौसम की यही स्थिति बनी रह सकती है। 

1 जुलाई के लिए मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 
 

बता दें कि मुंबई में इस बार मॉनसून सामान्य तारीख से 13 दिन देर से आया, लेकिन अब पूरी तरह एक्टिव है. शहर के जलाशयों में पानी की भरपाई हो रही है, जो अच्छी खबर है लेकिन भारी बारिश से आम जनजीवन प्रभावित है. मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 5 से 6 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। 

Petrol-Diesel Price Cut: 2 साल बाद बड़ी राहत, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 हुआ सस्ता, जानें किस कंपनी ने घटाए दाम

नई दिल्ली

प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देश के आम नागरिकों को राहत देते हुए रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. नई दरें बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं।  अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए पर आ गया है। नायरा के देशभर में 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं।

इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कम की गईं कीमतें पूरे देश में नयारा (Nayara) के 7000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों  पर लागू होगी.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और दूसरे लोकल टैक्स में अंतर के कारण पंप की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर दिख सकता है। 

आज प्राइवेट रिटेलर ने भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. ये तीनों कंपनियां मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों को संभालती हैं। 

प्रमुख शहरों में अनुमानित कीमतें
शहर            पेट्रोल की अनुमानित कीमत     डीजल की अनुमानित कीमत     सरकारी तेल कंपनियों के रेट
दिल्ली            97.12 रुपये                                          92.20 रुपये            102.12 और 95.20 रुपये
नोएडा            96.96 रुपये                                          87.03 रुपये           101.96 और 90.03 रुपये
मुंबई              106.21 रुपये                                       91.50 रुपये            111.21 और 94.50 रुपये

7000 पेट्रोल पंपों पर सस्ता पेट्रोल-डीजल
Nayara Energy रूस की रोसनेफ्ट समर्थित फ्यूल कंपनी है. इसने हाल ही  भारत में अपने पेट्रोल पंप की संख्या 7,000 के पार पहुंचाई है और इसके साथ ही ये प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेल सेलर के रूप में उभरी है. तेल की कीमतों पर बीते कुछ समय में महंगाई की मार से इस कंपनी ने अब अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल प्राइस में 5 रुपये और डीजल प्राइस में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का तोहफा दिया है। 

इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नायरा के 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं. यहां ध्यान रहे कि विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर Petrol-Diesel Price अलग-अलग हो सकती हैं, जो लोकल टैक्स जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) पर निर्भर करती हैं। 

सरकारी तेल कंपनियों की कीमतें स्थिर
एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करते हुए लोगों को राहत दी है, तो वहीं सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने अपनी कीमतों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL),  जो मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल-पंपों में से 90 फीसदी से ज्यादा का संचालन करती हैं, इनपर फ्यूल प्राइस यथावत बने हुए हैं. राजधानी दिल्ली में, IOC आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। 

जितनी बढ़ोतरी, उतनी ही की कटौती
गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran War) से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस में तेज उछाल देखने को मिला था. इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करने के मामले में पहली फ्यूल रिटेलर्स में नायरा एनर्जी भी शामिल थी. बीते 26 मार्च को कंपनी ने अपने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब इतनी ही कटौती भी की है। 

नायरा के बाद करीब चार साल तक स्थिर रखने के बाद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम फोड़ते हुए देशवासियों को झटका दिया था. इंडियन ऑयल से बीपी, एचपी तक ने मई महीने में एक के बाद एक कई बार Petrol-Diesel Price में बढ़ोतरी की थी और इनकी कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके पीछे कंपनियों ने मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से बढ़ती लागत का हवाला दिया था। 

युद्ध थमने, क्रूड सस्ता होने का असर
नायारा एनर्जी गुजरात के वाडिनार में हर साल 20 मिलियन टन क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद की गई है. समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है। 

 

 

क्रिप्टो करेंसी पर बड़ा फैसला जल्द? RBI और संसदीय समिति की अहम बैठक पर सबकी नजर

नई दिल्ली
क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Regulations) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। इस संबंध में संसदीय वित्त समिति, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाली है। दिल्ली में 2 जुलाई को होने वाली इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को रेगुलेट करने के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।

नोटिस के अनुसार, कमेटी “वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर एक अध्ययन और आगे की राह” विषय पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी।

RBI का सतर्क रवैया
रेगुलेटर्स के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर चल रही बातचीत के लिए यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि RBI का डिजिटल एसेट्स को लेकर हमेशा से ही सतर्क रवैया रहा है। समय-समय पर RBI गवर्नर्स ने VDA इकोसिस्टम की कमियों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी है।

नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था, “स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज़्यादा जोखिम है, इसलिए हम इनके मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।” हालांकि, सेंट्रल बैंक UPI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल लेंडिंग का समर्थन करना जारी रखे हुए है।

यह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ आठवीं बैठक होगी। पिछली दो बैठकों में, स्टैंडिंग कमेटी ने भारत में काम कर रहे कई घरेलू और ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंजों से मुलाकात की थी ताकि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझा जा सके। 20 मई को, पैनल ने दिल्ली में क्रिप्टो एक्सचेंज Binance, WazirX और Zebpay के साथ रेगुलेशन के दायरे, VDA इंडस्ट्री के लिए आगे की राह और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की। 

इससे पहले, दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी। रेगुलेटर्स ने पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी चिंताओं, इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन और रेमिटेंस से जुड़ी समस्याओं, विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को एक ही पॉलिसी और कानूनी ढांचे के तहत लाने, और ग्लोबल एक्सचेंजों के लिए मौजूदा GST सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सवाल पूछे थे।

 

Russia Oil to India: जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी कच्चे तेल का आयात, बंदरगाहों पर टैंकरों की भरमार

नई दिल्‍ली
जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है। 

एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे। 

अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। 

कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात
CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है। 

भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा 
भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई। 

रूसी तेल से मिली मदद 
ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

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