निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल, गुणवत्ता और तय समय में काम पूरा करने के दिए निर्देश

रायपुर/कांकेर.

प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से चल रहे प्रयासों के तहत स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को कांकेर जिले के समीप तारसगांव में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया।

इस दौरान उन्होंने कॉलेज परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लेते हुए अधिकारियों से प्रगति की विस्तृत जानकारी ली और विभिन्न सुविधाओं की तैयारियों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित समय-सीमा और परियोजना की प्रगति पर विशेष ध्यान देते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि तारसगांव में बन रहा मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा। इस संस्थान के शुरू होने से न केवल कांकेर जिले बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के बाद कांकेर सहित आसपास के जिलों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा। इससे गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर होने वाले पलायन में भी कमी आएगी। साथ ही चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान नया आयाम स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि विकसित और स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तारसगांव मेडिकल कॉलेज परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके पूर्ण होने से प्रदेश का स्वास्थ्य तंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

तबादलों की सुनामी! 24 घंटे में 5 हजार कर्मचारी-अधिकारी बदले, सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी

भोपाल
 मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादला नीति के तहत अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी देखने को मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तबादलों की समय-सीमा 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाए जाने के बाद शासन-प्रशासन में मानो तबादलों की सुनामी आ गई। कुछ ही घंटों के भीतर प्रदेशभर में करीब 5 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को नई पदस्थापना दे दी गई, जिससे सरकारी तंत्र में व्यापक बदलाव की तस्वीर सामने आई है।

दरअसल, तबादलों की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित थी, लेकिन कई विभागों में मंत्रियों की स्वीकृति मिलने के बावजूद तकनीकी कारणों और ई-ऑफिस पर बढ़ते दबाव के चलते आदेश जारी नहीं हो पाए थे। यह मामला मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उठा, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने एक दिन की अतिरिक्त मोहलत देने का फैसला किया। सामान्य प्रशासन विभाग ने भी तत्काल आदेश जारी कर दिए।

मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही विभिन्न विभागों में अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गईं। दोपहर से लेकर आधी रात तक तबादला आदेशों की झड़ी लग गई। सबसे ज्यादा फेरबदल स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य, वन और राजस्व विभाग में देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले भेजा गया।

इससे पहले सोमवार देर रात राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की बड़ी सूची जारी की गई थी। इसमें 56 अतिरिक्त जिला दंडाधिकारियों (ADM) सहित कुल 155 अधिकारियों के तबादले किए गए। इनमें वे अधिकारी भी शामिल रहे जिन्हें पदोन्नति तो मिल चुकी थी, लेकिन लंबे समय से वरिष्ठ पदों पर पदस्थापना का इंतजार था। इसके अलावा डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

तबादलों की यह प्रक्रिया 1 जून से शुरू हुई थी, लेकिन अधिकांश विभागों में तैयारी और तकनीकी व्यवस्था समय पर पूरी नहीं हो सकी। कई कर्मचारियों और अधिकारियों को आवेदन प्रक्रिया और अनुमोदन के लिए अंतिम दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इसके बावजूद अंतिम 24 घंटों में जिस तेजी से आदेश जारी हुए, उसने पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिला दिया।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे मोहन सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए फेरबदल का असर जिलों के प्रशासनिक कामकाज और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर किस रूप में दिखाई देता है।

चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना से छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई शक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना से छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई शक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

₹755 करोड़ की परियोजना को मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार

डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री

मोदी सरकार के विशेष फोकस से छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली नई ऊंचाई : रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प – मुख्यमंत्री साय

रायपुर,
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय रेल द्वारा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत ₹755 करोड़ की लागत से चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे विकास को नई गति मिल रही है।

उन्होंने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं प्राप्त होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण पहचान रखता है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयले की आपूर्ति होती है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) तथा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना के पूर्ण होने से कोयला परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक आधार और अधिक मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में  तीसरी रेल लाइन का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया दूरदर्शी निर्णय है। इससे अतिरिक्त माल परिवहन को सुगम बनाया जा सकेगा और रेल परिचालन अधिक दक्ष एवं प्रभावी होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को मजबूती मिलेगी, निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क, सुदृढ़ लॉजिस्टिक व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ को रेल अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रदेश के रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी-चौथी लाइन और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के विकास के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना भी इसी विकास दृष्टि का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में स्वीकृति मिलना जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरांचल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल एवं शहरी परिवहन अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विकास पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1853 से 2014 तक 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 रूट किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  प्रदेश का रेल नेटवर्क बढ़कर  2200 रूट किलोमीटर से अधिक होने जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश की रेल परियोजनाओं के लिए जहां लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को 1,680 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

बस्तर का कोसा सिल्क बना आजीविका का मजबूत सहारा, हजारों परिवारों को मिल रहा रोजगार

जगदलपुर.

बस्तर का रैली कोसा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है. महज पांच ग्राम वजन वाले एक कोसा से करीब एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है. हर वर्ष करोड़ों की संख्या में कोसा उत्पादन यहां के गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है.

साल वनों से घिरे बस्तर में रेशम पालन की समृद्ध परंपरा आज भी कायम है. रेशम विभाग द्वारा संचालित प्रगुणन केंद्र इस उद्योग को मजबूती दे रहे हैं. बस्तर में उत्पादित कोसा का प्रसंस्करण प्रदेश के कई जिलों में किया जाता है. यहीं से तैयार वस्त्र देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचते हैं. जापान, सिंगापुर, यूएई सहित कई देशों में इसकी मांग बनी हुई है. कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक बनावट और आरामदायक गुणों के कारण पसंद किए जाते हैं. धागे के अपशिष्ट से भी गलीचे और दरियां तैयार की जाती हैं. महिला समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और सशक्त बनाया है. कालीपुर क्षेत्र में महिलाएं धागा निर्माण से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं. बस्तर का कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

CM मोहन यादव आज उज्जैन में देंगे करोड़ों की सौगात, झारडा में 188.42 करोड़ के बैराज का करेंगे लोकार्पण

उज्जैन 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले की झारड़ा तहसील में 188.42 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सामाकोटा बैराज का लोकार्पण करेंगे। छोटी कालीसिंध नदी पर बने इस बैराज से क्षेत्र के 18 गांवों के करीब 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है और इससे 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि में पाइप लाइन पद्धति से सिंचाई हो सकेगी।

सामाकोटा बैराज परियोजना से नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी और झारड़ा सहित कई गांवों के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।

मुख्यमंत्री इस दौरान 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य विकास कार्यों का भी लोकार्पण करेंगे। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के 4.35 करोड़ रुपए लागत के महाविद्यालय भवन, लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में कन्या स्कूल भवन, मोचीखेड़ा में 33/11 केवी उपकेंद्र तथा झारड़ा क्षेत्र के 13 उप स्वास्थ्य केंद्र भवन शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य जनता को समर्पित किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश में UCC पर बड़ा कदम, मानसून सत्र में विधानसभा में विधेयक लाएगी मोहन सरकार

भोपाल 

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉमन सिविल कोड की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इसे पारित कराया जाए।

खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की पुष्टि करते हुए बड़ा बयान दिया है। सीएम ने कहा कि इसी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा रहा है और महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। बता दें कि मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।

विधानसभा में यूसीसी प्रस्ताव लाने को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह पूरे हिंदुस्तान की डिमांड है और यह कानून देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस कानून के लागू होने से जनसंख्या पर भी नियंत्रण लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश के कई राज्यों ने इसे लागू करने की पहल की है और अब मध्य प्रदेश में भी इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।

मध्य प्रदेश में यूसीसी कमेटी का गठन और प्रस्तावों की समय-सीमा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता जांचने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मध्य प्रदेश सरकार के विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा इस 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन इसी वर्ष 27 अप्रैल को किया गया था।

इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह को शामिल किया गया है।

राज्य का दौरा कर लोगों से ली राय
कमेटी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर समाज के सभी वर्गों से राय ली और आम नागरिकों के सुझाव ऑनलाइन दर्ज करने के लिए एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी शुरू किया था। जनता और विभिन्न संगठनों से यूसीसी को लेकर प्रस्ताव और सुझाव लेने की अवधि 15 मई से शुरू होकर 15 जून तक तय की गई थी। हालांकि, अभी भी पब्लिक को एसएसएम भेजकर ऑनलाइन सुझाव मंगाए जा रहे हैं

कमेटी को गठन के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। जनता के सुझावों और अलग-अलग वर्गों से संवाद के बाद अब इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा पटल पर रखकर पारित कराया जाए और इस साल दिवाली तक मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाए।

20 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय मानसून सत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही विधायकों द्वारा प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय सूचनाएं देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट माना जा रहा है। सरकार अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों का प्रस्ताव सदन में रख सकती है। इससे विभिन्न विभागों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित स्वामित्व योजना भी इस सत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती है। सरकार इस योजना से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधनों पर विचार कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।  इस पांच दिवसीय सत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। सत्र के लिए अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 जून 2026 तक तथा अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 9 जुलाई 2026 तक विधानसभा सचिवालय में प्रस्तुत की जा सकेंगी। वहीं, स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा नियम 267-क के अंतर्गत सूचनाएं 14 जुलाई 2026 से विधानसभा सचिवालय में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 4 बजे तक प्राप्त की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का यह 11वां सत्र होगा। 

सदन में यूसीसी को लेकर हो सकती है चर्चा 
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति प्रदेशभर से सुझाव प्राप्त कर रही है। सुझावों के परीक्षण के बाद समिति अपना प्रारूप (ड्राफ्ट) सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि यूसीसी विधेयक इसी सत्र में आएगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वहीं प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण को लेकर तैयार किए जा रहे मसौदे को भी सदन के समक्ष रखा जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है। 

वहीं, विपक्ष इस सत्र में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मुद्दे के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने पर काम कर सकती है। दूसरी ओर सरकार अपनी विकास योजनाओं, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी उपलब्धियों को सदन में प्रमुखता रखने की योजना बना सकती है। इस मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा, बहस और महत्वपूर्ण निर्णय देखने को मिल सकते हैं।
  

यूसीसी पर अंतिम तैयारी में सरकार
प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति लगातार विभिन्न जिलों में जाकर लोगों और सामाजिक प्रतिनिधियों से सुझाव ले रही है। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में लाकर विधानसभा के समक्ष रखा जा सकता है।
 
विपक्ष ने सत्र की अवधि पर उठाए सवाल
विधानसभा के पांच दिवसीय सत्र को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि इतने कम समय में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा संभव नहीं हो पाएगी। हालांकि सरकार का फोकस इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर है।

यूसीसी को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में यूसीसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजरें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठा सकती है।

इन मुद्दों पर भी चर्चा संभव
    माना जा रहा है कि सोलहवीं विधानसभा के इस सत्र में मोहन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और विधेयकों को सदन के पटल पर रख सकती है। इसके अलावा अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी फोकस रहेगा।

    मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), स्वामित्व योजना, अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा और बड़ा फैसला होने की संभावना है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सत्र छोटे रखने पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
मानसून सत्र की पांच दिनों की संक्षिप्त अवधि को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) ने सवाल भी उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि जब सवालों के जवाब न हों, तो सत्र छोटे कर दिए जाते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र मात्र 5 दिनों के लिए बुलाया गया है। यह केवल विधानसभा की अवधि कम करने का सवाल नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही को सीमित करने का प्रयास है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुनकर आए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे अनगिनत मुद्दे प्रदेश के सामने खड़े हैं।

उन्होंने आगे लिखा है कि क्या इन सभी विषयों पर गंभीर चर्चा, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और जनहित के मुद्दों को केवल 5 बैठकों में समेटा जा सकता है? सरकार को यह समझना होगा कि विधानसभा जितनी चलेगी, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। कांग्रेस विधायक दल मानसून सत्र के हर मिनट का उपयोग जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए करेगा। सरकार चाहे चर्चा से बचे, लेकिन जनता के सवालों से बच नहीं सकती।

सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी करेगा विपक्ष
इस बार के मानसून सत्र में जमकर हंगामा होने के आसार हैं। संभावना है कि विपक्ष, सत्ता पक्ष को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव के नामांकन निरस्त होने के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर घेरने की रणनीति बना सकता है। चर्चा तो ये भी है कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को इस संबंध में आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। 

रिवीलिंग मोनोकनी में दिखीं अर्चना पूरन सिंह की होने वाली बहू? बेटे संग रोमांटिक तस्वीरें हुईं वायरल

मुंबई 
एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह के छोटे बेटे आयुष्मान सेठी लंबे समय से योग और मेंटल वेलनेस ट्रेनर समीक्षा शेट्टी को डेट कर रहे हैं. दोनों बीते कुछ समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। अर्चना पूरन के दोनों बेटे आर्यमन और आयुष्मान सेठी अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड्स संग इन दिनों मालदीव में वेकेशन एन्जॉय कर रहे हैं। अर्चना की होने वाली छोटी बहूरानी समीक्षा शेट्टी ने मालदीव वेकेशन से अपनी कई बोल्ड तस्वीरें शेयर की हैं।                  

समीक्षा तस्वीरों में प्रिंटेड बैकलेस रिवीलिंग मोनोकनी में नजर आ रही हैं. मोनोकनी पहने वो अपने वॉटर विला में चिल करती हुई दिखाई दीं। समीक्षा ने अपने वॉटर विला की बेडरूम फोटोज भी शेयर कीं. वो आयुष्मान की बांहों में कोजी हुई नजर आ रही हैं. कपल का रोमांटिक अंदाज देखते ही बनता है। 
एक तस्वीर में आयुष्मान अपनी लेडी लव को गोद में लेकर झूमते हुए दिखाई दिए. दोनों का प्यार और बॉन्ड काफी खूबसूरत है। समीक्षा के लुक की बात करें तो प्रिंटेड बैकलेस मोनोकनी में उन्होंने कई किलर पोज दिए. ओपन हेयर और नो मेकअप लुक में वो काफी स्टनिंग लगीं। 

समीक्षा शेट्टी अपने सपनों के राजकुमार आयुष्मान संग काफी खूबसूरत टाइम स्पेंड करती नजर आईं. कपल की केमिस्ट्री पर फैंस दिल हार रहे हैं।समीक्षा और आयुष्मान पर फैंस प्यार लुटा रहे हैं. फैंस उन्हें परफेक्ट कपल बता रहे हैं. वहीं, कई लोग उन्हें टीज भी कर रहे हैं। एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा- शादी से पहले हनीमून. वहीं, कई लोग समीक्षा को रीवीलिंग कपड़े न पहनने की सलाह दे रहे हैं. फैंस का कहना है कि वो काफी खूबसूरत हैं. उन्हें एक्सपोज करने की जरूरत नहीं है.  वैसे आपकी क्या राय है?

रेत विवाद में सनसनीखेज वारदात! फॉर्च्यूनर सवार युवक को जिंदा जलाने का आरोप, 4 हिरासत में

कोरिया.

रेत का विवाद जिले में मरने-मारने में तब्दील हो चुका है. बीती रात जिले के सोनहत तहसील अंतर्गत ग्राम कटगोड़ी में हुई दिल दहला देने वाली घटना में फॉर्च्यूनर गाड़ी को आरोपियों ने पहले टिपर से मारकर क्षतिग्रस्त किया, फिर आग लगा दी.

घटना में गाड़ी में सवार भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं तीन अन्य सवार घायल हो गए. आरोपी हिरासत में लिए गए हैं. जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार रात 11 बजे की है. भरत सिंह अपने साथियों के साथ जैसे ही नवगई गांव पहुंचे आरोपियों ने पहले टिपर से फॉर्च्यूनर को कई बार टक्कर मारी, इसके बाद वाहन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी. क्षतिग्रस्त वाहन के दरवाजे जाम होने की वजह से शीशा तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास कर रहे सवारों से आरोपियों ने मारपीट भी की.

घटना में जहां फॉर्च्यूनर में सवार भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जलकर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका उपचार अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में जारी है.
घटना की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी रात में ही मौके पर पहुंचे. पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अक्षय त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मन्नू त्रिपाठी शामिल हैं. बाकी तीन फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है.

मौके पर पहुंचे बैंकुठपुर विधायक
बताया जा रहा है कि मामले में मरने वाले भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह आरोपी मनोज त्रिपाठी के बीच रेत उत्खनन को लेकर विवाद था. लल्ला सिंह आरोपी मनोज त्रिपाठी 3 अन्य लोगों के साथ मंगलवार की दोपहर आपसी झड़प भी हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई थी.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दिया जवाब
कोरिया जिले में घटित घटना को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि घटना की पूरी जांच होगी. घटना में जो तथ्य आयेंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी. साव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश का अपराधीकरण किया. कांग्रेस घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है.

गरियाबंद को CM साय की बड़ी सौगात, आज 700 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण-शिलान्यास

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गरियाबंद के क्षेत्रवासियों को 700 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने वाले हैं. मुख्यमंत्री बुधवार को आज सूरजपुर और गरियाबंद जिले के दौरे पर रहेंगे. निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक वह सुबह 11 बजे रायपुर से सूरजपुर के लिए रवाना होंगे.

जहां नवनिर्वाचित अध्यक्ष, पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे. कार्यक्रम के बाद दोपहर करीब एक बजे गरियाबंद के लिए प्रस्थान करेंगे. विधान सभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह की मौजूदगी में सीएम साय दोपहर करीब 3 बजे पुलिस परेड ग्राउंड में 700 करोड़ के विकास कार्य का शिलान्यास लोकार्पण करेंगे. 4 बजे नव निर्मित कचना धुरवा गोंडवाना भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे. वहीं दर्रिपारा ग्राम में आयोजित आदिवासी समाज के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे. वहीं नव निर्मित कचना ध्रुवा गोंडवाना भवन का लोकार्पण करेंगे.

नक्सल प्रभावित इलाके में बदलाव की मिसाल, डॉक्टर रामटेके की 23 साल की मेहनत से बना मॉडल अस्पताल

कांकेर
एक समय छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था. घने जंगलों से घिरा यह इलाका नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था. सड़कें कम थीं, संचार के साधन सीमित थे और स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर. किसी को गंभीर बीमारी हो जाए तो इलाज से ज्यादा चिंता अस्पताल तक पहुंचने की होती थी. मलेरिया यहां की सबसे बड़ी समस्या थी और हर साल सैकड़ों परिवार इसके कारण तबाह हो जाते थे। 

लेकिन आज उसी अंतागढ़ का एक सरकारी अस्पताल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बन चुका है. यह बदलाव किसी बड़े बजट, किसी कॉर्पोरेट निवेश या किसी चमत्कार से नहीं आया, बल्कि एक डॉक्टर की 23 साल लंबी तपस्या और जिद का नतीजा है. यह कहानी है डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की, जिन्होंने वर्ष 2003 में अंतागढ़ में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 23 साल पहले शुरू किए अपने मिशन को अब एक मॉडल में बदल दिया है। 

जब लोगों ने कहा- वहां मत जाओ
वर्ष 2003 में जब डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की नियुक्ति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में हुई, तब यह इलाका डॉक्टरों के लिए सबसे कठिन पोस्टिंग मानी जाती थी. नक्सली गतिविधियां लगातार होती थीं. कई गांव ऐसे थे जहां पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था. पूरे विकासखंड में न कोई निजी डॉक्टर था, न नर्सिंग होम और न कोई निजी अस्पताल। 

ऐसे माहौल में अधिकांश लोग यहां लंबे समय तक काम करने की कल्पना भी नहीं करते थे. लेकिन डॉक्टर रामटेके ने इसे चुनौती नहीं, बल्कि मिशन के रूप में लिया। 

स्थानीय लोग बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने अस्पताल के कमरे को ही अपना घर बना लिया था. दिन हो या रात, मरीजों के लिए वे हमेशा उपलब्ध रहते. धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि इस इलाके की सबसे बड़ी बीमारी केवल मलेरिया नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का टूटता भरोसा भी है। 

गांव-गांव जाकर समझी लोगों की पीड़ा
डॉक्टर रामटेके ने इलाज को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखा. वे गांवों में जाते, आदिवासी परिवारों के बीच बैठते, उनकी भाषा और जीवनशैली को समझने की कोशिश करते. उन्हें पता चला कि कई लोग बीमारी को सामान्य मानकर इलाज नहीं कराते और जब तक अस्पताल पहुंचते, हालत गंभीर हो चुकी होती। 

यहीं से उन्होंने एक अलग रणनीति तैयार की. उनका मानना था कि बीमारी का इलाज अस्पताल में नहीं, बल्कि समाज के भीतर जाकर करना होगा। 

मलेरिया बना सबसे बड़ा लक्ष्य
उस समय अंतागढ़ में मलेरिया भयावह रूप ले चुका था. वर्ष 2003 में क्षेत्र का API (Annual Parasite Incidence) 51.11 था, जो 2006 तक बढ़कर 70.65 पहुंच गया. केवल वर्ष 2006 में 4,942 मलेरिया मरीज दर्ज किए गए। 

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 95 से 98 प्रतिशत मामले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया के थे, जो सबसे खतरनाक माना जाता है. सेरेब्रल मलेरिया और अन्य जटिल मामलों के कारण लोगों की जान तक चली जाती थी. डॉक्टर रामटेके ने तय किया कि अगर अंतागढ़ को बदलना है तो सबसे पहले मलेरिया को हराना होगा। 

लोगों का भरोसा जीता, फिर बीमारी को हराया
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, मिथानिनों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय को एक साथ जोड़ा. गांवों में रैलियां निकाली गईं, ग्राम सभाएं आयोजित की गईं, दीवारों पर संदेश लिखे गए और घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया कि मलेरिया से कैसे बचा जा सकता है। 

वर्ष 2010 और 2015 में पूरे इलाके में लॉन्ग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट (LLIN) वितरित किए गए. लोगों को मच्छरदानी के उपयोग की आदत डाली गई। 

धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा. लोग समय पर जांच कराने लगे. बुखार होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने लगे. मलेरिया की चेन टूटने लगी। 

आज स्थिति यह है कि जहां वर्ष 2006 में 4,942 मरीज थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 127 रह गई. API 70.65 से गिरकर 1.39 पर पहुंच गया. मलेरिया जनित मौतों और गंभीर मामलों में भी भारी कमी आई। 

मलेरिया के बाद अस्पताल की बारी
बीमारी पर नियंत्रण मिलने के बाद डॉक्टर रामटेके ने अस्पताल की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया. उन्होंने “कायाकल्प” योजना के तहत अस्पताल को एक मॉडल संस्थान बनाने की शुरुआत की। 

अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएं, हाइजीन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों पर लगातार काम किया गया। 

एक समय दो कमरों के खपरेल भवन से चलने वाला यह स्वास्थ्य केंद्र आज 30 बिस्तरों वाले व्यवस्थित अस्पताल में बदल चुका है। 

350 मानकों पर खरा उतरता अस्पताल
कायाकल्प योजना के तहत किसी अस्पताल का मूल्यांकन 350 से अधिक बिंदुओं पर किया जाता है. इसमें साफ-सफाई से लेकर संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के अनुभव से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक सब कुछ शामिल होता है। अंतागढ़ अस्पताल ने इन सभी मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है. पिछले पांच वर्षों से यह बस्तर संभाग में प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है. वर्ष 2025 में इसे पूरे छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूसरा स्थान मिला। 

एक डॉक्टर की वजह से बदली हजारों जिंदगियां
23 वर्षों तक लगातार एक ही क्षेत्र में काम करना अपने आप में असाधारण है. खासकर तब, जब वह इलाका नक्सल प्रभावित, आदिवासी बहुल और संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो। 

स्थानीय लोग कहते हैं कि डॉक्टर रामटेके केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हैं. कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म उनके हाथों हुआ और आज वे युवा हो चुके हैं. कई परिवार ऐसे हैं जो उन्हें भगवान का रूप मानते हैं क्योंकि उन्होंने उनके प्रियजनों की जान बचाई। 

अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू होगा मॉडल
डॉक्टर रामटेके द्वारा विकसित मलेरिया नियंत्र
ण और अस्पताल प्रबंधन मॉडल को अब राज्य सरकार पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने की तैयारी कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यदि अंतागढ़ जैसे कठिन क्षेत्र में यह मॉडल सफल हो सकता है, तो राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई मिल सकती है। 

डर से भरोसे तक का सफर
अंतागढ़ की यह कहानी केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं है. यह उस विश्वास की कहानी है जो एक डॉक्टर ने समाज में जगाया. यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें बंदूक और बारूद की खबरों के बीच स्वास्थ्य, सेवा और उम्मीद ने अपनी जगह बनाई।

कभी जिस इलाके की पहचान नक्सल हिंसा और मलेरिया थी, आज वही इलाका स्वास्थ्य सेवाओं के मॉडल के रूप में जाना जा रहा है. और इस बदलाव के केंद्र में खड़े हैं डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके, जिन्होंने साबित कर दिया कि समर्पण, धैर्य और सेवा की भावना से सबसे कठिन भूगोल भी बदला जा सकता है। 

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