सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आज डेटा है सबसे मूल्यवान संपत्ति
सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है तेजी से
प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन
प्रदेश में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की होगी स्थापना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव “राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” पर कार्यशाला का किया शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।

 सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी।

डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है।

सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य: पी.एस. सेल्वेन्द्रन

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा।

एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ

प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से सायबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए एक मजबूत, प्रभावी और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता मिलेगी।

प्रदेश में 44 सायबर कमांडो और 3 हजार सायबर वॉरियर तैयार किए जाएंगे : एडीजी मनोहर

एडीजी ए. साई मनोहर ने कहा कि सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा आज डिजिटल युग की प्रमुख चुनौतियां हैं। सायबर हेल्पलाइन 1930, त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था और जागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश में सायबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अनेक मामलों में नागरिकों की बड़ी राशि सुरक्षित कराई गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ शासकीय डेटा और प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी, आधुनिक निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सायबर जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

एडीजी मनोहर ने बताया कि प्रदेश में सायबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में 6 सायबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है। राज्य सायबर सेल में सिंहस्थ – 2028 से पहले 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे। सिंहस्थ में सायबर अटैक पर बारीकी से नजर रखने और उसे समय रहते प्रतिबंधित करने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों एवं युवा स्वयं सेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी उपाय हैं और राज्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सायबर अपराध नियंत्रण, आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन परियोजना के माध्यम से सायबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और एनआईसीनेट की सायबर सुरक्षा संरचना जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अतिरिक्त डिजिलॉकर, एंटिटी लॉकर, एपीआई सेतु एवं यूएक्स4जी, एंड-पॉइंट सुरक्षा, वेब एवं आईटी अवसंरचना की सायबर सुरक्षा स्थिति और सुरक्षित एआई परिवर्तन यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की सहभागिता से विषयगत समूह चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान सायबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर 5 समानांतर समूह गठित कर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।समूह चर्चाओं में जोखिम आधारित आकलन एवं सिक्योरिटी निगरानी, राज्य डेटा सेंटर (एसडीसी) एवं स्वान सुरक्षा, लेगेसी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, सुरक्षा-बाय-डिज़ाइन एवं ज़ीरो-ट्रस्ट मॉडल, डेटा वर्गीकरण एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और  सायबर सुरक्षा क्षमता निर्माण, जागरूकता और एमपी-सीईआरटी की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने अपने-अपने विभागों में सायबर सुरक्षा से संबंधित वर्तमान व्यवस्थाओं, प्रमुख चुनौतियों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अंतरालों और सुधार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। समूहों द्वारा राज्य शासन की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएँ भी प्रस्तुत की गईं। चर्चा में सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में विभागीय समन्वय बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना विकसित करने और डेटा संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ विभिन्न विभागों के बीच सायबर सुरक्षा संबंधी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना रहा। 

डीजीपी कैलाश मकवाणा का बड़ा संकल्प, अगले 3 साल में ड्रग फ्री मध्यप्रदेश बनाने का लक्ष्य

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश को “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” बनाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे प्रदेश में “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय भोपाल में आयोजित दो दिवसीय जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक में अपराध नियंत्रण, न्यायालयीन प्रकरणों, पुलिस आधुनिकीकरण, मानव संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुशासन, जवाबदेही और प्रभावी पुलिसिंग के निर्देश दिए। 

AI आधारित 1 लाख कैमरों का नेटवर्क बनेगा
डीजीपी मकवाणा ने सेफगार्ड योजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए। यह नेटवर्क कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सीसीटीवी नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। 

स्कूल-कॉलेजों के आसपास बनेंगे ड्रग फ्री जोन
बैठक में निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध तरीके से “ड्रग फ्री जोन” बनाया जाएगा। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। 

लंबित न्यायालयीन मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर
डीजीपी ने उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी विवादों और रिट याचिकाओं की नियमित समीक्षा कर समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में सभी कार्यालयीन कार्यों में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिकतम डिजिटल बनाया जाए और स्थानांतरित अधिकारियों-कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से भारमुक्त किया जाए। 

उत्कृष्ट पुलिसकर्मियों को मिलेगा सम्मान
डीजीपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों, विशेष रूप से के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान मिलना पुलिस बल के मनोबल और कार्य संस्कृति के लिए आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले छह महीनों में की गई कार्रवाई के दौरान 10 महत्वपूर्ण मामलों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है। इसके अलावा मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों पर कार्रवाई और बॉर्डर मीटिंग्स की समीक्षा भी की गई।

पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
डीजीपी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए जिला पुलिस अधीक्षक हर माह सिविल सर्जन के साथ बैठक करें। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर अस्पतालों के साथ एमओयू किए जाएंगे। 

पाकिस्तानी वायुसेना को बड़ा झटका, एक महीने में 5वां एयरक्राफ्ट क्रैश; सड़क पर गिरा जेट

 खैबर पख्तूनख्वा 
पाकिस्तान की सेना को एक बार फिर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. खैबर पख्तूनख्वा के मरदान जिले में रविवार को एक सैन्य प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा कटलंग रोड के पास जाबर नहर क्षेत्र में हुआ, जहां विमान गिरते ही आग का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया. यह हादसा एक CCTV फुटेज में रिकॉर्ड हो गया. विमान के क्रैश होने के बाद धुआं और आग की लपटें देखी गईं. फुटेज में देखा जा सकता है कि रोड पर लगातार गाड़ियां गुजर रही हैं. जब दो मोटरसाइकिल सवार गुजर रहे थे, तभी यह जेट सीधे आकर रोड के बीच में गिरा और देखते ही रोड के बीच में आग की एक सीधी रेखा बन गई. विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई. राहत एवं बचाव दल और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं. पाकिस्तानी अधिकारियों ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है. इस हादसे के बाद मौके पर लोग जमा हो गए. बाइकसवार लोगों का हाल पता नहीं है. लेकिन बाद में दोनों गाड़ियां सड़क पर ही पड़ी दिखाई दी हैं। 

एक महीने में पांचवां सैन्य विमान हादसा
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान के सैन्य विमानों की सुरक्षा पर पहले से सवाल उठ रहे हैं. पिछले एक महीने के भीतर यह पांचवीं बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है. सबसे बड़ा झटका 10 जून को लगा था, जब पाकिस्तान आर्मी एविएशन का Mi-17 हेलिकॉप्टर POK में टेकऑफ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उस हादसे में 22 सैन्यकर्मियों की मौत हुई थी. पाकिस्तानी सेना ने बाद में सभी के मारे जाने की पुष्टि की थी। 

उससे पहले 20 मई को मियांवाली के पास पाकिस्तान एयर फोर्स का FT-7PG ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. एक दिन पहले 19 मई को कामरा के पास JF-17 थंडर लड़ाकू विमान भी ट्रेनिंग मिशन के दौरान क्रैश हो गया था. दोनों मामलों में पायलटों ने इजेक्ट कर जान बचा ली थी। 

आबादी को बचाने की कोशिश में हादसा
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार मरदान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ विमान Super Mushshak (MFI-17) ट्रेनर एयरक्राफ्ट था. बताया जा रहा है कि पायलटों ने विमान को घनी आबादी वाले इलाके से दूर ले जाने की कोशिश की ताकि जमीन पर बड़े पैमाने पर नुकसान न हो. हालांकि इस कोशिश में दोनों पायलट अपनी जान नहीं बचा सके। 

लगातार हादसों से बढ़े सवाल
जनवरी से जून 2026 के बीच पाकिस्तान को कम से कम पांच बड़े हवाई हादसे सामने आ चुके हैं. इनमें लड़ाकू विमान, ट्रेनर एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर शामिल हैं. ज्यादातर मामलों में शुरुआती वजह तकनीकी खराबी बताई गई है, लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट्स के रखरखा की कमी को दिखाया है. POK में Mi-17 हेलिकॉप्टर हादसे के कुछ ही दिन बाद हुआ यह नया क्रैश पाकिस्तान के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। 

थोक महंगाई पर बड़ा अपडेट, मई में WPI 9.68% पर; सरकार ने लॉन्च की नई WPI सीरीज

नई दिल्ली
 भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत ‘उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग’ (DPIIT) ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। मई 2026 के लिए थोक महंगाई पिछले महीने की तुलना में बढ़कर 9.68% हो गई है। यह आंकड़े नई सीरीज के तहत जारी किए गए हैं। इस नई सीरीज में, आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है।

मई 2026 में थोक महंगाई की स्थिति
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में सालाना थोक महंगाई दर 9.68% दर्ज की गई, जबकि अप्रैल 2026 में यह 8.26% थी। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईंधन, बिजली और मिनरल ऑयल की कीमतों में तेजी है।

ईंधन सबसे बड़ा झटका
थोक महंगाई में सबसे ज्यादा उछाल ईंधन और बिजली क्षेत्र में आई. मई 2026 में फ्यूल एंड पावर की महंगाई 30.33 प्रतिशत रही जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी. मिनरल ऑयल यानी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 49.82 प्रतिशत उछलीं. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 61.51 प्रतिशत रही. पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथलपुथल इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। 

प्राथमिक वस्तुएं और मैन्युफैक्चरिंग
प्राइमरी आर्टिकल्स यानी खेती और खनन से जुड़ी चीजों की महंगाई मई में 4.99 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.78 प्रतिशत थी. नॉन-फूड आर्टिकल्स 9.49 प्रतिशत महंगे हुए. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई 7.48 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से अधिक है. केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। 

खाने-पीने की चीजें
WPI फूड इंडेक्स की महंगाई मई 2026 में 4.49 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.11 प्रतिशत थी. खाद्य तेल, अंडे-मांस-मछली और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी वजह रही. हालांकि दालें, आलू और प्याज की कीमतें साल भर पहले के मुकाबले अभी भी कम हैं। 

नई WPI सीरीज आज से लागू
सरकार ने आज से WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है. नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई है. साथ ही आज से Output Producer Price Index और Service Producer Price Index भी जारी किए गए हैं. सेवा क्षेत्र में बैंकिंग, बीमा, टेलीकॉम, रेलवे और एयर पैसेंजर सेवाएं शामिल की गई हैं. अगली WPI रिपोर्ट जून 2026 के लिए 14 जुलाई को आएगी। 

रोजाना जरूरत के सामान, फ्यूल और पावर के दाम बढ़े

    रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 3.78% से बढ़कर 4.99% हो गई।

    खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 3.11% से बढ़कर 4.49% पर पहुंच गई है।

    फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 24.89% से बढ़कर 30.33% हो गई है।

    मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 6.68% से बढ़कर 7.48% रही।

होलसेल महंगाई के 4 हिस्से
प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।

    फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, गेहूं, सब्जियां
    नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
    मिनरल्स
    क्रूड पेट्रोलियम

मई में रिटेल महंगाई 3.93% रही
मई में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले 5 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के टारगेट 4% के बेहद करीब पहुंच गई है।

होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है।

जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।

महंगाई कैसे मापी जाती है?
भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।

महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

 

4 बड़ी खुशखबरियों से शेयर बाजार में रॉकेट जैसी तेजी, अब निवेशकों को इस एक फैसले का इंतजार

 नई दिल्ली

कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, सेंसेक्स 860 अंक और निफ्टी 260 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन महीने से जारी संघर्ष आखिरकार समाप्त होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो गया है. फिलहाल बाजार में तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं, जिसने निवेशकों के सेंटिमेंट को सुधार दिया है. वहीं, बाजार अब 5वीं बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है। 

आइए एक-एक कर जानते हैं कि बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण हैं..
1. होर्मुज का खुलना

पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज रूट बाधित चल रहा था. रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की घोषणा के बाद, इस रूट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया गया है. वैश्विक व्यापार के लिए यह इस साल की सबसे बड़ी राहत है. दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है, इसके खुलने से सप्लाई चेन ठप होने का डर पूरी तरह खत्म हो गया है. जिसने भारतीय बाजार में चौतरफा लिवाली को बढ़ावा दिया है। 

2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
होर्मुज संकट टलने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गई हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. इससे देश का आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में आएगा। 

3. डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड मजबूती
कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स के सुस्त पड़ने से भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है. रुपया मजबूत होकर 94.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. रुपये की इस मजबूती से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में फिर से लौट आया है, क्योंकि इससे उन्हें करेंसी डेप्रिसिएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) का जोखिम कम हो जाता है. साथ ही, आयात होने वाली जरूरी वस्तुओं की लागत घटने से घरेलू स्तर पर महंगाई को रोकने में मदद मिलेगी। 

4. बॉन्ड टैक्स कटौती से FII की बिकवाली थमी
घरेलू मोर्चे पर सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा बॉन्ड मार्केट पर टैक्स ढांचे में किए गए हालिया सुधार और कटौती का बड़ा असर दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, लेकिन बॉन्ड टैक्स में राहत मिलने के बाद फिक्स्ड इनकम और इक्विटी मार्केट दोनों में विदेशी फंड्स का आउटफ्लो न के बराबर रह गया है. FIIs अब आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग कर रहे हैं। 

अब इस एक खबर का इंतजार (भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील)
बाजार में आई इस शुरुआती तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें उस पांचवें और सबसे निर्णायक ट्रिगर पर टिकी हैं, जो इस रैली को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के अंतिम मसौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। 

ट्रेड डील से बाजार को क्या उम्मीद?
इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग सामान पर लगने वाली भारी ड्यूटी को कम किया जाना है, जिससे भारतीय कंपनियों को वियतनाम और मेक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ा एडवांटेज मिलेगा। 

CCPL Season 3 की चैंपियन बनी बिलासपुर बुल्स, फाइनल में रायगढ़ लायंस को 7 विकेट से हराया

रायपुर.

छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग (CCPL) सीजन-3 का फाइनल मुकाबला रविवार को नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया, जिसमें बिलासपुर बुल्स (Bilaspur Bulls) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रायगढ़ लायंस (Raigarh Lions) को 7 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।

पहले गेंदबाजी और फिर दमदार बल्लेबाजी के दम पर बिलासपुर ने मैच पर पूरी तरह पकड़ बनाई और नया चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। बिलासपुर बुल्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए रायगढ़ लायंस ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 160 रन बनाए। रायगढ़ लायंस की ओर से नयन राजकुमार चौहान ने 41 रन, संगीत सोनी ने 32 रन और दीपक यादव ने नाबाद 22 रनों की पारी खेली। वहीं अन्य बल्लेबाज बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रहे।

भारत गोंडवानी ने झटके 3 विकेट
बिलासपुर बुल्स की ओर से गेंदबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला। भारत गोंडवानी ने 3 विकेट झटके। वहीं वरुण सिंह भूई और मोहित राउत ने 2-2 विकेट हासिल किए।

बिलासपुर बुल्स की बल्लेबाजी
लक्ष्य का पीछा करने उतरी बिलासपुर बुल्स की शुरुआत मजबूत रही। टीम ने 16.3 ओवर में 3 विकेट खोकर 164 रन बनाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। बल्लेबाजी में वीकल्प तिवारी ने नाबाद 39 रन, पवन परनाटे ने 39 रन और प्रतेक यादव ने मात्र 13 गेंदों में 30 रनों की धमाकेदार पारी खेली। रायगढ़ लायंस के गेंदबाजों ने कोशिश जरूर की, लेकिन वे बिलासपुर के बल्लेबाजों को रोकने में नाकाम रहे। प्रवीण कुमार यादव ने 1 विकेट लिया, जबकि अन्य गेंदबाज महंगे साबित हुए।

भारत गोंडवानी बने प्लेयर ऑफ द मैच
इस शानदार प्रदर्शन के लिए भारत गोंडवानी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने गेंदबाजी में 3 अहम विकेट लेकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दिलचस्प रहा है टूर्नामेंट का इतिहास
सीसीपीएल का इतिहास भी काफी रोचक रहा है। वर्ष 2024 में खेले गए पहले सीजन के फाइनल मुकाबले में रायपुर राइनोज ने बिलासपुर बुल्स को आठ विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया था। वहीं पिछले सीजन में बारिश के कारण फाइनल मुकाबला आयोजित नहीं हो सका था। इसके चलते रायपुर राइनोज और राजनांदगांव पैंथर्स को संयुक्त विजेता घोषित किया गया था। अब तीसरे सीजन (2026) में फिर नया चैंपियन सामने आया है। नवा रायपुर में खेले गए फाइनल मुकाबले में बिलासपुर बुल्स ने रायगढ़ लायंस को 7 विकेट से हराकर पहली बार CCPL का खिताब जीत लिया है। इस जीत के साथ बिलासपुर बुल्स ने पहले सीजन की हार का बदला भी पूरा कर लिया और नया इतिहास रच दिया।

CM Helpline 1076 में 5 दिनों में 15,434 शिकायतें दर्ज, बिजली और जमीन से जुड़े मामले सबसे ज्यादा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन 1076 आम जनता के लिए शासन तक अपनी शिकायतें पहुंचने का सशक्त माध्यम बन रही है. हेल्पलाइन शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर शिकायतों की संख्या 15 हजार के आंकड़े को पार कर गई है.

सबसे ज्यादा शिकायतें नगरीय सुविधाओं, बिजली और जमीन से जुड़ी हुई है. 13 जून तक 15,434 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित 2,470 शिकायतें आई हैं. इनमें नामांतरण, सीमांकन और भू-अभिलेख संबंधी शिकायतें प्रमुख हैं. वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से जुड़ी 2,058 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं शामिल हैं.

सीएम हेल्पलाइन पर ऊर्जा विभाग से संबंधित 1,921 शिकायतें दर्ज की गई हैं. इनमें बिजली आपूर्ति, ट्रांसफॉर्मर और विद्युत कनेक्शन से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 1,509 मामलों के साथ-साथ खाद्य विभाग से जुड़ी 1,235 शिकायतें भी हेल्पलाइन पर दर्ज हुई हैं. खाद्य विभाग की शिकायतों में राशन कार्ड और पात्रता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं.लगभग हर दूसरी शिकायत जमीन, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी है.

सड़कों और पुलों के निर्माण की धीमी गति पर बिफरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, 2 ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त

सड़कों और पुलों के निर्माण की धीमी गति पर बिफरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, 2 ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त 

8 को कारण बताओ नोटिस, 2 ठेकेदारों पर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया

बस्तर में निरीक्षण और समीक्षा बैठकों में जताई थी गहरी नाराजगी, लापरवाह और काम में देरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के दिए थे निर्देश

सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी – अरुण साव

रायपुर. 
 उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव द्वारा सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले 8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं पूर्व में दो ठेकेदारों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया गया है। 

लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को भी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर केशलूर के पास बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज में काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स के अनुरूप नहीं होने पर ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।    

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पिछले सप्ताह चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान अपने चारों विभागों के कार्यों का निरीक्षण कर गहन समीक्षा की थी। उन्होंने निरीक्षण और बैठकों के दौरान सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में लापरवाही, देरी और अनुबंध के अनुसार अपेक्षित तेजी नहीं लाने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

पुलों के काम पिछड़ने पर दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार मेसर्स गुप्ता कन्सट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी द्वारा भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, कोंडागांव के घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और बड़े राजपुर विकासखंड के पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी कबीरधाम जिले के बांटीपथरा से कुई (दमगढ़) मार्ग में हॉफ नदी पर भी उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कर रही है। चारों कार्यस्थलों पर कंपनी का काम अपेक्षित गति से काफी पीछे है।

विभाग ने कांकेर के आमाबेड़ा-सेमर गांव सड़क पर नेरूल नदी तथा बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग में डुमरीकेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के कार्य में लेट-लतीफी पर ठेकेदार निर्भय राम साहू का पंजीयन आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद इन दोनों ठेकेदारों के काम की गति असंतोषजनक है।
 
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण व सुधार कार्य की धीमी गति पर ठेकेदार पंकज हालदार को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के उत्तर का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है। प्रमुख अभियंता ने सुकमा में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग तथा केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क के कार्य में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर ठेकेदार आशीष भदौरिया को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है।   

सड़कों के निर्माण में लेट-लतीफी पर इन ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी

विभाग ने कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बी.एम.एस. प्रोजेक्ट, कोंडागांव में हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी और जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एस.के. अरोरा को कार्यों में धीमी प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कार्यस्थलों पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं होने पर सुकमा के चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के ठेकेदार के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन तथा भेज्जी-चिंतागुफा सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार के. मोहन रेड्डी एवं गोविन्द्र सिंह देशमुख को लोक निर्माण विभाग के सुकमा संभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।    

”सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी प्रकार की लेट-लतीफी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों के पूरे नहीं होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को तेजी से पूरे कर बेहतर कनेक्टीविटी सुनिश्चित करने पर जोर है। वहां काम कर रहे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार निर्धारित प्रगति तथा माइलस्टोन्स पूरे करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है।“ – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

भोपाल का आदमपुर खंती मॉडल बना मिसाल, 54 दिन में साफ हुआ 92 हजार टन कचरा; 330 दिन में खत्म होगा कचरे का पहाड़

भोपाल
राजधानी भोपाल को सालों पुराने बदबूदार कचरे के पहाड़ से मुक्ति मिलने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में वर्षों से जमा ‘लिगेसी वेस्ट’ (पुराने कचरे) का नामोनिशान मिटाने के लिए नगर निगम का महा-अभियान फुल स्पीड में चल रहा है।

महज 54 दिनों के भीतर हाईटेक मशीनों ने 92 हजार टन (करीब 14 प्रतिशत) कचरे को प्रोसेस कर पूरी तरह खत्म कर दिया है।

हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बीच एक वैश्विक संकट ने भोपाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगा दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कचरे से कोयला बनाने वाले देश के दूसरे सबसे बड़े प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्स) अटक गए हैं।

लेगेसी वेस्ट की प्रोसेसिंग का काम 22 अप्रैल से शुरू किया गया था। इसके लिए दो हाईटेक मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं। बज्र-250 मशीन हर घंटे 250 टन और बज्र-300 मशीन हर घंटे 300 टन कचरा प्रोसेस कर रही है। दूसरी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया था। पूरी साइट को 330 दिनों के भीतर साफ करना अनिवार्य है। इसमें बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

330 दिन में पूरी साइट साफ करने की शर्त…

    पूरे 6 लाख टन से ज्यादा लेगेसी वेस्ट का निष्पादन 330 दिनों में करना होगा।
    बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

    तय समय में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर जुर्माना लगेगा।

    कचरा निष्पादन, साइट सुरक्षा, आग रोकथाम और धुआं नियंत्रण की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

    खंती में आग लगने या नियंत्रण नहीं होने पर 10 लाख रुपए प्रतिदिन की पेनल्टी तय है।

ईरान-अमेरिकी तनाव से अटका कचरे से कोयला बनाने वाला प्लांट भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो गया है। आदमपुर खंती में लगे इस प्लांट के ट्रायल में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है। नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की टीम ने प्लांट के कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए ओके रिपोर्ट दे दी है।

इस कोयले का उपयोग बिजली संयंत्रों में होगा। यह देश का दूसरा टोरीफाइड चारकोल प्लांट है। हालांकि, ईरान-अमेरिकी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्ट्स) नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण प्लांट को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का मामला अटका हुआ है।

हर घंटे 550 टन कचरे का खात्मा; दिन-रात चल रही हैं दो ‘दानवाकार’ मशीनें
आदमपुर खंती में कुल 6 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा जमा है। इसे खत्म करने के लिए नगर निगम ने कंपनी को 330 दिनों की सख्त समय-सीमा दी है। कचरा निष्पादन का यह काम 22 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसमें दो अत्याधुनिक मशीनें दिन-रात जुटी हैं:

बज़-250 मशीन: यह मशीन हर घंटे 250 टन कचरे को प्रोसेस कर रही है (22 अप्रैल से चालू)।

बज़-300 मशीन: इस दूसरी बड़ी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया, जो हर घंटे 300 टन कचरा साफ करती है।

नो वेकेशन इन मानसून: इस बार मानसून और बारिश के सीजन को भी ‘वर्किंग डेज’ में शामिल किया गया है, यानी बारिश में भी काम नहीं रुकेगा।

330 दिन में साइट साफ करने की शर्तें… नहीं तो ₹10 लाख प्रतिदिन का जुर्माना

नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी के सामने बेहद कड़े नियम और पेनाल्टी की शर्तें रखी हैं।

– तय समय (330 दिन) में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा।

– कचरा निष्पादन, साइट की सुरक्षा, आग की रोकथाम और धुएं पर नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

– खंती में आग लगने या उस पर तुरंत नियंत्रण नहीं होने की स्थिति में कंपनी पर 10 लाख रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी (जुर्माना) तय की गई है।

कचरे से बनेगा कोयला, लेकिन इंटरनेशनल टेंशन से अटका फुल-ऑपरेशन
कचरे के पहाड़ को खत्म करने के साथ ही भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में लगे इस विशेष प्लांट के ट्रायल रन में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है।

देश के इस दूसरे टोरीफाइड चारकोल प्लांट की नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की टीम ने भी जांच की है और कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए अपनी ‘ओके रिपोर्ट’ दे दी है। इस कोयले का उपयोग देश के बड़े बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में होगा।

पुर्जों का इंतजार: यह प्लांट भोपाल के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से इस प्लांट के कुछ बेहद अहम टेक्निकल पार्ट्स (पुर्जे) भारत नहीं आ पा रहे हैं। यही वजह है कि कोयला बनाने का यह प्लांट अभी तक अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं हो पाया है।

 

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सब स्टेशन संचालन एवं सुरक्षा से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन जिले के नागदा, धार जिले के बदनावर व राजगढ़ टेस्टिंग डिवीज़न मुख्यालयों मे प्रशिक्षण कार्यशाला अधीक्षण अभियंता शेखर फटाले के मार्गदर्शन में हुई।

जिनमें सब स्टेशन मेंटेनेंस एवं ऑपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया गया एवं कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षित कार्यशैली से कराया गया अवगत

प्रशिक्षण में फटाले ने एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के रूप में कार्य करने के प्रति जागरूक भी किया गया। कार्यशालाओं में क्षेत्र के अभियंताओं एवं तकनीकी स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।

 

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