बंगाल में पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला, बोले- श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बचाई थी राज्य की पहचान

पश्चिम बंगाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुखर्जी के सिद्धातों को ही अपनाकर बीजेपी ने बंगाल में चुनाव लड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस समय बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिशें हो रही थीं, तब कांग्रेस ने साजिश रचने वाली ताकतों को सामने घुटने टेक दिए थे। तभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को बेसहारा छोड़ा- पीएम मोदी
उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को बेसहारा छोड़ दिया था और आजादी के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की।’ पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को गलत इतिहास पढ़ाने की कोशिश की। हालांकि सच को छिपाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बंगाल अपने बेड़ियों से मुक्त हो गया है और विकास की नई यात्रा पर निकल पड़ा है।

‘बेड़ियों से आजाद हो गया बंगाल’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘चुनाव और सरकार गठन के बाद, आज मुझे पहली बार आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। बंगाल की हवा में अब एक नई ताजगी है। ऐसा लगता है मानो बंगाल अब अपनी बेड़ियों से आजाद हो गया है और बंगाल का गौरव फिर से लौटने लगा है।’ विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि राज्य में हो रहा बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताकत को दिखाता है।

सीमा पर बाड़ लगाने में रुकावट डाल रही थी ममता सरकार
उन्होंने कहा, ‘बंगाल के लोगों के चेहरों पर चमक है और गांवों में खुशी और भरोसे का माहौल है… बंगाल में यह साफ दिखता है कि आपका एक वोट कैसे बदलाव ला सकता है।’ पीएम मोदी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी के लिए राज्य सरकार की कोशिशों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इस प्रक्रिया में रुकावट डाली थी। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपने देखा होगा कि पिछली सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपने के काम को रोक दिया था। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में वह प्रक्रिया शुरू हो गई है।’

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पीएम मोदी ने 20 जून के ‘पश्चिमबंग दिवस’ के ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया और कहा कि नयी पीढ़ी को उन हालात के बारे में पता होना चाहिए जिनकी वजह से यह राज्य बना। मोदी ने कहा, ‘हमें बार-बार ‘पश्चिमबंग दिवस’ के महत्व को रेखांकित करने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उस दौरान क्या हुआ था।’ बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए और हजारों लोगों के साथ योग किया। इसके बाद वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर जाएंगे।

भारत को मिला नया डिफेंस ऑफर, बेल्जियम कंपनी ने पेश किया 105 मिमी टैंक टरेट

 नई दिल्ली
भारत अपनी पर्वतीय युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन से साथ LAC पर घटते-बढ़ते तनाव और हिमालयी क्षेत्रों में सैन्य तैनाती की चुनौतियों के बीच हल्के और अधिक प्रभावी हथियारों की जरूरत महसूस की जा रही है। इस बीच बेल्जियम की डिफेंस कंपनी जॉन कॉकरिल ने भारत को अपने उन्नत 105 मिमी टैंक टरेट बेचने की पेशकश की है।

कंपनी का दावा है कि यह टरेट विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में युद्ध संचालन के लिए डिजाइन किया गया है तथा हिमालयी क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में प्रभावी साबित हो सकता है।

कंपनी के अनुसार, इस टरेट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता है। सामान्य टैंकों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर निशाना साधने की यह क्षमता पहाड़ी युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां दुश्मन ऊंटी चोटियों और ढलानों पर तैनात हो सकता है।

जॉन कॉकरिल के इस सिस्टम में ऑटोमैटिक लोडर लगाया गया है, जिससे गोला-बारूद लोड करने की प्रक्रिया तेज होती है और चालक दल का कार्यभार कम होता है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है, जो कठिन भौगौलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।

क्या है टैंक टरेट?
टरेट किसी भी टैंक का वह हिस्सा होता है जिसमें मुख्य तोप, फायर कंट्रोल सिस्टम और कई अन्य हथियार प्रणालियां लगी होती हैं। यह 360 डिग्री तक घूम सकती है और विभिन्न दिशाओं में निशाना साध सकता है। जॉन कॉकरिल का प्रस्ताव एक टैंक नहीं, बल्कि एक ऐसा टरेट सिस्टम है, जिसे अलग-अलग बख्तरबंद वाहनों पर भी लगाया जा सकता है।

जॉन कॉकरिल के 105 मिमी टरेट की खासियत?
कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम खास तौर पर कठिन और पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं…
    105 मिमी की मुख्य तोप
    42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता
    ऑटोमैटिक लोडर
    आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम
    हल्के प्लेटफॉर्म पर लगाने की सुविधा

42 डिग्री एलीवेशन क्यों महत्वपूर्ण है?
सामान्य टैंकों की तोपें सीमित ऊंचाई तक ही ऊपर उठ सकती हैं। लेकिन पहाड़ी युद्ध में दुश्मन अक्सर ऊंची चोटियों और ढलानों पर मौजूदा होता है। ऐसी स्थिति में 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता टैंक को ऊंचाई पर स्थिति लक्ष्यों पर हमला करने में मदद कर सकती है। यही कारण है कि कंपनी इसे हिमालय जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बता रही है।

ऑटोमैटिक लोडर से क्या फायदा होगा?
परंपरागत टैंकों में गोला-बारूद लोड करने के लिए एक अलग क्रू सदस्य की जरूरत होती है। जबकि ऑटोमैटिक लोडर फायरिंग की गति बढ़ाता है। चालक दल की संख्या कम कर सकता है। सीमित जगह वाले हल्के टैंकों में उपयोगी साबित होता है। कठिन परिस्थितियों में संचालन को आसान बनाता है।

भारतीय सेना को इसकी जरूरत क्यों पड़ सकती है?
भारतीय सेना लंबे समय से ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से तैनात किए जा सकें। वजन में अपेक्षाकृत हल्के हों और तेजी से मूव कर सकें। जिससे पहाड़ी इलाकों में प्रभावी फायर सपोर्ट दे सकें। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में ऐसी क्षमताओं का विशेष महत्व है।

जॉन कॉकरिल का 105 मिमी टरेट भारतीय सेना की पर्वतीय युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया एक दिलचस्प प्रस्ताव है। इसकी हाई एलीवेशन कैपेसिटी, ऑटोमैटिक लोडर और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम इसे हिमालयी युद्धक्षेत्र के लिए आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला भारतीय सेना के परीक्षणों और परिचालन जरूरतों पर निर्भर करेगा।

यदि यह प्रणाली अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो भारत की पर्वतीय युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

भारत का पाकिस्तान पर सख्त रुख: आतंकवाद खत्म हुए बिना सामान्य रिश्तों की बहाली नहीं

नई दिल्ली
भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार ने कहा कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक दोनों देशों के बीच सामान्य माहौल या लोगों के स्तर पर संपर्क बहाल नहीं हो सकता। आरएसएस नेताओं की पाकिस्तान के साथ अधिक जुड़ाव संबंधी हालिया टिप्पणियों पर पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने यह स्पष्ट रुख रखा। संसद की स्थायी समिति की बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से जानकारी देते हुए सरकार की नीति और सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को सामने रखा।

पाकिस्तान से रिश्तों पर सरकार का स्पष्ट संदेश
विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में अधिकारियों ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क तभी संभव है, जब आतंकवाद और हिंसा का डर पूरी तरह समाप्त हो जाए। मौजूदा हालात में ऐसा वातावरण नहीं है, इसलिए किसी भी तरह के सामान्य संपर्क की संभावना फिलहाल नहीं दिखती।

ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 वार्ता पर भी लगी रोक
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रैक-2 कूटनीतिक संवाद से भी किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच इस समय ट्रैक-1.5 स्तर की भी कोई वार्ता नहीं चल रही है।

विदेश सचिव ने समिति को दी विस्तार में जानकारी
विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक के बाद शशि थरूर ने कहा कि यह ब्रीफिंग समिति के जम्मू-कश्मीर, लेह और कारगिल दौरे से पहले काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने भारत-चीन संबंधों को ‘संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण’ बताया।

चीन के साथ 35 दौर की वार्ता का ब्यौरा
सरकार ने समिति को बताया कि जून 2020 से अब तक भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने के लिए 35 दौर की वार्ता हो चुकी है। यह बातचीत वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठकों के माध्यम से हुई है। ताजा बैठक 27 मई को बीजिंग में आयोजित की गई थी।

सीमा पर शांति, लेकिन विवाद अब भी बरकरार
अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद मिली है। बातचीत में सीमांकन, विश्वास बहाली के उपाय और सीमा पार आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

लद्दाख और अरुणाचल को लेकर चीन के दावे पर प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने समिति को दिए अपने नोट में दोहराया कि चीन अब भी लद्दाख में भारत के लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। इसके अलावा वह अरुणाचल प्रदेश के करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर भी दावा करता है। भारत ने चीन के साथ जल संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान और यारलुंग जांगबो नदी पर बन रही बड़ी परियोजनाओं को लेकर भी अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं।

सिंधु जल संधि पर भी सरकार का सख्त रुख
बैठक में अधिकारियों ने दोहराया कि भारत ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखा है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक इस संधि को सामान्य रूप से लागू करने का सवाल ही नहीं उठता।

 

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स को मिला नवरत्न दर्जा, कंपनी को मिली बड़ी वित्तीय आज़ादी

 नई दिल्ली
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers) को नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज से यह स्टेटटस मिला है। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी जानकारी के अनुसार कंपनी को 19 जून 2026 को यह दर्जा मिला था। बता दें, नवरत्न स्टेटस मिलने के बाद पब्लिक सेक्टर की कंपनी और स्वतंत्र तरीके से वित्तीय फैसले ले सकते हैं।

इस कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा है?
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स का रेवन्यू वित्त वर्ष 2026 के दौरान 7002 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवन्यू 1754 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) 190 करोड़ रुपये से बढ़कर 748 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने 8 वारशिप की डिलीवरी की है। कंपनी ने अबतक 800 से अधिक मरिन प्लेटफॉर्म बनाए थे। इसके अलावा कंपनी 118 वारशिप इंडियन नेवी को दिए। जर्मनी के ग्राहक के लिए कंपनी ने 12 मल्टी पर्पज़ वेसेल्स बना रही है।

कंपनी के शेयरों की स्थिति क्या है?
शुक्रवार को Garden Reach Shipbuliders के शेयर बीएसई में 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2797.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अबतक कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन 14 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक साल में स्टॉक 10 प्रतिशत गिरा है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 3535 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1965 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 32043 करोड़ रुपये का है।

दो साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में 57 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, तीन साल में यह स्टॉक 367 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 5 साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयरों का भाव 1341 प्रतिशत बढ़ा है।

लगातार डिविडेंड दे रही है कंपनी
इसी साल के फरवरी के महीने में कंपनी ने 7.15 रुपये का डिविडेंड दिया था। 2025 में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तीन बार डिविडेंड दिया था। तीन बार में कंपनी ने एक शेयर पर 19 रुपये का डिविडेंड दिया था।

जी-7 में मोदी की सराहना पर थरूर के बयान से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली
 कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। जी-7 समिट में पीएम नरेंद्र मोदी के रुख की सराहना करने वाले उनके बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोला है। उधर विवाद बढ़ने पर थरूर ने एक्स पर अपनी सफाई भी पेश की है।

दरअसल, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से उठाए गए मुद्दों पर अपनी बात कही है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दे को मजबूती से रखा है। थरूर के इस बयान के बाद देश में राजनीतिक बवाल मच गया।

‘भारतीयों की जान राजनीति का मुद्दा नहीं’
विवाद बढ़ने के बाद थरूर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हो रही है कि भारतीय नागरिक नाविकों की सुरक्षा से जुड़े बयान को राजनीतिक विवाद बनाया जा रहा है। उन्होंने लिखा, ‘तीन भारतीयों की जान चली गई। मेरी बात सिर्फ हमारे नागरिकों की सुरक्षा और इस सिद्धांत की थी कि नागरिक नाविकों को कभी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर कुछ लोग इस चिंता पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक फायदा उठाने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं, तो यह मेरे बारे में नहीं बल्कि उनके बारे में ज्यादा बताता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीयों की जान की चिंता देश को जोड़ने वाली होनी चाहिए, बांटने वाली नहीं।

बीजेपी का राहुल पर तंज
बीजेपी ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वह अपनी ही पार्टी में समर्थन खो रहे हैं। बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पीएम मोदी की तारीफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों के मुद्दे पर मोदी के रुख को लेकर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा,’ यह राहुल गांधी के रुख से बिल्कुल अलग है।’ पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा, ‘यह शर्मनाक है। कल राहुल गांधी का जन्मदिन था, लेकिन उन्हें कोई तोहफा नहीं मिला।’ उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

मतभेदों के बीच राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई
इस विवाद के बीच शशि थरूर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि अब समय आ गया है जब देश में कांग्रेस के पक्ष में राजनीतिक माहौल बदलेगा और पार्टी आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। इसे पार्टी के प्रति एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

राहुल से मुलाकात, गुलदस्ता और किताब की भेंट
शुक्रवार को शशि थरूर कांग्रेस मुख्यालय 24, अकबर रोड पहुंचे, जहां उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए गुलदस्ता और एक किताब भेंट की। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में थरूर ने राहुल गांधी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेगी।

 

​मानसून की दस्तक से पहले अबूझमाड़ में मुकम्मल इंतजाम

​रायपुर

 बस्तर के दुर्गम और धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ इलाके में भारी बारिश के दौरान भी ग्रामीणों को राशन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान पहुंचविहीन होने वाले क्षेत्रों के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की है। जिले की सभी 39 पहुंचविहीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों में तीन महीने का खाद्यान्न (राशन) एडवांस में भंडारित कर दिया गया है।

राशन की बोरियों का हो रहा है भौतिक सत्यापन

कलेक्टर  ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के मौसम में खाद्यान्न वितरण किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस पूरी व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन केवल राशन भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि तैनात किए गए नोडल अधिकारी खुद नदी-नाले पार कर इन सुदूर केंद्रों में पहुंच रहे हैं और राशन की बोरियों की गिनती (भौतिक सत्यापन) कर रहे हैं।

​ग्राउंड जीरो पर पहुंचे अफसर, व्यवस्थाएं मिलीं चाक-चौबंद
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कलेक्टर के निर्देशानुसार, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक व नोडल अधिकारी ने ओरछा विकासखंड के बेहद संवेदनशील और अंदरूनी ग्राम पंचायत हांदावाड़ा के बेड़मापारा राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। अधिकारी ने मौके पर जाकर तीन माह के लिए सुरक्षित रखे गए खाद्यान्न के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। सुरक्षा मानकों और भंडारण व्यवस्था को बारीकी से देखने के बाद वितरण प्रक्रिया की जानकारी ली गई। 

दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में राशन का शत प्रतिशत अग्रिम भंडारण
   

खाद्य विभाग के मुताबिक, जिले की सभी 39 दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में 100 प्रतिशत अग्रिम भंडारण का काम समय से पहले पूरा कर लिया गया है। भंडारण और वितरण व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए जिला स्तर के अधिकारियों की दुकानवार ड्यूटी लगाई गई है, जो लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। भौगोलिक रूप से बेहद कठिन इस क्षेत्र में बारिश के दिनों में कई नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे संपर्क टूट जाता है। इस अग्रिम कदम से अब अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के राशन पहुंचेगा।
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प्रशासन की इस मुस्तैदी से अबूझमाड़ के आश्रित गांवों के हजारों राशन कार्डधारियों ने राहत की सांस ली है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भौगोलिक चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों का हक उन तक हर हाल में पहुंचेगा।

​नारायणपुर जिले के वनांचल ग्राम पीडियाकोट में विशेष शिविर का आयोजन

​रायपुर

 भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। जिले के सुदूर व अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत पीडियाकोट में आयोजित विशेष पेंशन भुगतान शिविर महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुशासन और सामाजिक सुधार का एक जीवंत उदाहरण बन गया। इस अनूठे शिविर ने जहाँ एक ओर वृद्धजनों और जरूरतमंदों के चेहरों पर डिजिटल सुरक्षा की मुस्कान बिखेरी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को एक स्वस्थ और नशामुक्त समाज की नई दिशा भी दिखाई।

​पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम: ‘नॉन-डीबीटी’ से ‘डीबीटी’ का सफर
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पीडियाकोट में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना था। वनांचल क्षेत्र होने के कारण कई हितग्राही अब भी नॉन- डीबीटी (Non-DBT) श्रेणी में थे, जिन्हें सीधे बैंक खातों में राशि प्राप्त करने में कठिनाई आ रही थी। शिविर में मुस्तैद अधिकारियों और पंचायत कर्मियों ने​ हितग्राहियों के आवश्यक दस्तावेजों का संकलन किया। ​प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के महत्व को सरल भाषा में समझाया। सुरक्षित और त्वरित पेंशन भुगतान के लिए बैंक खातों से क्रेडेंशियल्स को लिंक करने तथा ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूर्ण करने की अनिवार्यता बताई।

निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी कराए

​ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपनी निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी का कार्य पूरा कराएं ताकि भविष्य में मिलने वाली पेंशन राशि बिना किसी मध्यस्थ या रुकावट के सीधे उनके खातों में हस्तांतरित हो सके।

​समस्याओं का मौके पर ही समाधान
   
 ​पेंशनधारियों ने इस पहल का स्वागत पूरे उत्साह के साथ किया। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दूरियों की परवाह न करते हुए बड़ी संख्या में बुजुर्ग, दिव्यांग और कल्याणी बहनें शिविर स्थल पर पहुँचे। पंचायत स्तर पर ही प्रशासन को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा। अधिकारियों ने न केवल दस्तावेज जमा किए, बल्कि पेंशन से जुड़ी अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं को सुनकर उनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास किया। साथ ही, राज्य शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

गूंजी नशामुक्ति की शपथ
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पीडियाकोट का यह शिविर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल साक्षरता के इस मंच को ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के साथ जोड़कर एक बेहतरीन सामाजिक संदेश दिया गया। ​उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे के कारण टूटने वाले परिवारों, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर एक भावुक और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला, जब शिविर में मौजूद सभी पेंशनर्स, युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हाथ उठाकर नशामुक्ति की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं को व्यसनों से दूर रखेंगे और अपने समाज को भी इस सामाजिक बुराई से मुक्त कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

 शिविर आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव

एक मिसाल बना पीडियाकोट ​दूरस्थ अंचलों में इस तरह के शिविरों का आयोजन यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो विकास और जागरूकता की किरण राज्य के अंतिम कोने तक आसानी से पहुँच सकती है। पीडियाकोट का यह सफल आयोजन न केवल पेंशनधारियों के डिजिटल सशक्तिकरण का जरिया बना, बल्कि इसने एक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव भी रख दी है।

सिलिकॉन वैली में धड़कता है भारतीय संगीत का दिल

– सुनील कुमार गुप्ता

बैंगलुरु। भारत की आईटी राजधानी और सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बैंगलुरु में एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही आधुनिक तकनीक और सदियों पुरानी सांगीतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान है इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम (IME)—देश का पहला इंटरैक्टिव संगीत संग्रहालय, जो भारतीय संगीत की जड़ों, उसके विकास, विविधताओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यहां पहुंचकर केवल संगीत सुनाई नहीं देता, बल्कि उसे महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि यह संग्रहालय हर संगीत प्रेमी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।

10 वर्षों की मेहनत से साकार हुआ अनूठा सपना

करीब 50 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल, तीन मंजिलों और नौ कला दीर्घाओं (गैलरी) में फैला यह संग्रहालय वर्षों की शोध, तकनीकी नवाचार और संगीत विशेषज्ञों की अथक मेहनत का परिणाम है। लगभग एक दशक तक संगीत मर्मज्ञों, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर इसे तैयार किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें।

जेपी नगर के सातवें ब्लॉक स्थित ब्रिगेड मिलेनियम एवेन्यू में स्थापित इस संग्रहालय का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के उद्भव, विकास और उसके सांस्कृतिक महत्व के प्रति सम्मान जगाना है।

जहां संगीत को देखा भी जा सकता है और महसूस भी

आईएमई की नौ गैलरियां भारतीय संगीत की विविध विधाओं—लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड, पॉप, इंडी और समकालीन संगीत—को अत्यंत रोचक और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करती हैं। ऑडियो-विजुअल तकनीक और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से आगंतुक न केवल विभिन्न शैलियों को सुन सकते हैं, बल्कि स्वयं संगीत रचने और वाद्ययंत्रों के साथ प्रयोग करने का अवसर भी प्राप्त करते हैं।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लिए यह संग्रहालय सीखने और आनंद लेने का अनूठा माध्यम है। यहां संगीत के नौ रस, विभिन्न घरानों, रागों, गायन के समय और महान संगीतकारों के योगदान को सहज भाषा में समझाया गया है।

स्टार गैलरी में सजे भारतीय संगीत के अमूल्य खजाने

संग्रहालय की सबसे आकर्षक जगहों में से एक है स्टार गैलरी, जहां भारतीय संगीत के महान उस्तादों और कलाकारों से जुड़ी दुर्लभ धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। यहां उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, जिसे उनके परिवार ने संग्रहालय को भेंट किया, विशेष आकर्षण का केंद्र है।

इसके अलावा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का तंबूरा, पंडित भीमसेन जोशी और पंडित जसराज की पोशाकें तथा पंडित रविशंकर सहित भारतीय संगीत के लगभग सौ महान कलाकारों की जानकारी, रिकॉर्डिंग और योगदान को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

ग्रामोफोन से मोबाइल तक संगीत की यात्रा

‘रीचिंग आउट’ गैलरी संगीत रिकॉर्डिंग तकनीक के विकास की रोमांचक कहानी सुनाती है। यहां ग्रामोफोन, रेडियो, सीडी, बाइस्कोप, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक के सफर को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। यह अनुभाग बताता है कि तकनीक ने किस प्रकार संगीत को घर-घर तक पहुंचाया।

गीतों में छिपा इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज

स्टोरीज़ थ्रू सॉन्ग्स’ गैलरी में हिंदी फिल्म संगीत के विभिन्न दौरों की झलक देखने को मिलती है। वहीं ‘सॉन्ग्स ऑफ स्ट्रगल’ अनुभाग यह दर्शाता है कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का भी प्रभावशाली साधन रहा है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को प्रेरित करने वाले गीतों, विरोध और जनजागरण की धुनों को यहां सहेजा गया है। विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 35 से अधिक संस्करण, महात्मा गांधी द्वारा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी को लिखा गया पत्र, तथा देशभक्ति गीतों का समृद्ध संकलन इस गैलरी को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।

लोक परंपराओं से लेकर रामकथा तक संगीत का विस्तार

संग्रहालय यह भी दर्शाता है कि भारतीय समाज में जन्म, विवाह, त्योहार, श्रम, उत्सव और यहां तक कि शोक के अवसरों पर भी गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रामकथा सुनाती लकड़ी की कांवड़ किताब, कठपुतली कला, लोक भित्ति चित्र और लोक परंपराओं से जुड़े प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि संगीत भारतीय जीवन का अभिन्न अंग रहा है।

एक विशेष कोना महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित है, जहां उनके विचारों और संगीत से जुड़े योगदान को रेखांकित किया गया है।

100 से अधिक वाद्ययंत्रों का जीवंत संसार

इंस्ट्रूमेंट गैलरी में देशभर के 100 से अधिक पारंपरिक और आधुनिक वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं। यहां मयूर वीणा, नाग के आकार का वाद्य, पैरों से बजाया जाने वाला हारमोनियम, ब्रास बैंड के उपकरण, वायलिन और अनेक दुर्लभ यंत्रों की बनावट, इतिहास और वादन शैली को विस्तार से समझाया गया है।

‘लिविंग ट्रेडिशन’ गैलरी में श्रुति, राग, ताल, ध्रुपद, ख्याल और घराने जैसी भारतीय शास्त्रीय संगीत की मूल अवधारणाओं को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

इंडी पॉप, रॉक और आधुनिक संगीत की भी झलक

यह संग्रहालय केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। इंडी पॉप, रॉक और हाइब्रिड संगीत के विकास, उनके प्रमुख कलाकारों और सांस्कृतिक प्रभावों को भी यहां स्थान दिया गया है। दलेर मेहंदी की पोशाक, इंटरैक्टिव टच स्क्रीन और मिनी थिएटर जैसी आधुनिक प्रस्तुतियां युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

साउंड गार्डन: जहां पत्थर और धातु भी गाने लगते हैं

आईएमई का साउंड गार्डन अपने आप में अनूठा अनुभव है। यहां आगंतुक ध्वनि, कंपन और प्राकृतिक वस्तुओं के माध्यम से संगीत के विज्ञान को समझ सकते हैं। यह जानकर आश्चर्य होता है कि पत्थरों, धातुओं और अन्य सामान्य वस्तुओं से भी मधुर संगीत उत्पन्न किया जा सकता है।

हर भारतीय को एक बार अवश्य जाना चाहिए

आज जब सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर लगातार बहसें हो रही हैं, ऐसे समय में इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम भारतीय संगीत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का अवसर है।

यदि आप कभी बैंगलुरु जाएं, तो इस संग्रहालय के लिए पर्याप्त समय निकालें। यहां जल्दीबाजी में नहीं, बल्कि शांत मन और खुले हृदय से जाइए। तब आप महसूस करेंगे कि भारतीय संगीत केवल सुरों का मेल नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की जीवंत धड़कन है।

G7 समिट के बाद ट्रंप-मेलोनी विवाद गरमाया, फोटो को लेकर बयानबाज़ी तेज

वॉशिंगटन
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी हाल ही में फ्रांस में हुई G7 समिट में मिले थे। इस ग्लोबल समिट में शामिल होने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गए थे।

फ्रांस में समिट के पूरा होने के बाद डोनल्ड ट्रंप और जॉर्जियो मेलोनी के बीच फोटो खिंचवाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने दावा किया कि इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए मिन्नतें कीं।
‘वह फिर से दोस्त बनना चाहती हैं’

ट्रंप के इस बयान के सामने के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके ट्रंप के इन सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा- न मैं और न ही इटली ने कभी किसी से भीख मांगी है।

अब इस मामले को लेकर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट शेयर किया है और कहा है कि जॉर्जिया मेलोनी उनसे फिर से दोस्ती करना चाहती हैं।

‘मेलोनी ने बार-बार फोटो लेने के लिए कहा’
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘फ्रांस में G-7 मीटिंग के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बार-बार मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की।’

ट्रंप ने आगे बताया, ‘इटली में उनकी लोकप्रियता का स्तर गिर रहा है, शायद इसलिए क्योंकि जब ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने से रोकने की बात आई, तो उन्होंने अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया (हालांकि NATO ने भी ऐसा ही किया था!)।’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे लिखा, ‘उन्होंने हमें इटली के लैंडिंग स्ट्रिप्स या रनवे का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया, जिससे बहुत बड़ी लॉजिस्टिकल दिक्कत हुई और यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और दूसरे तथाकथित NATO सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।’

ट्रंप ने आगे बताया, ‘अब, जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। नहीं, शुक्रिया!’

Pakistan Cousin Marriage: कजिन से शादी की परंपरा पर वैज्ञानिकों की चिंता, रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

कराची 

Cousin Marriage in Pakistan: दुनिया भर में कजिन मैरिज (चचेरे-ममेरे, फुफेरे-मौसेरे भाई-बहनों के बीच शादी) के मामले में पाकिस्तान पहले पायदान पर आता है. अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू’ में 2023 में छपे आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में रक्त संबंधों के भीतर निकाह करने की दर करीब 61.2% है। 

समय-समय पर सामने आईं तमाम साइंटिफिक रिसर्च इस बात की पुष्टि करती हैं कि एक ही जेनेटिक पूल या खून के रिश्तों में शादी करना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इन शादियों से पैदा होने वाले बच्चों में जेनेटिक डिसॉर्डर यानी गंभीर आनुवांशिक विकार और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

लेकिन एक नई रिसर्च में सामने आया है कि पाकिस्तान में लगभग 34,000 लोग ‘ह्यूमन नॉकआउट’ हैं, यानी ऐसे लोग जिनमें कम से कम एक जीन ने काम करना बंद कर दिया है और इससे उनकी सेहत पर कोई खास असर नहीं हुआ है।

क्या है ‘ह्यूमन नॉकआउट’
विज्ञान की भाषा में कहें तो जब शरीर का कोई खास जीन पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है या गायब हो जाता है तो उसे ह्यूमन नॉकआउट (Human Knockout) कहा जाता है. आम तौर पर इंसानों में हर जीन की दो कॉपियां (एक माता से और एक पिता से) होती हैं. रक्त संबंधों में शादी होने की वजह से बच्चों को माता-पिता दोनों से एक जैसा म्यूटेशन मिलता है जिससे उनके शरीर में कोई खास जीन पूरी तरह गायब हो जाता है। 

17 जून को ‘नेचर’ में छपी एक स्टडी के मुताबिक, ये निष्कर्ष सबसे बड़े दक्षिण एशियाई जीनोमिक अध्ययनों में से एक का हिस्सा हैं जिसमें देश के 1,73,303 जीनोम का आकलन किया गया. इस शोध का मकसद मानव आनुवंशिकी के विकास को समझना और इससे जरूरी दवाओं के निर्माण में मदद करना था। 

स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे
कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स में मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर और ग्लोबल जीनोमिक्स के डायरेक्टर दानिश सालेहीन ने एक प्रेस रिलीज में कहा, ‘जीनोम स्टडीज में दक्षिण एशियाई लोगों की भागीदारी बहुत कम रही है. दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद ग्लोबल जीनोमिक डेटाबेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत है. लेकिन दक्षिण एशियाई जीनोम की खास विशेषताएं जो आबादी के इतिहास और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से बनी हैं. दुनिया भर में मेडिकल क्षेत्र में ऐसी बड़ी कामयाबियों का आधार बन सकती हैं जिनसे हर जगह के मरीजों को फायदा हो। 

भारत में इसी तरह की एक रिसर्च ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ में देश भर के 83 ग्रुप्स के 9,768 स्वस्थ लोगों के पूरे DNA का एनालिसिस किया गया. इसमें लगभग 4.4 करोड़ ऐसे जेनेटिक वैरिएंट्स मिले जो ग्लोबल डेटाबेस में नहीं थे जो काफी चौंकाने वाली बात है। 

जेनेटिक रिसर्च में कमियां
कराची में सेंटर फॉर नॉन-कम्युनिकेबल डिसीजेज में सालेहीन के ‘पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स’ बनाने की शुरुआत किए हुए दो दशक हो चुके हैं. उन्हें तब जो बात समझ आई थी, उसका इशारा 1960 के दशक से ही अमेरिका की अमिश समुदाय पर हुई स्टडीज कर रही थीं और वह ये है कि जिन समुदायों में चचेरे भाई-बहनों या रिश्तेदारों के बीच शादी की दर ज्यादा होती है, वहां जेनेटिक स्टडीज के मामले में रिसर्चर्स को एक खास तरह का फायदा मिलता है। 

एक ही खानदान में शादी की वजह से एक ऐसे समुदायों में जीन की बनावट एक जैसी होने के कारण दुर्लभ आनुवंशिक म्यूटेशन और उनके इंसानी शरीर पर होने वाले असर को खोजना और समझना वैज्ञानिकों के लिए बहुत आसान हो जाता है, जो सामान्य आबादी में ढूंढ पाना नामुमकिन के बराबर है। 

निकट संबंधी माता-पिता के बच्चों को समान जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक उत्परिवर्तन) विरासत में मिलते हैं, जिनमें वे बदलाव भी शामिल हैं जिनमें कुछ जीन निष्क्रिय हो जाते हैं. ऐसे ‘नॉक आउट’ मामले वैज्ञानिकों को यह देखने का अवसर देते हैं कि एक इंसान एक विशेष जीन के बिना कैसे काम करता है और क्या कुछ ऐसे जीन हैं जिन्हें बीमारियों के इलाज के लिए ‘बंद’ यानी निष्क्रिय किया जा सकता है। 

रिसर्च करने वालों ने पाया कि पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति में कम से कम एक जीन गायब है. स्टडी के दौरान, उन्होंने ऐसे लगभग 6,500 जीनों की पहचान की जो निष्क्रिय (स्विच ऑफ) हो गए थे। 

सालीहीन ने कहा, ‘हमारी पाकिस्तान स्टडी की खास बात यह है कि हम रिसर्च में शामिल प्रतिभागियों के पास वापस जा सकते हैं और डिटेल मेडिकल जांच कर सकते हैं ताकि यह देखा जा सके कि जीन के गायब होने का व्यक्ति पर किस तरह का असर पड़ सकता है। 

‘नॉकआउट’ वैज्ञानिकों के लिए क्यों हैं मौका?
अक्सर जीन से जुड़ी खोजें तब होती हैं जब वैज्ञानिक चूहों में कुछ खास जीन को हटाकर यह देखते हैं कि इससे उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है. लेकिन रिसर्च से पता चल रहा है कि इंसानों और चूहों में जीन अक्सर अलग-अलग तरह से काम करते हैं. इसी वजह से चूहों पर असर करने वाली कई दवाएं इंसानों पर काम नहीं करतीं जिससे लाखों डॉलर, समय और मेहनत बर्बाद हो जाती है। 

सालेहीन ने बताया, ‘हम ऐसे लोगों की पहचान करना चाहते हैं जिनमें जीन की काम करने वाली कॉपी नहीं होती और यह देखना चाहते हैं कि क्या इसका उनकी सेहत पर कोई असर पड़ता है। 

हाल की स्टडी में ठीक यही किया गया.
रिसर्च के दौरान सामने आया, RXFP1
जीन, जो पहले चूहों के दिल के काम करने के लिए जरूरी माना जाता था, जिन लोगों में नहीं था, उनमें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं देखी गई. यहां तक कि PRDM9 जीन, जो चूहों की प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी है, उसका इंसानों की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा। 

इस तरह की रिसर्च दवाओं की खोज और निर्माण के लिए बहुत बड़े क्लू देती हैं. स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में CIDEB जीन नहीं होता, वो लिवर की बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं. इससे पता चलता है कि CIDEB इनहिबिटर्स फैटी लिवर की बीमारी का इलाज हो सकते हैं। 

कुछ मामलों में जीन की कमी डॉक्टरों को सावधान भी कर सकती है. पार्किंसंस की एक्सपेरिमेंटल दवाएं अक्सर LRRK2 जीन को टारगेट करती हैं, लेकिन इस स्टडी से पता चला कि जिन लोगों में यह जीन नहीं था, उन्हें किडनी की समस्याएं हुईं. अब वैज्ञानिक जानते हैं कि उन्हें पार्किंसंस की दवाएं ले रहे लोगों की किडनी के कामकाज पर नजर रखनी चाहिए। 

सालेहीन ने कहा, ‘फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री कई दशकों से साइड इफेक्ट्स की समस्या का सामना कर रही है. हमारा डेटाबेस कंपनियों को उन दवाओं पर लाखों डॉलर खर्च करने से बचा सकता है जिनके फेल होने की संभावना है. साथ ही ये उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी कर सकता है। 

 

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