AI और डेटा सेंटर डिमांड से बढ़ी मेमोरी चिप्स की जरूरत, भारत बनेगा बड़ा सेमीकंडक्टर हब

नई दिल्ली
AI, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच दुनिया भर में मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए भारत भी सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भारत में मेमोरी चिप निर्माण से जुड़ी नई कंपनियां निवेश कर सकती हैं, जबकि पहले से मौजूद कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। खासकर AI डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स की बढ़ती जरूरत ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ तिमाहियों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत पर भी पड़ा है

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर उद्योग के इतिहास में पहली बार कुछ विशेष प्रकार की मेमोरी चिप्स की इतनी अधिक कमी महसूस की जा रही है। AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में दुनिया भर की कंपनियां नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा प्लांट्स का विस्तार करने में जुटी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में डेटा सेंटर सेक्टर का साइज आने वाले सालों में 200 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है। इतनी बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए विशाल स्टोरेज और हाई-स्पीड मेमोरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। यही वजह है कि मेमोरी चिप निर्माण भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र बनता जा रहा है।

मंत्री ने यह भी बताया कि हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से AI सिस्टम, डेटा सेंटर, सुपरकंप्यूटर और एडवांस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स में किया जाता है। वर्तमान में इन चिप्स की वैश्विक मांग इतनी तेज है कि कई कंपनियां नई फैक्ट्रियां शुरू कर रही हैं। कुछ नई उत्पादन यूनिट ने हाल ही में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में सप्लाई की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।

भारत सरकार का ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। मिशन 1.0 के तहत देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की मजबूत नींव रखी जा रही है, जबकि मिशन 2.0 में चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि वैश्विक उपकरण निर्माता भारत में आकर केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि डिजाइन और रिसर्च का काम भी करें।

वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दशकों बाद चिप निर्माण कंपनियों का भरोसा जीतने में सफलता हासिल की है। आज भारत केवल चिप उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

एक्सपर्ट का मानना है कि यदि भारत इस मौके का सही लाभ उठाता है, तो आने वाले वर्षों में देश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल निवेश और रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

 

TMC में बड़ी टूट का दावा, 64 विधायक और 20 सांसदों के अलग गुट में जाने की खबर

कोलकाता
ममता बनर्जी की TMC के ज्यादातर विधायकों और सांसदों ने बगावत कर ली है और नया गुट बना लिया है। TMC बनने के बाद से ममता बनर्जी के ऊपर आया यह सबसे बड़ा संकट है। विधानसभा में करीब 64 विधायक अलग हो गए, जबकि लोकसभा में 20 सांसदों ने नया गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। जिन सांसदों ने बगावत की है, उसमें एक समय सबसे ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की करीबी नेता मानी जाने वाली सायोनी घोष भी शामिल हैं। अब ममता बनर्जी ने सायोनी को बड़ा झटका दिया है। उन्हें तृणमूल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष वही नेता हैं, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काबा-मदीना वाला गीत गाकर सुर्खियां बंटोरी थीं।

टीएमसी की शनिवार को वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें जिन नेताओं ने विरोधी गुट का दामन थाम लिया था, उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया। सायोनी के अलावा, सुदीप बंद्दोपाध्याय को कोलकाता उत्तर के पार्टी प्रमुख पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, माला रॉय को भी वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है।

ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक के बाद, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “यह वर्किंग कमेटी की बैठक थी। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, इसलिए दो पद खाली हो गए। सुदीप बंद्योपाध्याय, माला रॉय और एक और व्यक्ति, जो दूसरी तरफ चले गए हैं और अलग गुट बना रहे हैं, उन्हें वर्किंग कमेटी से हटा दिया गया है। सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय की जगह कुणाल घोष को कोलकाता उत्तर का अध्यक्ष बनाया गया है। सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। 4000 EVM का जलना एक गंभीर मामला है, हम इसे आगे उठाएंगे।”

ममता के एक और सांसद हुए बागी
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और ममता के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी हो गए। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उनके साथ पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय भी थीं। बंद्योपाध्याय और यादव की मुलाकात ने पार्टी के भीतर जारी संकट के बीच नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या वरिष्ठ सांसद बंद्योपाध्याय बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब बंद्योपाध्याय ने यादव से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कथित तौर पर मुलाकात की।

इंग्लिश चैनल में ब्रिटेन का बड़ा एक्शन, रूस के ‘शैडो फ्लीट’ तेल टैंकर को पहली बार रोका

लंदन
 यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को की फंडिंग रोकने के उद्देश्य से ब्रिटिश सेना ने एक बड़ा अभियान चलाते हुए पहली बार इंग्लिश चैनल में रूस के एक ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) के तेल टैंकर ‘SMYRTOS’ को रोका है।

रविवार तड़के, ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्र में छह घंटे चले एक अभियान के दौरान, रॉयल मरीन कमांडो और राष्ट्रीय अपराध एजेंसी के विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों ने SMYRTOS नामक जहाज पर धावा बोला। इस रूसी जहाज पर चिनूक हेलीकॉप्टर और दूसरे एयरक्राफ्ट, एक फ्रिगेट और एक माइनहंटर की मदद से कब्जा किया।

इस अभियान में मैरीटाइम एयर ग्रुप के विमानों, जिनमें चिनूक, मर्लिन एमके4 और वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर शामिल थे, साथ ही आरएएफ के पी-8 निगरानी विमान और रॉयल नेवी के युद्धपोत एचएमएस सदरलैंड और एचएमएस लेडबरी ने भी सहयोग किया।

रूस के लिए बड़ा झटका- कीर स्टार्मर
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने X पर एक पोस्ट में कहा, “इस सफल ऑपरेशन ने रूस को एक और बड़ा झटका दिया है। यह यूक्रेन में पुतिन के युद्ध को हवा देने वालों को याद दिलाता है कि हम उन्हें छिपने नहीं देंगे।”

इस ऑपरेशन के बाद ब्रिट्रेन की ओर से एक सरकारी बयान में कहा गया कि टैंकर को इंग्लैंड के दक्षिणी तट के पास एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, जहां जांच जारी रहने तक उस पर निगरानी रखी जाएगी। यह ऑपरेशन फ्रांस के साथ करीबी तालमेल में किया गया है।

पीएम कीर स्टार्मर ने दी कार्रवाई की अनुमति
नेतृत्व की चुनौतियों से जूझ रहे और पिछले सप्ताह सैन्य खर्च के विवाद में अपने रक्षा सचिव को खो चुके प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मार्च में ब्रिटिश सेना को रूसी जहाजों पर कार्रवाई करने और उन्हें रोकने की अनुमति दी थी।

पश्चिमी सरकारों का आरोप है कि ये ‘शैडो फ्लीट’ जहाज कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को को अवैध रूप से तेल निर्यात करने में मदद करते हैं।

नहीं पड़ा कोई खास असर
हालांकि, रॉयटर्स के एक विश्लेषण के मुताबिक, प्रधानमंत्री के इस कड़े रुख का ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरने वाले रूसी जहाजों की संख्या पर तत्काल कोई खास असर नहीं पड़ा है। इस विश्लेषण से साफ हुआ कि इस नीतिगत घोषणा के पहले और बाद में ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले रूसी जहाजों की संख्या लगभग समान बनी रही।

पहली बार ऐसी कार्रवाई
ब्रिटिश सेना ने रविवार को इंग्लिश चैनल में जिस कैमरून के झंडे के नीचे चल रहे जहाज को रोका, वह पहली बार यूक्रेन में रूस के युद्ध को फंड जुटाने में मदद किया था। । रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के अनुरूप की गई है। यह अभियान पहली बार है जब ब्रिटेन ने रूस के गुप्त बेड़े से जुड़े किसी पोत के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई का नेतृत्व किया है।

SIPRI रिपोर्ट में खुलासा, ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की परमाणु रणनीति पर सवाल

नई दिल्ली
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जून 2026 में जारी नई रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव को उजागर किया है. मई 2025 में हुए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के उस परमाणु सुरक्षा कवच के भ्रम को तोड़ दिया है जिसके पीछे वह दशकों से छिपता आया था.

इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायु सेना और सेना ने सीधे पाकिस्तान के उन चुनिंदा एयरबेस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया, जो उसके परमाणु हथियारों के बुनियादी ढांचे से जुड़े माने जाते हैं. वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था सिपरी की इस आधिकारिक पुष्टि ने यह साफ कर दिया है कि भारत ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग की नीति को हमेशा के लिए ध्वस्त कर दिया है.

ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने सीधे न्यूक्लियर ठिकानों को बनाया निशाना
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर को दशकों का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना गया है. सिपरी की ‘इयरबुक 2026’ में यह बात रिकॉर्ड पर लाई गई है कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेसों पर सटीक हमले किए, जिनके पास परमाणु अभियान चलाने की जिम्मेदारी थी.

इसमें पाकिस्तान के कुख्यात किराना हिल्स क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया, जिसके बारे में माना जाता है कि वहां पाकिस्तान के गुप्त परमाणु हथियार और मिसाइल सुविधाएं मौजूद हैं. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के रणनीतिक नूर खान एयरबेस को भी निशाना बनाया, जो पाकिस्तान का मुख्य परमाणु कमांड और कंट्रोल सेंटर माना जाता है.

पाकिस्तान हमेशा से यह दावा करता रहा है कि भारत की किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन भारत ने उसके परमाणु अड्डों पर ही पारंपरिक हमला कर इस खोखले दावे की हवा निकाल दी.

परमाणु हथियारों की होड़ में भारत आगे: बढ़े कुल वॉरहेड्स
सिपरी की रिपोर्ट में केवल सैन्य टकराव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या के ताजा आंकड़े भी जारी किए गए हैं. जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का परमाणु हथियारों का भंडार अब बढ़कर 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है, जबकि इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं.

भारत ने अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम को चीन और पाकिस्तान दोनों की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तेज किया है, जिसके कारण पिछले एक साल में भारत के बेड़े में 10 नए परमाणु हथियार शामिल हुए हैं. हथियारों की संख्या में बढ़त ने भारत की रणनीतिक स्थिति को क्षेत्र में और अधिक मजबूत बना दिया है.   

इतिहास में पहली बार: शांतिकाल में भारत ने तैनात किए परमाणु हथियार
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बिंदु भारत की परमाणु नीति में आया एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है. भारत ने शांतिकाल के दौरान भी अपने कुछ परमाणु हथियारों (लगभग 12 वॉरहेड्स) को ऑपरेशनली तैनात स्थिति में रखा है.

इससे पहले, भारत के सभी परमाणु हथियारों को हमेशा ‘स्टोरेज’ या रिजर्व में रखा जाता था, जिन्हें इस्तेमाल करने से पहले मिसाइलों के साथ असेंबल करना पड़ता था. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने संभवतः अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी (SSBN) पर इन वॉरहेड्स को तैनात किया है, जो समुद्र के भीतर गश्त लगा रही है.

यह बदलाव भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ को कायम रखते हुए भी दुश्मन को पलक झपकते ही ‘तगड़ा और अचूक जवाबी हमला’ देने की क्षमता को प्रदर्शित करता है.   

साइबर वॉरफेयर का पहली बार खुला इस्तेमाल
सिपरी 2026 की रिपोर्ट में एक और बेहद आधुनिक पहलू का जिक्र किया गया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ने पहली बार सक्रिय सैन्य संघर्ष के साथ-साथ ‘साइबर ऑपरेशन्स’ को भी पूरी तरह से शामिल किया था.

88 घंटे चले इस संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य टकराव में पारंपरिक मिसाइल हमलों (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल) के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी एक-दूसरे की सैन्य संचार प्रणालियों को ठप करने की कोशिशें की गईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले भी यह संकेत दिया था कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु डर के गुब्बारे को फोड़ दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सिपरी’ की स्वतंत्र रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि आधुनिक दौर की जंग में भारत का पलड़ा हर मोर्चे पर भारी रहा है.  

मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, 40 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

भोपाल
 मध्य प्रदेश में प्री-मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 24 घंटों के दौरान प्रदेश के करीब 40 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं कुछ जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के शेष हिस्सों में आगे बढ़ते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि मानसून 3 से 4 दिन लेट चल रहा है। ऐसे में यह मध्य प्रदेश में 18 जून तक प्रवेश कर सकता है।

इन जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अगले चौबीस घंटों के दौरान भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी व पांढुर्णा जिलों में कहीं-कहीं वर्षा या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने विदिशा, रायसेन और सागर जिलों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल समेत मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।

तापमान में उतार-चढ़ाव
प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान की बात करें तो राजगढ़ 41 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि पचमढ़ी 18.8 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा स्थान दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है, हालांकि बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण गर्मी से राहत का दौर भी जारी रहेगा।

भोपाल का मौसम
राजधानी भोपाल में आज  आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ शाम के समय गरज-चमक और हल्की वर्षा की संभावना है। हवा की औसत गति 16 से 18 किमी प्रति घंटा रहने का अनुमान है। शहर में अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

आगे ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर मध्य भारत तक सक्रिय मौसमी प्रणालियों और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। मानसून के आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में वर्षा का दायरा और बढ़ सकता है।

 

अटलांटिक में ठंडा होता रहस्यमयी ‘कोल्ड ब्लॉब’, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

नई दिल्ली
जहां एक तरफ ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पूरी दुनिया तप रही है और अल-नीनो जैसी घटनाओं ने समंदरों के तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, वहीं अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के ठीक दक्षिण में एक ऐसी जगह है जो लगातार ठंडी होती जा रही है.

दुनिया के नक्शे पर जहां हर तरफ बढ़ते तापमान को दिखाने वाले लाल और नारंगी रंग के धब्बे नजर आते हैं, वहीं यह हिस्सा एक गहरे नीले धब्बे की तरह चमकता है. वैज्ञानिक इस अजीबोगरीब घटना से हैरान हैं और इसे ‘कोल्ड ब्लॉब’ या ‘नॉर्थ अटलांटिक वार्मिंग होल’ का नाम दिया गया है.

नासा के आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि साल 1880 से लेकर 2025 तक इस पूरे इलाके में तापमान लगातार गिरा है. जब पूरी दुनिया का औसत तापमान बीते एक दशक में लगभग 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है, तब इस ठंडे हिस्से का तापमान करीब 0.9 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया है, जो वैज्ञानिकों के लिए एक गहरी चिंता और रिसर्च का विषय बन गया है.

क्या है समंदर का ‘ग्लोबल कनवर्टर बेल्ट’ (AMOC)?
इस रहस्यमयी ठंडक के पीछे की मुख्य वजह महासागरीय धाराओं के एक विशाल नेटवर्क को माना जा रहा है, जिसे अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) कहा जाता है. यह समंदर के भीतर बहने वाली पानी की एक ऐसी बेल्ट है जो दुनिया भर के मौसम को कंट्रोल करती है. इसका मुख्य काम भूमध्य रेखा के गर्म पानी को उत्तर दिशा (यूरोप और ध्रुवीय क्षेत्रों) की ओर ले जाना और वहां के ठंडे व खारे पानी को नीचे की ओर धकेलते हुए वापस दक्षिण की ओर लाना है.

पानी का यह चक्र इतना विशाल है कि इसे पूरा होने में लगभग 1,000 साल का समय लगता है. यह धारा इतनी शक्तिशाली है कि इसका जलप्रवाह अमेज़न नदी के मुहाने से बहने वाले पानी की तुलना में करीब 90 से 100 गुना अधिक होता है. ब्रिटेन और उत्तर-पश्चिमी यूरोप में सर्दियों के मौसम में जो हल्की नरमी देखी जाती है, वह इसी AMOC द्वारा दक्षिण से लाई जाने वाली गर्मी के कारण ही संभव हो पाती है.

सुस्त पड़ रहा है समंदर का इंजन
जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स (2026) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (2025) द्वारा प्रकाशित नए रिसर्चों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह ‘कोल्ड ब्लॉब’ असल में AMOC के कमजोर होने का एक सीधा और खतरनाक लक्षण है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनलैंड की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे महासागर में बड़े पैमाने पर मीठा पानी मिल रहा है.

यह मीठा पानी समंदर के खारे पानी को हल्का कर देता है, जिसकी वजह से ठंडा पानी भारी होकर नीचे नहीं बैठ पाता और यह दुनिया की ‘कनवर्टर बेल्ट’ सुस्त पड़ने लगती है. चूंकि यह बेल्ट अब उत्तर की ओर उतनी गर्मी नहीं भेज पा रही है, इसलिए ग्रीनलैंड के दक्षिण का यह हिस्सा गर्म होने के बजाय लगातार ठंडा होता जा रहा है.

अगर यह प्रणाली इसी तरह कमजोर होती रही, तो समंदर की वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता भी घट जाएगी, जिससे धरती पर ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव और अधिक विनाशकारी हो जाएगा.

भारतीय मॉनसून और दुनिया पर होने वाला भयानक असर
यदि AMOC का यह चक्र पूरी तरह ठप हो जाता है, तो इसके परिणाम हॉलीवुड की डरावनी साइंस-फिक्शन फिल्म (जैसे The Day After Tomorrow) जैसे हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि मौजूदा उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा, तो इसी सदी में यह महासागरीय धारा पूरी तरह बंद हो सकती है.

इसके बंद होने से जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे वहां भयंकर बर्फीला तूफान और अत्यधिक ठंड का दौर शुरू हो जाएगा. इसका सबसे घातक असर भारत सहित दक्षिण एशिया के मॉनसून सिस्टम पर पड़ेगा.

समंदर के तापमान में इस उथल-पुथल के कारण अल-नीनो की घटनाएं और अधिक शक्तिशाली हो जाएंगी, जो भारतीय मॉनसून को पूरी तरह तबाह कर सकती हैं. भारत की आधी से अधिक कृषि भूमि सिंचाई के लिए मॉनसूनी बारिश पर निर्भर है, ऐसे में मॉनसून का बिगड़ना करोड़ों किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर देगा.

भारत-फ्रांस साझेदारी मजबूत, पीएम मोदी ने ‘भारत इनोवेट्स’ लॉन्च को बताया नवाचार का नया मंच

नई दिल्ली
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भारत इनोवेट्स के लॉन्च कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। रविवार को नीस में उन्होंने कहा कि इनोवेशन भारत के डीएनए में है। पीएम मोदी ने कहा, ‘दुनिया में अलग-अलग देश एक दूसरे के साथ व्यापार करते हैं। अलग-अलग देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी भी होती है लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो साझा रुचि के साथ-साथ साझा विजन से भी ड्राइव होते हैं। भारत और फ्रांस का रिश्ता कुछ ऐसा ही है। इस रिश्ते भी जुड़ाव, दृढ़ विश्वास, नवाचार, प्रेरणा, साझा मूल्य, साझा विजन भी है। इसी रिश्ते की नींव पर बीते वर्षों में हमने साथ मिलकर नई पहल शुरू की है और वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने का प्रयास किया है। हम दोनों देश हमेशा एक साथ चले हैं। आज हमें खुशी है कि हम भारत इनोवेट्स की शुरुआत भी फ्रांस के साथ कर रहे हैं। मैं अपने मित्र इमैनुएल मैक्रों का यहां आने के लिए धन्यवाद करता हूं।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘इमैनुएल मैक्रों ने अभी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि इस सदी की चुनौतियों के समाधान के लिए भारत और फ्रांस को एक साथ आगे आना होगा। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि ये पहल उसी दशा में एक कदम है। भारत इनोवेट्स हमारे टैलेंट और यूरोपियन कैपिटल के बीच एक ब्रिज बन रहा है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां भारत के यंग माइट्स को यूपरोपियन एक्सपर्ट से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।’ उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी का भारत बदलाव के एक बहुत बड़े दौर से गुजर रहा है। आज भारत में एक स्टार्टअप रिवॉल्यूशन हो रहा है। इस रिवॉल्यूशन में भारत का नौजवान एक नए मानसिकता के साथ मानवता के हित में समस्याओं के समाधान ढूंढ रहा है। हमारे नौजवानों के विश्व-स्तरीय समाधान को वैश्विक मंच पर लाने का माध्यम ही भारत इनोवेट्स है।

भारत के भविष्य की एक झलक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘आज यहां इतने सारे युवा उद्यमी जुड़े हुए हैं। आपको यहां भारत के भविष्य की एक झलक दिखाई देती है। आपको भारत के युवाओं का आत्मविश्वास, आपको नए भारत की ऊर्जा दिखाई देती है। एक ऐसा भारत जो समाधान का उपभोक्ता नहीं बल्कि समाधान में योगदान देने वाला है। यहां कुछ लोग AI के जरिए ग्रामीण भारत की जिंदगी बदलने का काम कर रहे हैं, तो कुछ किसान की मदद के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपकी क्षमता को देखते हुए, मैं कहूंगा कि भारत बड़े पैमाने पर और तेजी से इनोवेशन करता है। भारत टिकाऊ भविष्य के लिए इनोवेशन करता है और भारत पूरी दुनिया के लिए इनोवेशन करता है।’

15-मिनट सिटी: भारत में बदलता शहरी जीवन, जहां घर के पास ही मिल रही हर सुविधा

नई दिल्ली
 जरा सोच के देखिए आपको ऑफिस जाना हो और ट्रैफिक की टेंशन न हो। आपके बच्चे का स्कूल थोड़ी ही दूर पैदल रास्ते पर हो, कॉलोनी के गेट पर ही किराने की दुकान हो, सड़क के उस पार जिम हो, नीचे ही फार्मेसी हो और ऑफिस मेट्रो से या 10 मिनट की ड्राइव पर हो। वीकेंड पर मॉल, सिनेमा और रेस्टोरेंट सब पास ही हों।

शहरों में रहने वाले ज्यादातर भारतीयों के लिए यह अब कोई कल्पना नहीं रही। यह जिंदगी जीने का एक नया तरीका बनता जा रहा है। तो ’15-मिनट सिटी’ की दुनिया में आपका स्वागत है।

15 मिनट सिटी का कॉन्सेप्ट
इसका आइडिया बहुत आसान है। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी हर चीज काम, पढ़ाई, हेल्थकेयर, शॉपिंग, मनोरंजन और लोगों से मिलना-जुलना आपके घर से 15 मिनट की दूरी पर होनी चाहिए। चाहे आप पैदल जाएं, साइकिल से जाएं या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से थोड़ी दूर का सफर करें।

ऐसे देश में जहां रोजाना आने-जाने में आसानी से दो से तीन घंटे लगते हों वहां घर खरीदने वालों, डेवलपर्स और निवेशकों के बीच इस कॉन्सेप्ट को तेजी से अपनाया जा रहा है। JUSTO RealFintech Ltd. के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पमित्र दास कहते हैं, “सच तो यह है कि बात एक ही चीज पर आकर रुकती है जिसे खरीदार अब बर्बाद नहीं कर सकते और वो है समय।”

उन्होंने आगे कहा, रोजाना का सफर चुपचाप शहरी जिंदगी पर लगने वाला सबसे बड़ा टैक्स बन गया है। खरीदार अब सिर्फ यह नहीं पूछते कि फ्लैट कितना बड़ा है, बल्कि यह भी पूछते हैं कि ये पता उन्हें उनकी जिंदगी का कितना हिस्सा वापस देगा? यह बदलाव भारत के रिहायशी परिदृश्य को नया रूप दे रहा है।

बदल रहा रहने का ढंग
कई दशकों तक भारत में घर खरीदने वालों का ध्यान तीन चीजों पर रहा- लोकेशन, कीमत और कब्जा मिलने का समय। पर आज जरूरतों की लिस्ट बहुत लंबी हो गई है। लोग खुली जगहें, टहलने के रास्ते, पास में स्कूल, हेल्थकेयर की सुविधा, सुरक्षा, कम्युनिटी स्पेस, मनोरंजन की सुविधाएं और खरीदारी की आसानी चाहते हैं।

इससे भी जरूरी बात यह है कि वे चाहते हैं कि ये सभी चीजें एक ही इकोसिस्टम में आपस में जुड़ी हों। दास के अनुसार, खरीदार अब सिर्फ चार दीवारों वाला घर नहीं, बल्कि एक खास तरह की जीवनशैली (लाइफस्टाइल) खरीद रहे हैं। हाइब्रिड वर्क ने घर को रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र बनाकर इस बदलाव को और तेज कर दिया है।

यही एक वजह है कि अब बड़े शहरों में नए लॉन्च होने वाले घरों में प्रीमियम और लग्जरी घरों का हिस्सा काफी ज्यादा है। खरीदार ऐसे माहौल के लिए अपना बजट बढ़ाने को तैयार हैं जो उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए।

इंटीग्रेटेड टाउनशिप बना पसंदीदा विकल्प
शहरों में रहने वाले कई अमीर परिवारों के लिए ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ एक पसंदीदा विकल्प बनकर उभर रही हैं, क्योंकि इनमें एक ही मास्टर-प्लान वाले डेवलपमेंट में सुविधा, सुरक्षा, हरियाली और सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसी सभी चीजें एक साथ मिलती हैं।

इस सुविधा के लिए कीमत चुकानी पड़ती है और खरीदार इसके लिए पैसे देने को तैयार भी दिखते हैं। दास कहते हैं, “हां और वे खुशी-खुशी ऐसा करने को तैयार हैं, बशर्ते इसकी असल कीमत हो न कि यह सिर्फ ब्रोशर पर दिखाई गई कोई दिखावटी चीज हो।”

इसका लॉजिक सीधा-सादा है। अगर स्कूल, फार्मेसी, कैफे, किराने की दुकानें और फिटनेस सेंटर पैदल दूरी पर हों तो वहां रहने वाले लोग हर हफ्ते अनगिनत घंटे बचा सकते हैं। बचाए गए उस समय का आर्थिक मूल्य है।

आरएमआर ग्रुप की डेवलपमेंट मैनेजर शगुन कालरा के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स में रहने वाले लोग सिर्फ घर के लिए पैसे नहीं दे रहे हैं। वे उस समय के लिए पैसे दे रहे हैं जो वे हर दिन बचाते हैं। वह समय जो किराने का सामान लाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने या मेडिकल जरूरतों के लिए आने-जाने में बर्बाद हो जाता।

ऐसी जगहों पर कितनी हो सकती है फ्लैट की कीमत?
मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे जैसे बड़े शहरों में एक अच्छी तरह से प्लान की गई इंटीग्रेटेड टाउनशिप में आम तौर पर 2-बीएचके अपार्टमेंट की कीमत 1.5 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है।

पेंटहाउस की कीमत आम तौर पर लगभग 3.5 करोड़ रुपये से शुरू होती है और प्रीमियम डेवलपमेंट में यह आसानी से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। ऐसे डेवलपमेंट में एक ही इकोसिस्टम के अंदर रेजिडेंशियल, ऑफिस, रिटेल, वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं।

जैसे-जैसे शहरी जमीन कम होती जा रही है और भीड़-भाड़ बढ़ रही है, कालरा का मानना है कि समय के साथ यह प्रीमियम और मजबूत हो सकता है। शहरों की योजना बनाने वाले अक्सर समय की कमी की बात करते हैं। शहर में रहने वाला आम व्यक्ति घर, काम की जगह, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं और शॉपिंग की जगहों के बीच आने-जाने में घंटों बिताता है।

किन सिद्धातों पर आधारित है ये कॉन्सेप्ट

  • ’15-मिनट सिटी’ का कॉन्सेप्ट ठीक इसी समस्या को हल करने की कोशिश करता है। कालरा के अनुसार, सफल प्रोजेक्ट्स तीन अहम डिजाइन सिद्धांतों पर आधारित होते हैं।
  • पहला है मिक्स्ड-यूज प्लानिंग। इसमें घर, ऑफिस, स्कूल, क्लिनिक और दुकानें अलग-अलग जोन में बंटे होने के बजाय एक ही इलाके में साथ-साथ होते हैं।
  • दूसरी बात है रोजमर्रा की सुविधाओं की सोच-समझकर की गई प्लानिंग। ग्रॉसरी स्टोर, फार्मेसी, डायग्नोस्टिक सेंटर, क्रेच और प्राइमरी स्कूल जान-बूझकर टाउनशिप के मास्टर प्लान में शामिल किए गए हैं।
  • तीसरी बात है ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन। कालरा कहते हैं, “कोई भी टाउनशिप उन सभी सुविधाओं की नकल नहीं कर सकती जो एक शहर देता है।”
  • इसका मकसद यह पक्का करना है कि रोजमर्रा की जरूरतें पैदल दूरी पर हों, जबकि कभी-कभार होने वाली जरूरतें जैसे स्पेशलिस्ट अस्पताल, यूनिवर्सिटी या मुख्य बिजनेस इलाके मेट्रो सिस्टम या दूसरे मास ट्रांजिट नेटवर्क के जरिए आसानी से पहुंच में हों। ये सभी चीजें मिलकर लंबी दूरी की यात्रा की जरूरत को काफी हद तक कम कर देती हैं।

कंपनियों को भी यह आइडिया क्यों पसंद है?
’15-मिनट सिटी’ का कॉन्सेप्ट सिर्फ रिहायशी रियल एस्टेट को ही नहीं बदल रहा है, बल्कि यह कंपनियों के वर्कप्लेस के बारे में सोचने के नजरिए को भी बदल रहा है। ऑनवर्ड वर्कस्पेस के को-फाउंडर और सीईओ सुव्रत जैन के अनुसार, आज कंपनियां लोकेशन का मूल्यांकन कुछ साल पहले की तुलना में बहुत अलग तरह से करती हैं।

क्लाइंट्स अब सिर्फ किराए या जगह के साइज पर ध्यान नहीं देते। जैन कहते हैं, “वे पूछते हैं कि उनके लोग वहां कैसे पहुंचेंगे, बिल्डिंग के आस-पास क्या है और क्या यह जगह उस तरह के टैलेंट के लिए सही है जिसे वे लाना और बनाए रखना चाहते हैं।”

यह बदलाव कंपनियों को सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में स्थित एक ही हेडक्वार्टर वाले पारंपरिक मॉडल से दूर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके बजाय, कई कंपनियां अब ऐसे डिस्ट्रिब्यूटेड ऑफिस नेटवर्क को प्राथमिकता दे रही हैं जो उन्हीं इलाकों में हों जहां कर्मचारी पहले से रहते हैं। इसका मकसद सीधा है- आने-जाने का तनाव कम करना और ऑफिस तक पहुंचना आसान बनाना।

उनका कहना है कि जो कंपनियां कर्मचारियों के रहने की जगहों के पास से काम करती हैं, वहां अक्सर ज्यादा अटेंडेंस, बेहतर जुड़ाव और कम एट्रिशन (कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर) देखने को मिलता है।

किन शहरों में हो रहा बूम
    फिलहाल सबसे ज्यादा गतिविधियां भारत के सबसे बड़े मेट्रोपॉलिटन इलाकों में केंद्रित हैं। बेंगलुरु में हॉटस्पॉट में व्हाइटफील्ड, सरजापुर रोड और एयरपोर्ट कॉरिडोर शामिल हैं।
    पुणे के खराडी, हिंजवडी, बानेर और वाकड मार्केट में भी ऐसे ही ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। हैदराबाद में डेवलपर्स गाचीबोवली, कोकापेट और फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।
    मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में ठाणे, नवी मुंबई और पनवेल में गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिसे बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क का समर्थन मिल रहा है।
    दिल्ली-एनसीआर एक और बड़े केंद्र के तौर पर उभरा है, जहां द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और आने वाले जेवर कॉरिडोर के किनारे कई प्रोजेक्ट्स आकार ले रहे हैं।

कालरा के अनुसार, भारत में पहले से ही कई दर्जन ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो ’15-मिनट सिटी’ की परिभाषा पर खरे उतरते हैं और मेट्रो सिस्टम के विस्तार के साथ ऐसे और भी प्रोजेक्ट सामने आने की संभावना है।

यह कॉन्सेप्ट अब बड़े मेट्रो शहरों से आगे भी फैल रहा है। लखनऊ, चंडीगढ़, देहरादून, कोयंबटूर, अहमदाबाद और कोच्चि जैसे शहर इस मॉडल की खूबियों को अपना रहे हैं, क्योंकि बढ़ती इनकम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से खरीदारों की उम्मीदें बदल रही हैं।
क्या चुनौतियां हैं?

इन सब के बीच एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इस मॉडल में चुनौतियां भी हैं। जमीन के बड़े और जुड़े हुए टुकड़ों को इकट्ठा करना अभी भी मुश्किल है। जमीन का मालिकाना हक अक्सर बिखरा हुआ होता है। मंजूरी की प्रक्रियाएं लंबी हो सकती हैं। बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत होती है। सबसे जरूरी बात किफायती होना एक और बड़ी बाधा बनी हुई है।

हालांकि प्रीमियम खरीदार इंटीग्रेटेड कम्युनिटीज को अपना रहे हैं, लेकिन इस मॉडल को अलग-अलग इनकम ग्रुप्स तक फैलाने के लिए डेवलपर्स, अर्बन प्लानर्स और सरकारों के बीच सावधानी से प्लानिंग और सहयोग की जरूरत होगी।

 

भारतीय सेना ने बदले यूनिफॉर्म नियम, औपनिवेशिक परंपराओं में बड़े सुधार लागू

नई दिल्ली
भारतीय सेना ने गुलामी के दौर की परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए अपने यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग नियमों में बड़े ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब फॉर्मल कार्यक्रमों में बंद गले की बंडी जैकेट पहनने की मंजूरी दे दी गई है, जबकि पारंपरिक पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। इसके अलावा, परेड के दौरान समीक्षा अधिकारियों के लिए तलवार ले जाने की अनिवार्यता को भी वैकल्पिक बना दिया गया है। ये सभी बदलाव सेना द्वारा जारी आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 (Army Uniforms-2026) नाम के एक नए 174 पन्नों के मैनुअल में दिए गए हैं। इससे पहले सेना ने करीब आठ साल पहले अपनी वर्दी को लेकर ऐसा कोई व्यापक मैनुअल जारी किया था।

इस मैनुअल के एक खंड में कहा गया है कि देश की भावनाओं और बदलती संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं। ये सुधार भारतीय सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और स्थायी परंपराओं को बनाए रखते हुए औपनिवेशिक काल के बचे हुए प्रतीकों को हटाने का एक प्रगतिशील प्रयास हैं। सेना में पुराने समय से चले आ रहे रॉयल जैसे ब्रिटिशकालीन शब्दों के इस्तेमाल को भी अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।

मैनुअल की प्रस्तावना में एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने कहा कि यह संस्करण औपनिवेशिक काल की प्रथाओं, सामानों और शब्दावली को धीरे-धीरे हटाकर सेना के ड्रेस नियमों को समकालीन भारतीय लोकाचार के अनुरूप बनाने की दिशा में एक विचारशील कदम है।

यूनिफॉर्म में हुए मुख्य बदलाव
बंडी जैकेट की एंट्री: अधिकारियों को पहली बार औपचारिक आयोजनों में बंद गले की बंडी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। इसे पूरी आस्तीन की शर्ट के ऊपर पहना जा सकता है। यह जैकेट ठोस और सौम्य रंग की होगी, जिसे बिना हुक या हुक के साथ (दोनों पैटर्न) पहना जा सकता है।

महिला अधिकारियों के लिए नियम: महिला अधिकारियों को सौम्य रंगों की साड़ी, कुर्ता-सलवार या दुपट्टे के साथ टखने तक की सीधी पैंट पहनने की अनुमति दी गई है। हालांकि, स्लीवलेस कुर्ते, प्लाजो और सिगरेट पैंट जैसे कैजुअल कपड़ों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

नया विंटर ड्रेस: सेना ने सभी रैंकों के लिए एक नई विंटर ड्रेस ‘3B’ पेश की है, जिसमें अंगोला शर्ट के साथ बैटल जैकेट और बेरेट (टोपी) शामिल है।

पाउच बेल्ट पर रोक: मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से चमकीली पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। ये ड्रेस राष्ट्रपति भवन, राजभवन के राजकीय कार्यक्रमों या प्रधानमंत्री और सेना कमांडरों के आवासों पर आयोजित होने वाले औपचारिक भोज के दौरान पहनी जाती हैं। हालांकि, बख्तरबंद कोर, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी रेजिमेंट, राइफल रेजिमेंट और सिग्नल्स कोर के कर्नल रैंक तक के अधिकारी अभी भी रेजिमेंटल कार्यक्रमों में इसे पहन सकेंगे।

मूंछों पर भी कड़े दिशा-निर्देश
नए मैनुअल में सैनिकों के रहन-सहन, ग्रूमिंग और सजने-संवरने के मानकों को भी कड़ाई से परिभाषित किया गया है। शरीर पर टैटू बनवाने और बॉडी पियर्सिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। वर्दी में किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी। केवल पूजा के दिन कलाई पर एक पवित्र धागा यानी कि कलावा बांधने की छूट होगी। सिख सैनिकों को छोड़कर किसी भी अन्य सैनिक को धार्मिक चिह्न प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है।

सैनिकों की मूंछों का आकार 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। वर्दी में रहते हुए डियोड्रेंट या परफ्यूम लगाने पर पाबंदी होगी, हालांकि आफ्टर-शेव लोशन का उपयोग किया जा सकता है। महिला सैनिकों और सैन्य अधिकारियों के लिए लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पहनने पर सख्त रोक लगाई गई है। महिला कर्मी सिंदूर लगा सकती हैं, बशर्ते वह इस तरह लगाया जाए कि बेरेट या पीक कैप पहनने के बाद बाहर से दिखाई न दे।

संत गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलकर समरस, स्वच्छ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर. 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बिलासपुर जिले के बोदरी में आयोजित संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती, शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने संत गाडगे बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके बताए सेवा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क अधोसंरचना विकास की आधारशिला है और इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे बाबा का संपूर्ण जीवन समाज सुधार, स्वच्छता और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वच्छ भारत मिशन, संत गाडगे बाबा के स्वच्छता और जनजागरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कन्नौजे रजक समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 60 लाख रुपये तथा संत गाडगे भवन निर्माण हेतु 25 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही सन्नडय कुर्मी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 60 लाख रुपये और वर्मा समाज के सामुदायिक भवन के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने धमनी-चकरभाठा मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नयन, बोदरी में एयरपोर्ट के समीप खेल मैदान उपलब्ध कराने तथा जोरा तालाब के सौंदर्यीकरण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और समाज के पदाधिकारियों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक बनाने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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