उज्जैन रामघाट पर अनोखी पहल, तीर्थ पुरोहित दक्षिणा में मांग रहे शिप्रा को स्वच्छ रखने का संकल्प

उज्जैन 

शिप्रा सहित देशभर के नदी-तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए रामघाट के तीर्थ पुरोहितों ने अनूठा नवाचार शुरू किया है। अब यहाँ पूजा-आरती के बाद श्रद्धालुओं से नकद दक्षिणा के बजाय सिर्फ नदी स्वच्छता का संकल्प मांगा जा रहा है।
हर शाम होने वाली शिप्रा सांध्य आरती के समापन पर पुरोहित भक्तों को नदी स्वच्छ रखने का वचन दिलाते हैं। श्री क्षेत्र तीर्थ पुरोहित पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने बताया कि मात्र 51 दिन में करीब 2.50 लाख लोगों को यह संकल्प दिलाया जा चुका है।

पुरोहितों का मानना है कि यदि यही जनभागीदारी देश के सभी धार्मिक घाटों पर लागू हो, तो बिना किसी भारी-भरकम बजट के जल संरचनाएं स्वच्छ हो सकेंगी।

वैष्णव तिलक और आभूषण अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया।

भगवान महाकाल का जटाधारी स्वरूप में चंदन, वैष्णव तिलक एवं आभूषण अर्पित कर राजाधिराज स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।

इससे पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया। मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान कर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया।

श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पित करने के पश्चात भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से निर्मित हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्प धारण कर भगवान महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। इसके बाद फल एवं मिष्ठान का भोग लगाया गया।

भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

 

मोबाइल फटने की अफवाह बनी मौत की वजह, मुरैना में चलती ट्रेन से कूदे यात्री; 4 की दर्दनाक मौत

मुरैना
 प्रदेश के मुरैना जिले के हेतमपुर और राजस्थान के  धौलपुर रेल खंड के बीच रविवार शाम खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद फैली आग की अफवाह से घबराए यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। इसके बाद कुछ यात्री ट्रेन से कूदकर समीप की दूसरी रेल लाइन पर आ गए। इसी बीच आई पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे समेत कुल चार की दर्दनाक मौत हो गई।  

मृतकों में तीनों महिलाएं आगरा की 
मृतकों में आफरीन पत्नी नदीम खान (35) निवासी सुल्तानगंज की पुलिया, आगरा, उनका चार वर्षीय बेटा असद खान, शकुंतला पत्नी भूरी सिंह परमार (60) निवासी कचहरा थोक, रुनकता, आगरा तथा विरमा देवी पत्नी गिरधारी गिरि (60) निवासी गेसोरा, थाना महाजन, जिला बीकानेर (राजस्थान) शामिल हैं।

जनरल कोच से हुई अलार्म चेन पूलिंग
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रेन के एक कोच में किसी यात्री का चार्जिंग पर लगा मोबाइल फट गया था। इस कारण आग की अफवाह फैली। हादस रविवार शाम 4:15 बजे उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड पर हुआ। गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के जनरल कोच (इंजन से दूसरा कोच) में किसी ने अलार्म चेन पूलिंग किया था। इस कारण ट्रेन सेक्शन में रुक गई थी। ट्रेन रुकने के दौरान कुछ यात्री नीचे उतरकर समीपवर्ती रेलवे लाइन पर चले गए। इसी दौरान अप दिशा से आ रही गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से यात्रियों के हताहत होने की सूचना मिली। 

चीख पुकार मच गई
घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और मुरैना पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया तथा मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। 

मोबाइल ब्लास्ट की चर्चा से फैली दहशत
घटना उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड की है. गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रविवार शाम करीब 4:15 बजे हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच चल रही थी. इसी दौरान एक कोच में मोबाइल फटने जैसी घटना की चर्चा फैल गई. देखते ही देखते यात्रियों में डर का माहौल बन गया. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि किसी यात्री ने अलार्म चेन पुलिंग कर दी, जिससे ट्रेन बीच रास्ते में रुक गई. ट्रेन रुकते ही कई यात्री जल्दबाजी में नीचे उतर गए। 

दूसरी लाइन पर पहुंच गए यात्री
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन से उतरने के बाद कुछ यात्री पास की दूसरी रेलवे लाइन की ओर चले गए. उसी समय दूसरी तरफ से गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस तेज गति से वहां से गुजर रही थी. ट्रैक पर मौजूद यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और वे ट्रेन की चपेट में आ गए. इस हादसे में तीन महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। 

राहत और बचाव कार्य शुरू
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP), स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया और प्रभावित यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना दी.  रेलवे अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. मोबाइल ब्लास्ट की चर्चा के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच र रहा है। 

दिल्ली-मुंबई मार्ग पर यातायात प्रभावित
इस हादसे के चलते दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए रेल यातायात प्रभावित रहा। कई ट्रेनों को रास्ते में रोका गया, जबकि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं। बाद में ट्रैक को क्लियर कर रेल यातायात सामान्य किया गया।

मोड़ होने से सामने से आ रही ट्रेन नहीं दिखी : डीआरएम
झांसी रेल मंडल के डीआरएम अनुरुद्ध कुमार के अनुसार, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां रेलवे ट्रैक पर मोड़ होने के कारण यात्रियों को सामने से आ रही ट्रेन दिखाई नहीं दी। प्रारंभिक जांच में हादसे की मुख्य वजह आग लगने की अफवाह के बाद हुई चेन पुलिंग और यात्रियों का ट्रैक पर उतरना सामने आया है। यह हादसा केवल एक रेल दुर्घटना नहीं, बल्कि अफवाह, दहशत और जल्दबाजी का दर्दनाक परिणाम है, जिसने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रेन में आग लगने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का मानना है कि अफवाह के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस और रेलवे की टीमें सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

US का बड़ा AI प्रतिबंध! सबसे ताकतवर मॉडल पर लगा बैन, भारत समेत कई देशों पर क्या होगा असर?

 नई दिल्ली/वाशिंगटन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और दुनियाभर की सरकारों को चौंका दिया है। अमेरिका ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए मशहूर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे पावरफुल एआई मॉडल्स- क्लॉड फैबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5) का एक्सेस भारतीयों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए तुरंत रोक दे। इस सरकारी आदेश के बाद कंपनी को मजबूरन ग्लोबल लेवल पर इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है।

अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है और गैर अमेरिकियों के लिए पावरफुल AI मॉडल के एक्सेस को बैन कर दिया है. यह नियम एंथ्रोपिक के सबसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 पर लागू होगा. अमेरिका ने एंथ्रोपिक के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश दिए हैं, जो इन मॉडल्स पर लागू होंगे। 

दरअसल, अमेरिकी सरकार के एक विभाग ने पावरफुल एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 के ग्लोबल एक्सेस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसकी जानकारी शनिवार को मिली. यह बैन अमेरिका के बाहर के सभी यूजर्स, जिसमें एंथ्रोपिक के विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं। 

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के मुताबिक, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां हैं, जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं. हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। 

अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
AI जगत में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने सीधे AI सॉफ्टवेयर की पहुंच पर रोक लगाई है। यह कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक संकेत है कि दुनिया में एआई को लेकर नियम कितनी तेजी से बदल रहे हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं:

    12 जून को अमेरिकी प्रशासन ने एंथ्रोपिक को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक (चाहे वह अमेरिका के अंदर हो या बाहर) इन नए मॉडल्स का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश इतना व्यापक था कि इसमें कंपनी के अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल थे। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एंथ्रोपिक के पास इन दोनों मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। हालांकि, यूजर्स कंपनी के अन्य पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल पहले की तरह कर सकेंगे।

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के दौरान फैबल 5 (Fable 5) मॉडल में कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ साझा की गई। अमेरिकी अधिकारियों को यह डर सताने लगा कि इस सिस्टम के सुरक्षा घेरे को आसानी से तोड़ा जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो इसका इस्तेमाल सरकारी नेटवर्क्स, बैंकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर खतरनाक साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।

    कंपनी ने सरकार के इस फैसले को असंगत बताया है। एंथ्रोपिक का तर्क है कि जिन कमजोरियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से ज्ञात हैं और बाजार में मौजूद अन्य एआई मॉडल्स भी उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लॉन्च से पहले अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन मॉडल्स की हफ्तों तक कड़ी टेस्टिंग की थी। एंथ्रोपिक इसे एक ‘गलतफहमी’ मान रही है और अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की कोशिशों में जुटी है।

    यह बैन रातों-रात नहीं लगा है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने पहले अपने एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और स्वचालित हथियारों के लिए करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को “सप्लाई-चेन रिस्क” तक घोषित कर दिया था। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

विदेशी यूजर्स के लिए सेवा पूरी तरह बंद
रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक के पास ऐसा कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है जिससे हर उपयोगकर्ता की राष्ट्रीयता की सटीक पहचान की जा सके। इसी कारण कंपनी को अमेरिका के बाहर के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इन मॉडलों की पहुंच बंद करनी पड़ी है।

इस फैसले को सोशल मीडिया पर टेक उद्योग का ‘9/11’ तक कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक एआई इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी कंपनी के अत्याधुनिक और खुले बाजार में उपलब्ध मॉडल को अचानक वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है।

साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ जैसे उन्नत मॉडल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का विश्लेषण करने, मालवेयर जांचने, सैन्य रणनीति और जैविक अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग किए जा सकते हैं।

यदि कोई एआई मॉडल सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने और सिस्टम को तोड़ने के तरीके सुझाने में सक्षम हो जाए, तो वह साइबर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया है।

भारत के लिए दो बड़े सबक
कोरोवर. एआई के फाउंडर और सीईओ अंकुश सभरवाल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस फैसले से सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान खुद एंथ्रोपिक और अमेरिका को होगा। उनका कहना है कि जब किसी कंपनी का सबसे उन्नत सॉफ्टवेयर वैश्विक बाजार में उपलब्ध नहीं रहेगा, तो उसके व्यापार और निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक उद्योग में बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और अन्य एशियाई मूल के डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे में पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौती भी है। अंकुश सभरवाल के अनुसार, भारत के लिए इससे दो महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। पहला, भारतीय स्टार्टअप्स को केवल विदेशी एआई एपीआई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि भविष्य में जियो-ब्लॉकिंग या एक्सपोर्ट बैन लागू होते हैं, तो भारतीय कंपनियों का काम प्रभावित हो सकता है।

दूसरा, भारत को केवल विदेशी एआई तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय अपना स्वदेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसके लिए ‘इंडिया एआई मिशन’, घरेलू एलएलएम और स्वदेशी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई गई है।

जोहो फाउंडर ने दी चेतावनी
अब तक अमेरिका सिर्फ एआई चिप्स और हार्डवेयर (जैसे सेमीकंडक्टर) के निर्यात को रोकता था, लेकिन यह पहली बार है जब सीधे ‘एआई सॉफ्टवेयर’ पर रोक लगाई गई है। जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इसे भारत के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है।” वेम्बू का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। अब वक्त आ गया है कि देश अपनी खुद की सॉवरेन एआई (Sovereign AI) क्षमताएं विकसित करे और घरेलू रिसर्च व ओपन-सोर्स मॉडल्स पर भारी निवेश करे।

आगे क्या होगा?
फिलहाल, एंथ्रोपिक सरकारी आदेश का पालन कर रही है। लेकिन इस घटना ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में एआई को सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की तरह एक ‘रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा माना जाएगा। ऐसे में, जो देश अपनी खुद की एआई तकनीक विकसित नहीं करेंगे, वे भविष्य की डिजिटल दौड़ में बहुत पीछे छूट सकते हैं। 

ईरान-अमेरिका युद्धविराम से शेयर बाजार में जश्न, सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी ने लगाई लंबी छलांग

मुंबई 

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की खबर का असर अब दुनिया भर के बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारतीय शेयर बाजार ने भी आज यानी 15 जून को दमदार शुरुआत की है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में भी शानदार तेजी देखने को मिली. ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मजबूत संकेतों ने निवेशकों का जोश हाई कर दिया है। 

सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी
ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों के बीच आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की.सुबह करीब 9:17 बजे BSE सेंसेक्स 1,154.98 अंक यानी 1.53 फीसदी की तेजी के साथ 76,682.94 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.वहीं 9:18 बजे NSE निफ्टी 50 इंडेक्स 341.30 अंक यानी 1.44 फीसदी चढ़कर 23,964.20 के स्तर पर पहुंच गया.बाजार में शुरुआती घंटों से ही खरीदारी का माहौल देखने को मिला। 

चौतरफा खरीदारी से बाजार में रौनक, सभी सेक्टर्स में छाई हरियाली
भारतीय शेयर बाजार के ब्रॉडर मार्केट्स में शानदार तेजी देखने को मिल रही है. बाजार खुलने के साथ ही हर तरफ खरीदारी का माहौल है, जिसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) और निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) इंडेक्स 1.3-1.3 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. बीएसई (BSE) के तमाम सेक्टोरल इंडेक्स पूरी तरह हरे निशान में रंगे हुए हैं. सेंसेक्स, मिडकैप, स्मॉलकैप से लेकर बैंकिंग इंडेक्स तक में 1.3% से लेकर 2% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया जा रहा है, जो बाजार में निवेशकों के तगड़े भरोसे और चौतरफा हरियाली को दिखाता है। 

 

    निफ्टी रियल्टी (Nifty Realty) में सबसे ज्यादा 2.59 प्रतिशत का उछाल आया.
    निफ्टी सीमेंट (Nifty Cement) 2.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
    निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) में 1.92 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.
    इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.85% ), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1.83%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.77% )  बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं.

दूसरी ओर, आज हेल्थकेयर शेयरों पर थोड़ा दबाव दिखा, जिसमें निफ्टी फार्मा (Nifty Pharma) 0.17 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.05 प्रतिशत टूटकर कारोबार करते दिखे.

अमेरिका-ईरान समझौते से निवेशकों का बढ़ा भरोसा
बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की घोषणा हुई है.निवेशकों का मानना है कि इस समझौते से ग्लोबल टेंशन कम होगी और एनर्जी मार्केट पर दबाव घटेगा. यही वजह है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में राहत की लहर देखने को मिल रही है। 

पहले दिए संकेत, अब किया ऐलान 
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान के साथ जल्द शांति समझौता होने के संकेत दे दिए थे और अब इसका ऐलान भी कर दिया है. Donald Trump ने यूएस-ईरान शांति समझौते का ये ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट पर पोस्ट के जरिए किया।  
  
उन्होंने कहा कि, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है, सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी देता हूं.’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो, तेल की सप्लाई शुरू होने दो!’

एशियाई बाजारों में भी दिखा जबरदस्त जोश
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद एशियाई शेयर बाजारों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली। 

    जापान का निक्केई इंडेक्स 4.68 फीसदी बढ़कर 69,108.03 पर पहुंच गया। 

    दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.64 फीसदी की तेजी के साथ 8,581.47 पर कारोबार करता दिखा। 
    ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 1.44 फीसदी चढ़कर 8,930.6 पर पहुंच गया। 
    न्यूजीलैंड का NZX 50 इंडेक्स 0.28 फीसदी बढ़कर 13,431.14 पर पहुंचा, जबकि सिंगापुर का STI 0.76 फीसदी मजबूत होकर 5,025.8 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। 

ट्रंप के ऐलान के बाद WTI और ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है.वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे.इस घोषणा के बाद तेल बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। 

युद्ध खत्म होने और तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली.जुलाई डिलीवरी वाले WTI क्रूड फ्यूचर्स 4.77 फीसदी गिरकर 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए.वहीं अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी टूटकर 83.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिसे बाजार के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। 

TMC के बागी सांसद जिस NCPI में करने जा रहे विलय, जानिए कौन है इसका संस्थापक और बंगाल से क्या है कनेक्शन?

कोलकाता 
 राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले किसी व्यक्ति के लिए भी ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) का नाम सुनना लगभग नामुमकिन है। अब यह लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है। एक चौंकाने वाली घटनाक्रम में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सूचित किया कि उनके समूह का विलय NCPI के साथ हो गया है। यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रजिस्टर्ड है और जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। बागी सांसदों ने कहा कि वे एनसीपीआई और BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन करेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि अपने अधिकारों को बचाने के लिए, राजनीतिक दल बदलने वालों को नकारें NCPI के नारों में से एक था। इस विलय से यह कम जानी-पहचानी पार्टी सत्ताधारी गठबंधन में BJP (240) के बाद और TDP (16) व JDU (12) से आगे दूसरा सबसे बड़ा गुट (20 लोकसभा सदस्य) बन जाएगी।

चुनाव आयोग में करेंगे टीएमसी के चिन्ह पर दावा
टीएसी के बागी सासंदों ने लोकसभा स्पीकर से उन्हें ट्रेज़री बेंच (सत्ता पक्ष की सीटों) पर जगह देने का अनुरोध किया, क्योंकि अब तक वे संसद में TMC के सदस्य के रूप में विपक्षी दलों के साथ बैठते थे। सुदीप बंद्योपाध्याय छह बार के सांसद होने के नाते इस अलग हुए गुट के सबसे अनुभवी सदस्य हैं। उन्होंने असली TMC होने का दावा करने के लिए चुनाव आयोग जाने की संभावना भी खुली रखी है।

TMC बागियों के पास ज़रूरी 2/3 संख्या से 1 सांसद ज्यादा है
स्पीकर ओम बिरला के साथ बैठक के बाद, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह विलय दलबदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) की ज़रूरतों के अनुसार किया गया है। यह कानून पार्टी में विभाजन को मान्यता नहीं देता है। एक ऐसा बिंदु जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के मामले में भी जोर दिया था। हालांकि एक पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के दूसरी पार्टी में विलय के लिए अपवाद की अनुमति देता है। 20 सांसदों के साथ, TMC के बागी गुट के पास ज़रूरी दो-तिहाई संख्या से एक सांसद ज़्यादा है, क्योंकि लोकसभा में TMC के कुल 28 सदस्य हैं।

हावड़ा में रजिस्टर्ड, पर त्रिपुरा में मौजूदगी
NCPI चुनाव आयोग (EC) के पास रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। यह उन 2,049 पार्टियों में से एक है जो मान्यता प्राप्त करने के लिए ज़रूरी चुनावी प्रदर्शन के स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं। NCPI को जनवरी 2023 में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के साथ रजिस्टर किया गया था। यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रजिस्टर्ड है, लेकिन इसने मुख्य रूप से त्रिपुरा में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाने की कोशिश की है।

श्वेली कुंडू राष्ट्रीय अध्यक्ष
एनसीपीआई का आधिकारिक चुनाव चिह्न सात स्ट्रोक वाला इंक पेन का निब है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी शुरुआत की। पार्टी ने कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे, लेकिन बहुत कम वोट मिले और यह चुनाव पर कोई खास असर नहीं डाल पाई। इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्वेली कुंडू हैं।

हावड़ा में तरुण कुमार रॉय पार्टी चीफ
2023 में बनी इस पार्टी का चुनाव चिह्न सात किरणों वाली पेन की निब है और त्रिपुरा व मेघालय में इसकी कुछ मौजूदगी है। हालांकि, यह कभी भी ज़्यादा लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाई और इसे बड़ी पार्टियों के साथ-साथ TIPRA और IPFT जैसे क्षेत्रीय दलों से भी नकारा गया है। त्रिपुरा में शांतनु साहा पार्टी का कामकाज संभालते हैं, जबकि हावड़ा के तरुण कुमार रॉय कथित तौर पर इसके कामकाज में शामिल हैं।.

अभिषेक बनर्जी की गुहार
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है।

10 जून की तारीख वाले इस पत्र को पहले ईमेल के जरिए भी भेजा गया था, जिसमें कहा गया है कि दलबदल विरोधी कानून इस तरह के विभाजन की इजाजत नहीं देता। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक द्वारा किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बागी सांसदों की ओर से किसी भी तरह के पत्राचार या अनुरोध पर कोई फैसला करने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए बनर्जी ने तर्क दिया कि 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव उपलब्ध नहीं है। वर्तमान कानूनी ढांचा किसी एक राजनीतिक दल की पहचान को मान्यता देता है न कि उसके भीतर मौजूद विरोधी गुटों को अलग अलग मान्यता देता है।

बनर्जी ने यह भी कहा कि विलय के किसी भी दावे के लिए राजनीतिक पार्टी का विलय और दो-तिहाई विधायकों का समर्थन, दोनों जरूरी हैं और कानून के तहत इनमें से सिर्फ एक शर्त पूरी करना काफी नहीं होगा। लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद आजाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह साफ कर दिया है कि एक राजनीतिक पार्टी में विभाजन मंजूर नहीं है।

NCPI पार्टी क्या है?
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध रजिस्टर्ड, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है जिसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही अधिक वोट मिले।

पार्टी का इतिहास
उपलब्ध चुनाव आयोग और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NCPI को 20 जनवरी 2023 को एक Registered Unrecognised Political Party (RUPP) के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था। पार्टी का रजिस्ट्रेशन एड्रेस पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में बताया जाता है। लेकिन इसने अपनी शुरुआती चुनावी गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा में की थीं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने भाग लिया, लेकिन उसे कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली। जून 2026 में पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने इसमें विलय की घोषणा की। इस घटनाक्रम से NCPI की संसदीय उपस्थिति काफी बढ़ गई।

संस्थापक और नेतृत्व
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में उत्तिया कुंडू (Uttiya Kundu) को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है। जबकि पार्टी की कोषाध्यक्ष (Treasurer) श्यूली कुंडू (Shewly Kundu) हैं। हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में पार्टी के वर्तमान नेतृत्व का उल्लेख मिलता है। लेकिन संस्थापक के रूप में किसी एक व्यक्ति का स्पष्ट और आधिकारिक उल्लेख सभी स्रोतों में उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्टी के गठन और संचालन में कुंडू परिवार की प्रमुख भूमिका रही है।

विचारधारा और उद्देश्य
NCPI खुद को राष्ट्रवादी और नागरिक-केंद्रित राजनीति से जोड़ती है। शुरुआती चरण में इसका प्रभाव मुख्य रूप से बंगाली भाषी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक सीमित रहा। लेकिन 2026 में NDA को समर्थन देने की घोषणा के बाद इसकी राजनीतिक पहचान और चर्चा बढ़ी है।

त्रिपुरा चुनाव में तीन सीटों पर लड़ी थी एनसीपीआई
2023 के त्रिपुरा चुनावों में, NCPI ने तीन उम्मीदवार उतारे थे ऊनाकोटी ज़िले के कैलाशहर से जहांगीर अली, चावमानु से बरजेदा त्रिपुरा और अंबासा से कृष्ण कुमार देबबर्मा। इसके बावजूद, यह पार्टी लगभग न के बराबर ही रही है। अब अचानक, NCPI छह महिला सांसदों (सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया, काकोली घोष दस्तीदार और माला रॉय) और मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम सांसदों (खलीलुर रहमान, अबू ताहिर और यूसुफ पठान) को NDA में शामिल करेगी।

भूपेंद्र यादव के आवास पर मिले थे बागी सांसद
बागी सांसदों ने पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर मुलाकात की थी और उनके साथ BJP सांसद निशिकांत दुबे भी शामिल हुए, जिन्होंने TMC को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। सूत्रों के मुताबिक, 19 सांसद व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि एक सदस्य ने अपना समर्थन देने का वादा किया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में TMC के और राज्यसभा सदस्य इस्तीफा दे सकते हैं। अब तक तीन सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं।

टीएमसी-एनसीपीआई विलय के बाद क्या होगा
एक बार जब लोकसभा स्पीकर इस विलय को मान्यता दे देंगे, तो NCPI के पास 20 सांसद हो जाएंगे। यह BJP, कांग्रेस (98), SP (37) और DMK (22) के बाद पांचवां सबसे बड़ा समूह होगा। NCPI के समर्थन से NDA की संख्या 361 (लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा) के करीब पहुंचकर 313 हो जाएगी। BJP यह आंकड़ा हासिल करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, क्योंकि ‘सुपर मेजॉरिटी’ न होने के कारण महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन (जिससे सदन में सीटों की अधिकतम संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाती) का बिल गिर गया था।

 

बस्तर देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर के आर्थिक विकास और लघु वनोपजों के समुचित उपयोग के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक का विमोचन

रायपुर 
नक्सलवाद का दंश झेलते-झेलते बस्तर चार दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब नक्सलवाद की समाप्ति के साथ केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाओं सहित सभी आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पूर्व ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण किए हैं। उनके नेतृत्व में देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली सफलता भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया।

उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और उत्साह का संचार करता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में माओवाद के विरुद्ध सामूहिक संकल्प विकसित हुआ। सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा, आम जनता खुलकर माओवाद के विरोध में सामने आई और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। इस संघर्ष में लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर आए थे, जहां उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव रंजन प्रसाद और सुरचना नायडू ने यह पुस्तक ऐसे समय में लिखी है, जब माओवाद की समाप्ति हो चुकी है। इस दृष्टि से यह पुस्तक और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। समय के साथ स्मृतियां धुंधली हो जाती हैं और घाव भरने लगते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि माओवाद के कठिन दौर और उससे मुक्ति के संघर्ष को दस्तावेज़ी रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख सकें।

उन्होंने कहा कि जब भावी पीढ़ियां इस विषय पर लिखी पुस्तकों को पढ़ेंगी, तब उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि माओवाद से मुक्ति के लिए समाज और सुरक्षा बलों ने कितना कठिन संघर्ष किया तथा कितने जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह पुस्तक उन्हें यह भी बताएगी कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और लोगों का विश्वास केवल संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही जीता जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि लेखकों ने अत्यंत गंभीर और व्यापक शोध किया है। उन्होंने बस्तर समाज के विभिन्न वर्गों, आत्मसमर्पित नक्सलियों तथा नक्सलवाद को निकट से देखने और झेलने वाले लोगों से संवाद कर महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन किया है। पुस्तक यह उजागर करती है कि किस प्रकार माओवादी नेतृत्व ने अपने कैडर का विस्तार किया और अनेक परिवारों पर संगठन में सदस्य भेजने का दबाव बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखकों ने अपने शोध में जिन पूर्व नक्सलियों से बातचीत की, उनमें लगभग 80 प्रतिशत लोग अशिक्षित या केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षित पाए गए। जिस आयु में उनके हाथों में कलम होनी चाहिए थी, उस आयु में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा से वंचित रखा, उन्हें परिवार और समाज से दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर पर पहले भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें माओवाद का वास्तविक चेहरा उजागर करने के साथ-साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का भी प्रभावी चित्रण किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब बस्तर के नवनिर्माण का समय है। राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए शासकीय योजनाओं का लाभ सैचुरेशन मोड में लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जहां पहले सुरक्षा कैंप स्थापित थे, वहां अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं, जो शासकीय सेवाओं, कौशल विकास और उद्यमिता के केंद्र बनेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से अगले तीन वर्षों में इस आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। सहकारिता के माध्यम से बस्तर को अग्रणी संभाग बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जनजातीय परिवारों को गाय अथवा भैंस उपलब्ध कराकर कृषि के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उन्हें बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए बस्तर में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है तथा अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से यहां की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने पुस्तक के लेखक राजीव रंजन प्रसाद और सुरचना नायडू को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक को बताया वर्षों की मेहनत का परिणाम

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक वर्षों की मेहनत और गहन अध्ययन का परिणाम है। यह पुस्तक किसी वातानुकूलित कक्ष में बैठकर नहीं लिखी गई, बल्कि बस्तर के दूरस्थ जंगलों तक पहुंचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर और जमीनी वास्तविकताओं को समझकर तैयार की गई है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा – माओवाद पेट से नहीं, दिमाग से आया था

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक आवश्यकता से नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था। इसका उद्देश्य बंदूक की नली के बल पर सत्ता स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

इस दौरान उन्होंने बाबा नागार्जुन की कविता का उल्लेख भी किया। शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद बस्तर में मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। देवगुड़ियों में पूजा-पाठ पुनः प्रारंभ हो गया है।  राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है तथा इसके लिए पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने भी पुस्तक के लेखक राजीव रंजन प्रसाद एवं सुरचना नायडू को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में साहित्य, मीडिया, समाज सेवा एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

खाद कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, 1500 बोरी जब्त; दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

धमतरी.

धमतरी जिले में खरीफ सीजन से पहले खाद की कालाबाजारी पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में कृषि विभाग की टीम विभिन्न उर्वरक विक्रय केंद्रों में जांच के लिए पहुंची. निरीक्षण के दौरान मगरलोड विकासखंड के करेली छोटी स्थित वंदना खाद भंडार में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बिक्री और कम्प्यूटराइज्ड बिल नहीं देने की शिकायत सही पाई गई.

अनियमितता की पुष्टि होने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठान का उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिया. साथ ही दुकान में रखी 859 बोरी रासायनिक उर्वरक भी जब्त कर ली गई. मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है.

अन्य प्रतिष्ठानों पर भी हुई कार्रवाई
नगरी विकासखंड के बेलरगांव स्थित पवार ट्रेडर्स से 600 बोरी और जय किसान ट्रेडर्स से 100 बोरी जैविक खाद जब्त की गई. दोनों प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. कुरूद विकासखंड के चण्डी ट्रेडर्स और किसान ट्रेडर्स में POS मशीन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाए जाने के साथ ही मूल्य सूची और उपलब्ध स्टॉक की जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई थी. इस गंभीर अनियमितता पर दोनों प्रतिष्ठानों के उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं.

कृषि विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से कालाबाजारी करने वाले प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया है. वहीं प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक खरीदते समय अनिवार्य रूप से पक्का बिल लें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें.

बस्तर के 3 गांवों में शिक्षा का नया सवेरा, आजादी के बाद पहली बार खुलेंगे स्कूल

दंतेवाड़ा.

मलगिर क्षेत्र के बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल गांवों में आजादी के बाद पहली बार स्कूल शुरू होने जा रहे हैं. इन गांवों के 65 बच्चे पहली बार औपचारिक शिक्षा से जुड़ेंगे. इलाका अब तक सड़क और शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित रहा है.

शिक्षा विभाग की टीम ने गर्मी की छुट्टियों में दुर्गम रास्तों पर पैदल पहुंचकर सर्वे किया. घर-घर जाकर बच्चों की पहचान और दस्तावेज तैयार किए गए. अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया. फिलहाल ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए भवनों में कक्षाएं संचालित होंगी. भविष्य में स्थायी स्कूल भवन बनाने की योजना तैयार की जा रही है.

यह पहल दूरस्थ इलाकों में शिक्षा पहुंचाने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है. साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने का अभियान भी जारी है. पलायन और अन्य कारणों से शिक्षा से दूर हुए बच्चों की सूची तैयार की जा रही है. बस्तर के इन गांवों में अब पहली बार बच्चों के हाथों में कलम और किताब दिखाई देगी.

उत्तर कोरिया का ऐलान: परमाणु निरस्त्रीकरण अब ‘अपरिवर्तनीय मुद्दा’, अमेरिका को सख्त संदेश

नई दिल्ली
उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अत्यंत सख्त और अडिग रुख अपनाते हुए लाल रेखा खींच दी है। किम जोंग उन के देश ने कहा है है कि परमाणु निरस्त्रीकरण को ‘अपरिवर्तनीय रूप से अंतिम रूप दिया गया मामला’ है। देश ने अमेरिका तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों द्वारा लगातार की जा रही परमाणु निरस्त्रीकरण की मांगों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के माध्यम से जारी आधिकारिक बयान में उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि दूसरे पक्ष द्वारा उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को निरस्त्र करने की मांग ‘पूरी तरह तर्कहीन चर्चा’ और ‘काल्पनिक दिवास्वप्न’ के अलावा कुछ नहीं है।

इस दौरान प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि बाहरी दबाव, धमकियां या किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से उत्तर कोरिया की परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं लाया जा सकता। प्रवक्ता ने आगे कहा कि अमेरिका और उसकी सहयोगी सेनाओं द्वारा उत्तर कोरिया के खिलाफ बेबुनियाद बयानबाजी, निरंतर परमाणु खतरा पैदा करने के प्रयास और आक्रामक नीतियां हमारे देश की परमाणु हथियार संपन्न स्थिति को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकतीं। परमाणु निरस्त्रीकरण अब एक अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त और अंतिम रूप दिया गया मुद्दा है।

‘स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे’
बयान में हाल ही में हुई दक्षिण कोरिया-अमेरिका और अमेरिका-जापान के उच्चस्तरीय वार्ताओं की कड़ी निंदा की गई है। इन वार्ताओं में प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को पूर्ण रूप से समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया था। उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने अमेरिका-जापान के बीच हुई एक्सटेंडेड डिटरेंस संबंधी वार्ता की भी आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन और टोक्यो द्वारा उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराना व्यर्थ है। प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया कितनी भी बैठकें करें, कितनी भी बहस कर लें या संयुक्त बयान जारी कर लें, वे डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) की परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में मौजूदा अपरिवर्तनीय स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे।

बता दें कि यह कड़ा बयान गुरुवार को दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई द्विपक्षीय परमाणु परामर्श समूह (Nuclear Consultative Group) की बैठक के ठीक बाद जारी किया गया। इस बैठक में दोनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID) के साझा लक्ष्य को एक बार फिर दोहराया था।

चीन के साथ संबंध
इसी बीच, उत्तर कोरिया और चीन ने दोनों देशों के बीच ‘मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि’ के 65 वर्ष पूरे होने के अवसर पर द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत तथा गहरा करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई है। चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी दो दिवसीय उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान प्योंगयांग के साथ आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचागत विकास, सैन्य सहयोग और राजनयिक समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया।

शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात में दोनों देशों के बीच ‘नए युग’ के संबंध स्थापित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कितने भी बदलाव क्यों न आएं, चीन और उत्तर कोरिया के बीच पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को अटूट बनाए रखा जाएगा।

रोटी-नमक और ‘वंदे मातरम्’ से हुआ PM मोदी का भव्य स्वागत, स्लोवाकिया दौरे से खुलेंगे रिश्तों के नए अध्याय

नई दिल्ली/ ब्रैटिस्लावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बाद अब स्लोवाकिया के दौरे पर पहुंच गए हैं. स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारतीय प्रधानमंत्री का शानदार स्वागत किया गया. स्लोवाकिया के गठन के बाद, वहां का दौरा करने वाले पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. ब्रातिस्लावा पहुंचने पर स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया. पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार उन्हें ‘रोटी और नमक’ भेंट किया गया, जो वहां सम्मान, सद्भावना और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है। 

पीएम मोदी आज स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. इसके बाद पीएम मोदी ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे. इसके अलावा वह डेन्यूब नदी पर आयोजित विशेष हाई-टी कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी आज शाम राष्ट्रपति भवन में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति के साथ बेहद अहम बैठक करने वाले हैं, जबकि दिन का समापन राष्ट्रपति की ओर से आयोजित राजकीय रात्रिभोज के साथ होगा। 

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को और खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. उनके इस दौरे को लेकर स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में भी काफी उत्साह है. पीएम मोदी के स्लोवाकिया पहुंचते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया. लोगों ने मोदी-मोदी..वंदे मातरम..और भारत माता की जय के नारे लगाए। 

स्लोवाकिया दौरे के बाद फिर फ्रांस लौटेंगे पीएम मोदी, करेंगे G-7 नेताओं से बात
स्लोवाकिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर फ्रांस लौटेंगे, जहां वे 16-17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ सीधी बात करेंगे. इस दौरे के अंतिम चरण में मोदी 18 जून को पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कार्यक्रम ‘वीवाटेक 2026’ में भी शामिल होंगे। 

पीएम मोदी के दौरे से स्लोवाकिया संग रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान
पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, नवाचार, ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे क्षेत्र और नई प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. भारत और स्लोवाकिया हाल के वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं. अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्लोवाकिया यात्रा और फरवरी 2026 में स्लोवाक राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद यह दौरा संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। 

‘सचमुच बहुत खास… ‘ ब्रातिस्लावा में मिले स्वागत पर बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को नई ऊंचाई देने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश का अवसर है. उन्होंने राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ होने वाली बैठकों को लेकर उत्साह भी जताया. पीएम मोदी ने आज सुबह एक्स पोस्ट में लिखा, ‘कल शाम ब्रातिस्लावा में मिला स्वागत सचमुच बहुत खास था. मैं भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता के लिए उनका आभारी हूं. ऐसे भाव उन मज़बूत रिश्तों को दर्शाते हैं जो हमारे लोगों को जोड़ते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत बनाते हैं। 

 वंदे मातरम्, महादेव कीर्तन… पीएम मोदी की स्लोवाकिया यात्रा की बेहद खास शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को बेहद खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. समूह के कलाकारों ने इसे अपने जीवन का यादगार क्षण बताया। 

पीएम मोदी ने ब्रातिस्लावा में स्लोवाक संगीत समूह ‘महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट’ की आध्यात्मिक प्रस्तुति भी देखी. इसके अलावा प्रसिद्ध बाल लोकनृत्य दल ‘कोपानिचियारिक’ ने पारंपरिक स्लोवाक नृत्य प्रस्तुत कर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बढ़ती नजदीकियों की झलक भी दिखाई दी। 

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