मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व अभियान के कार्यों की समीक्षा की

मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व अभियान के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर
मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में टीवी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ को टीवी मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। 

                मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा है कि राज्य में टीबी के मरीजों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाये जायें। जिसमें जांच के दौरान मिलने वाले टीबी के मरीजों का त्वरित ईलाज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक गांव और शहरों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने टीबी मरीजों के जांच के लिए सभी जरूरी उपकरणों एक्स-रे मशीन एवं रेडियोग्राफरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा है। 

               विकासशील ने मरीजों की शीघ्र पहचान कर ईलाज शुरू किया जाना चाहिए एवं मरीजों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत पोषण आहार एवं पौष्टिक सामग्री हेतु निर्धारित राशि तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत जो गांव और ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होती है। इसके बारे में गांव में होने वाली ग्राम सभा में लोगों को बताया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की घर-घर जाकर जांच की जाए। महिलाओं के बीपी, वजन, हिमोग्लोबिन इत्यादि की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को एफआरयू में रेफर किए जाए। 

                मुख्य सचिव ने बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाए। सभी आंगनबाड़ी, स्कूलों में हर बच्चें की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। रोग युक्त पाए जाने बच्चों को बड़े अस्पतालों में ईलाज के लिए भेजा जाए। अस्पतालों में ईलाज करा रहे बच्चों की टैªकिंग की जाकर उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग कर समुचित उपचार दिया जाए। सभी शिशुओं को जरूरी टीके लगाए जाये। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाश नाथ काटजू की जयंती पर पुष्पांजलि की अर्पित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाश नाथ काटजू की जयंती पर पुष्पांजलि की अर्पित

विधानसभा के सेंट्रल हॉल में स्व. काटजू के चित्र पर किया माल्यार्पण
नीट परीक्षा के निर्विघ्न संचालन के लिए राज्य सरकार केन्द्र के लगातार संपर्क में है
भोपाल-इन्दौर सहित नीट के अधिक परीक्षा केन्द्रों वाले शहरों के लिए अतिरिक्त बसों का होगा संचालन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से की चर्चा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कैलाशनाथ काटजू की 139वीं जयंती पर विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में उन्हें पुष्पांपजि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि स्व. काटजू का जन्म रतलाम जिले की जावरा तहसील में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1957 से 1962 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दायित्वों का निर्वाहन किया। इसके बाद केंद्रीय स्तर पर रक्षा , कानून सहित कई मंत्रालय का कामकाज भी संभाला। स्व. काटजू विभिन्न राज्यों के राज्यपाल भी रहे। देश की आजादी से पहले भी उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अपनी क्षमता और योग्यता से स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। मुख्यमंत्री के रूप में मध्यप्रदेश का नेतृत्व करने के साथ-साथ काटजू, पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के प्रमुख सहयोगी भी रहे। काटजू ने कई स्वशासी संस्थाओं को समृद्ध कर आगे बढ़ाया। प्रदेश के विकास में अपने दूरदर्शी नेतृत्व, उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण से उन्होंने प्रदेश तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. काटजू के आदर्श, विचार और उनका राष्ट्र सेवा का भाव हमें सदैव जनहित और लोककल्याण के कार्यों के लिए प्रेरित करता रहेगा।

नीट परीक्षा के सुचारू और पारदर्शी आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाओं पर है विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नीट अभ्यर्थियों को पुन: परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीट परीक्षा के निर्विघ्न संचालन के लिए राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। परीक्षा के सुचारु और पारदर्शी आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। व्यापक तैयारियों के साथ रोल नंबर वेरिफिकेशन भी सुनिश्चित किया जाएगा। नीट परीक्षा के लिए शहरों में अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई है। परीक्षा केंद्रों पर रिफ्रेशमेंट सेंटर शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। राज्य सरकार परीक्षार्थियों और अभिभावकों के आवागमन के लिए इंदौर, भोपाल सहित नीट के अधिक परीक्षा केंद्र वाले शहरों में अतिरिक्त बसों का संचालन कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर पीने के पानी और अन्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परीक्षार्थियों और अभिभावकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं।

 

NEET Re-Exam पर MP में हाई अलर्ट, 283 केंद्रों पर कड़ी निगरानी; CM मोहन यादव खुद कर रहे मॉनिटरिंग

इंदौर/ भोपाल 
 नीट पुनर्परीक्षा को लेकर मध्य प्रदेश में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. परीक्षा के लिए इंदौर जिले में सर्वाधिक 57 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. जहां 23 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे. परीक्षा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. तमाम सुविधा और संसाधनों की समीक्षा मुख्यमंत्री द्वारा की जा रही है. कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया, ” इंदौर में नीट परीक्षा के लिए सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। 

सीएम मोहन के अधिकारियों को सख्त निर्देश
मंगलवार को नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर आयोजित वीडियो कन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री डॉ. यादव भी शामिल हुए, सीएम मोहन ने नीट परीक्षा के समन्वयक उच्च शिक्षा विभाग को सभी परीक्षा केन्द्रों में लगाई जाने वाली बायोमैट्रिक मशीन, सीसीटीवी कैमरे और जैमर 19 जून को ही परीक्षा केन्द्रों में लगाने के निर्देश दिए हैं। 

शासकीय वाहन से छात्र को परीक्षा केंद्र पहुचाने की सलाह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों के निर्देश देते हुए कहा, ” नीट परीक्षा के दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन भी होने हैं, इन आयोजनों के कारण परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कोई कठिनाई न हो. यातायात का बेहतर नियोजन करें. सुनिश्चित करें कि सभी परीक्षार्थी तय समय से पहले केन्द्रों में पहुंच जायें. किसी परीक्षार्थी को यदि सेंटर तक पहुंचने में आवागमन के साधन की परेशानी आ रही है तो प्रशासन और पुलिस अधिकारी किसी शासकीय वाहन या खुद अपने वाहन से उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करें। 

नीट के सभी केंद्रों पर अधिकारी की नियुक्ति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा केंद्रों वाले सभी 30 जिलों के कलेक्टर्स और एसपी सहित अन्य अधिकारियों को वीसी से निर्देशित किया कि नीट परीक्षा की तैयारियों के लिए उपयोग में लाई गई एसओपी अब प्रदेश में होने वाली सभी परीक्षाओं में उपयोग की जाएगी. अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा एवं जनसंपर्क अनुपम राजन ने परीक्षा की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि नीट परीक्षा आयोजन के लिए जिलास्तरीय समन्वय समिति का गठन कर इनकी बैठकें भी कर ली गई है. नियंत्रण कक्ष की स्थापना कर जिला नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी कर दी गई है. करीब 4 परीक्षा केन्द्रों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है. इसके अलावा प्रत्येक परीक्षा केन्द्रों में सहायक उपनिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की गई है। 

2 बैंकों में रखे गए नीट के प्रश्नपत्र
अपर मुख्य सचिव  राजन ने बताया, “नीट परीक्षा आयोजन के लिए संबंधित जिलों में सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किये गये हैं. परीक्षा के प्रश्नपत्र प्रदेश के 5 एयरपोर्ट के जरिए पहुंच चुके हैं. प्रश्न एनटीए द्वारा तय किए गए 2 अधिसूचित बैंकों में सुरक्षित रखे गए हैं. परीक्षा के दिन वाहनों की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी. इन वाहनों की जानकारी शाम तक एनटीए को दे दी जाएगी। 

नीट यूजी (अंडर ग्रेजुएट) परीक्षा 2026 मध्य प्रदेश में 30 जिलों के 283 परीक्षा केन्द्रों में होगी. यह परीक्षा इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, सागर, छिंदवाड़ा, बैतूल, भिंड, बालाघाट, अशोकनगर, छतरपुर, रतलाम, बड़वानी, खरगौन, धार, खंडवा, नर्मदापुरम्, दमोह, दतिया, देवास, गुना, मंदसौर, मुरैना, नीमच, राजगढ़, सिंगरौली, विदिशा और सतना जिले में होगी। 

VIP ट्रीटमेंट पड़ा भारी! गिरिबाला-समर्थ मामले में जेल अधीक्षक समेत 25 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले

भोपाल 

जेल विभाग ने 20 से ज्यादा अधिकारियों की तबादला सूची जारी की है। जिसमें सबसे चर्चित नाम ग्वालियर के जेल अधीक्षक विदित सिरवैया का है। जिन्हें ग्वालियर से हटाकर सर्किल जेल शिवपुरी का प्रभारी अधीक्षक बनाया है। बता दें सिरवैया से रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। जिसमें ब्लैकमेलर ने जेल में वसूली और नशेबाजी का वीडियो भेजकर उनसे 5 लाख मांगे। रकम नहीं भेजने पर वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की धमकी दी। जिस पर जेल अधीक्षक द्वारा ब्लैकमेलिंग की लिखित शिकायत बहोड़ापुर थाने में दर्ज करवाई गई।

गिरिबाला, समर्थ सिंह जैसे हाईप्रोफाइल कैदियों का ध्यान रखने वाले अधीक्षक का भी ट्रांसफर
वहीं परिवहन के करोड़पति आरक्षक सौरभ शर्मा और ट्विशा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ जैसे हाईप्रोफाइल बंदियों की जेल में देखरेख करने वाले कथित VIP ट्रीटमेंट देने वाले भोपाल जेल अधीक्षक का भी तबादला किया गया है। अधीक्षक राकेश भांगरे को केंद्रीय जेल ग्वालियर का प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है। बता दें हाल ही में भांगरे पर पूर्व जज गिरिबाला और समर्थ को जेल के भीतर वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोप लगा था।

जेल विभाग में हुए प्रमुख ट्रांसफर की लिस्ट

अधिकारी – वर्तमान पदस्थापना – नई पदस्थापना

दिनेश नरगावे – जेल मुख्यालय, भोपाल केंद्रीय जेल, इंदौर

अलका सोनकर – केंद्रीय जेल, इंदौर जेल मुख्यालय, भोपाल

विदित सिरवैया – प्र. अधीक्षक, केंद्रीय जेल ग्वालियर – सर्किल जेल, शिवपुरी

राकेश भांगरे – प्र. अधीक्षक, केंद्रीय जेल, भोपाल – केंद्रीय जेल, ग्वालियर

रमेशचंद्र आर्य – प्र. अधीक्षक, सर्किल जेल शिवपुरी – केंद्रीय जेल, सागर

देवेंद्र कुमार – सारस जिला जेल, उमरिया – जिला जेल, खण्डवा

मानेंद्र सिंह परिहार- अधीक्षक, केंद्रीय जेल सागर – केंद्रीय जेल, भोपाल

अदिति चतुर्वेदी- जिला जेल, खण्डवा – केंद्रीय जेल, नरसिंहपुर

यशवंत मांझी – जिला जेल, नीमच – प्र. अधीक्षक, जिला जेल, मंदसौर

दिलीप सिंह – जिला जेल, छतरपुर – जिला जेल, हरदा

योगेंद्र परमार – केंद्रीय जेल, रीवा – केंद्रीय जेल, छतरपुर

16 जून रात 12 बजे तक होने थे ट्रांसफर
बता दें कि नई तबादला नीति के तहत मध्य प्रदेश में 1 जून से तबादलों से रोक हटाते हुए तबादले शुरू किए गए थे। 1 जून से शुरू हुए इन तबादलों की अंतिम तारीख 15 जून थी। लेकिन कई विभाग में तबादलों पर अनुमोदन के बावजूद तबादला आदेश तय समय पर जारी नहीं हो पाए थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने गत दिवस मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों की मांग के बाद 24 घंटे की अवधि और बढ़ाते हुए आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक जिन विभागों में अधिकारी कर्मचारी ज्यादा हैं और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों के तबादले 16 जून रात 12 बजे तक करने की अनुमति मिली। इसके बाद जेल विभाग समेत सभी विभागों में रात 12 बजे तक ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की गई है।

पेड़ काटने पर सख्ती! HC में पेश हुई ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026, एक पेड़ के बदले लगाने होंगे 20 पौधे

ग्वालियर
मध्यप्रदेश सरकार ने विकास परियोजनाओं के दौरान पेड़ों की कटाई को कम करने के उद्देश्य से ‘ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026’ का मसौदा तैयार किया है।  यह ड्राफ्ट हाई कोर्ट की डबल बेंच के समक्ष पेश किया गया।

प्रस्तावित नीति के तहत सड़क, मेट्रो, रेलवे और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं में पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह प्रत्यारोपित करने पर जोर दिया गया है।

थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना के बाद बनी नीति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ग्वालियर के थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों का प्रत्यारोपण किया गया था। बाद में पर्याप्त देखरेख नहीं होने से कई पेड़ नष्ट हो गए। इस मामले में हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार से स्पष्ट नीति बनाने को कहा था।

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट
न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए थे कि पेड़ों के प्रत्यारोपण और कटाई से संबंधित कार्य वैज्ञानिक मानकों और स्पष्ट नीति के आधार पर किए जाएं। इसके बाद राज्य सरकार ने ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी का मसौदा तैयार किया।

पेड़ काटना नहीं होगा पहला विकल्प
प्रस्तावित नीति के अनुसार किसी भी निर्माण एजेंसी को यह साबित करना होगा कि परियोजना के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को बचाने के सभी विकल्पों पर विचार किया गया है।

यदि पेड़ों को हटाना अपरिहार्य हो, तो प्रभावित पेड़ों में से कम से कम 80 प्रतिशत का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण करना होगा।

जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग
नीति में प्रत्यारोपित पेड़ों और उनके स्थान पर लगाए जाने वाले नए पौधों की जियो-टैगिंग का प्रावधान किया गया है। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।

डैशबोर्ड पर पेड़ों की लोकेशन, तस्वीरें और रखरखाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

नए पौधे लगाने की भी व्यवस्था
ड्राफ्ट के अनुसार प्रत्यारोपित किए गए प्रत्येक पेड़ के बदले निर्धारित संख्या में नए पौधे लगाने होंगे। इन पौधों की निगरानी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी।

Kalki 2898 AD के सीक्वल में Alia Bhatt की एंट्री की चर्चा तेज

प्रभास स्टारर ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल को लेकर इन दिनों जबरदस्त चर्चा हो रही है. फिल्म से दीपिका पादुकोण के बाहर होने की खबर के बाद से ही फैंस एक सवाल का जवाब तलाश रहे हैं- आखिर उनकी जगह कौन लेगा? और अब इस सवाल के बीच आलिया भट्ट का नाम सामने आने से सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है.

हालांकि अगर आप सोच रहे हैं कि आलिया सीधे दीपिका को रिप्लेस करने जा रही हैं, तो मामला थोड़ा अलग है. नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलिया भट्ट फिल्म में एक बेहद खास और दमदार किरदार निभाती नजर आ सकती हैं.

वैष्णो देवी बनेंगी आलिया?
खबरों की मानें तो आलिया भट्ट को फिल्म में देवी वैष्णो देवी के रोल के लिए अप्रोच किया गया है. इतना ही नहीं, उनका किरदार कलयुग के उन दिव्य चिरंजीवियों में से एक हो सकता है, जिनका मकसद सुमति और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की रक्षा करना होगा.

अगर ऐसा होता है तो ‘कल्कि 2’ में आलिया का रोल सिर्फ कैमियो नहीं, बल्कि कहानी का एक बेहद अहम हिस्सा साबित हो सकता है. हाल ही में आलिया की अल्फा का ट्रेलर जारी हुआ है, जिसमें उनके किरदार का नाम सीता बताया गया है. वो फिल्म में हाई ऑक्टेन एक्शन करती दिखेंगी. अगर कल्कि 2898 एडी में वैष्णो देवी का किरदार निभाने की खबर सही निकलती है तो आलिया के करियर के लिए ये बड़ा जंप होगा.

नाग अश्विन ने तोड़ी चुप्पी
आलिया की कास्टिंग को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच डायरेक्टर नाग अश्विन ने भी रिएक्ट किया है. उन्होंने साफ कहा कि अभी तक किसी भी कास्टिंग को लेकर ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई है.

उन्होंने कहा- हमें अभी ये बताना है कि कल्कि 2 में सुमति का किरदार कौन निभाएगा. फिलहाल जो भी बातें चल रही हैं, वो सिर्फ अटकलें हैं. लेकिन इतना तय है कि ये किरदार फिल्म में जरूर रहेगा क्योंकि कहानी के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है. यानि मेकर्स ने न तो आलिया की एंट्री कन्फर्म की है और न ही इन खबरों को पूरी तरह खारिज किया है.

आखिर क्यों हुई थी दीपिका की विदाई?
सितंबर 2025 में मेकर्स ने एक ऑफिशियल बयान जारी कर फैंस को बड़ा झटका दिया था. बयान में बताया गया कि दीपिका पादुकोण अब ‘कल्कि 2’ का हिस्सा नहीं होंगी. मेकर्स ने कहा था कि ‘कल्कि जैसी फिल्म को पूरी प्रतिबद्धता की जरूरत है और कई दौर की बातचीत के बाद हमने अलग होने का फैसला किया है.’

इसके बाद इंडस्ट्री में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दीपिका ने अपनी फीस में 25 फीसदी बढ़ोतरी और सिर्फ 7 घंटे की शिफ्ट की मांग रखी थी. कहा गया कि मेकर्स और एक्ट्रेस के बीच इन शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई.

दीपिका ने भी दिया था जवाब
फिल्म से बाहर होने के कुछ समय बाद दीपिका पादुकोण ने बिना किसी का नाम लिए इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि वो हमेशा अपने संघर्ष सम्मान और शालीनता के साथ लड़ती हैं और सार्वजनिक विवादों का हिस्सा बनना उन्हें पसंद नहीं है. हालांकि दीपिका ने सीधे तौर पर ‘कल्कि 2’ विवाद का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनके बयान को इसी मामले से जोड़कर देखा गया.

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई आलिया भट्ट ‘कल्कि 2′ का हिस्सा बनने जा रही हैं? और अगर हां, तो क्या उनका किरदार फिल्म की कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट लेकर आएगा? जब तक मेकर्स आधिकारिक घोषणा नहीं कर देते, तब तक फैंस के बीच कयासों का दौर जारी रहने वाला है. लेकिन एक बात तय है कि’कल्कि 2’ रिलीज से पहले ही सुर्खियों का सुपरहिट पैकेज बन चुकी है.

‘सपा में होगी बड़ी बगावत’! ओमप्रकाश राजभर का दावा, महाराष्ट्र-बंगाल के बाद यूपी में भी टूट तय

लखनऊ

यूपी में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा सियासी दावा किया है कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है. राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है. खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है. शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है.राजभर का कहना है कि महाराष्ट्र, बंगाल छोड़िए, समूची सपा भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है. बंगाल में टीएमसी के 20 सांसद बगावत कर चुके हैं. जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 सांसद टूटने के कयास लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र और बंगाल में बड़ी बगावत दो दलों में देखने को मिल रही है। 

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी (सपा) को बड़ा झटका लगेगा. राजभर ने यहां तक कह दिया कि महाराष्ट्र और बंगाल छोड़िए, पूरी समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है। 

राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो रही है. सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं. ऐसे माहौल में राजभर का यह दावा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। 

सपा पर क्यों साधा निशाना ?

ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि जैसे-जैसे विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है, वैसे-वैसे सपा नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़े मामलों को लेकर पूरा उत्तर प्रदेश जानता है कि इन प्रकरणों में कौन लोग चर्चा के केंद्र में रहे हैं. राजभर के मुताबिक, जब जांच आगे बढ़ती है तो कुछ लोगों की परेशानी भी बढ़ती है. हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी नए साक्ष्य या संभावित दल-बदल करने वाले नेताओं का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका दावा बड़ा माना जा रहा है. राजभर ने अपने बयान में सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। 

 पहले भी अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं राजभर
यह पहली बार नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला हो. पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती गई है. हाल ही में राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लंबी पोस्ट लिखी थी, जिसने राजनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं. उस पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव के विदेश दौरे को निशाने पर लिया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अगर घूमने ही जाना था तो लंदन और पेरिस की जगह काशी, अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य या मां विंध्यवासिनी धाम चले जाते। 

राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि यदि अखिलेश प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर जाते तो स्थानीय व्यापारियों को रोजगार मिलता. फूल बेचने वाले, मिठाई विक्रेता, छोटे होटल कारोबारी और परिवहन से जुड़े लोगों को भी लाभ होता. उन्होंने कहा था कि ऐसे दौरों से उत्तर प्रदेश के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता और देश-दुनिया में सकारात्मक संदेश जाता. राजभर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि शायद अब अखिलेश यादव को लंदन और पेरिस ज्यादा पसंद आने लगे हैं और उन्हें विदेशी पर्यटन स्थलों पर जाना ज्यादा अच्छा लगता है। 

नया भारत और नया उत्तर प्रदेश देखिए
अपनी पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को सलाह भी दी थी कि उन्हें देश और उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना चाहिए. उन्होंने लिखा था कि अब देश बदल चुका है और नया भारत तथा नया उत्तर प्रदेश विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है. काशी से अयोध्या, मथुरा से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है. राजभर ने कहा था कि अपने देश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने में एक जिंदगी भी कम पड़ सकती है। 

उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! 9 में से 6 सांसद बागी, लोकसभा स्पीकर को सौंपी चिट्ठी; शिंदे गुट में जाने की चर्चा

 मुंबई

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग अपना गुट बनाने का फैसला किया है. शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अलग समूह माना जाए। 

शिवसेना (यूबीटी) के जिन सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा है, उसमें संजय जाधव , संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर , ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। 

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों ने शिंदे गुट की शिवसेना में विलय के लिए बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी भेजी है।

सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी भेजने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम शामिल है। संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था। उन्होंने कहा- मैं उद्धव ठाकरे की पार्टी का सांसद हूं और इसी पार्टी में रहूंगा। इधर, शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने गाली देते हुए कहा- ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। बाद में मीडिया से उन्होंने कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं।

उद्धव और अन्य पार्टी लीडर्स अपने सांसदों से लगातार संपर्क करने और उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पार्टी ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। जो सांसद बैठक में नहीं आएंगे, पार्टी उनके खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन की कार्रवाई कर सकती है।

उद्धव के सांसद एकनाथ शिंदे के साथ
महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के साथ खेला हो गया है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे स्पीकर को पत्र देकर एकनाथ शिंदे की पार्टी में विलय करने की मांग की है. उद्धव के 6 सांसदों ने अपना गुट बनाकर शिवसेना में विलय कर दिया है। 

उद्धव की पार्टी के 6 बागी सांसद बुधवार सुबह  नांदेड़, पुणे और मुंबई से प्राइवेट प्लेन से दिल्ली पहुंचे. इस दौरान उनके साथ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक सीनियर नेता मौजूद थे, जिनके साथ दिल्ली आए और स्पीकर को अपने समर्थन का पत्र सौंपा है। 

उद्धव के साथ सिर्फ 3 सांसद ही बचे
यूबीटी में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत और चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद थे. इस तरह शिवेसना (यूटीबी) के 9 में से 3 लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे, 6 सांसद नहीं थे. इसके मतलब साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बना हुई है। 

वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा था कि सभी 9 सासंद हमारी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे ने उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया. हमने उन्हें जितना हो सका, संसाधन दिए। 

राउत ने कहा कि हमारे सांसद शिवसेना के चुनाव चिह्न मशाल पर चुने गए थे, जिसके नेता उद्धव ठाकरे हैं. वे पीएम मोदी के नाम पर नहीं जीते हैं. ऐसे में अगर अब कोई पाला बदलता है, तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, अगर जिन्हें जाना है, वो इस्तीफा देकर जा सकते हैं. इससे साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा टला नहीं है। 

छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग अध्यक्ष की कार से टकराई बाइक, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

कवर्धा.

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में बुधवार को गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विश्वेसर पटेल के साथ बदसलूकी और हमले की कोशिश का मामला सामने आया है. कार और बाइक के बीच हुई टक्कर को लेकर विवाद शुरू हुआ था.

आरोप है कि दोनों युवकों ने अभद्रता करते हुए पत्थर उठाकर हमला करने का प्रयास किया. घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर की है. जानकारी के अनुसार, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विश्वेसर पटेल जिला मुख्यालय कवर्धा से अपने गांव रोहरा लौट रहे थे. उस समय वह अपनी कार में चालक के साथ सवार थे. इसी दौरान पीछे से आ रही एक बाइक उनकी कार से टकरा गई. टक्कर के बाद जब कार रोकी गई तो बाइक सवार दोनों युवक विवाद करने लगे. आरोप है कि उन्होंने गाली-गलौज की और पत्थर उठाकर हमला करने की कोशिश भी की.

विश्वेसर पटेल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है, लेकिन उन्हें सुरक्षा के लिए कोई गार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जांच के दौरान दोनों युवक नशे की हालत में पाए गए. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया और कानूनी कार्रवाई के बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

दोनों आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने मामले में जानकरी दी कि कवर्धा के बाहरी क्षेत्र में घटना हुई है. कार में अचानक ब्रेक लगने से पीछे चल रही बाइक टकरा गई. बाइक सवार दो युवक घटना के दौरान नशे की हालात में थे. इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद हुआ. वहीं गाली-गलोच भी हुई है. सूचना पर पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार किया है. कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है.

विकसित छत्तीसगढ़ को मिला वैश्विक सहयोग, राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ की उच्चस्तरीय बैठक में बनी रणनीति

राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ के बीच उच्चस्तरीय बैठक 

विकसित छत्तीसगढ़ एवं बस्तर अंजोर को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन

रायपुर, 
राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा से आज यूनिसेफ इंडिया के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नीति भवन नवा रायपुर में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने किया। इस अवसर पर यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड कार्यालय की प्रमुख श्रीमती सीमा कुमार एवं सामाजिक नीति प्रमुख डॉ. बाल परितोष दाश भी उपस्थित रहे।

          बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त, सामुदायिक जागरूकता एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन और बस्तर अंजोर कार्यक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई।

विकसित छत्तीसगढ़ – जहाँ बच्चे हैं विकास की नींव

        बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में बच्चे केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य के प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और संरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य अधूरा है।  राज्य नीति आयोग ने विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क के अंतर्गत 50 से अधिक विभागों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक विकसित किए हैं, जिसमें बाल कल्याण को एक स्वतंत्र एवं समर्पित विषयक्षेत्र के रूप में सम्मिलित किया गया है।

विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई, नीति और जमीन के बीच सेतु

        राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से स्थापित विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई (VC-SPS Unit) राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल है। यह इकाई विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए बजट विश्लेषण और सामाजिक संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य के विभागों को निरंतर तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। बैठक में इस इकाई के कार्यों की सराहना की गई और इसे और अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।

देश में पहली बार – बाल कल्याण सूचकांक 

           राज्य नीति आयोग देश में पहली बार एक राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण मापन पद्धति एवं बाल वंचना सूचकांक विकसित करेगा। यह सूचकांक राज्य के विभागों को बच्चों तक सेवा वितरण की कमियों की पहचान करने और बाल-केंद्रित नीतियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। साथ ही बच्चों के लिए बजट का एक मानक ढांचा भी तैयार किया जाएगा। यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्तावित पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगा।

बस्तर अंजोर – आदिवासी एवं बाल विकास का ऐतिहासिक अवसर

         बैठक में बस्तर अंजोर को आदिवासी समुदायों और बच्चों के कल्याण के लिए एक अभूतपूर्व अवसर के रूप में रेखांकित किया गया। राज्य नीति आयोग द्वारा प्रवर्तित यह अभिनव समन्वय पहल बस्तर संभाग के सातों जिलों को आच्छादित करती है। 3+4 मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम तीन कलेक्टर नेतृत्व वाली जिला पहलों -नियद नेल्ला नार, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर को चार राष्ट्रीय एवं राज्य मिशनों से जोड़ता है। इस कार्यक्रम के 90 प्रतिशत से अधिक हस्तक्षेप क्षेत्र बाल स्वास्थ्य, पोषण एवं सामाजिक संरक्षण से संबंधित हैं।

        यूनिसेफ ने इस कार्यक्रम को संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में विकास की रोशनी पहुँचाने का एक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण अवसर बताया और बस्तर अंजोर के औपचारिक लोकार्पण में मुख्य अतिथि एवं रणनीतिक भागीदार के रूप में सहभागिता की सहर्ष स्वीकृति दी।

सामुदायिक जागरूकता, विश्वास निर्माण एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन

         बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल नीति एवं बजट से नहीं, बल्कि समुदाय के विश्वास और व्यवहार परिवर्तन से भी निर्धारित होती है। बस्तर जैसे आदिवासी एवं संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जागरूकता और जन विश्वास का निर्माण विकास की पूर्वशर्त है।

        यूनिसेफ की सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञता को बस्तर अंजोर और विकसित छत्तीसगढ़ के जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके अंतर्गत पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्रों में समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान, स्थानीय नेतृत्व का सुदृढ़ीकरण और परिवारों में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।

यूनिसेफ का सहयोग और विस्तार

        यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने कहा कि यूनिसेफ वर्ष 2019 से छत्तीसगढ़ सरकार का विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार रहा है और यह साझेदारी आगे और सुदृढ़ होगी। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़, बस्तर अंजोर, बाल कल्याण सूचकांक, सामुदायिक जागरूकता और बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त के क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से सहयोग विस्तार का आश्वासन दिया।

       बैठक के अंत में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने यूनिसेफ की पूरी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी छत्तीसगढ़ के बच्चों के उज्जवल भविष्य और विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी कदम है।

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