महिला कोच में सफर करना पड़ेगा महंगा, पुरुष यात्रियों पर लगेगा ₹2500 तक का जुर्माना

नई दिल्ली

 ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है। 

ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। 

 जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा।

कितना लगेगा जुर्माना?

    अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 
    साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा। 

    वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है। 
    इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
    रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें। 

गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा?
अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं। 

रेलवे ने सख्त किए नियम
रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। 

यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है
सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है।

जमीनी स्तर
वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं।

रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है?
1 जुलाई, 2026
से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा।

क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं?
सामान्यतः
नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।

 

 

कारगिल युद्ध का अनसुना किस्सा: सफेद झंडा, पाकिस्तानी अफसर संग सिगरेट और फिर प्वाइंट 5465 पर फतह

 कारगिल
 कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की। 

यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है। 

17 हजार फीट पर आमना-सामना
जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है। 

जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया
भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले। 

सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत
मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए। 

मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए। 

शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465
बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। 

चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी। 

भारत के बेटे झुकना नहीं जानते
आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

Rules Change From Today: पेट्रोल, LPG, आधार से बैंकिंग तक… आज से बदल गए 10 बड़े नियम

 नई दिल्‍ली

जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है। 

1. एलपीजी के नियमों में बदलाव 
केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है। 

2. LPG के दाम में कटौती 
मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है। 

3. आधार कार्ड अपडेट 
Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था। 

4. रेलवे के नियम
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं। 

5. ITR डेडलाइन 
ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है। 

6. पासपोर्ट फीस 
अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है। 

7. क्रेडिट कार्ड के नियम 
SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों। 

8. कारें हो रहीं महंगी 
जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 

9. पेट्रोल-डीजल के नियम 
भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है। 

10. ईपीएफओ अपडेट 
सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

अल-नीनो का बड़ा खतरा! 2032 तक भारत को 94 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की चेतावनी

नई दिल्ली
अल-नीनो को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है. अनुमान है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94,55,960 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हो सकता है। 

वहीं, पूरी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक नुकसान  का अनुमान है. यह नुकसान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, रोजगार, एनर्जी और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर सकती है और गर्मी बढ़ा सकती है. आने वाले अल-नीनो के दौरान भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई गई है। 

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
एक इंग्लिश अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार अल-नीनो की वजह से भारत में भीषण गर्मी बढ़ सकती है और मानसून कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा. बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और बिजली की मांग भी बढ़ सकती है. इससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। 

2032 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान क्यों?
रिसर्चर्स का कहना है कि अल-नीनो का असर केवल उसी साल तक सीमित नहीं रहता. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कई वर्षों तक धीमी रह सकती है. अनुमान है कि 2032 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह नुकसान 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता है. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं। 

कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां

उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, “हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी ‘जी राम जी’ कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा। 

कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए ‘जी राम जी’ कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके। 

दिल्ली में कब दस्तक देगा?
यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है। 

जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है। 

क्या करना होगा? 
एकस्पर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. इसके लिए बेहतर वेदर फोरकास्ट, समय पर चेतावनी देने वाले सिस्टम, गर्मी सहने वाली फसलों का विकास, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा. इससे अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज दोनों के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला अल-नीनो केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, खेती और लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी और क्लाइमेट के हिसाब से प्लानिंग बनाना फ्यूचर के नुकसान को कम करने के लिए जरूरी होगा। 

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले कर रहे आस्था की वकालत: सीएम योगी

रामपुर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था व विरासत के अपमान पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले कांवड़ यात्रा रोकने, त्योहारों पर बंदिशें लगाने और ‘जय श्रीराम’ बोलने पर लाठी-गोली चलवाते थे, आज वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख आस्था की वकालत कर रहे हैं। जो कांग्रेस प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व को ही नकार चुकी थी, वह भी ‘राम सबके हैं’ कहकर अयोध्या जाने के लिए मचल रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना ‘कालनेमी’ के छल-कपट से करते हुए कहा कि जनता इनके झूठ व दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को रामपुर जनपद के मिलक व बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों की ₹700 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इंटरमीडिएट/हाईस्कूल परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि और मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मानित भी किया।

प्रभु श्रीराम जानते हैं कौन सही और कौन बुरा

सीएम योगी ने कहा कि देखिए रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले रामभक्ति की दुहाई दे रहे हैं, वकालत कर रहे हैं। यह रामभक्तों की, आपके वोटबैंक की ताकत है कि ये पार्टियां आपकी पिछलग्गू बन रही हैं। उन्हें अपने पापों, कर्मों पर पश्चाताप भी होता होगा। लेकिन, प्रभु श्रीराम तो जग नियंता हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उन्हें पता है कि कौन सही है और कौन बुरा। दरअसल, सपा-कांग्रेस को चिढ़ यह है कि अयोध्याधाम, काशी-विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज धाम, नैमिषारण्य, शुक्रतीर्थ इतने सुंदर कैसे हो गए। वे इसे रोकना चाहते थे, नहीं कर सके तो चिढ़ गए। कुछ नहीं मिला तो झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने लगे।

कांग्रेस-सपा का शासन अन्याय का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा शासनकाल अन्याय व अराजकता का प्रतीक रहा है। 2017 से पहले सपा की निरंकुश सत्ता में रामपुर के गरीबों और बाल्मीकि समुदाय की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जाता था और उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। विकास केवल सैफई व रामपुर के दो परिवारों तक सीमित था, जबकि बाकी जनता को विकास से वंचित रखा जाता था। बिजली देने में भी ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई जाती थी, जिससे सैफई में बिजली आती थी लेकिन पीलीभीत व रामपुर जैसे क्षेत्र अंधेरे में रहते थे। जनता जनार्दन ने इस अन्यायी सत्ता को पलट कर पूरे राज्य में संदेश दिया। डबल इंजन सरकार में ‘पिक एंड चूज’ नहीं होता। बिजली सभी 75 जनपदों में आएगी। जहां भी आवश्यकता थी, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई दिए। अब कोई विकास नहीं रोक सकता, नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, बहन-बेटी का अपमान नहीं कर सकता।
 
वसूली पर निकल पड़ती थी चाचा-भतीजा की जोड़ी
सीएम योगी ने कहा कि सपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते उद्योग बंद होते गए। अन्नदाता किसान हताश होकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। न तो गरीब कल्याण के लिए कोई योजना थी और न विकास कार्यों के लिए धन। युवाओं के भविष्य से जमकर खिलवाड़ किया गया। अराजकता का यह हाल था कि कोई सरकारी विज्ञापन निकलता था तो ‘चाचा-भतीजा की जोड़ी’ वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कोर्ट को भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। सपा व कांग्रेस के इन्हीं पापों से यूपी बीमारू बना था।

विरासत और विकास का नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर की पावन धरा भगवान बामेश्वर महादेव, श्री पातलेश्वर महादेव, ओम नागेश्वर महादेव, कोसी मंदिर व मां बाला सुंदरी के दिव्य आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित है। सरकार इन पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत स्थलों के पुनरुद्धार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 2017 से पहले जहां त्योहारों पर रोक लगाई जाती थी। उपद्रव व दंगे होते थे, वहीं आज कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली, रामनवमी व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे सभी पर्व पूरी भव्यता व सुरक्षा के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या नगरी ब्रॉडगेज डबल रेलवे लाइन, फोर-लेन सड़क मार्ग और महर्षि बाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़कर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।

आर्थिक प्रगति व इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं रहा, बल्कि यह भारत की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन चुका है। प्रदेश आज युवाओं को रोजगार और अन्नदाताओं को अनुदान देने में अग्रणी है। हम खाद्यान्न, दुग्ध, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में देश में पहले या दूसरे नंबर पर गिने जाते हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना के माध्यम से रामपुर के पैच वर्क, जरी वर्क, वायलिन निर्माण व मेंथा उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान और युवाओं को नए रोजगार मिले हैं। रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का दुरुपयोग समाजवादी पार्टी जनता की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें प्रताड़ित करने में करती थी, लेकिन डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा में काम आ रहा है।

रामपुर में चौतरफा विकास

सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर-शामली नया इकोनॉमिक कॉरिडोर रामपुर से होकर गुजरेगा, जो गोरखपुर को सिलीगुड़ी और शामली को पानीपत से जोड़कर क्षेत्र में विकास को और मजबूत करेगा। रामपुर में ढांचागत विकास को गति देते हुए 3 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 व 10 मीटर और फोर-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल के पुनरुद्धार व विस्तारीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट आते ही सरकार वित्तीय राशि जारी करेगी।

सबका साथ-सबका विकास ही मूलमंत्र

 मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन की सरकार तुष्टिकरण के बजाय आमजन के संतुष्टिकरण पर विश्वास करती है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स को राज्य सरकार द्वारा ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है। हर महीने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से लखनऊ से सीधे मॉनिटरिंग कर गरीबों को शत-प्रतिशत राशन मिल रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर 2017 से पहले सपना था, आज हर गरीब के पास सिलेंडर अपना है। गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख का स्वास्थ्य कार्ड मिला है। कार्ड न होने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए संपूर्ण राशि दी जा रही है। प्रत्येक तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के माध्यम से इंटर कॉलेजों को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

निवेश प्रस्तावों से मिली उद्योगों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत का सम्मान हो या नौजवानों को नौकरी देने का संकल्प, सरकार हर मोर्चे पर प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों के नियुक्ति पत्र वितरण में रामपुर के युवाओं का नाम देखकर संतोष मिलता है। पहले जो युवा वंचित थे, आज प्रदेश की सेवाओं में चयनित होकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। रामपुर, मिलक, बिलासपुर, स्वार व चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों के युवा आज सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अवसर पा रहे हैं। निवेश प्रस्तावों से उद्योगों को गति मिली है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, विधायक श्रीमती राजबाला सिंह, आकाश सक्सेना, शफीक अहमद अंसारी, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, हरी सिंह ढिल्लो, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, सूर्य प्रकाश पाल, पूर्व सांसद घनश्याम लोधी, पूर्व विधायक शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान में बलरामपुर-रामानुजगंज बना छत्तीसगढ़ का अग्रणी जिला

रायपुर 

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिलाओं को भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य आबादी के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।

कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया।
कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए हैं।

दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों वाला बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के जनकल्याणकारी विजन, मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर 

देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान
     
योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ
        
छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त 

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना
            
वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।
      
विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। इनमें 20 अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। 

बैठक में अनुमोदित 156 खिलाड़ियों की सूची को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इसे अधिसूचित करने के बाद खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ होगी। राज्य के खिलाड़ी लंबे समय से इस सूची की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री  साय की अध्यक्षता में आज हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद खिलाड़ियों का यह इंतजार जल्द समाप्त हो जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चयनित उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पात्रता के अनुरूप उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों का अनुभव और उपलब्धियां प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, इसलिए उनकी सेवाओं का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो, उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से खेल गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा खेल प्रतिभाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास तथा नई खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज चयनित खिलाड़ी भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए पूर्व में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया।

बैठक में वन मंत्री  केदार कश्यप, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक  तनुजा सलाम उपस्थित थीं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा में भारतीयता का होगा नवोदय: राज्यपाल पटेल

भोपाल 

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भारतीयता का समावेश विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला है। भारतीय संस्कृति, संस्कार और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन से आत्मनिर्भर, संस्कारित और विकसित भारत का निर्माण होगा।

राज्यपाल  पटेल मंगलवार को उज्जैन की कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में पीएचडी की 21 उपाधियों के साथ ही कुल 1 हजार 303 उपाधियां प्रदान की गई। विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक तथा 13 कांस्य पदक, कुल 42 पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल  पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का केन्द्र हमारा देश था। विदेशों से अध्ययन के लिए विद्यार्थी आते थे। आज हमारे बच्चे विदेश जा रहे है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा से विकसित भारत @2047 बनाने की पहल की है। विकसित भारत में बच्चों को शिक्षा के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि संस्कृत की पहचान विश्व में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी पहल करें क्योंकि अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत के माध्यम से ही संभव हो सकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ग्रंथों के अध्ययन के लिए बच्चों को प्रेरित और संस्कारित आचरण की वैज्ञानिकता के बारे में बताने की भी जरूरत बताई है।

राज्यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता के बाद भी अपने माता-पिता को कभी नहीं भूलें, क्योंकि उनकी बदौलत ही हमारा जीवन है। राज्यपाल  पटेल ने माता-पिता के प्रति सम्मान, भारतीय परंपराओं के प्रति आस्था तथा चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज घरों में ‘मातृ छाया’ और ‘पितृ छाया’ लिखा तो होता है, लेकिन घरों में बुजुर्ग माता-पिता नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहती है। संस्कृति संरक्षण से ही भारत को विकसित बनाने का स्वप्न साकार होगा।

भारत होगा दुनिया को उर्जा की पूर्ति करने वाला केंद्र

उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति की वैज्ञानिकता को समझा था। उदाहरण देते हुए बताया कि सौर मंडल में सूर्य की शक्ति की वैज्ञानिकता का प्रतीक सूर्य देव को प्रणाम करने और अर्ध्य देने की परंपराएं है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में उर्जा को लेकर विवाद हो रहा है। वर्ष 2047 तक भारत दुनिया की उर्जा पूर्ति का केन्द्र और विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम् पुणे के संस्थापक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को महामहोपाध्याय (डी.लिट.) और  लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को विद्यावाचस्पति (डी.लिट.)की मानद उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति निवास वरखेड़ी ने दिया। कार्यक्रम को स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने भी संबोधित किया। कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियां बताई। समारोह का संचालन डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया और आभार कुल सचिव डॉ. दिलीप सोनी ने माना।

समारोह के प्रारंभ में अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई। राष्ट्रगान, विश्वविद्यालय कुलगान का गायन हुआ। राज्यपाल सहित सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

दीक्षांत समारोह में सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी संत  उमेश नाथ महाराज, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, कार्य परिषद् के सदस्य  गौरव धाकड़, डॉ. विश्वास व्यास, डॉ. हरीश व्यास, एडवोकेट गीतांजलि चौरसिया, डॉ. केशर सिंह चौहान एवं विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष और विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

भोपाल मेट्रो के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से करें काम : आयुक्त भोंडवे

भोपाल

भोपाल मेट्रो परियोजना प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों का आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। विभागीय स्तर पर लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करते हुए आपसी समन्वय के साथ कार्यों में गति लाई जाए जिससे नागरिकों को शीघ्र आधुनिक, सुरक्षित एवं सुगम मेट्रो परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने मंगलवार को भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के सुचारू संचालन के लिये विभिन्न विभागों के साथ स्टेकहोल्डर्स कोऑर्डिनेशन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता सामूहिक उत्तरदायित्व और अंतर-विभागीय सामंजस्य पर ही निर्भर है।

आयुक्त  भोंडवे द्वारा मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की विस्तृत समीक्षा और विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित बैठक में मेट्रो परियोजना से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना जैसे सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों, जल निकासी तथा ड्रेनेज की सघन सफाई पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्षा ऋतु के दृष्टिगत संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में नागरिकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही परियोजना के मार्ग में आने वाले अतिक्रमणों को हटाने, सीवर एवं पेयजल पाइपलाइन की शिफ्टिंग, विभिन्न उपयोगिता सेवाओं (यूटिलिटी सर्विसेज) के त्वरित स्थानांतरण तथा होर्डिंग्स एवं वृक्षों के वैज्ञानिक विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भी गहन समीक्षा की गई। आयुक्त  भोंडवे ने लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित विभागों को तत्परता से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जिससे निर्माण कार्य में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्माण अवधि के दौरान सुगम यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच संवाद को अधिक जीवंत व निरंतर बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

बैठक में भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के वरिष्ठ अधिकारियों सहित आयुक्त नगर निगम भोपाल, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, एनएचएआई एवं एमएसएमई विभाग के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

 

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