समान नागरिक संहिता पर जनसामान्य के सुझावों के अनुसार किया जाएगा नीति निर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समान नागरिक संहिता के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों के आधार पर किया जाएगा। बेहतर नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्राम स्तर तक नागरिकों को अपना अभिमत देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। नगरीय स्तर पर स्कूल-कॉलेजों में गतिविधियां संचालित करें, सामाजिक-व्यापारिक संस्थाओं, बार कॉउंसिल आदि में चर्चा के सत्र आयोजित कर जनसामान्य से अपनी राय प्रकट करने के लिए कहा जाए। शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी समान नागरिक संहिता के संबंध में भी अपने सुझाव दें। ग्राम स्तर पर रोजगार सहायक, पंचायत सचिव आदि इस विषय पर चर्चा को प्रोत्साहित करें। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा की बैठक भी आयोजित की जा सकती है। सभी जिला कलेक्टर इस गतिविधि को प्राथमिकता पर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश शनिवार को समान नागरिक संहिता जागरूकता अभियान पर जिला कलेक्टर्स की वीसी में दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई,  अनुपम राजन और शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे।

वेबसाइट पर देना है सुझाव : सरल है प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित हैं। इसके लिए विशेष रूप से वेबसाइट ucc.mp.gov.in का विमोचन किया गया है, जिस पर सुझाव देने की प्रक्रिया बहुत सरल है। वेबसाइट के फॉर्म में केवल नाम, लिंग, धर्म, संभाग, जिला, पता और मोबाइल नंबर अंकित करना है। कुल 12 प्रश्नों का उत्तर हाँ या ना में दिया जाना है। मोबाइल ओटीपी से सत्यापित करने से सुझाव जमा हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में जिला स्तर पर संचालित गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की।

जागरूकता बढ़ाना आवश्यक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समान नागरिक संहिता के उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी का विस्तार करने के लिए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विभिन्न व्यक्तिगत तथा पारिवारिक विधियों के अंतर्गत विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार आदि विषयों से संबंधित पृथक-पृथक प्रावधानों का समग्र परीक्षण कर विधिक संरचना विकसित करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य शासन द्वारा विषय के विधिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर समान नागरिक संहिता के संबंध में अनुशंसाओं को प्रस्तुत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा जिलों का भ्रमण कर लोगों को अपने सुझाव प्रेषित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स डील को अमेरिकी न्याय विभाग से मंजूरी, जांच बंद

 यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने पैरामाउंट स्काईडांस की तरफ से वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने के प्रपोजल की जांच की है। जांच में पाया गया है कि मीडिया कंपनियों के मर्जर से इंडस्ट्री में कंज्यूमर्स को नुकसान होने की संभावना नहीं है।

एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि उसने इस डील की जांच बंद कर दी है। इसके एंटीट्रस्ट डिवीजन के रेगुलेटर्स ने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर का असर ‘मीडिया और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम में कंपटीशन बढ़ाने वाला होगा, जिससे अमेरिकी कंज्यूमर्स और वर्कर्स को फायदा होगा।’

साल के शुरुआत में हुई थी डील
पैरामाउंट स्काईडांस ने फरवरी के आखिर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की डील की थी। पैरामाउंट को यह सफलता महीनों की बातचीत और नेटफ्लिक्स की एक बोली के बाद मिली। पैरामाउंट को पिछले साल स्काईडांस ने खरीदा था।

कंज्यूमर्स को मिलेगा ज्यादा कंटेंट
कंपनियों का तर्क है कि मर्जर इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए अच्छा होगा और कंज्यूमर्स को ज्यादा कंटेंट मिलेगा। मगर आलोचकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि ऐसी इंडस्ट्री में और ज्यादा समेकन का क्या मतलब हो सकता है, जिस पर पहले से ही कुछ बड़ी कंपनियों का कब्जा है।

मर्जर से बढ़ेगा कॉम्पिटिशन
मर्जर से मार्केट पर संभावित असर के बारे में रेगुलेटर्स ने इस बात पर भी विचार किया कि क्या इस डील से वीडियो स्ट्रीमिंग में कॉम्पिटिशन को नुकसान होगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से कॉम्पिटिशन बढ़ने की संभावना है क्योंकि यह कस्टमर्स को बड़े वीडियो स्ट्रीमिंग विकल्पों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प देगा।

कंज्यूमर का ध्यान खींचते हैं यूट्यूब और टिक टॉक
एजेंसी ने यह भी पाया कि यूट्यूब, टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया पोर्टल, जो वीडियो स्ट्रीमिंग कंटेंट भी देते हैं, वह अच्छी तरह से स्थापित एंटीट्रस्ट कानूनी मिसालों के तहत यहां कॉम्पिटिटिव विकल्प नहीं लगते हैं, हालांकि वे कंज्यूमर का ध्यान खींचने के लिए बड़े पैमाने पर कॉम्पिटिशन करते हैं।

रेगुलेटर्स ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से तथाकथित लीनियर टेलीविजन के लिए कॉम्पिटिशन को नुकसान होने की संभावना नहीं है, क्योंकि लाइव प्रोग्रामिंग के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है।

मर्जर के विरोध में हैं कई लोग
हजारों एक्टर्स, डायरेक्टर्स, राइटर्स और इंडस्ट्री के अन्य प्रोफेशनल्स ने पैरामाउंट डील का विरोध किया है। उनका तर्क है कि और ज्यादा समेकन से नौकरियां जाएंगी और फिल्ममेकर्स और फिल्म देखने वालों के लिए विकल्प कम हो जाएंगे। कई सांसदों ने भी इसी तरह चिंता जताई है।

 

सोना ₹6400 और चांदी ₹14,000 से ज्यादा टूटी, खरीदारी से पहले जान लें एक्सपर्ट की खास सलाह

इंदौर 

बीते कारोबारी हफ्ते में शुक्रवार को सोने और चांदी ने अपनी चमक एक बार फिर बिखेरी. राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के साथ शांति समझौते वाले बयान ने स्टॉक मार्केट के साथ कमोडिटी मार्केट को झूमने का मौका दे दिया था. नतीजन सोना एमसीएक्स पर 147 रुपये मजबूत होकर 150,675 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 418 रुपये चढ़कर 246,604 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई. एक समय पर सोना 151,053 और चांदी 2,47,000 रुपये के लेवल पर पहुंच गई थी, हालांकि आखिरी समय में मुनाफावसूली के चलते बढ़त दिन के हिसाब जैसी नहीं रही। 

शुक्रवार की इस तेजी का फायदा ये हुआ कि सोने-चांदी की हफ्ते वाली गिरावट में कुछ कमी आई है. इस हफ्ते सोना करीब 6,400 तो चांदी 14,300 रुपये सस्ती हुई है. ऐसे में अगर आप इन कीमती धातुओं को खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए शानदार मौका हो सकता है। 

दिल्ली के लोकल मार्केट में कैसी है सोने-चांदी की चाल?
एमसीएक्स का हाल आपने जान लिया. जरा अब देश के लोकल मार्केट में सोने-चांदी की चाल जानिए. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने के भाव दिल्ली में 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो पहले 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था. यानी सीधे तौर पर कीमतों में 6 हजार से ज्यादा की गिरावट आई. दूसरी तरफ चांदी तो सोने से भी ज्यादा सस्ती हुई है. एक किलो चांदी का भाव दिल्ली में 2,42,582 रुपये है, जो इस हफ्ते पहले 2,56,908 रुपये था. यानी चांदी 14,326 रुपये मार्केट में लुढ़की है। पूरे हफ्ते दिखा उतार-चढ़ाव
इस हफ्ते कमोडिटी मार्केट में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. सोने ने 9 जून को सुबह के सेशन में 1,52,519 रुपये का हाई लेवल टच किया था, तो वहीं 11 जून की सुबह ये लुढ़कर 1,44,782 रुपये के लो लेवल पर आ गया. इसी तरह चांदी 11 जून की शाम 2,32,591 के लो लेवल पर जा चुकी थी। 

वैश्विक बाजार का हाल कुछ अलग नहीं
लोकल मार्केट के जैसे ही वैश्विक मार्केट का हाल कुछ अलग नहीं है. इस हफ्ते सोना 4,248 डॉलर प्रति औंस और चांदी 68 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. हालांकि शुक्रवार को अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन कम होने से कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं, जिसके चलते ग्लोबल मार्केट में कीमतों में ग्रोथ देखी गई। 

क्यों कमजोर हुआ सोना-चांदी?
इस हफ्ते अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन चरम पर रहा. अमेरिका ने ईरान पर हमले किया. लग रहा था कि फरवरी आखिर और मार्च की स्थिति एक बार फिर देखने को मिल सकती है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ. जब भी डॉलर मजबूत होता है तो सोने-चांदी पर प्रेशर बनता है. इसके अलावा जब भी सोने-चांदी ने उठने की कोशिश की, वैसे ही निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में लगातार करेक्शन देखने को मिला। 

क्या है एक्सपर्ट की बाइंग टिप्स?
सोने-चांदी में खरीदारी को लेकर दिग्गज ब्रोकरेज फर्म केडिया एडवाइजरी से बात की. उन्होंने अगले 6 महीने के नजरिए से खरीदारी को लेकर लेवल्स साझा किए. केडिया एडवाइजरी के अनुसार निवेशक सोने के लिए 1.40 लाख से लेकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल एंट्री के लिए नोट कर सकते हैं. अगले 6 महीनों में सभी कुछ ठीक रहता है, जंग यहीं खत्म हो जाती है तो सोना 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है. वहीं, स्टॉप लॉस के लिए केडिया एडवाइजरी ने 1.35 लाख रुपये से 1.36 लाख रुपये के बीच का लेवल सजेस्ट किया है। 

दिग्विजय सिंह के सुप्रीम कोर्ट संबंधी बयान पर बवाल, अवमानना के आरोप के बीच सॉलिसिटर जनरल से शिकायत

भोपाल
 मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर भाजपा के कब्जे के बाद शुरू हुई राजनीतिक जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस जहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक शिकायती पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की आपराधिक अवमानना का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

‘चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल’ बयान पर आपत्ति
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने को मिली-जुली सीट चोरी करार दिया था। सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसकी ट्रांसक्रिप्ट भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। वीडियो में कांग्रेस नेता कथित तौर पर कह रहे हैं कि, ‘इस चोरी में सभी शामिल हैं। न केवल राज्य बल्कि केंद्र भी, चुनाव आयोग भी और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी।’ दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर अदालत पर यह टिप्पणी की थी।

कंटेम्प्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
इंदौर मेयर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान माननीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और अदालत को बदनाम करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971’ के सेक्शन 15(1)(बी) के तहत सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

‘पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर है’
इस पूरे घटनाक्रम पर महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने भी तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने को एक पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर बताया। ठाकुर ने दावा किया कि तेलंगाना में एक महिला द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई शिकायत पर नटराजन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण पीड़ित महिला की बद्दुआ के चलते उनका फॉर्म रिजेक्ट हुआ है।

आपराधिक अवमानना क्या होती है?
भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971’ लागू है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या नेता लिखित, मौखिक या वीडियो के जरिए अदालत की गरिमा को कम करने, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उसे ‘स्कैंडलाइज्ड’ करने की कोशिश करता है, तो सॉलिसिटर जनरल या अटॉर्नी जनरल की सहमति से सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।

 

मुहर्रम में DJ और म्यूजिक पर रोक, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी; उल्लंघन पर ₹50 हजार जुर्माना

रायपुर
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि इस्लामिक पर्वों को केवल इस्लामिक शिक्षा के अनुसार की आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए वफ्फ बोर्ड ने मस्जिद कमेटियों, दरगाह कमेटियों और आयोजकों के लिए लेजर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि सभी कार्यक्रम इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार ही आयोजित किए जाएं।

इस्लामिक एडवाइजरी जारी
एडवाइजरी में मुहर्रम और दूसरे इस्लामिक धार्मिक आयोजनों से पहले किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एजवाइजरी में वक्फ बोर्ड ने डीजे म्यूजिक, बैंड-बाजा, डांस प्रोग्राम, आतिशबाजी और पारंपरिक “शेर” परफॉर्मेंस जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि ऐसी गतिविधियां शरीयत के नियमों के मुताबिक नहीं हैं।

जुर्माने का भी प्रावधान
एडवाइज़री में चेतावनी दी गई है कि जो कमेटियां इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें कमेटी को भंग करने और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

सादगी से मनाएं त्योहार
वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे मुहर्रम को इबादत, सादगी, अनुशासन और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनाएं।

    छत्तीसगढ़ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी
    सादगी से साथ त्योहार मनाएं मुस्लिम समाज
    डीजे बजाना शरीयत के नियमों के खिलाफ
    उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना

बकरीद में की थी अपील
इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बकरीद को लेकर भी अपील की थी। बकरीद के दौरान वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कुर्बानी खुले में नहीं करना चाहिए। कुर्बानी बंद जगह पर होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि खुले में खून नहीं बहाना चाहिए। दूसरे धर्म के लोगों को सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे का उदाहरण पेश करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: बीमा कंपनी की याचिका खारिज, राइस मिल को 43.30 लाख देने का आदेश

 दुर्ग
 बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों के निपटारे में की जाने वाली मनमानी और कटौती पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को पूरी तरह से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, उपभोक्ता किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल की काउंटर अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 11 मार्च 2024 से आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा।

बिना ठोस कानूनी आधार के कम किया दावा
प्रकरण के अनुसार, दुर्ग ब्लॉक के समोदा में स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल ने अपनी मिल में स्थापित बूलर कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। एक अक्टूबर 2023 को यह मशीन अचानक खराब हो गई, जिसकी सूचना मिल प्रबंधन ने तुरंत बीमा कंपनी को दी। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, उपभोक्ता के 45 लाख 58 हजार 340 रुपये के वास्तविक दावे को घटाकर मात्र 20 लाख 55 हजार रुपये कर दिया।

जिला आयोग ने ग्राहक के पक्ष मे सुनाया आदेश
बीमा कंपनी के निर्णय के खिलाफ राइस मिल के संचालक कृष्णा अग्रवाल ने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग में न्याय की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला आयोग ने 28 जुलाई 2025 को बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश को चुनौती देते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। वहीं, पीड़ित उपभोक्ता ने भी काउंटर अपील दायर कर पूरे नुकसान की भरपाई की मांग की। राज्य आयोग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद माना कि कंपनी ने दावे को अनुचित तरीके से कम किया था और रिपेयर बिल के आधार पर पूरा भुगतान करने का फैसला सुनाया।

IRDAI से करेंगे शिकायत
उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर खारिज करने के बढ़ते मामलों को लेकर भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भी औपचारिक शिकायत भेजी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके।

 

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार

सिर्फ एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं तीन जिंदगियां

एमसीबी

रक्तदान को महादान कहा जाता है और यह केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस ( World Blood Donor Day) मनाया जाता है। यह दिवस उन लाखों स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। साथ ही यह दिवस सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी संदेश देता है।

क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2004 से विश्व रक्तदाता दिवस मनाने की शुरुआत की। 14 जून का दिन ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ( Karl Landsteiner) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चुना गया है। उन्होंने (ABO Blood Group System ) रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी, जिसने रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

रक्त का कोई विकल्प नहीं
आज तक रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त जीवनरक्षक साबित होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही किसी जरूरतमंद के लिए आशा की किरण बनते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त की एक यूनिट कम से कम तीन लोगों की जान बचा सकती है। रक्तदान के बाद रक्त को विभिन्न घटकोंकृरेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में विभाजित कर अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है।

कौन कर सकता है रक्तदान?
सामान्यतः 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 से 50 किलोग्राम या उससे अधिक हो तथा हीमोग्लोबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो, रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व चिकित्सकीय जांच और परामर्श लिया जाता है, जिससे दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

रक्तदान से जुड़े भ्रम और सच्चाई
समाज में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रक्तदान से कमजोरी आती है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की पूर्ति कर लेता है। नियमित रक्तदान स्वास्थ्य परीक्षण का भी एक अवसर प्रदान करता है।

रक्त समूहों की समझ भी है जरूरी
रक्तदान और रक्त प्राप्ति रक्त समूहों पर निर्भर करती है। सही रक्त समूह मिलने पर ही मरीज का सुरक्षित उपचार संभव होता है।

O $ :  सबसे सामान्य रक्त समूह
देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी का रक्त समूह  O $ माना जाता है। O $  रक्त समूह वाले व्यक्ति  O $‚ A $‚ B $ और  AB $   समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि वे केवल  O $  और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

O & : यूनिवर्सल डोनर
O & रक्त समूह को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है क्योंकि इस समूह का रक्त लगभग सभी रक्त समूहों के मरीजों को दिया जा सकता है। हालांकि  O&  समूह के व्यक्ति केवल  O &  रक्त ही प्राप्त कर सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में इस रक्त समूह का विशेष महत्व होता है।

AB $ : यूनिवर्सल रिसीवर
AB $ रक्त समूह वाले लोग किसी भी रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। इसी कारण इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहा जाता है। हालांकि वे केवल  AB $  समूह के लोगों को ही रक्तदान कर सकते हैं।

A $ रक्त समूह
A $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  A $ और  AB $  रक्त समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। वहीं वे  A $] A  &] O $ और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

A  & रक्त समूह
A & रक्त समूह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। इस समूह के लोग  A $] A  &] AB $  और  AB & रक्त समूह को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  A& और  A& समूह से ही प्राप्त कर सकते हैं।

B $ रक्त समूह
B $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $ और  AB $ समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे  B $] B &] O $ और  O &   समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

B &रक्त समूह
B &रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $] B &] AB $ और  AB & समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  B & और  O & समूह से प्राप्त कर सकते हैं।

AB & : दुर्लभ रक्त समूह
AB & भारत में अपेक्षाकृत दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल है। इस समूह के लोग  AB $ और  AB & को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि रक्त  AB &] A  &] B & और  O &  समूह से प्राप्त कर सकते हैं।

युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
देश में रक्त की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता न केवल रक्त भंडार को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश भी प्रसारित करती है।

रक्तदान: महादान
रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। किसी अनजान व्यक्ति को जीवनदान देने का सुख और संतोष अमूल्य होता है। एक छोटा-सा प्रयास किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है और किसी मरीज को नया जीवन दे सकता है।

निष्कर्ष
विश्व रक्तदाता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि रक्त की आवश्यकता किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है। अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीजों की जिंदगी स्वैच्छिक रक्तदाताओं पर निर्भर रहती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान का संकल्प लेना चाहिए। रक्तदान कर हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

संदेश
“रक्तदान करें, जीवन बचाएं। आपकी एक यूनिट रक्त किसी के लिए नई उम्मीद, नई खुशियां और नया जीवन बन सकती है।“

विशेष: लेख – लोकेश्वर सिंह

 

 

रायपुर : अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर : पक्की सड़कें, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और हर आय वर्ग के लिए आवास

रायपुर : अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर : पक्की सड़कें, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और हर आय वर्ग के लिए आवास

अटल विहार योजना से 184 परिवारों को मिला आशियाना

75.39 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है सुनियोजित आवासीय परिसर

रायपुर,

घर केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि वह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव होता है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना ने कोरबा जिले के सैकड़ों परिवारों के लिए इस सपने को साकार कर दिखाया है। अपने घर का सपना संजोए अनेक परिवार आज कोरबा नगरीय क्षेत्र के झगरहा में विकसित अटल विहार कॉलोनी में आत्मविश्वास और संतोष के साथ जीवन बिता रहे हैं। यह आवासीय परिसर आज इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी बनता है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा 75 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से 19 एकड़ में यह आवासीय परियोजना विकसित की गई है। विभिन्न आय वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां कुल 335 स्वतंत्र आवासों एवं फ्लैट भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसमें 50 एच.आई.जी., 18 सीनियर एम.आई.जी., 32 जूनियर एम.आई.जी., 75 एल.आई.जी. तथा 160 ई.डब्ल्यू.एस. आवासों सहित प्रकोष्ठ भवन का निर्माण शामिल है।

परियोजना के अंतर्गत अब तक 305 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और उनका चरणबद्ध हस्तांतरण किया जा रहा है। वर्तमान में 22 एच.आई.जी. तथा 5 सीनियर एम.आई.जी. भवनों का हस्तांतरण भी जारी है। यह उपलब्धि केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

अटल विहार कॉलोनी में अब तक 184 आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं, जहां परिवार पिछले तीन वर्षों से शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में निवास कर रहे हैं। पक्की सड़कें, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नियोजित आवासीय परिसर और सामुदायिक वातावरण ने यहां के निवासियों को एक नई जीवन शैली प्रदान की है। जिन परिवारों के लिए स्थायी आवास कभी एक चुनौती था, उनके लिए अटल विहार आज आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन का पर्याय बन चुका है।

वर्तमान में कॉलोनी में एक व्यवसायिक भू-खण्ड, 4 एच.आई.जी. भवन तथा 103 ई.डब्ल्यू.एस. फ्लैट भवन क्रय के लिए उपलब्ध हैं, जिससे और अधिक परिवार अपने घर के सपने को वास्तविकता में बदल सकते हैं।

झगरहा स्थित अटल विहार कॉलोनी न केवल आवास निर्माण की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, बल्कि यह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की प्रतिबद्धता का सजीव उदाहरण भी है। यहां बसते परिवार इस बात के साक्षी हैं कि गुणवत्तापूर्ण आवास किस प्रकार जीवन की दिशा और दशा दोनों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद

नई शिक्षा नीति से खेल और शिक्षा को मिल रही नई दिशा 2036
ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश में खेल उन्नयन में दी जानकारी

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के साथ शूटिंग अकादमी का दौरा किया और खिलाड़ियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल, खेल और नवाचार से जोड़ने का कार्य किया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों को मिला विशेष स्थान

केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से खेल और शारीरिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। अब विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई में से किसी एक का चयन करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे खेल गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

एपीएआर आईडी से जुड़ेंगी खिलाड़ियों की उपलब्धियां

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि एपीएआर (APAAR) आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों की शैक्षणिक तथा खेल संबंधी उपलब्धियों को एक मंच पर जोड़ा जाएगा। इससे उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों का समग्र रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों क्षेत्रों में लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इंटर-स्पोर्ट्स गतिविधियों को क्रेडिट स्कोर से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि खेलों में सक्रिय भागीदारी को भी अकादमिक मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सके।

आईआईटी सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा खेलों का महत्व

केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी स्पोर्ट्स कोटा की व्यवस्था की गई है। यह कदम खेल प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने और खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का संकल्प

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना है। उन्होंने 2036 ओलंपिक को देश का महत्वपूर्ण लक्ष्य बताते हुए कहा कि खेलों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब भारत को विकसित राष्ट्र, आत्मनिर्भर राष्ट्र और विश्व की अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना हमारा सामूहिक लक्ष्य होगा।

मंत्री सारंग ने दी शूटिंग अकादमी की जानकारी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश की खेल उपलब्धियों एवं राज्य शूटिंग अकादमी की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित शूटिंग अकादमी देश की ही नहीं बल्कि विश्वस्तरीय खेल अकादमियों में शामिल है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खिलाड़ियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्री सारंग ने बताया कि हाल ही में ओलंपिक चयन प्रक्रिया (ट्रायल्स) का आयोजन भी इसी शूटिंग अकादमी में किया गया था, जो इसकी उत्कृष्ट अधोसंरचना और व्यवस्थाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देखने को मिल रहे हैं।

खिलाड़ियों की उपलब्धियों से कराया अवगत

मंत्री सारंग ने अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित पदकों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध करा रही है।

 

MP Transfer Policy: 15 जून आखिरी तारीख, ट्रांसफर में देरी पर सख्त हुए CM; परफॉर्मेंस के आधार पर होंगे तबादले

भोपाल 
अब तबादलों में परफार्मेंस को आधार बनाया जाएगा। जिनका परफार्मेंस अच्छा होगा, वे तीन साल की अवधि पूरी करने बाद भी एक ही स्थान पर रह सकेंगे। ऐसे शासकीय सेवकों को विभागाध्यक्ष अपनी ओर से मौका देंगे, लेकिन जिनका कामकाज अच्छा नहीं होगा, उन्हें हटाने के लिए तीन साल के कार्यकाल पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। 6 महीने में ही हटाया जा सकेगा। ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार सामान्य प्रशासन के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव (कार्मिक) एम सेलवेन्द्रन को दिए।

अब तक तीन साल में होती थी कार्यवाही
आमतौर पर शासकीय सेवकों को एक स्थान पर तीन साल या अधिक की सेवा अवधि पूरी करने के बाद हटाया जाता है। सीएम ने सुशासन भवन में अपने प्रभार के विभागों की समीक्षा की। बारी-बारी से अफसरों को बुलाकर कामकाज पूछा आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भी सीएम ने चर्चा की।

अगले साल काम के आधार पर होगा ट्रांसफर
मुख्यमंत्री (MP Transfer Policy) ने शासकीय सेवकों के तबादलों के लिए परफार्मेंस वाले जिन आधारों को तैयार करने की बात कही है, वे अगले साल की तबादला नीति में शामिल किए जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में तबादलों का अंतिम चरण जारी है। इसमें किसी भी आधार को शामिल करना मुश्किल काम हो सकता है इसलिए आने वाले वर्ष की तबादला नीति को परफार्मेंस बेस्ड तबादला नीति के रूप में तैयार करेंगे।

इधर तीन दिन और लेकिन नहीं हो रहे ट्रांसफर
सरकार ने 13 दिन पहले तबादलों से बैन हटाया। अब तीन दिन बाद फिर से बैन लगने वाला है। लेकिन इन 13 दिनों में 90 फीसदी विभागों ने एक भी तबादले नहीं किए। यानी जो अफसर-कर्मचारी जहां पर डटे हुए हैं वे वहीं पर रहना चाहते हैं। वहीं सबसे बड़ी अनदेखी यह कि सरकार द्वारा तबादला नीति सार्वजनिक किए जाने के बावजूद एक भी विभागों ने खाली पदों को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। जबकि अंदर खाने गुपचुप सूचियां बनाई जा रही हैं।

सीएम ने पारदर्शिता की बात कही लेकिन अफसरों ने इस पर तवज्जो नहीं दी। अब प्रदेशभर के शासकीय सेवक सरकार और भाजपा को कोस रहे हैं।

स्कूल शिक्षा में पोर्टल ही नहीं, प्रोग्रामर पर गाज
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, दोनों ने कहा कि जो भी तबादले होंगे, उसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग में हाल यह है कि शिक्षकों के लॉग-इन आइडी के जरिए पोर्टल खोलने के निर्देश हैं, लेकिन वह खुल ही नहीं रहा। आवेदन के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है। मंत्री के दफ्तर में भीड़ लग रही है। हालांकि विभाग ने एक प्रोग्रामर को हटा दिया है।

स्वास्थ्य विभाग में आवेदन ले रहे, तबादला नहीं
कर्मचारियों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले आवेदनों के लिए पोर्टल बनाया। हजारों की संख्या में आवेदन भी आ चुके हैं, लेकिन तबादले नहीं किए जा रहे हैं। यही हाल जनजाति कार्य विभाग का है। यहां भी आवेदनों की भरमार है लेकिन निपटारा नहीं।

मंत्रियों से बिना पूछे तबादला, सीएम को शिकायत
कास एवं आवास विभाग में तबादलों को लेकर शिकायतें भी होने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, इंदर सिंह परमार और प्रद्मु्न सिंह तोमर के क्षेत्र के कुछ सीएमओ को नगरीय प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने अपने स्तर पर ही हटा दिया। तीनों मंत्रियों ने इस बात की शिकायत सीएम को कर दी। इसके बाद मामला विभागीय मंत्री को देखने के लिए कहा गया।

उधर एक जिले के पुलिस अधीक्षक पर प्रभारी मंत्री से बगैर पूछे तबादला करने का मामला भी सीएम तक पहुंचा है। संबंधित मंत्री का कहना है कि पुलिस अधीक्षक ने 17 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए लेकिन, एक भी सहमति नहीं ली। इसके बाद एसपी को जमकर फटकारा गया।

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