देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

वर्ष 2030 तक उदानिकी फसलों का क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ेगा

भोपाल
मध्यप्रदेश ने इतिहास बनाते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जी आई टैग हासिल करने में सफलता हासिल की है। देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिला है। इनमें गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बेंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल है

इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोक नगर की खिरनी को जी आई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कृषक कल्याण वर्ष में यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के आय को दो गुना बढ़ाने के लिए उनसे उदयानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आव्हान किया है। फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर में उदयानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है।

कुम्भराज धनिया

कुम्भराज धनिया गुना जिले में लगभग 60 वर्षों से उगाया जा रहा है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार होती है। इसकी उपज लगभग 12-15 कुंटल प्रति हेक्टर प्राप्त होती है। इसमें लगभग 0.4 से 0.50 प्रतिशित वाष्पशील तेल है, जिसकी वजह से इसमें बहुत अच्छी खुशबू व मिठास आती है। धनिया गुना जिले से अन्य देशो को निर्यात किया जा रहा है। कुम्भराज धनिया का स्वाद दूसरे धनिया की तुलना में तेज और बेहतर है, इसका चमकीला हरा रंग, उत्तम आकृत्ति और माप तथा शानदार सुगंध है। अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है जो पूरे देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है।

बरमान भटे

नर्मदा की बालुई मिट्टी में पैदा होने वाले भटे का जायका कुछ अलग ही है। यही कारण है कि बाहर से भी लोग अक्सर अपने माध्यमों से बरमान के भटे को बुलाते है, मंडियों में बरमान के भटे की तलाश रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नर्मदा किनारे कम तापमान होने की वजह से यहां के भटे का स्वाद अलग रहता है।

बैतूल का गजर‍िया आम

बैतूल जिले में खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किले जो 500 साल से ज्यादा पुराने किलो में आते हैं। जो यह बताते है की बैतूल गोंड राजाओ का केंद्र था। भारत वर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम है। ताजे फल के उपयोग के अतिरिक्त आम के फलों से अनेक परिरक्षित पदार्थ बनाये जाते हैं। कच्चे आम का अचार, अमचूर आदि बनाये जाते जबकि पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम, अमावट आदि बनाये जाते हैं। अधिकतर आम के बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाये गये हैं, इनकी उत्पादकता अत्यन्त कम है।

खरगोन मिर्च

खरगोन जिले की मिर्च सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। जिले में साल दर साल मिर्च की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मण्डियों में से एक यहाँ खरगोन जिले में सनावद के पास बेदिया में स्थित है। निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सर्वाधिक मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की लाल मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है।

खुरासानी इमली

मांडव की माटी का जादू ऐसा है कि जो भी यहां आया, यहीं का होकर रह गया। अलग-अलग सभ्यताओं के राजवंश हों या भेंर की वनस्पतियां, सभी यहां की मिट्टी के साथ एक हो गए। ऐसा ही एक उदाहरण अफ्रीका के शुष्क राज्य का बाओबाब है। 14 वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था और इसका नाम ‘बाओबाब से बदलकर खुरासानी इमली कर दिया गया था। इसे एक और नाम मांडवी इमली से भी जाना जाता है। यह पेड़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने जड़ों सहित इसको उल्टा लगा दिया हो। ऊपर और तना नीचे, पत्तियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही बढ़ती हैं।

सीताफल

सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में 6500 मीट्रिक टन से अधिक सीताफल का उत्पादन होता है। सीताफल का वजन 600 से 700 ग्राम होने के कारण इसका नाम जंब सीताफल रखा गया है। अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के कारण इसकी प्रदेश और देश में भी अच्छी मांग है।

मालवी आलू

भारतीय आलू रोग प्रतिरोधकता, आकार, माप, त्वचा, रंग आदि के मामले में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को पूरा करता है और आलू का प्रसंस्करण इसे अधिक आर्थिक मूल्य देता है। भारत के भीतर, मध्य प्रदेश राज्य वर्तमान में आलू का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य की हिस्सेदारी 6.68 प्रतिशत थी और 2014-15 से 2018-19 के बीच पांच वर्षों के लिए उत्पादन औसत 3225.95 है। मध्य प्रदेश के कई कृषि जलवायु क्षेत्रों में से, मालवा क्षेत्र मध्य प्रदेश में आलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हरी मटर जबलपुर

हरी मटर जबलपुर की एक लोकप्रिय सब्जी और प्रमुख रबी फसल है। ये काफी पौष्टिक भी होते हैं और इनमें उचित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हरी मटर या “गार्डन मटर”, छोटे, गोलाकार बीज हैं जो पाएसम सटाईवम पौधे द्वारा उत्पादित फली से आते हैं। वे सैकड़ों वर्षों से मानव आहार का हिस्सा रहे हैं और दुनिया भर में खाए जाते हैं। फसल अवधि 40-60 दिन है। जिले में वर्ष 2018-19 में हरी मटर की कुल बुआई 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी है तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक उत्पादन 52,500 टन है।

गराडू

गराडू (हायस्कोरियालाटा) मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख फसलों में से एक है। यह रतालू की विभिन्न प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है। मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है। गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से भी जाना जाता है। गराडू (बैंगनी रतालू) मालवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है, इसकी सत्र में विभिन्त्र पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों में उपयोग किया जाता है।

नरसिंहपुर गुड़

भारत दुनिया का एक प्रमुख गुड़ उत्पादक देश है, यह दुनिया में लगभग 58 प्रतिशत गुड़ उत्पादन में योगदान देता है। गुड़ उद्योग मध्य प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है, यह भारत में लगभग 6 प्रतिशत गुड़ उत्पादन का योगदान देता है। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिला गुड़ निर्माण के लिए लोकप्रिय है। यहां ज्यादातर काली कपास मिट्टी है जिसमें मिट्टी की मात्रा 60-65% है, पानी धारण करने की क्षमता अधिक है। सितंबर-अक्टूबर में बोए गए गने के साथ सहफसली खेती। मध्य प्रदेश के कुल गत्रा क्षेत्र का लगभग 65% (लगभग 75000 हेक्टेयर) नरसिंहपुर जिले में है। इसे मध्य प्रदेश का चीनी का कटोरा कहा जाता है। इस जिले में 2500-3000 टीसीडी क्षमता वाली 09-10 चीनी मिलें है, लेकिन गन्ना विकास गतिविधियां नहीं कर रही हैं। ऐसे में किसान अब गुड़ उत्पादन उद्यमिता विकसित करने के लिए काफी उत्सुक हैं।

जबलपुर सिंघारा

सिंघाड़ा की खेती के लिए सात महीने की मेहनत लगती है. पौधे को अपने पूर्ण आकार में विकसित होने में चार महीने लगते हैं और फल आने में तीन महीने और लगते हैं। बुआई का मौसम मई-जून के गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। किसान एक छोटे पोखर पा छोटे जलाशय में बीज बोते हैं। एक महीने के भीतर, पौधा एक बेल में बदल जाता है जिसे बाद में बड़े तालाब में प्रत्यारोपित किया जाता है। फलों की तुड़ाई दिसम्बर-जनवरी माह में की जाती है। जबलपुर, सतना और आसपास के जिलों में सिंधारा की खेती करने वाले लगभग 4,500 किसान हैं, जो मध्य प्रदेश में सिंधारा के मुख्य हितधारक हैं। ताजा सिंघाड़ा अपनी उच्च जल सामग्री (80%), स्टार्च (52%), प्रोटीन (1.87%) और टीएसएस (7-8%) के लिए जाना जाता है।

नूरजहाँ आम

मध्य प्रदेश का कट्टीवाड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, हाल ही में, इसने एक और अनोखे आकर्षण नूरजहाँ आम के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल की है। इनका वजन 3-3.5 किलोग्राम होता है और यह एक फुट तक लंबे हो सकते हैं। इस किस्म के उत्पादकों का मानना है कि यह सैकड़ों साल पहले अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश तक पहुंची थी। और जबकि इस फल के कई उत्पादक हैं, इस किस्म के सबसे प्रसिद्ध आम नूरजहाँ मैंगो फार्म्स से आते हैं, जिसका स्वामित्व और प्रबंधन किया जाता है।

 

सिवनी में 1 जुलाई को धान महोत्सव, CM मोहन यादव किसानों को देंगे ₹2.82 करोड़ और विकास कार्यों की सौगात

सिवनी 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई यानी आज  सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित धान महोत्सव में शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजन स्थल पर बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस आयोजन में मुख्यमंत्री किसानों को सौगात देंगे तो वहीं कृषि, श्रीअन्न संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित करेंगे। ये राशि 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।

विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे सीएम
कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि, कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही, विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। कृषिका ऐप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।

इस दिशा में अहम कदम है धान महोत्सव
श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषक तत्व से भरपूर होते हैं और इन्हें कम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गए हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारें श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, जिनमें प्रोत्साहन राशि और बाजार लिंकेज शामिल हैं। ये पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प भी प्रदान करती है। सिवनी में धान महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री का दौरा जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की घोषणा के लिए अहम माना जा रहा है। इन दौरों से स्थानीय प्रशासन को जनता से सीधे जुडऩे और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री का सिवनी दौरा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की विकास रणनीतियों को आकार देने में सहायक होगा। यह अवसर स्थानीय जनता के लिए भी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है।

कलेक्टर ने व्यवस्थाएं परखीं
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक ग्राउंड, हेलीपैड स्थल, सेफ हाउस और सुकतरा हवाई पट्टी का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सभी स्थानों पर चल रही तैयारियों का जायजा किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच की व्यवस्था, दर्शकों की बैठक व्यवस्था, पार्किंग स्थल, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, साफ सफाई और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा प्रत्येक व्यवस्था को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का होगा कायाकल्प, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके।

उल्लेखनीय है कि ज्योतर्लिंग परिसर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास की तैयारी की गई है।

इन मंदिरों का होगा कायाकल्प
मध्य प्रदेश सरकार से तैयार इस योजना में महाकाल ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई गई हैं।

ये सुविधाएं होंगी विकसित
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। असल में, कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित स्थान होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ से अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यकता अतिरिक्त भूमि शामिल कर इन मंदिरों में खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे।

प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध हो सके। मास्टर प्लान के अनुसार, इन मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सुरक्षा पर भी विशेष फोकस
मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

Russia Oil to India: जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी कच्चे तेल का आयात, बंदरगाहों पर टैंकरों की भरमार

नई दिल्‍ली
जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है। 

एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे। 

अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। 

कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात
CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है। 

भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा 
भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई। 

रूसी तेल से मिली मदद 
ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

महिला कोच में सफर करना पड़ेगा महंगा, पुरुष यात्रियों पर लगेगा ₹2500 तक का जुर्माना

नई दिल्ली

 ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है। 

ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। 

 जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा।

कितना लगेगा जुर्माना?

    अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 
    साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा। 

    वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है। 
    इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
    रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें। 

गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा?
अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं। 

रेलवे ने सख्त किए नियम
रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। 

यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है
सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है।

जमीनी स्तर
वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं।

रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है?
1 जुलाई, 2026
से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा।

क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं?
सामान्यतः
नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।

 

 

कारगिल युद्ध का अनसुना किस्सा: सफेद झंडा, पाकिस्तानी अफसर संग सिगरेट और फिर प्वाइंट 5465 पर फतह

 कारगिल
 कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की। 

यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है। 

17 हजार फीट पर आमना-सामना
जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है। 

जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया
भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले। 

सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत
मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए। 

मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए। 

शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465
बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। 

चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी। 

भारत के बेटे झुकना नहीं जानते
आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

Rules Change From Today: पेट्रोल, LPG, आधार से बैंकिंग तक… आज से बदल गए 10 बड़े नियम

 नई दिल्‍ली

जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है। 

1. एलपीजी के नियमों में बदलाव 
केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है। 

2. LPG के दाम में कटौती 
मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है। 

3. आधार कार्ड अपडेट 
Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था। 

4. रेलवे के नियम
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं। 

5. ITR डेडलाइन 
ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है। 

6. पासपोर्ट फीस 
अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है। 

7. क्रेडिट कार्ड के नियम 
SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों। 

8. कारें हो रहीं महंगी 
जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 

9. पेट्रोल-डीजल के नियम 
भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है। 

10. ईपीएफओ अपडेट 
सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

अल-नीनो का बड़ा खतरा! 2032 तक भारत को 94 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की चेतावनी

नई दिल्ली
अल-नीनो को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है. अनुमान है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94,55,960 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हो सकता है। 

वहीं, पूरी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक नुकसान  का अनुमान है. यह नुकसान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, रोजगार, एनर्जी और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर सकती है और गर्मी बढ़ा सकती है. आने वाले अल-नीनो के दौरान भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई गई है। 

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
एक इंग्लिश अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार अल-नीनो की वजह से भारत में भीषण गर्मी बढ़ सकती है और मानसून कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा. बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और बिजली की मांग भी बढ़ सकती है. इससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। 

2032 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान क्यों?
रिसर्चर्स का कहना है कि अल-नीनो का असर केवल उसी साल तक सीमित नहीं रहता. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कई वर्षों तक धीमी रह सकती है. अनुमान है कि 2032 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह नुकसान 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता है. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं। 

कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां

उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, “हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी ‘जी राम जी’ कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा। 

कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए ‘जी राम जी’ कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके। 

दिल्ली में कब दस्तक देगा?
यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है। 

जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है। 

क्या करना होगा? 
एकस्पर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. इसके लिए बेहतर वेदर फोरकास्ट, समय पर चेतावनी देने वाले सिस्टम, गर्मी सहने वाली फसलों का विकास, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा. इससे अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज दोनों के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला अल-नीनो केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, खेती और लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी और क्लाइमेट के हिसाब से प्लानिंग बनाना फ्यूचर के नुकसान को कम करने के लिए जरूरी होगा। 

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले कर रहे आस्था की वकालत: सीएम योगी

रामपुर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था व विरासत के अपमान पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले कांवड़ यात्रा रोकने, त्योहारों पर बंदिशें लगाने और ‘जय श्रीराम’ बोलने पर लाठी-गोली चलवाते थे, आज वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख आस्था की वकालत कर रहे हैं। जो कांग्रेस प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व को ही नकार चुकी थी, वह भी ‘राम सबके हैं’ कहकर अयोध्या जाने के लिए मचल रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना ‘कालनेमी’ के छल-कपट से करते हुए कहा कि जनता इनके झूठ व दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को रामपुर जनपद के मिलक व बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों की ₹700 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इंटरमीडिएट/हाईस्कूल परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि और मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मानित भी किया।

प्रभु श्रीराम जानते हैं कौन सही और कौन बुरा

सीएम योगी ने कहा कि देखिए रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले रामभक्ति की दुहाई दे रहे हैं, वकालत कर रहे हैं। यह रामभक्तों की, आपके वोटबैंक की ताकत है कि ये पार्टियां आपकी पिछलग्गू बन रही हैं। उन्हें अपने पापों, कर्मों पर पश्चाताप भी होता होगा। लेकिन, प्रभु श्रीराम तो जग नियंता हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उन्हें पता है कि कौन सही है और कौन बुरा। दरअसल, सपा-कांग्रेस को चिढ़ यह है कि अयोध्याधाम, काशी-विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज धाम, नैमिषारण्य, शुक्रतीर्थ इतने सुंदर कैसे हो गए। वे इसे रोकना चाहते थे, नहीं कर सके तो चिढ़ गए। कुछ नहीं मिला तो झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने लगे।

कांग्रेस-सपा का शासन अन्याय का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा शासनकाल अन्याय व अराजकता का प्रतीक रहा है। 2017 से पहले सपा की निरंकुश सत्ता में रामपुर के गरीबों और बाल्मीकि समुदाय की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जाता था और उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। विकास केवल सैफई व रामपुर के दो परिवारों तक सीमित था, जबकि बाकी जनता को विकास से वंचित रखा जाता था। बिजली देने में भी ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई जाती थी, जिससे सैफई में बिजली आती थी लेकिन पीलीभीत व रामपुर जैसे क्षेत्र अंधेरे में रहते थे। जनता जनार्दन ने इस अन्यायी सत्ता को पलट कर पूरे राज्य में संदेश दिया। डबल इंजन सरकार में ‘पिक एंड चूज’ नहीं होता। बिजली सभी 75 जनपदों में आएगी। जहां भी आवश्यकता थी, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई दिए। अब कोई विकास नहीं रोक सकता, नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, बहन-बेटी का अपमान नहीं कर सकता।
 
वसूली पर निकल पड़ती थी चाचा-भतीजा की जोड़ी
सीएम योगी ने कहा कि सपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते उद्योग बंद होते गए। अन्नदाता किसान हताश होकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। न तो गरीब कल्याण के लिए कोई योजना थी और न विकास कार्यों के लिए धन। युवाओं के भविष्य से जमकर खिलवाड़ किया गया। अराजकता का यह हाल था कि कोई सरकारी विज्ञापन निकलता था तो ‘चाचा-भतीजा की जोड़ी’ वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कोर्ट को भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। सपा व कांग्रेस के इन्हीं पापों से यूपी बीमारू बना था।

विरासत और विकास का नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर की पावन धरा भगवान बामेश्वर महादेव, श्री पातलेश्वर महादेव, ओम नागेश्वर महादेव, कोसी मंदिर व मां बाला सुंदरी के दिव्य आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित है। सरकार इन पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत स्थलों के पुनरुद्धार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 2017 से पहले जहां त्योहारों पर रोक लगाई जाती थी। उपद्रव व दंगे होते थे, वहीं आज कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली, रामनवमी व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे सभी पर्व पूरी भव्यता व सुरक्षा के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या नगरी ब्रॉडगेज डबल रेलवे लाइन, फोर-लेन सड़क मार्ग और महर्षि बाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़कर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।

आर्थिक प्रगति व इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं रहा, बल्कि यह भारत की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन चुका है। प्रदेश आज युवाओं को रोजगार और अन्नदाताओं को अनुदान देने में अग्रणी है। हम खाद्यान्न, दुग्ध, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में देश में पहले या दूसरे नंबर पर गिने जाते हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना के माध्यम से रामपुर के पैच वर्क, जरी वर्क, वायलिन निर्माण व मेंथा उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान और युवाओं को नए रोजगार मिले हैं। रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का दुरुपयोग समाजवादी पार्टी जनता की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें प्रताड़ित करने में करती थी, लेकिन डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा में काम आ रहा है।

रामपुर में चौतरफा विकास

सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर-शामली नया इकोनॉमिक कॉरिडोर रामपुर से होकर गुजरेगा, जो गोरखपुर को सिलीगुड़ी और शामली को पानीपत से जोड़कर क्षेत्र में विकास को और मजबूत करेगा। रामपुर में ढांचागत विकास को गति देते हुए 3 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 व 10 मीटर और फोर-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल के पुनरुद्धार व विस्तारीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट आते ही सरकार वित्तीय राशि जारी करेगी।

सबका साथ-सबका विकास ही मूलमंत्र

 मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन की सरकार तुष्टिकरण के बजाय आमजन के संतुष्टिकरण पर विश्वास करती है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स को राज्य सरकार द्वारा ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है। हर महीने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से लखनऊ से सीधे मॉनिटरिंग कर गरीबों को शत-प्रतिशत राशन मिल रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर 2017 से पहले सपना था, आज हर गरीब के पास सिलेंडर अपना है। गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख का स्वास्थ्य कार्ड मिला है। कार्ड न होने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए संपूर्ण राशि दी जा रही है। प्रत्येक तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के माध्यम से इंटर कॉलेजों को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

निवेश प्रस्तावों से मिली उद्योगों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत का सम्मान हो या नौजवानों को नौकरी देने का संकल्प, सरकार हर मोर्चे पर प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों के नियुक्ति पत्र वितरण में रामपुर के युवाओं का नाम देखकर संतोष मिलता है। पहले जो युवा वंचित थे, आज प्रदेश की सेवाओं में चयनित होकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। रामपुर, मिलक, बिलासपुर, स्वार व चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों के युवा आज सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अवसर पा रहे हैं। निवेश प्रस्तावों से उद्योगों को गति मिली है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, विधायक श्रीमती राजबाला सिंह, आकाश सक्सेना, शफीक अहमद अंसारी, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, हरी सिंह ढिल्लो, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, सूर्य प्रकाश पाल, पूर्व सांसद घनश्याम लोधी, पूर्व विधायक शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान में बलरामपुर-रामानुजगंज बना छत्तीसगढ़ का अग्रणी जिला

रायपुर 

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिलाओं को भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य आबादी के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।

कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया।
कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए हैं।

दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों वाला बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के जनकल्याणकारी विजन, मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।

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