कतर के LNG प्लांट में मौत का धमाका: 13 की दर्दनाक मौत, भारत-पाकिस्तान के नागरिक भी हादसे का शिकार

रास लाफान. 
कतर में रास लाफान औद्योगिक शहर में भीषण विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई। कतर एनर्जी ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रास लाफान औद्योगिक शहर के बरजान क्षेत्र में रविवार देर रात हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई। कंपनी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि विस्फोट घरेलू गैस आपूर्ति संयंत्र को रखरखाव के बाद दोबारा चालू करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। अचानक हुए विस्फोट के बाद आग भड़क उठी, जिसे स्थानीय अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीमों ने तेजी से नियंत्रित कर लिया।

प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में अधिकांश भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। कतर एनर्जी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में कुल 66 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कतर, भारत, पाकिस्तान, तंजानिया, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। कंपनी ने आश्वासन दिया कि सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं। किसी भी घायल की हालत चिंताजनक नहीं बताई गई है।

बता दें कि रास लाफान कतर का सबसे बड़ा औद्योगिक और ऊर्जा हब है, जहां दुनिया के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन संयंत्र और निर्यात सुविधाएं स्थित हैं। यह क्षेत्र कतर की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार है और वैश्विक LNG आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कतर एनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस विस्फोट से LNG उत्पादन, निर्यात कार्यों या रास लाफान बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है। संयंत्र और बंदरगाह दोनों पूरी क्षमता के साथ सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। कंपनी ने वैश्विक बाजार को पूरा आश्वासन दिया है कि गैस आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आएगा।

कतर एनर्जी ने विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित कर दी है। विशेषज्ञ टीम घटनास्थल पर पहुंचकर सबूतों का जुटा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि फिर से चालू करने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट होने की बात सामने आई है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

यहां आपको बता दें कि मार्च में ईरान की एक मिसाइल ने रास लाफान पर हमला किया था, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। इसके बाद से ही कतर ने वहां उत्पादन रोक रखा था। बताया जा रहा है कि उसी को एक बार फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही थी, जिस कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ डुओलॉजी ने मचाया धमाल, प्रॉफिट शेयरिंग से कमाए 325 करोड़ रुपये

बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा धमाका किया है, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे सितारों की कतार में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है. ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ की डुओलॉजी (दो फिल्मों की सीरीज) से रणवीर ने अनुमानित ₹325 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है. खास बात यह है कि रणवीर ने इसके लिए कोई बंधी-बंधाई मोटी फीस नहीं ली थी, बल्कि मेकर्स के साथ मुनाफे में हिस्सेदारी (प्रॉफिट-शेयरिंग) का एक बड़ा सौदा किया था.

अब इस स्मार्ट मूव के साथ ही वो अब शाहरुख खान और रजनीकांत जैसे उन चुनिंदा सुपरस्टार्स की लीग में शामिल हो गए हैं, जो अपनी फिल्मों की बंपर कमर्शियल सफलता का सबसे बड़ा फायदा खुद उठाते हैं.

तय फीस छोड़ी और खेला बड़ा दांव
हिंदुस्तान टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ के लिए अपनी एक्टिंग फीस न लेने का एक साहसिक और समझदारी भरा फैसला किया था. इसकी जगह उन्होंने प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को चुना. इस डील का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रणवीर की जेब में सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का हिस्सा ही नहीं आया, बल्कि फिल्म के सैटेलाइट राइट्स, डिजिटल (ओटीटी) और म्यूजिक राइट्स की बिक्री से हुई मोटी कमाई का भी एक सीधा और बड़ा हिस्सा उनके खाते में गया.

बजट बढ़ा तो खुद लगाए पैसे
शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि ‘धुरंधर’ को पहले एक ही फिल्म के तौर पर प्लान किया गया था, लेकिन बाद में इसे दो भागों में बनाने का फैसला हुआ. जब फिल्म का प्रोडक्शन बजट बढ़ने लगा, तो रणवीर ने पीछे हटने के बजाय प्रोजेक्ट को पूरा सपोर्ट किया और फिल्म में अपने पास से अतिरिक्त पैसे भी लगाए. उनका यह कदम मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, क्योंकि फिल्म में निवेश करने की वजह से मुनाफे में उनका पार्टनरशिप शेयर और ज्यादा बढ़ गया. जब ये दोनों फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं, तो इन्होंने कमाई के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और रणवीर की यह रणनीति उनके करियर की सबसे बड़ी लॉटरी साबित हुई.

40 की उम्र में रचा नया इतिहास
अगर इंडस्ट्री में चल रही ₹325 करोड़ की यह संख्या पूरी तरह सही है, तो 40 साल के रणवीर सिंह इस समय भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर बन चुके हैं. हालांकि, बड़े स्टार्स के बीच प्रॉफिट-शेयरिंग का यह ट्रेंड अब तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है. अगर फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो एक्टर को खाली हाथ भी रहना पड़ सकता है. इसके विपरीत, जब फिल्म ‘धुरंधर’ जैसी ब्लॉकबस्टर साबित होती है, तो एक्टर की कमाई किसी भी तय फीस के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊपर निकल जाती है.

बड़े-बड़े दिग्गजों की लीग में एंट्री
रणवीर की इस छप्परफाड़ कमाई ने भारतीय सिनेमा के इतिहास के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ उनकी तुलना शुरू कर दी है. इससे पहले रजनीकांत, शाहरुख खान, प्रभास और अल्लू अर्जुन जैसे पैन-इंडिया सुपरस्टार्स ही अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए इस तरह के रेवेन्यू-शेयरिंग समझौतों के जरिए इतनी भारी-भरकम रकम कमा चुके हैं. हालांकि, सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में ₹325 करोड़ के इस आंकड़े को लेकर जबरदस्त चर्चा और उत्साह है, लेकिन अभी तक खुद रणवीर सिंह या ‘धुरंधर’ के मेकर्स की तरफ से इस कमाई पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है.

‘वेलकम टू द जंगल’ को सेंसर बोर्ड से मिला U/A 16+ सर्टिफिकेट, 18 बदलाव के बाद हुई पास

बॉलीवुड की सबसे मशहूर कॉमेडी फ्रेंचायजी वेलकम का तीसरा पार्ट, फिल्म वेलकम टू द जंगल कुछ ही दिनों में रिलीज होने वाली है. इसका इंतजार पिछले काफी सालों से किया जा रहा था. फिल्म में करीब 30 से ज्यादा एक्टर्स शामिल हैं. अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, अरशद वारसी,  ना जाने कितने पॉपुलर स्टार्स इसमें नजर आने वाले हैं.

सेंसर बोर्ड से अक्षय की फिल्म को मिला सर्टिफिकेट
फिल्म वेलकम टू द जंगल को सेंसर बोर्ड से भी क्लियरेंस मिल चुकी है. वैराइटी इंडिया की रिपोर्ट अनुसार, 20 जून को फिल्म सेंसर से U/A 16+ सर्टिफिकेट के साथ पास हो गई. इसमें 18 बदलाव किए गए हैं, जिसमें से सबसे बड़ा बदलाव फिल्म की दो हीरोइनों- दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के सीन्स से हुए.

वेलकम टू द जंगल में दिशा और जैकलीन के बिकिनी सीन्स पर सेंसर की कैंची चली है. इसके अलावा फिल्म में कश्मीर का जिक्र जहां हुआ, उसे बदला गया. कुछ वल्गर-डबल मीनिंग वाले जोक्स को म्यूट किया गया है. CBFC की वेबसाइट के मुताबिक, वेलकम टू द जंगल की लंबाई 164.50 मिनट (2 घंटे 44 मिनट) है.

20 जून को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट पाने वाली फिल्म की कहानी के मुताबिक, ‘वेलकम’ की मजेदार और उथल-पुथल भरी दुनिया में इस बार और भी बड़ा धमाका होने वाला है. एक अरबपति, नकली घाटा दिखाने के लिए ऐसी फिल्म बनाने का प्लान करता है जो पक्के तौर पर फ्लॉप हो जाए. इसके लिए वो सबसे गैर-भरोसेमंद लोगों की टीम तैयार करता है, जिसमें एक फ्लॉप सुपरस्टार और दो इनएक्सपीरियंस्ड डायरेक्टर्स शामिल हैं.

क्या-क्या किए गए बदलाव?
फिल्म में कई सारे डायलॉग और सीन्स बदले या काटे गए हैं. कुछ डायलॉग जैसे- काला पैदा हुआ है को सादा पैदा हुआ है. याद करो कुर्बानी, मुंह में भर लो पानी को सुनो सुनाता हूं कहानी, जो शहीद होने जा रहा था उसके मुंह में भरलो पान में बदला गया. एक डायलॉग देश की टट्टी भी था, जिसे बदलकर इज्जत ले लो कर लिया गया है.

CBFC ने फिल्म से बिकिनी में दिखाए गए कुछ सेंशुअल सीन और बॉडी मूवमेंट्स भी हटाए, जिसमें दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के सीन्स शामिल थे. करीब 10 सेकंड के सीन हटाए गए हैं. वेलकम टू द जंगल फिल्म अहमद खान ने डायरेक्ट की है, जो 26 जून को रिलीज होगी.

राजनांदगांव को 510 करोड़ की सौगात: सीएम विष्णु देव साय ने 333 विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर. 
किसानों की समृद्धि, गांवों का विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश में विकास और सुशासन के नए अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव जिले को 510 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की लागत के 333 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने शिवनाथ नदी के मोहारा मेला स्थल से ऑक्सीजन जोन तक सस्पेंशन ब्रिज, ईरा एनीकट निर्माण एवं संरक्षण कार्य, कुमरदा-गेंदाटोला-कल्लूबंजारी मार्ग निर्माण तथा घुमरिया व्यपवर्तन जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव जिले ने फसल चक्र परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। यहां किसानों को पारंपरिक खेती के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषक उन्नति योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और अन्य किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को खेती के लिए आवश्यक खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है, जहां नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज कराकर निर्धारित समय-सीमा में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के माध्यम से आय, जाति, निवास सहित विभिन्न विभागों की 400 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आम नागरिकों को बिजली बिल से दीर्घकालिक राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विकास कार्यों का निर्माण नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप आवास, बिजली, पानी, सड़क और डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि फसल चक्र परिवर्तन एवं जल संरक्षण के लिए किसानों एवं ग्रामवासियों में जागृति लाने के लिए पद्मफूलबासन बाई यादव महिला स्वहसहायता समूह की महिलाओं के साथ अप्रैल-मई की दोपहरी में यात्रा करती रही और एक अद्भुत कार्य किया गया। राजनांदगांव में फसल चक्र परिवर्तन होने से 
फसल विविधीकरण के लिए किसान प्रेरित हुए हैं।

कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन एवं एबीस एक्सपोर्ट के बीच किसानों के सोयाबीन उत्पाद की खरीदी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, कृषि सखी दीदियों, सरपंचों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का सम्मान किया गया और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को मिनी किट वितरित किए गए।

इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद संतोष पांडे, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल: उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भेंट किया गया महिला समूहों का विशेष चावल

रायपुर. 
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब राज्य स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को जिले का प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल भेंट किया। यह चावल अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जैविक विधि से तैयार किया गया है।

इस अवसर पर उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री को जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका संवर्धन गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक एवं विशिष्ट कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

उन्होंने बताया कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद न केवल गुणवत्ता और शुद्धता के लिए पहचान बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय कृषि परंपराओं को भी संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ समूहों द्वारा उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं।

साव ने जिले में संचालित इस अभिनव गतिविधि की प्रशंसा करते हुए महिला स्व-सहायता समूहों और जिला प्रशासन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल आज ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों के संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि जिले की विशिष्ट पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

स्वास्थ्य, सड़क और बिजली की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे 52 गांवों के आदिवासी और कांग्रेसी

धमतरी.

जिले के आदिवासी अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सोमवार को फूट पड़ा। लगभग 52 गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया और कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे।

इस दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन और शासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए गए हैं। धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार, आदिवासी ग्रामीण बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से धमतरी पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने शोभाराम देवांगन चौक के पास एकत्र होकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने तथा समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट घेराव के लिए आगे बढ़ गए।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। अनुमान है कि प्रदर्शन में 500 से 2000 तक ग्रामीण शामिल है। बड़ी संख्या में आदिवासियों के जुटने को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई।

वहीं, प्रदर्शनकारी ग्रामीण कलेक्टर से सीधे मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनेगा और समाधान का भरोसा नहीं देगा, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जिससे जिले में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

60% गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को कहा अलविदा! EV से डिलीवरी कर बढ़ाया मुनाफा

 ग्वालियर
पीठ पर भारी – भरकम डिलीवरी बैग, माथे पर पसीने की बूंदें और दिल में पेट्रोल के मीटर को देखकर बढ़ती धडकऩे…। ये आज के देशभर की सड़कों का कड़वा सच है। वहीं, बात करें मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तो शहर में अचलेश्वर मंदिर की चौखट से लेकर महाराज बाड़े की तंग और व्यस्त गलियों तक जो युवा शहर की रफ्तार बने हुए थे, उनके बजट को भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हिलाकर रख दिया है। आलम ये है कि, कमाई ‘सेंटीमीटर’ में सिमटती चली जा रही है और पेट्रोल के खर्च ‘किलोमीटर’ की रफ्तार से भागते चले जा रहा है, लेकिन ग्वालियर के बड़ी आबादी के युवाओं ने भी हार मानने के बजाय एक ‘स्मार्ट’ ऑप्शन खोज निकाला है।

ईंधन की इस बेलगाम बढ़ती आग से बचने के लिए शहर के करीब 60 फीसदी गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को ‘बाय – बाय’ कह दिया है और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की राह थाम ली है।

जुगाड़ और स्मार्ट वर्क का नया फॉर्मूला
ग्वालियर की इस गिग इकोनॉमी का पूरा गणित ही बदलकर रख दिया है। शहर में 750 से अधिक गिग वर्कर्स एक्टिव हैं, जो रोजाना डिलिवरी पहुंचाते हुए 50 से 80 किलो मीटर तक की यात्रा शहर के भीतर ही तय कर लेते हैं। दिनभर में 7 से 8 ऑडर्स निपटाने और प्रति ऑर्डर 50 से 100 रुपए कमाने वाले इन युवाओं के लिए पेट्रोल का खर्च एक गहरा आर्थिक घाव बन रहा था। ऐसे में उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए हैं।

बाइक को कहा अलविदा, ई-स्कूटर का स्वागत
कई युवाओं ने अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक बेच दी और बची – खुची जमा पूंजी से डाउन पेमेंट देकर नया ई-स्कूटर घर ले आए।

किराए की सवारी का सहारा
जो युवा नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, वे अब किराए की ई – बाइक लेकर रोजाना की पेट्रोल की मार से खुद को बचा रहे हैं।

लंबी दूरी को सीधे ‘नो’
अब आंख मूंदकर ऑडर्स नहीं उठाए जा रहे। युवाओं ने ‘फिल्टरिंग’ शुरू कर दी है। लंबी दूरी के ऑडर्स को छोड़कर कम दूरी वाले ट्रिप्स से ईंधन और समय का संतुलन बिठाया जा रहा है।

रोजगार का बढ़ता ग्राफ और चुनौती…
रोजगार कार्यालय के उप संचालक (रोजगार) पवन कुमार भिवटे कहते हैं कि, ग्वालियर में गिग वर्कर्स का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक सिंगल रोजगार मेले से ही कंपनियों को 20 – 25 युवा मिल जाते हैं और सालभर में 200 से ज्यादा युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। चूंकि, इनका पूरा काम दोपहिया वाहन पर ही टिका है, इसलिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर रहा है।

पेट्रोल की टंकी जेब खाली कर रही थी
शहर के एक गिग वर्कर श्याम कुमार ने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि, पहले बाइक से ही दिनभर भागदौड़ होती थी, लेकिन जब पेट्रोल के दाम बजट से बाहर होने लगे तो ईवी ही एकमात्र रास्ता बचा। मैं रोजाना करीब 8 पार्सल डिलीवर करता हूं और हाल ही में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट हुआ हूं, जिससे अब कुछ बचत हो पाती है।

ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, लेबर पार्टी की कमान भी छोड़ेंगे; बोले- देश मेरे लिए पहले

लंदन
 ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्‍टार्मर ने अपनी लेबर पार्टी के कई सांसदों के महीनों से चले आ रहे दबाव के बाद अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नए नेता का चुनाव होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। अब लेबर पार्टी में एक बार फिर से नए नेता के चुनाव के लिए दौड़ शुरू हो गई है। कीर ने इस्‍तीफा देने के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि उनके लिए देश पहले है। पिछले 1 दशक में 7वें नेता अब ब्रिटेन के पीएम बनेंगे। इससे पहले ऋषि सुनक ने अपने पद से इस्‍तीफा दिया था।

कीर स्‍टार्मर जब इस्‍तीफा देने के लिए अपने आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट से निकले तो लोगों ने उनका जोरदार स्‍वागत किया। उन्‍होंने पीएम बनने को अपने जीवन लिए सबसे गर्व का क्षण बताया था। कीर ने कहा कि वह करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने के लिए राजनीति में आए थे। उन्‍होंने लेबर पार्टी की साल 2024 की शानदार जीत को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया।

कीर स्टार्मर ने क्या ऐलान किया?
देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई. स्टारमर ने कहा, “अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं. मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। 

फिर कीर स्टार्मर ने कहा है कि वे सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. स्टार्मर ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में नया लेबर नेता चुने जाने तक वे कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे। 

ब्रिटेन के राजा को दी इस्‍तीफे की जानकारी
कीर स्‍टार्मर ने प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के लीडर दोनों ही पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका पीएम पद का 2 साल का कार्यकाल खत्‍म हो गया है। उन्‍होंने कहा कि मैंने उन्‍होंने आज सुबह ही राजा से मुलाकात की है और उनको इस इस्‍तीफे के बारे में बताया है। उन्‍होंने कहा कि लेबर पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी और 9 जुलाई से नामांकन होने लगेगा।

कीर स्‍टार्मर ने कहा कि जो कोई भी अगला पीएम बनेगा, उसे उनका पूरा समर्थन रहेगा। साथ ही वह एक सामान्‍य तरीके से सत्‍ता के हस्‍तातंरण में पूरी मदद करेंगे। कीर ने कहा कि मैंने जो कोई भी फैसला लिया, उसे देश को ध्‍यान में रखकर लिया जिसे मैं प्‍यार करता हूं। उन्‍होंने कहा कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था अब तेजी से विकास कर रही है और मजदूरी भी बढ़ी है। यह महंगाई से ज्‍यादा है।

17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा
स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे।

स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी।

इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है।

अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती।

लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे
ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं।

कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं।

हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है।

लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है।

कीर स्टार्मर को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी
कीर स्टार्मर पर पिछले कुछ दिनों में लगातार दबाव तेजी से बढ़ गया था कि वे लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दें, ताकि एंडी बर्नहम नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बन सकें. पिछले हफ्ते उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहम ने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंदी को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा और मजबूत हो गया था. अब उनको ही सत्ताधारी लेबर पार्टी का अगला नेता और ब्रिटेन का नया पीएम माना जा रहा है। 

जुलाई 2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने 174 सीटों के बड़े बहुमत के साथ शानदार जीत हासिल की थी. लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल पर कई विवाद छाए रहे हैं. इनमें लेबर पार्टी के सीनियर नेता पीटर मेंडलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाना भी शामिल है, जबकि उनके दोषी यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से संबंधों की जानकारी पहले से थी। 

इसके अलावा टैक्स और सामाजिक कल्याण योजनाओं (सोशल बेनिफिट्स) को लेकर सरकार के कुछ फैसलों और बाद में उन्हें बदलने (यू-टर्न लेने) से भी उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. दूसरी तरफ, एंडी बर्नहम पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. बाद में उन्होंने ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई. उपचुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा कि यह जीत लेबर पार्टी के लिए “बदलाव का आखिरी मौका” है. उन्होंने वादा किया कि वे “ब्रिटेन के लिए एक नया रास्ता पेश करेंगे। 

उन्होंने “ट्रिकल-डाउन इकोनॉमिक्स” को खत्म करने की भी मांग की. उनका कहना uw कि इस आर्थिक नीति का फायदा आम लोगों तक लगभग पहुंचा ही नहीं। 

एंडी बर्नहाम ने कीर को दी चुनौती
कीर स्‍टार्मर चाहे जो भी दावा करें लेकिन पिछले कई महीने से वह लेबर पार्टी के दबाव में चल रहे थे। वह कई विवादों में घिरे और उनको जनता को समर्थर भी कम होता जा रहा था। लेबर पार्टी के अंदर और बाहर मौजूद आलोचकों का कहना है कि कीर सरकार लोगों के जीवन में सुधार के चुनावी वादे को पूरा करने में फेल साबित हुई है। कीर पर तब दबाव ज्‍यादा बढ़ गया जब उनके लेबर पार्टी के विरोधी एंडी बर्नहाम ने एक संसदीय सीट जीत ली। इसके साथ ही वह कीर को औपचारिक रूप से चुनौती देने की स्थिति में आ गए।

 

पश्चिम बंगाल का बड़ा फैसला! हासीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस को मिली 62 एकड़ जमीन, पूर्वी सीमा होगी और मजबूत

कलकत्ता

पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। 

यह जमीन दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होगी. यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, खासकर चीन की सीमा के करीब। 

हसीमारा एयरबेस: राफेल और S-400 का गढ़
हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित है. यह भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है। 

राफेल बेहद आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है जो लंबी दूरी तक हमला कर सकता है. दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा से हवा, हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी.

कलाईकुंडा एयरबेस: ट्रेनिंग और ऑपरेशन का प्रमुख केंद्र
पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं। 

कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां तैनाती बदलती रहती है। 

राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत देता है। 

पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार जरूरी है. दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है। 

पूर्वी कमान की तैयारियों में तेजी
भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हसीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह विकास न सिर्फ चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा। 

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन आवंटन से रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को तेजी से काम करने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा क्योंकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में स्थानीय कंपनियां और मजदूर शामिल होंगे। 

पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देशीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी। 

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हसीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के लिए जमीन आवंटित करना पूर्वी भारत की सुरक्षा दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला है. राफेल और S-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ इन बेसों का विस्तार भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मजबूती देगा. आने वाले समय में इन बेसों की क्षमता बढ़ने से वायुसेना की तैयारियां और बेहतर होंगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने बदली दुर्गेश यादव के खेती की तस्वीर

रायपुर. , 
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारे का मजबूत आधार बन रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम बिजरवार निवासी किसान दुर्गेश यादव भी उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद वे खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले खेती के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी है।

दुर्गेश यादव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें प्रत्येक तीन माह में दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती के मौसम में आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मददगार साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का बोझ कम हुआ है और उन्हें आर्थिक परेशानियों से काफी राहत मिली है।

उन्होंने बताया कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बीज, उर्वरक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिल रही है।

दुर्गेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अनेक किसानों को मिल रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती के कार्यों को बेहतर योजना और उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से किसानों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना पा रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज ग्रामीण भारत के लाखों किसानों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।

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