धार में मूक-बधिर नाबालिग से पड़ोसी ने किया दुष्कर्म, गर्भवती होने पर पेट देख पिता ने पूछा तो रोने लगी

पीथमपुर/धार.

पीथमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक संवेदनशील व मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक युवक ने अपने पड़ोस में रहने वाली मूक-बधिर नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया। नाबालिग के गर्भवती होने पर बढ़ता पेट देख स्वजनों को शंका हुई और उससे इशारे में पूछा और फोटो दिखाने पर आरोपित के बारे में बताया।

पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, पक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार नाबालिग मूक-बधिर किशोरी का युवक के घर आना-जाना था। युवक ने इसका फायदा उठाते हुए किशोरी से कई बार दुष्कर्म किया। इससे किशोरी गर्भवती हो गई। इस बात का खुलासा 3 जून को हुआ जब पिता ने बेटी का पेट असामान्य रूप से बढ़ा हुआ देखा।

इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई
अनहोनी की आशंका होने पर जब माता-पिता ने इशारों में पूछताछ की, तो बेटी रोने लगी। इसके बाद इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई। पिता ने किशोरी को आरोपित का फोटो दिखाया तो उसने पहचान की। पहले पीड़िता का परिवार सामाजिक बदनामी और डर के कारण शांत रहा, पर बाद में हिम्मत जुटा कर 11 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया
पीड़िता के नाबालिग और दिव्यांग होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। वर्तमान में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसका सटीक कानूनी बयान दर्ज कराने के लिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। जिससे आरोपित को सख्त सजा दिलाई जा सके।

CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान: पुलिस विभाग में नहीं रहेगा एक भी पद खाली, हर साल होगी भर्ती की कोशिश

भोपाल.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि पूरी कोशिश है कि पुलिस के स्वीकृत पदों में एक भी रिक्त नहीं रहे। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। हां, पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे।

उन्होंने यह भी कहा कि संभागीय स्तर पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकें होंगी, जिनमें वह खुद भी उपस्थित रहेंगे। पुलिस मुख्यालय में शनिवार को आईजी कांफ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा, थानों में शुचिता का माहौल रहे। पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, गश्त बढ़ाएं। देखें कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए। वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण करें और निगरानी भी करें। वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए। यह देखा जाए कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत करे। कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित निगरानी होगी। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, समस्त जोनल पुलिस महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

साइबर अपराधों की रोकथाम को दें सर्वोच्च प्राथमिकता- सीएम
सीएम ने आगे कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरुकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए।

सांप्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा, धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को प्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। सांप्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा।

टेक्सस के मिडलैंड में गोलीबारी, 1 की मौत और 10 घायल; संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ में ढेर

 टेक्सस
 टेक्सस के मिडलैंड में हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई और कम से कम 10 लोग घायल हो गए। संदिग्ध हमलावर, जिसकी पहचान 45 साल के विक्टर माटा विलेरियल के रूप में हुई है, बाद में पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद मृत पाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि हमला स्थानीय समयानुसार, सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ, जब पुलिस को एक शूटर की जानकारी मिली। टेक्सस डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक सेफ्टी के अनुसार, संदिग्ध ने राहगीरों और अधिकारियों पर गोलीबारी की।

संदिग्ध ने पहले भी चलाई थी पुलिस पर गोली
अधिकारियों ने बताया कि विलेरियल पहले से ही ‘कैपिटल मर्डर’ के प्रयास के मामले में वांछित था, क्योंकि उसने सप्ताह की शुरुआत में कार का पीछा किए जाने के दौरान कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई थी। पुलिस ने बताया कि अधिकारी ने बुधवार को उसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन विलेरियल ने कई बार गोली चलाई और भाग गया। बाद में उसकी गाड़ी लावारिस हालत में मिली।

अधिकारियों ने कहा कि यह वह व्यक्ति था जिसकी हम पहले से ही तलाश कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार की गोलीबारी पिछली घटना से ज्यादा दूर नहीं हुई थी।

हमलावर ने खुद को क्लिनिक में बंद किया
शुक्रवार की गोलीबारी के बाद, विलेरियल ने खुद को एक बंद पड़े पशु चिकित्सा क्लिनिक के अंदर बंद कर लिया। पुलिस ने इमारत को घेर लिया और इलाके को खाली कराने का काम किया।

मिडलैंड पुलिस प्रमुख ग्रेग स्नो ने बताया कि जब अधिकारी वहां पहुंचे तो उन पर गोलीबारी की गई। उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को अपनी गश्ती गाड़ियों के पीछे छिपना पड़ा और उन्हें बचाने के लिए बख्तरबंद गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़ा। किसी भी अधिकारी को चोट नहीं आई।

अधिकारियों ने इमारत में घुसने के लिए रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल किया और बाद में पुष्टि की कि संदिग्ध अंदर मृत पाया गया।

10 लोग घायल
घायल हुए दस लोगों को मिडलैंड मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। चार लोगों को सर्जरी की जरूरत पड़ी, जबकि अन्य की हालत स्थिर बताई गई। कुछ लोगों को बाद में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अधिकारियों ने पीड़ितों के बारे में या गोलीबारी की वजह के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं की है। मिडलैंड की मेयर लोरी ब्लॉन्ग ने समुदाय से प्रभावित लोगों का समर्थन करने का आग्रह किया।

ओमान के डुक्म बंदरगाह पर भारतीय नाविक की मौत, अमेरिकी नौसेना पर मदद न करने का आरोप

मस्कट
 ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक पोत पर सवार एक भारतीय नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के रूप में की गई है। उसने बताया कि जब निशांत की मौत हुई उस समय वह मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल सी पर सवार थे। खुलासा हुआ है कि एमटी सेलेस्टियल के क्रू ने रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए अमेरिकी नौसेना के बार-बार मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। अब दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना मृतक नाविक निशांत उर्थनाथन के शव को निकालने की अनुमति नहीं दे रही है

अमेरिकी नौसेना से कई बार मांगी गई मदद
स्पुतनिक इंडिया ने एमटी सेलेस्टियल सी शिप के रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना को मदद के लिए बार-बार कॉल किया। इसमें भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन को बहुत ज्यादा उल्टी होने की रिपोर्ट दी गई। लेकिन, अमेरिकी नौसेना की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में 11 जून को निशांत उर्थनाथन की सांसें रुक गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी नौसेना अभी भी लाश को निकालने की इजाजत नहीं दे रही है।

एमटी सेलेस्टियल शिप के कैप्टेन ने घटना के बारे में बताया
रिपोर्ट में एमटी सेलेस्टियल सी शिप पर हुई घटना को लेकर एक लेटर भी शेयर किया गया है। इसमें जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव समेत कई दूसरे कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा है, “यह सूचित किया जाता है कि निशांत उर्थनाथन, पीपी क्रमांक 58104330, रैंक द्वितीय अधिकारी, ने 08.06.2026 को दोपहर 12:00 बजे अस्वस्थता और लगातार उल्टी होने की सूचना दी। उन्होंने कंपनी कार्यालय को सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को फोन करके रोगी की स्थिति के बारे में बताया

लगातार उल्टी से पीड़ित था भारतीय नाविक
उन्होंने आगे लिखा, “शाम तक द्वितीय अधिकारी के स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उल्टी की तीव्रता बढ़कर हर 5-10 मिनट में होने लगी। उन्हें ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। शाम 4:00 बजे उन्होंने फिर से उल्टी कर दी। शाम 7:00 बजे उन्हें फिर से ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। रात 11:00 बजे एक बार उल्टी हुई। उस रात उल्टी नहीं हुई। 09.06.2026 को भी उल्टी नहीं हुई, केवल पेट और शरीर में दर्द था। उसे तरल दाल, चावल, ओआरएस और पानी पिलाया जा रहा था।”

अमेरिकी नौसेना ने नहीं की मदद
लेटर में आगे लिखा है, “10.06.2026 को हमने उन्हें तरल पदार्थ, भोजन और पानी दिया। हमने कंपनी को लगातार सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को भी लगातार फोन करके बीमार मरीज की स्थिति के बारे में बताया, लेकिन फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, हमने दवाएं दीं और वीएचएफ चैनल 16 के माध्यम से एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के ज़रिए तटवर्ती सहायता का प्रयास किया।”

शिप ने कई बार अमेरिकी नौसेना से संपर्क साधा
लेटर के अनुसार, “11 जून 2026 की सुबह 6 बजे उन्होंने पानी और भोजन लेना बंद कर दिया। डीआई की सलाह के अनुसार, कंपनी को लगातार सूचना दी गई। हमने दवाइयां दीं और एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के माध्यम से वीएचएफ चैनल 16 पर तटवर्ती सहायता का प्रयास किया। दोपहर 12 बजे लंगर उठाकर ओमान के निकटतम बंदरगाह दुकुम की ओर बढ़ना शुरू किया। दुकुम, ओमान के बंदरगाह नियंत्रण को फोन करके द्वितीय अधिकारी के चिकित्सा निकासी की आवश्यकता बताई गई।”

जहाज पर फंसा है भारतीय नाविक का शव
जहाज के कप्तान ने बताया, “बंदरगाह नियंत्रण ने दुकुम में स्थानीय एजेंट से संपर्क किया। दोपहर 2 बजे तक कंपनी ने हमें एजेंट का विवरण दिया। हमने यह जानकारी दुकुम बंदरगाह नियंत्रण को दे दी। दोपहर 3 बजे के बाद वह बेहोश हो गया, शाम 5 बजे पता चला कि उसकी सांसें रुक गई हैं। उसे कई बार सीपीआर दिया गया, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और उसकी नब्ज जांची गई, जो उस समय ठीक थी। बाद में शाम 6 बजे पता चला कि उसकी नब्ज भी रुक गई है। कंपनी से लगातार संपर्क में है लेकिन हेलीकॉप्टर से बचाव नहीं हो पाया है।”

 

अमेरिका-ईरान पीस डील का ड्राफ्ट तैयार, परमाणु कार्यक्रम और तेल प्रतिबंध पर बड़ी सहमति के संकेत

नई दिल्ली
अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील को लेकर महीनों से चल रही खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (पीस डील) का एक ड्राफ्ट सामने आया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार, होर्मुज स्ट्रेट और अरबों डॉलर फ्रीज किए हुए तक कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान ने यह वादा किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य तरीके से उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा. यह अमेरिका की सबसे बड़ी मांगों में से एक रही है.

ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर पर संवर्धित (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम का संवर्धन स्तर भी कम किया जाएगा. हालांकि यह प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. दोनों पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर इसकी तकनीकी रूपरेखा तय करेंगे.

25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड ईरान कर पाएगा हासिल
इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण ईरान के फ्रीज्ड फंड को लेकर है. ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है. इसमें डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय देशों के सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं.

इसके अलावा अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में भी छूट देगा. इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल बेच सकेगा और उससे होने वाली कमाई अपने पास रख सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दे सकता है, जो वर्षों से पश्चिमी प्रतिबंधों की मार झेल रही है.

डील पर साइन होने के बाद खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट
डील में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोल देगा. इसके बदले अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा.

अगर यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है. पिछले कई महीनों से होर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है. निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं.

समझौते की टाइमिंग अब भी तय नहीं!
समझौते को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं. वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर की तैयारियां चल रही हैं और इसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी.

लेकिन दूसरी तरफ ईरान के भीतर इस समझौते को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. कट्टरपंथी समूहों और कुछ राजनीतिक धड़ों ने डील के समय और शर्तों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता.

फिलहाल यह ड्राफ्ट समझौता अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन अगर दोनों पक्ष इस पर सहमत हो जाते हैं तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी. इससे न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

नागौद गोलीकांड में बाबा राजा का बड़ा खुलासा, बोले- ‘सुनीता सिंह न पत्नी है, न प्रेमिका; सिर्फ बिजनेस पार्टनर’

सतना.

नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में 11 जून को हुए चर्चित गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है। घटना के चार दिन बाद रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा पहली बार मीडिया के सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम में अपना पक्ष रखा।

रुपेन्द्र सिंह ने बताया कि सुनीता को बार-बार मेरी दूसरी पत्नी व प्रेमिका बताया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं है वह न तो मेरी दूसरी पत्नी है न ही प्रेमिका। बल्कि सुनीता सिंह केवल उनकी वर्किंग पार्टनर व पेट्रेाल पम्प की बतौर मैनेजर कार्यरत है।

सुनीता ने डिफेंस में चलाई गोली- बाबा राजा
रुपेन्द्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने दावा किया कि घटना के दौरान उनके साथ पत्नी योगिता सिंह, साले और अन्य लोगों ने मारपीट की। उनके अनुसार दोपहर करीब 3:30 बजे विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्हें धक्का देकर गिराया गया, चश्मा टूट गया और फोटो फ्रेम लगने से वे घायल हो गए। रूपेंद्र सिंह ने कहा कि सुनीता सिंह उनके पेट्रोल पंप की मैनेजर और बिजनेस पार्टनर हैं।

उनके मुताबिक मारपीट और धमकियों के बीच सुनीता ने आत्मरक्षा में दीवार की ओर फायरिंग की। उनका दावा है कि दीवार से टकराकर निकली गोली योगिता सिंह को लगी। उन्होंने कहा कि किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था। बाबा राजा ने अपनी सास के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थीं।

धारा नौ के तहत दायर है तलाक का प्रकरण
रूपेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि वैवाहिक संबंधों को बचाने के लिए उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत न्यायालय में मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि पत्नी और ससुराल पक्ष की नजर उनकी संपत्ति पर है।

ओमान के डुक्म पोर्ट पर भारतीय नाविक की मौत, शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू

 नई दिल्ली
मस्कट में भारतीय दूतावास ने शनिवार देर रात बताया कि ओमान के डुक्म पोर्ट पर खड़े जहाज ‘एमटी सेलेस्टियल’ पर एक भारतीय नागरिक की मेडिकल दिक्कतों के कारण मौत हो गई।

दूतावास ने मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के तौर पर की है। दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।” साथ ही यह भी बताया गया कि उनका शव अभी डुक्म पोर्ट पर मौजूद जहाज पर ही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के शिपिंग बेड़े में 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम करते हैं। देश के शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते बताया था कि मिडिल ईस्ट में 18,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।

अमेरिकी हमले में मारे गए थे तीन भारतीय नाविक
यह मौत ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिसकी वजह से जनता और विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की थी। विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस हफ्ते के आखिर में होने वाले ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाएं।

विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने “नागरिक शिपिंग के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता” जाहिर करने के लिए अमेरिका के ‘चार्ज डी’अफेयर्स’ (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया था। ‘फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया’ ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की 11 जून को मौत हो गई थी। उनका शव बिना सही रेफ्रिजरेशन के दो दिन से ज्यादा समय तक जहाज पर ही रखा रहा।

यूनियन ने कहा, “क्रू सदस्य शव को सड़ने से बचाने की कोशिश में ठंडे पानी की बोतलों का इस्तेमाल कर रहे हैं यह एक डरावनी और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी स्थिति है।”

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया तेज, फिटमेंट फैक्टर पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली
8वें पे कमीशन को लेकर अब प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। वित्त आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। कर्मचारी संगठनों से लगातार राय मांगी जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह वित्त आयोग की बैठकों और इससे जुड़ी जानकारी पर बनी हुई है।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर सबसे अधिक निगाह है। 6वें और 7वें वित्त आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर ही केंद्र में रहा था। इसी से सैलरी संशोधन, डीए अन्य सभी कैलकुलेट किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी 2014 को 7वें वित्त आयोग का गठन किया गया था। लेकिन इसके लागू होने में 21 महीने का समय लगा था। 19 नवंबर 2015 को 7वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट जमा की थी।

8वें वित्त आयोग की बात करें तो इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय है। रिपोर्ट्स के अनुसार पे कमीशन 25 जुलाई 2027 तक सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तय रिपोर्ट को जमा कर सकता है। जिसपर अंतिम फैसला सरकार की तरफ से लिया जाएगा।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
एक तरह से फॉर्मूला होता है जिसके कैलकुलेशन के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का पता चलता है। इसी फॉर्मूला के जरिए पुराने बेसिक पे की जगह नया रिवाइज बेसिक सैलरी तय किया जाता है।
कैसे प्रयोग होता है फॉर्मूला?

मौजूदा बेसिक पे x फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक पे
सातवें बेसिक पे के वक्त पर फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। जिसके बाद मिनिमम बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये के स्तर पर पहुचं गया। बता दें, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में हर 10 साल में एक बार इजाफा होता है।

इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर रह सकता है?
अभी तक 8वें पे कमीशन के लिए कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2.28 से 3.83 फिटमेंट फैक्टर इस बार तय किया जा सकता है।

पहले के समय में फिटमेंट फैक्टर नहीं हुआ करता था। जिसकी वजह से पे कमीशन की तरफ से सैलरी रिवीजन के लिए अलग-अलग फैक्टर्स को आधार बनाया जाता था। जिसके बाद कोई फैसला होता था। हालांकि, तब भी मूल में कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और भत्ता ही होते थे। जिसे मार्केट के अनुसार बढ़ाया जाता था। बता दें, 8वें पे कमीशन के फैसलों का असर 1.1 केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा।

टीएमसी में बड़ा फेरबदल, सायोनी घोष को युवा मोर्चे से हटाया गया

पश्चिम बंगाल
बंगाल में चुनाव के बाद टीएमसी में शुरू हुए बड़े संकट के बीच ममता बनर्जी पार्टी में बड़े बदलाव करने में जुटी हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान ‘काबा-मदीना’ और अन्य गीत गाकर जनता को लुभाने की कोशिश करने वाली सायोनी घोष को युवा मोर्चे के अध्यक्ष पद से हटा दिया है और यह जिम्मेदारी अर्णब बनर्जी को दे दी है। सायोनी घष जादवपुर से सांसद हैं। उन्हें एक सप्ताह पहले ही युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गाय था।

सायोनी घोष भी बागी गुट में शामिल
सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने महिाल मोर्चे की अध्यक्ष को भी बदल दिया है।कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब ममता बनर्जी ने नाडिया जिले की कालीगंज सीट से विधायक आलिफा अहमद को महिला मोर्चे का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि सायोनी और माला रॉय दोनों ही बागी नेताओं के साथ शामिल हो गई हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर अपने गुट को ‘वास्तविक टीएमसी’ घोषित करने का दावा पेश कर सकते हैं।

लोकसभा में एनडीए के समर्थन को तैयार बागी गुट
जानकारी के मुताबिक सांसद संदीप बंधोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल हो गए हैं। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसद हैं जिनमें से 20 बागी गुट में शमिल हैं। सांसद काकोली गोष दस्तीदार ने तो यहां तक कह दिया है कि उनके गुट को टीएमसी का तमगा मिलते ही वे संसद में बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का समर्थन कर देंगे।

बता दें कि विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद ही ममता बनर्जी ने 5 जून को संगठन समिति में बदलाव किए थे। ममता बनर्जी ने पहले की सारी समितियों को भंग कर दिया था और एक नया स्टरक्चर बनाया था। वहीं ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा था। एक राज्यसभा सांसद ने कहा, ममता बनर्जी ने जिन लोगों को दूध और शहद खिलाया वही आज उनके लिए सांप बन गए हैं। बालाघाट से सांसद कुणाल घोष को पार्टी के उत्तर कोलकाता संगठन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पहले इस पद पर संदीप बंधोपाध्याय थे।

चर्चा यह भी चल रही है कि ममता बनर्जी टीएमसी के कांग्रेस में विलय की घोषणा कर सकती हैं। हालांकि डेरेक ओ ब्रायन ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रायन ने कहा, ‘मैं टीएमसी के किसी दूसरी पार्टी में विलय की इस फर्जी खबर को खारिज करना चाहता हूं। यह निराधार है। हां, मेरे दोस्त केसी वेणुगोपाल ने इसके लिए बिल्कुल सही शब्द इस्तेमाल किया है।’

संविदा कर्मियों के तबादले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका खारिज

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण (तबादले) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट की एकल पीठ ने साफ किया है कि शासकीय सेवाओं में ट्रांसफर और पोस्टिंग नौकरी का एक अनिवार्य व स्वाभाविक हिस्सा है।

किसी भी संविदा कर्मचारी का तबादला किस स्थान पर किया जाना चाहिए, यह तय करना पूरी तरह से संबंधित सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) का विशेषाधिकार है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के एक संविदा कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से साफ इंकार कर दिया है।

इस प्रकार से समक्षें क्या है पूरा मामला
प्रशासनिक विशेषाधिकार बहाल: हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण पूरी तरह से कार्यपालिका (Executive) का काम है, जिसमें न्यायपालिका सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं करेगी। दुर्भावना सिद्ध करना अनिवार्य: अदालत के रुख से साफ है कि ट्रांसफर रुकवाने के लिए केवल संविदा होने का तर्क काफी नहीं है, बल्कि आदेश के पीछे किसी दुर्भावना या नियम के उल्लंघन को साबित करना होगा।

अनुच्छेद 226 का हवाला: चीफ जस्टिस की मंशा के अनुरूप कोर्ट ने रिट क्षेत्राधिकार के सीमित उपयोग पर जोर दिया, खासकर तब जब निर्णय किसी विशेषज्ञ वैधानिक संस्था द्वारा लिया गया हो। मुंगेली के संविदा कर्मी को झटका: स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 मई 2026 को किए गए इस अंतर-जिला ट्रांसफर के बाद अब याचिकाकर्ता को नए जिले में ज्वाइनिंग देनी ही होगी।

हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका और ये कहा
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है, शासकीय सेवाओं में ट्रांसफर और पोस्टिंग नौकरी का एक स्वाभाविक हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को स्थानांतरण के मामलों में हस्तक्षेप करने का बहुत ही सीमित अधिकार है, खासकर तब जब निर्णय किसी विशेषज्ञ वैधानिक संस्था द्वारा लिया गया हो। कोर्ट ने राज्य शासन के स्थानांतरण आदेश में किसी प्रकार की अवैधता या विधिक त्रुटि ना होने की बात कहते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

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