पटवारी संविलयन नीति 2026 जारी: गृह तहसील में पोस्टिंग पर रोक, नई सीनियरिटी व्यवस्था लागू

भोपाल 

राजस्व विभाग मध्य प्रदेश ने तबादलों की अवधि (15 जून) समाप्त होने से तीन दिन पहले पटवारियों के संविलयन की नई नीति 2026 जारी कर दी है। नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पटवारी की पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी। साथ ही नए जिले में पदस्थ होने के बाद वरिष्ठता वहीं की सीनियरिटी सूची के आधार पर तय होगी।

नीति के अनुसार पटवारी का पद जिला संवर्ग का होने के कारण अलग से संविलयन नीति लागू की गई है। इसमें कहा गया है कि पटवारी परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए पटवारी ही अंतर जिला संविलयन के पात्र होंगे। हालांकि वर्ष 2022 की परीक्षा पास कर नियुक्त हुए पटवारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में संविलयन का लाभ मिलेगा।

इन शर्तों के साथ पात्र होंगे 2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारी
    वर्ष 2022 की पटवारी परीक्षा में पास होने वाले पटवारी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन कर सकेंगे।

    अगर पटवारी पति या पत्नी शासकीय कर्मचारी हैं उनकी एक ही जिले की पदस्थापना की जरूरत है तो संबंधित जिले में पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में मौका दिया जाएगा।

    विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा, परित्यकता महिला पटवारी होने पर या पटवारी को गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, किडनी, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी से ग्रस्त होने पर पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में तबादले का अधिकार रहेगा।

    आपसी आधार पर संविलियन के मामलों में भी जो आवेदन मिलेंगे उसमें भी तबादला हो सकेगा।

प्रोबेशन संबंधी कार्यवाही नए जिले में होगी
संविलियन नीति में यह भी कहा गया है कि जिन पटवारी का संविलियन होता है उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति संबंधी कार्यवाही नए जिले में की जाएगी। इस संबंध में सभी विभागीय शर्तों का पालन पूर्व जिले की भांति नए जिले में पटवारी को करना होगा। पटवारी के संविलयन उपरांत पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती एवं जांच, दंड और विशेष दायित्व आदि के संबंध में सभी जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को दी जाएगी। पटवारी के संविलयन की संख्या का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के आधार पर होगा।

ऐसे होंगे पटवारी तबादले के लिए आवेदन
    आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।
    ऑनलाइन आवेदन में अपनी विशिष्ट श्रेणी जैसे चयन का वर्ग सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी और ओपन वर्ग, ओपन महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग की स्थिति की जानकारी देनी होगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    पटवारी जिनके खिलाफ लोकायुक्त या अन्य किसी मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज है वह अपात्रता की श्रेणी में आएंगे।

    संविलयन संबंधी आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए जाएंगे।

पद रिक्त हुए तो ही संविलयन किया जाएगा
पटवारी के संविलयन में यह भी कहा गया है कि जिस जिले में संविलयन चाहा गया है उस जिले में संबंधित वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही संविलयन किया जाएगा।

आरक्षण के प्रावधानों एवं जिला आरक्षण रोस्टर के परिपालन में ही संविलियन किया जाएगा। जिले के अंदर पदस्थापना कलेक्टर द्वारा की जाएगी किंतु किसी भी पटवारी को उसके गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा।

आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पटवारी को संविलयन किए गए जिले में उपस्थिति देनी होगी।

आरक्षण नियमों के विपरीत नहीं होगी पोस्टिंग
इसमें यह भी शर्त तय की गई है कि संविलयन पर एक बार जिला आवंटित हो जाने पर दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। प्रशासनिक दृष्टि से किए गए संविलयन में ही पटवारी द्वारा नए जिले में पदभार ग्रहण करने पर उसे जिले की संधारित सूची से पटवारी की वरिष्ठता की गणना कर वरीयता तय की जाएगी। पटवारी को एक बार जिला आवंटित होने पर उसे जिले में अनिवार्य उपस्थिति देनी होगी। जिले में आरक्षित पदों से अधिक एवं आरक्षण नियमों के विपरीत पद स्थापना नहीं की जाएगी।

सिंहस्थ 2028 होगा हाईटेक: AI बताएगा कब आएगा आंधी-तूफान, करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा योजना

उज्जैन
 सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ”मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है। 

2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा
अनिल फिरोजिया ने लिखा, ”सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने। 

अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग
सांसद ने कहा, ”सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है। 

सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। 

पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें। 

दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी। 

तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं। 

चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

21 जून से नए रूट पर दौड़ेगी इंदौर मेट्रो, रोजाना 4-6 लाख यात्रियों को मिलेगा फायदा

इंदौर
 इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के दूसरे फेज के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक के नए रूट का लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन, यानी 21 जून से यह ट्रैक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल स्थित मेट्रो कार्यालय में किराए, फेरों और शेड्यूल को लेकर बैठकों का दौर जारी है, जिस पर अगले तीन-चार दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

6 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का यह नया कॉरिडोर इंदौर मेट्रो का सबसे व्यस्त और अधिक यात्री घनत्व वाला रूट बनने जा रहा है। इस रूट के शुरू होने से सीधे 4 से 6 लाख लोगों को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।यदि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है।

इस रूट पर कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस
इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस हैं। इसके अलावा एसईजेड, आईटी पार्क, एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, होटल और कई कॉर्पोरेट कार्यालय भी इसी कॉरिडोर के आसपास हैं। केवल टीसीएस और इंफोसिस के कैंपस ही हजारों कर्मचारियों की क्षमता रखते हैं।

एक्सपर्ट के अनुमान के अनुसार, मेट्रो संचालन के शुरुआती चरण में इस कॉरिडोर पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्री सफर कर सकते हैं, वहीं सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यह संख्या 60 हजार से लेकर एक लाख यात्रियों रोज तक पहुंच सकती है।

कुल मिलाकर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का मेट्रो रूट इंदौर के आईटी हब, एयरपोर्ट क्षेत्र और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर साबित होगा, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुगम और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

भोपाल में हर रोज बैठकें
लोकार्पण से पहले भोपाल के सुभाष नगर स्थित डिपो में हर रोज एमडी एस. कृष्ण चैतन्य बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने इंदौर में तीन दिन तक दौरा भी किया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, मार्च में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने इंदौर मेट्रो के संचालन को लेकर दौरा किया था।

इसके बाद अगले ट्रैक पर मेट्रो को दौड़ाने की हरी झंडी भी दे दी थी। नियम के मुताबिक, सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के अंदर मेट्रो का संचालन शुरू करना होता है, वरना फिर से दौरा किया जाता है।

पहले 15 जून थी तारीख, अब 20 जून फाइनल
मेट्रो प्रबंधन सूत्रों की मानें तो पहले 15 जून को इंदौर में येलो लाइन के सेकंड फेज का लोर्कापण किया जाना था, लेकिन राज्यसभा चुनाव के चलते यह तारीख आगे बढ़ गई थी। अब 20 जून की तारीख फाइनल हुई है।

इन कामों पर मंथन
मेट्रो के सेकंड फेज के लोकार्पण से पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) शेड्यूल, किराए और फेरे को लेकर मंथन कर रहा है। दरअसल, अभी मेट्रो सिर्फ 1 घंटा ही दौड़ रही है।

नए शेड्यूल में गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक कुल 16 स्टेशनों की टाइमिंग, कहां-कितना किराया रहेगा और कितने फेरे लगेंगे? यह सब शामिल रहेगा। 15 जून तक पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। मेट्रो प्रबंधन 17 किलोमीटर पर मेट्रो चलाएगा।

शुरुआती चरण में इस रूट पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान है, जो भविष्य में बढ़कर एक लाख तक पहुंच सकता है।

कई आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा
यह एलिवेटेड कॉरिडोर गांधी नगर, लवकुश, सुखलिया, विजय नगर, स्कीम-78 और रेडिसन चौराहे जैसे प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस, आईटी पार्क, सेज (SEZ), शैक्षणिक संस्थान और एयरपोर्ट शामिल हैं, जिससे हजारों कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को तेज व आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

भोपाल के मुकाबले इंदौर मेट्रो आगे
मेट्रो विकास के मामले में इंदौर, भोपाल से आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रो के पहले फेज का संचालन 31 मई 2025 को ही शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर (सुभाष नगर से एम्स) का लोकार्पण 20 दिसंबर 2025 को हुआ था।

भोपाल के मुकाबले इंदौर में ऐसे आगे काम
इंदौर मेट्रो की येलो लाइन है। इसके पहले फेज में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक मेट्रो 31 मई 2025 को चलाई गई थी, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रॉयोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का 20 दिसंबर-25 को लोकार्पण हुआ था। 21 दिसंबर से लोग मेट्रो में सफर करने लगे, यानी भोपाल मेट्रो से इंदौर मेट्रो 7 महीने आगे रही।

अब सेकंड फेज का लोकार्पण हो रहा है, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन का सेकंड फेज साल 2028 तक पूरा होगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंदौर में दोनों फेज में एलिवेटेड कॉरिडोर है, जबकि भोपाल में सेकंड फेज में करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रूट भी है। इसलिए सेकंड फेज 2028 में पूरा होगा।

इंदौर मेट्रो फेज-2 के यह स्टेशन
सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भौंरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।

भोपाल में दो रूट पर चल रहा काम
बता दें कि भोपाल में इस समय ऑरेंज लाइन का सुभाष नगर से करोंद और ब्लू लाइन का भदभदा से रत्नागिरि के बीच काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के ही सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो पिछले साल दिसंबर से दौड़ने लगी थी।

इसके बाद बाकी कामों पर फोकस शुरू हो गया है। 30 मार्च को टीबीएम को जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में उतारा गया था। इसके बाद कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई की जा रही है। इसमें दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की मानें तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा।

हाल ही में मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अंडरग्राउंड रूट पर भी बात की थी। वहीं इंदौर मेट्रो के अब तक के काम और सेकंड फेज के लोकार्पण पर भी चर्चा की गई थी।

 

अमरनाथ यात्रियों की होगी Real-Time ट्रैकिंग, भोपाल में बनेगा कंट्रोल रूम; सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत

भोपाल

अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। पिछले साल अमरनाथ यात्रा के पहले पहलगाम हमले के बाद यात्रियों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम श्राइन बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। यात्रा के लिए पंजीयन कराने वाले यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड रेडियो फिक्वेंसी पहचान पत्र यात्रा शुरू करने से पहले लेना होगा।

साथ ही घोड़े, खच्चर, पालकी वालों के लिए भी इस बार श्राइन बोर्ड ने क्यूआरकोड बनाए हैं, जिससे यात्री इसे स्केन कर संबंधित की पूरी जानकारी ले सकेंगे। इस क्यूआर कोड के जरिए जत्थे की रियल टाइम लोकेशनस भी मिल सकेगी। इसी प्रकार भोपाल से जाने वाले मंडल भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम कर रहे है। इसके लिए यात्रियों का एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, जिससे स्केन करते ही ग्रुप से जुड़कर यात्री की जानकारी ले सकेंगे।

यात्रियों के लिए कंट्रोल रूम, क्यूआर कोड तैयार करेंगे
ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के सचिव रिंकू भटेजा ने बताया कि हमारे मंडल की ओर से 15 जत्थे अलग-अलग तारीखों में रवाना होंगे। पहला जत्था 29 जून को रवाना होगा। हर जत्थे का नेतृत्व करने के लिए पांच लोगों की टीम रहेगी। भोपाल में भी एक कंट्रोल रूम मंडल का रहेगा, जहां सभी यात्रियों की जानकारी रहेगी। बालटाल, पहलगाम सहित यात्रा मार्ग से जत्थे के लोग यहां संपर्क में रहेंगे।

साथ ही हर जत्थे के लिए एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, यह हर यात्री को दिया जाएगा। अगर यात्रा के दौरान घर परिवार के लोगों का किसी यात्री से संपर्क नहीं हो रहा है, तो परिजन सीधे क्यूआर कोड स्कैन कर ग्रुप से जुड़ जाएंगे और संबंधित यात्री के बारे में जानकारी ले सकेंगे। कई बार यात्रा के दौरान बारिश सहित अन्य कारणों से मोबाइल बंद हो जाते हैं, ऐसे में परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में ग्रुप से जुड़कर परिजन यात्री की जानकारी ले पाएंगे। ग्रुप के जिस सदस्य को जानकारी रहेगी, वह संबंधित यात्री का परिजनों से संपर्क करा पाएगा।

युवाओं का ग्रुप निभाएगा भागीदारी
जय बाबा अमरनाथ बर्फानी यात्रा मंडल के युवा राम मालवीय ने बताया कि इस बार अधिकांश फ्रेशर्स लोग जा रहे हैं, जो पहली बार यात्रा करेंगे। इसमें कुछ ऐसे यात्री भी रहेंगे जो पहले भी यात्रा कर चुके हैं। सभी एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे। जो फ्रेशर्स जा रहे है, उन्हें रोजाना योग, प्राणायाम, सैर आदि कराई जा रही है। जत्थे में मंडल की कार्यकारिणी के सदस्य भी रहेंगे। पहला जत्था 5 और दूसरा 14 जुलाई को रवाना होगा।

आरएफआईडी कार्ड लेना जरूरी होगा
अमरनाथ यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से पंजीकृत भक्तों को यात्रा के दौरान आरएफआईडी लेना जरूरी होगा। यह कार्ड जम्मू, पहलगाम, बालटाल सहित अन्य सेंटरों से मिलेगा। इस कार्ड में जीपीएस ट्रैकिंग की क्षमता रहेगी, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही, ट्रेक, आपात स्थिति पर उनके संपर्क, निगरानी में मदद मिलेगी। बिना कार्ड के किसी भी तीर्थयात्री को अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही स्थानीय ड्राइवर, दुकानदारों और यात्रा मार्ग में सहायक पिट्टू, खच्चर वालों को पुलिस वेरिफिकेशन करने के बाद क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे।

NCRB Report: शादीशुदा पुरुषों में बढ़े आत्महत्या के मामले, विवाहेतर संबंध भी बड़ी वजह के रूप में सामने आए

नई दिल्ली

देश में शादीशुदा पुरुषों की खुदकुशी के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से अब तक यह आंकड़ा करीब दोगुना हो गया है। 10 साल पहले 2015 में एक साल में 2497 पुरुषों ने शादी से संबंधित मामलों या फिर पत्नी से विवाद को लेकर खुदकुशी की थी। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4536 हो गया। इस रेट में 82 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है।

2022 में पलट गए आंकड़े
रिकॉर्ड के मुताबिक पहले पुरुषों की तुलना में शादी संबंधित मामलों को लेकर महिलाएं ज्यादा खुदकुशी करती थीं। वहीं 2022 में यह आंकड़ा ही पलट गया। 2024 में लगातार ऐसा देखा गया कि शादीशुदा जीवन में कलह को लेकर पुरुष महिलाओँ की तुलना में ज्यादा खुदकुशी कर रहे हैं। 2024 की बात करें तो शादी संबंधित मामलों में कुल 8524 लोगों ने खुदकुशी की। इनमें से 4536 यानी करीब 53 फीसदी पुरुष थे औ 3986 यानी करीब 46 फीसदी महिलाएं थीं।

2015 में खुदकुशी करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 61 फीसदी थी। हालांकि 2023 की तुलना में 2024 में शादी से जुड़े विवादों को लेकर खुदकुशी का आंकड़ा कम हुआ है। 2024 में खुदकुसी करने वाली महिलओं में से करीब दो तिहाई 30 साल से कम उम्र की थीं। वहीं पुरुषों की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग 30 से ज्यादा की उम्र के थे। 40 फीसदी खुदकुशी करने वाले लोग 30 से 45 की उम्र के थे।

कम उम्र में महिलाएं ज्यादा करती हैं खुदकुशी
रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 30 की उम्र में खुदकुशी करने के मामले में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। वहीं 30 से 40 की उम्र में पुरुष ज्यादा खुदकुशी करते हैं।

रोज 24 लोग कर लेते हैं खुदकुशी
रिपोर्ट के मुताबिक शादी या फिर पति-पत्नी के बीच विवाद को लेकर रोज करीब 23 लोग खुदकुशी करते हैं। इनमें से 12 पुरुष और 11 महिलाएं होती हैं। रोज होने वाली मौतों के औसत पर गौर करें तो रोज 30 से कम की उम्र के 5 पुरुष और 30 से ज्यादा उम्र वाले 6 पुरुष खुदकुशी करते हैं। 2019 से 2024 तक पांच साल में ऐसे खुदकुशी करने वालों की कुल संख्या 24335 थी।

क्यों खुदकुशी करते हैं शादीशुदा लोग
शादी या पति-पत्नी के बीच विवाद और खुदकुशी की मुख्य वजहों में दहेज, विवाहेतर संबंध, तलाक जैसे मुद्दे शामिल हैं। 2019 से 2024 तक कुल खुदकुशी के आंकड़ों को देखों तो करीब 18359 पुरुषों और 20485 महिलाओं ने खुदकुशी की है। 2024 में खुदकुशी के 8534 मामलों में से 3052 ऐसे थे जिनमें शादी के बाद सामंजस्य नहीं बन पाया।

उत्तर प्रदेश में होती हैं सबसे ज्यादा ऐसी खुदकुशी
उत्तर प्रदेश में लोग शादी संबंधित मामलों को लेकर सबसे ज्यादा खुदकुशी करतेहैं। 2024 में उत्तर प्रदेश में शादी के बाद सामंजस्य ना बनने की वजह से कुल 764 लोगों ने खुदकुशी की थी और इनमें से 394 पुरुष और 370 महिलाएं थीं। उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा नंबर महाराष्ट्र का आता है जहां 421 लोगों ने खुदकुशी की थी। विवाहेतर संबंधों को लेकर होने वाली खुदकुशी की दर काफी बढ़ गई है। 2014 में ऐसे मामले को लेकर 1624 लोगों ने खुदकुशी की थी।

RBI का बड़ा एक्शन: इस बैंक पर 6 महीने का प्रतिबंध, खाताधारकों में बढ़ी चिंता

मुंबई 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, आरबीआई ने मोगावीरा सहकारी बैंक, मुंबई की वित्तीय स्थिति में गिरावट को देखते हुए इसपर कई पाबंदियां लगा दी हैं। यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने किसी सहकारी बैंक पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे पहले मई में भी एक सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया गया था।

मोगावीरा सहकारी बैंक पर क्या एक्शन?
मोगावीरा सहकारी बैंक पर लगी पाबंदियों के तहत खाताधारकों के लिए पैसे निकालने की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। ये पाबंदियां 12 जून को कारोबार बंद होने के बाद से लागू हुईं, जो छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होंगी। हालांकि, इनकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।

क्या-क्या नहीं कर पाएगा बैंक?
आरबीआई ने कहा, ”सहकारी बैंक अब कोई भी लोन और उधार को मंजूर नहीं दे सकेगा और न ही मौजूदा लोन को रिन्यू कर पाएगा। इसके अलावा, बैंक किसी प्रकार का निवेश नहीं कर सकेगा, कोई नई देनदारी नहीं ले सकेगा और उधार लेने, नए जमा स्वीकार करने पर भी रोक रहेगी। बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को देखते हुए उसे निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी जमाकर्ता को उसके बचत, चालू अथवा अन्य किसी खाते से अधिकतम एक लाख रुपये तक की निकासी की अनुमति दे।”

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक के कामकाज में सुधार के लिए वह लगातार उसके निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ संपर्क में था। हालांकि, बैंक ने निगरानी संबंधी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसी कारण ये निर्देश जारी करना जरूर हो गया।

आरबीआई ने इस बैंक का किया लाइसेंस रद्द
बता दें कि बीते महीने केंद्रीय रिजर्व बैंक ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित ‘द यशवंत सहकारी बैंक’ के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं होने के आधार पर लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह सहकारी बैंक, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है और मौजूदा वित्तीय स्थिति में वह अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है।

इसके साथ ही आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है। आरबीआई ने कहा कि परिसमापन पर बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी। आरबीआई के अनुसार, बैंक के 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि मिलने की पात्रता है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत! जुलाई से 63% हो सकता है महंगाई भत्ता, सैलरी बढ़ने के संकेत

नईदिल्ली 
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. जल्‍द ही इन कर्मचारियों को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. इनकी सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है और केंद्रीय कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जुलाई से बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है। 

महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट      
दरअसल, केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीबी नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं. कर्मचारी संघों द्वारा ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर रखने और मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाने को कह रहे हैं. इस बीच, महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट आया है। 

किस आधार पर होगा डीए कैलकुलेशन        
कहा जा रहा है कि जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ सकता है. जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्‍मीद की वजह इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) है. डीए का कैलकुलेशन इसी इंडेक्स के आधार पर किया जाता है. यह इंडेक्स इस साल मार्च में 149.1 था, जो अप्रैल में बढ़कर 149.9 हो गया। 

रिटेल महंगाई में इजाफा
इंडस्‍ट्रियल वर्कर्स के लिए रिटेल महंगाई दर भी बढ़ा है. यह 4.27 से बढ़कर 4.46 फीसदी हो गया है. अप्रैल 2026 तक उपलब्ध  AICPI-IW डेटा के आधार पर 12 महीने का एवरेज 147.51 है। 

3 फीसदी बढ़ सकता है डीए 
ऐसे में 2016 की बेस सीरीज को 2001 के बेस में कनवर्ट करने के लिए 2.88 लिंकिंग फैक्टर का यूज करते हैं तो डीए कैलकुलेशन के बाद करीब 62.51 फीसदी हो जाएगा. इसी कारण डीए में 3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद की जा रही है। 

जुलाई की सैलरी में हो सकती है बढ़ोतरी 
साल में दो बार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की जाती है. सरकार ने जनवरी के महंगाई भत्ता को बढ़ा दिया है और अब जुलाई में होने वाले डीए में बढ़ोतरी की उम्‍मीद की जा रही है. अगर जुलाई से ही इसमें बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ ही बढ़े हुए महंगाई भत्ता भी भेजा जा सकता है। 

अभी 60 फीसदी महंगाई भत्ता
अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी का महंगाई भत्ता 60 फीसदी है. ऐसे में अगर सरकार जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला करती है तो यह बढ़कर 63 फीसदी तक पहुंच सकता है। 

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है।

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी।

कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान
8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है।

पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है।

कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी?
सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…

    पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।

    दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा।

7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा?
तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था।

इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम
वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है।

इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट?
केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है।

आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी।

फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा।

क्या होता है वेतन आयोग ?
केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है।

आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

सड़क सुरक्षा रिपोर्ट: हेलमेट और सीटबेल्ट पहनने से 2024 में बच सकती थीं 40 हजार से ज्यादा जानें

 नई दिल्ली
 केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट से 2024 में हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 40 हजार से अधिक जिंदगियों को केवल स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल से बचाया जा सकता था।

साल 2024 में सड़क हादसों में मारे गए 81,780 टू-व्हीलर सवारों में से 40% से ज्यादा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनकर बच सकते थे, जबकि सीटबेल्ट कार में सवार लोगों की 21,988 मौतों में से लगभग आधी मौतों को रोक सकती थी। यानी दोपहिया वाहनों पर जान गंवाने वाले 40% से ज्यादा लोग और कार हादसों में मारे गए करीब आधे लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव का शिकार हुए।

बाइक सवारों के मरने की संभावना सबसे अधिक
संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी के अनुसार, कार चालकों की तुलना में मोटरसाइकिल सवारों के सड़क हादसों में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है, और अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनने से उनके बचने की संभावना 42% बढ़ जाती है और बाइक सवारों को होने वाली 69% चोटों से बचा जा सकता है।”

इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सीटबेल्ट उन हादसों में मौत को रोकने में लगभग 50% असरदार हैं, जिनमें सीटबेल्ट न होने पर ड्राइवर या यात्री की मौत हो सकती थी।

किन-किन राज्यों में हुईं सबसे अधिक मौतें?
राज्य पुलिस विभागों से मिले डेटा पर आधारित सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि हेलमेट न पहनने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 7,744 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (5,946) और मध्य प्रदेश (5,543) का नंबर आता है। सीटबेल्ट न पहनने के कारण हुई मौतों के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,816 मौतें हुईं, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा।

हालांकि. सेफ्टी गियर न पहनना और तेज रफ्तार या गलत साइड से गाड़ी चलाने जैसे जानलेवा हादसों के अन्य कारण सड़क इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार से जुड़े हैं, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सड़क बनाने और देखरेख करने वाली एजेंसियों की बढ़ती लापरवाही ने भी कुल मौतों की संख्या बढ़ाई है।

उदाहरण के लिए, 2024 में गड्ढों के कारण होने वाली मौतें बढ़कर 2,384 हो गईं, जो 2023 की तुलना में 10.4% ज़्यादा हैं, और निर्माणाधीन साइटों पर मौतों की संख्या 5,389 रही, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% ज़्यादा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में भारतीय सड़कों पर मारे गए लोगों में से लगभग 67% टू-व्हीलर सवार या पैदल चलने वाले थे। सड़क हादसों में कुल 1.28 लाख दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की जान चली गई।

टक्कर रोकने वाली तकनीक के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम लाइसेंस-मुक्त
केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को रोकने और वाहन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और ‘व्हीकल-टू-एवरीथिंग’ (V2X) कम्युनिकेशन में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह लाइसेंस-मुक्त (Delicensed) कर दिया है। इस कदम से देश में उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों और टक्कर रोधी प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने जारी की अधिसूचना

इस संबंध में दूरसंचार विभाग (DoT) ने दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की है-

77-81 GHz बैंड- इसे ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए लाइसेंस-मुक्त किया गया है।

5.9 GHz बैंड- इसे V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है।

V2X (Vehicle-to-Everything) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से गाड़ियां न सिर्फ आपस में संपर्क साध सकती हैं, बल्कि सड़क के किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैफिक सिग्नल और स्मार्ट पोल्स) के साथ भी डिजिटल संवाद कर सकती हैं।

इससे ड्राइवर को संभावित दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है।

 

धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना से जशपुर के विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है।

मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा उत्पादन, मिट्टी संरक्षण को भी मिल रही मजबूती

रायपुर

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम मात्रा में अधिक दक्षता के साथ फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध करा रहे हैं।

सरगुजा जिले के ग्राम भगवानपुर के प्रगतिशील किसान  सत्यनारायण ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस तकनीक से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

 सत्यनारायण ने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के रूप में किया जाता है, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं और उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। इससे फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्वों का अनावश्यक अपव्यय कम होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलती है, जो टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता अधिक होने के कारण किसानों को कम मात्रा में बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है। यही कारण है कि प्रदेश में किसानों का रुझान नैनो उर्वरकों की ओर लगातार बढ़ रहा है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देकर उन्हें कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 सत्यनारायण ने अन्य किसानों से भी नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी कृषि भूमि की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है।

 

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