छत्तीसगढ़ की 5 बड़ी रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का टेंडर जारी, शंकर नगर बीटीआई ग्राउंड क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान

रायपुर

छत्तीसगढ़ शासन की रिडेवलपमेंट नीति के तहत राज्य के विभिन्न शहरों में पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का टेंडर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जारी कर दिया गया है। शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

राज्य शासन ने इन परियोजनाओं के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी है। मंडल द्वारा परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है।

30 जून 2025 को मंत्रिपरिषद ने इन परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर अनुमोदन दिया गया।

इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। योजनाएं रायपुर के बीटीआई रोड शंकर नगर, महासमुंद के क्लब पारा, राजनांदगांव के कैलाश नगर, कोरबा के कटघोरा तथा जगदलपुर के चांदनी चौक फेज-2 क्षेत्र में विकसित की जाएंगी।

राजधानी रायपुर की शंकर नगर स्थित परियोजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बीटीआई ग्राउंड और सिंधु भवन के समीप स्थित यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा और शासकीय परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर और अनुपयोगी सरकारी परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे सरकारी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी और जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक एवं उपयोगी अधोसंरचना में बदला जाएगा, जिससे शहरों की कार्यक्षमता और सौंदर्य दोनों में वृद्धि होगी।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। विशेष रूप से शंकर नगर स्थित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित होगी।

मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने टीएल बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अगले चरण की 8 नई रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। इससे राज्य में शहरी अधोसंरचना विकास की प्रक्रिया को और गति मिलने की संभावना है।

DMF घोटाले की जांच तेज, रायपुर सहित 5 जिलों में ईडी के छापे

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को ईडी ने एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू की।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी है। प्रदेशभर में करीब नौ ठिकानों पर छापेमारी की चर्चा है। कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की दबिश
राजधानी रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की टीम ने सुबह से जांच शुरू की। जानकारी के अनुसार पांच अधिकारियों की टीम कई घंटों से घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़े पहलुओं की जांच के तहत की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि शाश्वत लुणावत प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े हैं और राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार संचालित करते हैं। ईडी की जांच केवल उनके निवास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की कार्रवाई जारी है।

हालांकि ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक रूप से कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रदेशभर में चल रही इस बड़ी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

भोपाल में बिजली कटौती ने तोड़ा रिकॉर्ड, मई में 14,974 बार गुल हुई लाइट

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली कंपनी द्वारा साल भर चलाए जाने वाले ‘मेंटेनेंस’ के दावों की पोल खुल गई है। बिजली कटौती से बेहाल भोपालवासियों को इस साल मई के भीषण गर्मी वाले महीने में रिकॉर्ड तोड़ पावर कट का सामना करना पड़ा। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा एक्सेस की गई डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मई महीने में शहर में कुल 14,974 बार बिजली गुल हुई। इसका औसत निकाला जाए तो शहर में हर तीन मिनट में एक बार बिजली कटौती दर्ज की गई।

हर 6 मिनट में लंबी कटौती
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, कुल कटौतियों में से 6,896 बिजली कट ऐसे थे जो 5 मिनट से ज्यादा समय तक खिंचे। यानी करीब हर साढ़े छह मिनट में शहर के किसी न किसी हिस्से में लंबी बिजली कटौती हुई। हालांकि, मई 2025 (18,767 पावर कट) की तुलना में इस बार का आंकड़ा थोड़ा कम है, लेकिन पिछले साल मई में भारी बारिश और तूफान थे। इस साल बिना किसी बड़े मौसम बदलाव के इतनी बड़ी संख्या में ट्रिपिंग होना डिस्कॉम के मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इन इलाकों में सबसे बुरा हाल
फीडर-वार आंतरिक आंकड़ों से पता चला है कि भोपाल के नबी बाग फीडर में मई के दौरान सबसे ज्यादा 107 बार ट्रिपिंग हुई। इसके बाद मालीखेड़ी में 105 और विश्वकर्मा नगर में 97 बार बिजली गुल हुई। सीटीओ और आदमपुर फीडर में भी 95-95 बार ट्रिपिंग दर्ज की गई।

वीआईपी फीडर रहे पूरी तरह सुरक्षित
हैरानी की बात यह है कि जहां आम जनता वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और कटौती से जूझ रही थी, वहीं शहर के 514 फीडर में से 36 फीडर ऐसे थे जहां एक बार भी ट्रिपिंग नहीं हुई। इनमें राज्य सचिवालय (वल्लभ भवन), भोपाल कलेक्टरेट और कुछ प्रीमियम आवासीय इलाके शामिल हैं। दूसरी ओर, डिस्कॉम के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति और हरियाली के कारण पेड़ की शाखाएं ओवरहेड लाइनों पर गिर जाती हैं, जिससे यह ट्रिपिंग होती है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लोकायुक्त के SPE विंग को RTI से बाहर रखने वाली अधिसूचना रद्द

भोपाल 
 सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है।

‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा है. दरअसल, इससे पहले राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें एसपीई को आरटीआई से बाहर रखना गलत माना गया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त की SPE ब्रांच से भी RTI द्वारा जानकारियां मांगी जा सकेंगी। 

मध्य प्रदेश सरकार का 2011 का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट (एसपीई) को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर किया गया था. मध्य प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2011 को ये अधिसूचना जारी की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अधिसूचना “कानून के हिसाब से गलत” है। 

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारी राय है कि मध्य प्रदेश राज्य के GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) का 25.08.2011 का नोटिफिकेशन, जिसमें SPE को 2005 के एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत उसके दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी, कानून के हिसाब से गलत होने के कारण रद्द किया जा सकता है, क्योंकि इसमें उन मामलों के लिए भी प्रावधान है जो 1947 के एक्ट के सेक्शन 7 के तहत नहीं आते हैं। 

क्यों उठी लोकायुक्त SPE पर आरटीआई की मांग?
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा के मामले से हुई. कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाने के प्रभारी थे. 11 अप्रैल 2017 को उनपर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर हुई. इसके बाद 2020 में अभियोजन की स्वीकृति मिली. इस दौरान कामता प्रसाद मिश्रा ने आरटीआई आवेदन दायर कर लोकायुक्त से जानकारियां मांगी, जिसे SPE ने खारिज कर दिया। 

हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
इसके बाद याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे. 2021 में हाईकोर्ट ने SPE के आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिए, लेकिन एसपीई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. हालांकि, 15 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा दिया। 

समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है। विभाजन की रेखाएं समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवनकाल में यह महत्वपूर्ण कार्य किया। मध्यप्रदेश और पंजाब के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने विभिन्न युक्तियों से समाजों, वर्गों और प्रदेशों को परस्पर जोड़ने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस क्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने पंचतीर्थ के विकास की पहल की। इसके फलस्वरूप आज भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पावन स्थलों के समुचित विकास के लिए कार्य हो रहा है। श्रद्धालु नागरिक इन स्थानों की यात्रा के लिए उत्सुक हुए हैं। सामाजिक समरसता का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंभ प्रभार)  गौतम टेटवाल, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष  कैलाश जाटव, सदस्य  बारेलाल,  रामलाल, विधायक सु ऊषा ठाकुर के अलावा, सु नेहा बग्गा उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गत 14 मई से मोहाली (चंड़ीगढ़) से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत कर रहे थे। यह यात्रा आगामी 21 जून को दिल्ली में पूर्ण होगी। यात्रा के स्थानों में डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली डॉ. अंबडेकर नगर (महू), दीक्षा भूमि नागपुर, इंदु मिल मुंबई, निर्वाण स्थल दिल्ली शामिल हैं। यात्रा के संयोजक  एस.आर. लद्धड़ और सह-संयोजक  मनोज चंदल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की उन्नति आवश्यक है। सभी वर्गों का आपसी सद्भाव महत्वपूर्ण है। अनेक दल और व्यक्ति सिर्फ समाज को बांटने और महापुरूषों के अपमान का कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समानता के भाव को स्थापित किया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर के योगदान का स्मरण ही नहीं किया जा रहा बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का कार्य भी किया जा रहा है।

आत्मीय स्वागत से प्रसन्न हुए तीर्थ यात्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंजाब से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा का मध्यप्रदेश में स्वागत करते हुए आगामी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों को बाबा महाकाल की प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री निवास पहुंचे तीर्थ यात्रियों ने मध्यप्रदेश में हुई आवभगत के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया और उनके साथ छायाचित्र भी खिंचवाए। कार्यक्रम का संचालन  राहुल कोठारी ने किया।

 

ईरान डील ट्रंप के लिए प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश? जानिए विशेषज्ञ ऐसा क्यों मान रहे हैं

वाशिंगटन
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते को लेकर तरह-तरह की चर्चा है. इस बीच वेस्ट एशिया मामलों के एक्सपर्ट इसे अलग नजरिये से देखते हैं. उनका मानना है कि यह डील महज जंग से पहले की स्थिति पर वापसी भर है. आने वाले 60 दिन यह तय करेंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन उद्देश्यों को हासिल कर पाते हैं या नहीं, जिनके नाम पर उन्होंने ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था। 

क्या है समझौते का मुख्य उद्देश्य?
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के वरिष्ठ फेलो विल टॉडमैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि शुरुआती समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी को खत्म करना, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है. उनके अनुसार यह समझौता मूल रूप से हालात को उसी स्थिति में वापस ले जाता है, जहां वे अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से पहले थे। 
टॉडमैन ने कहा, ‘अमेरिका अब तक उनमें से एक भी उद्देश्य या लक्ष्य नहीं पा सका, जिनका ऐलान उसने जंग के शुरू करने से पहले किया था.’ उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद बनी परिस्थितियां बताती हैं कि इस मिलिट्री ऑपरेशन से अमेरिका को जैसी अपेक्षा थी, वैसी रणनीतिक सफलता हासिल नहीं हुई है। 

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को होर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमति बनी. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है. इस मार्ग के खुलने से ग्लोबल एनर्जी बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है और तेल आपूर्ति नॉर्मल होने का रास्ता साफ हो सकता है. हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं. ईरान ने संकेत दिया है कि समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया हस्ताक्षर समारोह के बाद शुरू होगी। 

60 दिन तक बातचीत के बाद खुलेगी समझौते की राह
बातचीत में मिडिएटर की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के अनुसार यह हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जा सकता है. समझौते में एक महत्वपूर्ण प्रावधान 60 दिनों की वार्ता अवधि (बातचीत के लिए 60 दिनों का समय) भी है. इस दौरान ईरान के एनरिच (हाई लेवल पर संवर्धित) यूरेनियम के भंडार और उसके परमाणु प्रोग्राम से जुड़े विवादित मुद्दों पर बातचीत होगी. यही वह स्टेप होगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कितनी प्रभावी शर्तें लागू करा पाते हैं। 

खाड़ी देशों से संबंधों में नुकसान
टॉडमैन का कहना है कि तीन महीने से अधिक चले इस युद्ध ने अमेरिका के पश्चिम एशियाई सहयोगियों के साथ संबंधों को भी नुकसान पहुंचाया है. उनके मुताबिक खाड़ी के कई अरब देशों को महसूस हुआ कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। 

उन्होंने कहा, ‘अरब खाड़ी देशों को लगता है कि अमेरिका ने उन्हें अकेला छोड़ दिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान निर्णय लेते समय उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया.’ टॉडमैन के अनुसार इसका परिणाम यह हो सकता है कि खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों के साथ भी रणनीतिक साझेदारियां विकसित करें। 

विशेषज्ञ का मानना है कि अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बना विश्वास का संकट जल्दी दूर होने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन या भविष्य की कोई भी अमेरिकी सरकार इस भरोसे की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक पूंजी खर्च करने के लिए तैयार नहीं दिखती। 

इस जंग से अमेरिका और इजरायल के बीच भी पनपे मतभेद
ऐसे में आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के संबंध धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकते हैं. टॉडमैन ने यह भी कहा कि इस युद्ध ने अमेरिका और इजरायल के बीच भी एक असामान्य प्रकार का मतभेद पैदा कर दिया है. उनके अनुसार इजरायली सरकार को आशंका है कि मौजूदा समझौता ईरान से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं करता और भविष्य में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को भी सीमित कर सकता है। 

उन्होंने कहा, ‘इजरायल का मानना है कि समझौता ईरान के खतरे को पूरी तरह बेअसर नहीं बनाता. इसके अलावा इजरायल को लगता है कि लेबनान में उसका अभियान अभी अधूरा है.’ लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि लेबनान में संघर्ष आगे न बढ़े, क्योंकि इससे ईरान के साथ हुआ समझौता खतरे में पड़ सकता है। 

विशेषज्ञ के अनुसार युद्ध का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा. इससे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच भी दूरी बढ़ी है. यूरोप के कई देशों ने युद्ध का समर्थन नहीं किया था और उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया था। 

टॉडमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाटो की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि गठबंधन ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया. उनके मुताबिक यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल युद्धविराम और होरमुज का खुलना एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन असली चुनौती अगले 60 दिनों की बातचीत में होगी। 

अगर परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम भंडार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तो यह समझौता केवल अस्थायी राहत साबित हो सकता है. ऐसे में आने वाले दो महीने न सिर्फ अमेरिका और ईरान, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। 

 

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश ने ही नक्सलवाद को समाप्त किया है। लाल सलाम को आखिरी सलाम करने में मध्यप्रदेश ने बाजी मारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जून को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के विकास के हर मामले में सदैव अग्रणी रहने की क्रियाशीलता की सराहना की। इस वर्ष बैठक का विषय “विकसित भारत @2047 के लिये समावेशी मानव विकास” था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद् की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। देश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज करने पर चर्चा हुई। भविष्य में युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष रूप से जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना, नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, पीएम मित्र पार्क निर्माण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह मप्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में हो रहे उच्च कोटि के कामों की भी प्रशंसा की है।

समान नागरिक संहिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों मांगे जा रहें है। अच्छी नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाये जायें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित किये गये हैं। समान नागरिक संहिता की वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर सुझाव देने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में समान नागरिक संहिता के संबंध में और उसमें सुझाव देने के लिये अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस – स्वस्थ आयु के लिये योग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को प्रदेश में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी। विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग अपना चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिये योग’ रखी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रदेश में अक्षरश: पालन किया जाएगा।

एमपी टूरिज्म को मिला “कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित ’10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026′ में “कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार” प्राप्त हुआ है। एमपी टूरिज्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इसे देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल एवं बेहतरीन प्रबंधन के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी।

प्रदेश को मिला उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गत 15 जून को गोवा में ग्लोबल विंड डे – 2026 पर मध्यप्रदेश को उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान प्रदान किया है। हमारा मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में से है और हम प्रदेश में इस दिशा में लगातार काम कर रहें है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को यह केंद्रीय सम्मान प्राप्त होने पर विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी।

प्रदेश में स्थापित होगा सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को जानकारी दी कि गत 15 जून को भोपाल में सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। प्रदेश में सायबर सुरक्षा के लिये एक सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में यह ठोस कदम है। यह सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

एमएसएमई यूनिट्स को प्रोत्साहन राशि का वितरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 14 जून को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है। इसमें 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को 2 करोड़ 2 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को 1 करोड़ 7 लाख रुपये मण्डी शुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों को विद्युत टैरिफ के रूप में 3 करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण भी किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी इस दौरान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य बदलने के लिये कृत संकल्पित है और इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बड़े उद्योगों के अलावा हमारा पूरा ध्यान एमएसएमई की ओर भी है, जिनका प्रदेश के औद्योगिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।

 

देवकीनंदन ठाकुर ने विवाह परंपराओं पर उठाए सवाल, मंदिरों के लिए सनातन बोर्ड की मांग

भोपाल 

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह, शादियों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति, मंदिरों के प्रबंधन और राम मंदिर दान पात्र विवाद जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार समय का विभाजन देवताओं, पितरों और दैत्यों के समय में किया गया है। रात का समय दैत्यों का माना जाता है, इसलिए हिंदू समाज को रात में विवाह करने से बचना चाहिए। दैत्यों के समय में विवाह करके दैवीय और आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय परंपरा में ‘गोधूलि बेला’ को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय माना जाता था। उस समय विवाह के सभी प्रमुख संस्कार और फेरे दिन में ही संपन्न होते थे। मुगल आक्रांताओं के दौर में जब बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर खतरा मंडराने लगा था, तब मजबूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों ने रात के समय छिपकर विवाह करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह एक परंपरा का रूप बन गई।

देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई
उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वैसा कोई खतरा नहीं है, इसलिए समाज को शोर-शराबे और अनावश्यक दिखावे से दूर रहकर फिर से दिन में विवाह करने की पवित्र परंपरा की ओर लौटना चाहिए।

शादियों में मद्यपान के सेवन को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। ऐसे पवित्र अवसर पर मद्यपान करना अत्यंत दूषित विषय है। इसका नकारात्मक प्रभाव केवल परिवार पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है। विवाह को जितना अधिक पवित्र रखा जाएगा, समाज उतना ही स्वस्थ और संस्कारित बनेगा।

उन्होंने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर बोलते हुए शास्त्रों का जिक्र किया और कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक विष्ठा (मल) का कीड़ा बनकर कष्ट भोगना पड़ता है। यदि लोगों को इस बात का वास्तविक ज्ञान हो जाए तो कोई भी मंदिर का एक रुपया तक चुराने की हिम्मत नहीं करेगा।

मंदिरों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संचालन धर्म के जानकार, मर्मज्ञ और धर्मनिष्ठ लोगों के हाथों में होना चाहिए। इस बोर्ड का अध्यक्ष चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बनाया जाना चाहिए, ताकि सनातन धर्म और धार्मिक संस्थाओं का संचालन सही दिशा में हो सके।

‘फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं’
न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि फैसला आने से पहले ही आरोपी की हार्ट अटैक से मौत हो जाए और भगवान राम अपनी दक्षिणा की प्रतीक्षा करते रह जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने श्रीराम की मर्यादा का उल्लंघन किया है और गलती की है, उनसे तुरंत धन वापस लिया जाना चाहिए। मामले को वर्षों तक अदालतों में घसीटने से बेहतर है कि दोषियों को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए। 

भवानीपुर चुनाव नतीजे को ममता बनर्जी ने दी कानूनी चुनौती, कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं

 कोलकाता

ममता बनर्जी ने भवानीपुर की हार को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज दोपहर अचानक कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गईं और भवानीपुर विधानसभा रिजल्ट के नतीजे को चुनौती दी है. ममता बनर्जी के साथ सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी मौजूद थे. रिपोर्ट के अनुसार ममता याचिका के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने कोर्ट पहुंचीं थीं। 

भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर थी. इस सीट से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की है. जबकि ममता को हार का मुंह देखना पड़ा था. कांटे की टक्कर में इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर ममता बनर्जी को 15104 वोटों से मात दी थी. इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी को 73917 और ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर रहे सीपीएम के श्रीजीब विश्वास को 3556 वोट मिले थे। 

ममता बनर्जी मतगणना के दिन 16-17 राउंड तक आगे ही थीं. लेकिन दोनों उम्मीदवारों के बीच गैप धीरे धीरे कम होता गया. आखिर मतगणना के आखिरी चरणों में शुभेंदु अधिकारी ने तगड़ी लीड ली और आखिरकार 15104 वोट से चुनाव जीत गए। इस सीट पर मतगणना के दौरान काफी हंगामा भी हुआ था। उन्होंने भवानीपुर विधानसभा रिजल्ट के नतीजे को चुनौती दी. ममता बनर्जी के साथ सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी भी उपस्थित थे। आपको बता दें कि भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर देखी गई थी. इस सीट से पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की. वहीं ममता को हार का मुंह देखने को मिला. कांटे की टक्कर में इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15104 वोटों से हराया था।  

15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, प्रजनन काल में संरक्षण पर जोर

जगदलपुर.

मछलियों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. बरसात का मौसम मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नदी और नालों में मछली शिकार पर रोक लगाई गई है.

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड दोनों हो सकते हैं. हालांकि केज कल्चर गतिविधियों को छूट दी गई है. दूसरे राज्यों से मछली आयात और बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. व्यापारियों को आयात से जुड़े दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य होगा. बरसात में बड़ी संख्या में ग्रामीण मछली पकड़कर आय अर्जित करते हैं.

इसी कारण प्रतिबंध अवधि में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. मत्स्य विभाग ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है. उद्देश्य आने वाले वर्षों के लिए मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है.

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