90 डिग्री ब्रिज के बाद भोपाल का नया ‘कमाल’, फुटपाथ बना दिया लेकिन पहुंचने का रास्ता ही नहीं छोड़ा

 भोपाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है। 

शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है। 

स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है। 

सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं। 

रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है। 

ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं?

फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल
लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है। 

रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 

 

Monsoon 2026: मानसून से पहले उमस का कहर, बैतूल में 90% और भोपाल में 64% ह्यूमिडिटी; IMD का अलर्ट जारी

भोपाल
 देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक ‘अस्थायी ठहराव’ देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं।

मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

क्यों थम गई मानसून की रफ्तार?
मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

    जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
    प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।

    वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।

    सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है।

मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार
भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है।

शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं
    बैतूल: 90 प्रतिशत
    रायसेन: 77 प्रतिशत
    पचमढ़ी: 73 प्रतिशत
    भोपाल: 64 प्रतिशत

खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम
वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया।

शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल
पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश?
सिवनी: 22.6 मिमी
श्योपुर: 20.4 मिमी
बैतूल: 16.6 मिमी
रीवा: 13.0 मिमी
राजगढ़: 13.0 मिमी
भोपाल: 14.0 मिमी
सतना: 12.0 मिमी
सागर: 8.7 मिमी

अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे ‘ब्रेक मानसून’ कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा।

इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।

    प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
    भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।
    कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
    अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।
    किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल

मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित

भोपाल 

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन

वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है।

कैसे होगी निगरानी

इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा।

क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया

विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है।

निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम

गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।

 

एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने कर्नाटक स्थित दोणिमलै परिसर में

हैदराबाद

 एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो दोणिमलै को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही हैं । साथ ही, एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है ।

इस यात्रा के दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और दोणिमलै परिसर से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की । इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है ।
प्रबंधन ने 35% तक Fe युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की । परंपरागत रूप से, इन संसाधनों का सीमित उपयोग किया जाता था और मूल्यवान लौह सामग्री होने के बावजूद इन्हें अपशिष्ट के रूप में माना जाता था । लाभकारी और वैज्ञानिक खनिज प्रसंस्करण के माध्यम से, एनएमडीसी इन कम उपयोग किए गए संसाधनों को मूल्यवान कच्चे माल में बदल रहा है, मौजूदा खदानों से अधिक लौह अयस्क को पुनः प्राप्त कर रहा है, जबकि अपशिष्ट उत्पादन को कम कर रहा है । यह पहल खनन की सुस्थिर प्रथाओं का समर्थन करती है, खनिज संरक्षण में सुधार करती है, खनन कार्यों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है और भारत के इस्पात क्षेत्र की कच्ची सामग्री की बढ़ती आवश्यकताओं में योगदान करती है ।

कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था । डिजिटल प्रणाली ने रियल टाइम निगरानी और सामग्री की आवाजाही के सत्यापन को सक्षम बनाकर लौह अयस्क प्रेषण में पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत बनाया  है । यह पहल यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि खनिज संसाधनों को उनके इच्छित गंतव्यों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए, साथ ही मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया जाए और परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार लाया जाए ।

एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता  है । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, एनएमडीसी का मानना है कि सतत विकास उत्पादन लक्ष्यों से परे होता है और इसमें कर्मचारियों के लिए बेहतर जीवन-स्तर बनाना, स्थानीय समुदायों का समर्थन करना और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रखना शामिल है ।

इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, “हमारा दृष्टिकोण ऐसे खनन संचालन का निर्माण करना है, जिस पर भावी पीढ़िया गर्व कर सकें । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, हम दोणिमलै को एक मॉडल खनन परिसर बनाने की आकांक्षा रखते हैं, जो जिम्मेदार खनन, नवाचार और कर्मचारी कल्याण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है । जैसे-जैसे एनएमडीसी अपने 100 एमटीपीए विजन की ओर बढ़ रहा है, हम भारत के इस्पात उद्योग को उच्च-गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । साथ ही, हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से हर संसाधन के मूल्य को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यहां तक कि निम्न श्रेणी के अयस्क को उत्पादक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं, साथ ही सुस्थिर और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे    हैं ।

MP में शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादलों के आवेदन आज से, नए नियमों को लेकर बढ़ा विरोध

भोपाल
 मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे।

पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है।

90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा
शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है।

जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ
नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा।

नियमों में राहत की मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।

 

UNHRC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, बोला—एकमात्र अनसुलझा मुद्दा सिर्फ PoK है

 जेनेवा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने पाकिस्तान के सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का ये प्रोपेगैंडा उसकी अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश है। 

दरअसल, पाकिस्तान ने UNHRC में कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और जम्मू-कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। 

इसके जवाब में UN में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा किए गए दावों पलटवार करते हुए कहा, ‘भारत को पाकिस्तान और OIC द्वारा हमारे खिलाफ दिए गए बयानों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हम पाकिस्तान के बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं और हम OIC द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को भी पूरी तरह खारिज करते हैं। 

OIC के कोऑर्डिनेटर पद का गलत इस्तेमाल

अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान द्वारा OIC कोऑर्डिनेटर की भूमिका का गलत इस्तेमाल केवल उसके इस धोखे को और पुख्ता करता है. भारत की ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा को कोई अहमियत देने की इच्छा नहीं है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों की वापसी है। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का ये झूठा प्रचार उसके अवैध कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे दमन की कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने आने से कभी नहीं छिपा सकता। 

भारत ने मानवाधिकार परिषद के सामने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की दयनीय स्थिति को मजबूती से रखा. अनुपमा सिंह ने कहा कि रावलकोट में चल रही त्रासदी, सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की हत्या और वहां की गई बेरहम कार्रवाई उस सिस्टम का नतीजा है जो जबरदस्ती के अवैध कब्जे पर बना है. दशकों से सेना के कब्ज़े, डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग और बुनियादी आजादी से इनकार के कारण वहां के हालात बदतर हो चुके हैं। 

‘अधिकारों का मांग वालों पर चलाई गोलियां’
काउंसिल में बात रखते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि वहां हालात ऐसे मोड़ पर आ गए हैं, जहां आम जनता द्वारा रोटी, बिजली, अधिकारों और सम्मान की मांग का जवाब गोलियों और बेरहमी से दिया जाता है. एक अवैध और गैर-कानूनी कब्जा सिर्फ ताकत के दम पर ही कायम रखा जा सकता है. उन्होंने पाकिस्तान को एक ‘फ्रेंकस्टीन स्टेट’ का जीता-जागता उदाहरण बताया जो अपने ही बनाए आतंकवाद से परेशान है। 

Pak ने आतंकवाद को बनाया सरकारी नीति
अनुपमा सिंह ने कहा कि ये वही देश है, जिसके मौजूदा रक्षा मंत्री आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें तैनात करने की डींगें मारते हैं जो वहां की एक सरकारी नीति है. इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है, जो एक बड़ा विरोधाभास है। 

सिंधु जल संधि पर भारत का रुख
इसके साथ ही उन्होंने सिंधु जल संधि को पुरानी बताते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश सद्भावना और दोस्ती पर आधारित सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता। 

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर, टेक्नोलॉजी में तरक्की और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत के कारण 1960 में हुई इस संधि की प्रासंगिकता पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है. अंत में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय इलाकों पर नजर रखने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने घर को ठीक करे, क्योंकि इस काउंसिल में उसके दिखावे का आकर्षण खत्म हो चुका है। 

Petrol Diesel Price Today: US-ईरान डील के बाद भी नहीं मिली राहत, जानें 19 जून को आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज  के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले आइए जानते हैं आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल किस कीमत पर मिल रहा है और क्या कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा जल्द ग्राहकों तक पहुंचेगा। 

देश के बड़े शहरों में क्या हैं नए रेट?
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा कीमतों के मुताबिक, आज पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। 

    दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.
    मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
    कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है.
    चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.

कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है. गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भुवनेश्वर और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता हुआ है।

कच्चा तेल  79 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 9% की बड़ी गिरावट
ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है.पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 9% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है। 

क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? मंत्री ने दिया जवाब
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं. इसके अलावा परिवहन लागत, बाजार की स्थिति और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत जैसे कई अन्य कारक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 

सुरेश गोपी के मुताबिक, कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लेता है. यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है और वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में भी कुछ समय लगेगा. मंत्री ने साफ कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल कुछ सस्ता हुआ है। 

सरकार पर पड़ा 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ
सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया में इस साल हुए युद्ध के दौरान ग्लोबल ऑयल मार्केट  में काफी अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा.उन्होंने बताया कि बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. इसके कारण सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 

मंत्री ने यह भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने टैक्स में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा. केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना जरूरी है। 

देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य, घबराकर  न करें खरीदारी
सरकारी तेल कंपनियों ने कहा है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां भी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.फ्यूल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तेल सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) लगातार सरप्राइज निरीक्षण कर रहे हैं. नियमों के उल्लंघन पर 14 पेट्रोल पंपों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 598 पेट्रोल पंपों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। 

आम लोगों को सलाह दी गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें। 

US-Iran शांति समझौते का क्या पड़ा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है.इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो गई है. यही जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। 

अमेरिका ईरान युद्ध के दौरान ईरान और अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है। 

क्या ग्राहकों को जल्द मिलेगा सस्ते तेल का फायदा?
एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत मिल सकती है.हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने फिर की PM मोदी की तारीफ, बोले- वह बेहद सख्त और मजबूत नेता हैं

वाशिंगटन 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं। 

इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं। 

 भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा “प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!”

सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, 71% इजरायलियों को ट्रंप पर नहीं भरोसा; जंग में जीत को लेकर भी संशय

यरुशलम
मिडिल-ईस्ट में हालिया संघर्ष के बाद सामने आए एक इजरायली चैनल के सर्वे ने वहां की राजनीति और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चैनल 12 के सर्वे के मुताबिक, बड़ी तादाद में इजरायली नागरिक न तो इस जंग में अपने देश को स्पष्ट विजेता मानते हैं और न ही उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वे ईरान के साथ किसी समझौते में इजरायल के हितों की रक्षा करेंगे। 

सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिससे इजरायल की घरेलू राजनीति में बढ़ती असंतुष्टि के संकेत मिले हैं। 

गुरुवार को पब्लिश हुए एक टेलीविज़न पोल में पाया गया कि बहुत कम इजरायली मानते हैं कि उनका देश ईरान के साथ हुई लड़ाई जीता है, या उन्हें भरोसा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक रिपब्लिक के साथ डील करते वक्त उनके हितों का ध्यान रखेंगे। .

नेतन्याहू के बर्ताव पर सवाल!
चैनल 12 न्यूज़ के मुताबिक, ज़्यादातर इजरायली नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायल के हितों को नुकसान पहुंचा है. ये आंकड़े उस मजबूत समर्थन से बिल्कुल अलग हैं, जो इजरायली लोग सालों से हर पोल में ट्रंप को देते आए हैं।  

हालांकि, अब इस हफ्ते साइन किए गए US-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की शर्तों को लेकर पूरे इजरायल में गहरी चिंता है, जबकि ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों की तरफ से हाल ही में इजरायली अधिकारियों की कड़ी सार्वजनिक आलोचना से US-इजरायल संबंधों में दरार का संकेत मिलता है। 

चैनल 12 के पोल में यह पूछा गया कि क्या नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायली हितों को फायदा हुआ या नुकसान; इसमें पाया गया कि 52% लोगों का कहना है कि इससे नुकसान हुआ, जबकि 24% को लगता है कि इससे मदद मिली और बाकी 24% को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या वे ईरान के साथ समझौते में इजरायली हितों का ध्यान रखने के लिए ट्रंप पर भरोसा करते हैं? इस पर 71% लोगों ने कहा कि वे ऐसा नहीं करते हैं, जबकि केवल 13% ने कहा कि वे ऐसा करते हैं और अन्य 16% को नहीं पता. ये संख्या पिछले हफ्ते से इस सवाल पर ट्रंप के लिए गिरावट का संकेत देती हैं, जब आंकड़ा 62% से 21% था। 

इन सवालों को एक सर्वे के हिस्से के रूप में शामिल किया गया था कि अगर अक्टूबर में आम चुनाव आज होते हैं, तो इजरायल के लोग किसको वोट देंगे, जिसमें दिखाया गया है कि जायोनी विपक्षी दल नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से कम रहेंगे। 

‘बिबी का समर्थन करने की सबसे ज्यादा संभावना’
ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच मौजूदा मतभेद को और साफ करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि वे आने वाले चुनावों में नेतन्याहू का समर्थन ‘शायद’ करेंगे, लेकिन पहले यह देखना चाहते हैं कि उनके खिलाफ और कौन चुनाव लड़ रहा है। 

ट्रंप ने ‘कान’ (Kan) पब्लिक ब्रॉडकास्टर को फोन पर दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू के निकनेम का इस्तेमाल करते हुए कहा, “मुझे देखना होगा कि कौन चुनाव लड़ रहा है, लेकिन मुझे बिबी बहुत पसंद हैं. सबसे ज्यादा संभावना यही है कि मैं उनका समर्थन करूंगा। 

ट्रंप ने आगे कहा, “वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा और समझदारी से काम लेना चाहिए.” ऐसा लगता है कि वे लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमलों का जिक्र कर रहे थे, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि वे बिना सोचे-समझे किए गए थे। 

 

‘कॉकटेल 2’ रिलीज के साथ ही छाई, शाहिद-कृति-रश्मिका की फिल्म को मिल रहे पॉजिटिव रिव्यू

शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर ‘कॉकटेल 2’ आज 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. अब रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों के रिएक्शन सामने आने लगे हैं. शुरुआती रिव्यू देखकर लग रहा है कि होमी अदजानिया एक बार फिर दर्शकों के दिलों को छूने में कामयाब रहे हैं.

एक्स पर यूजर्स ने फिल्म के बारे में क्या कहा?
नीतेश नाम के यूजर ने फिल्म का रिव्यू करते हुए एक्स पर लिखा, बॉलीवुड को दुनिया भर में पसंद किया जाता है क्योंकि दक्षिण कभी ऐसा सिनेमा नहीं बना सकता. कॉकटेल 2 ऐसी ही एक शैली है. ‘कॉकटेल 2’ ऐसी फिल्म है, जो रिश्तों और कमिटमेंट पर एक बेहद जरूरी और दिल से जुड़ा संदेश देती है. इस यूजर ने फिल्म को साढ़े चार स्टार दिए है. तमन्ना नाम की यूजर लिखती है, “यह भव्य पैमाने और सुंदर दृश्यों के साथ एक अच्छा रोम-कॉम एंटरटेनर है, लेकिन फिल्म की आत्मा गायब है और सब कुछ सपाट लगता है.”
   
एक्स पर छाया ‘कॉकटेल 2’ का क्रेज
फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने एक्स पर फिल्म की जमकर तारीफ की है. उन्होंने ‘कॉकटेल 2’ को “विनर” बताया और फिल्म को 4 स्टार दिए. तरण ने लिखा कि फिल्म उम्मीदों से कहीं ज्यादा बेहतर निकली है. शानदार परफॉर्मेंस, बेहतरीन म्यूजिक, खूबसूरत विजुअल्स और दमदार राइटिंग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक साधारण लव ट्रायंगल नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी अनप्रेडिक्टेबल कहानी है. फिल्म कई जगह दर्शकों को चौंकाती है और यही चीज इसे अलग बनाती है.

शाहिद कपूर और कृति सेनन ने लूटी महफिल
रिव्यू में शाहिद कपूर की एक्टिंग की खास तारीफ की गई है. तरण आदर्श के मुताबिक शाहिद फिल्म में पूरी तरह फॉर्म में नजर आए हैं. इमोशनल सीन्स हो या हल्के-फुल्के पल, उन्होंने हर जगह शानदार काम किया है. वहीं कृति सेनन को फिल्म की सबसे बड़ी सरप्राइज पैकेज कहा जा रहा है. कृति ने अपने करियर की अब तक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है. रश्मिका मंदाना ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है, लेकिन उनके किरदार को अपनी छाप छोड़ने का ज्यादा मौका नहीं मिला.

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