रूस पर यूक्रेन का अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक, 500 से ज्यादा हमलों से दहला देश; 4 की मौत

नई दिल्ली.
यूक्रेन ने रूस पर सबसे बड़े ड्रोन हमले को अंजाम दिया है। रात भर चले इन हमलों में मॉस्को समेत रूस के कई इलाकों को निशाना बनाया गया। रूस के अधिकारियों की अगर मानें तो इस अटैक में 500 से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों ने इस हमले को रूसी राजधानी क्षेत्र पर एक साल से ज्यादा समय में हुआ सबसे बड़ा हमला बताया है। इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। साथ ही, अलग-अलग इलाकों में रिहायशी इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा।

रूस ने 556 ड्रोन को किया तबाह
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रात भर चले इस हमले के दौरान उसके हवाई सुरक्षा तंत्र ने एक दर्जन से ज्यादा इलाकों में यूक्रेन के 556 ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। इस दौरान मॉस्को और पश्चिमी रूस के आसपास धमाकों और आपातकालीन बचाव कार्यों की खबरें भी आईं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार लोगों की जान चली गई। इनमें से तीन लोगों की मौत मॉस्को क्षेत्र में और एक व्यक्ति की मौत यूक्रेन की सीमा के पास स्थित बेलगोरोद क्षेत्र में हुई।

मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि इन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। वोरोब्योव के मुताबिक, एक ड्रोन के एक निजी रिहायशी मकान से टकराने के कारण एक महिला की मौत हो गई, जबकि बचाव अभियान के दौरान एक अन्य व्यक्ति घंटों तक मलबे के नीचे फंसा रहा।

सुबह तड़के शुरू हुए हमले
हमलों से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों के मारे जाने की भी खबर है। वोरोब्योव ने टेलीग्राम पर लिखा, “एक प्राइवेट घर पर यूएवी गिरने से एक महिला की मौत हो गई। एक और व्यक्ति मलबे के नीचे फंसा हुआ है।” उन्होंने आगे बताया कि हमले सुबह तड़के शुरू हुए और रूसी एयर डिफेंस यूनिट्स को लगातार ऑपरेशन करने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, “सुबह 3 बजे से एयर डिफेंस फोर्सेज राजधानी के इलाके पर बड़े पैमाने पर हो रहे यूएवी हमले का जवाब दे रही हैं।” साथ ही बताया कि इस हमले के दौरान कम से कम चार लोग घायल हुए और कई इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि मॉस्को और आस-पास के इलाकों को पहले भी यूक्रेनी ड्रोनों द्वारा निशाना बनाया गया है, लेकिन सीधे रूसी राजधानी को प्रभावित करने वाले हमले तुलनात्मक रूप से कम ही हुए हैं।

जेलेंस्की ने दी थी चेतावनी
रूसी अधिकारियों ने तुरंत इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की पूरी जानकारी नहीं दी, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि रिहायशी इलाके और रणनीतिक ठिकाने ही हमले के मुख्य निशाने थे। ये ताजा हमले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद हुए, जिसमें उन्होंने कीव पर रूस के एक बड़े हमले के बाद जवाबी कार्रवाई तेज करने की कसम खाई थी। उस हमले में 24 लोगों की जान चली गई थी। जेलेंस्की ने चेतावनी दी थी कि यूक्रेन के शहरों और आम नागरिकों पर लगातार हमलों के लिए मॉस्को को नतीजे भुगतने पड़ेंगे। हाल के दिनों में, कैदियों की अदला-बदली पूरी होने और तीन दिन के अस्थायी युद्धविराम के टूटने के बाद मॉस्को और कीव के बीच हवाई हमले तेज हो गए हैं। यह युद्धविराम इसी हफ्ते खत्म हुआ था।

चुप्पी को सहमति बताकर तालिबान ने बढ़ाया खतरा, अफगानिस्तान में बाल विवाह को मिली खुली छूट

नई दिल्ली.
अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़ा एक नया और विवादित पारिवारिक कानून लागू किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने बड़े पैमाने पर आलोचना की है। अफ़गानी मीडिया आउटलेट ‘अमू टीवी’ के अनुसार, 31 अनुच्छेदों वाले इस नियम को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने मंजूरी दी थी और मई के मध्य में इसे शासन के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसका शीर्षक पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत है।

तालिबान के नए नियम

  • इस दस्तावेज में बाल विवाह, लापता पतियों, जबरदस्ती अलग करने, धर्म-त्याग, व्यभिचार के आरोपों और अन्य धार्मिक व कानूनी मामलों से जुड़े नियम बताए गए हैं। 
  • इसके सबसे विवादित प्रावधानों में से एक यह है कि यौवन प्राप्त करने के बाद किसी कुंवारी लड़की की चुप्पी को शादी के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है।
  • हालांकि, इस नियम में यह भी कहा गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला की चुप्पी को अपने-आप सहमति नहीं माना जाएगा।
  • इस आदेश में “खियार अल-बुलूग” या “जवानी आने पर मिलने वाले विकल्प” की भी बात की गई है। यह इस्लामिक कानून का एक ऐसा सिद्धांत है जिसके तहत कम उम्र में शादी करने वाला कोई भी बच्चा, जवानी आने के बाद अपनी शादी रद करवा सकता है।
  • नियम के अनुच्छेद 5 के अनुसार, अगर किसी बच्चे के पिता या दादा के अलावा कोई और रिश्तेदार किसी नाबालिग की शादी तय करता है तो भी उस शादी को कानूनी रूप से वैध माना जा सकता है, बशर्ते कि जीवनसाथी सामाजिक रूप से मेल खाता हो और दहेज भी उचित हो।
  • बच्चा बाद में शादी रद करवाने की मांग कर सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ तालिबान की अदालत के आदेश से ही हो सकता है।
  • एक और नियम यह कहता है कि अगर जीवनसाथी मेल न खाता हो या दहेज अनुचित हो तो ऐसी शादियों को वैध नहीं माना जाएगा।
  • यह नियम पिता और दादाओं को बाल विवाह के मामले में काफी अधिकार देता है। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि अगर अभिभावक ज़ुल्म करने वाले, मानसिक रूप से अयोग्य या नैतिक रूप से भ्रष्ट पाए जाते हैं तो ऐसी शादियों को रद किया जा सकता है।

जजों को क्या अधिकार मिले?
यह दस्तावेज तालिबान के जजों को उन विवादों में दखल देने का अधिकार देता है जिनमें व्यभिचार, धर्म-परिवर्तन, पति की लंबे समय तक गैर-मौजूदगी और “जिहार” (Zihar) के आरोप शामिल हों। “जिहार” एक पुरानी इस्लामी प्रथा है जिसमें पति अपनी पत्नी की तुलना किसी ऐसी महिला रिश्तेदार से करता है जिससे शादी करना मना होता है। इन नियमों के तहत जज कुछ मामलों में अलग होने, जेल भेजने या सजा देने का आदेश दे सकते हैं। यह नया आदेश ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर लगाई गई पाबंदियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ रही है।

अफगानिस्तान में लड़कियों को छठी क्लास के बाद पढ़ाई करने से रोक दिया गया है, महिलाओं के यूनिवर्सिटी जाने पर पाबंदी लगा दी गई है और रोजगार, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने तालिबान की नीतियों को “जेंडर रंगभेद” (gender apartheid) की व्यवस्था बताया है। ‘गर्ल्स नॉट ब्राइड्स’ के मुताबिक, अफगानिस्तान की लगभग एक-तिहाई लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है।

रूस के खतरनाक डूम्सडे हथियार: दुनिया में बढ़ा परमाणु खतरा

नई दिल्ली

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक खतरनाक हथियारों को जमा कर रहे हैं. ये हथियार इतने भयानक हैं कि इन्हें दबाने मात्र से पूरा एक देश तबाह हो सकता है. रूस के वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्पेस में हमला करने वाले हथियार और परमाणु टॉरपीडो बना रहे हैं. पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया 1962 की क्यूबा मिसाइल संकट के बाद अब सबसे ज्यादा परमाणु खतरे के करीब पहुंच गई है.

पोसाइडन: समुद्र के अंदर का ‘डूम्सडे’ हथियार
रूस का सबसे चर्चित हथियार पोसाइडन है. यह एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल अंडरवाटर ड्रोन है, जो छोटी पनडुब्बी जितना बड़ा है. यह हजारों किलोमीटर तक समुद्र के अंदर यात्रा कर सकता है. दुश्मन के तट के पास पहुंचकर यह फट सकता है.

विस्फोट से विशाल रेडियोएक्टिव सुनामी उठ सकती है, जो तटीय शहरों और नौसैनिक अड्डों को पूरी तरह नष्ट कर देगी. पुतिन का दावा है कि इसे रोका नहीं जा सकता. पश्चिमी विशेषज्ञ इसे डूम्सडे वेपन कहते हैं. रूस ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया है. इसे ले जाने वाली नई पनडुब्बी खाबारोवस्क भी तैयार हो रही है.

बुरेवेस्तनिक: फ्लाइंग चेरनोबिल मिसाइल
बुरेवेस्तनिक मिसाइल को फ्लाइंग चेरनोबिल भी कहा जाता है. यह परमाणु रिएक्टर से चलने वाली क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज अनलिमिटेड बताई जाती है. पुतिन का कहना है कि यह कई दिनों तक उड़ सकती है.

2019 में इसके परीक्षण के दौरान रूस में विकिरण रिसाव हुआ था, जिसमें कई वैज्ञानिक मारे गए थे. फिर भी रूस इसे विकसित कर रहा है. पश्चिमी देश इसे बहुत खतरनाक मानते हैं क्योंकि इसमें रेडियोएक्टिव कचरा फैलने का खतरा है.

सरमत: दुनिया की सबसे भयानक मिसाइल
Sarmat या Satan-2 रूस की नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 200 टन से ज्यादा भारी है. इसमें कई परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग शहरों को निशाना बना सकते हैं.

पुतिन ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया और कहा कि साल के अंत तक इसे युद्ध के लिए तैयार कर लिया जाएगा. यह मिसाइल दक्षिणी ध्रुव से भी होकर दुश्मन पर हमला कर सकती है, जहां रडार नहीं होते.

हाइपरसोनिक हथियार  
एवनगार्ड: यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है, जो 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज गति से दुश्मन पर टूट पड़ता है. बीच में अपना रास्ता बदल सकता है.
किंझल: हवा से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल. यूक्रेन में इसका इस्तेमाल हो चुका है.
जिरकॉन: समुद्र से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल, जो 11265 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जहाजों को डुबो सकती है.
ये सभी मिसाइलें इतनी तेज हैं कि मौजूदा डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक पाना मुश्किल है.

स्पेस में युद्ध: सैटेलाइट ब्लाइंड करने वाला हथियार
रूस संभवतः स्पेस में भी परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. अमेरिका का आरोप है कि रूस एक ऐसा सैटेलाइट बना रहा है जो दुश्मन के सैटेलाइट को उड़ा या ब्लाइंड कर सकता है. इससे GPS, कम्युनिकेशन और सैन्य नेटवर्क बंद हो सकते हैं. रूस इससे इनकार करता है, लेकिन उसने UN में इस पर प्रस्ताव को वीटो कर दिया.

पेरेसवेट लेजर और S-500 डिफेंस सिस्टम
पेरेसवेट लेजर सिस्टम सैटेलाइट को अंधा कर सकता है. S-500 Prometheus सिस्टम स्टेल्थ विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस ऑब्जेक्ट्स को मारने का दावा करता है.

क्यों बना रहा है रूस ये हथियार?
पुतिन इन हथियारों को अजेय बताते हैं. ये हथियार न सिर्फ युद्ध जीतने के लिए हैं, बल्कि पश्चिमी देशों को डराने और उन्हें झुकाने के लिए भी हैं. रूस यूक्रेन युद्ध में फंसा है. लगातार परमाणु खतरे की बात कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब 1962 के बाद सबसे ज्यादा परमाणु खतरे में है.

रूस के ये हथियार सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आतंक फैलाने का हथियार बन गए हैं. पुतिन का सुपरवेपन आर्सेनल दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है. पोसाइडन, सरमत, बुरेवेस्तनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें परमाणु युद्ध के खतरे को बढ़ा रही हैं. यदि इनमें से कोई हथियार इस्तेमाल हुआ तो पूरा क्षेत्र तबाह हो सकता है.

इजरायल की डिफेंस फैसिलिटी में भीषण धमाका! कई मील दूर तक छाया धुएं का गुबार, हमले के पीछे ईरान का हाथ?

यरूशलम. 
इजरायल के यरूशलम के पास स्थित बेट शेमेश शहर में शनिवार देर रात एक भीषण विस्फोट हुआ। इस धमाके ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोशल मीडिया पर इसके जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। ब्लास्ट इतना जोरदार था कि आसमान में कई मील दूर तक आग का एक विशाल गोला और मशरूम क्लाउड बनता दिखाई दिया।

यह धमाका इजरायल की सरकारी डिफेंस कंपनी ‘तोमर’ के टेस्टिंग ग्राउंड में हुआ है, जो इजरायल के बेहद सीक्रेट रॉकेट और मिसाइल इंजन बनाती है। इजरायली प्रशासन इसे ‘पहले से तय एक्सपेरिमेंट’ बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय डिफेंस एक्सपर्ट्स इस थ्योरी को पचा नहीं पा रहे हैं।

रात के 12:30 बजे कौन करता है प्री-प्लान टेस्ट?
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन ने इजरायल के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक्स पर मारियो नॉफाल को दिए एक इंटरव्यू में जॉनसन ने तीन अहम बातें कहीं, जो इजरायली दावे को संदिग्ध बनाती हैं। धमाके के तुरंत बाद एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को उस संवेदनशील इलाके में जाने से रोक दिया गया। अगर यह सामान्य टेस्ट था, तो रेस्क्यू टीमों को क्यों रोका गया?

यह धमाका शनिवार की आधी रात (12:30 AM) को हुआ। इजरायल में शनिवार के दिन कोई भी रूटीन या सरकारी काम नहीं किया जाता है, जब तक कि वह कोई बेहद जरूरी सैन्य ऑपरेशन न हो। आधी रात को बिना किसी पूर्व चेतावनी के कोई देश अपनी आबादी के पास ऐसा खतरनाक ब्लास्ट नहीं करता। जॉनसन के मुताबिक, इस घटना के पीछे के सभी परिदृश्य इशारा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में एक बड़ा युद्ध बेहद करीब है और यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बुरा संकेत है।

क्या तबाह हो गई इजरायल की सबसे घातक मिसाइल बैटरी?
इब्रानी (Hebrew) मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमाके का असर पास के ‘सदोट मीचा’ (Sdot Micha) एयरबेस तक भी हो सकता है, जो इजरायल का सबसे संवेदनशील मिसाइल ठिकाना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस विस्फोट में इजरायल के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ‘एरो-3’ (Arrow-3) का एक बड़ा स्टॉक तबाह हो गया है। एरो-3 अंतरिक्ष की सीमा पर ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकेट मोटरों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले ‘सोडियम परक्लोरेट’ केमिकल के स्टॉक में लापरवाही की वजह से आग लगी, जो इस महाविस्फोट में बदल गई। अगर दावों में सच्चाई है, तो इजरायल की दो प्रमुख एरो-3 बैटरियों में से एक को भारी नुकसान पहुंचा है।

2021 की घटना की यादें हुई ताजा
लैरी जॉनसन ने याद दिलाया कि अप्रैल 2021 में भी इसी तोमर डिफेंस फैसिलिटी में ठीक ऐसा ही एक ‘रहस्यमयी’ धमाका हुआ था, जिसे तब भी इजरायल ने एक रुटीन टेस्ट बताया था। वीडियो में दिख रहा मशरूम क्लाउड इतना बड़ा था कि शुरुआत में चश्मदीदों को लगा कि यह कोई टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन का धमाका है।

इजरायली सरकार अपने दावे पर कायम
तमाम अटकलों और सोशल मीडिया पर चल रही दावों के बीच, इजरायली रक्षा मंत्रालय और तोमर कंपनी अपने रुख पर अडिग हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियंत्रित और तयशुदा प्रयोग था, इसमें किसी बाहरी ताकत का हाथ नहीं है। इस घटना में किसी के हताहत होने या सुरक्षा में सेंधमारी की खबर नहीं है।

ब्रिटेन में सियासी संकट: कीर स्टारमर के इस्तीफे की अटकलें, लेबर पार्टी को बड़ा झटका

नई दिल्ली

ब्रिटेन में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से प्रधानंत्री कीर स्टारमर अपना पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। डेली मेलकी रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अपने हिसाब से आगे का कदम उठाएंगे। उन्हें इस्तीफा कब देना है, इसका विचार भी वह खुद ही करेंगे।

क्यों खतरे में है कीर स्टारमर की सरकार
जानकारी के मुताबिक यूके की लेबर सरकार संकटों से जूझ रही है। लोगों की इस सरकार में विश्वास कम हो गया है। लेबर पार्टी के पीटर मैंडलसन का नाम एपस्टीन फाइल्स में आने केबाद लोगों ने लेबर पार्टी पर अविश्वास जताया और स्थानीय चुनावों में इसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसी वजह से कीर स्टारमर पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है।

गुरुवार को ब्रिटेन में क्षेत्रीय चुनाव हुए। यह चुनाव 136 क्षेत्रों में आयोजित किए गए। अंतिम नतीजों के अनुसार लेबर पार्टी ने परिषद की उन 2,200 से ज़्यादा सीटों में से लगभग 1,200 सीटें गंवा दीं, जिन पर पहले उसका कब्ज़ा था। दक्षिणपंथी ‘रिफॉर्म यूके ‘ पार्टी स्पष्ट विजेता के तौर पर उभरी और उसने लगभग 1,400 सीटें जीतीं।

बता दें कि लेबर पार्टी के ही 80 से ज्यादा सांसदों ने उनसे पद छोड़ने की अपील की है। बीते दिनों सरकार के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की बात भी सामने आई थी।

निगेल फराज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके को चुनावों का सबसे बड़ा विजेता माना जा रहा है। स्काई न्यूज के अनुसार, इसने अब तक 1,422 सीटें जीती हैं। लेबर पार्टी 980 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि लिबरल डेमोक्रेट्स और कंजरवेटिव पार्टी क्रमशः 834 और 754 सीटों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।प्लाइड सिमरु, जो वेल्स की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध एक मध्य-वामपंथी पार्टी है, 43 सीटों के साथ वेल्स सेनेड में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। रिफॉर्म यूके 34 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि लेबर पार्टी नौ सीटों के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर है। वेल्स में 27 साल सत्ता में रहने के बाद लेबर पार्टी ने पहले ही हार स्वीकार कर ली थी।

स्टारमर ने इस्तीफा देने से कर दिया था इनकार
वहीं स्कॉटलैंड में, स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने सबसे अधिक 58 सीटें जीतीं लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 65 सीटों से पीछे रह गई। लेबर और रिफॉर्म यूके 17-17 सीटों पर बराबरी पर हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की सीटें घटकर 12 रह गईं। अपनी पार्टी के लिए निराशाजनक नतीजों के बावजूद, स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना करते हुए कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे और देश को अराजकता में नहीं धकेलेंगे।

ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला? तबाही के नए दौर से पहले आसमान में बढ़ी हलचल

वाशिंगटन.
डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे संकेत दे दिए हैं कि अमेरिका ईरान पर 28 फरवरी से भी बड़ा हमला करने वाला है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका के 11 एयरफोर्स – सी 17ए विमान मध्य एशिया से यूरोप की ओर उड़ान फर चुके हैं। 28 फरवरी को हुए हमले से पहले भी ऐसी ही गतिविधियां देखने को मिली थी। बताया गया था कि डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय में ईरान पर बड़े हमले को रद्द कर दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारियों ने कहा कि अमेरका और इजरायल फिर से व्यापक सैन्य तैयारियां कर रहे हैं। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने कहा था कि पेंटागन के पास कई योजनाएं हैं जिनमें जरूरत पड़ने पर युद्ध शुरू होना भी शामिल है।इसके अलावा परिस्थिति अनुसार सेना को कम या फिर वापस भी बुलाया जा सकता है।

यूरेनियम के भंडार पर हो सकता है हमला
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करते हैं तो इस बार सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा यूरेनियम के संभावित भंडार को भी टारगेट किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के 12 दिन के युद्ध के दौरान परमाणु ठिकाने तबाह हो गए थे लेकिन यूरेनियम के भंडार जमीन के नीचे दब गए थे।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप की शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद भी युद्ध को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया। मंगलवार को चीन से निकलने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी और कहा कि अगर उसने समझौता नहीं किया तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान से युद्धविराम बहुत नाजुक स्थित में है और फिर कभी भी हमला करना पड़ सकता है।

ईरान बोला- जवाब देने को तैयार
अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो निश्चित तौर पर एक बार फिर युद्ध छि़ड़ सकता है। ईरान में संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की हर हरकत का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गलत फैसलों का परिणाम भी गलत ही होता है।

उधर पाकिस्तान के गृह मंत्री भी ईरान पहुंचे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक वह ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे। पाकिस्तान शुरू से ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है। उसेक प्रयास के बाद इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मिले थे लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला था। अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और ऐसे में दोनों देशों के बीच दूसरे चरण की वार्ता नहीं हो पाई।

ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: समझौता नहीं तो ‘बहुत बुरा समय’ तय

अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शांति समझौता जल्द नहीं हुआ तो तेहरान के लिए बहुत बुरा समय आने वाला है। फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर को दिए गए टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझौते में दिलचस्पी रखनी चाहिए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में कहा कि ट्रंप प्रशासन से संदेश आए हैं जिसमें बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है, लेकिन अमेरिका पर गहरे अविश्वास की वजह से प्रक्रिया धीमी हो रही है।

डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बावजूद ईरान ने अमेरिका पर दो बार हमला करने का आरोप लगाया है, खासकर परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी पुरानी वार्ताओं के दौरान। अराघची ने वाशिंगटन के विरोधाभासी संकेतों को बातचीत में बाधा बताया। उन्होंने चीन जैसे देशों के कूटनीतिक समर्थन का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की बड़ी भूमिका की मांग की। वहीं, ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरान के 14 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए, नहीं तो उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ईरानी प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्धविराम को जीवन रक्ष’ पर बताया था। इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव जारी है। इजरायल ने हाल ही में विस्तारित युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। लेबनानी मीडिया के अनुसार, 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर के दो दर्जन से अधिक गांवों पर हमले हुए। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बताया और कई गांवों के लिए निकासी चेतावनी जारी की। इन हमलों से सैकड़ों नागरिक बेघर हो गए और सिदोन व बेरूत की ओर पलायन शुरू हो गया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने युद्धविराम के विस्तार का स्वागत किया और सभी पक्षों से इसे पूरी तरह मानने की अपील की। युद्धविराम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था और शुक्रवार को 45 दिनों के लिए बढ़ाया गया, लेकिन इसका उल्लंघन बार-बार हो रहा है। लेबनान के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक 2900 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें युद्धविराम के बाद 400 से अधिक शामिल हैं। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले जारी रखे हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता की सफलता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है। दोनों पक्षों को अविश्वास दूर कर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नया प्लान, समुद्री ट्रैफिक सिस्टम से बढ़ेगा वैश्विक तनाव

नई दिल्ली

होर्मुज को लेकर ईरान फिर एक बार नया ऐलान कर दिया है जिससे दुनियाभर के कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है। वैश्विक तेल सप्लाई के लिए अहम माने जाने वाले होमूर्ज के लिए ईरान नया ट्रैफिक सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को घोषणा की है कि ईरान ने होर्मुज में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक प्रोफेशनल मैकेनिज्म तैयार किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर किए गए एक पोस्ट में अजीजी ने बताया कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा की गारंटी के दायरे में रहते हुए, एक निर्धारित मार्ग के माध्यम से होर्मुज में यातायात प्रबंधन के लिए इस योजना को लेकर आया है, जिसका जल्द ही खुलासा किया जाएगा।

फीस भी वसूलेगा ईरान
अजीजी के अनुसार, इस नई व्यवस्था का लाभ केवल उन्हीं पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग कर रहे हैं। इस सिस्टम के तहत दी जाने वाली विशेष सेवाओं के लिए जरूरी शुल्क भी वसूला जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह समुद्री फ्रीडम प्रोजेक्ट के ऑपरेटरों के लिए पूरी तरह से बंद रहेगा। ऐसे में एक बार फिर तनाव और बढ़ने की आशंका है।

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरानी क्षेत्र पर हमले शुरू किए थे। अमेरिका-ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी, जबकि ईरान ने होर्मुज से गुजरने के लिए नए ट्रैफिक सिस्टम लगाने नियमों की घोषणा की है।

इससे पहले ईरान ने कहा है कि होर्मुज में बाधा आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बिगड़ने के लिए सिर्फ वे जिम्मेदार हैं जिन्होंने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू किया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरावानी ने कहा, ईरान पर एक साल से भी कम समय में दो गैर-कानूनी हमले हुए हैं, जिससे वह ‘दो गहरे और आपस में जुड़े हुए’ तरीकों से प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोगों की मौत हुई और नागरिक, आर्थिक, ऊर्जा समेत कई चीजों में नुकसान हुआ। सैन्य अभियान खत्म होने के बाद भी इस संघर्ष के परिणाम बरकरार रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता के मूल कारणों की जांच होनी चाहिए।

इरावानी ने कहा, वर्तमान अस्थिरता अचानक नहीं हुई। इसके पीछे इजरायली शासन और अमेरिका द्वारा थोपे गए सैन्य संघर्ष और अवैध हमलों का हाथ है। उन्होंने जोर दिया कि ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल यूनिट पर हुए सीधे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा और सप्लाई को प्रभावित किया है। इसके अलावा प्रतिबंधों और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी ने वैश्विक व्यापार और पण्य बाजार को चोट पहुंचाई थी।

रूसी तेल पर ट्रंप का बड़ा फैसला, भारत में फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली

होर्मुज संकट के बीच, ट्रंप के एक और फैसले से अब दुनिया भर में तेल की कीमतें ऊपर जाने वाली हैं. कच्‍चे तेल के दाम बढ़ने से भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और अन्‍य एनर्जी के प्राइस बढ़ जाएंगे, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा आ गया है.

दरअसल, वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थाई प्रतिबंध में मिली छूट को रिन्यू करने से इनकार कर दिया है. इस कारण अब ये छूट समाप्‍त हो चुकी है. भारत के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्‍योंकि भारत मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच रूस से निर्बाध तेल हासिल कर रहा था.  

साथ ही वैश्विक तेल बाजार के लिए भी बड़ा झटका है, क्‍योंकि रूस कच्‍चे तेल का बड़ा निर्यातक है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका दिख रही है.

अमेरिका ने लगाए हैं कड़े प्रतिबंध
रूस-यूक्रेन जंग के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. हालांकि, मार्च 2026 में ईरान जंग शुरू होने और होर्मुज ब्लॉकेड होने के बाद ग्‍लोबल मार्केट में तेल की भारी कमी हो गई थी. जिसके बाद, बाजार को संतुलित बनाए रखने के लिए ट्रंप सरकार ने मार्च में एक खास छूट दी थी, जो 16 मई तक बढ़ाया गया था. यह छूट सिर्फ उन तेलों पर थी, जो समंदर में टैंकरों पर लोड किए गए थे.

हालांकि, इसके बाद से ही यूरोपीय देश इस छूट का लगातार विरोध कर रहे थे. उनका मानना था कि तेल बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस के युद्ध फंड को मजबूत कर रहा है. अब इस विरोध के बाद ट्रंप सरकार ने शनिवार को छूट को समाप्‍त कर दिया.  

भारत का यूरोप से तेल आयात
मार्च 2026 से अप्रैल 2026 के बीच भारत के यूरोप से तेल आयात ज्यादा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट और Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने रूसी तेल आयात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है.

मार्च 2026 में भारत के कुल कच्‍चे तेल का करीब 4.5 मिलियन बैल हर दिन आयात किया है. इनमें से करीब 50% हिस्सा रूस का था और मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई 61 फीसदी तक गिर गई थी. गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्‍चा तेल सप्‍लायर बना रहा. भारत के कच्‍चा तेल फरवरी के मुकाबले करीब 85 फीसदी स्‍तर पर रहे. अप्रैल में रूसी कच्‍चे तेल का आयात लगभग 1.57 मिलियन बैरल हर दिन तक रहे, जो मार्च के मुकाबले करीब 20% कम थे.

भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
कुछ दिन पहले ही भारत ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. साथ ही सीएनजी की कीमत भी बढ़ा दी थी. हालांकि, एक्‍सपट्स का कहना है कि अगर तेल की कीमतें ऊपर बनी रहती हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम फिर से बढ़ सकते हैं.

ट्रंप के बाद अब पुतिन का चीन दौरा तय, वैश्विक राजनीति में हलचल तेज

बीजिंग

दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच कूटनीतिक गठजोड़ और मजबूत होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा खत्म होने के तुरंत बाद, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। क्रेमलिन और चीनी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 19 और 20 मई को चीन की यात्रा पर रहेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के तुरंत बाद रूस ने ऐलान किया है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही चीन जाएंगे. क्रेमलिन ने कहा कि यात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19-20 मई को चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। क्रेमलिन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन अपनी इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मॉस्को और बीजिंग के बीच ‘व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना’ है। दोनों शीर्ष नेता कई ‘प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों’ पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। बातचीत के अंत में दोनों देशों के बीच एक साझा घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, पुतिन चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा होगी।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने गुरुवार को कहा कि पुतिन की चीन यात्रा अब लगभग तय है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी पूरी हो चुकी है. हालांकि उन्होंने यात्रा की सटीक तारीख नहीं बताई, लेकिन संकेत दिए कि यह दौरा जल्द होने वाला है.

रूस और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं. पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं. दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई थी.

अब पुतिन की प्रस्तावित चीन यात्रा पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन संबंध, ऊर्जा व्यापार और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर बड़ी रणनीति बन सकती है.

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के हालिया चीन दौरे के दौरान भी शी जिनपिंग ने पुतिन का जिक्र किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के खत्म होते ही रूस और चीन की बढ़ती नजदीकियां फिर चर्चा में आ गई हैं. रूस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बहुत जल्द चीन का दौरा करेंगे और इस यात्रा की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

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