सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न

रायपुर, 
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सामाजिक अंकेक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से हुई चर्चा

          मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से अंकेक्षण रिपोर्ट दिया जाना आवश्यक है। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस वर्ष प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण एवं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण कराये जाने पर बल दिया गया। 

सामाजिक अंकेक्षण नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम

         बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 में अब तक किए गए सामाजिक अंकेक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक अंकेक्षण कार्य में नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु डेवलपमेंट एजेंसी के सहयोग के लिए भी चर्चा हुई।  बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के विस्तार हेतु अन्य योजनाओं से निश्चित विकास निधि के निर्धारण के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। 

सामाजिक अंकेक्षण कार्यों के संपादन पदों को भरने के प्रस्ताव पर चर्चा 

        बैठक में मनरेगा योजना को संशोधित नवीन योजना वीबीजीरामजी में सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान का अवलोकन, आत्मसात करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण के कार्यों के संपादन हेतु विभिन्न पदों को नियमानुसार भरने के लिए आवश्यक नियमों के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन किया गया।  

       बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के सामान्य सभा के सदस्यों ने भाग लिया।

डिफॉल्टरों को दोबारा लीज देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

ग्वालियर 
मध्य प्रदेश में खनिज
विभाग के अफसरों और खनन माफिया की सांठगांठ से चल रहे घोटाले को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से सीधे पूछा।

जब अवैध खनन करने वालों पर करोड़ों रुपए की पेनल्टी बकाया है, तो उनसे अभी तक वसूली क्यों नहीं की गई? सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन डिफॉल्टरों को वापस खनन लीज किस आधार पर दे दी गई?

यह तल्ख सवाल जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता अकरम खान द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किए हैं।

मामले में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी है। अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।

साल 2017 से कुंडली मारकर बैठे हैं रसूखदार
याचिका में बताया है कि जिले के खनन माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपए की भारी-भरकम जुर्माना राशि बकाया है।

यह वसूली साल 2017 से लंबित है, लेकिन खनिज विभाग इसे वसूलने में पूरी तरह नाकाम रहा। नियमानुसार जुर्माना न चुकाने पर खदान संचालकों को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर उनका खनन तुरंत रोका जाना चाहिए था। लेकिन, रसूखदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रसूखदारों को तोहफे में मिली नई लीज
याचिका में यह भी बताया कि हद तो यह हो गई कि पुराने करोड़ों रुपए दबाकर बैठे खनन माफियाओं की खदानें न सिर्फ रिन्यू (नवीनीकरण) कर दी गईं, बल्कि उन्हें नई जगहों पर खनन करने के लिए नई लीजें भी आवंटित कर दी गईं हैं। मतलब उनके पेनल्टी न चुकाने को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।

बिलौआ-बेरजा में 100 फीट तक खोद दी जमीन
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि ग्वालियर जिले के बिलौआ और बेरजा क्षेत्र में काले पत्थर (क्रशर गिट्टी) का सबसे बड़ा कारोबार है। यहां नियमों को ताक पर रखकर ऐसा अंधाधुंध अवैध खनन किया गया है जिसने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। बिलौआ में अवैध खनन करने वालों ने जमीन को 25 से 30 मीटर (करीब 100 फीट) गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया है।

माफिया की जेब में गया राजस्व
खनिज विभाग ने जब पूर्व में इनकी जांच की थी, तो बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पाया गया था। माफिया यहां से कई हजार घनमीटर कीमती काला पत्थर निकालकर बाजार में बेच चुके हैं। जो करोड़ों रुपए सरकारी खजाने में आने चाहिए थे, वे सीधे माफिया की जेब में चले गए।

 

MP में 10 साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया तेज, आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी; सामान्य वर्ग ने जताई आपत्ति

भोपाल
 प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं।

यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है।

पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी।

यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है।

इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें।

उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा।

दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी।

दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित
भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत

खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त

रायपुर,
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी।

राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।

नौगई ट्रिपल मर्डर पीड़ितों से मिले विक्रमादित्य, आरोपियों के एनकाउंटर और संपत्ति कुर्की की मांग

कोरिया.

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर मामले को लेकर जूदेव परिवार के सदस्य एवं भाजपा नेता विक्रमादित्य सिंह जूदेव बैकुंठपुर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना पर शोक व्यक्त किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान विक्रमादित्य सिंह जूदेव ने कहा कि इस घटना से पूरा क्षत्रिय समाज शोक में है। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

एनकाउंटर और मौत के बदले मौत की मांग
साथ ही उन्होंने आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की मांग भी की और कहा कि जब तक ऐसी कार्रवाई नहीं होती, तब तक समाज शांत नहीं बैठेगा। इस दौरान उन्होंने अपने बयान में आरोपियों के एनकाउंटर और ‘मौत के बदले मौत’ जैसी मांग भी रखी।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत

जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत – मुख्यमंत्री साय

रायपुर 
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय “रामगढ़ महोत्सव-2026” के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति “मेघदूतम्” की रचना की थी, जिसका आरंभ “आषाढस्य प्रथमदिवसे” से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान “हाथीपोल” नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, TMC के अकाउंट फ्रीज मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार

कलकत्ता

कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर अर्जेंट सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य कर रहे हैं. उन्होंने ममता गुट की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी, यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार सुनवाई की जाएगी। ममता गुट के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट को बताया कि टीएमसी के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट और लेन-देन नहीं हो पा रहा है. वकील ने कहा कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी रकम फंसी हुई है. उन्होंने इस संकट को देखते हुए कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की, लेकिन अदालत ने उनकी ये मांग मानने से साफ इनकार कर दिया।

बैंक खातों में 440 करोड़ जमा
तृणमूल कांग्रेस के जिन तीन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कुछ विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।विधायकों ने अपनी शिकायत में बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए सभी लेन-देन की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का आग्रह किया कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, जैसे ‘कट मनी’ की वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों से अर्जित रकम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि फलता के चुनाव के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें लोगों को कटमनी वापस की गई थी। दरअसल सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए वसूला गया धन कट मनी कहा जाता है। आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार में धड़ल्ले से लोगों से कटमनी वसूली जाती थी।

तय समय से होगी सुनवाई
सोमवार को मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग किये जाने पर अदालत ने बैंक, पुलिस और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फिर से त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. न्यायमूर्ति ने दोहराया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी. इस मामले में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि त्वरित सुनवाई संभव नहीं है, तो कम से कम गुरुवार को पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया जाये। 

बागी विधायकों की शिकायत पर हुई कार्रवाई
टीएमसी के इन बैंक खातों पर ये कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है. इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। 

इन बागी विधायकों ने खातों में जमा करोड़ों रुपयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पैसे के सोर्स की जांच की जाए. वे पता लगाना चाहते हैं कि ये पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत काम से आया है. उन्हें शक है कि ये पैसा कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी और किसी बड़े घोटाले का हो सकता है। 

धान महोत्सव में किसानों की बल्ले-बल्ले! CM डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी से जारी करेंगे ₹2.82 करोड़

सिवनी 
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 1 जुलाई का दिन खास रहने वाला है. सिवनी में आयोजित होने वाले धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव हजारों किसानों को आर्थिक सौगात देंगे. कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए कोदो और कुटकी की खेती करने वाले 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। 

सरकार की ओर से यह राशि 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दी जा रही है. इसका उद्देश्य श्रीअन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हों और उनकी आय में भी इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि इस पहल से प्रदेश में कोदो और कुटकी के उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 3,941 कोदो एवं कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।यह राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।

सिवनी में धान महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
धान महोत्सव का आयोजन सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

कलेक्टर नेहा मीना की निगरानी में प्रशासन ने हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सभी जरूरी सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके। 

विकास परियोजनाओं की भी देंगे सौगात
धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सिर्फ किसानों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं देंगे, बल्कि जिले को कई विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी. कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. इससे जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। 

सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देना भविष्य की कृषि नीति का अहम हिस्सा है. ऐसे में धान महोत्सव किसानों के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का मंच भी साबित हो सकता है। 

वर्ष 2026 ‘कृषक कल्याण वर्ष’: आयोजित होगा धान महोत्सव
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन की शुरुआत के मौके पर कार्यक्रम स्थल पर ‘धान महोत्सव’ का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में अच्छी बारिश, बेहतर पैदावार और अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना के साथ ही किसानों को आधुनिक तरीके से धान की बोनी करने का संदेश दिया जाएगा।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी संख्या में जुटेंगे किसान
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह, अपर कलेक्टर सीएल चनाप सहित सभी संबंधित विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग, पेयजल, बिजली और स्वच्छता की पुख्ता व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले के किसानों और आम जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है।

प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख आकर्षण होंगे—

    धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र
    प्राकृतिक एवं प्रमाणित बीजों की प्रदर्शनी
    कस्टम हायरिंग सेंटर
    प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल
    जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद
    पीएमएफएमई योजना के उत्पाद
    आम की विभिन्न उन्नत किस्में
    स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद
    लघु वनोपज आधारित उत्पाद
    स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद
    पोषण आहार प्रदर्शनी
    कृषिका एप की जानकारी

प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों और विकास उपलब्धियों की जानकारी किसानों एवं नागरिकों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रशासन ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

 

42 साल में पहली बार इतना सूखा बरगी डैम, जलस्तर इतना गिरा कि दिखने लगी तलहटी; विशेषज्ञों ने जताई चिंता

जबलपुर 
बरगी बांध में 42 सालों बाद इतना पानी कम हो गया है कि बांध के तल से अनोखी चीजें निकलकर सामने आ रही है. कहीं, अचानक पुरानी नाव सामने आने से चर्चा का विषय बनी हुई है तो कहीं मंदिर दिखाई देने से लोग हैरान हैं. वहीं, बरगी बांध के दक्षिणी तट का गेट पूरी तरह ऊपर दिखाई देने लगा है, जिसे पिछले 42 सालों में लोगों ने जल भराव के बाद कभी नहीं देखा था। 

बरगी बांध के बुरे हाल, कभी नहीं सूखा इतना पानी
जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने इस विशाल डैम में रोजाना 5 सेंटीमीटर के करीब पानी कम हो रहा है. बरगी बांध का कुछ पानी गर्मी की वजह से उड़ जाता है, तो वहीं कुछ हिस्सा नर्मदा नदी में प्रवाह बनाए रखने, पावर प्लांट चलाने और नहरों के लिए निरंतर प्रवाहित किया जाता है. खरीफ के मौसम में किसानों को धान की खेती के लिए नहरों से पानी भेजा जाता है, जिससे अब बांध का पानी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी और बांध के प्रभारी राजा राम रोहित ने बताया, ”बांध में रोज 5 सेंटीमीटर पानी की कमी आ रही है और बांध का वर्तमान जलस्तर समुद्र तल से 407.45 मीटर है. इसके अनुसार बांध में अब मात्र 5.5 मीटर पानी ही शेष बचा है। 

आज तक बांध का ऐसा हाल नहीं देखा
बरगी नगर में रहने वाले स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने कहा, ” बचपन से ही बरगी नगर में ही रहे हैं लेकिन बांध में इतना कम पानी पहले कभी नहीं देखा. बरगी बांध का पानी कम होने के साथ ही बांध के कुछ ऐसे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं, जो पहले लोगों ने कभी नहीं देखे. बरगी बांध में बायीं ओर से नहर से पानी नरसिंहपुर जिले के लिए जाता है और दायीं ओर पानी को सतना तक ले जाने की तैयारी है. फिलहाल यह पानी कटनी जिले तक जा रहा है। 

पहली बार 407 मीटर तक गिरा बरगी डैम का जलस्तर
बरगी डैम को फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, वहीं इसकी दायीं नहर का गेट लगभग 409 मीटर पर लगा हुआ है और डैम का पानी कभी 408 मीटर के नीचे नहीं जाता था. लेकिन इस साल यह पानी 407 मीटर के स्तर तक गिर गया है. इसकी वजह से बांध की दायीं ओर का कैनाल गेट पानी के ऊपर नजर आ रहा है. नीरज मिश्रा ने कहा, ” बरगी बांध में पहली बार पानी 42 साल पहले भरा गया था और 42 साल में यह पहला मौका है जब यह गेट पानी के बाहर आया है। 

इतना बड़ा है डैम का कैनाल गेट
पानी से बाहर नजर आ रहा बरगी डैम का कैनाल गेट लगभग 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट ऊंचाई का एक भीमकाय स्ट्रक्चर है, जिसमें 50 फीट हिस्सा हमेशा पानी में डूबा रहता है. बांध के इस हिस्से से जो पानी छोड़ा जाता है उससे दायीं नहर में पानी जाता है, यह नहर किसी नदी से कम नहीं है. इस हिस्से में लोहे के तीन बड़े गेट हैं. जब इससे पानी छोड़ा जाता है तो दायीं नहर में लगभग 20 फीट पानी होता है. यह इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना है. इसी पानी को जबलपुर से कटनी और कटनी के आगे स्लीमनाबाद टनल से होते हुए सतना तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। 

बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है।

15 साल में सबसे खराब स्थिति
बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था।

जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश
सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है।

बिजली उत्पादन पर असर
कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है।

डैम के तल में नजर आया मंदिर और पुरानी बोट
बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में पानी कम होने की वजह से एक मंदिर भी चर्चा में है, जो हमेशा पानी में डूबा रहता था. इस बार ये मंदिर पानी के बाहर नजर आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ बरगी बांध के पुनर्वास विभाग की एक नाव भी चर्चा में है, जो लावारिस छोड़ दी गई थी और पानी कम होने की वजह से अब दिख रही है. बरगी बांध में अचानक इतना पानी कम क्यों हुआ यह चर्चा और जांच का विषय है. जांच ये होनी चाहिए कि बांध का पानी केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हुआ है या कोई लापरवाही बरती गई है. क्योंकि बांध से इस तरह पानी कम होना भविष्य में संकट की ओर इशारा कर रहा है। 

पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट
बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है।

लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध
जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि बांध का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। नर्मदा के कई घाटों पर चट्टानें दिखाई देने लगी हैं और नदी का पानी भी पहले की तुलना में कम व गंदला नजर आ रहा है।

अल नीनो का असर भी माना जा रहा कारण
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो मध्य प्रदेश के कई जलाशयों में जल संकट गहरा सकता है और इसका असर बिजली उत्पादन, सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इक्का ट्रेलर लॉन्च पर भावुक हुए सनी देओल, कहा मैं हमेशा पापा का बेटा हूं

मुंबई में 29 जून को नेटफ्लिक्स की फिल्म इक्का का ट्रेलर लॉन्च किया गया. इस मौके पर जब फिल्म के ट्रेलर में दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र को ट्रिब्यूट दिया गया. ट्रेलर में सनी को “धर्मेंद्र का बेटा, सनी देओल” कहकर क्रेडिट किया गया. इस बारे में बात करते हुए सनी काफी भावुक हो गए.

सनी देओल ने कहा- मैं हमेशा पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा
जब सनी देओल से पूछा गया कि मेकर्स ने उन्हें “धर्मेंद्र का बेटा” कहकर क्यों क्रेडिट किया, तो उन्होंने बहुत ही भावुक अंदाज में कहा, “मैं हमेशा अपने पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा… बस इससे आगे कुछ नहीं.”

‘इक्का’ ट्रेलर में दिखा कोर्टरूम ड्रामा
फिल्म ‘इक्का’ का ट्रेलर एक इंटेंस कोर्टरूम ड्रामा की झलक दिखाता है, जिसमें सनी देओल एक वकील अर्जुन मेहरा का किरदार निभा रहे हैं. कहानी में वह अपने अतीत के एक व्यक्ति का केस लड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिसे अक्षय खन्ना निभा रहे हैं. फिल्म में तिलोत्तमा शोम एक सख्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की भूमिका निभा रही हैं. जबकि दिया मिर्जा, सनी की पत्नी का रोल निभा रही है. इसके अलावा फिल्म में संजेदा शेख, शिशिर शर्मा और आकांक्षा रंजन कपूर भी हैं.

फिल्म को लेकर डायरेक्टर ने क्या कहा?
फिल्म के डायरेक्टर सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने बताया कि ‘इक्का’ सिर्फ एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि इसमें रिश्तों, इमोशंस और न्याय की जटिलताओं को भी दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ इस कहानी को पर्दे पर लाना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा. फिल्म की कहानी इक्का को अल्थिया कौशल और मयंक तिवारी ने लिखा है. यह फिल्म 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

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