होर्मुज से आई बड़ी राहत, 34 जहाजों की खेप से किसानों को मिलेगा फायदा; पेट्रोल-LPG आपूर्ति भी रहेगी सुचारु

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 

भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है। 

आखिर क्यों खास है ‘दिशा’?
दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे। 

किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज
जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 

भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज?
भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है। 

कब तक खत्म हो सकेगा संकट?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। 

भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं। 

सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले, इंदौर मेट्रो समेत कई परियोजनाओं पर ₹24,200 करोड़ खर्च को मंजूरी

 भोपाल

भोपाल के बाद सरकार ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत में वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 19,472 करोड़ रुपये होगी। इसमें 6,582 करोड़ रुपये की ऋण राशि भी शामिल है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना की लागत में भूमिगत लाइन सहित अन्य कारण से वृद्धि हुई है। इसकी मूल लागत 7,500 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889 करोड़ रुपये होगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6,582 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

प्रोजेक्ट टाइगर, एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ की स्वीकृति

बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा संबंधी योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक चलाने की स्वीकृति दी गई। इस अवधि में 2,381 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इससे प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाई क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था के काम होंगे। संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी टाइगर रिजर्व के साथ ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों का पुनर्वास किया जाएगा।
श्रमिक कल्याण, शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना रहेगी निरंतर

बैठक में श्रमिक कल्याण, जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन तथा 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण, बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास, असंगठित शहरी व ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।

 

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व हुआ “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में प्रतिष्ठित पुरस्कार से पुरस्कृत

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश के गौरव एवं विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में “Editor’s Choice Award – Best Wildlife Destination” श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को वन्यजीव संरक्षण, उत्कृष्ट पर्यटन प्रबंधन, पर्यटकों को उच्च स्तरीय अनुभव प्रदान करने तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत एवं मुख्यमंत्री गोवा, डॉ. प्रमोद सावंत द्वारा गोवा में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की ओर से फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय, बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व तथा अपर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव  एल. कृष्णमूर्ति ने प्राप्त किया।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य एवं प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। पुरस्कार बाँधवगढ़ में कार्यरत समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय समुदायों तथा संरक्षण सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

पुरस्कार न केवल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है तथा राज्य की पहचान को देश के अग्रणी वन्यजीव पर्यटन गंतव्यों में और अधिक सुदृढ़ करता है। 

मोहर्रम, ताजिया जुलूस और राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण को लेकर सुरक्षा तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा

भोपाल 

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की अध्‍यक्षता में पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक की वीडियों कॉफ्रेंस आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि मोहर्रम, ताजिया जुलूसों, अन्य धार्मिक आयोजनों, महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण तथा वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि आगामी त्योहारों एवं आयोजनों के दौरान परंपरागत रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, जुलूस मार्गों, धार्मिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। शांति समितियों, धर्मगुरुओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता एवं आपसी सौहार्द का वातावरण बनाए रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों एवं आपत्तिजनक सामग्री पर सतत निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की भड़काऊ अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि के विरुद्ध त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया तंत्र को सक्रिय रखते हुए संभावित चुनौतियों का समय रहते आकलन कर आवश्यक निवारक कदम उठाए जाएं।

डीजीपी ने कहा कि उपलब्ध पुलिस बल, दंगा नियंत्रण उपकरणों, वाहनों, संचार संसाधनों, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा कर उन्हें पूर्णतः सक्रिय एवं तैयार रखा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं, वहां उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी स्थिति में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों एवं पुलिस प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था बाधित न होने पाए।

बैठक में महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित मध्यप्रदेश भ्रमण सहित अन्य वीआईपी एवं वीवीआईपी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल, रूट सुरक्षा, एंटी-सबोटेज जांच, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं समन्वित सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर बल दिया गया।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।

 

लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण सत्र आयोजित

रायपुर

 लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।        

प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव  अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI (Artificial Intelligence) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। सत्र में ।प् के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
         
 कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों- कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार मती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सु निधि साहू,  सुधीर सुलतानिया,  लक्षित त्रिलोक सेठिया,  अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

एनटीपीसी यूएसएससी दिवस-2026 उत्साहपूर्वक मनाया गया, उत्कृष्ट कर्मचारियों का हुआ सम्मान

नवा रायपुर

एनटीपीसी के यूनिफाइड शेयर्ड सर्विस सेंटर (यूएसएससी) का स्थापना दिवस 15 जून 2026 को नवा रायपुर स्थित परिसर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्ष 2021 में स्थापित यूएसएससी आज एनटीपीसी की महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्रीकृत संचालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो खरीद एवं अनुबंध प्रक्रियाओं, विक्रेता प्रबंधन तथा विभिन्न सेवाओं के प्रभावी निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पश्चिम क्षेत्र-II) एवं कार्यकारी निदेशक-यूएसएससी  नीरज जलोटा ने संगठन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में यूएसएससी ने असाधारण दृढ़ता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एनटीपीसी के रणनीतिक एवं परिचालन लक्ष्यों को पूरा करने में एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि, सक्रिय रेट कॉन्ट्रैक्ट और पंजीकरणों में बढ़ोतरी तथा विक्रेता आधार के विस्तार जैसी उपलब्धियां यूएसएससी की निरंतर प्रगति को दर्शाती हैं।  जलोटा ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक एकीकरण तथा रेट कॉन्ट्रैक्ट और विक्रेता पंजीकरण के विस्तार पर विशेष बल दिया।

समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य निष्पादन करने वाले यूएसएससी के 40 कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने कर्मचारियों के उत्साह और मनोबल को नई ऊर्जा प्रदान की।

कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक केक कटिंग समारोह से हुई, जिसके बाद कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत इन-हाउस स्कीट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। रंगारंग प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया और कर्मचारियों के बीच टीम भावना को और मजबूत किया।

इस अवसर पर  राम भजन मलिक, कार्यकारी निदेशक (ऐश मैनेजमेंट एवं एनआई),  बिद्या नंद झा, कार्यकारी निदेशक (ऑपरेशन सर्विसेज),  हर्ष आहूजा, कार्यकारी निदेशक (यूएसएससी सी एंड एम) सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगठन की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की गई।

बाल आयोग अध्यक्ष की पहल रंग लाई, गंभीर बीमार बालिका का इलाज शुरू

रायपुर.

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गंभीर रूप से बीमार नाबालिग जोगेश्वरी कड़की मामले में संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार के लिए पहल की, जिसके चलते बालिका का एम्स रायपुर में इलाज शुरू हुआ है।

उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने 5 जून को दंतेवाड़ा कलेक्टर को पत्र लिखकर बालिका के बेहतर उपचार के लिए तत्काल एम्स रायपुर भेजने और आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।

आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार के लिए एम्स रायपुर लाया गया। 15 जून को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध
इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है। आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

छत्तीसगढ़ में पीएमजीएसवाई की उच्च स्तरीय समीक्षा, ग्रामीण सड़कों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश

रायपुर

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में
         
मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है।

PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी
      

 बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें
        

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ।

पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति
        
भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।
         
इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव श्री पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव श्री अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ श्री भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भाटापारा में गौरव का दिन, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया छत्तीसगढ़ महतारी और शहीद खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण

रायपुर

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अपने एक दिवसीय प्रवास पर भाटापारा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शहर को एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौगात देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और देश के वीर सपूत शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। शहीद को नमन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेगी। देश उनके सर्वाेच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।
          
इस गरिमामय समारोह में राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवेदनशील अवसर पर विधानसभाध्यक्ष डॉ. सिंह ने शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के परिजनों (पुत्री प्रिया खोण्डे और भाई प्रभाकर खोण्डे) से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना।

छत्तीसगढ़ महतारी चौक पर नमन
         
अपने प्रवास के दौरान डॉ. रमन सिंह सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने नवनिर्मित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।

1971 के युद्ध के नायक शहीद खोण्डे को दी श्रद्धांजलि
        

इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष भाटापारा स्थित शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर फ्लाइट लेफ्टिनेंट शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण किया।

समारोह में कई दिग्गज रहे मौजूद
         
इस ऐतिहासिक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदारनाथ गुप्ता, पूर्व विधायक श्री शिवरतन शर्मा और डॉ. सनम जांगड़े उपस्थित थे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, जनप्रतिनिधिगणों के साथ-साथ बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर

रायपुर

छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद  छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा।

गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा।

किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं

राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी।

बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है।

बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है।

उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर

राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत

बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी।

कम बिजली खर्च करने का नया अवसर

10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश

राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है।

आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

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