जबलपुर में बदहाल सड़क बनी काल, 2 किमी पैदल चलने के बाद गर्भवती और अजन्मे बच्चे की मौत

जबलपुर.

स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जबलपुर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने व्यवस्था की संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर सीमा से लगे एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड की ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क की बदहाली एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जिंदगी पर भारी पड़ गई।

समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण 22 वर्षीय ममता कुशवाहा और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता की कहानी है, जो विकास के दावे तो करती है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाती।

प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन रास्ता बना सबसे बड़ी बाधा
शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात महीने की गर्भवती ममता कुशवाहा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय उनके पति अमन कुशवाहा मजदूरी के लिए घर से बाहर गए हुए थे। घर पर मौजूद जेठानी ने तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन कॉलोनी तक पहुंचने वाली सड़क कीचड़, गड्ढों और खराब हालात के कारण वाहन चालकों ने अंदर आने से मना कर दिया। दर्द से कराह रही ममता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। मजबूरी में उन्हें जेठानी के सहारे पैदल ही मुख्य सड़क तक जाना पड़ा। करीब दो किलोमीटर का यह सफर उनके लिए किसी यातना से कम नहीं था। हर कदम के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था और समय हाथ से निकलता जा रहा था।

अस्पतालों के बीच दौड़ती रही जिंदगी
मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद किसी तरह ऑटो मिला और ममता को लेडी एल्गिन अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए तुरंत नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचने की इस जद्दोजहद में कीमती समय निकल चुका था। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। कुछ ही देर बाद ममता ने भी अंतिम सांस ले ली। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

अब सवालों के घेरे में व्यवस्था
ब्रजपुरी कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र की खराब सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ममता और उसके अजन्मे बच्चे की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विकास के दावे तब किस काम के हैं, जब एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़े और उसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़े।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में बांटे गोल्ड मेडल

जबलपुर.

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह रविवार को उस समय ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में पहुंचकर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह और गरिमा का माहौल था।

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। सर्किट हाउस से विश्वविद्यालय तक पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही। समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। राष्ट्रपति के पहुंचते ही परिसर में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

शोभायात्रा और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें मंचासीन अतिथि शामिल हुए। इसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर 36वें दीक्षांत समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। कुलगान और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं।

कुलगुरु ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां
दीक्षांत भाषण की शुरुआत करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन किया। उन्होंने कहा कि 24 जून को रानी दुर्गावती का 462वां बलिदान दिवस है और विश्वविद्यालय उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। कुलगुरु ने बताया कि 23 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने विश्वविद्यालय को ‘ए’ ग्रेड प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मात्र 0.04 अंक से ‘ए++’ ग्रेड हासिल करने से चूक गया। इसके बावजूद यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है।

रोजगारोन्मुखी शिक्षा और डिजिटल सुधारों पर जोर
प्रो. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में कई नवाचार लागू किए गए हैं। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से 10 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 घंटे में 28 परीक्षा परिणाम घोषित कर एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

‘भारत’ शब्द को बनाया पहचान का हिस्सा
अपने संबोधन में कुलगुरु ने एक विशेष पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द का उपयोग प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।

मेधावियों को मिला राष्ट्रपति के हाथों सम्मान
समारोह के अंतिम चरण में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न संकायों के चयनित विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कर सम्मानित किया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह क्षण जीवनभर की याद बन गया। पूरे समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गूंज और उपलब्धियों के उत्सव से सराबोर नजर आया।

अमेरिका में योग दिवस का भव्य आयोजन, भारत की पहल बनी वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन

वॉशिंगटन
 टेक्सास के पार्कों और न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर राज्य विधानसभाओं और गवर्नर के ऑफिस तक, इस हफ्ते के अंत में पूरे अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। यह दिखाता है कि भारत में शुरू हुई यह परंपरा अब एक देशव्यापी स्वास्थ्य कल्याण आंदोलन बन गई और इसे आम लोगों में कितना पसंद किया जा रहा है। इस साल का थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रहा, जिसमें निवारक स्वास्थ्य देखभाल, सक्रिय जीवनशैली और मानसिक कल्याण पर विशेष जोर दिया गया।

अमेरिका में भारत की सांस्कृति पहचान
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के एक दशक से अधिक समय बाद अब इसका आयोजन पूरे अमेरिका में व्यापक स्तर पर किया जाता है। देशभर के पार्कों, विश्वविद्यालयों, सामुदायिक केंद्रों, सार्वजनिक स्थलों और सरकारी संस्थानों में योग दिवस मनाया जाता है। करोड़ों अमेरिकी नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं और यह अमेरिका में भारत की सांस्कृतिक पहचान तथा प्रभाव के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक बन चुका है। सबसे बड़े समारोह में से एक, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को टेक्सास के शुगर लैंड में हुआ।

यहां कॉन्सुल जनरल डी.सी. मंजूनाथ, हिंदू स्वयंसेवक संघ और हिंदू युवा के एक इवेंट के लिए ब्रेजोस रिवर पार्क में मेयर कैरल मैककचियन के साथ शामिल हुए। इस इवेंट में लोग, चुने हुए अधिकारी और योग के शौकीन लोग आउटडोर योग सत्र और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए इकट्ठा हुए। मंजूनाथ ने “होलिस्टिक हेल्थ, वेल-बीइंग और तालमेल” को बढ़ावा देने में योग की भूमिका के बारे में बात की। न्यूयॉर्क में, भारत के महावाणिज्यदूत ने मुख्य कार्यक्रम से पहले सेंट्रल पार्क में एक योग सत्र आयोजित किया। इसे “जबरदस्त ऊर्जा वाली शाम” बताते हुए, महावाणिज्यदूत ने कहा कि यह इवेंट न्यूयॉर्क शहर के बीचों-बीच वेलनेस का जश्न मनाता है।

टाइम्स स्कावयर में बड़े आयोजन की तैयारी
हर वर्ष आयोजित होने वाले ‘सोल्स्टिस इन टाइम्स स्क्वायर’ कार्यक्रम में इस बार हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह आयोजन उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसके तहत जून महीने में दुनिया के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में से एक टाइम्स स्क्वायर को खुले आसमान के नीचे एक विशाल योग स्टूडियो में बदल दिया जाता है। वाशिंगटन डीसी में, भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को लिंकन मेमोरियल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व किया। सैकड़ों योग के शौकीन लोग नेशनल मॉल के पीछे वाली जगह में “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” थीम पर एक सामूहिक योग सत्र के लिए इकट्ठा हुए।

इस इवेंट में डिप्लोमैट, कानून बनाने वाले, कम्युनिटी लीडर, योग करने वाले और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य शामिल हुए, जिससे पूरे अमेरिका में योग की बढ़ती अपील पर जोर दिया गया।

न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में योग दिवस का प्रस्ताव
इस वर्ष के आयोजनों को अमेरिकी लॉमेकर्स और सरकारी अधिकारियों से व्यापक मान्यता मिली है। न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट ने सीनेटर शेली मेयर द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव ‘जे1895’ को सर्वसम्मति से पारित किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से गवर्नर कैथी होचुल से 21 जून 2026 को न्यूयॉर्क राज्य में आधिकारिक तौर पर ‘योग दिवस’ घोषित करने का आह्वान किया गया है। पारित प्रस्ताव में प्राचीन भारत में योग की ऐतिहासिक जड़ों, अमेरिकी नागरिकों के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता और मानसिक तनाव को कम कर समग्र स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा देने में इसके लाभों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में योग दिवस का एक प्रस्ताव पेश किया गया। यह इस साल किसी स्टेट गवर्नमेंट द्वारा योग दिवस को मिले सबसे बड़े आधिकारिक समर्थन में से एक को दर्शाता है। डेलावेयर के गवर्नर मैथ्यू मेयर (मैट मेयर) ने 21 जून 2026 को आधिकारिक रूप से अपने प्रांत में ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने का घोषणापत्र जारी किया है।

पूरे अमेरिका में योग को लेकर कार्यक्रम
इसके अलावा, कैलिफोर्निया में, रेडलैंड्स शहर ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए समर्थन जताया। वहीं कई दूसरी नगर पालिकाओं ने स्थानीय समारोह के साथ-साथ इसकी सराहना करते हुए समर्थन जताया। वेस्ट कोस्ट पर, सैन फ्रांसिस्को के क्रिसी मैदान में गोल्डन गेट ब्रिज के पास योग दिवस मनाया गया। भारतीय डिप्लोमेटिक मिशन और सामुदायिक संगठन ने लॉस एंजिल्स, सिएटल और पैसिफिक नॉर्थवेस्ट के दूसरे शहरों में योग कार्यक्रम आयोजित किए। शिकागो, अटलांटा, मियामी, डेनवर, डेट्रॉइट, बोस्टन और देश भर के यूनिवर्सिटी कैंपस में भी सामुदायिक योग सत्र की जानकारी सामने आईं।

योग दिवस के अवसर पर आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में न्यूयॉर्क के हेम्पस्टेड स्थित वैदिक हेरिटेज हनुमान मंदिर में ‘ए लोटस इन द मड’ मैगजीन की तरफ से आयोजित भक्ति-आधारित योग कार्यक्रम भी शामिल रहा। इस आयोजन में 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ध्यान, संगीत, नृत्य और ‘आध्यात्मिक विकास के लिए भक्ति एक राजमार्ग’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में पद्म भूषण से सम्मानित और मशहूर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दत्तात्रेयुडू नोरी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। आयोजक ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद योग के आध्यात्मिक पहलुओं के साथ-साथ इससे होने वाले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य फायदों को भी हाईलाइट करना था।

पूरे अमेरिका में योग दिवस के जश्न का बढ़ना दिखाता है कि यह कैसे एक सालाना डिप्लोमैटिक पहल से बढ़कर एक बड़े पैमाने पर सर्व-कल्याणकारी आंदोलन बन गया है। यह 2014 में भारत की तरफ से पेश किए गए संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव के तौर पर शुरू हुआ था और अब पूरे अमेरिका में राज्य विधानसभाओं, गवर्नर के कार्यालय, सिटी हॉल, सार्वजनिक पार्क और सामुदायिक केंद्रों में मनाया जाता है।

 

योग दिवस पर नौसेना का कमाल, INS सतवाहन में पानी के भीतर योगासन का प्रदर्शन

विशाखापत्तनम
 देशभर में आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। तीनों भारतीय सेनाओं ने भी योग कार्यक्रम आयोजित किए, लेकिन भारतीय नौसेना विशाखापत्तनम में योग का एक अनोखा प्रदर्शन किया। INS सतवाहन में शनिवार को एक अनूठे अंडरवॉटर योग (पानी के भीतर योग) सत्र का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में यूनिट के 40 कर्मियों ने भाग लिया और पानी की सतह के नीचे कई योगासन कर अपनी एकाग्रता, श्वास नियंत्रण, सहनशक्ति और मानसिक संतुलन का शानदार प्रदर्शन किया।

भारतीय नौसेना के अनुसार, इस कार्यक्रम का संचालन नौसेना के ही योग विशेषज्ञों ने किया और इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर आरुष शर्मा ने किया। यह कार्यक्रम भारतीय नौसेना की स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता तथा फिटनेस के क्षेत्र में नवाचार को अपनाने के संकल्प का प्रतीक बना। साथ ही यह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मोटो -‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’को भी मजबूत करता है।

‘मन शांत, शरीर मजबूत…’
नौसेना की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा गया, ‘मन से शांत। शरीर से मजबूत। सेवा के प्रति समर्पित।’ नौसेना की ओर से आगे लिखा गया, ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नौसेना ने ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ थीम को अपनाया है, जिससे एक स्वस्थ और मिशन के लिए तैयार फोर्स की नींव मजबूत हो रही है।

योग मुद्राएं कर दिखाया दम
इस अंडर वाटर योग में प्रतिभागियों ने पानी के भीतर योग मुद्राएं अपनाकर यह दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी योग कैसे शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत बना सकता है। कार्यक्रम ने योग की प्राचीन परंपरा और पानी के भीतर काम करने वाले चुनौतीपूर्ण वातावरण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

नौसेना के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और परिचालन तत्परता को बढ़ावा देना था। प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया कि नियंत्रित श्वास, सजगता और अनुशासन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सामंथा की ‘मा इंटी बंगारम’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाल, दूसरे दिन बढ़ी कमाई

साउथ एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु लंबे ब्रेक के बाद फिल्म ‘मा इंटी बंगारम’ के जरिए बड़े पर्दे पर लौटी हैं. फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. पहले दिन दमदार शुरुआत करने के बाद अब दूसरे दिन भी फिल्म की कमाई में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

सरे दिन बढ़ी ‘मा इंटी बंगारम’ की कमाई
Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘मा इंटी बंगारम’ ने रिलीज के दूसरे दिन करीब 7.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. फिल्म की कमाई में शनिवार का फायदा साफ देखने को मिला. पहले दिन फिल्म ने 5.35 करोड़ रुपये की ओपनिंग की थी. ऐसे में अब फिल्म का कुल इंडिया नेट कलेक्शन 12.85 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि इंडिया ग्रॉस कलेक्शन लगभग 14.90 करोड़ रुपये हो चुका है.

 फिल्म की कहानी ने जीता दर्शकों का दिल
‘मा इंटी बंगारम’ की कहानी स्वर्णा नाम की महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार सामंथा रुथ प्रभु ने निभाया है. स्वर्णा शादी के बाद पहली बार अपने पति अनिरुद्ध के परिवार से मिलने जाती है. वह अपने ससुरालवालों पर अच्छा प्रभाव डालना चाहती है, लेकिन तभी उसके अतीत से जुड़ा करुणा उसकी जिंदगी में वापस आ जाता है और सबकुछ बदलने लगता है. फिल्म में सामंथा के अलावा दिगंत और गुलशन देवैया भी अहम भूमिका में नजर आए हैं. फिल्म की निर्देशक बीवी नंदिनी रेड्डी ने किया है, जबकि इसे राज निदिमोरू, सामंथा और हिमांक रेड्डी दुव्वुरु ने मिलकर प्रोड्यूस किया है.

फिल्म को मिल रहे प्यार से सामंथा काफी खुश नजर आईं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों का धन्यवाद करते हुए लिखा कि किसी फिल्म का पहले दिन इतना अच्छा प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद भावुक पल है. सामंथा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि दर्शक अब फिल्म को सिर्फ मेल लीड या फीमेल लीड नजरिए से नहीं देख रहे हैं. अभिनेत्री ने आगे लिखा कि सबसे ज्यादा खुशी उन्हें इस बात की है कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी फिल्म देखने सिनेमाघरों तक पहुंची. सामंथा ने कहा कि दर्शकों का स्वाद लगातार बदल रहा है और यह सिनेमा के लिए बहुत खूबसूरत बदलाव है.

शिवसेना यूबीटी में बड़ा सियासी उलटफेर, 6 बागी सांसदों के अलग होने का ऐलान संभव

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है. शिवसेना यूबीटी खेमे में आज फूट का औपचारिक ऐलान होने के संकेत मिल रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, 6 बागी सांसदों के अलग होने की तैयारी पूरी हो चुकी है. कई दिनों की ज़बरदस्त अटकलों, आरोपों और तीखी टिप्पणियों के बाद, आज शिवसेना (उद्धव ठाकरे) खेमे में फूट की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद रविवार को संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ अपनी बैठक की तस्वीरें और वीडियो फुटेज जारी करेंगे.

इसके साथ ही, स्पीकर को सौंपे गए पत्र की एक कॉपी भी पेश करेंगे. उम्मीद की जा रही है कि बागी सांसद उद्धव ठाकरे खेमे से अलग होने के पीछे की वजहों का भी जिक्र करेंगे.

कब क्या हुआ? पूरी टाइमलाइन….
उद्धव ठाकरे खेमे में पाला बदलने की चर्चा तेज होने के बाद महाराष्ट्र के सियासी हलकों में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है. संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय दीना पाटिल सहित 6 बागी सांसद पहले देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली पहुंचे, नोएडा के एक होटल में रुके और दिल्ली में एकनाथ शिंदे तथा उनके बेटे श्रीकांत के साथ मीटिंग में शामिल हुए.

अगली सुबह, श्रीकांत और निंबालकर दोनों ने सुबह करीब 7 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की. सुबह करीब 10.20 बजे, बाकी पांच सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय कर रहे हैं और सदन में उनके बैठने की जगह बदलने की गुजारिश की. मीटिंग के बाद, सांसद चेन्नई, वाराणसी, पुणे और मुंबई सहित अलग-अलग जगहों के लिए रवाना हो गए.

आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो सांसद चेन्नई से और दो कोलकाता से मुंबई पहुंचेंगे, जबकि एक सांसद पहले से ही मुंबई में है और दूसरा पुणे में है.

भोजपुर एनकाउंटर पर बवाल, भरत तिवारी मामले में न्यायिक जांच के आदेश से गरमाई बिहार की सियासत

पटना
 बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने राज्य की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। इस मुठभेड़ के बाद उठ रहे गंभीर सवालों के बीच वर्तमान सम्राट सरकार विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर है। विवाद इतना बढ़ चुका है कि सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। इसी सियासी हलचल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब तीन साल पुराना एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है। लोग इस पुराने बयान के जरिए मौजूदा कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई की तुलना कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने एनकाउंटर पर क्या कहा था?
17 अप्रैल 2023 को नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा था, ‘अपराधियों का सफा माने मार दीजिए, यह कोई तरीका है? इसका मतलब जो जेल में जाएगा तो उसको मार दीजिए। ऐसा कोई नियम है? आप बताइए तो अरे तो कोर्ट ना फैसला करता है ? अगर, किसी को यह भी सजा होती है कि उसको फांसी होगी। फांसी हो जाती है। लेकिन, बाकी को साल तक (सजा) का होता है कितने तक का होता है? सजा या कोई जेल में हो तो इलाज के लिए ले जा रहा है या किसी काम के लिए ले जा रहा है और रास्ते में हो गया (एनकाउंटर) ये बहुत दुखद है।’

नीतीश कुमार यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा, ‘इसपर तो निश्चित रूप से लोगों को एक्शन करना चाहिए। क्या ठीक है? किसी को सजा होती है या किसी पर केस होता है, कोई जेल में है उस पर हमको नहीं कुछ करना है। हमारा यह है कि कोई भी जेल में रहेगा और कोई भी किस तरह से बाहर जाए और उसको ऐसे ही मार दें? ये तो बड़ा दुखद बात है ना?’

अपराधियों का सफा माने मार दीजिए, यह कोई तरीका है? इसका मतलब जो जेल में जाएगा तो उसको मार दीजिए।

भरत तिवारी कथित मुठभेड़ से मुश्किल में सम्राट सरकार
भोजपुर में पुलिस कार्रवाई के दौरान मारे गए भरत तिवारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के सामने आए कुछ वीडियो साक्ष्यों के बाद पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके चलते राज्य की सम्राट चौधरी सरकार बैकफुट पर है। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत न्यायिक जांच (ज्यूडिशियल इंक्वायरी) के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

नीतीश कुमार के पुराने बयानों की दुहाई देकर अब विपक्ष सम्राट सरकार पर चौतरफा हमले कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एनकाउंटर ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि जेडीयू और बीजेपी के बीच नीतिगत मतभेदों को भी हवा दे दी है। अब सभी की नजरें इस मामले में आने वाली न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

भरत तिवारी कथित मुठभेड़ मामला क्या है?
    बिहार के भोजपुर में पुलिस ने कथित एनकाउंटर किया।
    पुलिस मुठभेड़ में आरोपी भरत तिवारी की मौत हो गई।
    वायरल वीडियो में सरेंडर के बाद गोली मारते देखा गया।
    मानवाधिकार उल्लंघन और फर्जी एनकाउंटर के गंभीर आरोप लगे।
    चौतरफा सियासी दबाव के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए।

 

दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना में पात्र परिवारों को मिलेगी ₹10 हजार की सहायता

सूरजपुर.

राज्य सरकार द्वारा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के उद्देश्य से “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, जो खेती में परिश्रम तो करते हैं, परंतु उनके पास स्वयं की भूमि नहीं है। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो। यह योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना के अंतर्गत आवेदन के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है। पात्र समूह में भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी सहित अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों से जुड़े पुजारी, वैद्य, गुनिया एवं मांझी परिवार शामिल हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

योजना के अंतर्गत आवेदन की प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी गई है। इच्छुक हितग्राही ग्राम/नगर पंचायत कार्यालय से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूर्ण आवेदन जमा करने के पश्चात विभाग द्वारा सत्यता जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त पंजीयन विवरण ऑनलाइन मोबाइल नंबर, आधार नंबर अथवा पंजीयन क्रमांक के माध्यम से भी देखा जा सकता है। नियमित वित्तीय सहायता भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित करेगी। यह पहल राज्य सरकार की ग्रामीण कल्याण नीति में कमजोर वर्ग के उत्थान की प्राथमिकता को दर्शाती है।

योग को दिनचर्या बनाएं, स्वस्थ समाज के निर्माण में दें योगदान: मुख्यमंत्री साय

अम्बिकापुर/रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं,  युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया।

इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जिसने आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” वर्तमान समय की आवश्यकता को प्रतिबिंबित करती है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव को रिकॉर्ड समय में व्यापक समर्थन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि विश्व ने भारतीय ज्ञान परंपरा और योग की उपयोगिता को स्वीकार किया है। आज 21 जून को पूरी दुनिया जिस उत्साह से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है, वह भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व का गौरवशाली उदाहरण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योग स्वास्थ्य और आरोग्य की ऐसी विश्वसनीय साधना है, जो जीवन के हर चरण में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। योग शरीर को निरोग, मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी आज योग की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है और इसे बेहतर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का संदेश देकर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन का मार्ग प्रशस्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार योग के व्यापक विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि योग आयुष पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है और इस निर्णय से योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों, कॉलेजों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है ताकि स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। विद्यालयों में योग को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक योग से नहीं जुड़ पाए हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें, क्योंकि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कोई भी समय देर नहीं होता।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि योग को घर-घर तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आयोग प्रदेश में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनजातीय युवाओं की शिक्षा और भविष्य को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं द्वारा यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें देश और समाज के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ब्रह्ममुहूर्त का विशेष महत्व है और इसी समय योगाभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है।
इस अवसर पर विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक झा, आयुष विभाग के संचालक राजेंद्र कुमार कटारा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक उपस्थित थे।

भोपाल स्टेशन पर ‘हरित युवा–हरित भारत’ अभियान की शुरुआत, यात्रियों को बांटे गए 500 पौधे

भोपाल
पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आज भोपाल रेलवे स्टेशन पर **हरित युवा–हरित भारत अभियान** का शुभारंभ मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM एवं YCS द्वारा MIJARC के सहयोग से किया गया। अभियान के अंतर्गत भोपाल स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को 500 निःशुल्क फलदार पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  आशीष दुबे  स्टेशन डायरेक्टर, भोपाल रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में  हैरिस लाल (मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वाणिज्यिक – डीआरएम, भोपाल), राकेश (डिप्टी एसएस) तथा  सुरेन्द्र मोहन शर्मा (सेवानिवृत्त रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट) उपस्थित रहे।

इस अवसर पर फादर शिल्टों अब्राहम, फादर जोशी, मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS) के समस्त स्टाफ सदस्य तथा एम.पी.आर.वाई.सी. (MPRYC) के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत फादर शिल्टों द्वारा अभियान के परिचय के साथ की गई। इसके बाद MPRYC के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत फलदार पौधे भेंट कर किया।

मुख्य अतिथि श्री आशीष दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने इस जन-जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के हित में एक सराहनीय पहल बताया। साथ ही उन्होंने भारतीय रेलवे द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।

विशिष्ट अतिथि हैरिस लाल ने कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे और सभी जीव-जंतु शामिल हैं। स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन प्रदान करता है। बढ़ते प्रदूषण और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, इसलिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण ही हमारे सुरक्षित भविष्य की नींव है।

कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को पौधों का वितरण किया गया तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का सफल आयोजन मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM, YCS, MIJARC तथा MPRYC के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का समापन फादर जोशीके आभार उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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