शराब में जहरीला पदार्थ मिलाकर 8 लोगों की हत्या, वारदात से पहले कुत्ते पर किया था परीक्षण

बलौदाबाजार.

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल अंतर्गत खर्वे गांव में 8 लोगों की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। गांव के ही एक साइको किलर ने पुरानी रंजिश, अंधविश्वास, गाली-गलौज और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए 8 लोगों को शराब में सुहागा देकर मार डाला, जबकि एक व्यक्ति जिंदगी और मौत की जंग जीतकर बच गया। पुलिस ने आरोपी राम सहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है।

ग्रामीणों की शिकायत पर खोदे गए कब्र
पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने खुलासा करते हुए बताया कि 6 जून को ग्राम खर्वे के ग्रामीणों ने एसडीओपी कसडोल को आवेदन देकर फरवरी से 14 मई के बीच गांव में हुई 8 संदिग्ध मौतों की जांच की मांग की। ग्रामीणों ने राम सहाय जायसवाल पर शक जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 7 मृतकों के शवों को कब्र से बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया। रायपुर के मेडिकोलिगल संस्थान में डॉक्टरों की विशेष टीम ने पोस्टमार्टम किया और डीएनए, विसरा व अन्य सैंपल प्रिजर्व किए। एक मृतक बुधराम जायसवाल का परिजनों द्वारा पहले ही दाह संस्कार किया जा चुका था।

कुत्ते पर किया था जहर का ‘सफल परीक्षण’
पुलिस पूछताछ में आरोपी राम सहाय ने कबूल किया कि उसने गांव के ही एक व्यक्ति से चूहा मारने की दवा के नाम पर ‘सुहागा’ लिया था। उसने सबसे पहले इस जहर का ट्रायल एक आवारा कुत्ते पर किया। कुत्ते की मौत के बाद उसने एक-एक कर इंसानों को अपना निशाना बनाना शुरू किया।

सिलसिलेवार हत्याओं का खौफनाक पैटर्न

  • 6 फरवरी को उसने पहला शिकार बद्री को बनाया, जो अक्सर उसके साथ गाली-गलौज और शराब पिलाने के लिए परेशान करता था।
  • 20 फरवरी को उसने दूसरा शिकार बुठालु को बनाया गया। बुठालु द्वारा समाज को गाली देने और पूर्व विधान सभा चुनाव के समय हुए विवाद के कारण उसे शराब में सुहागा मिलाकर पिला दिया, जिससे बद्री की मौत हो गई।
  • 12 मार्च को उसने तीसरा निशाना छत्तु राम को बनाया, जो उसकी पत्नि के उपर बुरी नियत रखता था।
  • 20 मार्च को चौंथा निशाना उसने बुधराम को बनाया, जमीन लेन देन और समाजिक रूप से रंजीश को लेकर उसे भी ठीक उसी पैटर्न में शराब में सुहागा मिलाकर पिला दिया।
  • 31 मार्च को उसने पांचवां निशाना विनोद कुमार को बनाया गया, जो उसके साथ लगातार गाली-गलौज किया करता था।
  • 28 अप्रैल को उसने छठा निशाना गजानंद को बनाया। आरोपी को उसपर शक था कि वह उसपर बैगा गुनिया करता है, जिसके कारण वो कर्ज मुक्त नहीं हो पा रहा है और जीवन में सुख शांति नहीं आ पा रहा है।
  • 29 अप्रैल को इसने सातवां निशाना चैतूराम को बनाया। आरोपी ने चैतूराम से 50,000 कर्ज लिया गया था, जिसके ब्याज देने से निजात पाने के लिए उसने उसे शराब में सुहागा मिलाकर मार डाला।
  • 14 मई को आठवां निशाना उसने महेतरू राम को बनाया। 2023 में चुनाव के समय हुए पुराने विवाद, मारपीट और बीच बीच में ताने मारने से नाराज होकर उसने उसे शराब में सुहागा मिलाकर मार डाला।

आरोपी ने 14 अप्रैल 2026 को कार्तिक नाम के ग्रामीण को भी जहर वाली शराब दी थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी जान बच गई।

मृतकों के कफन-दफन में शामिल होता था आरोपी
हैरानी की बात ये है कि किसी को शक न हो इसलिए आरोपी खुद मृतकों को अस्पताल ले जाता और उनके कफन-दफन में शामिल होता था।

पुलिस टीम की बड़ी सफलता
इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए आईजी रायपुर अमरेश मिश्रा (IPS) लगातार दिशा-निर्देश दे रहे थे। पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा के निर्देश, एएसपी अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन और एसडीओपी कसडोल कौशल किशोर वासनिक के नेतृत्व में निरीक्षक प्रवीण मिंज और सायबर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रणाली वैद्य की टीम ने सूझबूझ, धैर्य और तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल कर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाया। आरोपी के खिलाफ 8 हत्या और 1 हत्या के प्रयास सहित कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह: 2036 पौधों के रोपण से ओलंपिक मेजबानी के संकल्प को दी नई ऊर्जा

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर नवा रायपुर के ग्राम पलोद में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ द्वारा आयोजित वृक्षारोपण एवं खिलाड़ी सम्मान समारोह में शामिल होकर रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं खेल प्रेमियों को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए खेल और पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण के दो महत्वपूर्ण आधार बताया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत ने वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी का दावा प्रस्तुत किया है। इसी राष्ट्रीय संकल्प और आकांक्षा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए कार्यक्रम में 2036 पौधों का रोपण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल वृक्षारोपण अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, हरित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में खेलों के लिए बेहतर वातावरण और आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जा रही है ताकि युवा अपनी प्रतिभा का पूरा प्रदर्शन कर सकें।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। वहीं बस्तर ओलंपिक जैसे अभिनव आयोजन ने दूरस्थ अंचलों की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दी है। इस वर्ष बस्तर ओलंपिक में लाखों युवाओं ने भाग लेकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है, जो प्रदेश में खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेल क्षेत्र में विशेष बजट प्रावधान कर रही है। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अधिक आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ देश एवं प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा वन विभाग के खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए नई पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने देश में खेल संस्कृति को नई पहचान दी है।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में अपार प्रतिभा है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर संभव अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा ओलंपिक का आयोजन भी युवाओं को नई दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय, बीएसएफ के आईजी  संजय पंत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, 20 जुलाई 2026 तक भर सकेंगे फॉर्म

रायपुर

हज कमेटी के माध्यम से वर्ष 2027 की हज यात्रा पर जाने के इच्छुक आवेदकों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 जून 2026 से प्रारंभ हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक हज कमेटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध हज आवेदन पत्र एवं दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदक हज सुविधा मोबाइल एप के माध्यम से भी आवेदन जमा कर सकते हैं।

मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने बताया कि हज-2027 के लिए आवेदन करने वाले सभी आवेदकों के पास 31 दिसंबर 2027 तक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है। ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 को रात्रि 11:59 बजे निर्धारित की गई है।

उन्होंने हज यात्रा के इच्छुक लोगों से अपील की है कि आवेदन करने से पहले हज गाइडलाइन को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा उसमें दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

अधिक जानकारी के लिए आवेदक छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी कार्यालय, मुखर्जी बाड़ा, बैरन बाजार, रायपुर से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए दूरभाष क्रमांक 0771-4266646 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

काले हिरण व चिंकारा के शिकार कर अतंर्राज्यीय स्तर पर तस्करी करने वाले आरोपी रिजवान एवं इम्तियाज की जमानत याचिका ख़ारिज

भोपाल

जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में आरोपी रिजवान और आरोपी इम्तियाज द्वारा जमानत याचिका दायर की गयी। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर के समक्ष स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा शासन का ठोस पक्ष रखा गया एवं अन्य प्रकरणों जैसे वीरूपक्षा गोडा विरूद्ध स्टेट आफ कर्नाटक राज्य में पारित आदेश एवं उक्त प्रकरण के महत्वपूर्ण तथ्यों से अगवत कराया गया। आरोपियों की मोबाइल फारेन्सिक रिपोर्ट से प्राप्त शिकार के साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा की गई सटीक विवेचना एवं रखे गए ठोस पक्ष के आधार पर उक्त जमानत याचिकाएं खारिज की गई। प्रकरण में अग्रिम विवेचना जारी है।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स इकाई इंदौर द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) म.प्र. के निर्देश पर वनमण्डल इंदौर एवं स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कार्यवाही की गई। किशनगंज जिला इंदौर से वन्यजीवों के मांस की तस्करी करने वाले 3 आरोपियों को 65 कि.ग्रा. (लगभग), एक नग देसी पिस्टल, 3 जिंदा कारतूस एवं एक नग चार पहिया वाहन टोयोटा इनोवा क्रिस्टा क्रमांक एम.एच-02-ई.पी.-4223 के साथ विभिन्न धाराओं में परिक्षेत्र महू वनमण्डल इंदौर के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये वन्यजीव मुख्यालय द्वारा इस प्रकरण को अग्रिम विवेचना के लिये स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) इकाई इंदौर को हस्तांतरित किया गया। एसटीएसएफ द्वारा वैज्ञानिक तकनीकी साक्ष्यों की सहायता से नया प्रकरण क्रमांक POR No. 237/22 दिनांक 21.08.25 दर्ज कर विवेचना की जा रही है। उक्त आरोपी इम्तियाज 19 माह से व आरोपी रिजवान 4 माह से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। वर्तमान में प्रकरण में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

नॉर्वे की धमाकेदार जीत: सेनेगल को 3-2 से हराकर वर्ल्ड कप 2026 नॉकआउट में एंट्री

नई दिल्ली
 नॉर्वे ने सोमवार को न्यू जर्सी में सेनेगल को 3-2 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। जीत के बाद खिलाड़ियों ने कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड के नेतृत्व में समर्थकों के साथ पारंपरिक “वाइकिंग रो” के जरिए जश्न मनाया। वाइकिंग रो वर्ल्ड कप के दौरान नॉर्वे के प्रशंसकों के बीच एक लोकप्रिय परंपरा बन गई है। इसमें समर्थक वाइकिंग्स की लंबी नाव जैसी आकृति में बैठते हैं और ढोल की ताल पर चप्पू चलाने जैसी गतिविधि करते हैं। इसकी तुलना अक्सर आइसलैंड के प्रसिद्ध “वाइकिंग क्लैप” से की जाती है।

खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ ने साथ मनाया जश्न
नॉर्वे के समर्थक अपने दोनों वर्ल्ड कप मुकाबलों के दौरान और मेजबान शहरों बोस्टन और न्यूयॉर्क सिटी में इस नारे और उत्सव का प्रदर्शन कर चुके हैं। सोमवार की जीत के बाद खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने भी प्रशंसकों के साथ इस जश्न में भाग लिया मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले एरलिंग हालैंड ने कहा कि अगर नॉर्वे जीत हासिल करता है तो वह इस उत्सव को मनाने के लिए उत्सुक थे। हालैंड ने फॉक्स स्पोर्ट्स से कहा, ‘मैंने इसे इंटरनेट पर देखा था यह पूरी तरह वायरल हो चुका है। मैच से पहले मार्टिन ओडेगार्ड ने मुझसे पूछा, क्या तुम्हें लगता है कि हमें भी इसमें शामिल होना चाहिए?’ मैंने कहा, ‘अगर हम जीतते हैं, तो जरूर करेंगे।’

क्या होता है वाइकिंग रो?
कहा जाता है कि वाइकिंग रो एकता शक्ति और टीमवर्क का प्रतीक है। यह परंपरा युद्ध से पहले एक साथ चप्पू चलाने वाले वाइकिंग योद्धाओं की छवि से प्रेरित है। राष्ट्रीय टीम के प्रति समर्थन दिखाने के लिए प्रशंसक एक साथ तालमेल में यह गतिविधि करते हैं। फुटबॉल कै मैदान पर भी खिलाड़ी एकता के साथ खेलते हैं। इसीलिए खेल में भी इस सेलिब्रेशन का खास महत्व है।

कैसा रह मैच का हाल
इसके साथ ही बात की जाए मैच की तो नॉर्वे ने 43वें मिनट में मार्कस होल्मग्रेन पेडरसन के गोल की बदौलत बढ़त हासिल की। इसके बाद एरलिंग हालैंड ने 48वें और 58वें मिनट में गोल दागकर विपक्षी खेमे पर दबाव बना दिया। इस परिणाम के साथ नॉर्वे ने ग्रुप I में कम से कम दूसरा स्थान सुनिश्चित कर लिया है। शुक्रवार को मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में फ्रांस के खिलाफ होने वाला उनका अंतिम ग्रुप-स्टेज मुकाबला यह तय करेगा कि ग्रुप में शीर्ष स्थान किस टीम के पास जाएगा।

जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने का प्रस्ताव, मंत्री राकेश सिंह ने मुख्यमंत्री को सौंपा पत्र

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। इस दौरान मंत्री  सिंह ने जबलपुर एयरपोर्ट का नामकरण वीरांगना मां रानी दुर्गावती के नाम पर किए जाने का अनुरोध किया।

 सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपते हुए कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की गौरवशाली वीरांगनाओं में से एक हैं। उन्होंने अपने साहस, पराक्रम और बलिदान से देश और समाज के लिए अमूल्य योगदान दिया है। विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र और जबलपुर से उनका ऐतिहासिक संबंध रहा है, जिसके कारण उनके नाम पर एयरपोर्ट का नामकरण क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

लोक निर्माण मंत्री ने मुख्यमंत्री से इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट को मां रानी दुर्गावती के नाम से जोड़ना उनकी वीरता और बलिदान को सम्मान देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्री  सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महापुरुषों के सम्मान से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।

आधुनिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में जीआरपी का महत्वपूर्ण कदम

भोपाल

बदलते अपराध स्वरूपों और आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप पुलिस बल को अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष एवं जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से शासकीय रेल पुलिस (जीआरपी) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण (Smart Policing Training) शिविर का समापन विशेष पुलिस महानिदेशक दूरसंचार  संजीव कुमार शमी तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल, भोपाल  राजाबाबू सिंह के मुख्य आतिथ्‍य में पी.टी.आर.आई. प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में सम्पन्न हुआ।

08 जून से 22 जून तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीआरपी भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर इकाइयों के आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के कुल 30 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता कर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक अधिक ‘स्मार्ट’, तकनीकी रूप से सक्षम, और संवेदनशील बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की जांच एवं रोकथाम, फॉरेंसिक विज्ञान, मानवाधिकार संरक्षण, तनाव प्रबंधन तथा नागरिकों के साथ बेहतर संवाद एवं जनसंपर्क स्थापित करने संबंधी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल  अंकित जायसवाल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने किया विमर्श

भोपाल

उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने विमर्श किया। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और समिति के सदस्यों ने नीति को जन-केंद्रित, सेवा-उन्मुख, गरीब एवं वंचित वर्गों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

बैठक में मंत्रिपरिषद समिति के सदस्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य काश्यप, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह सहित अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  अशोक बर्णवाल, आयुक्त  धनराजू एस तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परोपकारी संस्थाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सेवा-भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आमजन तक पहुंचाना है।

वर्तमान में प्रदेश गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं पहुंच के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों सहित उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान मुख्यतः बड़े शहरों तक सीमित हैं, जिससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करती है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य प्रदेश में उच्चस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना, विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना, अन्य राज्यों में उपचार के लिये मरीजों के पलायन को कम करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाना है।

नीति के अंतर्गत केवल सेवा-उन्मुख एवं लाभ-निरपेक्ष परोपकारी संस्थाओं को पात्र माना जाएगा। इनमें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियां, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्थाएं शामिल हो सकेंगी। पात्र संस्थाओं के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का पंजीकरण एवं सेवा गतिविधियों का संतोषजनक अनुभव होना प्रस्तावित किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं नर्सिंग कॉलेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने वाली संस्थाओं को प्राथमिकता दिए जाने का भी प्रस्ताव है।

बैठक में प्रस्तावित प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त भूमि का चयन कर रियायती दरों पर दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराने, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिये उच्च लागत वाले चिकित्सा उपकरणों पर निर्धारित शर्तों के अधीन अनुदान उपलब्ध कराने तथा विभिन्न स्वीकृतियों के लिए सिंगल-पॉइंट क्लियरेंस प्रणाली विकसित करने जैसे प्रावधानों पर चर्चा की गई।

मंत्रिपरिषद समिति ने नीति के प्रारूप का परीक्षण करते हुए सुझाव दिया कि इसके सभी प्रावधानों का केंद्र बिंदु आमजन, विशेषकर गरीब एवं वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। समिति ने नीति को अधिक सेवा-उन्मुख, पारदर्शी एवं जनहितकारी स्वरूप प्रदान करने पर बल दिया।

 

अल-नीनो और इथेनॉल की दोहरी मार! भारत के चीनी एक्सपोर्ट पर कई साल तक लग सकता है ब्रेक

 नई दिल्ली

भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके। 

भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है। 

चीनी की जरूरत ज्यादा, उत्पादन कम
उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा। 

इथेनॉल की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है। 

सरकार की नजर घरेलू सप्लाई पर 
भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है। 

क्या भारत को भी चीनी खरीदनी पड़ सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी। 

इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। 

अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है। 

 

वैष्णो देवी यात्रा ने तोड़ा रिकॉर्ड, 22 जून तक 50.70 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 10 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी

जम्मू
 उत्तर भारत के
पवित्रतम तीर्थ स्थलों में से एक श्री माता वैष्णो देवी जी की पावन यात्रा ने इस वर्ष एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 22 जून 2026 को पवित्र गुफा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 50 लाख के पार पहुँच गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 50.70 लाख भक्त माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं।

यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय रिकॉर्ड नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, विश्वास और भक्ति का सशक्त प्रमाण मानी जा रही है। पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 39.84 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 50.70 लाख तक पहुँच गई है, जो लगभग 10.86 लाख की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ यह भी स्पष्ट होता है कि यात्रा प्रबंधन और सुविधाओं में हुए सतत सुधारों पर भक्तों का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

बेहतर सुविधाओं पर भक्तों का भरोसा
श्राइन बोर्ड के दिशा-निर्देशन में, माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा के नेतृत्व में आधारभूत ढांचे के विस्तार, स्वच्छता व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा प्रबंधन तैयारियों, बैटरी कार और रोपवे सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए गए हैं। इसके साथ ही डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने भी यात्रियों के अनुभव को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, और निरंतर निगरानी एवं व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के कारण यात्रा का संचालन सुचारू रूप से जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष के मध्य में ही 50 लाख का आंकड़ा पार करना आने वाले महीनों में यात्रा के और अधिक विस्तार का संकेत है। यह न केवल धार्मिक पर्यटन की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है, बल्कि इस पवित्र धाम के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को भी पुष्ट करता है।

माता वैष्णो देवी की यह पावन यात्रा सदैव की तरह श्रद्धा, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु शांति और आशीर्वाद की अनुभूति प्राप्त करते हैं।

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