पन्ना की मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत से हड़कंप, नाराज छात्रों ने किया जमकर हंगामा

जबलपुर/प्रयागराज.

यूनाइटेड इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ने वाली छात्रा सृष्टि मिश्रा की संदिग्ध दशा में मौत हो गई। इससे नाराज छात्रों ने हंगामा किया। मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन भीतर नहीं घुसने दिया गया।

मेडिकल कालेज की ओर से कहा गया है कि छात्रा को थायराइड की समस्या थी और मिर्गी के दौरे पड़ते थे। सृष्टि मिश्रा मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रहने वाली थी।

छात्रा हास्टल के एक कमरे में सोई हुई थी
वह एमबीबीएस फाइनल इयर की छात्रा थी। संस्थान के हास्टल में रहकर पढ़ाई करती थी। छात्रा शुक्रवार रात हास्टल के एक कमरे में सोई हुई थी।

छात्रा के पिता अनुराग मिश्रा के आने का इन्तजार
इसी दौरान उसकी संदिग्ध दशा में मौत हो गई। एयरपोर्ट थाना के प्रभारी राजेश उपाध्याय का कहना है कि छात्रा के पिता अनुराग मिश्रा के आने का इन्तजार किया जा रहा है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

21 साल बाद MP में लौटेंगी सरकारी बसें, इंदौर से होगी सेवा की शुरुआत

भोपाल.

मध्यप्रदेश के लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी कंपनी की बसें दोबारा सड़कों पर दौड़ने जा रही हैं। इसकी शुरुआत इंदौर से जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (PM E-Bus Service) के तहत इंदौर शहर में 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी जुलाई महीने से शुरू करने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून को मंत्रालय में मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक ली थी। इस बैठक में प्रदेश की नई परिवहन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने नई परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया गया कि प्रदेश को सात परिवहन क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इनमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा शामिल हैं।

इंदौर से होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और PM ई-बस सेवा के तहत बसों का संचालन सबसे पहले इंदौर क्षेत्र से शुरू किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र के अंतर्गत इंदौर संभाग के सभी जिले और इंदौर स्थित अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) मिलकर बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले इंटरसिटी मार्गों पर बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा इंदौर शहर में सिटी बस सेवा को भी मजबूत किया जाएगा। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले अंतरराज्यीय मार्गों पर भी अनुबंध के अनुसार बसों का संचालन किया जाएगा।

PM ई-बस सेवा के तहत इंदौर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार इंदौर शहर में PM ई-बस सेवा की 150 इलेक्ट्रिक बसें जुलाई 2026 से चलाने का प्रस्ताव है। इन बसों का उद्देश्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना और यात्रियों को आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

सात क्षेत्रों में 620 मार्गों पर चलेंगी 2432 बसें
बैठक में बताया गया कि सात क्षेत्रीय मुख्यालयों के शहरों से प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों तक जाने वाले कुल 620 मार्गों की पहचान की गई है। इन मार्गों पर कुल 2432 बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। इंदौर क्षेत्र के लिए प्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले 121 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 608 बसें संचालित की जाएंगी।

इंदौर में सिटी बस सेवा का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सातों क्षेत्रीय मुख्यालयों में सिटी बस सेवा भी संचालित की जाएगी। इन बसों को केवल शहर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आसपास के महत्वपूर्ण उपनगरीय क्षेत्रों तक भी चलाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। इंदौर में शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए कुल 28 सिटी बस मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर PM ई-बस सेवा की 150 बसों को मिलाकर कुल 784 बसें चलाने की योजना है।

चार राज्यों के लिए चलेंगी अंतरराज्यीय बसें
इंदौर क्षेत्र से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले मार्गों के लिए भी बस सेवा शुरू की जाएगी। इन राज्यों के लिए कुल 101 अंतरराज्यीय मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर 276 बसों का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) द्वारा किया जाएगा। इस तरह इंदौर से शुरू होने वाली इंटरसिटी, सिटी और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को मिलाकर कुल 250 मार्गों पर 1688 बसें संचालित करने की योजना है।

पूरे प्रदेश में 1164 मार्गों पर चलेंगी 5206 बसें
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के सातों क्षेत्रों में सभी श्रेणी की बस सेवाओं के लिए कुल 1164 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 5206 बसों का संचालन किया जाएगा। अन्य छह क्षेत्रीय मुख्यालयों से भी इंदौर की तरह बस सेवा शुरू की जाएगी। संबंधित क्षेत्रीय कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

निजी बस संचालकों पर नहीं पड़ेगा असर
बैठक में स्पष्ट किया गया कि नई सरकारी बस सेवा शुरू होने से वर्तमान निजी बस संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मोटरयान अधिनियम 1988 के प्रावधानों के अनुसार योजना लागू की जाएगी। निजी बसों के वर्तमान अनुज्ञा-पत्र पहले की व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगे और उनका संचालन जारी रहेगा।

राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक कंपनियां होंगी गठित
बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे को मंजूरी दी गई। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में सात विभाग काम करेंगे। इनमें आईटी एवं आईटीएमएस विभाग, प्लानिंग एवं अनुबंध विभाग, पॉलिसी एवं अनुसंधान, मानव संसाधन एवं विधि विभाग, अधोसंरचना विभाग, प्रवर्तन एवं गुणवत्ता विभाग और बिजनेस डेवलपमेंट विभाग शामिल हैं। इन विभागों के प्रमुख मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी होंगे।

1190 पदों को मिली मंजूरी, चार साल में होगी भर्ती
राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में कुल 140 पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में 150 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों में कुल 1190 पद विभिन्न विभागों के लिए सृजित करने की मंजूरी दी गई है। इन पदों पर अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर की जा सकेगी।
सुरक्षा और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान
सरकार ने बस संचालन में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी है। बसों की सुरक्षा और प्रवर्तन व्यवस्था के लिए पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल से अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकेगा। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अलग विभाग बनाया जाएगा। इन बसों की आवाजाही प्रदेश के सभी ISBT और बस स्टैंड तक हो सकेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए जरूरी निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बस मार्गों और यात्री सुविधाओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को सात शहरों में स्थित कंपनियों की देनदारियों को लेकर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राज्य स्तरीय कंपनी की अधिकृत पूंजी और पेड-अप कैपिटल को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए। इस नई परिवहन व्यवस्था से प्रदेश में यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बस सेवा और आसान सफर मिलने की उम्मीद है।

होर्मुज स्ट्रेट में जाम जैसी स्थिति, नए नियमों के बीच जहाजों की लंबी कतार

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान में हुई डील के बाद अब होर्मुज से जहाजों का निकलना शुरू हो गया है। हालांकि इतने ज्यादा जहाज कतार में थे कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई है। पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने जहाजों को बिना किसी असुविधा को होर्मुज से पास करवाने के लिए कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत जहाज की तरफ से कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करनी होगी। इसके बाद भी जहाज का संपर्क अथॉरिटी से लगातार बना रहना चाहिए। अगर इसमें किसी तरह की चूक होती है तो इसकी जिम्मेदारी जहाज के मालिक की होगी। पीजीएसए ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करने की सुविधा दी है।

क्यों इतना अहम है होर्मुज?
बता दें कि होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। अमेरिका के हमले के बाद मार्च से ही यह सामान्य आवाजाही के लिए बंद था। बेहद कम जहाजों को यहां से निकलने की अनुमति दी जाती थी। इसके बाद भी जहाजों पर हमले का खतरा बना रहता था। इसी जलमार्ग से खाड़ी देशों के लगभग 80 फीसदी तेल और गैस का निर्यात होता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए यह मार्ग बेहद अहम है। भारत भी अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का करीब 40 फीसदी आयात इसी मार्ग से करता आ रहा है।

PGSA के मुताबिक ट्रांजिट ऐप्लिकेशन में यात्रा की पूरी जानकारी, रूट, संपर्क और शिप के बार में सारी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही इसे होर्मजु से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज के पास पहुंचने से पहले ही जहाजों को अपनी रिक्वेस्ट भेज देनी चाहिए। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और किसी भी तरह की दुर्घटना को टालने के लिए यह प्रक्रिया लागू की गई है। बता दें कि युद्ध के दौरान होर्मजु में भी माइन्स बिछा दी गई थीं। इसलिए दुर्घटना संभावित क्षेत्र से जहाजों को गुजरने नहीं दिया जा सकता।

60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क
समझौते के मुताबिक 60 दिनों तक ईरान जहाजों को पास कराने के बदले किसी भी तरह का शुल्क वसूल नहीं करेगा। स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा, पर्यावरण संबंधित भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। रखरखाव संबंधित सारे खर्च ईरान की सरकार वहन करेगी।

गुरुवार को होर्मुस से होकर कम से कम 25 जाहज निकले। वहीं अप्रैल महीने में 7 से 8 जहाज ही होर्मुज से पास हो पाए थे। अमेरिकी हमले के बाद होर्मुज से जहाजों का निकलना बेहद कम हो गया था। बता दें कि एक दिन पहले यानी शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने वाली थी। तब तक उधर इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष बढ़ने लगा और इजरायल ने लेबनान में एयरस्ट्राइक कर दी। इसके बाद शुक्रवार की वार्ता टाल दी गई और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड का दौरा भी रद्द कर दिया।

जशपुर दौरे पर रहेंगे CM साय, जैविक खेती कार्यशाला और जनकल्याण शिविर में करेंगे शिरकत

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। CM साय सुबह करीब 11:30 बजे बगिया से कुनकुरी के पण्डरीपानी पहुंचेंगे। यहां वे जैविक खेती कार्यशाला, जनकल्याणकारी शिविर और भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

इसके बाद दोपहर ढाई बजे वे बेमताटोली जाएंगे, जहां उत्कल ब्राह्मण समाज सेवा समिति के सामाजिक भवन का भूमिपूजन करेंगे। दोपहर बाद CM साय गिनाबहार में निर्माणाधीन MCH, BPHU, चराईडांड में निर्माणाधीन 220 बिस्तर अस्पताल, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग कॉलेज, सलियाटोली में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे।

सलियाटोली में पौने तीन बजे आयोजित ‘PM किसान उत्सव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, वे करीब 5:30 बजे अंबिकापुर के लिए रवाना हो जाएंगे।

एमपी के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत, पेंशन और पीएफ के लिए अब 4 महीने पहले करना होगा ऑनलाइन आवेदन

भोपाल.

सेवानिवृत्त या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों को किए जाने वाले अंतिम भुगतान की व्यवस्था में प्रदेश सरकार ने परिवर्तन किया है। अब अंतिम भुगतान के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को भुगतान सहित अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार भविष्य निधि कटौती का विवरण कर्मचारी प्रतिमाह कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से देख सकेंगे।

चार महीने पहले करना होगा आवेदन
कोई गड़बड़ी नजर आने पर अभ्यावेदन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को देंगे। सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व जब अंशदान की कटौती बंद कर दी जाती है, तक कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे। चार माह पहले ही अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करेंगे। ऑनलाइन आवेदन जमा होने और वास्तविक भुगतान प्राप्त होने तक अपने वेतन से संबंध बैंक खाते में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन करने की अनुमति नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे सुरक्षित रखने का दायित्व कर्मचारी का होगा।

सीधे खाते में आएगी राशि
कर्मचारी से प्राप्त आवेदन का मिलान विभाग में संधारित निधि की पासबुक एवं सेवा पुस्तिका से होगा और उसकी प्रविष्टि कराई जाएगी। सत्यापित पृष्ठों को स्कैन कर कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा। आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद संचालक पेंशन के द्वारा भुगतान संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। भुगतान की राशि सीधे कर्मचारियों के उसे खाते में अंतरित की जाएगी, जहां सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर छह माह का वेतन जमा किया गया हो।

कर्मचारियों की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा नाम, जन्मतिथि, बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। विवरण अपूर्ण होने पर स्वजन से जानकारी प्राप्त कर उसे अद्यतन किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान होगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु होने पर वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी। एक जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि जमाशेष में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल प्रमाणित साक्ष्यों और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा के आधार पर संचालक पेंशन के स्तर से किया जा सकेगा। आनलाइन की प्राधिकार पत्र जारी होने की तिथि से छह माह की अवधि के लिए ही वैद्य रहेगा।

UN बैठक में इजरायली राजदूत और प्रतिनिधि के बीच तीखी बहस, तू-तड़ाक तक पहुंचा मामला

नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक बैठक में दो राजनयिकों के बीच ऐसी बहस हुई कि दोनों तू-तड़ाक पर उतर आए। न्यूयॉर्क में ‘युद्ध के दौरान बच्चों के खिलाफ यौन शोषण’ जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के दौरान इजरायली राजदूत और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की प्रतिनिधि के बीच जमकर कहासुनी हो गई। इजरायली राजदूत डैनी डेनन गुतेरस की प्रतिनिधि प्रामिला पैटन से इस्तीफा मांगने लगे तो वह भड़क गईं और उन्होंने भी जमकर सुना दिया।

रिपोर्ट में इजरायल ब्लैकलिस्ट
प्रामिला पैटन ने बच्चों के खिलाफ अपराध को लेकर एक रिपोर्ट पेश की जिसमें इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया गया था। इजरायली राजदूत ने कहा कि यह रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और जानबूझकर इजरायल का टारगेट किया जा रहा है। इजरायली राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव पहले से ही इजरायल को निशाना बनाना चाहते हैं और तुम लोग उनके सामने नतमस्तक होकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हो।

तू-तड़ाक पर उतरे इजरायली राजदूत
गुतेरस की एक और प्रतिनिधि वानेसा फ्रेजियर ने भी अपनी रिपोर्ट में इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया था। डेनन जब भड़क गए और तू-तड़ाक पर उतर आए तो फ्रेजियर ने कहा कि उन्हें किसी पर व्यक्तिगत तौर पर हमला नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया गया है तो इसके बाकायदा सबूत मौजूद हैं। डेनन ने कहा, तुम लोग यूएन के लिए काम करते हो और हम इसके सदस्य हैं। तुम चुप हो जाए, तुम्हारी रिपोर्ट बहुत ही शर्मनाक है।

माल्टा की पूर्व राजनयिक फ्रेजियर ने गुतेरस की तरफ से इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट जारी की थी। इससे पहले गुतेरस ने भी कहा था कि इजरायल ने फिलिस्तीनियों के साथ जो कुछ किया है, उसके लिए उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इजरायल ने गाजा में बच्चों पर कहर ढाया है। हजारों बच्चे अनाथ हो गए और हजारों अपाहिज हो गए।

पिछले महीने पैटेन ने जब अपनी रिपोर्ट जारी की थी तब डेनन ने इसे नीचता बताया था। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा था कि वह गुतेरस के साथ सारे संबंध खत्म करना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन दोनों रिपोर्ट्स में इजरायल के दुश्मन हमास को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है।

NEET-UG री-एग्जाम से पहले NTA की मेगा मॉक ड्रिल, 5,500 से अधिक केंद्रों पर सुरक्षा की परख

नई दिल्ली
 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने NEET-UG की री-एग्जाम परीक्षा से ठीक एक दिन पहले देशभर में मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया है। इस मॉक ड्रिल के जरिए एनटीए परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप से परख रही है।

यह फुल-स्केल रिहर्सल सुबह 9 बजे से रात के 8 बजे तक चलेगी। देश के 551 और विदेश के 14 शहरों में 5,500 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिन्हें हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील किया गया है।

इस री-एग्जाम में 22.79 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल होंगे। इस मॉक ड्रिल को करने का मुख्य उद्देश्य 21 जून की मुख्य परीक्षा को पूरी तरह से सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है?
इसमें परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्रों की सुरक्षित डिलीवरी, सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, और बहुस्तरीय सुरक्षा जांच जैसी सभी प्रक्रियाओं का वास्तविक समय में परीक्षण किया जाता है।

6,669 पर्यवेक्षक तैनात किए गए
एनटीए के अनुसार, पुनर्परीक्षा में कई एजेंसियों और प्रशासन के विभिन्न स्तरों के बीच घनिष्ठ समन्वय शामिल है, जिसमें 674 शहर समन्वयक शहर-स्तरीय संचालन की देखरेख कर रहे हैं और परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र निगरानी के लिए 6,669 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर केंद्र अधीक्षक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।

एनटीए ने बताया कि पुनर्परीक्षा के सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित कुल मिलाकर 2 लाख से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है। एनटीए इस बार किसी तरह की चूक करना नहीं चाहती है।

14 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदने का आरोप, उत्तराखंड में 12 अधिकारियों पर कार्रवाई

उत्तराखंड
उत्तराखंड की नौकरशाही में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक भूमि खरीद मामले ने प्रशासनिक तंत्र की इतनी बड़ी परतें उधेड़ दी हों. एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति, दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई, कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन और मुकदमे की तलवार.

करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के आरोपों से यह मामला शुरू हुआ था.  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जिस सख्ती के साथ कार्रवाई की है, उसने सचिवालय से लेकर जिलों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में अब लापरवाही भी भारी पड़ सकती है.

सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों
सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की है. वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट देने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन सैलरी इनक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

कैसे खुली पूरे मामले की परतें
अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई एक भूमि खरीद अचानक सुर्खियों में आ गई. आरोप लगा कि जिस जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये के आसपास थी, उसे करीब 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया. मामला सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सवाल उठने लगे. आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या जमीन की वास्तविक जरूरत थी? क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन में सचिव रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी.

100 पन्नों की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
रणवीर चौहान ने हरिद्वार पहुंचकर पूरे मामले की गहन जांच की. फाइलों की पड़ताल हुई, अधिकारियों के बयान लिए गए और भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया गया. लंबी जांच के बाद करीब 100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी गई. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला लिया गया. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

जांच में क्या मिला
रिपोर्ट के मुताबिक भूमि खरीद की प्रक्रिया कृषि भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शुरू हुई थी, लेकिन अंतिम खरीद वाणिज्यिक दरों पर की गई. जांच अधिकारियों को यह बिंदु सबसे अधिक संदिग्ध लगा. इसके अलावा भूमि खरीद के लिए जरूरी लैंड कमेटी का गठन नहीं किया गया. सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी खरीद से पहले कई स्तरों पर परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया होती है, लेकिन यहां कई महत्वपूर्ण चरण या तो पूरे नहीं किए गए या फिर अत्यधिक जल्दबाजी में निपटा दिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़ी धारा-143 की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेजी से पूरी की गई. बताया गया कि सामान्य तौर पर समय लेने वाली यह प्रक्रिया महज दो से तीन दिनों के भीतर पूरी हो गई. रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम स्तर पर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए स्टेनो से ही राजस्व संबंधी अभिमत तैयार करवाया गया. यदि यह तथ्य अंतिम रूप से सिद्ध होता है तो इसे प्रशासनिक नियमों की गंभीर अनदेखी माना जाएगा.

जमीन पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में केवल कीमत और प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि भूमि चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं. बताया गया कि खरीदी गई जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल आवश्यकता भी स्पष्ट नहीं थी. ऐसे में यह सवाल और बड़ा हो गया कि आखिर उसी भूमि को खरीदने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई. जांच एजेंसियां अब यह भी पड़ताल कर रही हैं कि भूमि चयन के दौरान क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं.

निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक
मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था. उस समय भी इस कार्रवाई को अभूतपूर्व माना गया था. लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया. अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति तक पहुंच गया है.

अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी. राज्य सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा की जाएगी. कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है. सरकार का दावा है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो कार्रवाई तय है.

कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान पर गिरी बिजली, 141 यात्रियों को सुरक्षित उतारा गया

नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से शुक्रवार को अगरतला जाने वाली इंडिगो की एक फ्लाइट एयरपोर्ट पर खड़ी थी. इसी दौरान जबरदस्त तूफान के दौरान बिजली गिरी और फ्लाइट उसकी चपेट में आ गई. सुरक्षा नियमों के तहत यात्रियों को विमान से उतारा गया और नियमों के मुताबिक जरूरी जांच की गई. इसके बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया.

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एहतियातन ग्राउंड पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा के लिए ले जाया गया. सूत्रों के मुताबिक, किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर तूफान के दौरान अगरतला जा रहे इंडिगो के एक विमान पर बिजली गिरी.

क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तूफान और बारिश के बीच हुई, जिसके लिए एयरपोर्ट ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर (AOCC) ने मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए थे. उन्होंने बताया कि इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ. इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 (VT-IPW) एरोब्रिज 56L पर खड़ी थी, तभी सुबह करीब 9:30 बजे उस पर बिजली गिरी. बिजली गिरने से विमान के पावर सिस्टम पर असर पड़ा, जिससे अचानक पावर ऑफ हो गया.

अधिकारी ने बताया कि जब बिजली गिरी, तो A320 विमान में 141 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे. एहतियात के तौर पर एयरलाइन ने यात्रियों को विमान से उतार दिया और बाद में उन्हें A321 विमान (VT-ICD) से रवाना किया गया. यह फ्लाइट असल में सुबह 9.20 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन यात्रियों के साथ दोपहर 12.50 बजे रवाना हुई.

इंडिगो के मुताबिक, दो ग्राउंड स्टाफ मामूली रूप से प्रभावित हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारी ने बताया कि मेडिकल चेकअप के तुरंत बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.

कोलकाता और आसपास के जिलों में शुक्रवार सुबह से ही आंधी-तूफान और बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलजमाव हो गया है और ट्रैफिक में रुकावट आने की खबरें आईं.

तेजस MK2 की ताकत से दुनिया हैरान! THAAD-आयरन डोम को दे सकता है चुनौती, राफेल जैसी रफ्तार का दावा

बेंगलुरु 

 दशकों पहले जिस देश के पास जितनी मजबूत आर्मी यानी थलसेना होती थी, उसे उतना पावरफुल माना जाता था. फिर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमले के बाद कॉम्‍बैट फील्‍ड में एयरफोर्स की धमाकेदार एंट्री हुई. आज 21वीं सदी में दुनिया दो भीषण सशस्‍त्र संघर्ष का साक्षी बनी है – रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जंग. इन दोनों युद्ध में एक बात कॉमन है – एरियल अटैक यानी हवाई हमले. इन संघर्षों में पैदल सेना यानी आर्मी का न के बराबर यूज किया गया. हवाई हमले प्रमुख रहे. फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने प्रतिद्वंद्वी देशों की हालत खराब करके रख दी. इसके दो परिणाम सामने आए हैं – पहला फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने वाले प्रोजेक्‍ट्स का रफ्तार मिली है. दूसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर जोर दिया जाने लगा है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र परियोजना नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम का हिस्‍सा है. इसके अलावा देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर फाइटर जेट डेवलप करने की प्रक्रिया को भी रफ्तार मिली है. इसी क्रम में भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. तेजस फाइटर जेट के MK2 वेरिएंट Mk1A की तुलना में काफी कम रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) हासिल करने में सफल रहा है। 

 इसका मतलब यह हुआ कि तेजस MK2 मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा दे सकता है. साथ ही THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को धता बताने से महज कुछ कदम ही दूर है. इस खासियत के चलते तेजस MK2 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के बीच का ब्रिज भी माना जा रहा है. साथ ही इसकी स्‍पीड राफेल फाइटर जेट जितनी होने वाली है। 

भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 फाइटर जेट (मीडियम वेट फाइटर) में रडार से बचने की क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सुधार किया गया है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा. इसका अर्थ है कि नए विमान की रडार पर दिखाई देने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन को चकमा देने और सर्वाइवल की क्षमता बढ़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ADA के परियोजना निदेशक ने बताया कि तेजस MK2 का फ्रंटल आरसीएस तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई होगा. स्वतंत्र आकलनों के अनुसार, साफ कॉन्फिगरेशन (बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों के) में इसका फ्रंटल आरसीएस 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है. यह आंकड़ा आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में काफी प्रभावशाली माना जाता है। 

  • RCS में कमी लाने वाली प्रमुख खासियतें
  •     एडवांस शेपिंग और एज अलाइनमेंट (किनारों का विशेष डिजाइन), जिससे रडार तरंगें अपने स्रोत की ओर वापस परावर्तित यानी रिफ्लेक्‍ट होने के बजाय दूसरी दिशा में मुड़ जाती हैं। 
  •     S-डक्ट (S-Duct) या ट्विस्टेड एयर इंटेक, जो इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को छिपाते हैं. कंप्रेसर ब्लेड्स किसी भी लड़ाकू विमान में रडार के लिए सबसे बड़े परावर्तक (रिफ्लेक्टर) माने जाते हैं। 
  •     विमान के पंखों, फ्यूजलाज (मुख्य ढांचे), कैनार्ड्स और अन्य सतहों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग, जो धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है। 
  •     स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग, जिसे एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है। 
  •     सतहों के बीच अधिक चिकने और निर्बाध संक्रमण (स्मूथ सरफेस ट्रांजिशन) तथा बाहरी उभारों और गैप्स की संख्या में कमी, जिससे रडार पर विमान की पहचान और भी कठिन हो जाती है। 

मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के साथ बड़ा आकार
दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 फाइटर जेट आकार में अपने पूर्ववर्ती एमके-1ए से बड़ा है. इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज कपल्ड कैनार्ड और अधिक ईंधन तथा हथियार ले जाने की क्षमता होगी. सामान्य तौर पर विमान का आकार बढ़ने से उसकी रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन डिजाइनरों ने एडवांस एयरोडायनामिक डिजाइन, स्मूथ ट्रांजिशन और व्यापक रूप से कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल के जरिए इसकी रडार पहचान को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफलता हासिल की है. तेजस एमके-1ए पहले से ही अपनी श्रेणी के विमानों में अपेक्षाकृत कम आरसीएस के लिए जाना जाता है. इसका अनुमानित फ्रंटल आरसीएस लगभग 0.5 वर्ग मीटर या उससे कम माना जाता है. अब इसमें चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को लो विजिबिलिटी वाले उन विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिनकी तुलना अक्सर महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से की जाती है। 

रडार को चकमा देने की क्षमता
रडार से कम दिखाई देने की यह क्षमता विमान को दुश्मन के रडार द्वारा देर से पकड़े जाने में मदद करेगी. इससे विशेष रूप से बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) एरियल वॉर में इंडियन एयरफोर्स को सामरिक बढ़त मिल सकती है. हालांकि, विमान को पूरी तरह हथियारों और ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम आरसीएस बनाए रखना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. बाहरी हथियार, पॉड और अतिरिक्त टैंक रडार सिग्नेचर को बढ़ा देते हैं. इसी कारण डिजाइनर एडवांस रडार और अन्य तकनीकों पर काम कर रहे हैं। 

भारत के एरियल पावर को नई ऊंचाई
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी सुधारों के बावजूद विमान के विकास और वायुसेना में शामिल किए जाने की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. भारतीय वायुसेना को अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजस MK2 की आवश्यकता है, खासकर तब तक जब तक एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो जाती. GE F414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और अन्य आधुनिक सिस्‍टम्‍स के साथ तेजस MK2 भारतीय वायुसेना के लिए एक शक्तिशाली लड़ाकू प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, एडवांस सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता से यह विमान भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। 

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