उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 2500 किलोलीटर क्षमता के पानी टंकी निर्माण का किया भूमिपूजन

रायपुर. 
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के खम्हारडीह में बहुप्रतीक्षित 2500 किलोलीटर क्षमता के पानी टंकी के निर्माण का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से करीब 20 करोड़ 93 लाख रुपए की लागत से बनने वाली इस पानी टंकी से शहर के 2500 घरों को पानी मिलेगा। इसके लिए चार वार्डों, वार्ड क्रमाकं-9, 10, 30 और 31 में 25 किमी डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन और 2 किमी राइजिंग मेन पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके निर्माण से इन चारों वार्डों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। विधायकगण सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा तथा महापौर श्रीमती मीनल चौबे भी भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराना सरकार का प्राथमिक दायित्व है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महापौर श्रीमती मीनल चौबे के नेतृत्व में रायपुर के सभी क्षेत्रों का तेजी से विकास किया जा रहा है। रायपुर को राजधानी के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। रायपुर के चारों विधायक और महापौर शहर के विकास और जनसुविधाएं बढ़ाने लगातार सक्रियता से विकास एवं निर्माण कार्य स्वीकृत करवा रहे हैं।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने खम्हारडीह में नई पानी टंकी के निर्माण का अपना वादा आज पूर्ण कर दिया है। पूर्ववर्ती सरकार ने जितना काम 5 वर्षों में नहीं किया, विष्णु देव साय की सरकार ने उससे कहीं अधिक कार्य अपने ढाई साल के कार्यकाल में कर दिखाया है। वहीं महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि आज का दिन खम्हारडीह में जल समस्या के स्थायी निदान के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसके लिए केवल राशि ही नहीं दी है, बल्कि उन्होंने यहां के लोगों को जलापूर्ति का साधन दे दिया है।  

राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, रायपुर नगर निगम में जल कार्य विभाग के अध्यक्ष संतोष सीमा साहू, जोन-3 अध्यक्ष श्रीमती साधना प्रमोद साहू, एमआईसी सदस्यगण महेन्द्र खोडियार, श्रीमती संजना संतोष हियाल, अवतार भारती बागल, अमर गिदवानी, जोन 5 जोन अध्यक्ष अम्बर अग्रवाल और रमेश सिंह ठाकुर सहित अनेक पार्षदगण भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

आध्यात्मिक मूल्यों से ही संभव है स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री

रायपुर. 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोड़ी (राछा) स्थित सत्य निजनाम बोध संस्थान में आयोजित सत्य निजनाम सत्संग सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान के सदस्यों ने पुष्पवर्षा एवं गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने परमपूज्य सद्गुरु सत्य कबड्डीदास जी एवं पूजनीया गुरुमाता सत्य लीला देवी जी से भेंट कर आशीर्वाद लिया तथा आश्रम परिसर में लाल चंदन का पौधा रोपा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सत्य निजनाम बोध संस्थान आध्यात्म और नशामुक्ति के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। आध्यात्मिक मूल्यों से ही स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए नशामुक्ति को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है। राज्य सरकार नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कड़ी कार्रवाई कर रही है तथा जनजागरूकता के माध्यम से समाज को नशामुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को निरंतर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का नया वातावरण बना है। अब इन क्षेत्रों में सड़क, दूरसंचार, राशन वितरण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंच रहा है। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076, अटल डिजिटल सेवा केंद्र और अन्य नागरिक सेवाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में सत्य निजनाम बोध संस्थान के अनुयायी उपस्थित थे।

कयाकिंग-कैनोइंग को आगे बढ़ाने हरसंभव सहयोग देगी सरकार – अरुण साव

रायपुर. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव आज नवा रायपुर के सेंध जलाशय में आयोजित 36वें नेशनल कैनो स्प्रिंट चैंपियनशिप के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विजेता खिलाड़ियों और टीमों को पुरस्कार प्रदान किए। विगत 12 जून से प्रारंभ इस चैंपियनशिप में देश के 24 राज्यों के 810 खिलाड़ियों तथा करीब 400 अधिकारियों, खेल संघों के पदाधिकारियों और सपोर्टिंग स्टॉफ ने भागीदारी की। चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश ओवरऑल चैंपियन बना। केरलम और ओड़िशा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार मंत्री गुरू खुशवंत साहेब भी समापन समारोह में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समापन समारोह में खिलाड़ियों और विभिन्न राज्यों से आए कयाकिंग-कैनोइंग संघों के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी इस खेल में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। देशभर में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में राज्य के लिए पदक जीत कर ला रहे हैं। राज्य में कयाकिंग-कैनोइंग को और आगे बढ़ाने सरकार हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल और खिलाड़ियों की तरक्की एवं बेहतरी के लिए लगातार काम हो रहे हैं। भारत सरकार 2047 तक विकसित भारत के साथ ही देश को दुनिया की पांच बड़ी खेल शक्तियों में शामिल करने रोडमैप बनाकर काम कर रही है। ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा पदक जीते, इसके लिए योजना बनाकर काम कर रही है। 

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि आज खेलों का महत्व केवल खेल तक ही सीमित नहीं है। यह नौजवानों के विकास और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने का बड़ा माध्यम है। देश के वातावरण को बदलने के लिए ज्यादा से ज्यादा युवाओं को खेल के मैदान में लाना पड़ेगा। खेल के मैदान से सब कुछ मिलता है। मान-सम्मान, धन-दौलत, शोहरत… ये सब खेल के मैदान से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो खेलेगा वही खिलेगा, इसलिए आप खूब खेलें, खूब आगे बढ़ें। उन्होंने नवा रायपुर में इस चैंपियनशिप के शानदार आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।

तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद तीन दिनों तक यहां अच्छा आयोजन हुआ है। देशभर के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि खेल अब एक अच्छा करियर भी हो गया है। खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए सरकार लगातार सुविधाओं व अधोसंरचनाओं को मजबूत कर रही है। इससे बड़ी संख्या में युवा खेलों को अपना रहे हैं। उन्होंने प्रतियोगिता के सभी विजेता खिलाड़ियों एवं टीमों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

नवा रायपुर के सेंध जलाशय में 36वें नेशनल कैनो स्प्रिंट चैंपियनशिप के तहत महिला एवं पुरूष वर्ग में जूनियर और सब-जूनियर स्तर पर कयाकिंग-कैनोइंग की विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ प्रदेश कयाकिंग-कैनोइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया, सचिव प्रशांत रघुवंशी, एशियन कयाकिंग-कैनोइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत कुशवाहा, उत्तराखंड कयाकिंग-कैनोइंग एसोसिएशन के डॉ. डी.के. सिंह और ओड़िशा कयाकिंग-कैनोइंग एसोसिएशन के विपिन दास सहित विभिन्न राज्यों के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

रायपुर. 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित कार्यक्रम में जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 70.10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 159 कार्यों का लोकार्पण तथा 224.90 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 182 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इन विकास कार्यों के माध्यम से सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय अधोसंरचना तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा और जिले के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया तथा बटन दबाकर पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज का दिन जांजगीर-चांपा जिले के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जांजगीर चांपा जिले को लगभग 295 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है, जिससे क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनजीवन अधिक सुगम बनेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले में विकास की नई संभावनाएं सृजित होंगी तथा आमजन को सीधे लाभ मिलेगा।

विभिन्न विभागों के कार्य शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लोकार्पित 159 कार्यों में जल संसाधन, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सीजीएमएससी, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य शामिल हैं। वहीं भूमिपूजन के 182 कार्यों में जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, सीजीएमएससी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े तथा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कल से फिर गूंजेंगी दलीलें, समर वेकेशन समाप्त; नियमित सुनवाई होगी शुरू

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में करीब एक माह से चल रहे समर वेकेशन ख़त्म हो गये हैं. अब यहां सोमवार 15 जून से सभी निर्धारित बेंचों में नियमित सुनवाई होगी . सोमवार से शुरू हो रहे सप्ताह की काज लिस्ट भी जारी कर दी गई है.

हाईकोर्ट में गत 18 मई से समर वेकेशन शुरू हो गए थे जो करीब एक माह बाद अब समाप्त हो गये हैं. इस बीच हाईकोर्ट में आने वाले जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए हर सप्ताह अलग अलग वेकेशन बेंचें निर्धारित की गईं थीं. इनमें सप्ताह के दो दिन डिवीजन बेंच समेत सिंगल बेंचों में भी सुनवाई होती रही, इस बीच कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी पारित किये गए. अब वेकेशन खत्म होते ही सब कुछ पहले की तरह होगा. गौरतलब है कि इससे पूर्व हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. समर वेकेशन के बाद सोमवार 15 जून से जब यहाँ नियमित कामकाज प्रारंभ होगा, तब कोर्ट में पुरानी व्यवस्था के तहत सुनवाई होगी. कोर्ट रूम में अधिवक्ता खुद मौजूद रहकर अपने मामलों की पैरवी करेंगे हालांकि वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा भी पहले की तरह लागू रहेगी.

सामुदायिक सुरक्षा शिविरों में पुलिस अब सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास की भी बना रही है मजबूत आधारशिला

भोपाल. 
सृजन बालिका सुरक्षा महासम्मेलन” के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को व्यापक सामाजिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कार्य कर रही है। इस पहल का उद्देश्य केवल अपराधों से संरक्षण सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि बच्चों एवं युवाओं के स्वस्थ, शिक्षित, आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक सहयोग एवं अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसी दृष्टिकोण के साथ महासम्मेलन में सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई।

महासम्मेलन के दौरान आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। संस्थान के लगभग 30 विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल द्वारा 300 से अधिक किशोर-किशोरियों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य शिविर में सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के साथ किशोर स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, एनीमिया, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञ परामर्श प्रदान किया गया। चिकित्सकों ने किशोरों से संवाद करते हुए उन्हें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल, नशे से दूरी, सोशल मीडिया एवं स्क्रीन टाइम के संतुलित उपयोग तथा तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर जागरूक किया। बालिकाओं एवं बालकों को यह भी प्रेरित किया गया कि वे स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय अपने अभिभावकों, शिक्षकों एवं चिकित्सकों से खुलकर चर्चा करें।

महासम्मेलन में युवाओं के भविष्य निर्माण को ध्यान में रखते हुए आईटीआई, कौशल विकास संस्थानों एवं रोजगार मार्गदर्शन विशेषज्ञों द्वारा विशेष करियर काउंसलिंग एवं कौशल विकास सत्र आयोजित किए गए। इसमें विद्यार्थियों को विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, स्वरोजगार के अवसरों, स्टार्टअप संभावनाओं तथा शासन की कौशल विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उनकी रुचि, योग्यता एवं क्षमताओं के अनुरूप करियर चयन के संबंध में व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज के बच्चों और युवाओं को ऐसा सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जिसमें वे स्वस्थ, शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में विकसित हो सकें। इसी सोच के तहत सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण आयामों को एक मंच पर जोड़ने का अभिनव प्रयास किया गया है। महासम्मेलन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, कौशल विकास विशेषज्ञों तथा पुलिस विभाग की संयुक्त सहभागिता ने यह संदेश दिया कि बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त भविष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और सहभागिता से सुनिश्चित किया जा सकता है। “सृजन” केवल सुरक्षा का अभियान नहीं, बल्कि सुरक्षित, स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर युवा पीढ़ी के निर्माण का एक सामाजिक संकल्प बनकर उभर रहा है।

 

धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना से जशपुर के विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर. 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है।

मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी। 

रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि दशकों से लंबित मांग को पूरा कर केंद्र सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से हो रहा है। यह रेल लाइन आदिवासी अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने क्षेत्र के विकास की बहुप्रतीक्षित पहल का स्वागत करत हुए कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना का विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित होना पत्थलगांव क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सुखद समाचार है। इस परियोजना से क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा स्थानीय किसानों, व्यापारियों,ने युवाओं और आम नागरिकों को व्यापक लाभ मिलेगा। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के प्रयासों से लंबे समय से प्रतीक्षित यह सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र की जनता की ओर से प्रधानमंत्री जी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी एवं मुख्यमंत्री जी के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हैं। यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास और समृद्धि की नई आधारशिला सिद्ध होगी।

जशपुर विधायक रायमुनि ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना जशपुर जिले सहित पूरे वनांचल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। वर्षों से जशपुर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की जो आकांक्षा थी, उसे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी के विशेष प्रयासों तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की सतत पहल से नई दिशा मिली है। यह परियोजना जशपुर के विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार एवं रोजगार के नए अवसरों का द्वार खोलेगी। इसके लिए वे क्षेत्र की जनता की ओर से प्रधानमंत्री जी, रेल मंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करती हैं।

अब तक 1 लाख 82 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल. 
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत द्वितीय चरण के अंतिम दिन 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में 1 लाख 82 हजार 473 विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त कर लिया है। द्वितीय चरण में अब तक 86 हजार 679 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जिनमें 64 हजार 535 विद्यार्थी स्नातक (UG) तथा 22 हजार 141 स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी हैं। इससे पूर्व प्रथम चरण में 72 हजार 477 विद्यार्थियों ने स्नातक तथा 17 हजार 463 विद्यार्थियों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया था। अब तक कुल प्रवेशित विद्यार्थियों में 1 लाख 37 हजार 12 विद्यार्थी स्नातक पाठ्यक्रमों, 39 हजार 607 विद्यार्थी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों तथा 5 हजार 854 विद्यार्थी एनसीटीई पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले चुके हैं।

एनसीटीई पाठ्यक्रमों के प्रथम चरण में आवंटित विद्यार्थियों के लिए प्रवेश शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित है। विभाग ने विद्यार्थियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर शुल्क जमा कर प्रवेश सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में कॉलेज लेवल काउंसलिंग (CLC) के लिए पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। इच्छुक अभ्यर्थी 20 जून तक पंजीयन कर सकेंगे और 23 जून को महाविद्यालय आवंटन किया जाएगा तथा आवंटित अभ्यर्थी 30 जून तक प्रवेश शुल्क जमा कर अपने प्रवेश की पुष्टि कर सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी ढंग से संचालित किया जा रहा है तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

 

दो दिवसीय पुलिस महानिरीक्षक जोन/विसबल जोन की त्रैमासिक समीक्षा बैठक संपन्न

भोपाल. 
पुलिस मुख्यालय भोपाल के कॉन्फ्रेंस हॉल मेंआयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की।

बैठक के समापन अवसर पर पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े।

डीजीपी मकवाणा ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत प्रस्तुत कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए।

डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके।

उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर उनका प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें।

सीसीटीवी नेटवर्क, सेफगार्ड योजना एवं संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर
पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए।सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके।

डीजीपी ने उपलब्ध मानव संसाधनों के समुचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देशित किया कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर पर पदस्थापना की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार संसाधनों का पुनर्विन्यास किया जाए। उन्होंने पुराने अभिलेख एवं आदेशों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी जिलों को पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का व्यवस्थित जिलेवार प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने तथा वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए।

अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी प्रकार अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह अभियान केंद्र सरकार एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध रूप से “ड्रग फ्री जोन” बनाने के निर्देश दिए।

डीजीपी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में पुलिस कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण हेतु जिला पुलिस अधीक्षक प्रतिमाह सिविल सर्जन के साथ बैठक आयोजित करें। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए तथा चिन्हित अस्पतालों के साथ एमओयू कर उपचार एवं भर्ती की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाया जाए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण और क्रम से निराकरण सुनिश्चित करने तथा नियमित जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित कर समीक्षा बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि जोनल स्तर पर प्रत्येक माह विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं एवं अभियानों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए। कार्यों को व्यवस्थितएवं परिणामोन्मुख तरीके से संचालित किया जाए। प्राथमिक जांचों एवं अन्य लंबित प्रकरणों को बिना अंतिम निष्कर्ष के लंबित न रखा जाए, बल्कि उन्हें तार्किक एवं विधिसम्मत परिणाम तक पहुंचाया जाए।

विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली एवं अपराध नियंत्रण की हुई विस्तृत समीक्षा
दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, विसबलजोनों के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा कर प्रभावी पुलिसिंग के लिए रणनीति तैयार करना था।

समीक्षा के दौरान मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती तथा मॉबलिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की स्थिति का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण किया गया। अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों एवं आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा हुई।

न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों, अवमानना प्रकरणों, सेवा संबंधी दावों, रिट याचिकाओं, स्थगन आदेशों तथा समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को न्यायालयीन मामलों की सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों तथा विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों से संबंधित लंबित प्रशासनिक मामलों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त सूबेदार, निरीक्षक एवं रक्षित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विगत छह माह में की गई कार्यवाहियों, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई, बॉर्डर मीटिंग्स एवं नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि 10 महत्वपूर्ण प्रकरणों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है।

बैठक में प्रशिक्षण की कार्ययोजना, मास्टर ट्रेनर व्यवस्था तथा आई-गॉट (iGOT) पोर्टल पर अधिकाधिक पाठ्यक्रम पूर्ण करने की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को नई तकनीकों एवं आधुनिक पुलिसिंग से संबंधित प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान वित्तीय प्रबंधन, मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों की प्रगति, प्रशासकीय भवनों के निर्माण, वाहनों के क्रय तथा पुलिस आधुनिकीकरण योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बैठक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में लंबित शिकायतों, सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों तथा अन्य जन-अभियोगों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

इसके अतिरिक्त प्रदेश के 49 जिलों को उपलब्ध कराए गए एफएसएल उपयोगी विशेष वाहनों के संबंध में एक वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान एवं अपराध विवेचना को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। बैठक में पुलिस आधुनिकीकरण, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रशासनिक सुधार, प्रशिक्षण, अपराध विश्लेषण एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

 

राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को कर रही है प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है। छोटे उद्योग करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। हमारा उद्देश्य वर्ष 2047 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई स्थापित करने का है। सूक्ष्म, लघु, और मध्यम उद्यम प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर जिले में उद्योग, हर परिवार में रोजगार और हर युवा को अवसर देना राज्य सरकार का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। जिस प्रकार हर 12 वर्ष में सिंहस्थ स्नान का अवसर मिलता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन के 12 वर्ष से देशवासियों को अमृत स्नान का अवसर प्राप्त हुआ है। बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एमएसएमई क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से प्रोत्साहन राशि और हितलाभ वितरण के लिए आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई- विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन के लिए संचालित गतिविधियों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औद्योगिक संगठनों ने किया अभिनंदन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया। साथ ही 31 मार्च 2026 तक की समस्त देयताओं का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को दो करोड़ 02 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को एक करोड़ 07 लाख रुपये मण्डीशुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों का विद्युत टैरिफ रुपए तीन करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण सिंगल क्लिक से किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी किया। विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा, अलाना ग्रुप के संस्थापक सुराशि बहल मेहरा और उद्यमी कुणाल ज्ञानी ने मध्यप्रदेश में उद्यम स्थापित करने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिक्की के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सरवैया तथा उद्यमी श्रीमती प्रतिभा यादव, डॉ. सुरेश दुबे, दिनेश चंदवानी, यशराज वर्मा से संवाद भी किया।

24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमशीलता और नवाचारों में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी है। प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 4 लाख 41 हजार से अधिक इकाइयों की कमान बहनें संभाल रही हैं, यह महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी है। आगामी ढाई वर्षों में 4 हजार 500 करोड़ रुपये देकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती देने का लक्ष्य है। एमएसएमई विकास, नीति उद्यमियों को मजबूती प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत निवेश पर 40 प्रतिशत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 60 प्रतिशत तक प्रोत्साहन तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों को 8 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा रही है।

एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए नियमों को सरल किया गया है। पिछले ढाई वर्षों में 30 नए औद्योगिक क्षेत्र और 14 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही 1 हजार 63 भूखंड, उद्यमियों को आवंटित किए जा चुके है। आने वाले ढाई वर्षों में 60 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर विकसित करने और 6 हजार से अधिक भू-खंड नए उद्यमियों को देने का लक्ष्य है। सरकार द्वारा दी जा रही सहायता केवलू अनुदान नहीं, बल्कि उद्यमियों के सपनों को गति देने का माध्यम है। इससे नए उद्योग स्थापित होंगे, उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को इससे नए अवसर प्राप्त होंगे। मध्यप्रदेश के उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। सरकार तकनीक, वित्त और आवश्यक मार्गदर्शन देकर स्थानीय उद्यमों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्टार्ट-अप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को “लीडर” श्रेणी का सम्मान मिला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 7 हजार 400 से अधिक हो चुकी है, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत 3 हजार 400 से अधिक स्टार्ट-अप्स का नेतृत्व हमारी बहनें कर रही हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना’ के तहत पिछले ढाई वर्षों में 23 हजार 500 से अधिक युवाओं को 1 हजार 630 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। स्टार्टअप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को “लीडर” श्रेणी का सम्मान मिला है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर हो। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सब्सिडी युक्त ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर को-वर्किंग स्पेस तैयार किए जाएंगे।

राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों से प्रदेश के युवा उद्यमी वैश्विक स्तर पर बना रहे हैं पहचान
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को औद्योगिक विकास में आगे रखने के लिए अनथक परिश्रम किया है। वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभी वर्ग के उद्यमियों के साथ संवाद कर रहे हैं। प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अभूतपूर्व विकास हुआ है। प्रदेश की जीडीपी में कृषि की 40 प्रतिशत और उद्योगों की हिस्सेदारी मात्र 19 प्रतिशत थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे बदलने का संकल्प लिया है, उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश बदल रहा है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों के परिणाम स्वरूप प्रदेश के युवा उद्यमी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

प्रदेश की सभी विधानसभाओं में कम से कम एक एमएसएमाई सेंटर किया जायेगा विकसित
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग राघवेंद्र सिंह ने पिछले ढाई वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में निवेश सहायता के रूप में 6 हजार 136 एसएसएमई उद्यमियों को 3 हजार 723 करोड़ राशि दी गई है। उसके पहले के ढाई साल में केवल 1245 करोड़ की राशि प्रदान की गई थी। प्रदेश की नई औद्योगिक नीति तीव्र, पारदर्शी और उद्योग अनुकूल है। पिछले एक वर्ष में उद्यमियों को 1000 से अधिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में 44 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर प्रस्तावित हैं। अगले ढाई साल में राज्य में 30 नए क्लस्टर और 20 नई कॉमन फैसिलिटी विकसित की जाएगी। अगले ढाई से तीन वर्षों में उद्योगों को 5000 नए भूखंड आवंटित होंगे। सरकार की मंशा है कि प्रदेश की सभी विधानसभाओं में कम से कम एक एमएसएमाई सेंटर विकसित किया जायेगा। इसके लिए अब तक 76 विधानसभाओं में स्थान चिह्नित किए गए हैं।

राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता और तत्परता के साथ कर रही है उद्यमियों की सहायता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों तथा उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए। लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में पिछले ढाई साल में औद्योगिक विकास को तेज गति प्रदान की है। राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता और तत्परता के साथ उद्यमियों की सहायता कर रही है। सरकार की दूरदृष्टि उद्यमियों के लिए वरदान सिद्ध हो रहे हैं। स्टार्टअप अलाना की संस्थापक सुराशी बहल मेहरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश से शुरू हुए अलाना लिप केयर ब्रांड की पहचान बनाना आसान नहीं था, आज हमारा ग्रुप देश-विदेश में अपने प्रोडक्ट्स सप्लाई कर रहा है। राज्य सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। मध्यप्रदेश अब वुमन लेड बिजनेस का सेंटर बन रहा है।

भोपाल में फोम बनाने की यूनिट से शुरूआत की, अब यूके में लगा रहे हैं औद्योगिक इकाई
सारवा फोम इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक कुणाल ज्ञानी ने कहा कि हमने भोपाल में फोम बनाने की एक छोटी यूनिट से शुरूआत की थी। आज देश के 5 राज्यों में हमारी ईकाइयां हैं और अब यूके में भी एक इकाई खुलने जा रही है। मध्यप्रदेश में उद्योग संचालन की लागत सबसे कम है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में पूरी दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किए हितलाभ वितरित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत इन्दौर के रवि बोबड़े तथा श्रीमती रेखा वर्मा और भोपाल के सुधीर कुमार शर्मा व मोहम्मद शिफर को ऋण राशि के चैक प्रदाय किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी की श्रीमती जयरैकवार, कटनी की श्रीमती भारती चौधरी व रामप्रसाद लड़िया और अनूपपुर के नागेश सिंह नरवरिया को भूमि आंवटन के लिए आशय पत्र प्रदान किए। निवाड़ी के सागर जामरा को भूमि आवंटन आदेश प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति-2025 के अंतर्गत ऐरी राइड्स प्रायवेट लिमिटेड इंदौर की संस्थापक सुआरती मतानी, ग्लाफिक्स इंडस्ट्रीज प्रायवेट लिमिटेड भोपाल के अरिहंत आर्या, कोनार्क एग्रो. सोल्युशन्स भोपाल के सौरभ गोस्वामी और सर्विस जेट प्राइवेट. लिमिटेड भोपाल के दिनेश चांदवानी को सहायता राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम में उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

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