कतर की LNG फैक्ट्री में भीषण धमाका: 12 भारतीयों समेत 13 की मौत, 66 लोग घायल

दोहा 
कतर के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। 

ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था। 

कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है। 

दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया। 

ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी। 

सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है। 

 

राजगढ़ के लाल मोहन नागर को आज मिलेगा पद्मश्री, जल-पर्यावरण क्रांति के लिए राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

राजगढ़
मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है।

जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर
बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए।

बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया।

श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं
मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर ‘बोरी बंधान’ की शुरुआत की।

सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास
‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

MP सरकार फिर ले रही 2800 करोड़ का कर्ज, राज्य पर कुल देनदारी 5.02 लाख करोड़ के पार

भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वित्त विभाग ने मंगलवार को राज्य विकास ऋण के जरिए दो चरणों में बॉन्ड जारी करने की अधिसूचना जारी की है। यह राशि 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के रूप में जुटाई जाएगी।

इस नए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 13,800 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। इसी तरह, राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 2 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा।

सरकार जारी करेगी दो तरह के बॉन्ड
वित्त विभाग की मानें तो राज्य सरकार 7.64 फीसदी ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को करना होगा। वहीं, 7.83 % ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल निर्दारित की गई है। दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के जरिए कराई जाएगी।

दो तरह के बॉन्ड जारी करेगी सरकार
वित्त विभाग के अनुसार सरकार 7.64 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को किया जाएगा।

इसके अलावा 7.83 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल होगी।

दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से कराई जाएगी।

विकास कार्यों पर खर्च होगी राशि
राज्य सरकार का कहना है कि बॉन्ड से जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति भी मिल चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह राशि सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ था कर्ज
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज था। सरकार का दावा है कि ऋण की राशि का उपयोग सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में किया गया है।

अब 2800 करोड़ रुपए के नए ऋण के साथ राज्य का कुल कर्ज बढ़कर करीब 5.02 लाख करोड़ रुपए पहुंच जाएगा।

इन विकासकार्यों पर खर्च होगी रकम
प्रदेश सरकार के अनुसार, बॉन्ड के जरिए कर्ज ली जाने वाली रकम का इस्तेमाल प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर होगा। इसके लिए केंद्र सरकार से जरूरी अनुमति भी मिल चुकी है। बताया जा रहा है कि, इस राशि का इस्तेमाल सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ कर्जदार था एमपी और अब
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक एमपी पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर्ज था। सरकार का दावा है कि, ऋण की राशि का इस्तेमाल सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में हुआ है। नए 2800 करोड़ के इस ऋण बाद राज्य का कर्ज का कुल आंकड़ा बढ़कर 5.02 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी – मुख्यमंत्री साय

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

रायपुर,
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद्,भारत के प्रथम उद्योग मंत्री, राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और त्याग भारतीय लोकतंत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतन की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही हम राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

CG के बांध में बड़ा हादसा: 9 लोगों से भरी नाव पलटी, 3 ग्रामीण लापता, रेस्क्यू जारी

सूरजपुर.

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां 9 ग्रामीणों से भरी नाव बतरा बांध में पलट गई। 6 लोगों ने तैरकर जान बचा ली मगर 3 ग्रामीण लापता हो गए हैं। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरु कर दिया है।

दरअसल, यह पूरा मामला करंजी चौकी क्षेत्र के बतरा इलाके का है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंध के बाद भी सोमवार की रात अंधेरे में 9 लोग मछली पकड़ने के लिए बांध में गए थे। इस दौरान उनकी नाव पलट गई। घटना के बाद 6 लोगों ने किसी तरह से तैरकर अपनी जान तो बचा ली, मगर 3 लोग लापता हो गए।

रेस्क्यू अभियान जारी
इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम के साथ मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान में जुट गई है।

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा में बस्तर का शानदार प्रदर्शन, प्रदेश में हासिल किया तीसरा स्थान

बस्तर.

राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 में बस्तर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है. पिछले वर्ष जहां केवल दो विद्यार्थियों का चयन हुआ था, इस बार संख्या बढ़कर 177 पहुंच गई.

यह उपलब्धि जिले की शैक्षणिक रणनीति और सतत तैयारी का बड़ा परिणाम मानी जा रही है. बकावंड ब्लॉक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए अकेले 130 विद्यार्थियों का चयन कराया. वहीं लोहंडीगुड़ा ब्लॉक से भी 37 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की. छात्रों को परीक्षा से पहले ओएमआर आधारित मॉक टेस्ट और नियमित अभ्यास कराया गया. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण और विशेष प्रशिक्षण का भी लाभ मिला. डिजिटल माध्यमों और समूह प्रशिक्षण ने तैयारी को और मजबूत बनाया.

चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा. जिले की इस सफलता ने ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाई है. अब शिक्षा विभाग इस मॉडल को आगे भी जारी रखने की तैयारी में है.

जहां कभी आतंक और भय का माहौल था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जहां कभी आतंक और भय का माहौल था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प और सुरक्षा बलों के शौर्य से बस्तर में लौटी शांति और विकास की नई रोशनी  – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई को विकास और जनविश्वास की विजय बताते हुए कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज उसके सकारात्मक परिणाम पूरे देश के सामने हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय, हिंसा और अविश्वास का वातावरण था, वहां आज विकास, सुशासन और नई संभावनाओं का युग प्रारंभ हो चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य नागरिक निरंतर भय के साये में जीवन जीने को मजबूर थे। लोगों को अपनी सुरक्षा, आजीविका और सम्मान की चिंता रहती थी। विकास कार्यों को आगे बढ़ाना अत्यंत कठिन था। सड़क निर्माण से लेकर संचार सुविधाओं के विस्तार तक हर प्रयास का हिंसक विरोध किया जाता था। कई बार निर्माण सामग्री को जला दिया जाता था, ठेकेदारों को धमकाकर भगा दिया जाता था और विकास कार्यों को रोकने की कोशिश की जाती थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बीते वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए गए और दूरस्थ गांवों तक संचार सुविधाएं पहुंचाई गईं। बैंकिंग सेवाओं, डाक सेवाओं और वित्तीय समावेशन के माध्यम से लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास और अवसरों का विस्तार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल बम, बंदूक और गोली के सहारे नहीं लड़ी गई। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ जनसामान्य की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबों को अधिकार दिलाने और लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत करने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी का परिणाम है कि आज नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आमजन का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की प्रक्रिया में बढ़ा है।

प्रधानमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी आतंक और हिंसा का माहौल था, वहां आज युवाओं की ऊर्जा खेल और प्रतिभा के माध्यम से सामने आ रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों युवाओं की भागीदारी इस परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। यह दर्शाता है कि अब वहां के युवा हिंसा के रास्ते को नहीं, बल्कि अवसर, शिक्षा, खेल और विकास के मार्ग को अपना रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने बस्तर सहित पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कभी नक्सलवाद का आतंक था, वहां आज विकास का आत्मविश्वास दिखाई देता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, बैंकिंग और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच ने लोगों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों की वीरता तथा स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि विकास, जनभागीदारी, खेल, पर्यटन और नई संभावनाओं से बन रही है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और अंत्योदय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़  विकास और सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा तथा बस्तर देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम

महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम

प्रदेश में हीरा उद्योग, निवेश और रोजगार की संभावनाएं हुईं मजबूत

वैज्ञानिक अन्वेषण की सफलता से खनिज क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर, राज्य को मिलेगा राजस्व एवं आर्थिक विकास का नया स्रोत

खनिज संपदा की नई उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री

रायपुर, 

 छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश को खनिज संपदा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है तथा भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व सृजन और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकती है।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्रित कर परीक्षण किया गया। प्रसंस्करण के पश्चात प्राप्त पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीति केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रदेश में खनिज संसाधनों के माध्यम से निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार खनिज, कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य कर रही है। बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र से प्राप्त यह सफलता प्रदेश की खनिज क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी तथा निवेश, रोजगार और समावेशी विकास के नए द्वार खोलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी खनिज संपदा की खोज को गति मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में प्राप्त यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है। इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा। आगामी सर्वेक्षणों एवं परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए बल्क सैंपल परीक्षण के परिणामस्वरूप प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की कार्यवाही नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी।

सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विकास कार्यों का जिला स्तर पर होगा प्रेजेंटेशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 अगस्त के कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर देंगे जानकारी
जिले के विकास कार्यों पर केंद्रित लगाई जाएंगी प्रदर्शनियां
जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में होगा सम्मेलन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्री, जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। समारोह स्थल पर विकास कार्यों और योजनाओं को जनसामन्य के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, यह प्रेजेंटेशन एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला विकास समितियां विकास गतिविधियों के लिए शासकीय नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करने के लिए जिला विकास समितियां प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने और किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त सांख्यिकी आंकड़े एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में योजना, आर्थिक एवं साख्यिकी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मनीष रस्तोगी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 विश्राम घाट पर ही मृत्यु पंजीयन की हो व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र में सभी विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। योजना अंतर्गत कराए गए कार्यों के संधारण की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजना में श्रेष्ठ कार्य तथा नवाचार करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।

जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों पर हों आधारित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग निर्धारित किया जाए। औद्योगिक पृष्ठ भूमि, कृषि आधारित व्यवस्था, वन क्षेत्र संपन्न जिलों के लिए विकास के सूचकांक अलग-अलग हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं का मकान बनाने वालों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और उपयुक्त भवन निर्माण सामग्री के संबंध में जागरूक करने के लिए भी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों की रही सक्रिय सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों ने कुएँ, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव जैसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की। बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों के चिन्हाकंन और पंजीकरण के लिए जारी अभियान में अब तक पच्चीस हजार से अधिक परिवारों की जानकारी पोर्टल पर प्रविष्ट की जा चुकी है। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है।

 

प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी : मंत्री परमार

प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी : मंत्री परमार

हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पुस्तक निर्माण पर दिया गया जोर
शिक्षाविदों का किया सम्मान, अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को सराहा

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ मूल्य पर उपलब्ध हैं। मंत्री परमार ने इन पुस्तकों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास करने तथा अकादमी की वेबसाइट पर पुस्तकों की ऑनलाइन प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा। परमार ने विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया, जिससे प्राप्त सुझावों के आधार पर पुस्तकों में आवश्यक सुधार एवं संशोधन किए जा सकें। उन्होंने कहा कि परिवर्तनशीलता और निरंतर सुधार ही संस्थागत प्रगति का आधार हैं। मंत्री परमार भोपाल स्थित मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता कर संबोधित कर रहे थे।

मंत्री परमार ने मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अकादमी परिवार को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के निर्माण में अकादमी के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। मंत्री परमार ने कहा कि पुस्तक लेखन एक कठिन और उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य है तथा लेखन का मूल भाव भारतीय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करते हुए अकादमी का कार्य एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

मंत्री परमार ने कहा कि सतत कार्य करना अकादमी का स्वभाव बन चुका है। उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण में प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए समग्र अध्ययन-अध्यापन को मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का महत्व कभी समाप्त नहीं होगा तथा प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। मंत्री परमार ने पुस्तक लेखन से जुड़े सभी लेखकों एवं शिक्षाविदों का आभार भी व्यक्त किया।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि हिंदी ग्रंथ अकादमी के योगदान से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देशभर में अग्रणी पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि की निरंतरता बनाए रखने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। राजन ने अकादमी की पुस्तकों की पहुंच राज्य की सीमाओं से बाहर अन्य राज्यों तक बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुस्तक लेखन प्रक्रिया से जुड़े सभी शिक्षाविदों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी के निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने विद्यार्थियों को सत्रानुरूप समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने में अकादमी की भूमिका की सराहना करते हुए विभागीय अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर प्रगति करने पर जोर दिया। अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने अकादमी की 55 वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए उसकी उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। कड़ेल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत पुस्तक निर्माण के लिए 375 से अधिक नए लेखकों को अवसर उपलब्ध कराया गया है और अकादमी द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश करते हुए विभिन्न विषयों की 1 हजार 336 शीर्षक की 1 करोड़ 10 लाख 99 हजार 512 प्रतियों का प्रकाशन किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि 26 विषयों में भारतीय ज्ञान परम्परा संदर्भ पुस्तके तैयार की जा रही है।

स्थापना दिवस समारोह में अकादमी द्वारा प्रकाशित “प्रगति पथ” ब्रोशर तथा द्विमासिक पत्रिका “रचना” के नवीन अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षाविदों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया।

ये शिक्षाविद् हुए सम्मानित

स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में अकादमी को उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय सहयोग प्रदान करने वाले शिक्षाविदों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति डॉ. खेमसिंह डहेरिया, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व आचार्य डॉ. राकेश ढण्ड तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी को शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इन शिक्षाविदों के योगदान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित उच्च शिक्षा सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण बताया गया।

कार्यक्रम का संचालन अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान ने किया तथा अकादमी के सहायक संचालक (प्रभारी) राम विश्वास कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

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