ईरान में शांति समझौते के खिलाफ सड़क पर उतरे कट्टरपंथी, विदेश मंत्री अराघची के खिलाफ लगे इस्तीफे के नारे

 नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी जंग सुलझती नजर आ रही है, लेकिन अब ईरान में अमेरिका के साथ शांति समझौते के खिलाफ विरोध के सुर फूट रहे हैं। कट्टरपंथी ईरानियों का गुस्सा इस डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सांसद गालिबाफ के खिलाफ निकल रहा है। शनिवार को ईरान के कई शहरों में इन दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हई और शांति समझौते का विरोध किया गया। ईरान में यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर शेखी बघार रहा है। ट्रंप ने यहां तक कहा है कि ईरान के साथ समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है।

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में शांति समझौते को लेकर दो पक्ष बंटे हुए हैं। एक तरफ कुछ लोग शांति समझौते के लिए राजी हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस युद्ध में शहीद सुप्रीम लीडर और तमाम साथियों का बदला चाहते हैं। शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। उसी दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने नारे बाजी शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में कई महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने काले चाहत पहने हुए थे और वह लाल झंडे लिए नारे लगा रही थीं।

इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें प्रदर्शन कारी डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, झुकना बंद करो और अराघची इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाती सुनी जा सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मसहद के एक निवासी ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अराघची का विरोध कर रहे थे।

अराघची के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा
एएफपी की रिपोर्ट के मताबिक, ईरान में इस शांति समझौते को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का तर्क यह है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका झुक गया है तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर समझौता करने की जरूरत क्या है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के हितों को नहीं साधता। इससे होर्मुज पर भी ईरान की पकड़ कमजोर हो सकती है। भले ही प्रदर्शनकारी अराघची के ऊपर ईरान के साथ धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों लेकिन अराघची लगातार ईरान के पक्ष में बातचीत करने का दावा कर रहे हैं।

अराघची और गालिबेफ के खिलाफ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब दोनों ही पक्षों की तरफ से शांति समझौते को लेकर आम राय बन रही है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि जल्दी ही अमेरिका के साथ ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि जल्दी ही समझौता हो सकता है। ट्रंप ने भी अपने 80वें जन्मदिन के दिन समझौता करने दावा किया है।

विकासनगर हिंसा: युवक की मौत के बाद भड़का बवाल, आरोपी का घर फूंका, इंटरनेट सेवा बंद

उत्तराखंड
उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है.

इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है.

इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं.

इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए.

घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई.

गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली.

घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक
घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया.

अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है.

घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा?
इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

EPFO Update: पीएफ खाताधारकों का इंतजार खत्म? ब्याज की रकम जमा होने को लेकर आया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के सदस्य अपने पीए खाते में ब्याज का पैसा जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. FY2025-26 के लिए पीएफ की ब्याज दर (PF Interest Rate) को यथावत रखा गया है, जो 8.25% है. इसे स्थिर रखने का फैसला लिए गए दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसा ईपीएफओ सदस्यों के खाते में जमा नहीं हुआ है. अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 

बीते मार्च 2026 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 2 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीटी ने सिफारिश की कि ब्याज को सदस्यों के ईपीएफ खाते में वित्तीय वर्ष के लिए जमा किया जाए। 
 
कब तक PF खाते में जमा होगा पैसा? 
EPFO Interest के खाते में जमा करने का इंतजार कर रहे सदस्यों के लिए बता दें कि अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है और न ही कोई संभावित तारीख घोषित की गई है. लेकिन अगर, पीएफ में ब्याज का पैसा आने के पिछले रुझानों पर नजर डालें, तो संकेत मिल रहा है कि ये जून और सितंबर के बीच किसी भी समय डाला जा सकता है। 

ब्याज की राशि ईपीएफओ सदस्यों के खातों में तभी जमा की जाती है जब केंद्र सरकार से सिफारिश को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है और इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए राशि जमा करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। 

पिछले वर्ष, कई ग्राहकों को जून और जुलाई में खाते में ब्याज मिला था. हालांकि, इसे लेकर सटीक समय अलग-अलग हो सकता है. सदस्यों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि पीएफ ब्याज की जानकारी सभी ईपीएफ पासबुक में एक साथ दिखाई नहीं देती है, मतलब कुछ सदस्यों को यह अपडेट दूसरों की तुलना में पहले दिखाई दे सकता है और कुछ को बाद में। 

क्या देरी से ब्याज पर असर पड़ेगा?
इस उत्तर है नहीं, पासबुक अपडेट में देरी होने पर भी, ग्राहकों को उनका पूरा ब्याज मिलता है. EPF Scheme 1952 के अनुच्छेद 60 के तहत पीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक चालू शेष पर होती है, जिसपर सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है. इसलिए, पासबुक में ब्याज दर्शाने में किसी भी प्रशासनिक देरी से सदस्यों को मिलने वाली रकम पर कोई असर नहीं पड़ता है। 

PF खाते में आया ब्याज, ऐके करें चेक
EPFO द्वारा अपने सदस्यों को कई ऑप्शन दिए गए हैं, जिनके जरिए वे अपने पीएफ खाते में ब्याज की रकम आने पर इसे आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) या एसएमएस सुविधाएं (EPFO SMS Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं। 

 

उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका? 6 सांसदों की बगावत की चर्चा तेज, शिंदे खेमे की बढ़ी सक्रियता

मुंबई

संसद में अपना संख्या बल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत से नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं. टीएमसी के बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने का दावा किया है और ये सभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने को तैयार हैं. अगर यह दावा सही साबित होता है तो संसद में NDA की ताकत बढ़ेगी और उसके लिए कई महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है। 

दरअसल, पिछले संसद सत्र में एनडीए को संविधान संशोधन से जुड़े कुछ अहम विधेयकों पर बहुमत नहीं मिलने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. ऐसे में गठबंधन अब विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की संभावनाएं तलाश रहा है. सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर भी नजरें टिक गई हैं। 

उद्धव सेना में टूट की अटकलें तेज
रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा जोरों पर है कि महाराष्ट्र में महायुति की विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी में असंतोष गहराता जा रहा है. अब यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि पार्टी के कुछ सांसद अलग राह चुन सकते हैं. लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं और दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को किसी अन्य दल में विलय करना होगा। 

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर ऐसा कोई कदम उठता है तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है. माना जा रहा है कि शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्यभर में अपना संगठनात्मक आधार मजबूत किया है और कई स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है. वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से मुंबई और कुछ शहरी इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है। 

‘विचारधारा बदलने का खामियाजा भुगत रहे उद्धव’
शिवसेना (यूबीटी) गुट के सांसदों के एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों पर बीजेपी नेता राम कदम ने बड़ा बयान दिया है. ANI से बातचीत में कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे विचारधारा बदलने का खामियाजा पहले ही भुगत चुके हैं और आगे भी भुगतेंगे. उन्होंने कहा कि उनके सभी नेता निश्चित रूप से उन्हें छोड़ देंगे. राम कदम ने कहा, ‘जिस तरह ममता बनर्जी ने अपनी विचारधारा बदली और उसका असर उद्धव ठाकरे पर भी पड़ा और उन्होंने भी अपनी विचारधारा बदल ली, तो विचारधारा बदलने का नुकसान उद्धव ठाकरे पहले भी झेल चुके हैं और भविष्य में भी झेलेंगे. उनके सभी नेता उन्हें छोड़ देंगे, यह तय है। 

360 के आंकड़े पर NDA की नजर
सूत्रों के मुताबिक, संसद में एनडीए की आगे की रणनीति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के कितना करीब पहुंच पाता है. वर्तमान में 540 सदस्यीय लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं और किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है. टीएमसी में संभावित टूट और विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के समर्थन की संभावनाओं ने एनडीए को उम्मीद दी है कि वह भविष्य में अपने संख्या बल को और मजबूत कर सकता है। 

कौन बनेगा छत्तीसगढ़ यूथ कांग्रेस का नया अध्यक्ष? संगठन में चुनावी सरगर्मी तेज

रायपुर 
छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के नए मुखिया की खोज तेज हो गई है, जिसे लेकर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में दावेदारों के साक्षात्कार का दौर शुरू हो चुका है. अलग-अलग जिलों से आए 35 से अधिक युवा नेता इस रेस में शामिल होने के लिए देश की राजधानी पहुंचे हैं. इस इंटरव्यू प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले अंतिम प्रत्याशियों की सूची तय की जाएगी, जिसके बाद ही मतदान की रूपरेखा स्पष्ट होगी। 

इस बार मुकाबले को केवल दो ध्रुवों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बिठाने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला और अल्पसंख्यक वर्ग के चेहरों को भी पूरा मौका दिया जा रहा है, जिससे अंतिम चरण में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। 

इस पूरे चुनावी घमासान के बीच भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गुटों के बीच खींचतान की खबरें भी हवाओं में हैं। 

हालांकि, इन अटकलों को खारिज करते हुए देवेंद्र यादव ने साफ किया कि वरिष्ठ नेता हमेशा युवाओं को रास्ता दिखाते हैं और वे चुनाव में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करते। 

उन्होंने इसे गुटबाजी के बजाय एक स्वस्थ पारिवारिक प्रतिस्पर्धा करार दिया और खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी एनएसयूआई की छात्र राजनीति से निकलकर ही आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं. उन्होंने सभी युवा कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद भुलाकर सदस्यता अभियान को गति देने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की अपील की है। 

राजनीतिक गलियारों में इस समय दो नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं गर्म हैं, जिनमें पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले विनयशील का है। 

विनयशील के पक्ष में सबसे मजबूत कड़ी यह है कि उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र कुनकुरी की नगर पंचायत में जीत दर्ज की थी, जिसे उनकी मजबूत सांगठनिक पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है। 

वहीं दूसरी ओर, विधायक देवेंद्र यादव के खेमे से बलौदाबाजार के शैलेंद्र बंजारे का नाम प्रमुखता से उछाला जा रहा है. शैलेंद्र को यादव का बेहद विश्वसनीय सिपहसालार माना जाता है और उनके समर्थकों में उनकी उम्मीदवारी को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं है. अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व अंततः किन दो-तीन नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगाता है। 

 

रेलवे प्लेटफॉर्म पर ‘ठंडा-ठंडा कूल-कूल’ इंतजाम, फोगर और वॉटर स्प्रिंकलर से यात्रियों को AC जैसी राहत

बिलासपुर
 भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बिलासपुर जंक्शन पर विशेष व्यवस्था की है। स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर और हाई-प्रेशर मिस्टिंग सिस्टम (फोगर) लगाए गए हैं, जिनसे लगातार पानी की बारीक फुहारें छोड़ी जा रही हैं। इससे प्लेटफॉर्म का तापमान कम हो रहा है और यात्रियों को गर्मी से काफी राहत मिल रही है।

बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 सहित अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन के जरिए मिस्टिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। फोगर से निकलने वाली पानी की बेहद महीन बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को ठंडा करती हैं, जिससे यात्रियों को चिलचिलाती धूप के बीच भी अपेक्षाकृत ठंडक का एहसास होता है।

गर्मी से परेशान यात्रियों ने रेलवे की इस पहल की सराहना की है। यात्री प्लेटफॉर्म पर पड़ रही फुहारों का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था गर्मी के दौरान सफर को अधिक आरामदायक बना रही है। रेलवे ने सिर्फ फोगर सिस्टम ही नहीं लगाया है, बल्कि यात्रियों के लिए ठंडे पेयजल और शरबत की व्यवस्था भी की है। अधिकारियों के अनुसार गर्मी के मौसम में यात्रियों को अधिकतम राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

प्रदेश के इन रेलवे स्टेशनों पर भी व्यवस्था लागू
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा बिलासपुर के अलावा रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई है। रेलवे का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव के प्रभाव को देखते हुए इस तरह की सुविधाएं यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।

    बिलासपुर स्टेशन पर यात्रियों के लिए किए गए विशेष इंतजाम
    प्लेटफॉर्म पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया।
    हाई-प्रेशर मिस्टिंग और फोगर सिस्टम से ठंडी फुहारें छोड़ी जा रही हैं।
    यात्रियों के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था।
    हीटवेव के दौरान प्लेटफॉर्म का तापमान कम करने का प्रयास।
    सोशल मीडिया पर रेलवे की इस पहल की जमकर तारीफ।

भीषण गर्मी में काफी मिल रही राहत
सोशल मीडिया पर भी बिलासपुर स्टेशन के फोगर सिस्टम के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे रेलवे का यात्री हित में उठाया गया अभिनव और सराहनीय कदम बता रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच प्लेटफॉर्म पर मिल रही यह ठंडी फुहारें यात्रियों के लिए किसी राहत भरी बारिश से कम नहीं हैं।

प्रमुख प्लेटफॉर्मो पर लगाए गए हैं हाई प्रेशर मिस्ट शावर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 समेत प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन बिछाकर हाई-प्रेशर मिस्ट शावर लगाए गए हैं। इनसे निकलने वाली पानी की बेहद बारीक बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को तेजी से ठंडा करती हैं, जिससे प्लेटफॉर्म पर तापमान में उल्लेखनीय कमी महसूस होती है।

गौरतलब है कि इस बार देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है। ऐसे में रेलवे द्वारा अपनाया गया यह ‘कूलिंग मॉडल’ यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी व्यवस्था के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इसे रेलवे का स्मार्ट व यात्री हितैषी कदम बता रहे हैं।

बॉक्सिंग वर्ल्ड कप के लिए मध्यप्रदेश की मुक्केबाज माही लामा का भारतीय टीम में चयन

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी, भोपाल की प्रतिभावान मुक्केबाज माही लामा का चयन चीन में आयोजित होने वाले World Cup of Boxing 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। माही लामा 60 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 15 से 20 जून 2026 तक चीन में आयोजित की जाएगी, जिसके लिए भारतीय दल आज रात चीन के लिए रवाना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति

माही लामा का भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर और राज्य बॉक्सिंग अकादमी में उपलब्ध कराए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रमाण है। विश्व स्तरीय इस प्रतियोगिता में उनकी सहभागिता प्रदेश के लिए गौरव का विषय है तथा यह राज्य में विकसित हो रही उत्कृष्ट खेल संस्कृति को भी दर्शाता है।

कठोर परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम

माही लामा ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई है। उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्हें भारतीय टीम में स्थान प्राप्त हुआ है। अब वे विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगी।

प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत

माही लामा की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, नियमित अभ्यास और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। उनकी उपलब्धि प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी।

खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माही लामा चीन में आयोजित बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण

“समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में

भोपाल 

प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर “विकसित मध्यप्रदेश” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा।

कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा।

मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। “समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

भारतीय क्रिकेट टीम में चुने गए लोकेंद्र आर्य, कभी गांव वाले कहते थे- ‘लंगड़ा बेटा किसी काम का नहीं’

बड़वानी
‘गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते।’
यह कहना है बाएं पैर से दिव्यांग लोकेंद्र आर्य का। उनका सिलेक्शन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में होने वाले केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे।

सिलेक्शन के बाद लोग बधाई देने घर आ रहे हैं। मिठाई खिला कर फूल माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं। पिता रूमा आर्य पेशे से किसान हैं। बड़वानी जिले में सेंधवा के मोरदड़ गांव पहुंची। यहां लोकेंद्र और पिता से बात करके उनका सफर जानने की कोशिश की।

क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे लोग
यहां टीले पर बने कच्चे मकान के सामने बड़ा सा शामियाना लगा है। चारपाई के साथ 20-25 कुर्सियां रखी हैं। घर के बाहर फूलों की मालाएं और गुलदस्ते लिए किसी का इंतजार कर रहे हैं।

इतने में घर के अंदर से एक 27 साल का युवक एक पैर से लंगड़ाते हुए बाहर आया। माला और गुलदस्ता लिए खड़े लोग उसे एक-एक कर माला पहनाते और फोटो खिंचवाने लगता है। ये वही लोग हैं, जो इसे कभी लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके पिता से कहते- ऐसा बेटा पैदा किया है, किसी काम का नहीं है। ये क्या करेगा।

दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया।

लोग बोलते- हमारे बच्चों को बिगाड़ देगा
लोकेंद्र कहते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं सुना और सहा है, ये मैं ही जानता हूं। लोगों के तानों से परेशान होकर पिताजी बचपन में ही विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे। वे भी क्या करते, ताने और घर के हालत ऐसे नहीं थे कि मेरी इलाज और पढ़ाई के साथ देखभाल कर पाते। सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही कट जाएगी।

क्रिकेट खेलने का शौक, तो तीन-चार साल की उम्र से ही था। खड़ा तो ठीक से हो नहीं पाता था, लेकिन प्लास्टिक का बैट जरूर अपने पास ही रखता था। थोड़ा बड़ा हुआ, तो लकड़ी के पल्ले को बैट बना लिया। अपने गांव के हम उम्र बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी भी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते। छोटा था, इसलिए कुछ समझ नहीं पाता था।

आश्रम से मिली नई राह और जिंदगी
विकलांग सेवा आश्रम में शुरुआती दिन मुश्किल से कटे। हर पल मां की याद आती थी। सोचता था, मेरा पैर ऐसा क्यों है? क्यों मैं अपने दोनों छोटे भाइयों की तरह अपने घर में रह सकता। आश्रम पहुंचा, तो वहां सीनियर्स को क्रिकेट खेलते देखा। मन को तसल्ली हुई। धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ मैं भी क्रिकेट खेलने लगा। वहां जो हमारे वार्डन थे, वो हमेशा मोटिवेट करते। जितनी पढ़ाई करना हो करो, जितना खेलना हो खेलो।

कबीर के दोहे ने दी प्रेरणा
आश्रम में हम लोग प्रार्थना भी करते थे। कबीर ग्रंथावली का एक दोहा है- मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ पहले तो इस दोहे को ऐसे ही दोहरा लेते थे। लेकिन, जब इसका अर्थ समझ आया, तो अमल करना शुरू कर दिया। सोच लिया कि अब किसी भी हालत और कीमत में अपने आपको और अपने मन को कभी हारने नहीं देना है।

लोकेंद्र कहते हैं कि 2021 में विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग क्रिकेटर टीम के कप्तान ब्रजेश द्विवेदी के बारे में पता चला। उनके बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला वे IIT इंदौर में नौकरी करते हैं। दो-तीन दिन बाद उनसे मिलने IIT इंदौर पहुंच गया। उन्हें क्रिकेट को लेकर अपने जुनून के बारे में बताया। उन्होंने मेरा ट्रायल कराया। इसके कुछ महीने बाद ही खास तौर से हमारे लिए सतपुड़ा डिवीजन के नाम से टीम बन गई।

चंदे से खरीदी पहली किट
शुरुआत में लेदर बॉल से खेलने के दिक्कत हुई। किट भी नहीं थी। दोस्तों ने चंदा जमा कर किट की व्यवस्था की। शुरुआत में सेंधवा के किला परिसर स्थित मंडी में डामर सड़क पर खेले। इसके बाद निवाली के खेल परिसर में प्रैक्टिस करना शुरू किया। आज भी यहां से हर शनिवार रविवार को सेंधवा से 20 किमी दूर निवाली मैच खेलने जाते हैं। तीन साल पहले मेरी शादी हुई। आईटीआई करने के बाद बीए कर रहा हूं।

बेटी को खेलते देख मिलता है सुकून
तीन साल पहले 22 मार्च 2023 को टिकेश्वरी से शादी हुई। एक बेटी है। जब बेटी होने वाली थी, उस समय मन में डर था। लगता था कि कहीं बच्चा भी मेरी तरह तो नहीं होगा। ऐसे में पत्नी का समय समय डॉक्टरों से उपचार ओर जांच करवाते रहे। खुशी होती है, जब अपनी बेटी को सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलता देखता हूं।

महाकाल मंदिर में लाइट एंड साउंड शो के लिए ₹100 शुल्क, दर्शन-आरती समेत श्रद्धालुओं का खर्च ₹1050 तक पहुंच सकता है

उज्जैन 

बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है।

18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो
इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है।

करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है।

शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है।

हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान
कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी।

इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है।

संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है।

श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ
महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा।

जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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