‘मैं घोर सनातनी हूं’— Digvijaya Singh बोले- एकादशी व्रत रखता हूं, नर्मदा परिक्रमा भी कर चुका हूं

इंदौर 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  इंदौर में थे, वे जब रेसीडेंसी कोठी में विधायक उषा ठाकुर से मिले तो दोनों में मीठी नोक झोंक हुई। ठाकुर ने भोजशाला के फैसले पर कुछ कहा कि तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं घोर सनातन धर्म को मानने वाला हुं। मैने नर्मदा परिक्रमा है। एकादशी का उपवास करता हुं। उषा ने कहा कि आप पक्के सनातनी है तो सार्वजनिक रुप से स्वीकार करना चाहिए। भोजशाला को लेकर जो फैसला आया है। उसका आपको सम्मान करना चाहिए। तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि तुम्हें कैसे मान लिया कि मैंने फैसले का विरोध किया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे। वे पूर्व विधायक अश्विन जोशी के निधन पर शोक प्रकट करने उनके निवास पर पहुंचे। इसके बाद वे अन्य कार्यकर्ता व नेतागणो से भी मिले।

मीडिया से चर्चा के दौरान सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में अच्छे दिन लाने का वादा किया था, लेकिन आज आम जनता महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिससे गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है, जबकि कुछ चुनिंदा लोग लगातार अमीर बनते जा रहे हैं।

सिंह ने कहा कि पहले भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस पर लोगों का मंगलसूत्र छीनने जैसे आरोप लगाए जाते थे, लेकिन अब जनता को सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्रा नहीं करने और तेल कम उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और रुपये की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट आई है। बेरोजगारी कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।

नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और घोटालों को लेकर भी सिंह ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में धांधली रोकने के लिए समिति द्वारा विस्तृत रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप था कि बार-बार सामने आ रहे घोटाले युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा धोखा हैं।
 
भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि फैसले का अध्ययन किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कानून व संविधान के दायरे में रहकर ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि भोजशाला एक एएसआई संरक्षित स्थल है और वहां पूजा-अनुष्ठान को लेकर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई 4 जुलाई तक टली

नई दिल्ली

राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ दायर रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी। यह याचिका वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने से जुड़े आरोपों पर आधारित है, जिसमें बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त किए नाम शामिल होने का दावा किया गया है। अदालत में फिलहाल मामले की प्रक्रिया जारी है और अगली तारीख पर आगे की सुनवाई होगी।

पिछली सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी दौरान शिकायतकर्ता के वकील विकास त्रिपाठी ने भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त कुछ दस्तावेजों को कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि उनकी फिलहाल मांग ट्रायल शुरू कराने की नहीं है, बल्कि मामले में पुलिस जांच कराने की है। वकील का तर्क था कि इस पूरे प्रकरण में कई ऐसे तथ्य हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, इसलिए विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए। यह मामला सोनिया गांधी से जुड़ी उस याचिका पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, जबकि उनका नाम 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में पहले से दर्ज बताया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि सोनिया गांधी को 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त हुई थी, तो फिर 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या उस समय मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किसी फर्जी दस्तावेज का उपयोग किया गया था या नहीं। इसी आधार पर मामले में विस्तृत पुलिस जांच की मांग की गई है।

राउज एवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन रिवीजन पिटीशन में याचिकाकर्ता ने यह अतिरिक्त दावा किया है कि वर्ष 1982 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि नाम हटाए जाने के पीछे क्या कारण थे और यह प्रक्रिया किन दस्तावेजों या नियमों के आधार पर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मामले में पहले ही यह आरोप भी शामिल है कि 1983 में नागरिकता मिलने से पहले 1980 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने और बाद में हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच की जाए।

सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस की नई रणनीति, बड़े प्लान से बदलेगी सियासत!

भोपाल

मध्यप्रदेश में सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने अब नया सियासी दांव चल दिया है। पार्टी ने फैसला किया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया जाएगा। अब तक पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते रहे हैं और राजनीतिक दल सीधे तौर पर दूरी बनाए रखते थे, लेकिन कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ते हुए गांव स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है।

दरअसल, कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ताकत का आंकलन करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में पंचायत समितियों का गठन किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि अब तक 21 हजार 478 पंचायत समितियां बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें प्रत्याशी चयन और समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पंचायत कमेटियों के गठन का मकसद गांव-गांव संगठन को मजबूत करना है। पार्टी सरपंच चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को समर्थन देगी ताकि कार्यकर्ता सक्रिय हों और कांग्रेस की पकड़ ग्रामीण इलाकों में मजबूत हो सके।

हालांकि कांग्रेस की इस रणनीति पर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गैर-दलीय पंचायत चुनाव में खुला समर्थन कांग्रेस के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है, लेकिन इससे अंदरूनी गुटबाजी बढ़ने का खतरा भी रहेगा।

मध्यप्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में समय है। ऐसे में कांग्रेस का यह ‘मिशन एमपी’ आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि पंचायत चुनाव में खुलकर उतरने का कांग्रेस का यह दांव सत्ता वापसी की राह आसान करता है या नई चुनौतियां खड़ी करता है।

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा हमला! अब अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना, डायमंड हार्बर पहुंचेंगी CM

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल के नए-नवेले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी आज  शनिवार डायमंड हार्बर का दौरा करने वाले हैं। तृणमूल के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी का यह संसदीय क्षेत्र है। मुख्यमंत्री यहां प्रशासनिक और पार्टी से जुड़े दोनों तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस शनिवार को विशेष रूप से एक प्रशासनिक बैठक करने के लिए भी डायमंड हार्बर जा रहे हैं। इस दौरान कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इससे पहले यहां ममता बनर्जी की सरकार थी। आरोप है कि इस दौरान अभिषेक बनर्जी के पसंदीदा अधिकारियों की यहां पोस्टिंग की गई थी।

आपको यह भी बता दें कि इसी इलाके में आने वाले फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की एक बैठक में शामिल होने का भी कार्यक्रम है। यहां चुनाव अभी बाकी है।

इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का 19 मई को एक बार फिर फाल्टा जाने का कार्यक्रम है। उस दिन वे यहां एक रोड शो करने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने पिछले मंगलवार को भी चुनाव से जुड़ी एक बैठक की थी।

आपको बता दें कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान 21 मई को होना है। दूसरे चरण के दौरान यहां भी वोट पड़े थे, लेकिन चुनाव आयोग ने बाद में उन वोटों को रद्द कर दिया और 21 मई को दोबारा मतदान की नई तारीख घोषित की। वोटों की गिनती 24 मई को होनी है।

फाल्टा पहले से ही सुर्खियों में था। वहां तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान और उत्तर प्रदेश से तैनात किए गए पुलिस पर्यवेक्षक और आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के बीच विवाद हो गया था। इसी वजह से चुनाव आयोग ने उस विधानसभा क्षेत्र की पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया था।

TMC विधायक दिलीप मंडल के आवासों की तलाशी

इससे पहले पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक दिलीप मंडल के दो आवासों में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई एक कथित वायरल वीडियो के संबंध में की गई है जिसमें विधायक पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी और धमकी देने का आरोप है। पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान, केंद्रीय बलों के साथ आज सुबह डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अंतर्गत पायलान इलाके में विधायक के आवास पर पहुंचे और चल रही जांच के हिस्से के तौर पर तलाशी शुरू की।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि तलाशी बिष्णुपुर के विधायक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए विशिष्ट आरोपों के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा, “प्राथमिकी में लगाए गए विशिष्ट आरोपों के आधार पर जारी जांच केतहत तलाशी की जा रही है। कानून के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।” पुलिस सूत्रों के अनुसार मंडल के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जांचकर्ता सोशल मीडिया पर चल रहे कथित वीडियो से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे हैं, जिनमें विधायक को कथित तौर पर एक जनसभा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ धमकी भरे बयान देते हुए देखा गया था।

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर BJP का हमला, 22 साल में 54 ट्रिप और 60 करोड़ खर्च पर उठे सवाल

नई दिल्ली

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर खुलासा करते हुए BJP ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 22 साल में किए अपने 54 दौरों पर राहुल गांधी ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह उनकी इनकम के 5 गुना से भी ज्यादा है। संबित पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी करीब 22 साल से निर्वाचित पद पर हैं। उन्होंने इन वर्षों में कई बार विदेश दौरे किए हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर 54 विदेश यात्राएं की हैं। ये यात्राएं सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका खर्च पब्लिक नहीं है। राहुल गांधी की हर विदेश यात्रा पर करीब 3-4 लोग उनके साथ गए और उनकी विदेश यात्राओं का कुल खर्च 60 करोड़ रुपये है।

राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर इनकम से 5 गुना कैसे किया खर्च?
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की इनकम का विवरण है। इस दौरान, 10 साल में राहुल गांधी की इनकम 11 करोड़ रुपये थी। 11 करोड़ रुपये की इनकम वाले राहुल गांधी ने 60 करोड़ रुपये सिर्फ अपने विदेश दौरों पर खर्च किए हैं। ये कैसे मुमकिन है। उनको कौन फंड कर रहा है। क्या किसी विदेशी कंपनी ने फंड किया तो क्या राहुल गांधी ने नियमों का पालन किया।

विदेशी दौरों पर खर्च 60 करोड़
संबित पात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने 54 व्यक्तिगत (निजी) विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें कोई भी आधिकारिक सरकारी या संसदीय दौरा शामिल नहीं है।

पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक फॉर्म 26 के हलफनामों में उनके द्वारा घोषित आय के विवरण के आधार पर, 10 वर्षों में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आय 11 करोड़ रुपये थी, तो विदेशी यात्राओं पर 60 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए गए?

किस साल में राहुल गांधी ने कितने पैसे कमाए और कितने खर्च किए?
संबित पात्रा बोले कि राहुल गांधी ने 2014-15 में अपनी विदेश यात्रा पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, 2017-18 में राहुल गांधी ने 1.20 करोड़ रुपये कमाए थे और 6 करोड़ रुपये विदेश यात्रा में खर्च किए थे। वहीं, 2019-20 में राहुल गांधी ने 1.39 करोड़ रुपये कमाए थे और उन्होंने विदेश दौरे पर 4.6 करोड़ खर्च कर दिए थे। इसके बाद, 2018-19 में राहुल गांधी की इनकम 1.22 करोड़ थी और उन्होंने अपनी विदेश दौरे पर 3.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद 2021-22 में राहुल गांधी ने 1.03 करोड़ रुपये कमाए और विदेश यात्रा पर 2.6 करोड़ रुपये खर्च किए।

20 साल में कितनी बढ़ी राहुल गांधी की संपत्ति?
बीजेपी सांसद ने ये भी बताया कि 2004 में राहुल गांधी ने जब पहली बार चुनाव लड़ा था, तब उनके चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति 55.58 लाख थी। वहीं, 2024 में जब आखिरी बार उन्होंने चुनाव आयोग को हलफनामा दिया तो अपनी संपत्ति करीब 21 करोड़ रुपये की बताई थी। ये कैसे मुमकिन है कि राहुल गांधी अपनी इनकम से कई गुना ज्यादा पैसे विदेश दौरों पर खर्च भी करते रहे और उनकी इनकम लगातार बढ़ती गई। 

संबिता पात्रा को मंत्री बनने के लिए करना होगा कुछ काम
बीजेपी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि विश्वगुरु’ होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए।

बीजेपी को देश को देना चाहिए जवाब
कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया बीजेपी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।

केरलम में वीडी सतीशन जमीनी योद्धा का सम्मान

•    डॉ. सुधीर सक्सेना 

वदासरी दामोदरन (वीडी) सतीशन अब साक्षर-राज्य केरलम के मुख्यमंत्री होंगे। दस दिनों की माथा-पच्ची और रायशुमारी के उपरांत अंततः 14 मई को दिल्ली में उनके नाम का ऐलान हो गया। गुरुवार की सुबह सुश्री दीपा दासमुंशी के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन तथा वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की मौजूदगी में इस आशय की घोषणा से अंततः अटकलों का कुहासा छंट गया और यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व अपने जमीनी योद्धा का चयन करने के मूड में है और केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला कुर्सी की दौड़ में पिछड़ गये हैं। यह ऐलान इसलिये भी मानीखेज था, क्योंकि यह खबर छनकर आ रही थी कि निर्वाचित विधायकों का बहुमत वेणुगोपाल के साथ है, जिन्हें पार्टी में दिल्ली की किल्ली के नजदीक माना जाता है। लेकिन बुधवार की शाम पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के माकन, दासमुंशी और वासनिक से विमर्श ने सतीशन का नाम आगे कर दिया। इसके बाद घड़ी के कांटे तेजी से घूमे। गुरुवार की सुबह राहुल गाँधी ने केसी वेणुगोपाल से चर्चा की। तकरीबन तीस मिनट की बातचीत में राहुल अपने निकट सहयोगी को दौड़ से हटने के लिये मनाने में सफल रहे और इसके कुछ घंटो बाद विधिवत वीडी के नाम की घोषणा कर कर दी गयी।

31 मई, सन 1964 को नेत्तूर में जनमे सतीशन खाँटी कांग्रेसी नेता हैं। छात्र जीवन में वह एनएसयूआई से जुड़ गये। सन 1986-87 में वह महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। यूनिवर्सिटी आफ केरल से उन्होंने एलएलएम किया और हाईकोर्ट में दस साल प्रैक्टिस। सन 1996 में उन्होंने परवूर से असेंबली का पहला चुनाव लड़ा, लेकिन ‘प्रथम ग्रासे मक्षिकापातः’ की तर्ज पर वह सीपीआई के पी. राजू से हार गये। सन 2001 के चुनाव में उन्होंने राजू हिसाब चुकता किया और इसके बाद क्रमशः केएम दिनकरन, रवीन्द्रन, शारदा मोहन और एमटी निक्सन जैसे नेताओं को हरा कर लगातार असेंबली में पहुंचे। सन 2021 में रमेश चेन्निथला के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष बने और तदंतर विधानसभा के भीतर और बाहर अपनी सक्रियता से सबका ध्यान आकृष्ट किया। केरलम के कांग्रेस नेताओं में वह संघर्ष, साख और सक्रियता  के मामले में सबसे आगे हैं। कोट्टायम के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक निजाम सैयद के मुताबिक सतीशन इज द बेस्ट च्वॉयस फॉर चीफ मिनिस्टरशिप। जनभावनाओं का ज्वार उनके साथ है और कार्यकर्ता उनके पीछे। 
आखिर क्या वजह है कि निजाम व अन्य मलयाली पत्रकार सतीशन को ‘सर्वोत्तम पसंद’ निरूपित कर रहे हैं वजह साफ है। सतीशन जमीनी योद्धा है और आडंबर से कोसों दूर। वह कुशल और प्रभावशाली वक्ता हैं और उन्हें सुनना ‘सांद्र अनुभव’ से गुजरना है। वह लेखक तो नहीं, अलबत्ता गंभीर पाठक हैं और साहित्यिक जलसों में उन्हें आग्रहपूर्वक बुलाया जाता है। आधुनिक मलयाली साहित्य में उनकी गहरी रूचि है और वह जेन-जी में बेहद लोकप्रिय है। उन्हें सियासी नजूमी भी माना जा सकता है, क्योंकि चुनावों में उनकी भविष्यवाणियाँ खरी उतरती रही हैं। इस दफा  तो उन्होंने सार्वजनिक ऐलान कर कर दिया  था कि यदि यूडीएफ को सौ से कम सीटें मिलीं तो वह राजनीति सन्यास ले लेंगे। केरलम में काँग्रेसनीत गठबंधन को जिताने में उन्होंने रात-दिन एक कर दिया। पार्टी में उन्हें ‘टास्क मास्टर’ माना जाता है और इसके चलते वह प्रियंका और राहुल के विश्वासपात्र बनकर उभरे। मासांत में वह अपना 62वीं वर्षगांठ बतौर सीएम मनायेंगे। उनका टास्क मास्टर होना यकीनन उम्मीदें जगाता है। त्रिवेंद्रम और दिल्ली में चले दस दिनी घटनाक्रम ने यह भी दर्शा दिया कि महत्वाकांक्षी शशि थरूर के नाम पर कहीं कोई विचार नहीं किया गया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।राष्ट्रीय , अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरी समझ रखते हैं । भोपाल में निवास )

सतीशन को CM बनाने की चर्चा पर कांग्रेस में घमासान, वेणुगोपाल चुप तो चेन्निथला नाराज

तिरुवनंतपुरम

कांग्रेस ने 10 दिनों की खींचतान के बाद वीडी सतीशन को केरल का सीएम बनाने का फैसला लिया है। उनके मुकाबले में दो कैंडिडेट और माने जा रहे थे, राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल और दूसरे रमेश चेन्निथला। कांग्रेस ने तिरुअनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक चली बैठकों के बाद केसी वेणुगोपाल को तो मना लिया और वीडी सतीशन के नाम का ऐलान हो गया। केसी वेणुगोपाल को लेकर कहा जा रहा है कि वह हाईकमान की बात से सहमत हो गए हैं और उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें संतुष्ट कर लिया गया है, लेकिन रमेश चेन्निथला के बारे में कहा जा रहा है कि वह नाराज हैं। यही नहीं गुरुवार को विधायक दल की बैठक में भी वह नहीं पहुंचे।

उनकी नाराजगी सीएम पद न मिलने को लेकर है और इसके अलावा पर्याप्त सम्मान न मिलने से भी वह आहत बताए जा रहे हैं। चेन्निथला का कहना है कि मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया में उनकी कोई राय ही नहीं ली गई, जबकि वह केरल कांग्रेस के सीनियर नेता हैं और लंबे समय से पार्टी के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी नाराजगी उस समय खुलकर सामने आ गई, जब वह विधायक दल की मीटिंग में ही नहीं पहुंचे। इसी मीटिंग में सतीशन को आधिकारिक तौर पर विधायक दल का नेता चुना गया। हालांकि उन्होंने वीडी सतीशन के नाम का समर्थन करने वाला पत्र भेज दिया था।

केसी वेणुगोपाल भी मुख्यमंत्री पद की रेस में थे और निराश हुए। फिर भी उनका कहना है कि वह हाईकमान के फैसले के साथ हैं और सतीशन का समर्थन करते हैं। लेकिन चेन्निथला के साथ ऐसा नहीं दिखा। उनके करीबियों का कहना है कि चेन्निथला को 2021 में भी झटका लगा था, जब उन्हें नेता विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं मिली थी। उनके स्थान पर सतीशन को मौका मिला था। फिर 5 साल बाद सीएम की रेस में भी वह पिछड़ ही गए। यही नहीं कहा जा रहा है कि चेन्निथला ने अपनी नाखुशी राहुल गांधी से भी सीधे तौर पर जाहिर कर दी है।

2021 में भी नजरअंदाज करने का आरोप, राहुल से जताई नाराजगी
चेन्निथला ने राहुल गांधी से कहा कि मुझे 2021 में भी नेता विपक्ष नहीं बनाया गया था। तब मैंने पार्टी हित में इस फैसले को स्वीकार कर लिया था ताकि कार्य़कर्ताओं के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। यही नहीं जब वीडी सतीशन के नाम का ऐलान हुआ तो चेन्निथला ने मीडिया से ही बात नहीं की और चुपचाप राजधानी से निकल गए। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि वह गुरुवयूर गए हैं ताकि शुक्रवार को मलयाली महीने के पहले दिन पूजा कर सकें। हालांकि जिस तरह वह मीटिंग में नहीं आए और एक दिन पहले ही निकल गए, उससे स्पष्ट है कि नाराजगी के चलते ही ऐसा किया गया है।

PM की अपील पड़ी भारी! काफिला निकालने वाले BJP नेता को कारण बताओ नोटिस, वित्तीय अधिकार भी छीने

भोपाल 
 200 से ज्यादा गाड़ियों के साथ शक्ति प्रदर्शन करने वाले मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। पाठ्य पुस्तक निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष को मुख्यमंत्री कार्यालय से वाहन रैली निकालने पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। इसके साथ ही उनसे सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार मामले के निराकरण तक निरस्त कर दिए हैं।

दरअसल, उज्जैन के बीजेपी नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर को हाल ही में मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। पदभार ग्रहण करने के लिए जब वे उज्जैन से भोपाल पहुंचे तो उनके साथ सैकड़ों गाड़ियों का लंबा काफिला भी चल रहा था। हाईवे पर कई किलोमीटर तक गाड़ियों की कतार देखने को मिली।

बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे काफिला भोपाल की ओर बढ़ता गया, हाईवे पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ती गई। कई जगह वाहन चालकों को जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर भी इस काफिले के वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिन पर लोग सवाल उठा रहे थे।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे शासन के दिशा-निर्देशों के प्रतिकूल बताते हुए गंभीर अनुशासनहीनता माना है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की वाहन रैली न केवल राष्ट्रीय संसाधनों के अपव्यय को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए अपेक्षित सादगी, जवाबदेही और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के विपरीत भी है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले के अंतिम निराकरण तक सौभाग्य सिंह के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।

अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता
जारी आदेश के अनुसार सिंह अब मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के कार्यालय एवं परिसर में प्रवेश, निगम के वाहन, संसाधन एवं कर्मचारियों का उपयोग, निगम की बैठकों में भागीदारी अथवा अध्यक्षता, किसी भी प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय में सहभागिता तथा कर्मचारियों को निर्देश जारी करने जैसे अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक जीवन में सादगी, जवाबदेही और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा शासन की गरिमा के विरुद्ध किसी भी प्रकार के आचरण को गंभीरता से लिया जाएगा।

भाजपा में महिला मोर्चा अध्यक्ष पद पर घमासान, सांसद और विधायक आमने-सामने

भोपाल 
भारतीय जनता पार्टी में महिला मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। इंदौर में राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार और विधायक उषा ठाकुर आमने-सामने नजर आ रही हैं। दोनों नेताओं के बीच अपने-अपने समर्थकों को संगठन में जगह दिलाने की होड़ मची हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष पद को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने माया पटेल का नाम आगे बढ़ाया है, जबकि विधायक उषा ठाकुर मानपुर की सीमा पटेल को जिम्मेदारी दिलाना चाहती हैं।

संगठन की चिंता ये है कि विवाद ज्यादा बढ़ा तो चुनाव से पहले गलत संदेश जा सकता है। इसी वजह से अब भाजपा संगठन दूसरी विधानसभा क्षेत्रों की दावेदारों के नामों पर भी विचार कर रहा है ताकि संतुलन बनाया जा सके।

दरअसल, कविता पाटीदार और उषा ठाकुर के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए थे। उषा ठाकुर की नाराजगी की एक वजह बगावत करने वाले नेताओं को कथित संरक्षण माना जा रहा है।

कुछ समय पहले महू में हुए एक सरकारी कार्यक्रम में भी विवाद सामने आया था। कार्यक्रम के शिलालेख में राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार का नाम नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी।

फिलहाल महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। देपालपुर से हेमलता डांगर और पूजा मंडोवरा, राऊ से किरण सूर्यवंशी और शारदा कुशवाह, जबकि सांवेर से पूजा यादव दावेदारी कर रही हैं। अब देखना होगा कि भाजपा संगठन दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर विवाद सुलझा पाता है या फिर यह अंदरूनी खींचतान आगे और बढ़ती है।

राहुल गांधी का MP दौरा फाइनल! उज्जैन और रीवा में कांग्रेस संगठन की होगी बड़ी समीक्षा

उज्जैन/रीवा 

कांग्रेस एमपी में आगामी चुनावों को लेकर संगठन तैयार करने में अभी से जुट गई है। खास बात यह है कि खुद राहुल गांधी एमपी में संगठन की समीक्षा करेंगे। ताकि पार्टी को मजबूती से चुनाव में उतारा जा सके। सूत्रों के मुताबिक जून माह में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दो संभागों में कार्यों और संगठन की समीक्षा करेंगे।  

उज्जैन-रीवा संभागों की समीक्षा कर सकते हैं राहुल गांधी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी एमपी में संगठन की जमीनी हकीकत परखने के लिए उज्जैन और रीवा संभाग की समीक्षा कर सकते हैं। आगामी वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और कामकाज की समीक्षा करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित दौरा जून 2026 में हो सकता है। इस दौरान राहुल गांधी बीएलए (Booth Level Agents) से लेकर जिला अध्यक्षों तक के कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत और ट्रेनिंग कार्यक्रम करेंगे। नई नियुक्तियों के बाद यह पहला बड़ा संगठनात्मक दौरा होगा, जिसमें कार्यों की जांच और समीक्षा की जाएगी।

जिले स्तर पर क्रॉस चेकिंग जारी
एमपी कांग्रेस संगठन में अब तक जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं। उनकी क्रॉस चेकिंग और वेरिफिकेशन का काम तेजी से प्रत्येक जिले में किया जा रहा है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से लेकर हर स्तर के नेता बूथ समिति, पंचायत समिति, वार्ड समिति में शामिल किए गए सदस्यों का वेरिफिकेशन कर रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2025 में 3 जून को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान का शुभारंभ किया था। 16 इसके बाद 16 अगस्त को सभी 71 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा हुई थी।

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