ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, ऋतब्रत बने बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता

कलकत्ता
विधानसभा से लेकर संसद तक बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले पार्टी ने यहां विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस के इस फैसले को चुनौती दी थी। ममता खेमे के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस सिलसिले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश पास करने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्पीकर का फैसला बरकरार रहेगा. तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी है।  

टीएमसी की तरफ से दो नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए गए थे. शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव टीएमसी नेतृत्व के गुट की तरफ से भेजा गया, जबकि पार्टी के बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम भेजा, जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु ने स्वीकार किया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया। 

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 जून, 2026) को शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहा है. जस्टिस कृष्ण राव ने सभी पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। 

टीएमसी सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन याचिका स्वीकार कर ली है. अब इस मामले में फाइनल हियरिंग होगी। 

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने पूछा था कि अगर एक ही राजनीतिक दल की तरफ से दो अलग-अलग नामों का प्रस्ताव भेजा जाए, तब अध्यक्ष का कर्तव्य क्या होगा, क्या वह स्वत: संज्ञान लेते हुए फैसला ले सकते हैं या फिर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक होगा. इस पर अध्यक्ष के लिए पेश एडवोकेट बिल्वदल भट्टाचार्य ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा परिलब्धियां अधिनियम, 1937 के अनुसार नेता प्रतिपक्ष वही सदस्य होता है जिसे सदन में सबसे अधिक संख्या वाले विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हो। 

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी दल का संख्याबल या उसके नेता को लेकर कोई विवाद होता है, तो उस मामले में अध्यक्ष का फैसला अंतिम और निर्णायक होगा. उधर, विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर का मामला भी चर्चा में है, जो नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से ही जुड़ा है. आरोप है कि टीएमसी सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष के लिए भेजे गए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम के प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। 

इसे लेकर सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ही सवाल उठाए और शिकायत की, जिसके बाद मामला गरमा गया. विधायकों की शिकायत के बाद विधानसभा सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू की. जिन विधायकों के नाम विवादित दस्तावेजों पर हैं, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और हस्ताक्षरों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। 

नशे के खिलाफ प्रदेशव्यापी जनअभियान शुरू, 26 जून तक चलेगा नशा मुक्त भारत सप्ताह

नशे के खिलाफ प्रदेशव्यापी जनअभियान शुरू, 26 जून तक चलेगा नशा मुक्त भारत सप्ताह

नशा मुक्त भारत अभियान-विकसित भारत की पहचान’’ थीम पर होंगे जागरूकता कार्यक्रम

प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने दिलाई नशामुक्ति की शपथ, सभी विभागों की सहभागिता से चलाया जाएगा अभियान

रायपुर,
 छत्तीसगढ़ समाज कल्याण विभाग द्वारा 17 जून से 26 जून तक प्रदेशभर में नशा मुक्त भारत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर विभिन्न विभागों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।

समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने बताया कि इस वर्ष “नशा मुक्त भारत अभियान-विकसित भारत की पहचान” थीम के अंतर्गत सप्ताह भर विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध जनभागीदारी को बढ़ावा देने और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सभी विभागों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की गई है।
सप्ताह के दौरान स्कूलों, कॉलेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार, समूह चर्चा, शपथ ग्रहण, जागरूकता रैलियां तथा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशा छोड़ चुके व्यक्तियों की प्रेरणादायक सफलता की कहानियों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा तथा स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मानव श्रृंखला, शपथ कार्यक्रम और जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। वहीं खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा फुटबॉल एवं हॉकी प्रतियोगिताएं तथा मैराथन आयोजित कर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा।
नेहरू युवा केंद्र एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से जिले स्तर पर ओपन माइक प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत, भाषण, समूह चर्चा, नशामुक्ति शपथ-पत्र वितरण तथा सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर चस्पा करने जैसी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।

इसी कड़ी में आज महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेशभर में जनजागरूकता का वातावरण निर्मित कर युवाओं को सकारात्मक जीवन मूल्यों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

भारत माता वाहिनी योजना के विस्तार, नशामुक्ति केन्द्रों की मॉनिटरिंग एवं पुनर्वास व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने पर जोर

राज्य में 5 जिलों में नए नशामुक्ति केन्द्र खोले जाएंगे

रायपुर, 
छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिनी योजना) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने की।

बैठक में समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान राज्य में संचालित शराब व्यसन मुक्ति अभियान की प्रगति, नशापीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास, नशामुक्ति केन्द्रों के संचालन तथा भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में राज्य स्तरीय समिति की पूर्व बैठक 6 अक्टूबर 2023 के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। साथ ही प्रत्येक विकासखण्ड की एक हजार से अधिक जनसंख्या वाली नवीन ग्राम पंचायतों में भारत माता वाहिनी के गठन एवं विस्तार संबंधी प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे नशामुक्ति अभियान को ग्रामीण स्तर तक और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

समिति ने नशापीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए संचालित 15 बिस्तरों वाले एकीकृत पुनर्वास केन्द्रों की क्षमता 15 से बढ़ाकर 50 बिस्तर करने का सुझाव दिया । केन्द्रों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए यह भी निर्णय लिया गया कि जिन जिलों में ऐसे केन्द्र संचालित नहीं हैं, वहां उनकी स्थापना एवं संचालन के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत राज्य के 5 जिलों में नए नशामुक्ति केन्द्र खोले जाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। 5 नये नशामुक्ति केंद्र मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा, कोरबा जिलों में खोले जायेंगे।

बैठक में संचालित नशामुक्ति केन्द्रों की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सीसीटीवी कैमरा एवं बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित करने संबंधी प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। समिति का मानना है कि इससे केन्द्रों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी।

इस अवसर पर वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान अभियान अंतर्गत किए गए कार्यों तथा व्यय की समीक्षा भी की गई। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना, आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं से संबंधित प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में एनसीओआरडी (NCORD) एवं एनएमबीए (NMBA) के प्रभावी क्रियान्वयन में योजनांतर्गत गठित समूहों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। समिति ने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों तथा समुदाय की सहभागिता आवश्यक है।

बैठक के दौरान नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के उद्देश्य से विभागीय समन्वय को और मजबूत करने, पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने तथा समुदाय आधारित जनजागरूकता गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बिलासपुर में PWD अधिकारियों पर बरसे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, लापरवाही पर लगाई फटकार

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने बिलासपुर में बहतराई स्थित स्वर्गीय बीआर यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया। यहां हॉकी स्टेडियम की अधूरी गैलरी, फंड मिलने के बाद भी मैपलवुड लगाने में देरी और मरम्मत कार्यों में लापरवाही देखी तो अधिकारियों पर नाराज हुए।

उन्होंने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बीबीएस गौतम से जानकारी मांगी, जब वे तुरंत जवाब नहीं दे पाए साव ने कहा वेरी गूड, ढूंढते रहो। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव जमकर भड़क गए। बहतराई स्टेडियम के अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर उन्होंने ईई, एसडीओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर संजय अग्रवाल की मौजूदगी में निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने 2017 से लंबित चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान सरल स्वभाव के उपमुख्यमंत्री का ऐसा रूप पहली बार सामने आया। अधिकारियों से उन्होंने कहा कि अगली बार आया और काम नहीं हुआ तो आप दिक्कत में पड़ जाएंगे। काम कंप्लीट करिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘काम करना है या नहीं? पहले जांच क्यों नहीं हुई? 2017 से काम अधूरा पड़ा है। यह कोई काम करने का तरीका है क्या? मजाक कर रहे हैं या नौकरी?’

जल्द काम पूरा करने के निर्देश
इस दौरान अरुण साव ने अधिकारियों से कहा, ‘ईई साहब, आपका सुपरविजन कैसा है? इतने साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। अगर समय पर निगरानी होती तो यह स्थिति नहीं बनती।’ करीब 9 साल पहले बने इस खेल प्रशिक्षण केंद्र में अब भी कई काम अधूरे हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को जल्द सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए।

डिप्टी सीएम बोले- दिक्कत में पड़ेंगे आप लोग
डिप्टी सीएम अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को सभी पेंडिंग काम जल्द पूरा करने के लिए संयुक्त बैठक बुलाकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 दिनों के अंदर सभी निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हर काम की खुद जांच कीजिए और 15 दिन में रिपोर्ट दीजिए। मैं दोबारा निरीक्षण के लिए आऊंगा। अगर काम में लापरवाही मिली तो आप लोग दिक्कत में पड़ेंगे।

हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी
इसके बाद अरुण साव ने हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिला खनिज न्यास (DMF) से पैसा मिलने के बावजूद जरूरी मरम्मत और रखरखाव के काम समय पर नहीं हो रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

साल 2017 से शुरू हुआ काम अधूरा
उन्होंने कहा कि इंडोर स्टेडियम में मैपलवुड फ्लोरिंग का काम साल 2017 में शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। ये गंभीर लापरवाही है। अरुण साव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण और मरम्मत कार्य तय समय में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही कामों की नियमित निगरानी भी की जाए। अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

तीरंदाजी मैदान जुलाई तक पूरा करने के निर्देश
डिप्टी सीएम ने एसईसीएल की ओर से करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे तीरंदाजी मैदान के निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने खेल विभाग के सहायक संचालक ए. एक्का को जुलाई तक मैदान का निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आउटडोर स्टेडियम में लगी हाईमास्ट लाइट को जल्द ठीक कराने के लिए कहा। पीडब्ल्यूडी और खेल विभाग के अधिकारियों को पूरे स्टेडियम का संयुक्त निरीक्षण करने और जरूरी कामों का प्रस्ताव तैयार कर भेजने के भी निर्देश दिए। साव ने हॉकी मैदान में बन रहे पैवेलियन में अधिकारियों के लिए शौचालय बनाने और दर्शकों के लिए शौचालयों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की

अधिकारियों को फील्ड में जाकर गुणवत्ता और निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर. 
 लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में विभाग के प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की। विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े, कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्माणाधीन सड़कों, पुलों और भवनों के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा फील्ड में जाकर कार्य की गुणवत्ता व समय-सीमा में पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तथा निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने को कहा। 

विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े ने सचिव श्री बंसल को कोरिया जिले की बहुप्रतीक्षित सड़कों और पुलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनके निर्माण से जिलेवासियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कोरिया जिले और वहां के नागरिकों के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों से लोक निर्माण विभाग के सचिव को अवगत कराने के साथ ही विकासखंड मुख्यालय सोनहत में सर्किट हाउस के निर्माण का भी आग्रह किया।

श्री बंसल ने विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े और कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव द्वारा प्रस्तुत सुझावों व प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा प्रक्रिया का विधिवत पालन करते हुए एकीकृत प्राक्कलन शासन को भेजने को कहा, ताकि निविदा प्रक्रिया समय पर प्रारंभ की जा सके।

जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक

जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक

44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन उर्वरक और 6,836 क्विंटल बीज का भंडारण

10 हजार से अधिक किसानों को 37.79 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित

रायपुर
खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जशपुर जिले में खाद, बीज एवं कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि एवं सहकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।

उप संचालक कृषि श्री एम.आर. भगत ने बताया कि किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दे रहा है।

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इससे किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है और समय तथा परिवहन व्यय दोनों में कमी आई है।

वर्तमान में जिले की 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 3,681 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार 6,836 क्विंटल धान बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए खाद एवं बीज का भंडारण लगातार बढ़ाया जा रहा है।

कृषि ऋण वितरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसमें 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद तथा 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इस सहायता से किसानों को समय पर कृषि निवेश करने और खेती की लागत वहन करने में मदद मिल रही है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार निरीक्षण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, हरी खाद एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।

NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने परीक्षा केंद्रों का किया निरीक्षण

रायपुर.

21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 पुनः परीक्षा के सुचारु एवं व्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिले के 11 परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।

इस दौरान उन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सेरीखेड़ी, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उपरवारा, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल फॉरेस्ट कॉलोनी (अभनपुर रोड, माना बस्ती), शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक शाला माना कैंप, मिंटू शर्मा स्मृति हायर सेकेंडरी स्कूल डुमरतराई, माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला बुढ़ापारा, जे.आर. दानी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कालीबाड़ी, संत कंवरराम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला कटोरा तालाब, शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ कॉलेज बैरन बाजार तथा प्रो. जे.एन. पांडे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नलघर चौक का निरीक्षण किया।

बारिश को देखते हुए विशेष व्यवस्था के निर्देश
कलेक्टर डॉ. सिंह ने संभावित बारिश को देखते हुए निर्देश दिए कि परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग शेड अथवा छायादार स्थान पर की जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहे तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

रायपुर में 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए
री-नीट परीक्षा को लेकर रायपुर जिले में कुल 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत करते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। निरीक्षण के दौरान रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, डीसीपी मयंक गुर्जर, डीसीपी उमेश कुमार गुप्ता, डीसीपी संदीप कुमार पटेल, एसडीएम नंदकुमार चौबे, एसडीएम अभनपुर रवि सिंह, एडीसीपी राहुल देव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) प्रशांत शुक्ला, डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किंडों सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

क्या अफगानिस्तान को ‘पाषाण युग’ में ले जा रहा तालिबान? सरकारी कर्मचारियों के स्मार्टफोन पर लगाया बैन

काबुल 

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसका फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। 

यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी को छूट चाहिए तो उसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी जरूरी होगी। 

एक ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म दि गार्डियन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में तालिबान अधिकारियों को यह आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि तालिबान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

पूरे देश में लागू नहीं किया जा रहा स्मार्टफोन बैन
रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा. कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी इसका असर देखने को मिल रहा है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल लोगों की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहा है और संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाए. उनका कहना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है। 

इंटरनेट पर पाबंदी का कड़ा विरोध
हाल के महीनों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं. पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. तालिबान ने इसे “अनैतिक सामग्री रोकने” के लिए जरूरी बताया था. हालांकि इस फैसले का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था, जिसके बाद इंटरनेट बहाल करना पड़ा। 

विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे. ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए थे. आरोप है कि तालिबान बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत भी हुई थी. वीडियो सामने आने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा। 

तालिबान स्मार्टफोन पर क्यों लगा रहा बैन?
तालिबान को यह भी चिंता है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की जानकारी लीक कर रहे हैं. कई मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी। 

हेरात के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि उनके दफ्तरों में कई महीनों से स्मार्टफोन पर अनौपचारिक रोक लगी हुई थी. एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब वह मोबाइल लेकर कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे तोड़ दिया। 

तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी काम करने के बजाय घंटों मोबाइल फोन पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन इसका समाधान स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है। 

 

​डिजिटल लॉकर में भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई

विशेष आलेख

​डिजिटल लॉकर में भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई

​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात
           

   रायपुर

      ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—’एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है।

​क्या है यह ‘क्रेडिट बैंक’ और कैसे बदलेगी जिंदगी?

    ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के ‘क्रेडिट’ (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता।
​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई ‘जीरो’ मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या ‘क्रेडिट’ कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे ‘थर्ड ईयर’ में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही “मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट” कहा गया है।

​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का ‘स्कोरकार्ड’

    ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं।
​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं।

​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग   

    तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है।

​डिजीलॉकर बना ‘सुरक्षा कवच’: गुम होने का डर खत्म

    ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है।
​विश्वविद्यालयों को सीधे ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी’ (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।
 ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है।

​’ग्लोबल’ हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा

    ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।
    ​’ABC ID’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया ‘डिजिटल पंख’ है।

 विष्णु प्रसाद वर्मा
 सहायक संचालक

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण

वर्ष 2006 में आवासीय परियोजना हेतु आबंटित भूमि पर निजी बिल्डर द्वारा किया जा रहा था अवैध निर्माण

रायपुर,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित मंडल की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया है। कार्रवाई के दौरान निजी बिल्डर द्वारा बिना अनुमति निर्मित की जा रही सड़क को हटाया गया।

दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इस भूमि में ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 के भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 शामिल हैं। परियोजना के लिए विकास अनुज्ञा 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी।

1435 एलआईजी आवासों के निर्माण का था प्रावधान

स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण में पाया गया कि 1435 प्रस्तावित आवासों में से 1327 आवास स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप निर्मित किए गए, जबकि 39 आवास स्वीकृत अभिन्यास से पृथक निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण किया गया।

भूमि विवाद के कारण नहीं बन सके 79 आवास

निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्माण अवधि के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी आवासों का निर्माण किया गया। विवादित क्षेत्र में स्थित 79 आवासों का निर्माण न होने के कारण उनका विक्रय भी नहीं किया गया।

सीमांकन के दौरान सामने आया अतिक्रमण

हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर सड़क निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की।

अवैध सड़क हटाकर भूमि को कराया अतिक्रमणमुक्त

कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक-3, सेजबहार रायपुर श्री नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान संपदा अधिकारी श्री अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता श्री हेमंत निषाद, उप अभियंता श्रीमती निकिता मिश्रा, श्री अनुपम राठौर, श्री पेमेन्द्र ध्रुव, श्री अमय विक्रम तथा श्री कमलेश दास सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में अनधिकृत सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया।

भूमि पर विकसित होगी नई आवासीय परियोजना

मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में इस क्षेत्र में नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

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