राशन के लिए देना होगा ‘जिंदा होने’ का प्रमाण! MP के इस जिले में 15 हजार हितग्राहियों पर संकट

 दतिया
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है।

अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं।

शिकायतों के बाद उठाया कदम
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है।

किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी 
पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे।

फैक्ट फाइल

कुल हितग्राही : 5,32,413

अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898

शेष हितग्राही : 15,489

पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक

ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी 
दतिया : 5,489

सेवढ़ा : 5,419

भांडेर : 4,541
पारदर्शिता और प्रभावी होगी

रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

-जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

मध्यप्रदेश पुलिस में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू, हर साल 60 पदों पर मिलेगी नियुक्ति

भोपाल
 मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें उप निरीक्षक (एसआई) के 10 और आरक्षक (कांस्टेबल) के 50 पद शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल तथा विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। पहले मुख्य रूप से पदक विजेताओं को ही प्राथमिकता मिलती थी। 

संशोधित नियमों के अनुसार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) से भी छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उप निरीक्षक पद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। वहीं आरक्षक पद के लिए राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे।  इस निर्णय से खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसे खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय बताया है।  

मध्य प्रदेश में नया नियम लागू, बोरवेल खुला छोड़ना पड़ेगा भारी; जेल, जुर्माना और रेस्क्यू खर्च की वसूली

भोपाल 

मध्य प्रदेश सरकार ने खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर अमल करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने बोरवेल सुरक्षा को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इस नई व्यवस्था का मकसद बोरवेल से जुड़े खतरों को कम करना और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 

खुला बोरवेल छोड़ना पड़ेगा भारी
नई SOP के अनुसार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना मंज़ूरी के नया बोरवेल खोदने की इजाज़त नहीं होगी. निर्माण से पहले संबंधित विभाग से जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है. इसके अलावा अगर इस्तेमाल के बाद बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है, तो ज़िम्मेदार व्यक्ति के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल, दोनों का प्रावधान किया गया है। 

खुले बोरवेल की शिकायत अब ऐप से करें
इसके अलावा सरकार ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने और निगरानी को मजबूत करने के लिए ‘PARAKH’ ऐप भी लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए नागरिक खुले, छोड़े गए या खतरनाक बोरवेल की जानकारी सीधे प्रशासन को दे सकते हैं. शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग तुरंत जांच करेगा और कार्रवाई करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस नए सिस्टम से बोरवेल से जुड़े हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा के मामले में जवाबदेही तय होगी। 

नया बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति अनिवार्य होगी, जबकि खुले या सूखे बोरवेल को समय सीमा में बंद नहीं करने पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी। हादसा होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च भी संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा।

90 दिन में बोरवेल बंद कर पोर्टल पर डालना होगा फोटो
अब तक बोरवेल हादसों में सिर्फ मामूली धाराओं में कार्रवाई होती थी, लेकिन अब नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत यदि बोरवेल में पानी नहीं निकलता है तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा और उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार जुर्माना
पहली बार लापरवाही पर 10,000 और दूसरी बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपए का जुर्माना व जेल होगी। यदि खुला बोरवेल मिलने पर कोई दुर्घटना होती है तो मकान/जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर सीधे FIR दर्ज होगी। यही नहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाला लाखों का खर्च भी दोषी से ही वसूला जाएगा।

‘परख एप’ (PARAKH) से सीधे शिकायत कर सकेंगे
नागरिक अपने आस-पास खुले पड़े बोरवेल की फोटो खींचकर इस एप पर शिकायत कर सकते हैं। सरकारी जमीन पर लापरवाही मिलने पर अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।

बोरवेल में गिरने से कई मासूमों की जा चुकी है जान 
बता दें कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश में खुले और असुरक्षित बोरवेल की वजह से कई मासूम बच्चों की जान गई है. सीहोर, विदिशा, सागर, रीवा और राजगढ़ जैसे जिलों में बच्चों के बोरवेल में गिरने की घटनाओं ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. कई मामलों में घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाने पड़े, फिर भी कुछ बच्चों को बचाया नहीं जा सका. इन दुखद घटनाओं के बाद सरकार ने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अब बिना मंजूरी के बोरवेल खोदने और बोरवेल को खुला छोड़ने के काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना ​​है कि नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और मॉनिटरिंग सिस्टम से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। 

तीन दिन में फाइल नहीं भेजी तो कार्रवाई

नए हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर टाइम लाइन तय कर दी गई है।

    3 दिन में भेजना होगी फाइल: आवेदन मिलते ही कार्यपालन यंत्री को 3 कार्यदिवस के भीतर फाइल सहायक यंत्री को भेजनी होगी।

    3 दिन में मौका ए मुआयना: उपयंत्री (Sub-Engineer) 3 दिन के अंदर गांव जाकर गूगल मैप और ‘घन’ पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे।

    1 हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट: सारी रिपोर्ट मिलने के बाद 1 सप्ताह के भीतर कार्यपालन यंत्री कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति के सामने प्रस्ताव रखेंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या है खास?

    पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता: जिन गांवों में नल कनेक्शन नहीं हैं और 300 मीटर के दायरे में प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी नहीं मिल रहा है, वहां विभाग खुद नया बोरवेल खोदेगा।

    बजट की कमी नहीं बनेगी रोड़ा: अगर सरकारी बजट कम पड़ता है तो कलेक्टर की सहमति से विधायक निधि, सांसद निधि या खनिज मद से पैसा PHE विभाग को ट्रांसफर किया जा सकेगा।

    कारण बताना होगा अनिवार्य: यदि जिला समिति ग्रामीणों की हैंडपंप की मांग को खारिज करती है तो विभाग को लिखित में कारण बताना होगा कि आवेदन क्यों रिजेक्ट हुआ।

शुद्ध पानी की गारंटी और नया विकल्प

    जांच के बाद ही मिलेगा पानी: नया हैंडपंप खोदने के बाद पानी का सैंपल सरकारी लैब भेजा जाएगा। BIS मानकों के तहत पानी शुद्ध होने और कीटाणुशोधन (Bleaching) के बाद ही इसे जनता को सौंपा जाएगा।

    सिंगल फेज मोटरपंप का विकल्प: जहां पानी का स्तर ज्यादा गहरा है और हैंडपंप काम नहीं कर सकता, वहां ग्राम पंचायत की सहमति से सिंगल फेज मोटरपंप लगाया जा सकेगा, जिसका रख-रखाव पंचायत करेगी।

भोपाल से बिहार तक फैले आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़, ATS की कार्रवाई में 6 गिरफ्तार, पाकिस्तानी लिंक सामने आया

भोपाल 

तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी। 

सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था? 
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है।

अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था?
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं।

अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है। 

फराज ने क्या-क्या उगला?
फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है।

विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच
एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है। 

डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।  

आगे जांच की दिशा क्या होगी?
अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

 

भारत की बढ़ती ताकत से बेचैन अमेरिका? ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप की नई रणनीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली

अमेरिका रंग बदल रहा है. जिस भारत-अमेरिका दोस्ती के कसीदे पढ़े जाते थे, उसका हनीमून पीरियड अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका ने एक झटके में इंडो-पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द ही गायब कर दिया है. लेकिन इसमें एक मैसेज भी है. ऐसा लग रहा है क‍ि अमेर‍िका भारत के दबदबे से घबरा रहा है. इसल‍िए डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ चीन से अपनी सेटिंग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत को दबाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान को खाद-पानी देने की तैयारी में हैं.कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी और पूर्व व‍िदेश सच‍िव न‍िरुपमा राव ने इस मूव को समझाने की कोश‍िश की है। 

ब्रह्मा चेलानी ने क्या कहा?
ब्रह्मा चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, पेंटागन के इंडो शब्द को हटाने और वापस यूएस पैसिफिक कमांड नाम अपनाने के फैसले, साथ ही हाल की यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत का ज‍िक्र न के बराबर होने से साफ नजर आ रहा क‍ि अमेर‍िका भारत को क‍ितनी अहमियत देता है. ऐसा लगता है कि अब यह रिश्ता किसी साझी सोच पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सौदेबाजी यानी लेन-देन पर टिका है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रंप चीन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोश‍िश कर रहे हैं. इसके साथ ही, इस इलाके में किसी एक ताकत (यानी भारत) का दबदबा न बन पाए, इसे रोकने के लिए ट्रंप को एक बार फिर पाकिस्तान की उपयोगिता याद आ गई है। 

पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने क्या कहा?
न‍िरुपमा राव ने एक्‍स पर ल‍िखा, मुद्दा यह है कि क्या अमेरिका अब भी भारत को इस इलाके की व्यवस्था बनाने वाला साझीदार मानता है या फिर अमेरिकी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई मोहरों में से सिर्फ एक उपयोगी मोहरा? यह एक बिल्कुल अलग बात है. और यह पीएम मोदी के उस बयान से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें उन्होंने भरोसे की बात कही थी। 

अगर हम हाल के कई इशारों को एक साथ देखें, तो एक बड़ी तस्वीर बनती है. ट्रंप का भारत को डेड इकॉनमी कहना. रायसीना डायलॉग में अमेरिकी अधिकारी लैंडौ की वह चेतावनी कि अमेरिका भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा. भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के साथ हुई तीखी बहस. G7 सम्मलेन में दिखा रुखापन और ठंडी तस्वीरें. पीएम मोदी का दुनिया में भरोसे की कमी होने पर जोर देना. और अब इंडो-पैसिफिक के प्रतीक को ही छोटा कर देना. इनमें से कोई भी एक बात अपने आप में रिश्ते टूटने का सबूत नहीं है. लेकिन जब इन सबको मिलाकर देखा जाता है, तो साफ पता चलता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का सुनहरा और जोशीला दौर अब खत्म हो रहा है. यह रिश्ता अब ज्यादा सामान्य, ज्यादा मतलब का, लेन-देन वाला और शायद काफी ज्यादा मुश्किल होने वाला है। 

भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?

  •     एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि भारत को अब यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि अमेरिका उसका पक्का दोस्त है. अमेरिका भारत को सिर्फ तब तक पूछेगा, जब तक उसका फायदा है. जरूरत खत्म, तो दोस्ती खत्म। 
  •     सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका इस इलाके में भारत को बॉस नहीं बनने देना चाहता. भारत को उलझाए रखने के लिए अमेरिका फिर से पाकिस्तान को ताकत और समर्थन दे सकता है। 
  •     ट्रंप चीन से लड़ने के बजाय उससे अपने व्यापारिक सौदे सेट करने में लगे हैं. अगर चीन के साथ अमेरिका की डील पक्की हो गई, तो अमेरिका को भारत की कोई खास जरूरत नहीं रह जाएगी। 
  •     पीएम मोदी ने भरोसे की कमी की जो बात कही थी, वह बिल्कुल सच साबित हो रही है. भारत को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. अमेरिका के भरोसे बैठकर हम अपनी सुरक्षा खतरे में नहीं डाल सकते। 
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा असर

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “जीरो टॉलरेंस” नीति अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ राज्य शासन ने सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं।

नवीनीकरण के आवेदनों के निरस्तिकरण का यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस स्पष्ट और दृढ़ प्रशासनिक नीति का प्रतिबिंब है, जिसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार, नियमों के उल्लंघन, राजस्व अपवंचन तथा जनहित के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के प्रति पूर्णतः जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि निवेश, उद्योग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ कानून का कठोर एवं निष्पक्ष अनुपालन भी उतना ही आवश्यक है।

आबकारी आयुक्त, द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण स्वचालित अथवा अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित संस्था के समग्र आचरण, विधिक अनुपालन, लाइसेंस की शर्तों के पालन, नियामकीय पात्रता, उपलब्ध अभिलेखों की सत्यता और सार्वजनिक हित से जुड़े पहलुओं का समग्र परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915, उससे संबंधित नियमों, उपलब्ध अभिलेखों तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का विस्तृत परीक्षण किया गया।

निर्णय प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण रहे कि संबंधित समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को क्षति पहुँचाने तथा आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित प्रकरण न्यायालयों के समक्ष विचारित हुए थे। उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों, जांच प्रतिवेदनों और न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण करते हुए संबंधित पक्ष के समग्र आचरण और विधिक अनुपालन की समीक्षा की गई। इसके उपरांत नवीनीकरण आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

माननीय उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण के प्रकरणों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, विधिक प्रावधानों तथा संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र एवं कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए। न्यायालय द्वारा नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान नहीं किया गया था। इसी विधिक दृष्टिकोण के अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश में विकास और निवेश की गति को तेज करने के साथ-साथ पारदर्शी, जवाबदेह और नियम आधारित प्रशासन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ ईमानदार उद्यमों और नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जबकि कानून और जनहित के विरुद्ध कार्य करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और विधिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। शासन की यह नीति न केवल कानून के शासन को मजबूत कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी सुदृढ़ बना रही है कि प्रदेश में प्रत्येक निर्णय विधिसम्मत, निष्पक्ष और जनहित सर्वोपरि की भावना के साथ लिया जा रहा है।

सोम डिस्टिलरीज प्रकरण में लिया गया यह निर्णय प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज” नीति का एक सशक्त उदाहरण है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि मध्यप्रदेश में किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्रतिष्ठान को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा तथा नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक हित के प्रतिकूल आचरण के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

WhatsApp पर सरकार की निगरानी आसान, Telegram पर क्यों फेल हो जाते हैं प्रयास? जानिए पूरा मामला

 नई दिल्ली

भारत में सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक के लिए टेंपररी बैन कर दिया गया है. इस बैन के पीछे सबसे बड़ा कारण NEET UG परीक्षा का पेपर लीक रोकना बताया जा रहा है. वहीं दूसरे फेमस मैसेजिंग ऐप्स पर अभी कोई बैन नहीं लगाया गया है, जैसे कि WhatsApp. आखिर दोनों ऐप्स में ऐसा क्या अंतर है कि टेलीग्राम पर बैन लग गया और व्हाट्सऐप सेफ रह गया?

टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही बहुत ज्यादा फेमस ऐप्स हैं और अपने मैसेजिंग फीचर्स के लिए जाने जाते हैं. लेकिन दोनों ऐप्स को अलग तरीके से बनाया गया है. WhatsApp एक पुराना मैसेजिंग सिस्टम की तरह काम करता है, जबकि टेलीग्राम एक बड़े क्लाउड-बेस्ड नेटवर्क की तरह काम करता है। 

जानिए क्यों नहीं बना पा रही सरकार टेलीग्राम पर अपनी पकड़

क्लाउड बेस्ड स्टोरेज VS फोन स्टोरेज

टेलीग्राम ऐप पर डेटा ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज में सेव रहता है. इसकी वजह से अगर आप किसी भी मोबाइल या डिवाइस में लॉगिन करते हैं तो अपनी सभी चैट्स और फाइल्स देख सकते हैं. अगर आपका फोन चोरी भी हो जाए, तब भी आपका डेटा क्लाउड पर सेफ रहता है. इसी फीचर की वजह से कोई भी व्यक्ति किसी भी डिवाइस से जानकारी आसानी से शेयर कर सकता है। 

वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सऐप आपके फोन की स्टोरेज का ज्यादा इस्तेमाल करता है. डाउनलोड या शेयर किया गया डेटा फोन में सेव हो जाता है. ऐसे में अगर कोई जानकारी शेयर की जाती है, तो उसके निशान फोन में मौजूद रह सकते हैं. यहां क्लाउड बैकअप ऑप्शनल है। 

यूजरनेम और फोन नंबर
टेलीग्राम में यूजरनेम का फीचर मिलता है, जिसकी मदद से लोग बिना फोन नंबर शेयर किए एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं और ग्रुप्स जॉइन कर सकते हैं. इस वजह से यूजर्स का फोन नंबर सामने नहीं आता। 

वहीं व्हाट्सऐप पर किसी से बात करने या ग्रुप जॉइन करने के लिए फोन नंबर जरूरी होता है. इसी वजह से ग्रुप्स में लोग एक दूसरे के नंबर आसानी से देख सकते हैं। 

मैसेज ब्रॉडकास्ट करना
टेलीग्राम पर चैनल्स का फीचर मिलता है, जो पब्लिक या प्राइवेट हो सकते हैं. चैनल का एडमिन एक क्लिक में अनलिमिटेड लोगों तक मैसेज, वीडियो और फाइल्स पहुंचा सकता है. इस वजह से जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है। 

वहीं व्हाट्सऐप को प्राइवेट बातचीत और छोटे ग्रुप्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसके ब्रॉडकास्ट और ग्रुप फीचर्स में भी सीमाएं हैं, जिससे एक साथ बहुत ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाना आसान नहीं होता। 

कोई लोकल ऑफिस नहीं
व्हाट्सऐप, मेटा कंपनी के अंडर आता है, जिसके ऑफिस और लीगल टीमें कई देशों में मौजूद हैं. वहीं टेलीग्राम किसी भी देश में लोकल ऑफिस खोलने से बचता है और अपनी कंपनी को काफी हद तक डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से चलाता है। 

लोकल ऑफिस और लीगल टीम न होने की वजह से सरकारों के लिए टेलीग्राम पर दबाव बनाना मुश्किल हो सकता है। 

व्हाट्सऐप एक अच्छा टूल है, जिसकी मदद से लोग रोजाना अपने दोस्तों और परिवार वालों से फोन नंबर के जरिए बात करते हैं. लेकिन टेलीग्राम को ज्यादा प्राइवेसी, बड़े ऑडियंस तक जानकारी पहुंचाने और एडवांस फीचर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यही वजह है कि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है। 

भोपाल बना ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ सिटी! 15 KM तक मेट्रो-फ्लाइओवर निर्माण, सड़कों पर रेंग रहे वाहन

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों बड़े बुनियादी ढांचागत विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन मानसून की आहट के बीच यही विकास आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। शहर में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो रेल, सड़कों और फ्लाइओवर का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। इस भारी निर्माण कार्य के कारण सबसे बड़ी समस्या विभिन्न जिम्मेदार विभागों जैसे मेट्रो कॉर्पोरेशन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच आपसी समन्वय की कमी के रूप में सामने आ रही है।

विभागों में आपस में मढ़ा जा रहा दोष
बीते मंगलवार को भेल क्षेत्र में लगे भीषण जाम को लेकर मेट्रो अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ट्रैफिक पुलिस ने जहां जाम के लिए मेट्रो निर्माण को जिम्मेदार ठहराया, वहीं एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने इन आरोपों पर हैरानी जताई। मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि वे 2 जून को लिखे पत्र और प्रशासन के साथ पूर्व में हुई बैठकों के अनुसार सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर
वर्तमान में करौंद से मंडी, भदभदा से रंगमहल और रत्नगिरि से जेके रोड जैसे व्यस्त रूटों पर एलिवेटेड मेट्रो का काम चल रहा है। इसके साथ ही अयोध्या बायपास, कोलार और शाहपुरा क्षेत्रों में फ्लाइओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम एक साथ चलने से पूरा शहर ट्रैफिक के मोर्चे पर ब्लॉक हो गया है। स्थानीय निवासी राजेश के मुताबिक, करौंद से ऑफिस पहुंचने में अब रोजाना 40 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हो रहा है।

भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन

भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है।

भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

अभी तो शुरुआत है! अल-नीनो का असली असर बाकी, अगले 5 महीने भारत के लिए बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

नई दिल्ली

भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 जून की शुरुआत में केरल पहुंचा, लेकिन सामान्य से थोड़ा देरी से. शुरुआती बारिश कई जगहों पर कमजोर रही है. मौसम वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अभी तो अल-नीनो का पूरा असर नहीं दिखा है, लेकिन आने वाले जुलाई से नवंबर तक के महीने देश के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल पूरे मॉनसून सीजन के लिए औसत से कम बारिश का अनुमान लगाया है – लगभग 90-92 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA). इसका मतलब है कि देश के कई हिस्सों में सूखा जैसी स्थिति बन सकती है, खासकर जून के बाद। 

अल-नीनो क्या है और यह भारत को कैसे प्रभावित करता है?

अल-नीनो एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी प्रशांत ठंडा रहता है. ट्रेड विंड्स पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं. लेकिन अल-नीनो में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं. इससे भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं प्रभावित होती हैं। 

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ जाता है. भारत में मॉनसून देश की कुल वार्षिक बारिश का करीब 70 प्रतिशत लाता है. अगर यह कम हुआ तो कृषि, जल संसाधन, बिजली उत्पादन और समग्र अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है. 2026 में वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो जून में कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई-अगस्त में मध्यम और सितंबर तक मजबूत हो सकता है. NOAA और IMD जैसे संगठनों के अनुसार, जुलाई-अगस्त में अल-नीनो विकसित होने की संभावना 80-90 प्रतिशत से ज्यादा है। 

पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर अल-नीनो वर्षों में भारत को औसत से कम बारिश मिली है. 2009 में कमजोर अल-नीनो के बावजूद बारिश मात्र 78 प्रतिशत रह गई थी, जो 37 साल का सबसे कम स्तर था. 2015-16 के मजबूत अल-नीनो में भी सूखे की स्थिति बनी। 

हालांकि कुछ सालों में सकारात्मक भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive IOD) ने अल-नीनो के निगेटिव असर को कुछ हद तक कम किया, लेकिन 2026 में IOD अभी न्यूट्रल है. बाद में पॉजिटिव होने की उम्मीद है, जो थोड़ी राहत दे सकता है लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं। 

मॉनसून की शुरुआत कमजोर
जून 2026 के पहले दो हफ्तों में कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम रही. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 70-80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. मध्य भारत और कुछ उत्तरी हिस्सों में भी कमी है. IMD के अनुसार, जून महीने में भी नीचे औसत बारिश रहने की संभावना है. मॉनसून की देरी और कमजोर शुरुआत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। 

अभी अल-नीनो का पूरा कहर नहीं दिखा क्योंकि यह अभी विकसित हो रहा है. असली असर जुलाई से सितंबर के बीच दिखेगा, जब मॉनसून अपने चरम पर होता है. अगर अल-नीनो मजबूत हुआ तो अगस्त-सितंबर में बारिश और भी कम हो सकती है. इससे जलाशयों में पानी की कमी, नदियों का सूखना और भूजल स्तर गिरना जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। 

कृषि और किसानों पर संभावित प्रभाव
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक कृषि पर निर्भर है. करीब 50-60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी हुई है. खरीफ सीजन (जून-सितंबर) में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें आदि फसलें बोई जाती हैं. कम बारिश से इन फसलों की पैदावार घट सकती है। 

पिछले अल-नीनो वर्षों में सूखे से किसानों की आय घटी, कर्ज बढ़ा और आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ीं. 2026 में अगर बारिश 90 प्रतिशत या उससे कम रही तो खाद्यान्न उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की कमी आ सकती है. इससे खाद्य सुरक्षा चुनौती बनेगी. सरकार को आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा। 

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इन इलाकों में वर्षा आधारित खेती ज्यादा है. छोटे किसान जिनके पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, वे सबसे ज्यादा परेशान होंगे. पशुपालन भी प्रभावित होगा क्योंकि चारे की कमी हो सकती है। 

जल संकट और अन्य क्षेत्रों पर असर
कम बारिश का मतलब जल संकट गहराना है. कई शहरों और गांवों में पहले से पानी की समस्या है. मॉनसून कमजोर रहा तो पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की कमी बढ़ेगी. बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा क्योंकि हाइड्रो पावर प्लांट पानी पर निर्भर हैं। 

गर्मी पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. अल-नीनो से तापमान और बढ़ सकता है. लू की लहरें लंबी और तीव्र हो सकती हैं, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी. बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। 

महंगाई और विकास दर
कृषि उत्पादन घटने से सब्जी, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं. खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने से RBI की मौद्रिक नीति प्रभावित होगी. विकास दर पर भी दबाव पड़ेगा. अगर GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गई तो नौकरियां कम होंगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो सकती है। 

सरकार पहले से तैयारी कर रही है. कॉन्टीजेंसी प्लांस बनाए जा रहे हैं. 200 से ज्यादा जिलों में सूखा राहत कार्यों की योजना है. फसल बीमा योजना (PMFBY) को मजबूत किया जा रहा है. लेकिन चुनौती बड़ी है। 

ऐतिहासिक उदाहरण और सीख
1950 के बाद कई अल-नीनो वर्ष आए हैं. 1997-98 का सुपर अल-नीनो सबसे मजबूत था, लेकिन कुछ मामलों में भारत को अप्रत्याशित रूप से अच्छी बारिश मिली. 2015 में भारी सूखा पड़ा. इन अनुभवों से पता चलता है कि अल-नीनो तय करता है लेकिन IOD, हिमालयी बर्फ, स्थानीय मौसम व्यवस्था आदि भी भूमिका निभाते हैं। 

2026 में सुपर अल-नीनो की आशंका है, जो अक्टूबर-फरवरी तक मजबूत रह सकता है. इसका असर 2026 के मॉनसून के अलावा 2027 की शुरुआत तक भी रह सकता है। 

सभी उम्मीदें निराशाजनक नहीं हैं. अगर पॉजिटिव IOD विकसित हुआ तो यह अल-नीनो का कुछ असर कम कर सकता है. बेहतर मौसम पूर्वानुमान, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और किसानों को समय पर सलाह देने से नुकसान कम किया जा सकता है.

वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे उतार-चढ़ाव बढ़ रहे हैं. लंबे समय में हमें जल संरक्षण, सूखा प्रतिरोधी फसलें और माइक्रो इरिगेशन पर जोर देना होगा। 

 

PM-VBRY के तहत 19 जून को ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी करेंगे प्रधानमंत्री

विवेक झा, भोपाल/नई दिल्ली। रोजगार सृजन और युवाओं को औपचारिक कार्यबल से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) एक नए पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े लाभार्थियों के साथ संवाद भी करेंगे, जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन और देशभर के 200 क्षेत्रीय केंद्रों पर किया जाएगा।

भोपाल और मंडीदीप भी बनेंगे राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा

राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ ही मध्यप्रदेश में भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) सभागार और एचईजी, मंडीदीप में भी क्षेत्रीय आयोजन किए जाएंगे। इन दोनों कार्यक्रमों में करीब 700 नियोक्ता, कर्मचारी और गणमान्य नागरिक भाग लेंगे।

मैनिट में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल तथा भोपाल की महापौर मालती राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं मंडीदीप स्थित कार्यक्रम में भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा मुख्य अतिथि होंगे।

देशभर में 200 स्थानों पर एक साथ होंगे कार्यक्रम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया है। देशभर में 200 स्थानों पर समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, राज्य मंत्री, महापौर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भाग लेंगे।

अनुमान है कि इन आयोजनों में 65 हजार से 70 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें लगभग 9 हजार नियोक्ता प्रतिनिधि और 45 हजार कर्मचारी शामिल रहेंगे। इससे योजना के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ औपचारिक रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पहली नौकरी करने वाले युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पहली बार औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। योजना के भाग-ए के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकृत और एक लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने के वेतन के बराबर, अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है।

पहली किस्त छह माह की निरंतर सेवा पूरी करने पर तथा दूसरी किस्त 12 माह की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद जारी की जाती है। इससे युवाओं में दीर्घकालिक रोजगार और बचत की आदत को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

नियोक्ताओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन

योजना के भाग-बी में अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर नियोक्ताओं को ₹3,000 प्रति माह तक दो वर्षों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के लिए यह सहायता दो अतिरिक्त वर्षों तक बढ़ाई गई है।

50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नए कर्मचारियों तथा 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम पांच नए कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी, तभी वे योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

₹99 हजार करोड़ से अधिक का परिव्यय, 3.5 करोड़ रोजगार का लक्ष्य

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹99,446 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया है। इसका लक्ष्य दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन करना है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ युवा पहली बार औपचारिक कार्यबल का हिस्सा बनेंगे। योजना के लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होंगे।

रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा का भी विस्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आएंगे। EPFO पंजीकरण के माध्यम से श्रमिकों को भविष्य निधि जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

शुरुआती चरण में मिले उत्साहजनक परिणाम

योजना के शुरुआती क्रियान्वयन में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मार्च 2026 में 4.41 लाख प्रथम बार काम करने वाले कर्मचारियों को लगभग ₹247 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। वहीं 17,551 प्रतिष्ठानों को ₹214 करोड़ के प्रोत्साहन जारी किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 6.46 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए।

विकसित भारत के विजन को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि PM-VBRY भारत में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने, उद्योगों को नई नियुक्तियों के लिए प्रोत्साहित करने और युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रोजगार, निवेश और कौशल विकास को जोड़ने वाली यह योजना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

बॉक्स: PM-VBRY एक नजर में

  • योजना का नाम: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)
  • कुल परिव्यय: ₹99,446 करोड़
  • लक्ष्य: 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना
  • पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को लाभ: अधिकतम ₹15,000 तक प्रोत्साहन
  • नियोक्ताओं को प्रोत्साहन: प्रति अतिरिक्त कर्मचारी ₹3,000 प्रतिमाह तक
  • विशेष लाभ: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए अतिरिक्त दो वर्ष तक सहायता
  • लाभ अवधि: 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगार
  • भुगतान व्यवस्था: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) एवं PAN-लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से

भोपाल कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • स्थान: मैनिट सभागार, भोपाल
  • तिथि: 19 जून 2026
  • मुख्य अतिथि: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • विशिष्ट अतिथि: कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मालती राय
  • अनुमानित सहभागिता: लगभग 700 नियोक्ता, कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक
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