राष्ट्रपति मुर्मु से मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौजन्य भेंट, स्मृति चिन्हों का हुआ आदान-प्रदान

भोपाल

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से जबलपुर सर्किट हाउस में मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट की। इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान दोनों के बीच आत्मीय संवाद हुआ और संस्कृति व श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप स्मृति चिन्हों का आदान-प्रदान किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश आगमन पर स्वागत करते हुए जीवनदायिनी मां नर्मदा की बेहद सुंदर प्रतिमा भेंट की। वहीं, राष्‍ट्रपति मुर्मु ने भी अपनी ओर से मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को पुरी स्थित सुप्रसिद्ध भगवान जगन्‍नाथ, भाई बलराम तथा बहन सुभद्रा की अलौकिक तस्‍वीर सप्रेम भेंट की। ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर के विश्व प्रसिद्ध चक्र की भव्य प्रतिकृति भी उपहार स्वरूप प्रदान की। 

भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : राष्ट्रपति मुर्मु

भोपाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है। राष्ट्र्पति मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये और उपाधियों का वितरण किया। कार्यक्रम में विश्व्विद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्विविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं और नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पिछड़े समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है, जितना आधुनिक विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। जनजातीय समाज के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प को आधुनिक शिक्षा, नवाचार और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए, जिससे जनजातीय ज्ञान परंपरा का व्यवस्थित अध्ययन हो सके और उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है और जीवनशैली में भी तीव्र परिवर्तन आ रहा है, लेकिन इस बदलते दौर में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। देश के युवाओं को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर युवा न केवल कठिन परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, बल्कि आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र

राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।

राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को गोद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थी स्वयं इन ग्रामों में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और अनुभव करें कि जनजातीय समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए किन-किन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में समाज सेवा की भावना, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का विकास होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से पीएम जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत पिछड़े जनजातीय समुदायों, विशेषकर बैगा, भारिया और सहरिया समाज के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों लोग निवास करते हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र और तहसीलों का ऐसा विकास मानचित्र तैयार करने में सहयोग करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनजातीय विकास एवं बुनियादी सुविधाओं से संबंधित कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं। इससे प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा।

राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार दिए, उनका पालन-पोषण किया और विश्वविद्यालय ने उन्हें शिक्षा एवं आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी जड़ों और समाज को कभी न भूलें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है, तब समय की मांग है कि वे महारानी रानी दुर्गावती से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें और लोकतांत्रिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के संकल्प को अपना जीवन ध्येय बनाकर राष्ट्र की उन्नति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त करेगा नई ऊंचाइयां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है। यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थियों द्वारा एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होकर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाने के प्रयास सफल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने से प्रदेश में किसान कल्यारण वर्ष अंतर्गत कृषि एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही नवाचार आधारित अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। स्वागत भाषण में कुलगुरु डॉ. वर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी से A+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो संस्थान के लिए गौरव का विषय है। स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के साथ संयुक्त छायाचित्र समारोह का विशेष आकर्षण रहा। विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, राज्य सभा सांसद सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक सर्वश्री अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, लखन घनघोरिया, अखिलेश जैन, संभागायुक्त धनंजय सिंह, कलेक्टार राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

तमिलनाडु के तिरुवल्लुर में फैक्ट्री हादसा, अमोनिया गैस रिसाव से 2 की मौत

तमिलनाडु
तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया. पेरियापालयम के पास कन्निगापेर गांव स्थित ‘सेंट पीटर्स पॉल सीफ़ूड प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट कंपनी’ में अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया. गैस फैलते ही फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे.

इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी गैस की चपेट में आ गए, जिनमें इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है. वहीं, उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं. गैस का असर होते ही कई कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और बेचैनी की शिकायत होने लगी. इसके बाद पर फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया. प्रभावित कर्मचारियों को अलग-अलग वाहनों के जरिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया.

अस्पतालों में भर्ती किए गए कर्मचारी
प्रभावित कर्मचारियों को इलाज के लिए तुरंत गाड़ियों से पास के वेल्स प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और वेंकटेश्वर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की टीम ने सभी मरीजों की तत्काल जांच शुरू की और इलाज किया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, 6 कर्मचारी गैस के प्रभाव से बेहोश हो गए.

उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. वहीं, दो लोगों के नाक से खून आने की भी जानकारी है, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया है. गांव के लोगों और फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भी इस घटना के बाद भय का माहौल है. बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों और फैक्ट्री परिसर के बाहर जमा हो गए हैं.

तीन गंभीर मरीजों को किया गया रेफर
घटना की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम ने गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों का प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद तीन गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए चेन्नई स्थित स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचाया गया. बता दें कि अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में रेफ्रिजरेशन सिस्टम के लिए किया जाता है.

वहीं, राज्य के मंत्री कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हादसे में 60 महिलाएं और 4 पुरुष प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है और अधिकारियों को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

FIR दर्ज, दो फैक्ट्री मालिक हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. शुरुआती कार्रवाई के तहत फैक्ट्री के दो मालिकों को हिरासत में लिया गया है. उनसे पूछताछ की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच जारी है. वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
 

संस्कृति विभाग ने 14 स्थानों पर आयोजित किए सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनजातीय संग्रहालय में संगीत संध्या

भोपाल 

विश्व संगीत दिवस के पावन अवसर पर समूचा मध्य प्रदेश नाद-ब्रह्म की अलौकिक स्वर-लहरियों से गुंजायमान हो उठा। संस्कृति विभाग के तत्वावधान में प्रदेश के 14 अंचलों में कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का एक ऐसा अनुपम वितान तना, जिसने युवा पीढ़ी में नई सांस्कृतिक चेतना का संचार कर दिया। शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालयों सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, कला और परंपराओं से जोड़ना एवं उनमें सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा।

इसी श्रृंखला में, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित ‘संगीत संध्या’ मुख्य आकर्षण रही, जहाँ कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। इस शाम पुणे की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन की लयात्मक प्रस्तुतियों और भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट के मनोहारी शास्त्रीय गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन में एक सराहनीय प्रयास सिद्ध हुआ। इस अवसर पर संचालक, संस्कृति एन.पी. नामदेव एवं संस्कृति संचालनालय की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला ने उपस्थित कलाकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता एवं दर्शक उपस्थित रहे।

संगीत संध्या में पुणे (महाराष्ट्र) की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन ने अपनी शिष्याओं सुहार्दिका फड़के, सुसिद्धि पाटिल एवं सुसिद्धि तार्डे के साथ भरतनाट्यम की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी। प्रस्तुत सभी नृत्य रचनाएँ संस्कृत एवं हिंदी में रचित थीं, जिनका लेखन, संगीतबद्धता और नृत्य संयोजन स्वयं स्मिता महाजन द्वारा किया गया है। प्रस्तुति का शुभारंभ ‘विनायक स्तुति’ से हुआ, जिसमें विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना करते हुए उनसे बुद्धि, शक्ति एवं मंगलकारी आशीर्वाद की कामना की गई। इसके पश्चात प्रस्तुत ‘मल्लारी’ में मंदिरों में देवयात्रा के दौरान वाद्ययंत्रों पर बजाई जाने वाली पारंपरिक रचना को भरतनाट्यम की शैली में साकार किया गया। चार विभिन्न गतियों में प्रस्तुत इस रचना ने दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई।

अगली प्रस्तुति ‘देवी कौतुकम्’ रही, जिसमें ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती, समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी तथा शक्ति स्वरूपा माँ अम्बा की स्तुतियाँ तीन भिन्न रागों एवं तालों में प्रस्तुत की गईं। इसके बाद प्रस्तुत हिंदी पदम में एक युवती की मनःस्थिति को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया, जो अपनी प्रिय सखी के रूठ जाने से व्यथित है और उसे मनाने का उपाय खोज रही है। दूसरे पदम में वासकसज्जिता नायिका के भावों का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया, जिसमें वह अपने प्रियतम के आगमन की प्रतीक्षा करते हुए उनके साथ बिताए जाने वाले सुखद क्षणों की कल्पना करती है। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक रूप से ‘तिल्लाना’ से हुआ, जो लयात्मकता, ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम था। राग देश में निबद्ध इस रचना के माध्यम से मातृभूमि को भावपूर्ण नमन अर्पित किया गया।

उल्लेखनीय है कि स्मिता महाजन ने स्वयं रचित एवं संगीतबद्ध 75 भरतनाट्यम रचनाओं का तीन खंडों में प्रकाशित ग्रंथ ‘मार्गम उन्मेष’ तैयार किया है। उन्हें 16वीं से 19वीं शताब्दी के तंजावुर भोंसले राजाओं की परंपरा के पश्चात मराठी एवं हिंदी में नृत्य रचनाओं के लेखन और संगीत-सृजन की विशिष्ट परंपरा को आगे बढ़ाने वाली अग्रणी कलाकारों में माना जाता है।

भरतनाट्यम की प्रस्तुति पश्चात शास्त्रीय गायन की सभा सजी। भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट ने अपने सुरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमयी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन कल्याण से किया। इस राग की गरिमा और माधुर्य को स्वर देते हुए एकताल में निबद्ध बड़ा ख़याल “मेरा मन बाँध लीनो रे” एवं तीनताल में छोटा ख़याल “रंग दे रंग रेजवा” प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में राग की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। इसके उपरांत ग्वालियर घराने की समृद्ध और विशिष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए तराना एवं तिरबट की प्रस्तुति दी। तिरबट की विशेषता यह है कि इसमें अर्थपूर्ण शब्दों के स्थान पर तबले और पखावज के बोलों की प्रधानता रहती है, जो लय और स्वर के अद्भुत समन्वय का सृजन करती है। इस क्रम में उन्होंने हमीर, केदार, बहार, दरबारी, अड़ाना और भोपाली जैसी विविध रागों की रंगत प्रस्तुत की, जिन्हें एकताल, तीनताल एवं रूपक ताल में संयोजित किया गया। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन अपने दादा एवं गुरु पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट्ट द्वारा रचित भजन “मोहन की राधा” से किया, जो भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर चैतन्य भट्ट एवं तबले पर रतलाम के युवा तबला वादक तल्लीन त्रिवेदी ने संगत दी। स्वर, लय और भाव के समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध हुई।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया। विश्व संगीत दिवस पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।

 

राष्ट्रपति ने किया चीता कमांड कंट्रोल सेंटर का भ्रमण, चीता प्रदर्शिनी भी देखी

भोपाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो नेशनल उद्यान के दो दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार को चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया। चीता कमांड एवं कण्ट्रोल सेंटर के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को चीतों कि निगरानी और ट्रैकिंग की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान की गयी।

राष्ट्रपति ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर परिसर में चीता प्रोजेक्ट की अभी तक की प्रगति पर लगाई गई प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति मुर्मु को अवगत कराया गया कि वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो में मौजूद है, तीन चीते गाँधी सागर अभयारण्य मंदसौर भेजे गए है।

राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा इस दौरान चीतों के लिए की गई आवश्यक सुविधाओं के विषय में जानकारी ली गई। बताया गया कि हर 2 किलोमीटर पर जंगल में वाटर पिट बनाये गए हैँ जिनमें अवश्यकता अनुसार पानी भरवाया जाता है। इस दौरान उन्हें बोत्सवाना से लाये गए चीतों की गतिविधियों की भी जानकारी दी गयी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्री मुर्मु द्वारा अपनी बोत्सवाना यात्रा के दौरान 8 चीते रिसीव किये गए थे जिन्हें कुनो लाया गया है।

इस दौरान सीसीफ श्री उत्तम कुमार, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, डीएफओ श्री आर थिरूकुराल आदि मौजूद रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु की कूनो हेलीपैड पर हुई आगवानी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय प्रवास पर रविवार को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क पहुंचीं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल भी साथ रहे। इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क स्थित हेलीपैड पर मिनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने आगवनी करते हुए पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान सांसद श्री शिवमंगल सिंह तोमर, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव, पीसीसीएफ श्री शुभरंजन सेन, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल द्वारा भी उनकी आगवनी करते हुए स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति मुर्मु कूनो नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम करेंगी और भारत में चीतों के पुनर्स्थापन की इस महत्वपूर्ण परियोजना के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा भी करेंगी। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किडनी रोगी को दी बड़ी राहत, मंजूर की ₹3.95 लाख की सहायता राशि

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी नेतृत्व में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत जशपुर जिले के गंभीर किडनी रोगी जितेन्द्र कुमार यादव (44 वर्ष) को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री साय ने उनके उपचार एवं किडनी प्रत्यारोपण के लिए 3 लाख 95 हजार 121 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर निवासी जितेन्द्र कुमार यादव गंभीर किडनी रोग से पीड़ित हैं और उन्हें रेनल ट्रांसप्लांट (किडनी प्रत्यारोपण) की आवश्यकता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके परिवार को उपचार कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने त्वरित संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। राज्य नोडल एजेंसी द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह राशि अहमदाबाद (गुजरात) स्थित जी.आर. दोशी एवं के.एम. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी एंड रिसर्च सेंटर में किडनी प्रत्यारोपण, उपचार तथा आवश्यक दवाइयों के लिए मंजूर की गई है।    

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार गंभीर एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि जीवन रक्षक उपचार के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत इस सहायता से मरीज एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से अब आवश्यक उपचार संभव हो सकेगा। यह पहल राज्य सरकार की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

बालाघाट में महिला सरपंच पर जानलेवा हमला, ईंट-लाठियों से पीटा; 5 आरोपी हिरासत में

बालाघाट/परसवाड़ा.

परसवाड़ा थाना के ग्राम चिनी बर्राटोला की महिला सरपंच को गांव से अतिक्रमण हटवाना भारी पड़ गया। इस कार्रवाई से नाराज अतिक्रमणकारियों ने सरपंच प्रमिला उइके पर ईंट व लकड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। जिससे सरपंच सहित अन्य चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

मारपीट की घटना शनिवार शाम पांच बजे की बताई जा रही है। घायलों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसवाड़ा में उपचार करवाया गया। इस मामले में पुलिस ने व्यासमून तिवारी, वेदमून तिवारी, कौशल्या बाई तिवारी, दुर्गा बाई तिवारी और लक्ष्मीपति पांडे को हिरासत में लिया है।

अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था
शुक्रवार को ग्राम चिनी बर्राटोला निवासी व्यासमून तिवारी के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था, जिससे नाराज अतिक्रमणकारी दूसरे दिन सड़क में गड्ढा खोद रहा था। इसकी सूचना पर सरपंच प्रमिला उइके वहां पहुंचीं और अतिक्रमणकारी को समझाने का प्रयास कर रही थीं।

आरोपितों ने मिलकर पीटा
इसी दौरान अतिक्रमणकारी ने महिला सरपंच को ईंट व लकड़ी से मारपीट कर दी। इसके साथ ही बीच-बचाव में आई अन्य महिलाओं को भी आरोपितों ने मिलकर पीटा। मारपीट की घटना में सभी को चोटें आई हैं।

आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा
इस घटनाक्रम से नाराज चिनी के सैकड़ों ग्रामीण थाना परसवाड़ा पहुंचे और आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात्रि तक डटे रहे। घटना को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित सरपंच संघ ने नाराजगी जाहिर की और घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो पूरा सरपंच संघ आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर आरोपितों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

इनका कहना
महिला सरपंच से अतिक्रमणकारी ने मारपीट की है। जिससे सरपंच के चेहरे में चोट आई है। मामले की शिकायत थाना में की गई है। यदि आरोपितों पर न्यायोचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो सरपंच संघ के माध्यम से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
कपूरचंद वरकड़े, सरपंच ग्राम पंचायत लिंगा एवं उपाध्यक्ष, सरपंच संघ बालाघाट।

NEET परीक्षा के बीच PM मोदी का संवेदनशील फैसला, एयरपोर्ट पर किया इंतजार

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए एक संवेदनशील फैसला लिया। उन्होंने NEET परीक्षा के चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर करीब 45 मिनट तक इंतजार किया। पीएम मोदी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि दोपहर 2 बजे नीट परीक्षा आयोजित होनी थी और पीएम के प्रोटोकॉल के हिसाब से जिस जगह काफिला निकलता वहां पर कुछ समय तक ट्रैफिक बाधित हो जाता है। ऐसे में छात्रों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में पीएम मोदी ने 2 बजे तक के लिए एयरपोर्ट पर ही इंतजार का फैसला लिया।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री का काफिला निर्धारित समय एक बजकर 15 मिनट पर रवाना हो सकता था, लेकिन NEET परीक्षा देने जा रहे छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो और उनके आवागमन में बाधा न आए, इसके लिए उन्होंने कुछ समय तक रुकने का निर्णय लिया। इस दौरान सुरक्षा और यातायात से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा गया।

कोलकाता से लौटे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में योग कार्यक्रम और भारतीय नौसेना के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौटे थे।

री-नीट यूजी एग्जाम को लेकर प्रशासन अलर्ट
देशभर में री-नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया और परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अभ्यर्थियों ने कड़ी जांच के बाद परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दीं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नीट परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफल तरीके से आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि किसी भी परिस्थिति में युवाओं और छात्रों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में नीट की दोबारा परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के 127 केंद्रों पर 50,000 से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नीट परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है; नौ केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और प्रश्न पत्रों को पुलिस व आईटीबीपी की सुरक्षा में केंद्रों तक पहुंचाया गया है।

योग दिवस पर अंजय शुक्ला का संदेश, योग को बताया स्वास्थ्य और जीवन संतुलन का आधार

रायपुर
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अंजय शुक्ला, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड तथा प्रदेश संयोजक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ने रविवार सुबह योगाभ्यास कर अपने दिन की शुरुआत की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित एवं स्वस्थ रखने की एक प्राचीन और प्रभावशाली भारतीय पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत तथा आत्मिक रूप से संतुलित रहता है।

शुक्ला ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और समृद्ध भारत की आधारशिला हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए संदेश दिया कि योग को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

“करें योग, रहें निरोग” के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

छत्तीसगढ़ में योग दिवस समारोह, योग को जीवन का हिस्सा बनाने का दिया आह्वान

रायपुर
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत सरिया में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की आत्मा और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।  

डॉ. शर्मा ने कहा कि योग का पहला परिचय धर्म की रक्षा के लिए कुरुक्षेत्र की रणभूमि में ही हुआ था, जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए सांख्य योग के माध्यम से अधर्मी शक्तियों से लड़ने का मार्ग दिखाया था। आज जब हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां वर्ष मना रहे हैं, यह गर्व का विषय है कि एक योग-धर्मी के त्याग, समर्पण और सेवा भाव से योग वैश्विक पहचान पा चुका है।  

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में योग की परिभाषा बदली है। यह अब केवल शारीरिक कसरत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तन और मन के बीच सेतु बनकर व्यक्ति का समग्र विकास करने वाला विज्ञान बन गया है।  

भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड पर बोलते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा, भारत केवल आयु वर्ग के आंकड़ों से युवाओं का देश नहीं कहलाएगा। असली युवाओं का देश वह भारत होगा जो योग से युवा रहेगा। योग शरीर को लचीलापन ही नहीं देता, बल्कि मानसिक दृढ़ता और संतुलन भी देता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धारणा गलत है कि योग केवल युवाओं के लिए है। वास्तविकता यह है कि योग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति युवा हो जाता है। योग युवापन का पर्याय है। जब हम योग से अपने मन और मस्तिष्क को नियंत्रित करना सीख लेते हैं, तब जीवन के हर क्षेत्र में हमारी जवाबदेही और क्षमता बढ़ जाती है। डॉ. शर्मा ने आह्वान किया कि योग को केवल एक दिन का आयोजन न बनाएं, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर घर-घर तक पहुंचाएं। तभी हम एक स्वस्थ, सशक्त और उज्ज्वल भारत का निर्माण कर पाएंगे।

इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष अरुण शराप, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही, पार्षदगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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