स्‍वच्‍छ एवं हरित विद्यालय की राष्‍ट्रीय रेटिंग में मध्‍यप्रदेश की उल्‍लेखनीय उपलब्‍ध‍ि

भोपाल

स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग भारत सरकार द्वारा घोषित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2025-26 में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय चयन सूची में मध्यप्रदेश के 10 विद्यालय विभिन्न श्रेणियों में चयनित हुए हैं, जिसमें शहरी वर्ग के अंतर्गत रतलाम जिले के सांदीपनि विद्यालय जावरा ने प्रथम और राजधानी भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय ने द्वितीय स्‍थान प्राप्‍त किया है। वहीं, देवास जिले की शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा ग्रामीण श्रेणी में दूसरे स्‍थान पर है।

उल्लेखनीय है कि “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’’ भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसके अंतर्गत सुरक्षित पेयजल, बाल-अनुकूल शौचालय, हाथ धुलाई सुविधाएं, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, वर्षा जल संचयन, हरित परिसर विकास, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली गतिविधियों तथा व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों सहित विभिन्न मानकों पर विद्यालयों का मूल्यांकन किया जाता है। इस प्रतिष्ठित सूची में स्‍थान पाने के लिए विद्यालय स्‍व-मूल्‍यांकन कर आवेदन करते हैं।

प्रदेश के 78 हजार से अधिक स्‍कूलों की सहभागिता

इस वर्ष राज्य स्तर पर व्यापक जन-भागीदारी एवं जागरूकता के परिचायक के रूप में प्रदेश की कुल 78,149 शालाओं द्वारा ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ अंतर्गत स्व-मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागिता की गई थी। विभिन्न तकनीकी एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं के आधार पर राज्य स्तर से कुल 20 विद्यालयों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर के लिए नामांकित किया गया था, जिसमें से मध्यप्रदेश के 10 विद्यालयों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है।

चयनित विद्यालयों को मिलेगी 1 लाख की प्रोत्‍साहन राशि

इन सभी 10 चयनित विद्यालयों को भारत सरकार द्वारा मेरिट प्रमाण-पत्र के साथ स्वच्छता एवं हरित गतिविधियों के सतत सुदृढ़ीकरण के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, इन विद्यालयों के संस्था प्रमुखों के लिए विशेष शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण भी आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

चयनित 10 में से 8 शासकीय विद्यालय

राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के 10 विद्यालयों में से 3 सांदिपनी विद्यालयों सहित कुल 8 शासकीय विद्यालय शामिल हैं। जिनमें रतलाम जिले का उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय जावरा, भोपाल का शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, देवास जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा, सीहोर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला महुआखेड़ी टाकीपुर, शाजापुर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला भराड़, जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम, शिवपुरी जिले का पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी करेरा, डिंडोरी जिले की आश्रम शाला इंग्लिश मीडियम शाहपुरा सहित 2 निजी विद्यालय इंदौर जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल निपानिया तथा कटनी जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल शामिल हैं।

सांदीपनि विद्यालयों का उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन

मध्यप्रदेश शासन की विशेष शैक्षणिक पहल सांदीपनि विद्यालय अंतर्गत संचालित विद्यालयों ने भी ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से रतलाम जिले के उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, जावरा ने शहरी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है, जबकि भोपाल जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कमला नेहरू ने इसी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम ने ग्रामीण श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर 10वां स्थान प्राप्त कर राज्य की उपलब्धियों को और अधिक गौरवपूर्ण बनाया है। इन विद्यालयों द्वारा स्वच्छता, हरित परिसर विकास, जल संरक्षण, व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों एवं छात्र सहभागिता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए गए हैं।

संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र ने दी बधाई

भारत सरकार के स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा घोषित राष्‍ट्रीय रेटिंग में प्रदेश के 10 स्‍कूलों के चयन पर संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र श्री हरजिंदर सिंह ने सभी चयनित विद्यालयों को बधाई दी है। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि, यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर विकास के क्षेत्र में राज्य द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है। यह सफलता राज्य शासन, लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, जिला प्रशासन, विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, समुदाय एवं यूनिसेफ मध्यप्रदेश टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करना केवल अधोसंरचना विकास का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, गरिमा, सीखने के वातावरण एवं सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। चयनित विद्यालयों की श्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों का व्यापक दस्तावेजीकरण एवं प्रसार किया जाएगा, जिससे प्रदेश के अन्य विद्यालय भी इन मॉडलों से प्रेरणा लेकर स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पहल को और अधिक प्रभावी बना सकें।

 

डीजीपी कैलाश मकवाणा से यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव शोको इशिकावा ने की सौजन्‍य भेंट

भोपाल 

महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसी क्रम में आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने सौजन्‍य भेंट की। इस अवसर पर महिला सुरक्षा, जेंडर समानता, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराधों की रोकथाम, नशा मुक्ति, बालिकाओं की सुरक्षा तथा पुलिस-समुदाय सहभागिता को सुदृढ़ बनाने जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर यूएन विमन इंडिया की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री रे, पीएसओ टू डीजीपी डॉ विनीत कपूर तथा एसओ टू डीजीपी  मलय जैन उपस्थित थे।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बालिका सुरक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न अभियानों, नवाचारों एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ समाज में विश्वास, सहभागिता एवं सुरक्षा का वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को निरंतर सशक्त बना रही है।

उन्‍होंने कहा कि महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा बहुआयामी अभियान संचालित किए जा रहे हैं। ऑपरेशन मुस्कान एवं विशेष ऑपरेशन मुस्‍कान के माध्यम से गुमशुदा बच्चों एवं बालिकाओं का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों से मिलाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। वहीं ‘सृजन’ अभियान के अंतर्गत बालक-बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता एवं सशक्तिकरण से जोड़कर उन्हें आत्मविश्वासी बनाने के साथ-साथ बाल विवाह, बाल हिंसा, मानव तस्करी तथा महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक संरक्षण एवं सशक्तिकरण का भी प्रभावी मॉडल विकसित कर रही है।

बैठक में महिलाओं के लिए सामुदायिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। इस दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, शिकायतों के त्वरित एवं संवेदनशील निराकरण, सुरक्षित सार्वजनिक वातावरण के निर्माण, पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने तथा महिला सहभागिता आधारित सामुदायिक पहलों को और सुदृढ़ करने के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए गए।

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस महिला एवं बालिका सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील, उत्तरदायी एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं एवं नागरिक संगठनों के सहयोग से महिला सुरक्षा एवं लैंगिक समानता के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रदेशव्यापी “सेफ क्लिक 2.0” साइबर जागरूकता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि डिजिटल युग में महिलाओं, बालिकाओं, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी व्यवहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे नागरिक डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकें।

उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस के “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान की भी जानकारी साझा की। इस अभियान के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों एवं समुदाय को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अभियान में पुलिस के साथ शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों की सराहना की। उन्होंने शक्ति कैफे जैसी पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता आधारित पहल, थानों में महिलाओं के लिए विकसित संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण तथा जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग के लिए अपनाए गए मध्यप्रदेश पुलिस मॉडल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग को प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है, जिससे नागरिक-केंद्रित और अधिक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके।

 

आपदा प्रबंधन में जेंडर संवेदनशीलता की दिशा में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास

भोपाल

आपदा प्रबंधन को अधिक समावेशी, संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश का पहला जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा यूएन वूमेन (UN Women) के मध्य’प्रवाह फेज-2’कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु मंगलवार को होमगार्ड मुख्यालय, भोपाल में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू होमगार्ड महानिदेशकश्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तवकी गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोकोइशिकावातथा होमगार्ड एवं राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की ओर से उप पुलिस महानिरीक्षकश्री अमित सांघीने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

‘प्रवाह फेज-2’ का उद्देश्य आपदा प्रबंधन व्यवस्था में महिलाओं, बालिकाओं एवं अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है। इसके अंतर्गत ‘प्रवाह फेज-1’ में विकसितजेंडर रिस्पॉन्सिवडिजास्टर रिस्क रिडक्शन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी)का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही वर्तमान मानसून एवं अन्य आपदाओं के दौरान इस एसओपी के व्यावहारिक परिणामों का मूल्यांकन कर भविष्य के लिए और अधिक प्रभावी रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने आपदा प्रबंधन में महिलाओं की आवश्यकताओं और सहभागिता को व्यवस्थित रूप से शामिल करते हुए विशेष एसओपी तैयार की है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में महिलाओं के विस्थापन, राहत, बचाव एवं पुनर्वास के दौरान आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह एसओपी रेस्क्यू टीमों को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी। वर्तमान मानसून के दौरान इसके प्रभावों का परीक्षण कर आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे।

यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव  शोकोइशिकावा ने कहा कि आपदाएं महिलाओं, बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों को असमान रूप से प्रभावित करती हैं। इसलिए आपदा प्रबंधन में जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार एवं होमगार्ड विभाग की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगी। यूएन वूमेन महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाने तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण की प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाने के लिए इस साझेदारी के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

‘प्रवाह फेज-2’ के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, सहभागिता तथा विशेष आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके परिणामस्वरूप राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली अधिक संवेदनशील, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित बनेगी तथा भविष्य में जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

 

जनसहभागिता से ही क्षेत्र का सर्वांगीण और चहुंमुखी विकास संभव : राज्यमंत्री कृष्णा गौर

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा है कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक और सर्वांगीण विकास केवल शासकीय प्रयासों से नहीं, बल्कि जनसहभागिता के पावन संकल्प से ही संभव है। जनता का प्रेम, अटूट विश्वास और निरंतर मिलने वाला स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है, जो उन्हें संपूर्ण ऊर्जा, निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसी सेवाभावी संकल्प के साथ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में निरंतर विकास कार्यों को नई गति और विस्तार दिया जा रहा है। राज्यमंत्री  गौर भोपाल के वार्ड क्रमांक 61 के अवधपुरी मंडल में 46 लाख रुपये की अनुमानित लागत से होने वाले विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों के भूमि- पूजन समारोह को संबोधित कर रही थीं।

राज्यमंत्री  गौर ने क्रिस्टल कैंपस, अवधपुरी स्थित  कृष्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर में 6 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले शेड एवं प्लेटफॉर्म निर्माण कार्य तथा तुलसी नगर फेज-एक में फ्लोरिंग कार्य का विधिवत भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल समाज की सांस्कृतिक चेतना के केंद्र होते हैं। मंदिर परिसर में इस शेड और प्लेटफॉर्म के निर्माण से श्रद्धालुओं को सुगमता होगी और यह स्थल धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक गतिविधियों के सुचारू संचालन में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इस सौगात के लिए स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने राज्यमंत्री के प्रति आत्मीय आभार व्यक्त किया।

क्षेत्र के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए लवकुश नगर में मकान नंबर 16 के सम्मुख 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सी.सी. रोड, नाली एवं रोड क्रॉस निर्माण कार्य का भी शिलान्यास किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों को सुगम आवागमन के साथ ही जल निकासी की उत्कृष्ट सुविधा प्राप्त होगी। इसी श्रृंखला में, अभिनव रिगल होम्स में 10 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत सी.सी. सड़क निर्माण कार्य और शिव लोक फेज-4 में सार्वजनिक उपयोग के लिये शेड निर्माण कार्य का भूमि-पूजन हुआ। ये निर्माण कार्य न केवल कॉलोनी के निवासियों के आवागमन को सुगम बनाएंगे, बल्कि क्षेत्र की अधोसंरचना को भी एक नया स्थायित्व प्रदान करेंगे।

राज्यमंत्री  गौर ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए कि जनसुविधा से जुड़े इन समस्त कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जाए, जिससे स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं को शीघ्र अति शीघ्र इसका लाभ मिल सके। उन्होंने क्षेत्रवासियों को आश्वस्त किया कि जनता द्वारा प्रस्तुत की गई प्रत्येक मांग और आवश्यकता को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्रता से पूरा किया जाएगा।

भूमि-पूजन कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद  मधु शिवनानी,  बी. शक्तिराव,  गणेश राम नागर,  संजय शिवनानी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

नवीन श्रम संहिताएं श्रमिकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाएंगी : श्रम मंत्री पटेल

नवीन श्रम संहिताएं श्रमिकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाएंगी : श्रम मंत्री पटेल

नियमों को सरल, व्यावहारिक और श्रमिक-केंद्रित बनाने के दिए निर्देश
असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल पंजीयन और समूह बीमा पर विशेष जोर
श्रमिकों की दुर्घटना की सूचना के लिए सक्रिय पोर्टल एवं टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित की जाएगी

भोपाल 

श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नवीन श्रम संहिताओं के नियमों को बनाया जाए। नियमों की व्याख्या इस तरह हो कि आम श्रमिक भी आसानी से समझ सके। इन्हें अधिक सरल, व्यवहारिक और श्रमिक-केंद्रित बनाया जाए। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में प्रदेश की नवीन श्रम संहिताओं के प्रस्तावित राज्य नियमों की समीक्षा करते हुए कही। मंत्री पटेल ने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ श्रमिक एवं नियोक्ता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

मंत्री पटेल ने श्रमिक कल्याण मंडलों एवं विभिन्न बोर्डों की संरचना में श्रमिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने समूह बीमा योजना के नियम इस प्रकार तैयार करने पर बल दिया, जिससे असंगठित कर्मकारों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही संबल योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अंशदान में सरकार अथवा नियोक्ता की सहभागिता से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक सहज एवं प्रभावी होगा। मंत्री पटेल ने प्रस्तावित नियमों में कुछ प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट एवं संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। बीमा न्यायालय की कार्य प्रणाली, अर्द्धन्यायिक व्यवस्था तथा श्रमिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने के विभिन्न प्रावधानों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

राष्ट्रीय फ्लोर वेज तथा न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के संबंध में मंत्री पटेल ने कहा कि कृषि श्रमिकों की कार्यकुशलता, बाजार की वास्तविक परिस्थितियों तथा विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित मजदूरी दरों का समुचित अध्ययन कर व्यावहारिक निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया अधिक यथार्थपरक बनाई जाए। श्रमजीवी पत्रकारों के संबंध में विशेष प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मंत्री पटेल ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पत्रकार संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनके हितों के अनुरूप नियम तैयार किए जाएं।

मंत्री पटेल अन्तर्राज्यीय प्रवासी कर्मकारों के ऑनलाइन पंजीयन के लिए डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री पटेल ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों का सटीक डेटाबेस तैयार होने से उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने पंचायत सचिवों एवं नगरीय निकायों के वार्ड स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही भी तय करने के निर्देश दिए। श्रमिकों की दुर्घटनाओं की त्वरित सूचना एवं सहायता के लिए सक्रिय पोर्टल तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित करने के भी निर्देश दिए गए। ट्रांसजेंडर एवं दिव्यांगजनों के लिए कार्य स्थलों पर सुलभ स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं गरिमा से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर भी बल दिया गया। निरीक्षक प्रणाली के स्थान पर सुविधा प्रदाता (फैसिलिटेटर) आधारित व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने नवीन श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर 4 नई श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य सूचना आधारित पंजीयन व्यवस्था को बढ़ावा देना, नियोक्ता एवं कर्मचारी के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना तथा उद्योगों को सुगम कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में तकनीक आधारित पंजीयन, संस्थानों को 24×7 संचालन की सुविधा, पृथक बीमा न्यायालय, अपील प्राधिकरण, राष्ट्रीय फ्लोर वेज, असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म कर्मकारों के सामाजिक सुरक्षा प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी की पात्रता तथा श्रमजीवी पत्रकारों एवं अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

पंचायतों को बनाए आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी : मंत्री पटेल

पंचायतों को बनाए आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी : मंत्री पटेल

ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे
पंचायतों के श्रेणीकरण, जल संरक्षण, डिजिटल सेवाओं और अधूरे आवासों के प्रभावी उपयोग पर दिए निर्देश
पंचायत दर्पण पोर्टल पर नागरिक सेवाओं का विस्तार, बिजली-पानी बिल एवं कर भुगतान की ऑनलाइन सुविधा पर जोर
विकास भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

भोपाल

ग्रामीण विकास योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सिर्फ आधारभूत सुविधाएं देना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त और रोजगारोन्मुखी बनाना होगा। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कही। मंत्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायतों का श्रेणीकरण उनके वास्तविक डाटा और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर किया जाए तथा इस प्रक्रिया में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त और रोजगारोन्मुखी बनाना होना चाहिए।

मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति तथा वीवीजी रामजी योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत ऐसे कार्यों का चयन किया जाए, जिनसे रिचार्जिंग सिस्टम को मजबूती मिले और जल संरक्षण के स्थायी परिणाम प्राप्त हों। सामुदायिक भवनों के रखरखाव एवं स्वच्छता के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग उसी परिसर में किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार उपयुक्त स्थलों का चयन किया जाए।

प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री पटेल ने अधूरे आवासों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन हितग्राहियों का निधन हो चुका है और उनके आवास अधूरे हैं, ऐसे मामलों में नियमानुसार पंचायतें भवनों को पूर्ण कर उन्हें आंगनवाड़ी, सामुदायिक भवन अथवा अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने भूमि संबंधी समस्याओं के कारण आवास निर्माण से वंचित पात्र परिवारों के प्रकरणों का भी प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत प्रदेश के 24 जिलों में भारत सरकार द्वारा प्राप्त 1.89 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत स्वीकृतियां प्रदान की जा चुकी हैं तथा 1.44 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। आवास पूर्णता के मामले में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना में अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए बहु-स्तरीय स्वीकृति व्यवस्था के स्थान पर सहज प्रणाली विकसित की गई है, जिससे पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके।

मंत्री पटेल ने कहा कि पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि पूरे भूगोल और स्थानीय संसाधनों की संरक्षक है। उन्होंने पंचायत क्षेत्र के वृक्षों की जियो-टैगिंग कर उनकी जिम्मेदारी तय करने तथा पंचायत का डिजिटल नक्शा नागरिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों में बिजली एवं पानी के बिलों का डिजिटल जनरेशन तथा भुगतान व्यवस्था विकसित होने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

बैठक में पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाओं के विस्तार की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल पर पेमेंट गेटवे सिस्टम विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन कर भुगतान, भवन निर्माण अनुमति, ग्रामीण संपत्ति कर सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से भी आवेदन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त बिल जनरेशन एवं ऑडिट जैसी सुविधाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।

मंत्री पटेल ने निर्देश दिए कि पंचायतों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए तथा योजनाओं से जुड़े अधिकारियों का पर्याप्त कार्यकाल सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। उन्होंने जन-जागरूकता गतिविधियों को भी गति देने पर बल दिया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

 

जी.एस.टी. एक राष्ट्र-संकल्प-उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक : राज्यपालपटेल

भोपाल

राज्यपालमंगुभाई पटेल ने कहा कि जी.एस.टी. को लागू करना ‘एक-राष्ट्र, एक-कर, एक-बाजार’ की अवधारणा तक सीमित नहीं होकर, ‘एक-राष्ट्र, एक-संकल्प और एक-साझा उत्तरदायित्व’ का जीवंत प्रतीक है। जी.एस.टी. की नौ वर्षों की इस यात्रा से  देश को दशकों पुराने इंस्पेक्टर राज और  जटिल कर तरीकों के जाल से मुक्ति मिली है। यह ऐतिहासिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब केंद्र और राज्य एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो आर्थिक सुधार केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह जाते, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लेते हैं।

राज्यपालपटेल बुधवार को जी.एस.टी. के नौवें वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन सी.जी.एस.टी. और सेंट्रल एक्साईज भोपाल द्वारा “सुगम कर–सशक्त भारत” थीम पर रविन्द्र भवन में किया गया। राज्यपालपटेल ने प्रदेश के उत्कृष्ट करदाता और संस्थाओं को सम्मानित किया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी।

राज्यपालपटेल ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी ने कर व्यवस्था को सरल तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बना कर देश के छोटे, मझोले और बड़े उद्यमियों को व्यापार के एक समान और सुरक्षित अवसर प्रदान किए हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की सहभागिता के लिए सी.जी.एस.टी. विभाग को उनके मूल मंत्र “सबका साथ-सबका विकास” का सतत रूप से पालन करना चाहिए। उन्होंने करदाता आधार के विस्तार, राजस्व संग्रह, टेक्नोलॉजी आधारित अनुपालन और पारदर्शी प्रशासन में नए मान दंड स्थापित करने की दिशा में सी.जी.एस.टी. भोपाल ज़ोन के प्रयासों की सराहना की।

राज्यपालपटेल ने कहा कि यह आप सब की बड़ी ज़िम्मेदारी है कि “सुगम कर व्यवस्था-सशक्त भारत” के सिद्धांत, विभागीय नीतियों और प्रशासनिक कार्यों में दिखाई दे। ऐसा व्यापक टैक्स आधार तैयार करें, जिसमें व्यवसायों के लिए समान अवसर के साथ ही स्वैच्छिक अनुपालन की संस्कृति को भी मजबूती मिले। टैक्स चोरी करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। किन्तु किसी भी ईमानदार करदाता को परेशानी अथवा उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़े। याद रहे कि कर दाताओं के पास नीति-निर्माताओं से सीधे संपर्क का माध्यम नहीं है, आप ही अपने ज़ोन में कर दाताओं के लिए सरकार का चेहरा हैं।

राज्यपालपटेल ने कहा कि जी.एस.टी. दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने कार्यों में कार्य कुशलता, पारदर्शिता और उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। सहकारी संघवाद की भावना को और मजबूत करेंगे। एक ऐसे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे जो आर्थिक रूप से अधिक सक्षम, अधिक एकीकृत और अधिक समृद्ध हो। उन्होंने सभी कर अधिकारियों से लोकसेवा में सत्य निष्ठा, ईमानदारी और नैतिक आचरण के सर्वोच्च मानकों के पालन की अपील की।

राज्यपालपटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उनका केन्द्रीय जी.एस.टी., कस्टम और आबकारी, भोपाल जोन के मुख्य आयुक्तमानस रंजन मोहंती ने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।मोहंती ने सुगम कर व्यवस्था से सशक्त भारत के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार के प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आम आदमी के लिए टैक्स राहत और व्यापार सुगमता की दिशा में किए जा रहे सरकार के नवाचारों से अवगत किया। केन्द्रीय जी.एस.टी. की प्रधान आयुक्त श्रीमती एन. पद्मश्री ने जी.एस.टी. के 9 साल के क्रियान्वयन, परिवर्तन और उपलब्धियों की जानकारी दी। आभार अतिरिक्त महानिदेशक राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नार्कोटिक्स अकादमीलोकेश लिल्‍हारे ने व्यक्त किया। समारोह में केन्द्रीय जी.एस.टी. आयुक्तधीरेन्द्र मणि त्रिपाठी, विभाग के पूर्व चीफ कमिश्नरनवनीत गोयल, अपीलेट अथॉरिटी के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी उनके परिजन और कर दाता मौजूद थे।

 

धान की फसल पर भी देंगे भावांतर योजना का लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे हलधर किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, इस धरा के वास्तविक शुभंकर है। वे अपने अथक परिश्रम से पूरे समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों की खुशहाली ही हमारी सरकार का संकल्प हैं क्योंकि किसान समृद्ध होगा, तभी हमारा प्रदेश और देश समृद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल की धरती धान उत्पादन के लिए जग प्रसिद्ध है। शेर की दहाड़ और सतपुड़ा के पहाड़ और अब यहां की छत्रिय धान इस क्षेत्र की बड़ी पहचान है। छत्रिय धान को अब भौगोलिक संकेतक टैग (जीआई टैग) मिल गया है। यह हमारी देशज और पारंपरिक कृषि का वैश्विक सम्मान है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के धान उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब धान की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी योजना (मनरेगा का नया स्वरूप) के तहत प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के कार्यम लगातार चलायें जाएंगे। किसानों और रोजगार के जरूरतमंदों को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सिवनी जिला मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय धान महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रदेश के 3 हजार 941 किसानों को 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से कोदो-कुटकी के बोनस के रूप में 2 करोड़ 84 लाख रुपए किसानों के खातों में अंतरित किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार अन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। हमने प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना अंतर्गत प्रदेश के 16 हजार 754 से अधिक श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। साथ ही 494 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से 629 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण कर सिवनी जिले को बड़ी सौगात दी। इसमें 349.33 करोड़ रुपये की लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण और 144.83 करोड़ रुपए की लागत के 43 विकास कार्यों का भूमि-पूजन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट से सिवनी तक फोरलेन रोड निर्माण कार्य की घोषणा करते हुए कहा कि जिले के छपारा ब्लॉक के ग्राम चमारी में शासकीय महाविद्यालय खोला जाएगा। ग्राम सागर से खटकर तक पक्की रोड का निर्माण किया जाएगा। ग्राम छिड़िया पलारी में नगर वन स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिवनी जिले के हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक मिनी स्टेडियम ‍का निर्माण कराने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 1 से 15 जुलाई तक स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है। सभी अपने बच्चों को स्कूलों में प्रवेश कराएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ के ध्येय को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसी माह प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजातीय बंधुओं को यूसीसी के दायरे से पृथक रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक लोगों ने राज्य सरकार के यूसीसी प्रस्ताव का समर्थन किया है। हम तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का को गरीबों की फसल कहा जाता था। उसे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने अन्न को प्रोत्साहित करने के लिये योजना शुरू कर देश-दुनिया में इसका मान बढ़ाया। अन्न में मौजूद तत्व सबसे जल्दी पचता है। राज्य सरकार ने पिछले साल से अन्न खरीदने की शुरुआत की है। इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें। प्रदेशभर में जल गंगा संरक्षण अभियान के अंतर्गत लाखों काम हुए हैं। सभी प्रदेशवासी पानी की महत्ता को समझें। वी-बी-जी रामजी अधिनियम देश में लागू हो चुका है। इसके तहत प्रदेश के गांव-गांव में बहुतायत में अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की राशि दे रही है। किसानों को किसान सम्मान निधि मिल रही है। राज्य में दीपावली के बाद भव्यता के साथ गोवर्धन जयंती मनाई जाएगी। मध्यप्रदेश में दूध-दही की नदियां बहती हैं। सरकार दूध उत्पादन और मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। युवाओं को नए कॉलेज और प्रशिक्षण की सौगात मिल रही है। मध्यप्रदेश सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने ही गरीब-जरूरतमंदों को संबल योजना का लाभ दिया। संबल योजना में सरकार द्वारा दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और शारीरिक अपंगता आने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है। श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक के नि:शुल्क इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। राज्य सरकार हर वर्ग के गरीब, वंचित और अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे सभी पात्र लोगों को आवास देने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष में गेहूं खरीद का नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रदेश के 13 लाख 46 हजार से अधिक किसानों से कुल 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर उन्हें 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से फसल राशि भुगतान की गई है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना के माध्यम से लाभ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में प्रदेश हमारी सरकार खेत से लेकर बाजार तक हर क्षेत्र में मूल्य संवर्धन पर काम कर रही है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलवाने के लिए सरकार दृढ़ संकल्पित है। किसानों को आपदा से हुए नुकसान के लिए 2106 करोड़ का मुआवजा दिया गया है। एग्रीटेक सिस्टम से खाद वितरण में हो रही गड़बड़ियों पर सख्ती से अंकुश लगाया जा रहा है। सभी जिला कलेक्टर को खाद वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। किसान कल्याण वर्ष में किसान भाई मात्र 5 रुपए में बिजली का कनेक्शन ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने रानी दुर्गावती के सम्मान में पहली कैबिनेट जबलपुर में आयोजित की थी। उनके नाम से रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना की शुरुआत भी की। आज प्रदेश के 3941 किसानों को उनके खातों में बोनस राशि अंतरित गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोटो कुटकी के ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए भी काम जारी हैं। मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि डिंडोरी की सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को भी जीआई टैग मिला है। किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार अन्नदाता को विभिन्न स्थानों पर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है। प्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी सभी वर्गों के लिए काम किए जा रहे हैं। प्रदेश में अनेक सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण हो रहा है। ये विद्यालय हमें गोपाल कृष्ण और सुदामा की मित्रता की गहराई का स्मरण कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धूमा में सांदीपनि विद्यालय, लखनादौन में मिनी स्टेडियम का भी भूमि-पूजन आज हो गया है। उन्होंने कहा वर्षाकाल के बाद प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सड़क हादसे के घायलों को राहवीर योजना शुरू होने से त्वरित रूप से लाभ मिल रहा है। सहायता करने वालों को भी 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। गरीब-जरूरतमंदों को पीएम एयर एंबुलेंस के माध्यम से कठिन समय में मदद पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु परंपरा की महिमा को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कुलपति के लिए कुलगुरु संबोधन के उपयोग की शुरुआत की है। सिंहस्थ के भव्य आयोजन के लिए सभी तरह के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण से जुड़े सभी धार्मिक स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय निकायों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। भगवान राम के धाम चित्रकूट में भव्य तीर्थ बन रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे किसानों के घर धन-धान्य से सदैव भरे रहें, यही हमारी सफलता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि अब हमें सिर्फ पारंपरिक खेती के भरोसे नहीं बैठे रहना है। खेत में धान लगाइए, गेहूं उगाइए, लेकिन उसके साथ-साथ फसल विविधिकरण, पशुपालन और मछली पालन जैसे नए क्षेत्रों को भी अपनाइए। जब आप खेती के साथ-साथ इन कामों में हाथ आगे बढ़ाएंगे, तो आपकी जेब भरने के लिये हर महीने कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की मदद के लिए हमारी सरकार हर कदम पर साथ खड़ी है।

अन्न उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार के प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने अन्न (मिलेट) उत्पादक किसानों के हित में रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना को लागू करने का फैसला लिया है। वैल्यू चेन का निर्माण कर किसानों को मार्केट एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। ‘नर्मदा मिलेट्स’ ब्रांड के माध्यम से मध्यप्रदेश के अन्न को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत 1 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश के 15 प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग 4 हजार किसानों से लगभग 3 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी का उपार्जन किया गया। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 40 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार द्वारा डिंडौरी में ‘मध्यप्रदेश राज्य अन्न अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना की जा रही है। कुछ दिन पहले ही डिंडौरी की सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगानी अरहर को भी जीआई वैश्विक पहचान मिली है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़कर कहा कि मुख्यमंत्री संबल योजना हमारी ग्रामीण आबादी के लिए एक वरदान की तरह है। योजना अंतर्गत अब तक प्रदेश के 8.50 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इन्हें 8 हजार 325 करोड़ रुपए से अधिक राशि वितरित की जा चुकी है। आज राशि वितरण के नौंवे चरण में 1 लाख 46 हजार से अधिक लोगों को 365 करोड़ से अधिक लाभ दिया जा रहा है। संबल योजना असमय मृत्यु, दुर्घटना और अपंगता के समय जरूरतमंदों की मदद करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबल सहित सभी योजनाओं का बैकलॉग खत्म किया है।

सासंद  फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों को अनेक सौगातें दी हैं। सिवनी जिले के पिछड़े किसानों के लिए स्पेशल पैकेज की व्यवस्था करने से यहां और भी समृद्धि आएगी।

सिवनी विधायक  दिनेश राय मुनमुन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिवनी जिले को मेडिकल हॉस्पिटल की सौगात दी है। राज्य में समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए शिद्दत से चिंता करने वाली सरकार है। प्रदेश में सभी तरह उद्योगों का जाल बिछने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सिवनी जिले में नवीन कलेक्टर भवन का निर्माण कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेत में उतरकर रोपा धान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को सिवनी में किसान के खेत में धान रोपकर धान महोत्सव का शुभारंभ किया। मिट्टी और पानी से भरे खेत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ महिलाओं ने भी धान रोपाई की। उन्होंने रोपाई के पारंपरिक गीत “चंदन राजा को परहा गढ़ से, रानी सरुपा सकारी उठ से” गाकर पूरा वातावरण भक्तिमय और संगीतमय बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा धान रोपने से किसान और समस्त ग्रामीण उत्साह से भर उठे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेरे क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती होती है, धान रोपने का यह मेरा पहला अनुभव है, इस अनुभव ने मुझे असीम प्रसन्नता मिली। उन्होंने कहा कि अगली बार मैं अपनी धर्मपत्नी को साथ लेकर आऊंगा जिससे वह भी इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बन सकें।

सिदोरी का स्वाद चखा और किसान से किया संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान रोपने के बाद बरघाट के ग्राम लोहारा से आए किसान दौलतराम बिसेन ने अपने घर से लाई गई ‘सिदोरी’ (खेत में खाया जाने वाला पारंपरिक भोजन) खाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान के इस आत्मीय आग्रह को सहर्ष स्वीकार किया और बड़े चाव से उसे ग्रहण किया। उन्होंने किसान के घर से आई रोटी, गुड़ और अचार का आनंद लेते हुए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान रोपाई के बाद प्रकृति, देवी-देवताओं और गौ-माता का पूजन कर खेत की मेड़ पर आम का पौधा रोपा।

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री एवं सिवनी जिले के प्रभारी  करण सिंह वर्मा, बालाघाट सांसद मती भारती पारधी, बरघाट विधायक  कमल मर्सकोले, केवलारी विधायक  रजनीश सिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मालती डहेरिया, जनप्रतिनिधि सहित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान बंधु उपस्थित थे।

 

चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा है : उप मुख्यमंत्रीशुक्ल

भोपाल 

उप मुख्यमंत्रीराजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर के स्नेहपूर्ण शब्द, मधुर मुस्कान और आत्मीय व्यवहार से रोगी की आधी बीमारी दूर हो जाती है। उप मुख्यमंत्रीशुक्ल रीवा में ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर आयोजित चिकित्सक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी चिकित्सकों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएँ दीं।

उप मुख्यमंत्रीशुक्ल ने कहा कि समाज चिकित्सकों को धरती का भगवान मानकर सम्मान देता है। प्रत्येक चिकित्सक को हर मरीज में ईश्वर का स्वरूप देखकर करुणा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ उपचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाएँ और आध्यात्मिक मूल्य जुड़ने से उपचार अधिक प्रभावी बनता है तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनहितैषी बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

उप मुख्यमंत्रीशुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों एवं चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ देने वाले डॉक्टरों का सम्मान किया और डॉ. बी.डी. त्रिपाठी एवं डॉ. नेहा त्रिपाठी द्वारा लिखित पुस्तक “दिल की आवाज़ : बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष” का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ रीवा की क्षेत्रीय संचालिका बी.के. लता दीदी, माउंट आबू से पधारे बी.के. राजू भाई, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल तथा मुख्य अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने भी चिकित्सकों की सेवा भावना और मानवीय मूल्यों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

 

ओडिशा के मंत्रीनाइक ने मुगलिया हाट गांव में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था का किया अवलोकन

भोपाल

ओडिशा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्रीरबी नारायण नाइक ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुगलिया हाट गांव पहुंचकर ग्रामीण पेयजल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने गांव में संचालित पेयजल आपूर्ति प्रणाली, जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था तथा पंचायत की कार्यप्रणाली का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने में सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और मुगलिया हाट में इसका प्रभावी उदाहरण देखने को मिला।

भ्रमण के दौरान मंत्रीनाइक ने ग्राम सरपंच, फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से जुड़ी महिला सदस्यों तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के सदस्यों से संवाद कर जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी, पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव तथा ग्रामीण समुदाय की सहभागिता के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा निभाई जा रही जिम्मेदारियों और पंचायत की सक्रिय भूमिका की सराहना की।

प्रतिनिधिमंडल ने इस अवसर पर पीडीपी पोर्टल के माध्यम से पेयजल योजनाओं की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन व्यवस्था को भी देखा। इसके साथ ही ग्रामीण जल प्रदाय प्रणाली के विभिन्न तकनीकी घटकों का निरीक्षण कर उनके संचालन की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को योजनाओं के संचालन, रखरखाव तथा पारदर्शी निगरानी तंत्र से अवगत कराया।

भ्रमण के दौरान मंत्रीनाइक एवं प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। प्रतिनिधिमंडल ने मुगलिया हाट ग्राम पंचायत द्वारा पेयजल योजनाओं के सुव्यवस्थित संचालन, बेहतर रखरखाव, जल गुणवत्ता निगरानी में जनभागीदारी तथा पंचायत की सक्रिय कार्यशैली की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जिम्मेदार पंचायत व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

 

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