अभी तो शुरुआत है! अल-नीनो का असली असर बाकी, अगले 5 महीने भारत के लिए बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

नई दिल्ली

भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 जून की शुरुआत में केरल पहुंचा, लेकिन सामान्य से थोड़ा देरी से. शुरुआती बारिश कई जगहों पर कमजोर रही है. मौसम वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अभी तो अल-नीनो का पूरा असर नहीं दिखा है, लेकिन आने वाले जुलाई से नवंबर तक के महीने देश के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल पूरे मॉनसून सीजन के लिए औसत से कम बारिश का अनुमान लगाया है – लगभग 90-92 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA). इसका मतलब है कि देश के कई हिस्सों में सूखा जैसी स्थिति बन सकती है, खासकर जून के बाद। 

अल-नीनो क्या है और यह भारत को कैसे प्रभावित करता है?

अल-नीनो एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी प्रशांत ठंडा रहता है. ट्रेड विंड्स पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं. लेकिन अल-नीनो में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं. इससे भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं प्रभावित होती हैं। 

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ जाता है. भारत में मॉनसून देश की कुल वार्षिक बारिश का करीब 70 प्रतिशत लाता है. अगर यह कम हुआ तो कृषि, जल संसाधन, बिजली उत्पादन और समग्र अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है. 2026 में वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो जून में कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई-अगस्त में मध्यम और सितंबर तक मजबूत हो सकता है. NOAA और IMD जैसे संगठनों के अनुसार, जुलाई-अगस्त में अल-नीनो विकसित होने की संभावना 80-90 प्रतिशत से ज्यादा है। 

पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर अल-नीनो वर्षों में भारत को औसत से कम बारिश मिली है. 2009 में कमजोर अल-नीनो के बावजूद बारिश मात्र 78 प्रतिशत रह गई थी, जो 37 साल का सबसे कम स्तर था. 2015-16 के मजबूत अल-नीनो में भी सूखे की स्थिति बनी। 

हालांकि कुछ सालों में सकारात्मक भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive IOD) ने अल-नीनो के निगेटिव असर को कुछ हद तक कम किया, लेकिन 2026 में IOD अभी न्यूट्रल है. बाद में पॉजिटिव होने की उम्मीद है, जो थोड़ी राहत दे सकता है लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं। 

मॉनसून की शुरुआत कमजोर
जून 2026 के पहले दो हफ्तों में कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम रही. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 70-80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. मध्य भारत और कुछ उत्तरी हिस्सों में भी कमी है. IMD के अनुसार, जून महीने में भी नीचे औसत बारिश रहने की संभावना है. मॉनसून की देरी और कमजोर शुरुआत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। 

अभी अल-नीनो का पूरा कहर नहीं दिखा क्योंकि यह अभी विकसित हो रहा है. असली असर जुलाई से सितंबर के बीच दिखेगा, जब मॉनसून अपने चरम पर होता है. अगर अल-नीनो मजबूत हुआ तो अगस्त-सितंबर में बारिश और भी कम हो सकती है. इससे जलाशयों में पानी की कमी, नदियों का सूखना और भूजल स्तर गिरना जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। 

कृषि और किसानों पर संभावित प्रभाव
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक कृषि पर निर्भर है. करीब 50-60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी हुई है. खरीफ सीजन (जून-सितंबर) में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें आदि फसलें बोई जाती हैं. कम बारिश से इन फसलों की पैदावार घट सकती है। 

पिछले अल-नीनो वर्षों में सूखे से किसानों की आय घटी, कर्ज बढ़ा और आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ीं. 2026 में अगर बारिश 90 प्रतिशत या उससे कम रही तो खाद्यान्न उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की कमी आ सकती है. इससे खाद्य सुरक्षा चुनौती बनेगी. सरकार को आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा। 

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इन इलाकों में वर्षा आधारित खेती ज्यादा है. छोटे किसान जिनके पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, वे सबसे ज्यादा परेशान होंगे. पशुपालन भी प्रभावित होगा क्योंकि चारे की कमी हो सकती है। 

जल संकट और अन्य क्षेत्रों पर असर
कम बारिश का मतलब जल संकट गहराना है. कई शहरों और गांवों में पहले से पानी की समस्या है. मॉनसून कमजोर रहा तो पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की कमी बढ़ेगी. बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा क्योंकि हाइड्रो पावर प्लांट पानी पर निर्भर हैं। 

गर्मी पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. अल-नीनो से तापमान और बढ़ सकता है. लू की लहरें लंबी और तीव्र हो सकती हैं, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी. बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। 

महंगाई और विकास दर
कृषि उत्पादन घटने से सब्जी, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं. खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने से RBI की मौद्रिक नीति प्रभावित होगी. विकास दर पर भी दबाव पड़ेगा. अगर GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गई तो नौकरियां कम होंगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो सकती है। 

सरकार पहले से तैयारी कर रही है. कॉन्टीजेंसी प्लांस बनाए जा रहे हैं. 200 से ज्यादा जिलों में सूखा राहत कार्यों की योजना है. फसल बीमा योजना (PMFBY) को मजबूत किया जा रहा है. लेकिन चुनौती बड़ी है। 

ऐतिहासिक उदाहरण और सीख
1950 के बाद कई अल-नीनो वर्ष आए हैं. 1997-98 का सुपर अल-नीनो सबसे मजबूत था, लेकिन कुछ मामलों में भारत को अप्रत्याशित रूप से अच्छी बारिश मिली. 2015 में भारी सूखा पड़ा. इन अनुभवों से पता चलता है कि अल-नीनो तय करता है लेकिन IOD, हिमालयी बर्फ, स्थानीय मौसम व्यवस्था आदि भी भूमिका निभाते हैं। 

2026 में सुपर अल-नीनो की आशंका है, जो अक्टूबर-फरवरी तक मजबूत रह सकता है. इसका असर 2026 के मॉनसून के अलावा 2027 की शुरुआत तक भी रह सकता है। 

सभी उम्मीदें निराशाजनक नहीं हैं. अगर पॉजिटिव IOD विकसित हुआ तो यह अल-नीनो का कुछ असर कम कर सकता है. बेहतर मौसम पूर्वानुमान, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और किसानों को समय पर सलाह देने से नुकसान कम किया जा सकता है.

वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे उतार-चढ़ाव बढ़ रहे हैं. लंबे समय में हमें जल संरक्षण, सूखा प्रतिरोधी फसलें और माइक्रो इरिगेशन पर जोर देना होगा। 

 

PM-VBRY के तहत 19 जून को ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी करेंगे प्रधानमंत्री

विवेक झा, भोपाल/नई दिल्ली। रोजगार सृजन और युवाओं को औपचारिक कार्यबल से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) एक नए पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े लाभार्थियों के साथ संवाद भी करेंगे, जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन और देशभर के 200 क्षेत्रीय केंद्रों पर किया जाएगा।

भोपाल और मंडीदीप भी बनेंगे राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा

राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ ही मध्यप्रदेश में भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) सभागार और एचईजी, मंडीदीप में भी क्षेत्रीय आयोजन किए जाएंगे। इन दोनों कार्यक्रमों में करीब 700 नियोक्ता, कर्मचारी और गणमान्य नागरिक भाग लेंगे।

मैनिट में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल तथा भोपाल की महापौर मालती राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं मंडीदीप स्थित कार्यक्रम में भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा मुख्य अतिथि होंगे।

देशभर में 200 स्थानों पर एक साथ होंगे कार्यक्रम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया है। देशभर में 200 स्थानों पर समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, राज्य मंत्री, महापौर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भाग लेंगे।

अनुमान है कि इन आयोजनों में 65 हजार से 70 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें लगभग 9 हजार नियोक्ता प्रतिनिधि और 45 हजार कर्मचारी शामिल रहेंगे। इससे योजना के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ औपचारिक रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पहली नौकरी करने वाले युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पहली बार औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। योजना के भाग-ए के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकृत और एक लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने के वेतन के बराबर, अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है।

पहली किस्त छह माह की निरंतर सेवा पूरी करने पर तथा दूसरी किस्त 12 माह की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद जारी की जाती है। इससे युवाओं में दीर्घकालिक रोजगार और बचत की आदत को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

नियोक्ताओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन

योजना के भाग-बी में अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर नियोक्ताओं को ₹3,000 प्रति माह तक दो वर्षों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के लिए यह सहायता दो अतिरिक्त वर्षों तक बढ़ाई गई है।

50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नए कर्मचारियों तथा 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम पांच नए कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी, तभी वे योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

₹99 हजार करोड़ से अधिक का परिव्यय, 3.5 करोड़ रोजगार का लक्ष्य

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹99,446 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया है। इसका लक्ष्य दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन करना है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ युवा पहली बार औपचारिक कार्यबल का हिस्सा बनेंगे। योजना के लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होंगे।

रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा का भी विस्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आएंगे। EPFO पंजीकरण के माध्यम से श्रमिकों को भविष्य निधि जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

शुरुआती चरण में मिले उत्साहजनक परिणाम

योजना के शुरुआती क्रियान्वयन में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मार्च 2026 में 4.41 लाख प्रथम बार काम करने वाले कर्मचारियों को लगभग ₹247 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। वहीं 17,551 प्रतिष्ठानों को ₹214 करोड़ के प्रोत्साहन जारी किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 6.46 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए।

विकसित भारत के विजन को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि PM-VBRY भारत में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने, उद्योगों को नई नियुक्तियों के लिए प्रोत्साहित करने और युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रोजगार, निवेश और कौशल विकास को जोड़ने वाली यह योजना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

बॉक्स: PM-VBRY एक नजर में

  • योजना का नाम: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)
  • कुल परिव्यय: ₹99,446 करोड़
  • लक्ष्य: 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना
  • पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को लाभ: अधिकतम ₹15,000 तक प्रोत्साहन
  • नियोक्ताओं को प्रोत्साहन: प्रति अतिरिक्त कर्मचारी ₹3,000 प्रतिमाह तक
  • विशेष लाभ: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए अतिरिक्त दो वर्ष तक सहायता
  • लाभ अवधि: 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगार
  • भुगतान व्यवस्था: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) एवं PAN-लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से

भोपाल कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • स्थान: मैनिट सभागार, भोपाल
  • तिथि: 19 जून 2026
  • मुख्य अतिथि: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • विशिष्ट अतिथि: कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मालती राय
  • अनुमानित सहभागिता: लगभग 700 नियोक्ता, कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक

राष्ट्रपति मुर्मु ने ओंकारेश्वर तीर्थ और ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर किया अभिषेक

भोपाल 

राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को म.प्र. यात्रा के पहले दिन तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर तीर्थ और द्वादश ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर अभिषेक भी किया। उन्होंने ममलेश्वर और ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।

राष्ट्रपति  मुर्मु ने 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश से पहले नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में मुख्य पुजारियों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज और विशेष मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने देशवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। ओंकारेश्वर तीर्थ के दर्शन के पहले राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद खंडवा कलेक्टर  ऋषव गुप्ता ने स्मृति चिह्न भेंट किया। क्षेत्रीय सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति  मुर्मु को स्मृति चिन्ह के रूप में नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और भगवान ओंकारेश्वर तीर्थ का छायाचित्र भेंट किया। इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, क्षेत्रीय विधायक  नारायण पटेल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी  अनुराग सिंह व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

भिंड के डायल-112 हीरोज परिजनों से बिछड़े 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित तलाश कर परिवार से मिलाया

भोपाल 

भिंड जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से परिजनों से बिछड़ गए 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित तलाश कर उसके परिवार से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से बालक सकुशल अपने घर पहुँच सका।

17 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत झाँसी मोहल्ला से एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है। बालक के परिजन काफी समय से उसकी तलाश कर रहे थे तथा उन्हें तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना कोतवाली क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री अनुराग एवं पायलट श्री संजय सिंह भदौरिया मौके पर पहुँचकर परिजनों से बालक के संबंध में आवश्यक जानकारी एवं उसका फोटो प्राप्त किया। इसके उपरांत टीम ने आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश के दौरान बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त होने पर डायल-112 जवानों ने उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसके घर पहुँचकर आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत परिजनों के सुपुर्द किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

 

एमपी में पकड़े गए आरोपियों के पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज, आतंकी ट्रेनिंग भेजने की थी साजिश

भोपाल

 देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से पूछताछ में मप्र आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) को नई जानकारी मिली है। सोशल मीडिया और वाट्सएप पर पाकिस्तानी हैंडलर इन लोगों से कहता था कि नियमित जिम जाकर फिटनेस सही करो। लड़ाके बनने के लिए यह जरूरी है।

इसी तरह से उन्हें पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया था। शीघ्र ही प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी थी। हालांकि, अभी तक अकेले फराज के पास ही पासपोर्ट मिला है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एटीएस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार है।

इनमें फराज को भोपाल, नईम अब्दुल्ला उप्र के सहारनपुर, शाकिर मेव अलवर(राजस्थान) और इजहार उल हक को मधुबनी (बिहार) से गिरफ्तार किया है। सबसे पहले फराज को गिरफ्तार किया गया था, जिसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पूछताछ में मप्र एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि देश विरोधी गतिविधियों के आरोपित किसी आतंकी संगठन से तो नहीं जुड़े हैं। अभी तक की पूछताछ में वे बड़े संगठन से जुड़े होने से मना करते रहे हैं। इसके लिए एटीएस उनके पास से जब्त डिजिटल डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटाॅप आदि का डाटा निकालने जा रही है।

साथ ही सोशल मीडिया में उनके संपर्क और बातचीत का विवरण निकाला जा रहा है। इनके संपर्क में रहे अन्य लोगों से भी पूछताछ की तैयारी है। ऐसे में आरोपितों की संख्या और बढ़ सकती है।

एटीएस सूत्रों ने बताया कि अभी तक आरोपितों को किसी एजेंसी या व्यक्ति से देश विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग के प्रमाण नहीं मिले हैं। उनके बैंक खातों की जानकारी निकाली जा रही है।

 

विश्व योग एवं संगीत दिवस: सुर-ताल और कला के त्रिवेणी संगम से महकेगा मध्यप्रदेश, 14 स्थानों पर होंगे भव्य आयोजन

भोपाल 

मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आगामी 21 जून 2026 को ‘विश्व योग एवं संगीत दिवस’ के पावन अवसर पर प्रदेश में कला और संस्कृति का अनूठा उत्सव मनाया जा रहा है। इस विशेष दिवस पर राज्य के 14 स्थानों पर संगीत, नृत्य, चित्र और शिल्पकला पर केंद्रित भव्य सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश सहित देश के सुप्रतिष्ठित और ख्यातिलब्ध कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा और अविस्मरणीय अनुभव होगा।

संस्कृति विभाग के संचालक  एन.पी. नामदेव ने जानकारी दी कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अटूट हिस्सा है। यह मात्र सुरों और रागों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली साधना और असीम मानसिक शांति का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस सुदीर्घ परंपरा का उत्सव मनाना गर्व की बात है, और इसका मुख्य उद्देश्य हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और कलात्मक धरोहर के प्रति जागरूक व गौरवान्वित करना है।

इसी कड़ी में, 21 जून को जनजातीय संग्रहालय’ में संगीत और नृत्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस सुरमयी शाम की शुरुआत सु प्रदक्षिणा भट्ट (भोपाल) के शास्त्रीय गायन से होगी, जिसके बाद पुणे की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु स्मिता महाजन अपने भावपूर्ण भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति देंगी। यह गरिमामयी कार्यक्रम सायंकाल 7:00 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें आम जनता और कला अनुरागियों के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है।

इसके साथ ही, प्रदेश के विभिन्न शासकीय संगीत महाविद्यालयों में भी सुर और ताल की महफिलें सजेंगी। शासकीय संगीत महाविद्यालय, नरसिंहगढ़ में  आकाश गुंटीवार का शास्त्रीय गायन और सु मोहिका सक्सेना का भरतनाट्यम होगा। उज्जैन में  यश देवले के शास्त्रीय गायन के बाद सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु सुचित्रा हरमलकर का कथक नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। ग्वालियर में सु श्वेता गुंजन जोशी का गायन व सु सन्नाली शर्मा का कथक, खंडवा में  सुप्रियो मैत्रो व  आकाश तिवारी का गायन तथा सु प्रियंवदा सिंह का कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। मंदसौर में डॉ. नीलिमा छापेकर के गायन के साथ  मुन्ने खाँ और आबिद हुसैन का जुगलबंदी भरा सारंगी वादन होगा। वहीं, मैहर में  विजय सप्रे के गायन व सु शालिनी खरे के कथक और इंदौर में  दामोदर राव के गायन व सु भार्गवी शर्मा एवं समूह के कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी।

संगीत के साथ-साथ दृश्य कलाओं के संवर्धन के लिए प्रदेश के शासकीय ललित कला महाविद्यालयों में विशेष व्याख्यान और प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) आयोजित किए जा रहे हैं। ग्वालियर में  बसंत भार्गव और धार में सु निधि चोपड़ा चित्रकला की बारीकियों को साझा करेंगे। इंदौर में गुजरात के प्रसिद्ध कलाकार  जयंती राबड़िया चित्रकला पर अपने अनुभव साझा करेंगे। वहीं, मूर्तिकला और शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर में वाराणसी के  मदनलाल शिल्पकला पर और खंडवा में सु गिरिजा वायंगणकर मूर्तिकला विषय पर व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगी। संस्कृति विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रदेश में कलात्मक चेतना को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

 

तालाब एवं जल स्रोतों को करेंगे अतिक्रमण मुक्त‍: मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शहर के तालाबों एवं उससे जुड़े जल मार्गों (चैनलों) पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिये विशेष अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में इंदौर शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों तथा 250 से अधिक कुओं और बावड़ियों के संरक्षण के लिये किये गये कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता में देश और दुनिया में अपनी पहचान स्थापित कर चुका इंदौर अब जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अपनी उपलब्धियां दर्ज कर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौदर्यीकरण के कार्यों का अवलोकन कर श्रमदान भी किया। उन्होंने लिंबोदी में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा  कि जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन नीरस है। हम प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करें और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई करें। जल की एक-एक बूंद बचायें और जल को सहेजें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को इंदौर में करीब 100 वर्ष से अधिक पुराने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये तालाबों, कुँओं एवं बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई संबंधी कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत गुड़ी-पड़वा से की थी। अभियान में अभी तक प्रदेश में 2 लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किये जा चुके हैं।

महापौर  पुष्यमित्र भार्गव  ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में शहर के तालाबों,  कुँओं और बावड़ियों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास के व्यापक कार्य किये जा रहे हैं। अमृत 2.0 के अंतर्गत भी तालाब संरक्षण एवं विकास कार्य जारी हैं, जिनमें स्‍टोन बोल्‍डर पिचिंग, टो-वॉल निर्माण, बंधान पर रैलिंग, इको फ्रेंडली पाथ-वे, स्टोन बेंच आदि कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, विधायक  मधु वर्मा, जनप्रतिनिधि, नगर निगम आयुक्‍त  क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्‍त  आशीष पाठक सहित बड़ी संख्‍या में नागरिक उपस्थित थे।

विज्ञान-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश परियोजनाओं पर हो तेज अमल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भविष्य में अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। मध्यप्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। हमें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर प्रदेश को ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सशक्त केंद्र बनाना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास किए जाएं। निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे गुजरात की तर्ज पर मध्यप्रदेश (राजधानी क्षेत्र भोपाल) में भी गिफ्ट सिटी बनाने के लिए ठोस प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज बन रहे हैं। उज्जैन में ही मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की स्थापना की जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यों एवं अन्य गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निवेश संवर्धन पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रमुख निवेश (लीड इन्वेस्टमेंट) आकर्षित करने के लिए तैयार की गई विशेष कार्य योजना की समीक्षा की तथा इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में होने वाला निवेश न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, अनुसंधान, स्टार्ट-अप संस्कृति और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने तथा निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रगति रिपोर्ट तथा आगामी कार्य योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में जरूरी मानव संसाधन की पद पूर्ति कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को और भी सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन देकर बताया कि उज्जैन में डीपटेक रिसर्च पार्क की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। अब इसी प्रस्ताव अंतर्गत उज्जैन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए नई कार्य योजना तैयार कर संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह सेंटर करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। डीपटेक रिसर्च पार्क भी अब इसी सेंटर ऑॅफ एक्सीलेंस का हिस्सा होगा। उन्होंने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने की तैयारी है। इसे ईकाई सिटी (EKAI CITY – एजुकेशन, नॉलेज एण्ड एआई सिटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 10 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग की जाएगी। राज्य सरकार भी इसमें राशि मिलाएगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की 4 यूनिवर्सिटीस मध्यप्रदेश में अपना अध्ययन परिसर (स्टडी कैम्पस) खोलना चाहती हैं। उनसे भी समन्वय किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का एक उभरता हुआ टेक हब बन रहा है। यहां 5 आईटी एसईजेड, 15 से अधिक आईटी पार्क, 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियां, करीब 1200 से अधिक टेक स्टार्ट-अप्स कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले 300 से अधिक कॉलेज, 50 हजार से अधिक तकनीकी स्नातक/वर्ष (यूजी. पीजी, डिप्लोमा), आईआईटी, आईआईआईटीडीएम, आईआईएम, एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र की 6 नीतियां हैं। एमपी स्टार्ट-अप पॉलिसी : 2022 भी लागू है। सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय, ब्याज सब्सिड़ी जैसे प्रोत्साहन भी निवेशकों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में टेक सेक्टर में लगभग 12 हजार 500 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इससे करीब 50 हजार नए रोजगार का सृजन हुआ है। विभाग द्वारा आईटी आईटीईएस तथा क्वांटम और एआई जैसी उभरते तकनीकी सेक्टर, डेटा सेंटर, ईएसडीएम- डेटा सेंटर कम्पोनेंट्स मैन्यूफेक्चरिंग, सेमी कंडक्टर- पैकेजिंग, डिजाइन, ड्रोन निर्माण, जीसीसी, एवीजीसी- एक्सआर एवं स्पेस टेक पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में इस पूरे सेक्टर के अंतर्गत करीब 5 हजार 892 करोड़ रूपए की मेगा परियोजनाओं के प्रस्ताव पाइपलाइन में है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बैठक में बताया कि उद्योग विभाग के पास 10 लाख वर्ग फीट जमीन उपलब्ध है। निवेशकों को कम से कम समय में भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अधीन स्टार्ट-अप मिशन के तहत हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को भी जरूरी मदद मुहैया करा रहे हैं।

प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा ने अपने स्पेशल प्रेजेंटशन में मध्यप्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आमूल-चूल विकास और इस सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार को इस सेक्टर को प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री मनीष सिंह, प्रबंध संचालक मप्र औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड श्री चंद्रमौली शुक्ला, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस में पदाधिकारी श्री तापस तिवारी सहित एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कार्यों की धीमी गति पर जताई नाराजगी

रायपुर

लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज अपने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रवास के दौरान लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग, सेतु निर्माण, सड़क एवं भवन निर्माण तथा विद्युत एवं यांत्रिकी के अधिकारियों की बैठक लेकर सड़कों, भवनों व पुल-पुलियों के निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी, वनमण्डलाधिकारी  आलोक बाजपेई और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाते हुए समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा ठेकेदारों के साथ सतत समन्वय बनाकर कार्यों को गति देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने लंबित कार्यों की जानकारी लेकर संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी करने तथा ब्लैक-लिस्ट करने के निर्देश दिए।

 बंसल ने बैठक में बलरामपुर-रामानुजगंज-सनावल, कामेश्वरनगर, कपिलदेवपुर, गणेशमोड़, जनकपुर, रमेशपुर-शंकरपुर, चंपा-बाद और कुसमी-कोरंधा मार्ग के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न भवनों के निर्माण और अधोसंरचना परियोजनाओं के साथ ही शासकीय महाविद्यालय भवन के कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। शासन की प्राथमिकता वाले निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को जवाबदेही से कार्य करने तथा गुणवत्ता व समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय राजमार्ग और कंठी घाट का किया निरीक्षण, अधूरे कार्यों को बारिश से पहले पूरा करने कहा

लोक निर्माण विभाग के सचिव  बंसल ने बैठक के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-343 और कंठीघाट में निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-343 का निरीक्षण करते हुए कहा कि बरसात के पहले नाली निर्माण एवं जल निकासी संबंधी सभी कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण कर लें, ताकि वर्षा के दौरान आवागमन बाधित न हो व लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने सड़कों और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता तथा सड़क सुरक्षा के मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

सीटों की संख्या को बढ़ाने का सुखद परिणाम: ट्राइबल हॉस्टल के 13 अभ्यर्थियों ने रचा कीर्तिमान

रायपुर

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 के परिणामों में छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। नई दिल्ली के द्वारका स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रहे 13 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। विशेष बात यह है कि इनमें अधिकांश विद्यार्थी जनजातीय, ग्रामीण एवं सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से आते हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति की प्रतिभा, परिश्रम और अटूट संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर निर्माण के लिए बेहतर अवसर एवं संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इन युवाओं की सफलता प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देगी।

यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में सफल होने वाले विद्यार्थियों में  गौतम कुमार,  कुलभूषण सिंह पोया,  हरि चंद्र प्रकाश सिंह,  मयंक रात्रे,  मलिकराम पटेल,  आर्यन राठौर,  चेतन लाल,  हरीश कुमार पटेल,  किशन लाल साहू,  सत्यनारायण चंद्राकर, सु दीक्षा दिवाकर,  विकेश कुर्रे तथा  प्रकाश पटेल शामिल हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि समाज के वंचित एवं प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।  इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ वनांचलों, जनजातीय क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को देश की राजधानी में रहकर संघ लोक सेवा आयोग सहित अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर अवसर प्राप्त हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि ट्राइबल यूथ हॉस्टल की स्थापना राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, अध्ययन कक्ष, पुस्तकालय, उत्कृष्ट कोचिंग तथा अनुभवी विशेषज्ञों का नियमित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि ट्राइबल यूथ हॉस्टल जैसे संस्थान प्रतिभाओं को पहचान देने और उन्हें उचित दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रारंभिक परीक्षा में सफल ये विद्यार्थी मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रशासनिक सेवाओं में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएंगे।

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार द्वारा युवाओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे शैक्षणिक अवसरों और मार्गदर्शन व्यवस्था का सकारात्मक परिणाम है।  UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में 13 अभ्यर्थियों की सफलता ने इस संस्थान की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

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