सामंथा की ‘मा इंटी बंगारम’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाल, दूसरे दिन बढ़ी कमाई

साउथ एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु लंबे ब्रेक के बाद फिल्म ‘मा इंटी बंगारम’ के जरिए बड़े पर्दे पर लौटी हैं. फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. पहले दिन दमदार शुरुआत करने के बाद अब दूसरे दिन भी फिल्म की कमाई में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

सरे दिन बढ़ी ‘मा इंटी बंगारम’ की कमाई
Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘मा इंटी बंगारम’ ने रिलीज के दूसरे दिन करीब 7.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. फिल्म की कमाई में शनिवार का फायदा साफ देखने को मिला. पहले दिन फिल्म ने 5.35 करोड़ रुपये की ओपनिंग की थी. ऐसे में अब फिल्म का कुल इंडिया नेट कलेक्शन 12.85 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि इंडिया ग्रॉस कलेक्शन लगभग 14.90 करोड़ रुपये हो चुका है.

 फिल्म की कहानी ने जीता दर्शकों का दिल
‘मा इंटी बंगारम’ की कहानी स्वर्णा नाम की महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार सामंथा रुथ प्रभु ने निभाया है. स्वर्णा शादी के बाद पहली बार अपने पति अनिरुद्ध के परिवार से मिलने जाती है. वह अपने ससुरालवालों पर अच्छा प्रभाव डालना चाहती है, लेकिन तभी उसके अतीत से जुड़ा करुणा उसकी जिंदगी में वापस आ जाता है और सबकुछ बदलने लगता है. फिल्म में सामंथा के अलावा दिगंत और गुलशन देवैया भी अहम भूमिका में नजर आए हैं. फिल्म की निर्देशक बीवी नंदिनी रेड्डी ने किया है, जबकि इसे राज निदिमोरू, सामंथा और हिमांक रेड्डी दुव्वुरु ने मिलकर प्रोड्यूस किया है.

फिल्म को मिल रहे प्यार से सामंथा काफी खुश नजर आईं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों का धन्यवाद करते हुए लिखा कि किसी फिल्म का पहले दिन इतना अच्छा प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद भावुक पल है. सामंथा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि दर्शक अब फिल्म को सिर्फ मेल लीड या फीमेल लीड नजरिए से नहीं देख रहे हैं. अभिनेत्री ने आगे लिखा कि सबसे ज्यादा खुशी उन्हें इस बात की है कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी फिल्म देखने सिनेमाघरों तक पहुंची. सामंथा ने कहा कि दर्शकों का स्वाद लगातार बदल रहा है और यह सिनेमा के लिए बहुत खूबसूरत बदलाव है.

शिवसेना यूबीटी में बड़ा सियासी उलटफेर, 6 बागी सांसदों के अलग होने का ऐलान संभव

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है. शिवसेना यूबीटी खेमे में आज फूट का औपचारिक ऐलान होने के संकेत मिल रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, 6 बागी सांसदों के अलग होने की तैयारी पूरी हो चुकी है. कई दिनों की ज़बरदस्त अटकलों, आरोपों और तीखी टिप्पणियों के बाद, आज शिवसेना (उद्धव ठाकरे) खेमे में फूट की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद रविवार को संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ अपनी बैठक की तस्वीरें और वीडियो फुटेज जारी करेंगे.

इसके साथ ही, स्पीकर को सौंपे गए पत्र की एक कॉपी भी पेश करेंगे. उम्मीद की जा रही है कि बागी सांसद उद्धव ठाकरे खेमे से अलग होने के पीछे की वजहों का भी जिक्र करेंगे.

कब क्या हुआ? पूरी टाइमलाइन….
उद्धव ठाकरे खेमे में पाला बदलने की चर्चा तेज होने के बाद महाराष्ट्र के सियासी हलकों में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है. संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय दीना पाटिल सहित 6 बागी सांसद पहले देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली पहुंचे, नोएडा के एक होटल में रुके और दिल्ली में एकनाथ शिंदे तथा उनके बेटे श्रीकांत के साथ मीटिंग में शामिल हुए.

अगली सुबह, श्रीकांत और निंबालकर दोनों ने सुबह करीब 7 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की. सुबह करीब 10.20 बजे, बाकी पांच सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय कर रहे हैं और सदन में उनके बैठने की जगह बदलने की गुजारिश की. मीटिंग के बाद, सांसद चेन्नई, वाराणसी, पुणे और मुंबई सहित अलग-अलग जगहों के लिए रवाना हो गए.

आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो सांसद चेन्नई से और दो कोलकाता से मुंबई पहुंचेंगे, जबकि एक सांसद पहले से ही मुंबई में है और दूसरा पुणे में है.

भोजपुर एनकाउंटर पर बवाल, भरत तिवारी मामले में न्यायिक जांच के आदेश से गरमाई बिहार की सियासत

पटना
 बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने राज्य की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। इस मुठभेड़ के बाद उठ रहे गंभीर सवालों के बीच वर्तमान सम्राट सरकार विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर है। विवाद इतना बढ़ चुका है कि सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। इसी सियासी हलचल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब तीन साल पुराना एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है। लोग इस पुराने बयान के जरिए मौजूदा कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई की तुलना कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने एनकाउंटर पर क्या कहा था?
17 अप्रैल 2023 को नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा था, ‘अपराधियों का सफा माने मार दीजिए, यह कोई तरीका है? इसका मतलब जो जेल में जाएगा तो उसको मार दीजिए। ऐसा कोई नियम है? आप बताइए तो अरे तो कोर्ट ना फैसला करता है ? अगर, किसी को यह भी सजा होती है कि उसको फांसी होगी। फांसी हो जाती है। लेकिन, बाकी को साल तक (सजा) का होता है कितने तक का होता है? सजा या कोई जेल में हो तो इलाज के लिए ले जा रहा है या किसी काम के लिए ले जा रहा है और रास्ते में हो गया (एनकाउंटर) ये बहुत दुखद है।’

नीतीश कुमार यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा, ‘इसपर तो निश्चित रूप से लोगों को एक्शन करना चाहिए। क्या ठीक है? किसी को सजा होती है या किसी पर केस होता है, कोई जेल में है उस पर हमको नहीं कुछ करना है। हमारा यह है कि कोई भी जेल में रहेगा और कोई भी किस तरह से बाहर जाए और उसको ऐसे ही मार दें? ये तो बड़ा दुखद बात है ना?’

अपराधियों का सफा माने मार दीजिए, यह कोई तरीका है? इसका मतलब जो जेल में जाएगा तो उसको मार दीजिए।

भरत तिवारी कथित मुठभेड़ से मुश्किल में सम्राट सरकार
भोजपुर में पुलिस कार्रवाई के दौरान मारे गए भरत तिवारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के सामने आए कुछ वीडियो साक्ष्यों के बाद पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके चलते राज्य की सम्राट चौधरी सरकार बैकफुट पर है। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत न्यायिक जांच (ज्यूडिशियल इंक्वायरी) के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

नीतीश कुमार के पुराने बयानों की दुहाई देकर अब विपक्ष सम्राट सरकार पर चौतरफा हमले कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एनकाउंटर ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि जेडीयू और बीजेपी के बीच नीतिगत मतभेदों को भी हवा दे दी है। अब सभी की नजरें इस मामले में आने वाली न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

भरत तिवारी कथित मुठभेड़ मामला क्या है?
    बिहार के भोजपुर में पुलिस ने कथित एनकाउंटर किया।
    पुलिस मुठभेड़ में आरोपी भरत तिवारी की मौत हो गई।
    वायरल वीडियो में सरेंडर के बाद गोली मारते देखा गया।
    मानवाधिकार उल्लंघन और फर्जी एनकाउंटर के गंभीर आरोप लगे।
    चौतरफा सियासी दबाव के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए।

 

दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना में पात्र परिवारों को मिलेगी ₹10 हजार की सहायता

सूरजपुर.

राज्य सरकार द्वारा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के उद्देश्य से “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, जो खेती में परिश्रम तो करते हैं, परंतु उनके पास स्वयं की भूमि नहीं है। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो। यह योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना के अंतर्गत आवेदन के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है। पात्र समूह में भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी सहित अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों से जुड़े पुजारी, वैद्य, गुनिया एवं मांझी परिवार शामिल हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

योजना के अंतर्गत आवेदन की प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी गई है। इच्छुक हितग्राही ग्राम/नगर पंचायत कार्यालय से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूर्ण आवेदन जमा करने के पश्चात विभाग द्वारा सत्यता जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त पंजीयन विवरण ऑनलाइन मोबाइल नंबर, आधार नंबर अथवा पंजीयन क्रमांक के माध्यम से भी देखा जा सकता है। नियमित वित्तीय सहायता भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित करेगी। यह पहल राज्य सरकार की ग्रामीण कल्याण नीति में कमजोर वर्ग के उत्थान की प्राथमिकता को दर्शाती है।

योग को दिनचर्या बनाएं, स्वस्थ समाज के निर्माण में दें योगदान: मुख्यमंत्री साय

अम्बिकापुर/रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं,  युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया।

इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जिसने आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” वर्तमान समय की आवश्यकता को प्रतिबिंबित करती है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव को रिकॉर्ड समय में व्यापक समर्थन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि विश्व ने भारतीय ज्ञान परंपरा और योग की उपयोगिता को स्वीकार किया है। आज 21 जून को पूरी दुनिया जिस उत्साह से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है, वह भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व का गौरवशाली उदाहरण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योग स्वास्थ्य और आरोग्य की ऐसी विश्वसनीय साधना है, जो जीवन के हर चरण में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। योग शरीर को निरोग, मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी आज योग की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है और इसे बेहतर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का संदेश देकर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन का मार्ग प्रशस्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार योग के व्यापक विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि योग आयुष पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है और इस निर्णय से योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों, कॉलेजों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है ताकि स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। विद्यालयों में योग को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक योग से नहीं जुड़ पाए हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें, क्योंकि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कोई भी समय देर नहीं होता।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि योग को घर-घर तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आयोग प्रदेश में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनजातीय युवाओं की शिक्षा और भविष्य को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं द्वारा यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें देश और समाज के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ब्रह्ममुहूर्त का विशेष महत्व है और इसी समय योगाभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है।
इस अवसर पर विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक झा, आयुष विभाग के संचालक राजेंद्र कुमार कटारा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक उपस्थित थे।

भोपाल स्टेशन पर ‘हरित युवा–हरित भारत’ अभियान की शुरुआत, यात्रियों को बांटे गए 500 पौधे

भोपाल
पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आज भोपाल रेलवे स्टेशन पर **हरित युवा–हरित भारत अभियान** का शुभारंभ मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM एवं YCS द्वारा MIJARC के सहयोग से किया गया। अभियान के अंतर्गत भोपाल स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को 500 निःशुल्क फलदार पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  आशीष दुबे  स्टेशन डायरेक्टर, भोपाल रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में  हैरिस लाल (मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वाणिज्यिक – डीआरएम, भोपाल), राकेश (डिप्टी एसएस) तथा  सुरेन्द्र मोहन शर्मा (सेवानिवृत्त रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट) उपस्थित रहे।

इस अवसर पर फादर शिल्टों अब्राहम, फादर जोशी, मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS) के समस्त स्टाफ सदस्य तथा एम.पी.आर.वाई.सी. (MPRYC) के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत फादर शिल्टों द्वारा अभियान के परिचय के साथ की गई। इसके बाद MPRYC के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत फलदार पौधे भेंट कर किया।

मुख्य अतिथि श्री आशीष दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने इस जन-जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के हित में एक सराहनीय पहल बताया। साथ ही उन्होंने भारतीय रेलवे द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।

विशिष्ट अतिथि हैरिस लाल ने कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे और सभी जीव-जंतु शामिल हैं। स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन प्रदान करता है। बढ़ते प्रदूषण और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, इसलिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण ही हमारे सुरक्षित भविष्य की नींव है।

कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को पौधों का वितरण किया गया तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का सफल आयोजन मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM, YCS, MIJARC तथा MPRYC के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का समापन फादर जोशीके आभार उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

NEET परीक्षा में सख्ती: चोटी का क्लचर, बाली और कलावा तक उतरवाया, इंदौर में कड़ी जांच

इंदौर.

मेडिकल में प्रवेश के लिए देश की सबसे बड़ी री परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। नीट-यूजी परीक्षा केंद्र के बाहर सुबह 11 बजे से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी। डेढ़ बजे तक प्रवेश मिलना था, लेकिन सुरक्षा के नियम इतने कड़े थे कि छात्र-छात्राएं हैरान रह गए।

पेन-पेंसिल ले जाने पर भी पाबंदी
केंद्र के बाहर ही पेन-पेंसिल रखवा लिए गए और बताया गया कि ये अंदर ही मिलेंगे। परीक्षार्थियों को केवल आधार कार्ड और प्रवेश पत्र ले जाने की अनुमति थी। जांच के दौरान पानी की पारदर्शी बोतलों से स्टिकर हटाए गए, हाथ के पवित्र धागे कटवाए गए और बालिकाओं के बालों से क्लच व पोनीटेल तक निकलवा दिए गए।

पुलिस अधिकारियों ने संभाला छात्रा का मोबाइल
इसी बीच छात्रा सेजल गुप्ता मोबाइल के साथ पहुंची। परिजन साथ नहीं थे, तो गेट पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसका मोबाइल सुरक्षित संभाला।

कान की बाली के लिए भी छात्रा को रोका गया
वहीं एक छात्रा सानिया मनियार की एक कान की बाली लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकली, तो गहन जांच के बाद उसे उसी हाल में प्रवेश दिया गया। सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई जब एक अन्य छात्रा अपना आधार कार्ड लाना भूल गई। उसे रोका गया तो वह रोने लगी; उसके माता-पिता तुरंत प्रिंट आउट निकलवाने के लिए दौड़े। परीक्षा से पहले का यह दृश्य किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं था।

उज्जैन में नर्मदा एक्सप्रेस में धक्का लगने पर विवाद, युवक पर चाकू से हमला; हालत गंभीर

उज्जैन.

नर्मदा एक्सप्रेस के जनरल कोच में युवक पर जानलेवा हमला हो गया। कोच के गेट पर खड़े एक युवक को भीड़ में धक्का लग गया था। इस पर उसने चाकू निकालकर युवक पर हमला कर दिया। दोस्तों ने घायल को बचाया और आरोपित को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। उपचार के लिए घायल को चरक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां उसकी हालत नाजुक होने पर उसे इंदौर रैफर किया गया है।

जीआरपी ने बताया कि अंशुमान पुत्र दिलीप कुमार तिवारी उम्र 20 वर्ष निवासी ग्राम सिलोटा रामनगर जिला बाराबंकी उत्तर प्रदेश किसी काम से इंदौर आया था। जहां से वह शुक्रवार को अपने साथियों के साथ ट्रेन संख्या 18233 नर्मदा एक्सप्रेस के जनरल कोच में इंदौर से उज्जैन की यात्रा कर रहा था। कोच में बहुत अधिक भीड थी।

उज्जैन स्टेशन पर उतरने के लिए तिवारी कोच के गेट पर खड़ा था। ट्रेन की गति अचानक से धीमी होने के कारण तिवारी सामने खड़े एक व्यक्ति से टकरा गया था। जिससे आक्रोशित होकर सामने वाले व्यक्ति ने उसे गालियां देना शुरू कर दी थी। तिवारी ने उसे गाली देने से मना किया तो उसने जेब से चाकू निकालकर तिवारी पर हमला कर दिया। सिर में कान के पीछे और पेट पर चाकू लगने से तिवारी घायल हो गया। तिवारी ने चाकू पकड़ लिया था। इससे उसके हाथ में भी चोट लग गई थी।

महाकाल मंदिर क्षेत्र में तिलक लगाता है आरोपित
तिवारी के साथी देवा राजपूत ,लवलीन पांडे, और रामनाथ गुप्ता ने उसे बचाया। चाकू मारने वाले आरोपित ने अपना नाम अरुण वर्मन उर्फ लल्ला बताया था। घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया गया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 115(2),118(1),296(b), 351(2),बीएनएस व 25 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जीआरपी ने बताया कि आरोपित अरुण महाकाल मंदिर क्षेत्र में दर्शनार्थियों को तिलक लगाने का काम करता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव चरम पर, अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले ट्रंप की टोल चेतावनी

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के अंतरिम युद्धविराम और स्विट्जरलैंड में होने वाली शांति वार्ता के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को साफ किया कि युद्धविराम के दौरान या उसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शांति वार्ता विफल रही तो अमेरिका खुद इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना टोल लागू कर देगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यदि स्विट्जरलैंड में रविवार से शुरू होने वाली वार्ता निर्धारित 60 दिनों में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो अमेरिका अपनी तरफ से टोल लगा सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, “युद्धविराम के दौरान 60 दिनों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई टोल नहीं होगा और 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी कोई टोल नहीं लिया जाएगा। लेकिन, अगर समझौता पूरा नहीं होता है तो संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा और केवल अमेरिका के लिए ही टोल लगाया जा सकता है। यह टोल मिडिल ईस्ट के देशों के लिए गार्जियन एंजेल (रक्षक) के रूप में दी गई सेवाओं के अतीत, वर्तमान और भविष्य के खर्चों की भरपाई के लिए होगा।”

ईरान का रास्ता बंद करने का दावा
ट्रंप की इस घोषणा ने तकनीकी स्तर की अमेरिका-ईरान वार्ताओं की शुरुआत में ही कड़वाहट पैदा कर दी है। मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान और कतर की भागीदारी के साथ यह बातचीत रविवार से स्विट्जरलैंड में शुरू होने वाली है। वार्ता से ठीक पहले ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा युद्ध को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धताओं का स्पष्ट उल्लंघन करने के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है। ईरान का कहना है कि यह अंतरिम समझौता सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने के लिए था, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।

अमेरिका ने ईरान के दावे को नकारा
अमेरिकी सेना ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि जलमार्ग बंद है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण नहीं है। वहां समुद्री यातायात सामान्य रूप से चल रहा है और अमेरिकी सेना स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवाजाही निर्बाध बनी रहे।” अमेरिकी सेना के अनुसार, शनिवार को भी उस जलमार्ग से 55 व्यापारिक जहाज सुरक्षित गुजरे, जिनमें 1.7 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल ले जाया जा रहा था।

स्विट्जरलैंड रवाना हुई ईरान की टीम
जलडमरूमध्य को बंद करने के अपने दावे के तुरंत बाद ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि उनकी वार्ताकार टीम स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुकी है। इस टीम में ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ-साथ केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। इस समझौते के तहत ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को भी वापस बहाल किया जाना है।

दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि वाइट हाउस के प्रमुख वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर होने वाली वार्ताओं के तकनीकी विवरणों पर काम कर रहे हैं। वेंस ने फॉक्स न्यूज को बताया कि वे खुद भी अगले एक-दो दिनों में स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होंगे।

योग दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में साइकिल रैली, फिटनेस और स्वास्थ्य का दिया संदेश

कवर्धा.

कबीरधाम जिले का एक ऐसा गांव, जहां के लोग वर्षों तक अपने ही गांव का नाम बताने में झिझक महसूस करते थे, लोगों को उपहास का सामना करना पड़ता था, क्योंकि गांव का नाम गधहाभाटा था। अब गांव का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर सोनपुर करने से ग्रामीणों की यह पीड़ा खत्म हो गई है।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इसका राजपत्र में प्रकाशन भी किया जा चुका है। इसी खुशी के मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ग्राम सोनपुर पहुंचे और ग्रामीणों को राजपत्र की प्रति सौंपकर नई पहचान के लिए बधाई दी। इस दौरान उन्होंने गांव के विकास के लिए 7 लाख 50 हजार रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की घोषणा भी की। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सिर्फ गांव का नाम ही नहीं बदला है, बल्कि अब सोनपुर की तस्वीर भी बदल रही है।

गांव में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने गांव का नाम परिवर्तन होने पर उपमुख्यमंत्री का आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गधहाभाटा नाम होने के कारण उन्हें कई जगह शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती थी। लोग मजाक उड़ाते थे, जिसका असर सामाजिक रिश्तों और बच्चों के विवाह संबंधों पर भी पड़ता था। अब गांव का नाम सोनपुर होने से ग्रामीण गर्व के साथ अपनी पहचान बता सकेंगे।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu