पुलिस मुख्यालय में सुरक्षाकर्मियों को दिया फायर सेफ्टी का प्रशिक्षण

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी तारतम्य में शनिवार शाम पुलिस मुख्यालय के भूतल पर सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों को स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर काबू पाने का प्रशिक्षण दिया गया। अग्नि नियंत्रण संबंधी प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों द्वारा आग बुझाने की मॉकड्रिल भी की गई। मॉकड्रिल के दौरान तरल पदार्थों में लगी आग को पुलिस के जवानों ने अग्निशमन यंत्रों के प्रयोग से किस तरह आसानी से बुझाई जा सकती है, इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुरक्षाकर्मियों ने आग को धुएं और लपटों से बचकर बुझाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर आग बुझाने का अभ्‍यास भी किया। मॉकड्रिल में प्रमुख रूप से पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा इंचार्ज  मुकेश सैनी, निरीक्षक विजय नागले, पुलिस फायर स्टेशन भोपाल के एसआई  शिवनारायण शर्मा व उनकी टीम उपस्थित थी।

इन उपकरणों का दिया प्रशिक्षण

मॉकड्रिल के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने में प्रयोग किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों के संबंध में जानकारी दी गई। आग बुझाने के दौरान प्रयोग में आने वाले कलेक्टिंग ब्रिज, डिवाइडिंग ब्रिज, फायर मेन हेलमेट, फोम नोजल, अग्निशमन सिलेंडर एवं कॉर्टेज, टॉर्च, रिवॉल्विंग नोजल, यूनिवर्सल ब्रांच, न्यू लाइट(ब्रांच), ऑर्डनरी ब्रांच, एडॉफ्टर, जाली, फायर मेन एक्स, लॉक कटर, प्रॉक्सीमेटी सूट, एल्यूमिनियम सूट, कैमिकल सूट, ब्रीदिंग ऑपरेटर सेट, लाइफ जैकेट, हौज पाइप, फायर ब्लैंकेट, अग्निशमन यंत्र आदि की जानकारी दी गई।

5 तरह की होती है आग- बुझाने में बरतें सावधानी

प्रशिक्षण के दौरान एसआई  शिवनारायण शर्मा ने बताया कि आग पांच तरह की होती है, जिन्हें बुझाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। उन्होंने बताया कि इन्हें ए से इ तक की श्रेणी में रखा गया है। लकड़ी-कोयला में लगी छोटी आग को ए क्लास में रखा गया है। तरल पदार्थों में लगी आग को बी क्लास, गैसों में लगी आग को सी क्लास, मेटल में लगी आग को डी क्लास और इलेक्ट्रिक आग को ई क्लास की श्रेणी में रखा गया है। इन सभी आग को पानी या कैमिकल की मदद से बुझाया जाता है।

अग्नि दुर्घटना होने पर यह करें

  •         फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम, पुलिस थाना, विद्युत विभाग एवं चिकित्सालय को सूचना दें।
  •         फायर फायटिंग दल फायर एक्सटिंग्यूशर अथवा पानी या रेत से अग्नि को प्रारंभिक स्थिति में बुझाएं। भवन के विद्युत प्रवाह को मेन स्विच से तत्काल कट-ऑफ करें।
  •         फायर अलार्म दल सभी को अग्नि दुर्घटना की चेतावनी अलार्म बजाकर दें।
  •         बचाव दल (इवेक्युएशन टीम) बिल्डिंग के व्यक्तियों को पूर्व निर्धारित योजना अनुसार सुरक्षित रास्तों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएं।
  •         भगदड़ नहीं करें।
  •         लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें।
  •         संपत्ति बचाव दल महत्वपूर्ण व मूल्यवान सम्पत्ति को बाहर निकालें।
  •         अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों जैसे-पैट्रोल, कैरोसिन, प्लास्टिक, आदि को अग्नि दुर्घटना स्थल से दूर करें।

इन नंबरों पर करें सूचित

आग की सूचना देने के लिए भोपाल में एमपीईबी के हेल्पलाइन नंबर 0755-2678251, 0755-2678369 पुलिस का हेल्पलाइन नंबर 0755-2555922, पुलिस फायर स्टेशन का हेल्पलाइन नंबर 0755-2441008 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0755-2542222 पर कॉल कर किया जा सकता है।

 

15 दिवस में प्रगति न लाने वाले रेड लिस्टेड संविदाकार होंगे ब्लैक लिस्ट, कटेगी परफॉर्मेंस गारंटी : आयुक्त भोंडवे

भोपाल

नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने निर्देश दिए कि “रेड लिस्ट के संविदाकार यदि 15 दिवस में परियोजनाओं में प्रगति नहीं लाते हैं, तो उनकी परफॉर्मेंस गारंटी की कटौती एवं उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। साथ ही रेड लिस्ट वाली परियोजनाओं के सभी संविदाकारों पर L.D. अधिरोपित किया जाएगा। आयुक्त  भोंडवे ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा अमृत 2.0 अंतर्गत संचालित जलप्रदाय परियोजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक में संविदाकारों और अधिकारियों को निर्देश दिए।

आयुक्त  भोंडवे ने बताया कि संविदाकारों के कार्यों में किए गए समयबद्ध भुगतान के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का 100 प्रतिशत उपयोग मार्च, 2026 तक सुनिश्चित कर लिया गया। इस बेहतर वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन के फलस्वरूप मध्यप्रदेश अमृत योजना के अंतर्गत वर्तमान में देश में 7वें रैंक पर आ गया है।

बैठक में वर्तमान में योजनांतर्गत कम प्रगति वाली पाई गई 122 परियोजनाओं की कार्यगुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन एवं लंबित बिंदुओं की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त  भोंडवे ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन कम प्रगति वाली परियोजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए, जिससे कार्य समय-सीमा में पूरे हो सकें।

बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, संभागीय अधीक्षण यंत्री, संभागीय कार्यपालन यंत्री, टीएल (TL), पीडीएमसी (PDMC) एवं आर.ई. प उपस्थित रहे। इसके साथ ही, शेष नगरीय निकायों के अधिकारी और संविदाकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

 

वेटिंग टिकट यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब चलती ट्रेन में भी बुक कर सकेंगे कन्फर्म सीट

नई दिल्ली

ट्रेन में वेटिंग टिकट लेकर सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब यात्री चलती ट्रेन में भी अपने लिए कंफर्म बर्थ बुक करा सकेंगे। बता दें कि अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना हो चुकी है, अगर ट्रेन के भीतर कोई सीट खाली है, तो यात्री उसे सफर के दौरान ही तुरंत बुक कर सकेंगे। रेलवे का यह नया नियम आने वाले दिनों में वेटिंग और आरएसी (RAC) के झंझट से जूझने वाले यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है।

CRIS अपग्रेड कर रहा है टीटीई का हैंड हेल्ड टर्मिनल
दरअसल, भारतीय रेलवे आने वाले दिनों में टिकट बुकिंग से आरएसी (RAC) की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की एक बहुत बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेलवे का टेक्निकल विंग यानी रेल सूचना प्रणाली केंद्र टीटीई को दिए गए हैंड हेल्ड टर्मिनल सॉफ्टवेयर को नए फीचर्स के साथ अपग्रेड कर रहा है। इस अपग्रेडेशन के तहत टीटीई के इस डिवाइस में ‘कंफर्म बर्थ बुकिंग’ का एक नया और सीधा ऑप्शन जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस नई और हाईटेक व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने अपने वाणिज्य विभाग के आला अधिकारियों और कई टीटीई को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दे दिया है, ताकि जमीन पर काम शुरू करने में कोई दिक्कत न आए।

यात्री के न आने पर तुरंत वेबसाइट पर दिखने लगेगी सीट
इस पूरी व्यवस्था को समझाते हुए एक सीनियर टीटीई ने बताया कि मान लीजिए अगर सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कंफर्म टिकट होने के बावजूद कोई यात्री अपनी सीट पर नहीं आता है, तो टीटीई चेकिंग के दौरान उस बर्थ को अपने एचएचटी डिवाइस में तुरंत खाली दिखाएगा। टीटीई द्वारा यह जानकारी भरते ही वह बर्थ सीधे रेलवे के बुकिंग पोर्टल और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लाइव दिखने लगेगी। इसके बाद अगर कोई अन्य यात्री बेतिया, नरकटियागंज या रास्ते के किसी भी अन्य स्टेशन से सप्तक्रांति में सीट बुक कराना चाहता है, तो वह आसानी से ऑनलाइन बुकिंग कर सकता है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में ऐसी खाली सीटों को टीटीई केवल ट्रेन के भीतर ही बुक कर पाते हैं और ये वेबसाइट पर नहीं दिखती हैं, लेकिन इस नए बदलाव के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।

धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की अधिसूचना, विकास के नए युग में प्रवेश करेगा क्षेत्र

रायपुर

जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है।

लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं

रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा।

पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच

नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र

रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

बीजेपी सरकार का दावा: सत्ता में आते ही 26 लाख आवासों को मिली मंजूरी, कांग्रेस पर योजना रोकने का आरोप

रायपुर
 छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘डबल इंजन सरकार’ के लाभों पर जोर देते हुए मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र-राज्य समन्वय की सराहना की। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “मैं छत्तीसगढ़ में डबल-इंजन सरकार के दो बड़े फायदे बताऊंगा। डबल-इंजन सरकार की वजह से छत्तीसगढ़ दोगुनी रफ्तार से तरक्की कर रहा है। राज्य को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा फायदा मिल रहा है।

26 लाख आवास का काम पूरा
अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना को पिछली कांग्रेस सरकार ने रोक दिया था, जिससे 18 लाख गरीब लोग घर से वंचित रह गए। राज्य में हमारी सरकार के आने के बाद केंद्र सरकार के सहयोग और विशेष समर्थन से प्रधानमंत्री आवास योजना को मंजूरी मिली और इस योजना के तहत 26 लाख घरों को स्वीकृति दी गई है।

पीएम मोदी को दी बधाई
पीएम मोदी द्वारा देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बनाने पर अरुण साव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद देश में राजनीति का स्वरूप और दिशा बदल गई है। राजनीति अब प्रदर्शन-आधारित हो गई है। विकास की राजनीति शुरू हो गई है। एनडीए की बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए और मजबूत हुआ है।”

कांग्रेस सरकार ने रोक दी थी योजना
2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी। इस दौरान राज्य में पीएम आवास योजना के कार्य को गति नहीं मिली थी। डेप्युटी सीएम टीएस सिंहदेव के पास इस विभाग की जिम्मेदारी थी। पीएम आवास का काम रुकने के बाद उन्होंने विभाग से इस्तीफा दे दिया था।

    छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम ने दी पीएम मोदी को बधाई
    कहा- बीजेपी सरकार में 26 लाख आवास मंजूर हुए
    कांग्रेस के कार्यकाल में राज्य में रोक दी थी योजना
    कांग्रेस के समय टीएस सिंहदेव के पास थी जिम्मेदारी

पहली कैबिनेट में हुआ कैबिनेट
छत्तीसगढ़ में 2023 में बीजेपी की सरकार बनी थी। सीएम पद की शपथ लेने के बाद छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने पहले ही मीटिंग में पीएम आवास योजना के काम को मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्य में पीएम आवास का काम शुरू हुआ। राज्य में पीएम आवास के निर्माण का काम तेजी से हो रहा है।

 

छत्तीसगढ़ में बदला मानसून का मिजाज: 50 साल में बदला ट्रेंड, अब अगस्त-सितंबर में ज्यादा बरसात

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में सुकमा और दंतेवाड़ा के किसान बारिश ज्यादा होने से परेशान है। जबकि जशपुर और बलरामपुर के किसान बारिश कम होने से चिंता में है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के किसान हर साल आसमान देखकर यही सोचते हैं कि इस बार जून साथ देगा या नहीं।

पिछले 40 से 50 साल के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उसकी चाल बदल रही है। बस्तर में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश घट रही है।

सबसे बड़ी बात यह है कि खेती की शुरुआत तय करने वाला जून अब सबसे ज्यादा अनिश्चित महीना बनता जा रहा है। ये केवल मौसम की कहानी नहीं है। इसका मतलब है कि किसान कब बुआई करेगा, तालाब में कितना पानी भरेगा, शहरों को कितना पानी मिलेगा, भूजल कितना रिचार्ज होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत कितनी बढ़ेगी।

यानी बदलता मानसून सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ मामला है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में दिख रहा है जब छत्तीसगढ़ एक और मानसून सीजन के मुहाने पर खड़ा है। इस साल भी किसानों की नजर पहली अच्छी बारिश पर टिकी है।

मौसम विभाग सामान्य मानसून की संभावना जता रहा है, लेकिन पिछले दशकों के आंकड़े बताते हैं कि अब केवल यह जानना काफी नहीं है कि कितनी बारिश होगी। असली सवाल यह है कि बारिश कब होगी और कहां होगी।

पहले पूरी तस्वीर समझिए
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लाखों किसान आज भी बारिश के भरोसे खेती करते हैं। प्रदेश में सिंचाई का दायरा बढ़ा जरूर है, लेकिन अब भी बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर टिका है।

यही वजह है कि मानसून यहां सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का इंजन है। बारिश अच्छी हुई तो फसल अच्छी होगी, बाजार चलेगा, गांवों में नगदी आएगी। बारिश बिगड़ी तो असर खेत से लेकर मंडी और घर की रसोई तक दिखाई देता है।

पिछले कई दशकों के आंकड़ों का एनालिसिस बताता है कि राज्य में औसत बारिश भले बहुत ज्यादा नहीं बदली हो, लेकिन उसका पैटर्न बदल गया है। यही सबसे बड़ा संकेत है।

बस्तर भीग रहा, सरगुजा सूख रहा
एक समय था जब पूरे छत्तीसगढ़ को एक जैसी बारिश वाला राज्य माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग के कई जिलों में बारिश बढ़ने का रुझान दिखाई देता है।

सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे जिलों में लंबे समय के आंकड़े वर्षा बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। सुकमा में बारिश बढ़ने का ट्रेंड राज्य में सबसे ज्यादा पाया गया है। इसके उलट सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में बारिश घटने का रुझान दिखाई देता है।

जशपुर में गिरावट सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। यानी एक तरफ राज्य का दक्षिणी हिस्सा ज्यादा पानी की ओर बढ़ रहा है, दूसरी तरफ उत्तरी हिस्सा कम बारिश की ओर बढ़ता दिख रहा है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया गया वर्षा का आकलन और लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 50 सालों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव दर्ज किया गया है। यह बदलाव आने वाले सालों में जल प्रबंधन और खेती की रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है।

खेती की शुरुआत तय करने वाला जून सबसे ज्यादा अनिश्चित
जून के महीने में खेत तैयार होते हैं। धान की नर्सरी डाली जाती है। बुआई की योजना बनती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यही महीना सबसे ज्यादा अनिश्चित होता जा रहा है। कुछ सालों में जून में अच्छी बारिश हुई। कुछ सालों में बारिश बहुत कम रही। यानी किसान के लिए सबसे बड़ा जोखिम सीजन की शुरुआत में ही खड़ा हो जाता है।

यही वजह है कि कई बार किसान जल्दी बुआई कर देते हैं और बाद में बारिश रुक जाती है। दूसरी ओर कुछ सालों में मानसून देर से सक्रिय होता है और पूरा कृषि कैलेंडर पीछे खिसक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती कुल बारिश नहीं, बल्कि जून की अनिश्चितता होगी।

मानसून पीछे खिसक रहा है?
आंकड़ों में एक और दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है। जून और जुलाई की बारिश में गिरावट के संकेत मिलते हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है। सरल भाषा में समझें तो मानसून का वजन अब शुरुआती महीनों से हटकर बाद के महीनों की ओर जाता दिख रहा है।

पहले किसान जून और जुलाई के भरोसे खेती शुरू करते थे। अब कई बार अगस्त और सितंबर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। इस बदलाव का असर धान की फसल पर पड़ता है। शुरुआती समय में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पौध कमजोर होती है। वहीं कटाई के आसपास ज्यादा बारिश होने पर तैयार फसल को नुकसान हो सकता है।

क्या कहते हैं मौसम एक्सपर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर की डायरेक्टर गायत्री वाणी के मुताबिक, मानसून के सीजन में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त महीने में होती है। जून में बारिश को लेकर सबसे ज्यादा अनिश्चितता रहती है, क्योंकि यह पूरी तरह मानसून के प्रदेश में पहुंचने और उसकी प्रगति पर निर्भर करता है।

सबसे ज्यादा बारिश कहां, सबसे कम कहां?
छत्तीसगढ़ के अंदर भी बारिश का अंतर काफी बड़ा है। सुकमा आज भी राज्य का सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। इसके बाद बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर आते हैं।दूसरी ओर दुर्ग, बलौदाबाजार, मुंगेली, कबीरधाम और बेमेतरा अपेक्षाकृत कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।

ज्यादा बारिश भी हमेशा अच्छी खबर नहीं
आमतौर पर माना जाता है कि जहां ज्यादा बारिश होती है वहां किसानों को फायदा होता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि 4 महीने में धीरे-धीरे बारिश हो तो खेती को फायदा मिलता है। लेकिन यदि कुछ दिनों में बहुत ज्यादा पानी गिर जाए तो उसका बड़ा हिस्सा बह जाता है।

इससे खेतों में कटाव बढ़ता है। छोटी नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। गांवों का संपर्क टूटता है। फसलें जलभराव से प्रभावित होती हैं। यानी समस्या सिर्फ कम बारिश नहीं, बल्कि कम समय में ज्यादा बारिश भी है।

पानी की टंकी से लेकर तालाब तक असर
यह बदलाव रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी मायने रखता है। यदि बारिश का वितरण बिगड़ता है तो भूजल रिचार्ज प्रभावित होता है। इससे हैंडपंप, बोरवेल और छोटे जल स्रोत प्रभावित होते हैं।

गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। दूसरी ओर भारी बारिश वाले दिनों की संख्या बढ़ती है तो शहरी जलभराव की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। यानी बदलते मानसून का असर गांव और शहर दोनों पर पड़ता है।

ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार से स्वास्थ्य सेवाएं हुई सुदृढ़ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की।  उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।      

मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।                

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।              

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।  जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।                    

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्री सारंग ने नरेला शासकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों से किया संवाद

भोपाल 

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और विकास के स्वर्णिम 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं शिक्षण संस्थान संवाद के तहत शनिवार को शासकीय महाविद्यालय नरेला में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश में हुए ऐतिहासिक परिवर्तन, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास की उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

मंत्री  सारंग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते 12 वर्षों में विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता, शिक्षा, खेल, तकनीक और जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने, शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री  सारंग ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। मंत्री  सारंग ने विद्यालय परिसर एवं महाविद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मंत्री  सारंग ने नरेला विधानसभा अंतर्गत करोंद क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। साथ ही क्षेत्रवासियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने पर बल दिया।

मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा के समग्र एवं सतत विकास के लिए विभिन्न आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसुविधाओं से जुड़े कार्य निरंतर किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

 

भोपाल में बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने के लिए जिला कंट्रोल रूम शुरू, 15 जून से 24 घंटे रहेगा सक्रिय

भोपाल

भोपाल जिले में बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत जिला कार्यालय भोपाल ने नगर निगम कार्यालय सदर मंजिल स्थित फायर ब्रिगेड स्टेशन (फतेहगढ़) में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। यह कंट्रोल रूम 15 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक 24 घंटे कार्यरत रहेगा।

जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर

आम नागरिक आपदा संबंधी सहायता और जानकारी के लिए निम्न दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं:

0755-2540220
0755-2701401
0755-2542222
अधिकारी और कर्मचारियों को किया गया पाबंद

जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम के सुचारु संचालन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष रूप से पाबंद किया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के लिए निम्न अधिकारियों की नियुक्ति की गई है:

प्रभारी अधिकारी:  लाखन सिंह चौधरी

सहायक प्रभारी:  कृष्णा रावत, प्रभारी तहसीलदार भू-संसाधन प्रबंधन

लिंक अधिकारी:  योगेश वास्तव, प्रभारी नायब तहसीलदार भू-संसाधन प्रबंधन

इसके अलावा जिला बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष में कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके।

आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन की तैयारी

प्रशासन का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाली भारी बारिश, जलभराव, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना है। कंट्रोल रूम के माध्यम से नागरिकों की शिकायतें, सूचना और सहायता अनुरोध तुरंत संबंधित विभागों तक पहुंचाए जाएंगे।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मानसून के दौरान सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य है। पीड़ित व्यक्तियों के साथ विनम्र व्यवहार और उनके हितों की सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से मध्यप्रदेश पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत कर सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित आईजी कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका अभिवादन किया गया। कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा, अपर मुख्य सचिव  संजय शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईजी स्तर के बाद संभाग स्तर पर भी समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और वे स्वयं इन बैठकों में शामिल होंगे।

साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को दी जाए सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को पुलिस विभाग की प्रमुख प्राथमिकताएं बताते हुए अधिकारियों को प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा।

प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए संचालित किया जाए जनजागरण अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादवने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यवाहियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के अथक प्रयासों से मंडला और बालाघाट जिले नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हुए। मध्यप्रदेश की धरती से लाल सलाम को आखिरी सलाम किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश की धरती से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने सुशासन की मिसाल प्रस्तुत की है। मध्यप्रदेश, नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने वाला देश का पहला राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी अनेकों उपलब्धियों के लिए आज प्रदेशवासी मध्यप्रदेश पुलिस और सुरक्षाबलों पर गर्व करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित नशामुक्ति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के लिए जागरूकता, संवाद और सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार हर साल भर्ती के लिए कर रही है आवश्यक प्रबंधन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार भारत सरकार के नए आपराधिक कानूनों को लागू करते हुए और सभी जरूरी संसाधन जुटाते हुए पुलिस भर्ती प्रक्रिया को जारी रख रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। हमारा प्रयास है कि स्वीकृत पदों में से कोई भी पद खाली न रहे। विकास के क्रम में पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे।

सिंहस्थ : 2028 के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी है। इसके लिये अभी से प्रशिक्षण, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित वातावरण तथा आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था के प्रशिक्षण से प्रदेश में आयोजित होने वाले अन्य बड़े मेलों के प्रबंधन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

साम्प्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को मध्यप्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। इसके लिए धार प्रशासन और पुलिस बल बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश

  •     पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, यह सुनिश्चित किया जाए कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए।
  •     थानों में शुचिता का माहौल बने।
  •     वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण सुनिश्चित करें।
  •     वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए।
  •     यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो।
  • मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था आरंभ : डीजीपी  मकवाणा

कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया प्रदेश में डायल-112 सेवा, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण तथा नई आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं तथा लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों के निराकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नशे के विरुद्ध अभियान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता

पुलिस महानिदेशक  मकवाणा ने बताया कि बाल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर गत एक वर्ष के दौरान 14 हजार से अधिक नाबालिगों को संरक्षण एवं सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि नई आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन, साइबर अपराध नियंत्रण तथा बढ़ते कार्यभार को देखते हुए पुलिस व्यवस्था को और अधिक सक्षम, आधुनिक तथा तकनीक-संपन्न बनाया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा एवं नशे के विरुद्ध अभियान विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि “नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान के प्रथम चरण को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में इसके द्वितीय चरण को और अधिक व्यापक स्वरूप में संचालित किया जाएगा।

बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, समस्त जोनल पुलिस महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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