रेलवे का नया मोबाइल ऐप लॉन्च, अब ट्रेन 15 मिनट से ज्यादा लेट हुई तो तुरंत मिलेगा अलर्ट

भोपाल 
भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। आने वाले समय में ट्रेनों के लेट होने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही पर सटीक और रियल-टाइम नजर रखने के लिए एक आधुनिक एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस खास ऐप का नाम ‘Punctuality BZA’ है, जिसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है।

इस डिजिटल तकनीक के आने से अब रेलवे के परिचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर ही किसी भी ट्रेन की सटीक लोकेशन, उसकी गति और देरी से जुड़ी पल-पल की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले जिस काम के लिए सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, वह काम अब बेहद तेज और आसान हो गया है।

एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी पूरी कुंडली
‘Punctuality BZA’ एप्लीकेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिंगल डैशबोर्ड पर ही यूजर को ट्रेन संचालन से जुड़ी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इस ऐप में मिलने वाली मुख्य सुविधाएं इस प्रकार हैं:

    लाइव ट्रैकिंग: अलग-अलग रूट और सेक्शन पर ट्रेनों की मौजूदा स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग।

    इंटेलिजेंट अलर्ट सिस्टम: यदि कोई ट्रेन अपने निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक लेट होती है, तो यह ऐप अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।

    जीपीएस कनेक्टिविटी: यह ऐप सीधे ‘जीपीएस आधारित लेट ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम’ से जुड़ा है, जो ट्रेनों की आवाजाही को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करता है।

    कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ट्रेन के लेट होने की वजहों को डिजिटल माध्यम से तुरंत दर्ज कर लिया जाता है, जिससे पुराना कागजी काम बेहद कम हो गया है। इससे ट्रेन मैनेजरों को सुरक्षित ट्रेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

पुराने सिस्टम (ICMS) की कमियों से मिलेगा छुटकारा
इस नई तकनीक के आने से पहले रेलवे मुख्य रूप से ‘इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम’ (ICMS) के वेब पोर्टल का इस्तेमाल करता था। पुराने सिस्टम में अधिकारियों को बार-बार वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगइन करना पड़ता था। साथ ही, अलग-अलग जानकारियों के लिए बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नया ऐप इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और ‘यूजर-फ्रेंडली’ बनाता है।

यात्रियों और रेलवे को क्या होगा बड़ा फायदा?
इस ऐप के जरिए मिलने वाले सटीक डेटा से रेलवे के उच्च अधिकारियों को विपरीत परिस्थितियों में तुरंत और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जब रेलवे स्टाफ के पास हर ट्रेन की रियल-टाइम लोकेशन होगी, तो वे ट्रेनों को ज्यादा कुशलता से री-शेड्यूल कर पाएंगे, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को होगा और उनकी असुविधाएं कम होंगी। विजयवाड़ा डिवीजन में इस ऐप के सफल प्रयोग के बाद अब इसे भारतीय रेलवे के अन्य डिवीजनों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

 

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर

अब तक 1 लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ताओं के खातों में पहुंची 100 करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी

भोपाल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल एक लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ता लाभान्वित हुए हैं। इनके बैंक खातों में 1010 करोड़ 25 लाख रूपये की सब्सिडी जमा कराई जा चुकी है। योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयंत्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

कहां करें आवेदन

पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए संबंधित विद्य़ुत वितरण कंपनी की वेबसाइट अथवा उपाय एप, वॉट्सऐप चेटबॉट एवं टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं।

कंपनीवार स्थिति

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 51 हजार 343 सोलर संयंत्रों पर 361 करोड़ 99 लाख, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 58 हजार 715 संयंत्रों पर 4162 करोड़ 30 लाख 39 हजार और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 33 हजार 092 सोलर संयंत्रों पर 231 करोड़ 95 लाख 50 हजार रूपये की सब्सिडी दी गई है।

 

Petrol-Diesel Price Cut: 2 साल बाद बड़ी राहत, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 हुआ सस्ता, जानें किस कंपनी ने घटाए दाम

नई दिल्ली

प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देश के आम नागरिकों को राहत देते हुए रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. नई दरें बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं।  अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए पर आ गया है। नायरा के देशभर में 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं।

इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कम की गईं कीमतें पूरे देश में नयारा (Nayara) के 7000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों  पर लागू होगी.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और दूसरे लोकल टैक्स में अंतर के कारण पंप की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर दिख सकता है। 

आज प्राइवेट रिटेलर ने भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. ये तीनों कंपनियां मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों को संभालती हैं। 

प्रमुख शहरों में अनुमानित कीमतें
शहर            पेट्रोल की अनुमानित कीमत     डीजल की अनुमानित कीमत     सरकारी तेल कंपनियों के रेट
दिल्ली            97.12 रुपये                                          92.20 रुपये            102.12 और 95.20 रुपये
नोएडा            96.96 रुपये                                          87.03 रुपये           101.96 और 90.03 रुपये
मुंबई              106.21 रुपये                                       91.50 रुपये            111.21 और 94.50 रुपये

7000 पेट्रोल पंपों पर सस्ता पेट्रोल-डीजल
Nayara Energy रूस की रोसनेफ्ट समर्थित फ्यूल कंपनी है. इसने हाल ही  भारत में अपने पेट्रोल पंप की संख्या 7,000 के पार पहुंचाई है और इसके साथ ही ये प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेल सेलर के रूप में उभरी है. तेल की कीमतों पर बीते कुछ समय में महंगाई की मार से इस कंपनी ने अब अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल प्राइस में 5 रुपये और डीजल प्राइस में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का तोहफा दिया है। 

इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नायरा के 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं. यहां ध्यान रहे कि विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर Petrol-Diesel Price अलग-अलग हो सकती हैं, जो लोकल टैक्स जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) पर निर्भर करती हैं। 

सरकारी तेल कंपनियों की कीमतें स्थिर
एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करते हुए लोगों को राहत दी है, तो वहीं सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने अपनी कीमतों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL),  जो मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल-पंपों में से 90 फीसदी से ज्यादा का संचालन करती हैं, इनपर फ्यूल प्राइस यथावत बने हुए हैं. राजधानी दिल्ली में, IOC आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। 

जितनी बढ़ोतरी, उतनी ही की कटौती
गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran War) से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस में तेज उछाल देखने को मिला था. इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करने के मामले में पहली फ्यूल रिटेलर्स में नायरा एनर्जी भी शामिल थी. बीते 26 मार्च को कंपनी ने अपने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब इतनी ही कटौती भी की है। 

नायरा के बाद करीब चार साल तक स्थिर रखने के बाद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम फोड़ते हुए देशवासियों को झटका दिया था. इंडियन ऑयल से बीपी, एचपी तक ने मई महीने में एक के बाद एक कई बार Petrol-Diesel Price में बढ़ोतरी की थी और इनकी कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके पीछे कंपनियों ने मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से बढ़ती लागत का हवाला दिया था। 

युद्ध थमने, क्रूड सस्ता होने का असर
नायारा एनर्जी गुजरात के वाडिनार में हर साल 20 मिलियन टन क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद की गई है. समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है। 

 

 

क्रिप्टो करेंसी पर बड़ा फैसला जल्द? RBI और संसदीय समिति की अहम बैठक पर सबकी नजर

नई दिल्ली
क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Regulations) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। इस संबंध में संसदीय वित्त समिति, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाली है। दिल्ली में 2 जुलाई को होने वाली इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को रेगुलेट करने के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।

नोटिस के अनुसार, कमेटी “वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर एक अध्ययन और आगे की राह” विषय पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी।

RBI का सतर्क रवैया
रेगुलेटर्स के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर चल रही बातचीत के लिए यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि RBI का डिजिटल एसेट्स को लेकर हमेशा से ही सतर्क रवैया रहा है। समय-समय पर RBI गवर्नर्स ने VDA इकोसिस्टम की कमियों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी है।

नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था, “स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज़्यादा जोखिम है, इसलिए हम इनके मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।” हालांकि, सेंट्रल बैंक UPI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल लेंडिंग का समर्थन करना जारी रखे हुए है।

यह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ आठवीं बैठक होगी। पिछली दो बैठकों में, स्टैंडिंग कमेटी ने भारत में काम कर रहे कई घरेलू और ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंजों से मुलाकात की थी ताकि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझा जा सके। 20 मई को, पैनल ने दिल्ली में क्रिप्टो एक्सचेंज Binance, WazirX और Zebpay के साथ रेगुलेशन के दायरे, VDA इंडस्ट्री के लिए आगे की राह और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की। 

इससे पहले, दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी। रेगुलेटर्स ने पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी चिंताओं, इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन और रेमिटेंस से जुड़ी समस्याओं, विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को एक ही पॉलिसी और कानूनी ढांचे के तहत लाने, और ग्लोबल एक्सचेंजों के लिए मौजूदा GST सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सवाल पूछे थे।

 

साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों के नए दौर में उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष से मिली सीख पर तय होगी भविष्य की शैक्षणिक रणनीति

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया।

टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर

कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति

‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए।

अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए।

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

30 जून तक 2 लाख 93 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश पोर्टल पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में 5,48,778 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 4,68,539 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 2, 93, 257 विद्यार्थियों ने विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है।

पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश में 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 30 जून तक 2,06,482 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 2,93,257 हो गई है। यानी एक वर्ष में 86,775 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, ऑनलाइन, सरल एवं विद्यार्थी-केंद्रित प्रवेश व्यवस्था, महाविद्यालयों में समयबद्ध दस्तावेज सत्यापन तथा प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने रिक्त सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। अब जिन शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीटें रिक्त हैं, वहाँ इच्छुक विद्यार्थी सीधे संबंधित महाविद्यालय पहुँचकर उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं सीट आवंटन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करा सकेंगे। सीट आवंटित होने के तुरंत बाद विद्यार्थी उसी दिन निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त चरण अथवा प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी पात्र विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम शासकीय अथवा अशासकीय महाविद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर इस विशेष सुविधा का लाभ उठाएँ तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रवेश सुनिश्चित करें।

 

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

वर्ष 2030 तक उदानिकी फसलों का क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ेगा

भोपाल
मध्यप्रदेश ने इतिहास बनाते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जी आई टैग हासिल करने में सफलता हासिल की है। देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिला है। इनमें गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बेंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल है

इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोक नगर की खिरनी को जी आई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कृषक कल्याण वर्ष में यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के आय को दो गुना बढ़ाने के लिए उनसे उदयानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आव्हान किया है। फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर में उदयानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है।

कुम्भराज धनिया

कुम्भराज धनिया गुना जिले में लगभग 60 वर्षों से उगाया जा रहा है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार होती है। इसकी उपज लगभग 12-15 कुंटल प्रति हेक्टर प्राप्त होती है। इसमें लगभग 0.4 से 0.50 प्रतिशित वाष्पशील तेल है, जिसकी वजह से इसमें बहुत अच्छी खुशबू व मिठास आती है। धनिया गुना जिले से अन्य देशो को निर्यात किया जा रहा है। कुम्भराज धनिया का स्वाद दूसरे धनिया की तुलना में तेज और बेहतर है, इसका चमकीला हरा रंग, उत्तम आकृत्ति और माप तथा शानदार सुगंध है। अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है जो पूरे देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है।

बरमान भटे

नर्मदा की बालुई मिट्टी में पैदा होने वाले भटे का जायका कुछ अलग ही है। यही कारण है कि बाहर से भी लोग अक्सर अपने माध्यमों से बरमान के भटे को बुलाते है, मंडियों में बरमान के भटे की तलाश रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नर्मदा किनारे कम तापमान होने की वजह से यहां के भटे का स्वाद अलग रहता है।

बैतूल का गजर‍िया आम

बैतूल जिले में खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किले जो 500 साल से ज्यादा पुराने किलो में आते हैं। जो यह बताते है की बैतूल गोंड राजाओ का केंद्र था। भारत वर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम है। ताजे फल के उपयोग के अतिरिक्त आम के फलों से अनेक परिरक्षित पदार्थ बनाये जाते हैं। कच्चे आम का अचार, अमचूर आदि बनाये जाते जबकि पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम, अमावट आदि बनाये जाते हैं। अधिकतर आम के बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाये गये हैं, इनकी उत्पादकता अत्यन्त कम है।

खरगोन मिर्च

खरगोन जिले की मिर्च सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। जिले में साल दर साल मिर्च की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मण्डियों में से एक यहाँ खरगोन जिले में सनावद के पास बेदिया में स्थित है। निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सर्वाधिक मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की लाल मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है।

खुरासानी इमली

मांडव की माटी का जादू ऐसा है कि जो भी यहां आया, यहीं का होकर रह गया। अलग-अलग सभ्यताओं के राजवंश हों या भेंर की वनस्पतियां, सभी यहां की मिट्टी के साथ एक हो गए। ऐसा ही एक उदाहरण अफ्रीका के शुष्क राज्य का बाओबाब है। 14 वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था और इसका नाम ‘बाओबाब से बदलकर खुरासानी इमली कर दिया गया था। इसे एक और नाम मांडवी इमली से भी जाना जाता है। यह पेड़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने जड़ों सहित इसको उल्टा लगा दिया हो। ऊपर और तना नीचे, पत्तियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही बढ़ती हैं।

सीताफल

सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में 6500 मीट्रिक टन से अधिक सीताफल का उत्पादन होता है। सीताफल का वजन 600 से 700 ग्राम होने के कारण इसका नाम जंब सीताफल रखा गया है। अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के कारण इसकी प्रदेश और देश में भी अच्छी मांग है।

मालवी आलू

भारतीय आलू रोग प्रतिरोधकता, आकार, माप, त्वचा, रंग आदि के मामले में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को पूरा करता है और आलू का प्रसंस्करण इसे अधिक आर्थिक मूल्य देता है। भारत के भीतर, मध्य प्रदेश राज्य वर्तमान में आलू का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य की हिस्सेदारी 6.68 प्रतिशत थी और 2014-15 से 2018-19 के बीच पांच वर्षों के लिए उत्पादन औसत 3225.95 है। मध्य प्रदेश के कई कृषि जलवायु क्षेत्रों में से, मालवा क्षेत्र मध्य प्रदेश में आलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हरी मटर जबलपुर

हरी मटर जबलपुर की एक लोकप्रिय सब्जी और प्रमुख रबी फसल है। ये काफी पौष्टिक भी होते हैं और इनमें उचित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हरी मटर या “गार्डन मटर”, छोटे, गोलाकार बीज हैं जो पाएसम सटाईवम पौधे द्वारा उत्पादित फली से आते हैं। वे सैकड़ों वर्षों से मानव आहार का हिस्सा रहे हैं और दुनिया भर में खाए जाते हैं। फसल अवधि 40-60 दिन है। जिले में वर्ष 2018-19 में हरी मटर की कुल बुआई 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी है तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक उत्पादन 52,500 टन है।

गराडू

गराडू (हायस्कोरियालाटा) मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख फसलों में से एक है। यह रतालू की विभिन्न प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है। मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है। गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से भी जाना जाता है। गराडू (बैंगनी रतालू) मालवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है, इसकी सत्र में विभिन्त्र पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों में उपयोग किया जाता है।

नरसिंहपुर गुड़

भारत दुनिया का एक प्रमुख गुड़ उत्पादक देश है, यह दुनिया में लगभग 58 प्रतिशत गुड़ उत्पादन में योगदान देता है। गुड़ उद्योग मध्य प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है, यह भारत में लगभग 6 प्रतिशत गुड़ उत्पादन का योगदान देता है। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिला गुड़ निर्माण के लिए लोकप्रिय है। यहां ज्यादातर काली कपास मिट्टी है जिसमें मिट्टी की मात्रा 60-65% है, पानी धारण करने की क्षमता अधिक है। सितंबर-अक्टूबर में बोए गए गने के साथ सहफसली खेती। मध्य प्रदेश के कुल गत्रा क्षेत्र का लगभग 65% (लगभग 75000 हेक्टेयर) नरसिंहपुर जिले में है। इसे मध्य प्रदेश का चीनी का कटोरा कहा जाता है। इस जिले में 2500-3000 टीसीडी क्षमता वाली 09-10 चीनी मिलें है, लेकिन गन्ना विकास गतिविधियां नहीं कर रही हैं। ऐसे में किसान अब गुड़ उत्पादन उद्यमिता विकसित करने के लिए काफी उत्सुक हैं।

जबलपुर सिंघारा

सिंघाड़ा की खेती के लिए सात महीने की मेहनत लगती है. पौधे को अपने पूर्ण आकार में विकसित होने में चार महीने लगते हैं और फल आने में तीन महीने और लगते हैं। बुआई का मौसम मई-जून के गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। किसान एक छोटे पोखर पा छोटे जलाशय में बीज बोते हैं। एक महीने के भीतर, पौधा एक बेल में बदल जाता है जिसे बाद में बड़े तालाब में प्रत्यारोपित किया जाता है। फलों की तुड़ाई दिसम्बर-जनवरी माह में की जाती है। जबलपुर, सतना और आसपास के जिलों में सिंधारा की खेती करने वाले लगभग 4,500 किसान हैं, जो मध्य प्रदेश में सिंधारा के मुख्य हितधारक हैं। ताजा सिंघाड़ा अपनी उच्च जल सामग्री (80%), स्टार्च (52%), प्रोटीन (1.87%) और टीएसएस (7-8%) के लिए जाना जाता है।

नूरजहाँ आम

मध्य प्रदेश का कट्टीवाड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, हाल ही में, इसने एक और अनोखे आकर्षण नूरजहाँ आम के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल की है। इनका वजन 3-3.5 किलोग्राम होता है और यह एक फुट तक लंबे हो सकते हैं। इस किस्म के उत्पादकों का मानना है कि यह सैकड़ों साल पहले अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश तक पहुंची थी। और जबकि इस फल के कई उत्पादक हैं, इस किस्म के सबसे प्रसिद्ध आम नूरजहाँ मैंगो फार्म्स से आते हैं, जिसका स्वामित्व और प्रबंधन किया जाता है।

 

सिवनी में 1 जुलाई को धान महोत्सव, CM मोहन यादव किसानों को देंगे ₹2.82 करोड़ और विकास कार्यों की सौगात

सिवनी 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई यानी आज  सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित धान महोत्सव में शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजन स्थल पर बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस आयोजन में मुख्यमंत्री किसानों को सौगात देंगे तो वहीं कृषि, श्रीअन्न संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित करेंगे। ये राशि 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।

विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे सीएम
कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि, कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही, विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। कृषिका ऐप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।

इस दिशा में अहम कदम है धान महोत्सव
श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषक तत्व से भरपूर होते हैं और इन्हें कम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गए हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारें श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, जिनमें प्रोत्साहन राशि और बाजार लिंकेज शामिल हैं। ये पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प भी प्रदान करती है। सिवनी में धान महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री का दौरा जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की घोषणा के लिए अहम माना जा रहा है। इन दौरों से स्थानीय प्रशासन को जनता से सीधे जुडऩे और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री का सिवनी दौरा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की विकास रणनीतियों को आकार देने में सहायक होगा। यह अवसर स्थानीय जनता के लिए भी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है।

कलेक्टर ने व्यवस्थाएं परखीं
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक ग्राउंड, हेलीपैड स्थल, सेफ हाउस और सुकतरा हवाई पट्टी का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सभी स्थानों पर चल रही तैयारियों का जायजा किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच की व्यवस्था, दर्शकों की बैठक व्यवस्था, पार्किंग स्थल, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, साफ सफाई और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा प्रत्येक व्यवस्था को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का होगा कायाकल्प, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके।

उल्लेखनीय है कि ज्योतर्लिंग परिसर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास की तैयारी की गई है।

इन मंदिरों का होगा कायाकल्प
मध्य प्रदेश सरकार से तैयार इस योजना में महाकाल ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई गई हैं।

ये सुविधाएं होंगी विकसित
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। असल में, कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित स्थान होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ से अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यकता अतिरिक्त भूमि शामिल कर इन मंदिरों में खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे।

प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध हो सके। मास्टर प्लान के अनुसार, इन मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सुरक्षा पर भी विशेष फोकस
मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

Russia Oil to India: जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी कच्चे तेल का आयात, बंदरगाहों पर टैंकरों की भरमार

नई दिल्‍ली
जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है। 

एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे। 

अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। 

कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात
CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है। 

भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा 
भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई। 

रूसी तेल से मिली मदद 
ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

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