Mumbai Monsoon: बारिश से बेहाल मुंबई, अंधेरी सबवे डूबा; कई इलाकों में जलभराव, IMD का येलो अलर्ट जारी

 मुंबई

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने दस्तक दे दी है. सोमवार सुबह से जारी बारिश के बीच कई इलाकों में जलभराव की खबरें सामने आ रही हैं. अंधेरी सबवे में पानी भर गया है. वहीं, कई सड़कों पर भी पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 22 जून को शहर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, बीते दिन यानी रविवार को शहर के कई इलाकों में सीजन की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने आज भी आंधी-बारिश की चेतावनी दी है। 
 
मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में मॉनसून दक्षिण कोंकण तक पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मॉनसून सोलापुर के पास रुका हुआ था. महाराष्ट्र में एक बार फिर मॉनसून एक्टिव हुआ है लेकिन रफ्तार अभी धीमी है. बता दें कि मुंबई में हर साल मॉनसून में मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस बार मॉनसून ने अभी तक अच्छी रफ्तार नहीं पकड़ी है। 
 
IMD के अनुसार, मुंबई और आसपास के इलाकों में आज पूरे दिन बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी. कुछ जगहों पर गरज और बिजली चमकने के भी आसार हैं. मौसम विभाग ने मुंबई में आज येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि मौसम खराब रह सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा खतरा नहीं है। 

मौसम विभाग के अनुसार, मुंबई के ऊपर कुछ बादल छाए हुए हैं. हालांकि, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में अभी मॉनसून की अच्छी बारिश नहीं हुई है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में ही बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं। 

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआत इस बार थोड़ी देरी से हुई है. लेकिन अब हवाओं में नमी बढ़ने से बारिश शुरू हो गई है. मुंबई के आसमान में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं. जबकि कई इलाकों में हल्की बारिश भी हो रही है. वहीं, कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल रही हैं। 

इस बीच मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अलर्ट है. मॉनसून की बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए पंपिंग मशीनें चेक की जा रही हैं. ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि लोगों को बारिश से होने वाले ट्रैफिक जाम से ना जूझना पड़े। 

मॉनसून की बारिश किसानों के लिए अच्छी खबर है. महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो सकेगी. मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून और मजबूत हो सकता है. पूरे महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। 

भारत ने बढ़ाई रूस और UAE से तेल खरीद, अमेरिकी आयात में भारी गिरावट

नई दिल्ली
 ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने तक भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले अपना ‘ऑयल स्टोरेज’ सुरक्षित करने की रणनीति अपनाई.

मैरीटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म क्लेपेर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, जून में 19 तारीख तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जबकि मई में यह 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन था. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.

संयुक्त अरब अमीरात से आयात जून में 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है. वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा. सऊदी अरब की आपूर्ति 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रही.

भारत ने 60% तक घटाई अमेरिकी तेल खरीद
दूसरी ओर, अमेरिका से तेल आयात घटकर केवल 91 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बैरल प्रतिदिन था. रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला तेल भारत के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से बढ़ी खरीद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनिश्चितता के बीच आपूर्ति संतुलित करने में मदद की.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और कच्चे तेल, एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. होर्मुज दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत के परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह के अंत से होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति धीरे-धीरे बहाल होने लगी है.

होर्मुज के खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार
फिर भी, ईरान द्वारा इजरायल पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद स्थिति को अब भी नाजुक माना जा रहा है. लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद ईरानी सेना ने शनिवार को फिर से होर्मुज बंद करने की घोषणा की. इस तरह यह समुद्री मार्ग जहाजों की आवाजाही के लिहाज से अब भी पूरी तरह खुल नहीं सका है. क्लेपेर में मॉडलिंग के सीनियर मैनेजर सुमित रितोलिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी आपूर्ति में मिलेगी, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है.

उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों के व्यवधान के दौरान भारत ने तेल और गैस आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों और अन्य समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया है. रितोलिया के अनुसार, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का फिर से खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा मील का पत्थर होगा, लेकिन भारत पर इसका असर अलग-अलग ईंधनों पर अलग तरीके से पड़ेगा.’ उन्होंने कहा कि एलपीजी सबसे ज्यादा प्रभावित ईंधन रहा, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही. क्योंकि भारत ने रूस, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ा दिया था.

भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर
सुमित रितोलिया का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत से धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बनने पर सबसे पहले फंसे हुए कार्गो को निकाला जाएगा और शिपिंग गतिविधियां बहाल की जाएंगी. इसके बाद खाड़ी देशों का निर्यात धीरे-धीरे बढ़ेगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत नेचुरल गैस और लगभग 65 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. ईरान युद्ध से पहले भारत के लगभग आधे कच्चे तेल, दो-तिहाई एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी. हाल के दिनों में होर्मुज में भारत के लिए स्थिति सामान्य होने के संकेत भी मिले हैं.

भारत के झंडे वाले तीन तेल टैंकर, जिनमें 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल था, और एक भारतीय एलएनजी जहाज ने अमेरिका-ईरान समझौते के बाद सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है. रितोलिया ने कहा कि रूस का कच्चा तेल अब भी भारत की आयात रणनीति का प्रमुख आधार बना हुआ है. जून में रूस से आयात 23.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान है और यह नया रिकॉर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमतों और आपूर्ति सुरक्षा के कारण होर्मुज सामान्य होने के बाद भी रूस भारत के लिए अहम आपूर्तिकर्ता बना रहेगा.

भारत ने वेनेजुएला से भी तेल की खरीद बढ़ाई
भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च के बाद से अटलांटिक बेसिन और वेनेजुएला से भी खरीद बढ़ाई है ताकि खाड़ी क्षेत्र की सीमित आपूर्ति की भरपाई की जा सके. जून में वेनेजुएला से आयात 3 से 4 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और उत्पादन सीमाओं के कारण दीर्घकालिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी क्षेत्र में देखा गया है. खाड़ी आपूर्ति बाधित होने के बाद अमेरिका भारत के लिए बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. पिछले साल हुए दीर्घकालिक समझौते ने इसमें मदद की, हालांकि लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है.

सुमित रितोलिया के अनुसार, होर्मुज सामान्य होने के बाद खाड़ी देशों की बाजार हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी, लेकिन भारत की आयात रणनीति पहले की तुलना में अधिक विविध बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने से माल ढुलाई लागत कम होगी, आपूर्ति जोखिम घटेंगे और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा. हालांकि, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और व्यापारियों का भरोसा पूरी तरह लौटने में अभी कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं.

जून 2026 में बैंकिंग सेवाओं पर असर, 22 से 28 जून के बीच चार दिन बैंक रहेंगे बंद

नई दिल्ली
अगर अगले सप्ताह बैक से जुड़े कामकाज करने के लिए ब्रांच जाने की योजना बना रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, आज 22 जून से 28 जून 2026 के बीच चार दिन बैंक बंद रहेंगे। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस महीने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और धार्मिक छुट्टियों के कारण कुल 11 छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इसमें दूसरे शनिवार, चौथे शनिवार और सभी रविवार की छुट्टियां भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ बैंक की छुट्टियां राज्यों या क्षेत्रों के हिसाब से अलग होती हैं लेकिन सरकारी राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन देश भर में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी।

अगले हफ्ते कब-कब है छुट्टियां
RBI के हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक अगले सप्ताह 25, 26, 27 और 28 जून को बैंक बंद रहेंगे। 25 और 26 जून को मुहर्रम के कारण देश के कई इलाकों में बैंक बंद रहेंगे। 25 जून को विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 26 जून को अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 27 जून को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे क्योंकि यह चौथा शनिवार है और 28 जून को रविवार है।

जून 2026 का छुट्टियों का कैलेंडर
15 जून को यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) की स्थापना के उपलक्ष्य में आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। राजा संक्रांति के कारण भुवनेश्वर में भी इस दिन बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 25 जून को मुहर्रम के कारण विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा, 26 जून को मुहर्रम के कारण अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक का कामकाज बंद रहेगा। वहीं, 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती मनाने के लिए शिमला में बैंक बंद रहेंगे। इसी तरह, 30 जून को रेमना नी नामक क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश के कारण आइजोल में बैंक बंद रहेंगे।

शनिवार और रविवार को छुट्टियां
रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। इसका मतलब है कि इन दिनों ग्राहक ब्रांच में मिलने वाली सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। बता दें कि इस महीने में कुल चार रविवार हैं, इसलिए बैंक 7, 14, 21 और 28 जून को बंद रहेंगे। रविवार के अलावा बैंक 13 जून (दूसरा शनिवार) और 27 जून (चौथा शनिवार) को भी बंद रहेंगे।

रेलवे का बड़ा कदम: रेलवन ऐप में AI फीचर, वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की संभावना बताएगा

नई दिल्ली
ट्रेन से यात्रा का प्लान बनाते समय सबसे बड़ी टेंशन बर्थ कंफर्म होने की होती है। इस मामले में रेलवे से यात्रियों के लिए बड़ी राहत वाली खबर आई है। भारतीय रेलवे ने अपने आधिकारिक रेलवन एप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से लैस कर दिया है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे के अनुसार, एप में जोड़ा गया नया एआई आधारित फीचर टिकट कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है और इसकी सटीकता लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी सरकारी रेलवे एप में यात्रियों को वेटिंग टिकट की स्थिति के बारे में एआई आधारित पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद करना है। यदि किसी यात्री का टिकट वेटिंग में है, तो एप उपलब्ध आंकड़ों और पूर्व रिकॉर्ड के आधार पर यह अनुमान बताएगा कि टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है।

एआई मॉडल लाखों पुराने रिजर्वेशन रिकॉर्ड, टिकट कैंसिलेशन के पैटर्न, विभिन्न रूटों पर यात्रियों की मांग, मौसम, छुट्टियों और त्योहारों के दौरान होने वाली अतिरिक्त भीड़ जैसे कई कारकों का विश्लेषण करता है। इसके बाद सिस्टम संभावित परिणाम का आकलन करता है। रेलवे का दावा है कि हालिया परीक्षणों और समीक्षा में इस तकनीक ने लगभग 94 प्रतिशत तक सटीक परिणाम दिए हैं।

हालांकि रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक पूर्वानुमान है, कोई अंतिम गारंटी नहीं। टिकट का वास्तविक कन्फर्मेशन सीटों की उपलब्धता, कैंसिलेशन और चार्ट तैयार होने तक होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को एआई के अनुमान को केवल एक मार्गदर्शक के रूप में देखना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रेलवे सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कारण होने वाली अनिश्चितता से काफी हद तक राहत मिलेगी और वे समय रहते वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था भी कर सकेंगे।

उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ पीआरओ डॉ. अमित मालवीय का कहना है कि भविष्य में एआई आधारित सेवाओं का दायरा और बढ़ाया जाएगा, जिससे यात्रियों को अधिक सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। रेलवन एप में जोड़ी गई यह नई सुविधा भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

अंबुबाची मेला 2026 की तैयारी पूरी, कामाख्या मंदिर में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु

 गुवाहाटी
पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक अंबुबाची मेला 2026 के लिए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी की ऐतिहासिक नीलाचल पहाड़ी पर स्थित माँ कामाख्या मंदिर में इस वर्ष देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के जुटने की उम्मीद है।

देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र और स्त्री शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय उत्सव 22 जून को ‘प्रवृत्ति’ के साथ शुरू होगा और 26 जून को ‘निवृत्ति’ के साथ समाप्त होगा। इस दौरान तीन दिनों तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं

असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग ने मेले की व्यवस्था को लेकर कहा, “यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक अंबुबाची मेला है। भारत और विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। हम श्रद्धालुओं को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर तरह से तैयार हैं। हमने निचले स्थानों पर शिविर और भोजन की व्यवस्था की है।

लगभग 8 लाख लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस आयोजन का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। हम श्रद्धालुओं से अनुरोध करते हैं कि वे मेले के दौरान सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक कामाख्या मंदिर अवश्य आएं।”

असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की
मेले के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और आवास सुविधाओं के लिए 24 विभागों में 4.55 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंदिर अधिकारियों ने सभी ऑफलाइन विशेष दर्शन काउंटरों को भी बंद कर दिया है। विशेष दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पास बुक करना होगा, जबकि सामान्य दर्शन नि:शुल्क रहेंगे।

अंबुबाची मेले का महत्व
मां कामाख्या मंदिर में साल में एक बार अंबुबाची मेला लगता है। । इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं।

इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से हो रही है, जो 26 जून तक चलेगा।

भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी युद्धपोतों का भव्य समावेश, समुद्री शक्ति को मिली नई मजबूती

नई दिल्ली
 पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को स्पष्ट संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं।’

समंदर में ताकत बढ़ा रही भारतीय नौसेना
कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे।

नेवी को मिला P17A क्लास का पांचवा वॉरिशप
इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती INS दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया।

INS दूनागिरी की खासियत
    INS दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।
    यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।
    यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
    INS दूनागिरी लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
    6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।

INS अग्रेह की खासियत
    दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

    INS अग्रेह की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है।
    यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।
    तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

INS संशोधक की खासियत
    संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है।
    जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
    इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
    110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है।
    यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है।
    भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

PM SVANidhi योजना: स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी 50 हजार तक लोन, लाखों लोग हुए लाभान्वित

 नई दिल्ली
नरेंद्र मोदी सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जिसके जरिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद चल रही है। इसी के तहत सरकार ने एक योजना-प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) को शुरू किया है। इस योजना के तहत लोगों को 50 हजार रुपये तक का लोन दिया जाता है। सरकार समय पर लोन चुकाने वाले लाभार्थियों को 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी देती है। आइए योजना के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

योजना की खास बातें
योजना के तहत बिना किसी गारंटी के 15000 रुपये, 25000 रुपये और 50000 रुपये के लोन दिए जाते हैं। ये लोन तीन चरणों में दिए जाते हैं। पहले चरण के तहत भुगतान करने वाले लाभार्थी को ही दूसरे चरण में 25 हजार और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये मिलते हैं। इस योजना के तहत सरकार लाभार्थियों को यूपीआई -लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा दे रही है। जो विक्रेता दूसरे चरण का लोन सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे 30000 रुपये तक की सीमा वाले यूपीआई -लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र होते हैं। इसके अलावा, स्ट्रीट वेंडरों को खुदरा/थोक डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए 1,600 रुपये तक के कैशबैक प्रोत्‍साहन दिए जाते हैं।

कोरोना के दौरान हुई थी शुरुआत
सरकार ने PM SVANidhi योजना की शुरुआत कोरोना के पहले चरण के दौरान की थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका को फिर से पटरी पर लाना था लेकिन बाद में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए योजना का विस्तार किया गया। सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए लाखों अतिरिक्त लाभार्थियों को शामिल करने का फैसला किया है।

मई 2026 में सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों ने 1.12 करोड़ से ज्यादा लोन लिए हैं, जिनकी कुल रकम 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। इस योजना के तहत 55 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है। एक साथ मिलकर, उन्होंने लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन किए हैं। पीएम स्‍वनिधि के तहत लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्‍साहन और ब्याज सब्सिडी के जरिए लगभग 800 करोड़ रुपये भी मिले हैं।

6 साल हो चुके पूरे
बीते एक जून को ही प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के 6 साल पूरे हुए हैं। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि PM स्वनिधि ने बिना किसी गारंटी के लोन, वित्तीय समावेश और विकास के नए मौकों तक पहुंच सुनिश्चित करके अनगिनत स्ट्रीट वेंडर्स (सड़क किनारे सामान बेचने वालों) की जिंदगी बदल दी है। बता दें कि इस योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
75% या 100%, इमरजेंसी में PF की रकम निकालने की क्या है नई लिमिट?

मुख्य बातें
    EPFO 3.0 के तहत PF बैलेंस को निकालने की लिमिट पर बहस छिड़ गई है
    बता दें कि EPFO 3.0 के तहत एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) कई बड़े बदलाव करने वाला है

75% या 100%, इमरजेंसी में PF की रकम निकालने की क्या है नई लिमिट?
EPFO news: किसी भी नौकरीपेशा शख्स के लिए उसके पीएफ की रकम काफी अहमियत रखती है। इस रकम का इस्तेमाल ज्यादातर लोग अपने किसी बड़े प्रोजेक्ट या इमरजेंसी में करते हैं। अब पीएफ की रकम को निकालने की लिमिट पर कई तरह की चर्चाएं चलने लगी हैं।

दरअसल, EPFO 3.0 के तहत एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) कई ऐसे सुधार लाने की योजना बना रहा है जो EPF सब्सक्राइबर्स के लिए फायदेमंद होगा। इसी कड़ी में पीएफ रकम निकाले जाने की लिमिट पर बहस छिड़ गई है। बता दें कि EPFO ने 15 अक्टूबर 2025 को जारी एक बयान में कहा था कि पात्र सदस्य अब अपने योग्य PF बैलेंस का 75% तक बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के निकाल सकते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष परिस्थितियों में 100% राशि निकालने की अनुमति भी जारी रहेगी। ऐसे में लोगों में भ्रम पैदा हो गया कि कहीं पूर्ण निकासी का विकल्प समाप्त तो नहीं हो गया।

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी: टीएमसी की सत्ता में परिवार बनाम संगठन की जंग तेज

  पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच का रिश्ता सिर्फ एक पारिवारिक बंधन नहीं बल्कि बंगाल की सत्ता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भविष्य को तय करने वाला सबसे बड़ा राजनीतिक समीकरण रहा है। वर्तमान में अभिषेक बनर्जी की स्थिति टीएमसी में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो की है, जिसे चुनौती देने वाला फिलहाल पार्टी में कोई दूसरा चेहरा नहीं है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे अशांत और अस्तित्व के संकट वाले दौर से गुजर रही है। पार्टी में आंतरिक बगावत है। इससे पहले टीएमसी को सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। अभिषेक बनर्जी इस पूरे चक्रव्यूह के केंद्र में आ गए हैं।

समर्थकों के लिए वे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का चेहरा हैं तो आलोचकों के लिए वे बंगाल के सबसे बड़े नेपो किड हैं, जिन पर पार्टी की मौजूदा दुर्दशा का ठीकरा फोड़ा जा रहा है।

कैसे हुआ अभिषेक का उदय?
ममता बनर्जी के कई भतीजे और भांजे हैं, लेकिन पार्टी के पुराने रणनीतिकारों का मानना है कि ममता के भाई अमित और भाभी लता के बेटे अभिषेक का उनकी राजनीतिक दुनिया में हमेशा एक विशेष स्थान रहा। जब ममता बनर्जी वाम मोर्चा के खिलाफ सड़कों पर एक बेहद कठिन और हिंसक राजनीतिक लड़ाई लड़ रही थीं, तब परिवार के युवा सदस्यों में अभिषेक ही थे जो उनकी इस राजनीतिक यात्रा के साथ जुड़े रहे।

पश्चिम बंगाल में 2011 में टीएमसी की जीत के बाद अभिषेक बनर्जी को युवा मंच की कमान सौंपी गई। वरिष्ठ नेताओं ने इसे मुख्य संगठन के समानांतर एक नया पावर सेंटर माना, जिससे पार्टी के भीतर पहली बार असहजता पैदा हुई। 2014 के लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट से लोकसभा में उनकी एंट्री होती है। इसके बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा।

टीएमसी का बदला स्टाइल
पारंपरिक बंगाली राजनेताओं के विपरीत अभिषेक बनर्जी ने राजनीति में एक प्रबंधन की नीति को पेश किया। कोलकाता और फिर बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले अभिषेक ने तकनीक, डिजिटल आउटरीच, सोशल मीडिया अभियान और डेटा-आधारित चुनावी रणनीति को पार्टी का मुख्य हथियार बनाया। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने बंगाल में बड़ी बढ़त हासिल की, तब अभिषेक के नेतृत्व में ही टीएमसी ने अपना सबसे बड़ा कायाकल्प किया। उन्होंने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC को जिम्मेदारी सौंपी, जिसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की।

क्यों बने विलेन?
भले ही कॉरपोरेट और रणनीतिक तरीके से चुनाव जीत लिए गए हों, लेकिन इसने पार्टी के भीतर के पुराने और जमीन से जुड़े नेताओं को नाराज कर दिया। वरिष्ठ नेताओं की शिकायत थी कि दशकों के जमीनी काम से बने उनके राजनीतिक अनुभव को कंप्यूटर प्रेजेंटेशन और कंसल्टेंट्स के सुझावों से रिप्लेस किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी आज टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, लेकिन अनौपचारिक रूप से वे सर्वशक्तिमान नंबर दो हैं। यही कारण है कि आज जब पार्टी में सांसदों और विधायकों की सामूहिक बगावत हो रही है, तो सारा ठीकरा उन्हीं के सिर फूट रहा है। विपक्ष और नाराज नेताओं का मानना है कि सारी शक्ति एक नेता और उसके आंतरिक घेरे के पास केंद्रित हो गई है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का मोहभंग हुआ है।

अभिषेक बनर्जी अपनी इस राजनीतिक विरासत और व्यक्तिगत उपलब्धि के बीच एक नाज़ुक मोड़ पर खड़े हैं। सत्ता की निकटता और उसकी पूर्ण कमान हासिल करने के इस संघर्ष के बीच, वे अपनी ही पार्टी की इस अभूतपूर्व और अप्रत्याशित संकट की घड़ी में कई गुटों के लिए विलेन बनकर उभरे हैं, जिससे पार पाना उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पुलिस परिवार ने किया सामूहिक योगाभ्यास

भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज धृति कल्याण शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा 25वीं वाहिनी के हॉल में योग कार्यक्रम एवं धृति 23वीं वाहिनी परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस परिवार के सदस्यों में स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सकारात्मक जीवनशैली तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती सीमा मकवाणा के साथ श्रीमती प्रियंवदा सक्सेना, श्रीमती अनुपमा कुमार, श्रीमती टिंग रॉय, श्रीमती भारती प्रसाद तथा श्रीमती गीता गोस्वामी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पुलिस लाइन नेहरू नगर, 23वीं वाहिनी विसबल, 25वीं वाहिनी विसबल, 7वीं वाहिनी विसबल भोपाल तथा झूला घर पुलिस मुख्यालय भोपाल से जुड़े पुलिस परिवार की महिलाओं एवं बच्चियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

योग कार्यक्रम के दौरान सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन किया गया तथा महिलाओं एवं बच्चियों द्वारा योग आधारित विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से योग के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली, आत्मानुशासन एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

योग कार्यक्रम के उपरांत धृति 23वीं वाहिनी परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण का संदेश देते हुए सभी ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।

संपूर्ण कार्यक्रम सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कल्याण) श्रीमती इरमीन शाह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस की सभी इकाइयों, जिलों, रेंज कार्यालयों, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों एवं वाहिनियों में पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा जवानों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया। योग सत्रों में सहभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं शारीरिक फिटनेस का संदेश दिया।

 

इजरायल में सर्वे से खुलासा, ईरान की स्थिति मजबूत मानी गई

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच भले ही समझौता हो गया है, लेकिन अभी भी मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इजरायल लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच एक चौंकाने वाले सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार, इजरायली जनता ने साफ संकेत दिया है कि हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष और अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ईरान मजबूत होकर उभरा है, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार की छवि बुरी तरह धूमिल हुई है। हिब्रू विश्वविद्यालय और अगम संस्थान के सहयोग से 17 से 20 जून के बीच कराए गए सर्वेक्षण में 3,644 लोगों ने भाग लिया।

न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, सर्वे में शामिल 92.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ईरान ने संघर्ष जीत लिया या इजरायल की तुलना में उसे ज्यादा फायदा हुआ। 82.9 प्रतिशत इजरायलियों ने कहा कि इस युद्ध और उसके परिणामों से इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमजोर हुई है। खास बात यह है कि यह धारणा केवल विपक्षी समर्थकों तक सीमित नहीं है। नेतन्याहू के दक्षिणपंथी राजनीतिक आधार वाले मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान को मजबूत बताते हुए इसे इजरायल की हार माना।

अमेरिका-ईरान समझौते का भारी विरोध
इतना ही नहीं, सर्वेक्षण में अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायलियों का भारी बहुमत विरोध करता दिखा। 63.2 प्रतिशत लोगों ने समझौते का विरोध किया, जबकि केवल 12.1 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। नेतन्याहू सरकार की छवि पर सबसे गंभीर प्रहार यह रहा कि 72.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने प्रधानमंत्री के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की सफलता वाले दावों पर भरोसा नहीं जताया। 56.4 प्रतिशत लोगों ने युद्ध प्रबंधन को ‘विफल’ या ‘खराब’ करार दिया।

स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हुई अमेरिका-ईरान वार्ता
यह सर्वेक्षण ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी रविवार को स्विट्जरलैंड में दीर्घकालिक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अस्थायी समझौते को स्थायी बनाने के लिए हो रही इन वार्ताओं में तेहरान का परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे हैं।

ये वार्ताएं लेबनान में जारी तनाव के बीच हो रही हैं। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्लाह के बीच झड़पों के बाद शुक्रवार को घोषित युद्धविराम का दोनों पक्ष उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में स्थायी युद्धविराम वार्ता की सफलता के लिए जरूरी है, जबकि अमेरिका अगले 60 दिनों में व्यापक समझौते की उम्मीद जता रहा है।

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