मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किडनी रोगी को दी बड़ी राहत, मंजूर की ₹3.95 लाख की सहायता राशि

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी नेतृत्व में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत जशपुर जिले के गंभीर किडनी रोगी जितेन्द्र कुमार यादव (44 वर्ष) को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री साय ने उनके उपचार एवं किडनी प्रत्यारोपण के लिए 3 लाख 95 हजार 121 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर निवासी जितेन्द्र कुमार यादव गंभीर किडनी रोग से पीड़ित हैं और उन्हें रेनल ट्रांसप्लांट (किडनी प्रत्यारोपण) की आवश्यकता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके परिवार को उपचार कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने त्वरित संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। राज्य नोडल एजेंसी द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह राशि अहमदाबाद (गुजरात) स्थित जी.आर. दोशी एवं के.एम. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी एंड रिसर्च सेंटर में किडनी प्रत्यारोपण, उपचार तथा आवश्यक दवाइयों के लिए मंजूर की गई है।    

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार गंभीर एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि जीवन रक्षक उपचार के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत इस सहायता से मरीज एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से अब आवश्यक उपचार संभव हो सकेगा। यह पहल राज्य सरकार की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

बालाघाट में महिला सरपंच पर जानलेवा हमला, ईंट-लाठियों से पीटा; 5 आरोपी हिरासत में

बालाघाट/परसवाड़ा.

परसवाड़ा थाना के ग्राम चिनी बर्राटोला की महिला सरपंच को गांव से अतिक्रमण हटवाना भारी पड़ गया। इस कार्रवाई से नाराज अतिक्रमणकारियों ने सरपंच प्रमिला उइके पर ईंट व लकड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। जिससे सरपंच सहित अन्य चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

मारपीट की घटना शनिवार शाम पांच बजे की बताई जा रही है। घायलों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसवाड़ा में उपचार करवाया गया। इस मामले में पुलिस ने व्यासमून तिवारी, वेदमून तिवारी, कौशल्या बाई तिवारी, दुर्गा बाई तिवारी और लक्ष्मीपति पांडे को हिरासत में लिया है।

अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था
शुक्रवार को ग्राम चिनी बर्राटोला निवासी व्यासमून तिवारी के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था, जिससे नाराज अतिक्रमणकारी दूसरे दिन सड़क में गड्ढा खोद रहा था। इसकी सूचना पर सरपंच प्रमिला उइके वहां पहुंचीं और अतिक्रमणकारी को समझाने का प्रयास कर रही थीं।

आरोपितों ने मिलकर पीटा
इसी दौरान अतिक्रमणकारी ने महिला सरपंच को ईंट व लकड़ी से मारपीट कर दी। इसके साथ ही बीच-बचाव में आई अन्य महिलाओं को भी आरोपितों ने मिलकर पीटा। मारपीट की घटना में सभी को चोटें आई हैं।

आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा
इस घटनाक्रम से नाराज चिनी के सैकड़ों ग्रामीण थाना परसवाड़ा पहुंचे और आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात्रि तक डटे रहे। घटना को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित सरपंच संघ ने नाराजगी जाहिर की और घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो पूरा सरपंच संघ आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर आरोपितों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

इनका कहना
महिला सरपंच से अतिक्रमणकारी ने मारपीट की है। जिससे सरपंच के चेहरे में चोट आई है। मामले की शिकायत थाना में की गई है। यदि आरोपितों पर न्यायोचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो सरपंच संघ के माध्यम से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
कपूरचंद वरकड़े, सरपंच ग्राम पंचायत लिंगा एवं उपाध्यक्ष, सरपंच संघ बालाघाट।

NEET परीक्षा के बीच PM मोदी का संवेदनशील फैसला, एयरपोर्ट पर किया इंतजार

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए एक संवेदनशील फैसला लिया। उन्होंने NEET परीक्षा के चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर करीब 45 मिनट तक इंतजार किया। पीएम मोदी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि दोपहर 2 बजे नीट परीक्षा आयोजित होनी थी और पीएम के प्रोटोकॉल के हिसाब से जिस जगह काफिला निकलता वहां पर कुछ समय तक ट्रैफिक बाधित हो जाता है। ऐसे में छात्रों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में पीएम मोदी ने 2 बजे तक के लिए एयरपोर्ट पर ही इंतजार का फैसला लिया।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री का काफिला निर्धारित समय एक बजकर 15 मिनट पर रवाना हो सकता था, लेकिन NEET परीक्षा देने जा रहे छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो और उनके आवागमन में बाधा न आए, इसके लिए उन्होंने कुछ समय तक रुकने का निर्णय लिया। इस दौरान सुरक्षा और यातायात से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा गया।

कोलकाता से लौटे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में योग कार्यक्रम और भारतीय नौसेना के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौटे थे।

री-नीट यूजी एग्जाम को लेकर प्रशासन अलर्ट
देशभर में री-नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया और परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अभ्यर्थियों ने कड़ी जांच के बाद परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दीं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नीट परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफल तरीके से आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि किसी भी परिस्थिति में युवाओं और छात्रों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में नीट की दोबारा परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के 127 केंद्रों पर 50,000 से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नीट परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है; नौ केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और प्रश्न पत्रों को पुलिस व आईटीबीपी की सुरक्षा में केंद्रों तक पहुंचाया गया है।

योग दिवस पर अंजय शुक्ला का संदेश, योग को बताया स्वास्थ्य और जीवन संतुलन का आधार

रायपुर
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अंजय शुक्ला, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड तथा प्रदेश संयोजक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ने रविवार सुबह योगाभ्यास कर अपने दिन की शुरुआत की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित एवं स्वस्थ रखने की एक प्राचीन और प्रभावशाली भारतीय पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत तथा आत्मिक रूप से संतुलित रहता है।

शुक्ला ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और समृद्ध भारत की आधारशिला हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए संदेश दिया कि योग को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

“करें योग, रहें निरोग” के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

छत्तीसगढ़ में योग दिवस समारोह, योग को जीवन का हिस्सा बनाने का दिया आह्वान

रायपुर
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत सरिया में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की आत्मा और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।  

डॉ. शर्मा ने कहा कि योग का पहला परिचय धर्म की रक्षा के लिए कुरुक्षेत्र की रणभूमि में ही हुआ था, जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए सांख्य योग के माध्यम से अधर्मी शक्तियों से लड़ने का मार्ग दिखाया था। आज जब हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां वर्ष मना रहे हैं, यह गर्व का विषय है कि एक योग-धर्मी के त्याग, समर्पण और सेवा भाव से योग वैश्विक पहचान पा चुका है।  

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में योग की परिभाषा बदली है। यह अब केवल शारीरिक कसरत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तन और मन के बीच सेतु बनकर व्यक्ति का समग्र विकास करने वाला विज्ञान बन गया है।  

भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड पर बोलते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा, भारत केवल आयु वर्ग के आंकड़ों से युवाओं का देश नहीं कहलाएगा। असली युवाओं का देश वह भारत होगा जो योग से युवा रहेगा। योग शरीर को लचीलापन ही नहीं देता, बल्कि मानसिक दृढ़ता और संतुलन भी देता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धारणा गलत है कि योग केवल युवाओं के लिए है। वास्तविकता यह है कि योग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति युवा हो जाता है। योग युवापन का पर्याय है। जब हम योग से अपने मन और मस्तिष्क को नियंत्रित करना सीख लेते हैं, तब जीवन के हर क्षेत्र में हमारी जवाबदेही और क्षमता बढ़ जाती है। डॉ. शर्मा ने आह्वान किया कि योग को केवल एक दिन का आयोजन न बनाएं, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर घर-घर तक पहुंचाएं। तभी हम एक स्वस्थ, सशक्त और उज्ज्वल भारत का निर्माण कर पाएंगे।

इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष अरुण शराप, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही, पार्षदगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मृतक शिक्षाकर्मी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से इनकार गलत, हाईकोर्ट का अहम फैसला

बिलासपुर.

हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि यदि दिवंगत पंचायत शिक्षक का आश्रित शिक्षक पद की अनिवार्य योग्यता नहीं रखता, तो केवल इस आधार पर उसकी अर्जी खारिज करना अनुचित है।

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने दुर्ग जिला पंचायत के पुराने आदेश को रद्द करते हुए प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार किसी भी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करें। याचिकाकर्ता राकेश कुमार वर्मा (30 वर्ष) के पिता चमन लाल वर्मा दुर्ग जिले में ‘सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर कार्यरत थे।

15 अक्टूबर 2015 को उनके आकस्मिक निधन के बाद राकेश ने 23 सितंबर 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसे 30 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि याचिकाकर्ता के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि विभाग की अनुकंपा नीतियां लगातार बदलती रहीं। 2014 में दिवंगत शिक्षक के आश्रित को सीधे सहायक शिक्षक बनाया जा सकता था, जबकि 2016 में नियम बदलकर ””ग्राम पंचायत सचिव”” के रिक्त पद पर नियुक्ति का प्रावधान किया गया।

हाई कोर्ट ने जिला पंचायत के आदेश को कानूनन गलत पाया और कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को संकट से उबारना है। अदालत ने चार महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

MP में शिक्षकों के तबादलों में ई-अटेंडेंस बनी बाधा, 90% स्कूलों के पद पोर्टल पर ‘रिजर्व’

भोपाल.

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले ही शिक्षकों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को स्थानांतरण पोर्टल पर रिजर्व दर्शाए जाने से हजारों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं पोर्टल पर आवेदन की तैयारी कर रहे अनेक शिक्षकों को 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि दो दिन पहले तक पोर्टल पर जो पद रिक्त दिखाई दे रहे थे, वे अब उपलब्ध सूची से गायब हो गए हैं। इससे उन्हें वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे अपनी पसंद के स्थानों के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। कई शिक्षकों को पोर्टल पर यह संदेश भी मिल रहा है कि उनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम होने के कारण वे आवेदन के पात्र नहीं हैं।

पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि जब तक स्थानांतरण आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो जाती और सभी पात्र शिक्षकों को विकल्प चयन का अवसर नहीं मिल जाता, तब तक रिक्त पदों को रिजर्व या भरा हुआ दर्शाना उचित नहीं है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को रिजर्व दिखाए जाने से ऐसे शिक्षक प्रभावित होंगे जो वर्षों से पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य आवश्यक कारणों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी पसंद के स्थानों का चयन करने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

नियमों में संशोधन की मांग
शिक्षक संगठनों ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण पोर्टल पर सभी वास्तविक रिक्त पदों को प्रदर्शित किया जाए तथा आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पद को अनावश्यक रूप से रिजर्व न रखा जाए। साथ ही, स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में संशोधन करते हुए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त समाप्त करने और जनगणना ड्यूटी में संलग्न शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए पात्र घोषित करने की मांग की गई है।

ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो
90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो, साथ ही जनगणना वाले शिक्षकों को भी मौका दिया जाए। यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होंगे।
– उपेन्द्र कौशल,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,शासकीय शिक्षक संगठन।

जनगणना कार्य के बाद कार्यमुक्त
जनगणना कार्य करने वाले शिक्षकों को स्थानांतरण से वंचित करना उनके साथ अन्याय है। यदि शासन को जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका हो, तो स्थानांतरण आदेश में यह शर्त जोड़ी जा सकती है कि संबंधित शिक्षक को जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद ही कार्यमुक्त किया जाए। नीति में संशोधन किया जाए।
– जगदीश यादव, प्रांताध्यक्ष,राज्य शिक्षक संघ।

PNG कनेक्शन वालों के लिए बड़ा नियम, 30 दिन में LPG कनेक्शन सरेंडर जरूरी

नई दिल्ली
अगर आप लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, केंद्र सरकार ने नया नियम लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लिया जाएगा, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी (LPG) कनेक्शन सरेंडर करना होगा। यह नियम इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के ग्राहकों पर लागू होगा। इसका मकसद डुप्लिकेट कनेक्शन खत्म करना, सब्सिडी को बेहतर बनाना और सिलेंडर की सप्लाई को उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भेजना है जहां पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है।

30 दिन में कनेक्शन सरेंडर करने का नियम
बीते मई महीने में सरकार ने LPG (सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन का नियमन) संशोधन आदेश, 2026′ को जारी किया था। इन संशोधित नियमों के तहत जो परिवार PNG कनेक्शन लेते हैं, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना मौजूदा LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। अगर उदाहरण से समझें तो अगर कोई परिवार 1 जून को PNG कनेक्शन लेता तो उसे 1 जुलाई तक अपना LPG अकाउंट बंद करना होगा। अगर इस समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो LPG रिफिल पर रोक लग सकती है और अकाउंट बंद भी किया जा सकता है।

किसे मिलेगा ट्रांसफर वाउचर ?
हालांकि, नौकरी या पढ़ाई के कारण एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष प्रावधान भी किया है। ऐसे उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने के बाद ट्रांसफर वाउचर दिया जाएगा। इसके तहत जहां PNG सुविधा नहीं होगी वहां पर एलपीजी कनेक्शन दोबारा हासिल करने में मदद करेगा। इससे किरायेदारों, छात्रों, प्रवासी कर्मचारियों और ट्रांसफरेबल जॉब करने वाले लोगों की बड़ी चिंता दूर होने की उम्मीद है। वर्तमान नियमों के तहत उपभोक्ता अपनी श्रेणी और क्षेत्र के अनुसार 25 दिन, 35 दिन या 45 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक करा सकते हैं।

इस बीच, खबर है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां उन ग्राहकों की पहचान करने के लिए डेटाबेस की सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं जिनके पास दोनों तरह के कनेक्शन हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह से PNG पर स्विच करने के लिए कहा जा सके, जहां नेटवर्क मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि डुप्लीकेट कनेक्शन खत्म करने से कालाबाजारी रुकती है, सब्सिडी वाले कमर्शियल सिलेंडर के दुरुपयोग को रोका जा सकता है और पूरी तरह से LPG पर निर्भर घरों के लिए ईंधन वितरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

नए नियम के तहत अब डिलीवरी एजेंट के सिलेंडर सौंपने से पहले, ग्राहकों को अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा गया वैलिड वन-टाइम पासवर्ड (OTP) बताना होगा।

बांस के ट्री गार्ड निर्माण से आत्मनिर्भर बनेंगी सुकमा की 53 दीदियां

सुकमा/रायपुर.

बांस के उपयोग को बढ़ावा देने और इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय के नए साधन अर्जित करने के लिए एक नवाचार के तहत महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जा रहा है l

सुकमा जिले के तोंगपाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 स्व-सहायता समूहों की 53 महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है।

बांस आधारित उत्पाद निर्माण की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड बनाने की तकनीक, डिजाइन और गुणवत्ता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में टिकाऊ और उपयोगी ट्री गार्ड तैयार किए जा सकते हैं।

पौधों की सुरक्षा में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
प्रशिक्षण के बाद स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले बांस के ट्री गार्डों का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, सार्वजनिक स्थलों एवं विभिन्न पौधारोपण स्थलों पर किया जाएगा। इससे पौधों को पशुओं और अन्य संभावित नुकसान से सुरक्षा मिलेगी तथा हरित आवरण बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर
बांस से निर्मित ट्री गार्डों की बढ़ती मांग महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत बनेगी। इससे स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं अतिरिक्त आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायक होगी।

‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा
यह पहल केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की योजनाओं के अनुरूप है। बांस आधारित आजीविका गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं ‘लखपति दीदी’ अभियान के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी।

महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण
तोंगपाल में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ हरित एवं समृद्ध समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

योग को जीवनशैली में शामिल करें, स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर बढ़ें: राज्यपाल रमन डेका

रायपुर.

राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित योग शिविर में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संदेश का वाचन किया एवं सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने बारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा कि यह हर्ष का विषय है कि पूरा छत्तीसगढ़ इस ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रहा है। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध रहने की कामना की। डेका ने प्रदेशवासियों से कहा कि योग को जीवनशैली में शामिल करें, प्रतिदिन योगाभ्यास की आदत बनाए और बच्चों को भी इसकी आदत डाले जिससे उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और वे  भविष्य में देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मन और भावनाओं को सुदृढ़ बनाकर व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर डेका ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।  योगाभ्यास कार्यक्रम में विधायकगण पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, सुनील सोनी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव विकास शील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, पुलिस कमिश्नर रायपुर संजीव शुक्ला, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुए।

बलरामपुर में हजारों लोगों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बलरामपुर जिले में “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम के साथ व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल के हाई स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले की प्रभारी मंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सहभागिता करते हुए विभिन्न योगासनों एवं प्राणायाम का अभ्यास किया तथा नागरिकों को नियमित योग अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। आज विश्व के अनेक देशों में योग को स्वास्थ्य, संतुलन और मानव कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का विज्ञान है। योग और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं तथा यह व्यक्ति को स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन की दिशा प्रदान करते हैं।

योग हमारी सांस्कृतिक विरासत और स्वस्थ जीवन का आधार है : ओ.पी. चौधरी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय स्थित भीमा तालाब के जाज्वल्य देव द्वार परिसर में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों के सदस्यों तथा नागरिकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में भाग लिया। इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने जिलेवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों के कारण योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को अपना रही है। उन्होंने कहा कि योग “विकास भी, विरासत भी” की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है, जिसने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया है।

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