TMC में बगावत: 20 से ज्यादा सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में

पश्चिम बंगाल
TMC (तृणमूल कांग्रेस) के 20 से ज्यादा सांसद पार्टी छोड़ने की कगार पर हैं. ये सांसद अब खुद को एक अलग गुट बनाना चाहते हैं और NDA (BJP) का साथ देने की बात कर रहे हैं. सोमवार को ये सब लोकसभा स्पीकर से मिलने दिल्ली जा रहे हैं.

TMC यानी ममता बनर्जी की पार्टी में इस वक्त बड़ा घमासान चल रहा है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी के अंदर खींचतान बढ़ती जा रही है.

बागी सांसदों का दावा क्या है?
TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जो इस बागी गुट की लीडर बन गई हैं, उन्होंने कहा कि उनके साथ अब 22 सांसद हैं. इससे पहले उन्होंने 20 का दावा किया था. दो नए सांसद और जुड़े हैं, लेकिन उनके नाम अभी नहीं बताए गए. काकोली ने कहा कि जब वो लोग औपचारिक रूप से शामिल होंगे, तभी नाम सामने आएंगे.

स्पीकर से मुलाकात क्यों?
सोमवार को ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने वाले हैं. मांग यह है कि उन्हें एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता दी जाए, यानी वो TMC से अलग एक नया पार्लियामेंट्री ब्लॉक बनाना चाहते हैं. काकोली ने खुद कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से यह बात कही.

19 सांसदों के दस्तखत वाला दस्तावेज
शुक्रवार को एक कागज सामने आया जिस पर 19 TMC सांसदों के दस्तखत थे. इन नामों में काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हल्दर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी यानी देव, जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय शामिल हैं.

रचना बनर्जी और सायनी घोष के दस्तखत भी अलग से दिखे. ये सभी स्पीकर को चिट्ठी लिख चुके हैं कि उन्हें काकोली की अगुवाई में अलग गुट माना जाए. हालांकि यह साफ नहीं है कि स्पीकर के दफ्तर को यह चिट्ठी मिली या नहीं. दस्तखतों की असलियत की भी कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई है.

NDA का साथ देने की बात
इस बागी गुट ने यह भी कहा है कि वो केंद्र में BJP की अगुवाई वाली NDA सरकार को समर्थन देंगे. यानी यह सिर्फ पार्टी से अलग होना नहीं है, बल्कि सीधे विरोधी खेमे में जाने की तैयारी है.

दिल्ली में मीटिंग और शुवेंदु अधिकारी
बागी सांसदों की एक मीटिंग पहले कोलकाता में होनी थी, लेकिन अब वो दिल्ली शिफ्ट हो गई है. पश्चिम बंगाल के CM शुवेंदु अधिकारी के इस मीटिंग में आने की उम्मीद थी, लेकिन एक सरकारी काम की वजह से वो शायद नहीं आ पाएंगे.

कौन नहीं है इनके साथ?
TMC के कई बड़े नेता इस बागी गुट में नहीं हैं. अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, किर्ती आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद के दस्तखत उस कागज पर नहीं थे.

सुदीप और भूपेंद्र की मुलाकात
बीच में एक और दिलचस्प बात हुई. TMC के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिले. इससे अटकलें लगने लगीं कि क्या सुदीप भी बागी गुट में शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी इस बारे में कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता.

कुल मिलाकर ऐसा है कि TMC के 20 से ज्यादा सांसद ममता बनर्जी से बगावत कर एक अलग गुट बनाने की कोशिश में हैं. वो NDA का साथ देना चाहते हैं और स्पीकर से मान्यता मांग रहे हैं. पार्टी के भीतर बड़ी टूट देखने को मिल रही है.

टीएमसी में बगावत से बदला संसद का गणित, एनडीए बहुमत के करीब

नई दिल्ली
 तृणमूल कांग्रेस में बगावत से संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बीजेपी सरकार अहम संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है।

हालांकि राज्यसभा चुनाव का मौजूदा दौर एनडीए को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने में मदद करेगा, लेकिन लोकसभा में टीएमसी के पाला बदलने के बावजूद वह अभी भी 363 के जादुई आंकड़े से काफी दूर है।

क्या कहता है गणित?
सूत्रों का कहना है कि झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय सीटों पर जीत हासिल करके एनडीए अपनी मौजूदा 148 सांसदों की संख्या में तीन सीटें और जोड़ लेगा। टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे और उपचुनावों के बाद एनडीए पश्चिम बंगाल से तीनों सीटें हासिल कर लेगा, जिससे उसकी संख्या 154 हो जाएगी, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत से नौ कम है।

चूंकि उच्च सदन में टीएमसी के और सांसदों के इस्तीफे की संभावना है, इसलिए एनडीए 163 का आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे सभी संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा।

नवंबर में फिर घट जाएगी संख्या
नवंबर तक सत्ताधारी गठबंधन की ताकत कम हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश से 10 सांसद रिटायर होंगे और राज्य विधानसभा में अपनी बेहतर संख्या के कारण समाजवादी पार्टी राज्यसभा में कुछ सीटें हासिल कर सकती है।

विपक्षी गठबंधन के 64 सांसद
विपक्षी इंडी गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं, क्योंकि डीएमके (आठ सांसदों के साथ) इससे बाहर हो गई है और आप (तीन सांसदों के साथ) ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया है। वाईएसआरसीपी और बीजेडी जैसी निर्दलीय पार्टियां (जिनके पास क्रमशः सात और छह सीटें हैं) और एमडीएमके राज्यसभा में किसी भी तरफ जा सकती हैं।

हालांकि, लोकसभा में एनडीए की संख्या 213 तक पहुंच सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर इसे समर्थन दे सकते हैं। पार्टी छोड़ने वाले ये सांसद सोमवार को स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे और टीएमसी से अलग होने की घोषणा करने वाला पत्र उन्हें सौंपेंगे। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है।

निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर हमला, भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज करने का आरोप

नई दिल्ली
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में भारत और उसके लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कोविड-19 वैश्विक महामारी और पश्चिम एशिया में संघर्ष जैसे बड़े संकटों के दौरान भी भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज करते हैं। देश के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है, जैसा राहुल गांधी पेश कर रहे हैं।

‘लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो…’
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में बीजेपी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बेंगलुरू में ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ का आयोजन किया गया है। इसमें पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो हर चीज की केवल आलोचना करते हैं और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार को कमतर दिखा रहे हैं।

बार-बार कहते हैं बड़ा संकट आने वाला है लेकिन कोई संकट नहीं आया: सीतारमण
सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कहते रहते हैं कि अगले कुछ सप्ताह में सब कुछ ढह जाएगा। नेता प्रतिपक्ष बार-बार कहते हैं कि कोई बड़ा संकट आने वाला है, लेकिन भारत के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

जब भी कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) लोकसभा में बोलते हैं, तो उनका लहजा हर चीज की बुराई करने और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकने वाला होता है। भारत पर कोई आपदा नहीं आने वाली है। IMF अप्रैल-मई में अपने आकलन के दौरान और फिर अक्टूबर में डेटा जारी करके बताता है कि भारत अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था क्यों बना हुआ है। भले ही मिडिल ईस्ट में संकट चल रहा हो और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटें आ रही हों। बात सिर्फ कच्चे तेल या LPG की कीमत की नहीं है, इन सभी चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए। अर्थव्यवस्था और आम घरों की जरूरतों पर इसी तरह का ध्यान दिया जा रहा है।

पश्चिम एशिया संकट, फ्यूल का जिक्र कर क्या बोलीं वित्त मंत्री
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने की बात सरकार नहीं कह रही, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी यही कहते हैं। सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि ईंधन की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। वित्त मंत्री ने अपनी बात स्पष्ट करने के लिए पश्चिम एशिया से ईंधन की ढुलाई में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

रक्तदान सबसे बड़ा दान, इससे बड़ी कोई सेवा नहीं – राज्यपाल डेका

रायपुर. 
मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है दूसरे के जीवन की रक्षा करना और यह अपने ही रक्त के एक बूंद से हो सके तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं है। रक्त का दान सबसे बड़ा दान होता है। राज्यपाल रमेन डेका ने आज प्रदेश के स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सम्मान करते हुए उक्त बातें कहीं।

30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के सदस्य हुए सम्मानित
विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मानित करने के लिए लोकभवन में समारोह आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के अध्यक्ष राज्यपाल डेका ने सर्वाधिक रक्तदान करने वाले प्रदेश के 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर लोकभवन में रेडक्रॉस द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें लोकभवन के अधिकारियों- कर्मचारियों सहित अन्य लोगों ने उत्सव पूर्वक रक्तदान किया।

रक्तदाताओं ने निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर लोगों को नया जीवन दिया है
कार्यक्रम को संबोधित करने हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और यह केवल स्वस्थ व्यक्ति के स्वैच्छिक दान से ही उपलब्ध हो सकता है। राज्यपाल ने कहा कि थैलेसीमिया, सिकल सेल, एनीमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में रक्त की आवश्यकता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोगों में जो सेवा भाव है वह दूसरी जगह देखने को नहीं मिलती। रक्तदाताओं ने वर्षो से निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर अनेक लोगों को नया जीवन दिया है। ऐसे रक्तदाता समाज के लिए प्रेरणा हैं और उनकी सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण है। राज्यपाल ने रेडक्रॉस ब्लड बैंक और उसकी टीम के कार्यो की भी सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था वर्षो से जरूरत मंदों तक जीवनदायी रक्त पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमेन तोमन साहू ने स्वागत उदबोधन दिया तथा छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव डॉ. रूपल पुरोहित ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के उपाध्यक्ष रूपेश पाणिग्रही, कोषाध्यक्ष संजय पटेल, रेडक्रॉस ब्लड सेंटर रायपुर के प्रभारी डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय, पूर्व चेयरमेन अशोक अग्रवाल रेडक्रॉस के पदाधिकारी, स्वैच्छिक रक्तदाता तथा सहयोगी, संस्थानों तथा संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।

लोहरसी आयुर्वेदिक औषधालय में दर्द प्रबंधन हेतु कपिंग थेरेपी एवं विशेष आयुर्वेदिक उपचार सेवाओं का आरंभ

सियान जतन कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी में “Pain Management through Ayurveda” विषय पर दर्द प्रबंधन हेतु विशेष आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का आरंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य घुटने के दर्द (Knee Joint Pain), कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर तथा अन्य वातजन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को प्रभावी एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत मरीजों के लिए कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) आरंभ की गई है, जो मांसपेशियों के तनाव, दर्द, सूजन एवं रक्त संचार में सुधार हेतु उपयोगी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त औषधालय में ड्राय कपिंग, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी विशेष आयुर्वेदिक उपचार प्रक्रियाओं का भी आरंभ किया जा रहा है। इन चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के अस्थि-संधि एवं मांसपेशीय विकारों, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर, साइटिका तथा पुराने दर्द संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में किया जाएगा।

सियान जतन कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को इन सेवाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे बढ़ती आयु के साथ होने वाली दर्द एवं गतिशीलता संबंधी समस्याओं से राहत प्राप्त कर सकें। आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से यह पहल क्षेत्रवासियों को सुलभ, सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. वर्षा ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खान-पान एवं शारीरिक श्रम की कमी के कारण जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल एवं अन्य वातजन्य रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगों की रोकथाम एवं समग्र स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शरीर, मन एवं जीवनशैली के संतुलन पर आधारित चिकित्सा पद्धति है, जो रोग के मूल कारण को समझकर उपचार करने का प्रयास करती है। कपिंग थेरेपी, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी प्रक्रियाएं दर्द प्रबंधन में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं तथा कई मरीजों को दीर्घकालिक राहत प्रदान कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग एवं आयुर्वेदिक परामर्श को अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का आग्रह किया।

शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी द्वारा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की गई है कि वे आयुर्वेद की इन विशेष उपचार सेवाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा स्वस्थ, सक्रिय एवं रोगमुक्त जीवन की ओर अग्रसर हों।

डीलिस्टिंग विवाद पर CM विष्णुदेव साय का पलटवार, बोले- ‘कांग्रेस भ्रम फैला रही, पहले सही जानकारी ले’

रायपुर.

डीलिस्टिंग को लेकर पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत के बयान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस का भ्रम है. कांग्रेस को सही जानकारी हासिल करनी चाहिए. कांग्रेसी आधी-अधूरी बातें करते हैं.

दरअसल, धर्मांतरित लोगों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी बढ़ गई है. पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने बयान के जरिए एक बार फिर से इस मुद्दे को उठाया है. इससे पहले यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बने मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर आधी-अधूरी जानकारी होने का आरोप मढ़ते हुए समाप्त करने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री साय ने इसके साथ बिलासपुर-जशपुर दौरे को लेकर कहा कि जशपुर जिले को रेल सुविधा को लेकर कहा कि जशपुर गृह जिला है. रेल सेवा से अछूता है.

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में रेल सुविधा की बात अवगत कराए थे. इसमें अब त्वरित कार्रवाई हो रही है. उन्होंने कहा कि जल्द इसकी स्वीकृति मिलेगी. रेल मार्ग के जुड़ने से जशपुर जिले को फायदा होगा. व्यापार, लोगों के आवागमन में फायदा मिलेगा. वहीं कांग्रेस केप्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी के आने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनका मामला है. आए-जाए जो भी करें. 

मातृ शक्ति का आशीर्वाद बना संबल, विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुन्देलखंड की धरती ने अपने गौरवशाली अतीत को संजोकर रखा है। बुन्देलखंड के वीरों ने अतीत से लेकर आज तक देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। मातृ शक्ति का आशीर्वाद सरकार के लिए संबल प्रदान कर रहा है। उनकी सहभागिता एवं नेतृत्व के माध्यम से आज मध्यप्रदेश विकास पथ पर आगे बढ़ता हुआ भारत को विकसित बनाने में अपना सहयोग दे रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर जिले के केसली में रविवार को आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 190.85 करोड़ रुपये की लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करते हुए शिलापट्टिका का अनावरण किया। इसमें लगभग 68.83 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 25 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं 122.02 करोड़ रुपये की लागत से 28 कार्यों का भूमि-पूजन कर लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त भी जारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृ शक्ति का सशक्तिकरण और उनका नेतृत्व वर्तमान की आवश्यकता है और सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार का कार्य कर रही है। लाड़ली बहना योजना तीसरे साल में प्रवेश कर रही है, जिसके माध्यम से प्रत्येक माह बहनों के बैंक खातों में राशि प्रदान की जा रही है। लाड़ली बहना योजना हमारी माताओं बहनों के आर्थिक स्वावलंबन का आधार बनी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे सुखद बात क्या हो सकती है कि लाड़ली बहना योजना से मिली राशि से बहनें अपने परिवार के संचालन में सहयोग कर रही हैं। यह उनका समर्पण है, उनका अपना त्याग है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक स्तर में बड़ा सुधार आया है। उन्होंने कहा कि बहनों एवं मातृशक्ति के आशीर्वाद से राज्य सरकार निरंतर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आज उनके मन में शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का विश्वास बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। उनके खेतों के लिए पानी की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का है। जब किसान के खेत में पानी आता है तो उसके साथ उसके जीवन में बदलाव आता है। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए भी सरकार कार्य कर रही है। जहाँ सरकार ने गौमाताओं के लिए प्रतिदिन खर्च को बढाया है, वहीं दुग्ध उत्पादन एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए सरकार योजनाएं चला रही है एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों तक लगातार प्रधानमंत्री पद रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की लोकल्याणकारी योजनओं के माध्यम से आज जरूरतमंदों को आवास, स्वास्थ्य सहित समस्त सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अनेक कार्य किए जा रहे है।

आवासहीनों को आवास, भूमिहीनों को भूमि के पट्टे मिल रहे हैं और महिलाओं को संबल मिल रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं की समाज एवं परिवार में स्थिति मजबूत हुई है। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि सरकार द्वारा आपके लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, पात्रता अनुसार उनका लाभ उठाइए।

मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केसली में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने केसली में सांदीपनि विद्यालय सेकण्ड फेज का कार्य प्रारंभ करने, शासकीय हाई स्कूल चिरचिटा सुखजू में हायर सेकण्डरी स्कूल तक उन्नयन करने, शासकीय हाई स्कूल देवरी, नाहरमऊ, नन्ही देवरी का उन्नयन करने, कृषि उपज मंडी केसली का नाम रानी अवंतिबाई के नाम पर रखने, देवरी में 100 बिस्तरों का अस्पताल स्टाफ सहित प्रारंभ करने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री ने केसली क्षेत्र में थावरी जलाशय (लागत लगभग 550 करोड़) की योजना को स्वीकृति दी तथा कहा कि किसानों की इस बहुप्रतीक्षित मांग से क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आएगी। मुख्यमंत्री ने देवरी में प्याज और लहसुन की खरीदी के लिए मंडी में खरीदी केन्द्र बनाने की घोषणा की। शासकीय महाविद्यालय देवरी में विज्ञान संकाय तथा कला संकाय में राजनीति विषय का आरंभ करने, केसली महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्ररंभ करने, देवरी नगर का नाम देवपुरी करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप देवखंडेराव मंदिर का पर्यटन स्थल के रूप में विकास किया जाएगा। ग्राम पंचायत गौरझामर एवं ग्राम पंचायत केसली को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की।

जनसामान्य में दिखा अपार उत्साह, मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहनों पर की पुष्पवर्षा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सागर जिले के देवरी विधानसभा अंतर्गत केसली ब्लॉक में यह पहला और महत्वपूर्ण आगमन था। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में उनका यह पहला दौरा था, जिसे लेकर स्थानीय जनता और प्रशासन में भारी उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैंप से लाड़ली बहनों के बीच पहुंचकर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कार्यक्रम में उपस्थित लाड़ली बहनों में उत्साह एवं उल्लास देखने को मिला। इस अवसर पर महिलाओं ने धन्यवाद लाड़ले भैया लिखे प्लेकार्ड प्रदर्शित कर मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

लाड़ली बहनों संग खेला सितोलिया, ‘लाड़ली बहना खेल सप्ताह’ का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर जिले के केसली में एक बेहद अनूठे और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहाँ लाड़ली बहनों के साथ पारंपरिक खेल सितोलिया (पिट्टू) खेलकर ‘लाड़ली बहना खेल सप्ताह’ का भव्य शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न केवल कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद मैदान में उतरकर खेलों में सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें बच्चों व युवाओं की तरह पारंपरिक खेल खेलते देख वहाँ मौजूद महिलाओं और लाड़ली बहनों का उत्साह दोगुना हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को स्वस्थ, जागरूक और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

हितग्राहियों को वितरित किए हितलाभ, मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न हितग्राहियों को मंच से लाभान्वित किया। कार्यक्रम में शिक्षा, आजीविका संवर्धन एवं प्रतिभा प्रोत्साहन से जुड़े हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रोत्साहन राशि के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय उत्पादों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और विभागों के प्रयासों की सराहना की।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया था, वह निभाया है। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को सशक्त किया जा रहा है, उनकी उपज को सरकारी दाम पर खरीदा जा रहा है। इस वर्ष 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई। उन्होंने कहा कि पहली बार मध्यप्रदेश में किसानों की भूमि का अधिग्रहण होने पर उसका चार गुना मुआवजा किसानों को मिलेगा। इसी प्रकार मध्यप्रदेश सहित बुन्देलखंड में औद्योगिक विकास किया जा रहा है। उन्होंने शबरी माता के नाम पर माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर के भूमि-पूजन पर आभार भी प्रकट किया।

दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल केसली का नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में गेहूं खरीदने में प्रथम स्थान पर है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत प्रदेश के 1064 मार्गों पर 5,200 से अधिक बसों का संचालन किया जाएगा। इससे उन मार्गों पर आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिन मार्गों से प्राइवेट बस संचालक बसों का संचालन नहीं करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के देवरी विधानसभा में पहली बार आगमन पर देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया ने आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से गरीब, महिला, किसान, युवा का कल्याण हो रहा है।

इस अवसर पर सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री एवं विधायक रहली गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री एवं विधायक खुरई भूपेंद्र सिंह, सागर विधायक शैलेंद्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार, श्रीमती रानी कुशवाहा, संभागायुक्त अनिल सुचारी, डीआईजी एस एस चौहान, कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

 

वन्यजीव संरक्षण, जल सुरक्षा और हरित भविष्य की आधारशिला हैं वन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया है।

इस पहल से पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, साथ ही 68 हजार किलोग्राम कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन की रोकथाम भी हुई है। इतना ही नहीं, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्थानीय वन समितियों को लगभग 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

वन विभाग द्वारा वर्ष-2025 के विभिन्न पौधरोपण स्थलों पर रोपण कार्य पूरा होने के बाद शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों के संग्रहण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके उपरांत संग्रहित सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक किया गया, जिससे उसका सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (एनर्जी रिकवरी) के लिए अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां तथा इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी उन्नत तकनीकों के कारण इस प्रकार के अपशिष्ट का निस्तारण सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। यह व्यवस्था खुले में प्लास्टिक जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है।

वन विभाग के अनुसार पौधरोपण के बाद पॉलीबैग्स् को वन क्षेत्रों में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में परिवर्तित होकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

अभियान की विशेष उपलब्धि यह है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आय का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, सामुदायिक विकास तथा जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे वन संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी को भी और अधिक मजबूती मिलेगी।

दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल जन-सहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों एवं नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल वन क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संवर्धन के लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।

 

पेट्रोल-डीजल को मिलेगी टक्कर! गन्ने से बने ईंधन पर दौड़ेंगी गाड़ियां, MP के किसानों को होगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर गाड़ियां पेट्रोल-डीजल से नहीं, बल्कि खेतों में लहलहाने वाले गन्ने के रस से बने एथेनॉल से दौड़ती नजर आएंगी। भारत सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलने जा रहे हैं।

गन्ने के जूस से बनता है एथेनॉल, MP के इन जिलों को होगा सीधा फायदा
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के बाद बचे उप-उत्पाद (मोलासेस) से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है। मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। महाकौशल और निमाड़ क्षेत्र: नरसिंहपुर (प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला), छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है।

मालवा और चंबल क्षेत्र: उज्जैन, धार, और ग्वालियर-दतिया के बेल्ट में भी किसान बड़े पैमाने पर गन्ना उगाते हैं। अब तक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल चीनी मिलों या स्थानीय गुड़ और खांडसारी उद्योग पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर भुगतान में देरी और सही दाम न मिलने की समस्या होती थी। लेकिन एथेनॉल की मांग 100% होने से अब गन्ने की सीधी खपत एथेनॉल प्लांटों में होगी।

कच्चे तेल का आयात घटेगा, प्रदेश में पैदा होगा रोजगार
मध्य प्रदेश में वर्तमान में कई चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी और एथेनॉल प्लांट जुड़े हुए हैं। गडकरी के इस फैसले के बाद राज्य में नए एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में निवेश बढ़ेगा।
सस्ता और घरेलू ईंधन: चूंकि एथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी और घरेलू स्तर पर तैयार होता है, इसलिए इसे खाड़ी देशों से आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता भी पड़ेगा।
प्रदूषण से मुक्ति: मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में यह ईंधन मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि एथेनॉल से चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है।

डेढ़ महीने में आ रही हैं गाड़ियां, किसानों को मिलेगा ‘ग्रीन गोल्ड’ का दाम
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां अगले डेढ़ महीने में 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) बाजार में उतार रही हैं। जैसे ही ये गाड़ियां सड़कों पर आएंगी, ईंधन की मांग बढ़ेगी। जानकारों का मानना है कि इस नीति से मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गन्ना अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि ‘ग्रीन गोल्ड’ (हरा सोना) बन जाएगा, जिससे उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने विषयक विभागीय परामर्श कार्यशाला में होंगे शामिल

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘‘राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने’’ विषय पर सोमवार 15 जून को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में विभागीय परामर्श कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड और मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (एमपी-सीईआरटी) के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते साइबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ), तकनीकी विशेषज्ञ, नीति निर्माता, कानून एवं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस अवसर पर राज्य में साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने, सुरक्षित डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने और विभागीय स्तर पर साइबर सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

कार्यशाला में मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (एमपी-सीईआरटी) की भूमिका, राज्य स्तरीय साइबर सुरक्षा प्रबंधन रणनीति तथा विभागों के लिए उपलब्ध सुरक्षा सहायता तंत्र पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, डेटा गोपनीयता, डेटा प्रबंधन एवं अनुपालन संबंधी विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

कार्यशाला में डिजिटल अवसंरचना एवं नेटवर्क सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम, ई-गवर्नेंस प्रणालियों की सुरक्षा, एंडपॉइंट सुरक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल परिवर्तन में सुरक्षा उपायों जैसे विषयों पर तकनीकी प्रस्तुतियां दी जाएंगी। विशेषज्ञ विभागों के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं, व्यावहारिक अनुभवों एवं भविष्य की रणनीतियों को साझा करेंगे।

अधिकारियों एवं सीआईएसओ को विषयगत समूहों में विभाजित कर जोखिम मूल्यांकन, डेटा सुरक्षा, डीपीडीपी अनुपालन, लेगेसी सिस्टम आधुनिकीकरण और एमपी-सीईआरटी की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। समूहों की अनुशंसाओं के आधार पर राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

कार्यशाला साइबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने, डेटा संरक्षण को बढ़ावा देने एवं सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह डिजिटल प्रशासन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

 

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