Sai Cabinet Meeting में बड़ा फैसला, ग्रामीण रोजगार की 2 नई योजनाएं मंजूर; बायोगैस नीति को भी हरी झंडी

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय में आज मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई और कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

1.    मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ’’विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
इस योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण तथा पीएम गति शक्ति से समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। विकास कार्यों की बेहतर कार्ययोजना एवं निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रणालियों का उपयोग करते हुए पारदर्शिता, सुशासन एवं जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाएगा। 
इस योजना के क्रियान्वयन में केंद्र एवं राज्य के व्यय का अनुपात 60ः40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2.    मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र आदि), विपणन केंद्र तथा आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ के माध्यम से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा व्यवसाय, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा तथा ग्रामीण बाजारों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की ग्रामीण आजीविका को मजबूत आधार प्राप्त होगा।

3.    मंत्रिपरिषद ने आज “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप का भी अनुमोदन किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा। 
इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य नोडल एजेंसी तथा ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक , श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी तिराहा पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र प्रथम के प्रति समर्पित प्रखर विचारधारा, देश की अखंडता के लिए उनका दृढ़ संकल्प सदैव प्रेरणा देता रहेगा। देश अनंतकाल तक डॉ.मुखर्जी का ऋणी रहेगा।

 

MP Weather Alert: 30 जिलों में बारिश की चेतावनी, 4 जिलों में हीटवेव का खतरा; 52% कम हुई बारिश

भोपाल 

मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार का असर साफ दिखाई देने लगा है। जून का आधे से ज्यादा महीना गुजर जाने के बावजूद प्रदेश में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 34.3 मिमी पानी ही बरसा है। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर खरीफ सीजन की तैयारियों पर पड़ रहा है। सोयाबीन सहित कई फसलों की बुवाई पिछड़ती जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में बुवाई के लिए कम से कम 4 इंच बारिश जरूरी होती है, लेकिन फिलहाल केवल भोपाल ऐसा जिला है, जहां यह आंकड़ा पार हुआ है।

प्रदेश में बारिश का पूरा हाल

विवरण     स्थिति
सामान्य बारिश (1 जून से अब तक)     70.9 मिमी
वास्तविक बारिश     34.3 मिमी
कमी     52%
सामान्य मानसून आगमन     15 जून
वर्तमान स्थिति     मानसून अभी भी लेट
4 इंच से ज्यादा बारिश वाला जिला     भोपाल

मानसून में देरी से बढ़ी चिंता

आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून तक प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार निर्धारित तारीख गुजरने के बाद भी इसकी सक्रियता कमजोर बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है, जहां औसत से 71 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सामान्य से 33 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

खरीफ फसलों की बोवनी पर असर
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खरीफ सीजन की तैयारियों पर पड़ रहा है। सोयाबीन समेत अन्य फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश जरूरी होती है। फिलहाल प्रदेश में केवल भोपाल ऐसा जिला है जहां चार इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यहां सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक, करीब 4.6 इंच पानी गिर चुका है।

कम बारिश की क्या वजह? प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है, जिसे 8 दिन ज्यादा बीत चुके हैं। फिलहाल अगले 2 से 3 दिन में मानसून के आने का अनुमान जताया जा रहा है। मानसून के जल्दी आने से तेज बारिश का दौर चलता है। जिससे आंकड़ा बढ़ जाता है।

हालांकि, जून के पूरे महीने ही प्री-मानसून का दौर चल रहा है। बावजूद पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 71% कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्सा यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल में औसत से 33 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

सिर्फ सात जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
अब तक भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जबकि अनूपपुर, बालाघाट, जबलपुर, सागर, रीवा, इंदौर, उज्जैन, धार, ग्वालियर, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम समेत अधिकांश जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। सोमवार को प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार जिले में करीब दो इंच वर्षा दर्ज की गई, जबकि भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, खंडवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सागर, सतना और बड़वानी सहित 17 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिला।

दतिया सबसे गर्म, पचमढ़ी सबसे ठंडा
सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा और यहां तापमान 42.2 डिग्री तक पहुंच गया। ग्वालियर में 40.2 डिग्री, जबलपुर में 36 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री और इंदौर में 34.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। 

धार में 2 इंच, भोपाल में पौन इंच बारिश, 17 जिलों में पानी गिरा इससे पहले सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी एक्टिविटी देखने को मिली। धार में करीब 2 इंच पानी गिर गया। वहीं, भोपाल में पौन इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर बना रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पर अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 32.9 डिग्री, सिवनी में 34.2 डिग्री, रायसेन में 35.4 डिग्री, शाजापुर में 35.7 डिग्री रहा। दतिया में सबसे ज्यादा 42.2 डिग्री दर्ज किया गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़ नौगांव और नरसिंहपुर में 40 डिग्री या इससे ज्यादा रहा।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 34.7 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, जबलपुर में 36 डिग्री और ग्वालियर में 40.2 डिग्री सेल्सियस रहा।

मानसून की एंट्री में देरी बनी मुख्य वजह
मध्य प्रदेश में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय के एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। आमतौर पर मानसून के सक्रिय होते ही तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी से सुधार आता है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां औसत से करीब 71 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में वर्षा की कमी का आंकड़ा लगभग 33 प्रतिशत है। 

संजीव कपूर का खुलासा: मास्टरशेफ इंडिया में अक्षय कुमार से ज्यादा फीस की थी शर्त

 सेलेब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने हाल ही में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को लेकर ऐसा खुलासा किया, जिसे फैंस जानते नहीं होंगे. संजीव ने बताया कि जब उन्हें पहली बार ‘मास्टरशेफ इंडिया’ ऑफर हुआ था, तब उन्होंने शो करने से इनकार कर दिया था. वजह थी उनकी एक खास शर्त, जिसे मेकर्स मानने के लिए तैयार नहीं थे.

Sanjeev Kapoor Reveals His Condition: ‘मेरी एक ही शर्त थी’
Culinary Culture से बातचीत में संजीव कपूर ने कहा, “जब वे पहली बार मेरे पास आए थे, तब उन्होंने मेरी शर्त नहीं मानी. मेरी शर्त सिर्फ इतनी थी कि मुझे अक्षय कुमार से एक रुपया ज्यादा फीस मिलनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “यह शो का पहला सीजन था और मुझे लगता था कि इस काम को मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता. जब उन्होंने मुझसे बात की, तो मैंने कहा कि मेरी एक शर्त है. उन्होंने उसे नहीं माना और मैं समझौता नहीं करना चाहता था. मैं अपने फैसले से खुश था.” संजीव ने यह भी बताया कि शो छोड़ने के बाद भी मेकर्स लगातार उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे.

गेस्ट बनकर भी नहीं पहुंचे शो में
शेफ ने बताया कि मेकर्स ने उन्हें कई बार एक एपिसोड के लिए गेस्ट बनकर आने का ऑफर भी दिया, लेकिन उन्होंने हर बार मना कर दिया. संजीव कपूर ने कहा, “वे लोग बार-बार कहते थे कि सर, एक एपिसोड के लिए आ जाइए. लेकिन मैंने साफ कह दिया था कि मैं ऐसा नहीं करूंगा.”

 तीसरे सीजन में बदली पूरी कहानी
संजीव कपूर ने बताया, “तीसरे सीजन में उन्होंने मुझसे कहा कि शो सही तरीके से नहीं चल रहा है और उन्हें मेरी जरूरत है. मैंने कहा कि मुझे नहीं लगता मैं कर पाऊंगा. तब उन्होंने कहा कि हम बिल्कुल वैसा ही करेंगे जैसा आप कहेंगे.” इसके बाद संजीव ने अपनी शर्तों पर शो साइन किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या आखिरकार उन्हें अक्षय कुमार से ज्यादा फीस मिली थी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “बिल्कुल मिली थी. वह शर्त कभी बदलने वाली नहीं थी. अगर मैं अपने फील्ड में यह नहीं कर सकता, तो फिर क्या मतलब है?”

पंकज कपूर ने सुनाया शाहरुख खान से जुड़ा NSD का दिलचस्प किस्सा

दिग्गज एक्टर पंकज कपूर ने हाल ही में पुरानी यादें ताजा करते हुए शाहरुख खान से जुड़ा एक दिल छू लेने वाला किस्सा शेयर किया. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में अपने स्टूडेंट के दिनों को याद करते हुए, पंकज ने बताया कि बॉलीवुड सुपरस्टार ने एक बार उभरते हुए एक्टर्स की जिंदगी में बैकस्टेज एक छोटा लेकिन यादगार रोल निभाया था.

किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर अपने पुराने क्लासमेट्स के साथ हाल ही में हुई मुलाकात के बारे में बात करते हुए, पंकज ने कहा कि NSD से ग्रेजुएट हुए उन्हें 50 साल हो गए थे और उन्होंने अपने घर पर एक गेट-टुगेदर रखा था. इस मुलाकात के दौरान, उनके स्टूडेंट के दिनों की यादें ताजा हो गईं, जिसमें मशहूर थिएटर डायरेक्टर इब्राहिम अल्काज़ी के पुराने किले में किए गए नाटकों की कहानियां भी शामिल थीं.

पंकज ने याद किया कि इब्राहीम अलकाजी जी एक साथ तीन बड़े नाटकों- रजिया सुल्तान, तुगलक और अंधा युग को डायरेक्ट कर रहे थे. ये नाटक किले की पुरानी दीवारों के बैकग्राउंड में किए गए थे, जिससे एक शानदार और यादगार थिएटर का एक्सपीरियंस मिला.

पंकज कपूर ने सुनाया किस्सा
एक्टर को ‘रजिया सुल्तान’ का एक खास सीन याद आया जिसमें भूखे नागरिक शासक के सामने जमा हुए थे. पहले साल के स्टूडेंट के तौर पर, पंकज और उनके दोस्तों को भीड़ का हिस्सा बनाया गया था, जबकि उनके दो क्लासमेट्स ने सैनिक का रोल निभाया था. सीन के दौरान, सैनिकों को भीड़ की तरफ नान फेंकने थे, और स्टूडेंट ने जल्द ही एक चालाक प्लान बनाया.

पंकज ने याद करते हुए कहा, ‘हमने दोस्तों के साथ एक टीम बनाई. वे हमारी तरफ नान फेंकते, हम उन्हें पकड़ते, और इंटरवल के दौरान हम समोसे खरीदते, सब कुछ बैकस्टेज ले जाते और साथ में नान, समोसा और चाय का मजा लेते.’

हालांकि, यह सीक्रेट प्लान ज्यादा देर तक छिपा नहीं रहा. पंकज के मुताबिक, अलकाजी ने आखिरकार देखा कि कुछ एक्टर सीन की स्टेजिंग में बदलाव कर रहे थे और तुरंत उन्हें डांट लगाई. इस कहानी को और भी खास बनाने वाली बात थी समोसे सप्लाई करने वाले व्यक्ति की पहचान. उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘वे समोसे हमें कोई और नहीं बल्कि शाहरुख खान सप्लाई करते थे. उस समय वह 10 साल का लड़का था. उसके पिता वहां कैंटीन चलाते थे.’

शाहरुख के पिता चलाते थे कैंटीन
इससे पहले, 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में, शाहरुख खान ने बताया था कि उनके पिता NSD में कैंटीन चलाते थे. उन्होंने कहा, ‘मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का हिस्सा नहीं था, लेकिन मैं वहां के कई एक्टर्स के साथ काम करता था. मनोज बाजपेयी भी वहां से नहीं थे, लेकिन उन्होंने और मैंने रघुवीर यादव जैसे एक्टर्स के साथ काम किया जो NSD का हिस्सा थे. जब हम दिल्ली में थिएटर करते थे, तो वे हमारे बोलने के तरीके और उच्चारण को बेहतर बनाने में मदद करते थे. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा. मेरे पिता NSD में कैंटीन चलाते थे, इसी वजह से मैं वहाँ के सभी बेहतरीन एक्टर्स को जान पाया.’

कौन हैं अरूप रॉय? बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को हटाकर बनाया TMC का नया अध्यक्ष

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने और सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की टीएमसी में सियासी संग्राम छिड़ गया है. टीएमसी तीन गुटों में बंट गई है. एक धड़ा बागी विधायकों का तो दूसरा बागी लोकसभा सांसदों का और तीसरा गुट ममता बनर्जी के साथ है. अब टीएमसी पर नियंत्रण की लड़ाई तेज हो गई है। 

बागी विधायकों वाले गुट की अगुवाई कर रहे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सोमवार को कोलकाता में बैठक कर टीएमसी की नई वर्किंग कमेटा का ऐलान किया. इस दौरान पार्टी अध्यक्ष पद से ममता बनर्जी को हटा दिया गया है.ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी की जगह पर विधायक अरूप रॉय को टीएमसी का नया अध्यक्ष बनाया है। 

कोलकाता में टीएमसी के बागी गुट के विधायक की बैठक में नए वर्किंग कमेटी का गठन किया गया. इस दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि ममता दीदी चाहें तो हमारी मुख्य सलाहकार बन सकती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि ममता बनर्जी की जगह पर टीएमसी के नए अध्यक्ष बने अरूप रॉय कौन हैं? 

टीएमसी के नए अध्यक्ष बने अरूप रॉय कौन
पश्चिम बंगाल की सियासत में अरूप राय जाना-पहचान नाम है. अरूप रॉय का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुआ. उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज छात्र राजनीति से किया और कांग्रेस पार्टी की छात्र संगठन से जुड़े. इसके बाद उनके असली सियासी पारी 1990 के दशक में हुआ, जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का गठन किया। 

अरूप रॉय उन शुरुआती और वफादार नेताओं में से एक थे, जिन्होंने ममता बनर्जी के संघर्ष के दिनों में उनका साथ दिया. उन्होंने हावड़ा जिले में तृणमूल कांग्रेस की जड़ों को मजबूत करने के लिए जमीन पर कड़ा संघर्ष किया, जिसके चलते ममता बनर्जी के भरोसेमंद बन गए। 

बंगाल की हावड़ा मध्य विधानसभा सीट से अरूप रॉय लगातार चौथी बार विधायक हैं. साल 2011, 2016, 2021 और 2026 के चुनाव में टीएमसी के टिकट पर विधायक बने हैं. ममता बनर्जी के अगुवाई वाली सभी सरकार में अरुप राय मंत्री रह चुके हैं. सहकारिता और कृषि विपणन जैसे मंत्रालय का जिम्मा संभालते रहे हैं। 

अरूप राय को संगठन का माहिर माना जाता है
अरूप रॉय अपनी सादगी, संगठनात्मक पकड़ और हावड़ा जिले की राजनीति पर मजबूत नियंत्रण रखते हैं. ममता के करीबी नेताओं में उन्हें गिना जाता है, लेकिन अब ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई वाले बागी विधायकों के साथ खड़े हैं. टीएमसी के बागी गुट के विधायकों की बैठक में ममता बनर्जी की जगह पर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। 

वो तृणमूल कांग्रेस के हावड़ा जिले के अध्यक्ष भी रहे हैं. साल 2011 में जब पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने वामपंथी शासन का अंत हुआ, तब अरूप रॉय ‘हावड़ा मध्य’विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने. ममता बनर्जी ने उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में ‘कृषि विपणन’मंत्री नियुक्त किया. इस तरह ममता की हर सरकार में मंत्री रहे। 

हावड़ा के ‘संकटमोचक’ और सांगठनिक ताकत
अरूप रॉय सिर्फ एक मंत्री ही नहीं, बल्कि हावड़ा जिले में तृणमूल कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक माने जाते हैं. लंबे समय तक वे टीएमसी के हावड़ा जिला अध्यक्ष रहे. हावड़ा की स्थानीय राजनीति में गुटीय कलह को शांत करने और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के कारण उन्हें अक्सर पार्टी का ‘संकटमोचक’ कहा जाता है। 

अरूप रॉय की सबसे बड़ी खासियत उनका ज़मीनी जुड़ाव है. वे हावड़ा के स्थानीय लोगों के लिए हमेशा सुलभ रहते हैं, जिसके कारण आम जनता के बीच उनकी छवि एक ‘माटी के नेता’ (जमीन से जुड़े नेता) की है. सहकारिता मंत्री के रूप में अरूप रॉय ने ग्रामीण बंगाल के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है. तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ावों के बीच ममता बनर्जी के प्रति उनकी निष्ठा बदल गई और सत्ता बदलते ही बागी गुट के साथ हो गए। 

अरूप रॉय की टीम में किसे-किसे मिली जगह
टीएमसी के बागी गुट के विधायकों ने सोमवार को बैठक कर पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे का ऐलान किया. पूर्व मंत्री अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष तो फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया है. ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त किया है.  बागी विधायक अखरुज्जमान अंसारी को नए कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि यह बैठक पार्टी संविधान के अनुरूप आयोजित की गई है और वर्किंग कमेटी का गठन उसी अनुरूप किया गया. इसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी. उन्होंने कहा कि नई वर्किंग कमेटी जल्द ही जिला समितियों, राज्य इकाई और प्रवक्ताओं के नाम का ऐलान कर देगी। 

 

108 एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी, महिला ने रास्ते में दिया बच्चे को जन्म, मां-बच्चा सुरक्षित

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही.

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 108 संजीवनी एम्बुलेंस एक बार फिर जीवनदायिनी साबित हुई. ग्राम करजा निवासी गर्भवती महिला गोमती को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सिम्स अस्पताल बिलासपुर रेफर कर दिया.

हालांकि रास्ते में ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई, जिसके बाद एम्बुलेंस स्टाफ की तत्परता से महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया. महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं. जानकारी के अनुसार, कोरजा (गौरेला) निवासी गोमती (28 वर्ष), पति संदीप को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल GPM में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने चेकउप के बाद पाया कि ‘ प्रसव में रुकावट’ थी और प्रोग्रेस नहीं हो पा रही थी. इसके साथ जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिम्स (CIMS) बिलासपुर रेफर कर दिया.

​परिजन आनन-फानन में महिला को डायल 108 एम्बुलेंस से बिलासपुर ले जा रहे थे. सफर के दौरान जैसे ही एम्बुलेंस कोनी (बिलासपुर) के पास पहुंची, महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और स्थिति काफी नाजुक हो गई. ​गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात ईएमटी (EMT) चंद्रिका प्रसाद ने तुरंत गाड़ी रुकवाई. उन्होंने बिना समय गंवाए सहायक पायलट शिवशंकर पुरी और साथ में मौजूद मितानिन के सहयोग से एम्बुलेंस के भीतर ही प्रसव कराने का निर्णय लिया.​

​स्टाफ की कुशलता से महिला का प्रसव पूरी तरह सफल रहा और एम्बुलेंस में ही किलकारी गूंज उठी. गोमती ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया. सफल प्रसव के बाद संजीवनी 108 की टीम ने बिना देरी किए जच्चा और बच्चा दोनों को सिम्स अस्पताल बिलासपुर में दाखिल कराया. जहां डॉक्टरों की देखरेख में दोनों की स्थिति पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ बताई जा रही है. विपरीत परिस्थितियों में सूझबूझ दिखाकर सुरक्षित प्रसव कराने के लिए परिजनों ने संजीवनी 108 के स्टाफ और मितानिन का आभार व्यक्त किया है. सोशल मीडिया पर भी लोग इस जीवन रक्षक टीम की जमकर सराहना कर रहे हैं.

व्यवस्था पर सवाल
पिछले 25 दिनों से स्थाई एनेस्थीसिया डॉक्टर का जिला अस्पताल में न होना कहीं न कहीं आम लोगों के स्वास्थ्य से साथ खिलवाड़ है. ​वर्तमान में मनेंद्रगढ़ से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एनेस्थीसिया डॉक्टर बुलाए जाते हैं. स्थाई डॉक्टर न होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में डॉक्टरों को न चाहते हुए भी गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को बिलासपुर रेफर करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में बनी रहती है.

रायपुर के सेंट पॉल स्कूल परिसर में चला बुलडोजर, सामुदायिक भवन की आड़ में चर्च निर्माण का आरोप

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सेंट पॉल स्कूल परिसर में बने एक विवादित सामुदायिक भवन पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया है। हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वदिनी पांडेय ने सामुदायिक भवन के नाम पर चर्च बनाए जाने का आरोप लगाया था और इसकी शिकायत भी की थी, जिसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन ने यह बड़ी कार्रवाई की है।

बता दें कि सेंट पॉल स्कूल के पास बने विवादित भवन को बुलडोजर के जरिए जमींदोज किया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान स्थिति न बिगड़े, इसके लिए प्रशासन ने सेंट पॉल स्कूल के दोनों तरफ की सड़कों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है। मौके पर अपर कलेक्टर, ADCP समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

सामुदायिक भवन’ की आड़ में चर्च बनाने का आरोप
इस पूरे मामले में हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वदिनी पांडेय ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है सेंट पॉल स्कूल परिसर एक शैक्षणिक संस्थान है। सेंट पॉल ट्रस्ट के पास इस जमीन की लीज़ साल 2022 में ही खत्म हो चुकी है। लीज़ समाप्त होने के बावजूद स्कूल परिसर में सामुदायिक भवन के नाम पर चर्च का निर्माण किया जा रहा था। इस निर्माण के लिए न तो ट्रस्ट के पास परमिशन थी और न ही नगर निगम को इसकी कोई जानकारी दी गई थी। वही उन्होंने आगे कहा कि हमारी शिकायत को शासन-प्रशासन ने सही पाया।

राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल! कई अधिकारियों के तबादले, जानें किसे मिली नई जिम्मेदारी

रायपुर
छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल की सूचना मिली है। यहां एक साथ 12 तहसीलदार डिप्टी कलेक्टर बने है। इन अधिकारियों को पदोन्नत करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। 3 वर्ष के लिए अधिकारी एक ही जगह पर टिके रह सकते है। यह पदोन्नत अधिकारियों की सेवाएं छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा नियम, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत शासित होगी।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर

 प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं महान  शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर आज लोक भवन में  राज्यपाल  रमेन डेका ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

                 इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और को सुदृढ़ करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके विचार और आदर्श आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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