CG में 200 टन मलबे से मिले 5 बेशकीमती हीरे, CM साय बोले- विकास को मिलेगा नया आयाम

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से खनिज संपदा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. सरायपाली क्षेत्र के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरे मिलने से क्षेत्र की संभावनाओं को नई मजबूती मिली है.

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण और प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है. यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरे के बड़े भंडार की संभावनाओं का संकेत है, जिससे भविष्य में निवेश, राजस्व और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं. एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन और अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्रित कर परीक्षण किया गया. प्रसंस्करण के पश्चात प्राप्त पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी और तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीति केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है. प्रदेश में खनिज संसाधनों के माध्यम से निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार खनिज, कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य कर रही है. बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र से प्राप्त यह सफलता प्रदेश की खनिज क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी तथा निवेश, रोजगार और समावेशी विकास के नए द्वार खोलेगी.

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी खनिज संपदा की खोज को गति मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में प्राप्त यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है. इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा. आगामी सर्वेक्षणों एवं परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा.

उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए बल्क सैंपल परीक्षण के परिणामस्वरूप प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है. आगे की कार्रवाई नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी.

MP में UCC की आहट! इंटरकास्ट मैरिज पर आदिवासी अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता, विवाह रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य

भोपाल 
 मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है। 

आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार
समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, ” उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा। 

आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत
यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, ” एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।
 
गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार
अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी। 

मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक
शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं। 

लिव इन रिलेशनशिप
गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। 

संपत्ति का अधिकार
गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

MP के मंदिरों में अब QR कोड से होगा दान, बड़े मंदिरों में लागू होगी डिजिटल व्यवस्था

दमोह 
 अयोध्या राम मंदिर के दान में गड़बड़ी के मामले के बाद मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था लागू होगी. प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मध्य प्रदेश के मंदिरों में क्यूआर कोड लागू किया जाएगा और डिजिटल टीमों का गठन किया जाएगा, जो पूरी दान व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेगी। 

सरकार पहले कर चुकी डिजिटल व्यवस्था की पहल
मध्य प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने सोमवार को दमोह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, ” राम मंदिर का मामला तो बाद में सामने आया है. काफी समय पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए थे कि प्रदेश की बड़े मंदिरों में कैसे डिजिटल टीमों का गठन किया जाए और डिजिटल तरीके से दान लिया जाए. उन्होंने संस्कृति विभाग को इस संबंध में पूरा अध्ययन करने के भी निर्देश दिए थे। 

मंदिरों में डिजिटल कमेटी, क्यू आर कोड से दान
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने दावा किया कि यह सारा वाक्या राम मंदिर का मामला आने के काफी पहले का है. उन्होंने कहा, ” हम इसका पूरा अध्ययन कर रहे हैं और यह तैयारी कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों में डिजिटल कमेटियों का गठन किया जाए, जो सारी चीजों की और व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी. इसके अलावा जो दान आता है उसके लिए डिजिटल और क्यू आर कोड जैसे आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जाए, जिससे किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी न हो सके.” संस्कृति मंत्री श्री लोधी ने कहा, ”मैंने संस्कृति विभाग की एक बैठक ली थी और उसमें अधिकारियों को या निर्देश दिए हैं। 

देश के बड़े मंदिरों पर हो रही स्टडी, एमपी में लागू होगी व्यवस्था
उन्होंने कहा, ” कुछ समय पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए थे
कि देश के सभी बड़े मंदिरों का आर्थिक मैनेजमेंट और सभी तरह के मैनेजमेंट के लिए नई रिसर्च की जाए और वह रिपोर्ट सरकार के सामने प्रस्तुत की जाए. इस रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जाए. ये निर्देश राम मंदिर मामले से पहले के हैं.” उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई बड़े मंदिरों में लंबे समय से ऐसी व्यवस्था को लेकर कई जगह काम चालू है. शीघ्र ही मध्य प्रदेश में एक कमेटी का गठन होगा, जो इस विषय को लेकर जरूरी विचार विमर्श करेगी। 

लखनऊ अग्निकांड के बाद इंदौर में बड़ा एक्शन, कई कोचिंग सेंटर सील; जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर

 इंदौर

लखनऊ की कोचिंग में हुए भीषण अग्निकांड हादसे के बाद इंदौर का जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग की दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की असमय मौत हो चुकी है। इस बड़े और हृदयविदारक हादसे से सबक लेते हुए इंदौर के प्रशासनिक अमले ने मंगलवार सुबह से ही पूरे शहर के कोचिंग संस्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सुबह होते ही प्रशासनिक अधिकारियों की कई गाड़ियां सड़कों पर उतरीं और अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रहे छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों की बारीकी से पड़ताल शुरू की गई।

शहर की बड़ी कोचिंग्स पर एक साथ कार्रवाई
इस विशेष जांच अभियान के दौरान शहर के कई नामी और बड़े कोचिंग संस्थानों पर एक साथ प्रशासनिक छापे पड़े हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही खुलकर सामने आने लगी। बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन संस्थानों पर प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। नियमों का उल्लंघन करने और छात्रों की जान जोखिम में डालने के कारण शहर के कई कोचिंग संस्थानों को मौके पर ही सील कर दिया गया है। अचानक हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे कोचिंग हब में हड़कंप का माहौल देखा जा रहा है।

फायर सिक्योरिटी और सुरक्षा मानकों की खुली पोल
प्रशासनिक टीमों द्वारा की गई इस औचक जांच में कोचिंग संस्थानों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पूरी तरह से पोल खुल गई है। शहर की कई इमारतों में फायर सिक्योरिटी सिस्टम यानी आग बुझाने वाले बुनियादी उपकरणों की भारी कमी पाई गई है। कई जगहों पर तो सुरक्षा के अन्य जरूरी पैमाने भी पूरी तरह से नदारद मिले, जिनमें आपातकालीन निकास की व्यवस्था न होना और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना शामिल है। नियमों की इसी घोर अनदेखी को देखते हुए प्रशासन की टीम ने तत्काल कदम उठाते हुए शहर की सबसे प्रमुख और बड़ी कैटेलाइजर कोचिंग को पूरी तरह से सील कर दिया है। 

कलेक्टर के सख्त आदेश पर शहरभर में सघन जांच जारी
इस पूरी बड़ी कार्रवाई को लेकर इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा के विशेष और कड़े आदेश पर प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की कई संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। ये विशेष टीमें इस समय इंदौर शहर के कोने-कोने में फैले हर एक कोचिंग संस्थान की गहराई से जांच कर रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। 

बीना-झांसी रेलखंड पर यार्ड रीमॉडलिंग का असर, 25 हजार यात्री प्रभावित; 15 से ज्यादा ट्रेनों के रूट बदलेंगे

भोपाल
 जुलाई में रेल यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। रेलवे द्वारा ललितपुर स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग और सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण का कार्य किया जा रहा है।

इसके चलते 1 जुलाई से 1 अगस्त तक बीना-झांसी रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। भोपाल होकर गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव संभव है।

चरणबद्ध तरीके से होगा तकनीकी कार्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ललितपुर यार्ड में नई रेल लाइनें जोड़ने, प्वाइंट बदलने और सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने का काम किया जाएगा। इसके लिए 1 से 19 जुलाई तक प्री-नॉन इंटरलॉकिंग, 20 जुलाई से नॉन-इंटरलॉकिंग तथा 1 अगस्त तक पोस्ट-नॉन इंटरलॉकिंग कार्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान रेल परिचालन पर सीधा असर पड़ेगा।

इन ट्रेनों के रूट रहेंगे परिवर्तित
    यशवंतपुर-हजरत निजामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12650) 13 से 19 जुलाई तक
    तिरुपति-जम्मूतवी एक्सप्रेस 14 जुलाई को
    जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 14 से 20 जुलाई तक
    हैदराबाद-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 13 से 20 जुलाई तक
    विशाखापट्टनम-नई दिल्ली एक्सप्रेस 13 से 18 जुलाई तक

ये सभी ट्रेनें रुठियाई, सोगरिया, बयाना और मथुरा मार्ग से चलाई जाएंगी।

कई प्रमुख ट्रेनें भी रहेंगी प्रभावित
    22456 कालका-शिरडी साईनगर एक्सप्रेस
    12172 हरिद्वार-एलटीटी एक्सप्रेस
    12804/12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस
    12644 निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस
    12782 निजामुद्दीन-मैसूर एक्सप्रेस
    18238 अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस
    20808 अमृतसर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस
    12716 अमृतसर-नांदेड़ एक्सप्रेस
    12780 निजामुद्दीन-वास्को-डि-गामा एक्सप्रेस

यात्रा से पहले स्थिति जांचने की सलाह
रेलवे ने कहा कि यह कार्य भविष्य में ट्रेनों की गति, समयपालन और सुरक्षित संचालन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की नवीनतम स्थिति और समय-सारिणी की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

कतर की LNG फैक्ट्री में भीषण धमाका: 12 भारतीयों समेत 13 की मौत, 66 लोग घायल

दोहा 
कतर के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। 

ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था। 

कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है। 

दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया। 

ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी। 

सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है। 

 

राजगढ़ के लाल मोहन नागर को आज मिलेगा पद्मश्री, जल-पर्यावरण क्रांति के लिए राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

राजगढ़
मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है।

जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर
बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए।

बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया।

श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं
मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर ‘बोरी बंधान’ की शुरुआत की।

सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास
‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

MP सरकार फिर ले रही 2800 करोड़ का कर्ज, राज्य पर कुल देनदारी 5.02 लाख करोड़ के पार

भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वित्त विभाग ने मंगलवार को राज्य विकास ऋण के जरिए दो चरणों में बॉन्ड जारी करने की अधिसूचना जारी की है। यह राशि 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के रूप में जुटाई जाएगी।

इस नए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 13,800 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। इसी तरह, राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 2 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा।

सरकार जारी करेगी दो तरह के बॉन्ड
वित्त विभाग की मानें तो राज्य सरकार 7.64 फीसदी ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को करना होगा। वहीं, 7.83 % ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल निर्दारित की गई है। दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के जरिए कराई जाएगी।

दो तरह के बॉन्ड जारी करेगी सरकार
वित्त विभाग के अनुसार सरकार 7.64 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को किया जाएगा।

इसके अलावा 7.83 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल होगी।

दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से कराई जाएगी।

विकास कार्यों पर खर्च होगी राशि
राज्य सरकार का कहना है कि बॉन्ड से जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति भी मिल चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह राशि सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ था कर्ज
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज था। सरकार का दावा है कि ऋण की राशि का उपयोग सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में किया गया है।

अब 2800 करोड़ रुपए के नए ऋण के साथ राज्य का कुल कर्ज बढ़कर करीब 5.02 लाख करोड़ रुपए पहुंच जाएगा।

इन विकासकार्यों पर खर्च होगी रकम
प्रदेश सरकार के अनुसार, बॉन्ड के जरिए कर्ज ली जाने वाली रकम का इस्तेमाल प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर होगा। इसके लिए केंद्र सरकार से जरूरी अनुमति भी मिल चुकी है। बताया जा रहा है कि, इस राशि का इस्तेमाल सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ कर्जदार था एमपी और अब
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक एमपी पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर्ज था। सरकार का दावा है कि, ऋण की राशि का इस्तेमाल सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में हुआ है। नए 2800 करोड़ के इस ऋण बाद राज्य का कर्ज का कुल आंकड़ा बढ़कर 5.02 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी – मुख्यमंत्री साय

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

रायपुर,
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद्,भारत के प्रथम उद्योग मंत्री, राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और त्याग भारतीय लोकतंत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतन की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही हम राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

CG के बांध में बड़ा हादसा: 9 लोगों से भरी नाव पलटी, 3 ग्रामीण लापता, रेस्क्यू जारी

सूरजपुर.

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां 9 ग्रामीणों से भरी नाव बतरा बांध में पलट गई। 6 लोगों ने तैरकर जान बचा ली मगर 3 ग्रामीण लापता हो गए हैं। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरु कर दिया है।

दरअसल, यह पूरा मामला करंजी चौकी क्षेत्र के बतरा इलाके का है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंध के बाद भी सोमवार की रात अंधेरे में 9 लोग मछली पकड़ने के लिए बांध में गए थे। इस दौरान उनकी नाव पलट गई। घटना के बाद 6 लोगों ने किसी तरह से तैरकर अपनी जान तो बचा ली, मगर 3 लोग लापता हो गए।

रेस्क्यू अभियान जारी
इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम के साथ मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान में जुट गई है।

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