मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक

‘नियद नेल्लानार’ मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार

जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान होगा प्रारंभ

जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ इसी सोच का विस्तार है।

‘नियद नेल्लानार’ की सफलता से प्रेरित नई पहल

वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित ‘नियद नेल्लानार’ योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की।

योजना की सफलता को देखते हुए इसे ‘नियद नेल्लानार 2.0’ के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।

सुशासन से संतृप्ति की ओर

‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।

 ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी।

31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है।

इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है।

CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी।

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड’ विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी।

तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन

अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी।

दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी।

‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे।
इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प साकार होगा। यह अभियान प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए विकास की यात्रा को और अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाएगा।

ईरान डील पर बनती बात बिगड़ी! वेंस की पहल पर इजरायल ने लगाया ब्रेक, लेबनान में 16 की मौत

वाशिंगटन 

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली समझौता समारोह ऐन मौके पर खटाई में पड़ गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के औपचारिक साइनिंग समारोह के लिए स्विट्जरलैंड रवाना होने ही वाले थे, लेकिन इजरायल ने आखिरी वक्त टांग अड़ा दी. इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी अपील को भी नजरअंदाज कर दिया और लेबनान पर हमला कर दिया. इस हमले में 16 लोगों की मौत हुई है। 

ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह को आपस में न उलझने की हिदायत दी थी. लेकिन इजरायल ने इस चेतावनी को दरकिनार करते हुए गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात दक्षिणी लेबनान पर बड़ा हमला कर दिया. इस हमले के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड जाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते जेडी वेंस को भी अपना दौरा रद्द करना पड़ा। 

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी बताया है कि लेबनान में सीजफायर होने तक स्विट्जरलैंड में ईरान के प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका के बीच होने वाली बैठक टाल दी गई है। 

ट्रंप की अपील को इजरायल ने किया दरकिनार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बड़ी डील से ठीक पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूश सोशल’ पर लिखा था, “अमेरिका शांति के लिए प्रतिबद्ध है और हम मिडिल ईस्ट रीजन में सभी को बढ़ावा देते हैं कि वे हमारी बातचीत को आगे बढ़ने देने के लिए अपना कमिटमेंट बनाए रखें. मार्केट को ये शांति रास आ रही है. तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं. हम लेबनान, हिजबुल्लाह और इजरायल सहित सभी मोर्चों पर पूरी तरह से सीजफायर की उम्मीद करते हैं। 

इजरायल और हिजबुल्लाह में तनाव की लपटें फिर उठीं
इजरायल के हमले के बाद हिजबुल्लाह ने भी मोर्चा खोल दिया. हिजबुल्लाह ने शुक्रवार सुबह एक बयान जारी कर दावा किया कि उसके लड़ाकों ने गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल करके इजरायल के तीन आधुनिक ‘मर्कवा’ टैंकों को तबाह कर दिया है और उनमें आग लगा दी है. हिजबुल्लाह के मुताबिक, यह भिड़ंत तब शुरू हुई जब इजरायली सेना के एक बख्तरबंद और एक इन्फैंट्री पलटन ने नबातीह शहर के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अली अल-ताहेर की पहाड़ियों की तरफ बढ़ने की कोशिश की। 

इस हिंसक टकराव का सीधा असर स्विट्जरलैंड में होने वाली डील पर पड़ा. एक दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर को खत्म करने के लिए एक सहमति बनी थी, जिसे शुक्रवार को औपचारिक रूप देना था. लेकिन इस जमीनी सैन्य टकराव के बाद ईरान ने बातचीत की मेज से कदम पीछे खींच लिए और स्विट्जरलैंड जाने से मना कर दिया। 

जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा ऐन वक्त पर रद्द
इस अचानक बदले हालात के बाद सीएनएन की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अब स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं. उन्हें ईरान के साथ तय हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के सेरेमनी के तहत हस्ताक्षर करने के लिए वहां पहुंचना था. व्हाइट हाउस ने यह भी साफ किया है कि समझौते के अगले चरण और आने वाली तकनीकी वार्ताओं की योजनाएं अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंच सकी हैं। 

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जब भी मौका बनेगा, रवाना होने के लिए तैयार है, लेकिन इस तरह की बातचीत की व्यवस्थाएं कभी भी आसान या पूरी तरह अनुमानित नहीं होती हैं. फिलहाल उपराष्ट्रपति रवाना नहीं हो रहे हैं और अगले कदम के बारे में जैसे ही कोई ठोस जानकारी मिलेगी, साझा की जाएगी। 

ट्रंप के बाद जेडी वेंस ने भी इजरायल को सुनाया 
इस पूरे घटनाक्रम और इजरायल के अड़ंगे से अमेरिकी प्रशासन बेहद नाराज नजर आ रहा है. बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ते तनाव के बीच, जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए वेंस ने सीधे तौर पर नेतन्याहू की कैबिनेट के सदस्यों से कहा कि वे हकीकत को समझें और जागें। 

जेडी वेंस ने इजरायल को याद दिलाया, “इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजरायल को लेकर सहानुभूति रखते हैं. और संयोग से वही दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति के प्रमुख भी हैं. अगर मैं इजरायली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं अपने उस इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता जो पूरी दुनिया में मेरे साथ खड़ा है। 

वेंस की नाराजगी सिर्फ यहीं नहीं रुकी, उन्होंने इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य मदद का हिसाब भी सरेआम रख दिया. उन्होंने इजरायल को दोटूक लहजे में कहा कि वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे पर निर्भर हैं. वेंस ने कहा, “पिछले तीन महीनों में आपके देश की रक्षा करने वाले दो-तिहाई रक्षात्मक हथियार अमेरिकी लोगों ने बनाए हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं ने उठाया है। 

 

वन पर्यटन का करें विस्तार, पर्यटकों के लिये बढ़ाएं सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डॉग्स

वन पर्यटन का करें विस्तार, पर्यटकों के लिये बढ़ाएं सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डॉग्स

राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ेंगे
गांधीसागर में छोड़े जाएंगे नर-मादा 2 चीते
संगठित वन अपराधों की रोकथाम के लिए बनेगा राज्य स्तरीय टास्क फोर्स
वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए होगी कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम की स्थापना
इस साल हुआ 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण, संग्राहकों को मिलेगा 710.71 करोड़ का बोनस
प्रदेश के 5 नेशनल पार्क के समीप बनेंगे रेस्क्यू सेंटर
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे घर के रूप में कर रहे विकसित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों से है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी और दीर्घकालिक पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, यह हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग वन्य पर्यटन का तेजी से विस्तार करे। इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। वन पर्यटन बढ़ाने के लिए पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। उन्हें होम-स्टे जैसे आकर्षणों के बारे में भी बताया जाए। सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। इससे पर्यटक तेजी से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की समृद्ध वन सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाई जाए। साथ ही नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर प्रदेश की वन सम्पदा को और भी समृद्ध बनाया जाये। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जंगल की सीमा में जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को समुचित तरीके से उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही विकसित करें। बताया गया कि इस साल 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। इससे पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध किया है। उन्हें बाघ और गौर देने के लिए कार्यवाही की जाए, बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य प्राणी लेने के प्रयास किए जाएं। इसी प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिरैया देने पर सहमति व्यक्त की गई है। उनसे सोन चिरैया प्राप्त कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों के सख्ती से नियंत्रण के लिए ‘राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’ का गठन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी प्रकार वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन मुख्यालय स्तर पर ‘कमॉण्ड एवं कन्ट्रोल रूम’ की स्थापना के प्रस्ताव का भी अनुमोदन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज के परिवहन के लिए वन विभाग को ‘परिवहन अनुज्ञा शुल्क’ में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव और वन्य जीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ऐसे संघर्ष में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर ऐसी आपदा का समुचित प्रबंधन कर सकेंगे।

बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर उन्हें घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीते मौजूद हैं, इनमें से 32 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्में हैं। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण में नर-मादा (दो) चीते जुलाई 2026 में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या और इनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है।

प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश में 5 स्थानों यथा कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के समीप वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल गई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हार्थियों रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश में हाथियों के अनुरक्षण के लिए सहायक महावत के पद बढ़ाए जाएंगे। वन राजस्व भूमि सीमा विवाद के निराकरण के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा।

प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के अनूपपुर एवं डिण्डौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार देखने मे आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इस आपदा के विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरित की जाएगी। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने के लिए कार्यवाही की जा रही है।

बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन सहित वरिष्ठ वन अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

होर्मुज से भारत के लिए राहतभरी खबर, LNG लेकर पहला टैंकर ‘दिशा’ गुजरात पहुंचा

अहमदाबाद 

अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील होते ही भारत को पहली खुशखबरी मिल गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहला एलएनजी जहाज भारत आ चुका है. जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पहला LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ आज यानी शुक्रवार को गुजरात में भरूच के दहेज पोर्ट पर पहुंचा. यह दहेज एलएनजी टर्मिनल पर आ गया है. इस तरह से तीन महीने का इंतजार खत्म हुआ. एनएनजी करियर दिशा ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा हुआ था। 

दरअसल, गुजरात के दहेज LNG टर्मिनल पर आज LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक पहुंच गया. इस जहाज ने 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार किया था. इस तरह से इस जहाज का तीन महीने से अधिक का इंतज़ार खत्म हुआ. इस जहाज ने 2 मार्च को कतर के रास लाफान टर्मिनल से 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड किया था. मगर मध्य पूर्व में तनाव के कारण यह जहाज फारस की खाड़ी में फंस गया था। 

दिशा जहाज पर कितना गैस
इसक तरह से ‘दिशा’ जहाज में 62,370 मीट्रिक टन LNG है. ‘दिशा’ उन शुरुआती भारतीय LNG कैरियर जहाजों में से एक है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है. इस कार्गो को भारत के सबसे बड़े LNG इंपोर्ट हब दहेज में स्टोर किया जाएगा और देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा। 

दिशा दिखाएगा रास्ता
दिशा का आना अपने आप में बड़ी खुशखबरी है. यह संकेत है कि अब भारत के जितने भी टैंकर और जहाज फंसे हैं, वो सब धीरे-धीरे भारत की ओर आ रहे हैं. इनमें कुछ एलपीजी टैंकर, कुछ ऑयल टैंकर और कुछ एलएनजी टैंकर हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हॉर्मुज बंद हो गया था. इसके चलते ज्यादातर जहाज इस रास्ते में फंस गए थे. उन्हें गुजरने नहीं दिया जा रहा था. इसके चलते भारत के भी दर्जनों जहाज फंसे थे. ऐसे में भारत के लिए यह पहली बड़ी गैस खेप मानी जा रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी। 

भारत के लिए बड़ी खुशखबरी
होर्मुज बंद होने से भारत के लिए यह स्थिति चिंता की वजह बन गई थी. कारण कि भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. इसका रास्ता होर्मुज ही है. पिछले कुछ महीनों में सप्लाई कम होने के कारण भारत को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ी और कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई भी सीमित करनी पड़ी. हाालंकि, दिशा टैंकर का निकलना सामान्य स्थिति लौटने का संकेत जरूर है. दिशा टैंकर ने एक तरह से बाकी फंसे हुए जहाजों को एक नई दिशा दिखाई है. आने वाले समय में गैस और तेल की स्थित पहले की तरह नॉर्मल हो सकती है। 

15 जुलाई से कार खरीदना होगा सस्ता! टैरिफ घटकर 10% होने से कीमतों में मिल सकती है राहत

 नई दिल्ली

15 जुलाई से भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट प्रभाव में आएगा. इस एफटीए (FTA) के तहत भारत और यूके के बीच कई सामानों पर टैरिफ कम या जीरो होगा. ऑटोमोबाइल वर्ल्ड के लिए भी ये ट्रेड एग्रीमेंट बहुत मायने रखता है. क्योंकि इस एफटीए के बाद कई प्रीमियम कारों पर भारत में टैरिफ कम हो जाएगा। 

इसका सीधा का मतलब है कि भारत में प्रीमियम कारें सस्ती होंगी. यूनाइटेड किंगडम के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस एंड ट्रेड के मुताबिक ब्रिटिश ऑटोमोबाइल कंपनियों की भारत में पहुंच आसान हो जाएगी. इन कारों पर कोटा के तहत टैरिफ 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पहुंच जाएगी। 

इस एग्रीमेंट के बाद ब्रिटिश कार कंपनियों को भारत में बेहतर एक्सेस मिलेगा. वहीं कई भारतीय कंपनियों के लिए यूके में तमाम मौके खुल जाएंगे. भारतीय कंपनियों के लिए टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, इलेक्ट्ऱ़ॉनिक्स, फार्मा और दूसरे सेक्टर में एक बड़ा बाजार मिलेगा। 

सस्ती होंगी कारें
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने का ऐलान 17 जून को किया गया है और बिजनेसेस को 28 दिनों का वक्त तैयारी करने के लिए दिया गया है, जिससे वे अपने सिस्टम को तैयार कर लें और जरूरी रजिस्ट्रेशन कर लें. यूके सरकार इसको भारत का अब तक का सबसे व्यापक व्यापार समझौता बता रही है। 

यूके सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ऑटोमोबाइल टैरिफ कोटा के तहत 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी आएगा. हालांकि, ये कोटा क्या और कितना होगा, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है. यानी इस टैरिफ कटौती के साथ ब्रिटिश कंपनियां कितनी गाड़ियां एक साल में भारत ला 

भारत और यूके की इस डील का असर काफी पहले से दिखने लगा है. कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें कम करनी शुरू कर दी हैं. जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने 5 मई को दो रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती का ऐलान किया था, जो यूके से इंपोर्ट की जाती हैं। 

कई कारें हुईं सस्ती
कंपनी ने रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) की कीमत 75 लाख रुपये घटाकर 3.50 करोड़ रुपये कर दी है. पहले ये कार 4.25 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी. वहीं रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमतों में 40 लाख रुपये की कटौती की गई थी. इस कार की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है। 

इसके अलावा ब्रिटिश सुपरकार निर्माता कंपनी मैकलारेन (McLaren) भी अपनी कारों की कीमतों को 38 फीसदी तक कम करने की तैयारी कर रही है. मैकलारेन 750एस कूपे की कीमत 3 करोड़ रुपये कम होने की उम्मीद है. ये कार पहले 7.94 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी, जो घटकर 4.94 करोड़ रुपये हो सकती है। 

इसके अलावा 750एस स्पाइडर की कीमत 3.32 करोड़ रुपये घटकर 5.46 करोड़ रुपये हो सकती है. दूसरी कंपनियों ने अभी कीमतों में कटौती का ऐलान नहीं किया है. आने वाले दिनों में हमें इनके बारे में भी जानकारी मिल सकती है। 

टैक्स कटौती और कोटा
एफटीए के तहत पहले साल 3000सीसी के ऊपर के इंजन वाली पेट्रोल और 2500सीसी के ऊपर वाली डीजल कारों पर टैरिफ को 110 परसेंट से घटाकर 30 परसेंट किया जाएगा. ये रेट 10 हजार गाड़ियों के लिए होगा। 

वहीं 1500सीसी से 3000सीसी तक वाली पेट्रोल और 2500सीसी तक इंजन वाली डीजल कारों पर टैरिफ 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो जाएगा. इसके लिए 5000 कारों का कोटा होगा. 1500सीसी इंजन तक वाली कारों पर भी 50 परसेंट टैरिफ पहले साल होगा. इसमें भी 5000 कारों का कोटा होगा। 

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मालिकाना हक नहीं तो रजिस्ट्री अमान्य; टैक्स भरने से नहीं मिलेगा स्वामित्व

 ग्वालियर
जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता।

यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मंदिर के नाम दर्ज है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के पुत्र कमलदास ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर इसके प्लॉट काटकर कई लोगों को बेच दिए। खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और वर्षों तक प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा किया।

खंडपीठ ने खरीदारों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का पुजारी या महंत संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केवल उसका प्रबंधक होता है। इसलिए उसके पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के पास वैध स्वामित्व नहीं है, वह जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। ऐसे में खरीदारों को भी मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा और उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे दस्तावेज स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि मूल मालिकाना हक की जांच सबसे महत्वपूर्ण है।

 

इंदौर को बड़ी राहत, यशवंत सागर से मिलेगा ज्यादा पानी; ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

इंदौर

इंदौर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर की जल-संग्रहण क्षमता नगर निगम बढ़ाने जा रहा है। देवधरम फिल्टर स्टेशन पर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके बाद हर दिन यशवंत सागर से अधिक पानी लिया जा सकेगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। अभी छह टंकियों से पानी की सप्लाई होती है। 

इस साल शहर में जलसंकट ने शहरवासियों को परेशान किया और निगम अफसरों को भी चिंता में डाल दिया। अगले साल फिर जलसंकट न हो, इसके लिए यशवंत सागर से अधिक पानी लेने की योजना बनाई गई है। पंद्रह साल पहले नगर निगम ने यशवंत सागर तालाब/बांध की ऊंचाई बढ़ाई थी। उसके बाद से तालाब में जून तक पानी रहता है। फिलहाल तालाब से 54 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी लेकर छह टंकियां भरी जाती हैं और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के कुछ संस्थानों को भी पानी दिया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ने के बाद अधिक मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे शहर के पश्चिमी हिस्से को गर्मी के दिनों में फायदा होगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी।

जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि जून तक तालाब में बचे पानी का उपयोग सप्लाई के लिए किया जा सके। घरों तक पानी पहुंचाने में यशवंत सागर के पानी की लागत 12 रुपये प्रति हजार लीटर आती है, जबकि नर्मदा जल की लागत 26 रुपये प्रति हजार लीटर है।

लिंबोदी तालाब को किया जा रहा है जिंदा
नगर निगम लिंबोदी तालाब को भी पुनर्जीवित कर रहा है। तालाब का गहरीकरण और खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद तालाब की पाल को मजबूत किया जाएगा। इस काम के लिए नगर निगम पांच करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित

भोपाल

माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित ‘कर्मवीर सम्मान–2026’ से सम्मानित किया जाएगा। 

यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन ‘नूर’ भी सम्मानित होंगे। 

इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

इंदौर से अबू धाबी की सीधी उड़ान शुरू, 15 जुलाई से यात्रियों के लिए खुले खाड़ी देशों के द्वार; जानें किराया और टाइमिंग

इंदौर
 अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर पूरे विश्व में किसी न किसी क्षेत्र में देखने मिला है. चाहे पेट्रोल-डीजल हो, चाहे गैस सिलेंडर हो, महंगाई हो फिर हवाई यातायात हो. इन सब समस्याओं से भारत को भी दो-चार होना पड़ा है. इंदौर में भी लंबे समय से इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट बंद हो गई थी, लेकिन लंबे समय के बाद अच्छी खबर यह है कि इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट की जगह अब इंदौर से अबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू होगी. लिहाजा 17 जुलाई से यात्री अबू धाबी के लिए उड़ान भर सकेंगे। 

एयर इंडिया ने शुरू की इंदौर-अबूधाबी फ्लाइट
इंदौर से दुबई और अन्य अरब देशों की एयर कनेक्टिविटी के चलते अब तक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट चल रही थी, जिसे युद्ध के कारण 27 फरवरी से अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा था, हालांकि कंपनी ने इसे सुचारु रखने का प्रयास किया, लेकिन संचालन नहीं हो सका. अब शारजाह के स्थान पर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर से आबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू करने का फैसला किया है. जिसका शेड्यूल जारी किया गया है। 

हफ्ते में इन 4 दिन चलेगी फ्लाइट
एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन यानि रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी. बताया जा रहा है कि शारजाह के अलावा अबू धाबी के लिए फ्लाइट का शड्यूल पेंडिंग था, हालांकि बीच ही शारजाह की फ्लाइट बंद होने से कंपनी को अब नई फ्लाइट शुरू करना पड़ा. जिससे कि यात्री इंदौर से अबू धाबी के जरिए दुबई और शारजाह की ओर उड़ान भर सकें। 

2019 में दुबई के लिए शुरू हुई थी फ्लाइट, हुई बंद
आपको बता दें कि इंदौर से 19 जुलाई 2019 को दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारण से यह फ्लाइट बंद करनी पड़ी. इसके बाद इंदौर से शारजाह की फ्लाइट शुरू की गई. जिसे अब युद्ध के कारण नियमित नहीं रखा जा सका, लेकिन अब अबू धाबी के लिए फिर फ्लाइट शुरू होने से दुबई और शारजाह की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को इंदौर से अबू धाबी के लिए सीधी फ्लाइट मिल सकेगी। 

ऐसा रहेगा फ्लाइट का शेड्यूल
इंदौर से अबू धाबी की फ्लाइट इंदौर एयरपोर्ट से 7:50 पर टेक ऑफ करेगी. जो अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 9:35 पर अबू धाबी एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. इसी प्रकार अबू धाबी से इंदौर के लिए संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 10:35 पर टेक ऑफ करेगी. जो रात भारतीय समय के अनुसार रात 3:20 पर इंदौर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी। 

माना जा रहा है कि इंदौर से अबूधाबी तक 3:15 घंटे का सफल रहेगा. जिसका किराए करीब 16500 रुपए बताया गया है. ट्रैवल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रमुख हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया “इस फ्लाइट से यात्रियों को दुबई और शारजाह जाने का नया विकल्प उपलब्ध हो सकेगा. वहीं इस रूट पर पर्यटन गतिविधियां भी पहले की तरह सुचारू रह सकेंगी। 

राशन के लिए देना होगा ‘जिंदा होने’ का प्रमाण! MP के इस जिले में 15 हजार हितग्राहियों पर संकट

 दतिया
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है।

अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं।

शिकायतों के बाद उठाया कदम
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है।

किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी 
पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे।

फैक्ट फाइल

कुल हितग्राही : 5,32,413

अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898

शेष हितग्राही : 15,489

पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक

ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी 
दतिया : 5,489

सेवढ़ा : 5,419

भांडेर : 4,541
पारदर्शिता और प्रभावी होगी

रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

-जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu