राज्यमंत्री गौर ने किया निर्माणाधीन 10 लेन सड़क का जायजा

राज्यमंत्री  गौर ने किया निर्माणाधीन 10 लेन सड़क का जायजा

गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुगम यातायात सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री गौर

राज्यमंत्री  गौर बोली एक वर्ष में पूर्ण करें 10 लेन सड़क का निर्माण कार्य, आमजन को यातायात में नहीं हो असुविधा

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को निर्माणाधीन 10 लेन सड़क के कार्य का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं। यह 10 लेन सड़क परियोजना भी इसी तीव्र विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि 10 लेन सड़क का यह निर्माण कार्य हर हाल में अगस्त 2027 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत समस्याओं एवं अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लिया और इनके शीघ्र निराकरण के लिये संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने निर्माण एजेंसी और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य के दौरान आम नागरिकों को यातायात, आवागमन एवं अपनी दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और सुव्यवस्थित ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा, सुगम यातायात एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख तय, 9 जुलाई को मशहद में होगा दफन; 2 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मीद

तेहरान 
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख की घोषणा कर दी गई है. तेहरान प्रशासन के अनुसार राजकीय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी, जबकि 9 जुलाई को उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में मुहर्रम के आयोजनों का दौर जारी है। 

तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने बताया कि मरहूम सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार टाल दिया गया है. खामेनेई को लेकर पहले जो कार्यक्रम तय किया गया था, उसमें बदलाव किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मुहर्रम के दौरान होने वाले पारंपरिक आयोजनों और शोक सभाओं पर असर न पड़े। 

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी को दिए बयान में अलीरेजा जकानी ने कहा कि अंतिम संस्कार मुहर्रम के 10 दिनों के बाद करने का फैसला लिया गया है. यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि लोग इमाम हुसैन के लिए अपना वार्षिक शोक पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ मना सकें. शिया समुदाय के लिए इमाम हुसैन का विशेष महत्व है। 

680 CE में कर्बला की लड़ाई में उनकी शहादत को याद करते हुए हर वर्ष मुहर्रम के दौरान बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसी वजह से अली खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम  4 जुलाई से शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा. इस दौरान भारी जनसमूह के जुटने की उम्मीद है। 

अमेरिकी-इजराइली हमले में हुई थी मौत
लेकिन मेयर अलीरेजा जकानी ने न्यूज एजेंसी के एक बयान में कहा कि समारोह को मुहर्रम के पहले 10 दिनों के बाद तक के लिए टाल दिया गया है, ताकि लोग इमाम हुसैन के लिए अपना सालाना शोक पूरा कर सकें. हुसैन 680 CE में कर्बला की लड़ाई में मारे गए शुरुआती शिया नेता थे। 

इसका मतलब है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से शुरू होगा. तेहरान के अधिकारियों ने पहले कहा था कि उन्हें 20 मिलियन लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 

दफनाये जाने का कार्यक्रम मूल रूप से मार्च में निर्धारित था, लेकिन युद्ध के कारण स्थगित कर दिया गया था. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, इसके पहले 4 जुलाई से तेहरान में तीन दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चलेगा, जिसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में एक और समारोह होगा। 

दफनाए जाने के कार्यक्रम में हुई देरी
ईरानी अधिकारियों ने घोषणा की है कि पूर्व सर्वोच्च नेता को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में मारे जाने के 132 दिन बाद 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा. यह ऐसे समय में आया है जब खामेनेई के दफनाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि उनकी हत्या के 100 से अधिक दिन बीत चुके हैं। 

मूल रूप से दफनाया जाने का कार्यक्रम मार्च में होने की उम्मीद थी, लेकिन संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं, उनके अवशेषों की स्थिति और उनके बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खामेनेई को सत्ता के हस्तांतरण को लेकर महीनों तक चली अटकलों के बीच इसमें देरी हुई। 

एक अनुमान के अनुसार मरहूम सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में दुनियाभर से करीब दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. यही वजह है कि सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्थाओं को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. अली खामेनेई ने लगभग 37 वर्षों तक इस्लामिक रिपब्लिक का नेतृत्व किया था। 

रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को US और इजरायल ने अपने संयुक्त हमलों में सेंट्रल तेहरान स्थित अली खामेनेई के घर में उनको मार दिया था. इसी दिन मिडिल ईस्ट शुरू हुआ था. उनकी मौत के बाद 4 मार्च को राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन युद्ध की वजह से स्थगित कर दिया गया। 

ईरान सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार की नई तारीखों की घोषणा के बाद देशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं. तेहरान से लेकर मशहद तक होने वाले इन कार्यक्रमों पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह आयोजन ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभाओं में से एक माना जा रहा है। 

भारत बना दुनिया के एलीट क्लब का हिस्सा, ICBM को हवा में मार गिराने वाली तकनीक में हासिल की बड़ी सफलता

 नई दिल्ली

भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की ‘नेक्स्ट-जेनरेशन’ की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है। 

इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ ‘मल्टी-लेयर्ड डिफेंस’ और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा ‘एलीट’ देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है। 

इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी। 

क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता?
मिसाइल डिफेंस की भाषा में ‘मल्टी-लेयर्ड डिफेंस’ का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…

    एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है। 

    एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है। 

DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं। 

ICBM को रोकने वाला ‘एलीट क्लब’: भारत की बड़ी वैश्विक छलांग
इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है। 

अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका ‘बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस’सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।    

नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण
इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का ‘मेडन फ्लाइट-टेस्ट’ यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।   

यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 

वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत
इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया। 

इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।  

भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ? जानिए भारतीय सेना के अगले प्रमुख बनने की चर्चा में क्यों हैं

नई दिल्ली

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय थल सेना के अगले अध्यक्ष होंगे. सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है. जनरल के स्थायी रैंक के साथ वो 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे. वो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का कार्यकाल 31 अगस्त, 2028 तक होगा। 

महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित खड़कवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे. लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं। 

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है. लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया. सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव हासिल किया। 

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया। 

क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। 

करीब 40 साल का सैन्य अनुभव, कई अहम कमानों का नेतृत्व किया
दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल करने वाले धीरज सेठ को करीब 40 साल का सैन्य अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कमान संभाली है।

धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी भी रह चुके हैं। वे पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (अंगोला), सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है।

जूनियर कमांड कोर्स में टॉपर, कई सम्मान हासिल किए
वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), DSSC वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे जूनियर कमांड कोर्स में फर्स्ट रैंक और DSSC में बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल हासिल कर चुके हैं।

उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका-पेरिस में किया कोर्स
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में मोंटेरी स्थित नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स,, पेरिस में मिलिट्री कॉलेज में डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स, महू में हायर कमांड कोर्स और नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा, उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, विकसित इलाके में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स की कमान भी संभाली है।

सेना के आधुनिकीकरण के लिए जाने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ हमेशा एक कुशल सैन्य अधिकारी रहे हैं और पेशेवर सैन्य शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जनरल ऑफिसर हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता विकास के रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना से जुड़ी पहलों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है खुशखबरी, जुलाई में बढ़ सकती है सैलरी

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है।

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी।

कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान
8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है।

पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है।

कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी?
सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…

    पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।

    दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा।

7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा?
तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था।

इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम
वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है।

इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट?
केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है।

आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी।

फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा।

क्या होता है वेतन आयोग ?
केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है।

आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जांजगीर चांपा जिले को देंगे विभिन्न विकास कार्यों की सौगात

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जांजगीर चांपा जिले को देंगे विभिन्न विकास कार्यों की सौगात

सत्य निज नाम सत्संग सम्मेलन में होंगे शामिल

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 जून को जांजगीर चांपा जिले के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा जिले में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय सत्य निज नाम बोध संस्थान पोड़ी (राछा) में आयोजित सत्य निज नाम सत्संग सम्मलेन में भी शामिल होंगे।

केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि जिले के प्रभारी एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विशिष्ट अतिथि छ.ग. विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद जांजगीर-चांपा श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक जांजगीर-चांपा ब्यास कश्यप, विधायक अकलतरा राघवेन्द्र कुमार सिंह, विधायक पामगढ़ श्रीमती शेषराज हरबंश, विधायक जैजैपुर बालेश्वर साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, अध्यक्ष छ.ग. खनिज विकास निगम सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता आनंद मिरी, उपाध्यक्ष जिला पंचायत गगन जयपुरिया, अध्यक्ष जनपद पंचायत नवागढ़ श्रीमती कांता कश्यप, ग्राम पंचायत पोड़ी सरपंच श्रीमती सरोजनी आशिकर होंगे। 

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल

सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा था स्थानीय उत्पाद, बाजार में बढ़ी सुगंधित पारंपरिक चावल की मांग

रायपुर,

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना जरिया

         गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए।

कलेक्टर की मौजूदगी में 7 हजार की सीधी खरीदी

        जिले में पहुंचे इन ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की विशेष उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल की खरीदी की। इस खरीदी की कुल कीमत 7 हजार रुपये रही। रायपुर से आए ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्पाद की तारीफ किए जाने के बाद ही उनकी रुचि इस चावल के प्रति जगी थी और वे खुद इसकी सुगंध और स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी इस चावल की खरीदी जारी रखने की बात कही।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है मजबूती

        इस मौके पर तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति रंग ला रही है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके लिए बाजार के नए रास्ते खुल रहे हैं।

कृषि समृद्धि का नया प्रतीक बना विष्णु भोग

       अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला विष्णु भोग चावल अब सिर्फ एक स्थानीय फसल नहीं, बल्कि जिले की कृषि समृद्धि और महिला उद्यमिता का एक सफल ब्रांड बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं।

रायपुर : शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर : शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की मिसाल बने जवानों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं

रायपुर,

  माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों “शौर्य चक्र” से सम्मानित वीर पुलिस एवं सुरक्षा बल के जवानों से उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज अपने नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में आत्मीय मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम सहित जवानों के परिजन एवं परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे।

जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत – शर्मा

     उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ और देश को ऐसे वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए असाधारण परिस्थितियों में भी वीरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

योगदान में परिवारों का त्याग, समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण

       मुलाकात के दौरान शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट, इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख तथा राइफलमैन भोज राम साहू के साहसिक कार्यों की सराहना की और उनके परिजनों से भी मुलाकात की और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश सेवा के इस गौरवपूर्ण योगदान में परिवारों का त्याग और समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के अदम्य साहस भरी घटनाओं के बारे में भी उनसे जानकारी ली।

कठिन परिस्थितियों में किया नक्सलियों का मुकाबला

      ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट एवं इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को 16 अप्रैल 2024 को कांकेर क्षेत्र में नक्सलियों के विरुद्ध संचालित एक बड़े अभियान में अद्वितीय नेतृत्व, साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों का मुकाबला करते हुए महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी।

गंभीर रूप से घायल होकर भी अदम्य साहस के साथ संभाला मोर्चा

       इसी प्रकार 3 असम राइफल्स के राइफलमैन भोज राम साहू को भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस के साथ मोर्चा संभालते हुए दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने और अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।

सरकार जवानों के सम्मान, कल्याण और परिवारों की सुरक्षा लिए प्रतिबद्ध

      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा बलों के जवानों के सम्मान, कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्मानित जवानों एवं उनके परिजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका साहस और बलिदान राष्ट्र सेवा का सर्वाेच्च उदाहरण है।

16 जून से खुलेंगे स्कूल, तिलक लगाकर होगा स्वागत; मुफ्त किताबें-यूनिफॉर्म और एडमिशन फेस्ट की तैयारी

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल 16 जून से ही खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 16 जून 2026 से पढ़ाई शुरू होगी।

आदेश के मुताबिक, प्रदेश में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 का नियमित संचालन 16 जून से शुरू किया जाएगा। इससे पहले गर्मी के कारण स्कूल खुलने में देरी की अटकलें लगाई जा रही थी।

स्कूल खुलने के साथ ही एडमिशन फेस्ट होगा। तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया जाएगा। नए बच्चों के एडमिशन के लिए गांवों-शहरों में मुनादी की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने स्पेशल प्लान तैयार किया गया है।

बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स का सम्मान किया जाएगा। वहीं प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार फ्री किताबें दी जाएगी। किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के जरिए किया जाएगा।

स्कूलों में मनाया जाएगा एडमिशन फेस्ट
16 जून से शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को इसकी तैयारी के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करना, पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ना और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।

निर्देशों के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले परिसर, कक्षाओं और भवनों की साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। शाला प्रवेश उत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर, पोस्टर, रैली और मुनादी का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

स्कूल छोड़ चुके बच्चों को लाने स्पेशल प्लान
विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची लेकर पहली कक्षा में प्रवेश की तैयारी करने और पांचवीं पास विद्यार्थियों का छठवीं कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

शिक्षकों के पेंडिंग मामलों के निराकरण और आगामी 3 महीनों की पढ़ाई की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।

शाला प्रवेश उत्सव के दौरान पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। वहीं पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों का विशेष स्वागत किया जाएगा।

प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार मिलेंगी फ्री किताबें
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश के गैर अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को कक्षा 1 से 10वीं तक की हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की मुफ्त पाठ्यपुस्तकें तय कार्यक्रम के अनुसार दी जाएंगी। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर वितरण योजना तैयार की है।

निगम के अनुसार, किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के माध्यम से किया जाएगा। स्कूलों को निर्धारित तारीख पर अपने प्रतिनिधि को भेजकर किताबें लेनी होंगी। यदि कोई स्कूल तय दिन नहीं पहुंच पाता है, तो उसे बाद में भी किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।

अस्थायी डिपो में रिजर्व डे भी रखा गया
विभाग ने बताया कि किसी तकनीकी या अन्य कारण से वितरण प्रभावित होने पर स्कूलों को टोकन नंबर दिया जाएगा और अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर किताबें दी जाएंगी। अस्थायी डिपो में इसके लिए रिजर्व डे भी रखा गया है।

सुबह 10 बजे से दी जाएगी किताबें
भीड़ से बचने के लिए स्कूल संचालक डिपो प्रभारी से संपर्क कर अलग समय निर्धारित कर सकते हैं। किताबों का वितरण हर दिन सुबह 10 बजे से शुरू होगा। जरूरत पड़ने पर रविवार और सरकारी अवकाश के दिन भी किताबें दी जाएगी।

पाठ्यपुस्तक निगम ने कहा है कि किताबों का वितरण डीपीआई की उपलब्ध कराई गई छात्र संख्या और ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों के आधार पर होगा। यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में बदलाव हुआ है, तो इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को देनी होगी।

ट्विशा केस में बड़ा खुलासा! कॉल डिटेल से कई प्रभावशाली लोगों पर शिकंजा, CBI कोर्ट में पेश करेगी रिपोर्ट

भोपाल 
ट्विशा शर्मा डेथ केस में सीबीआई जांच की स्पीड कुछ बढ़ी है। गुरुवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों व अधिवक्ताओं की भूमिका की जांच के लिए प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष को भेजे गए हलफनामे के बाद अब कॉल डिटेल रेकॉर्ड (सीडीआर) सामने आई है। इसमें कई प्रभावशाली लोग फंसते दिख रहे हैं। इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर समर्थ के करीबी वकील से पूछताछ की। सीबीआई ने अभी तक जांच के निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया है हालांकि जल्द ही जिला कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही जा रही है।

कॉल डिटेल रेकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर सीबीआई, एक साथ कई गुत्थियां सुलझा सकती है। दावा किया गया है कि पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत वाले दिन 12 मई की देर रात को और अगले दिन कई मोबाइल कॉल किए थे। इनमें जज, वकील और अन्य प्रभावशाली लोग शामिल थे। हालांकि इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है।

उधर, फरियादी पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने सीडीआर का हवाला देते हुए दावा किया है कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से वकालतनामा पेश करने वाले अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना सहित अन्य अनेक रसूखदारों को कई कॉल किए गए थे। ज्ञात हो कि श्रेयस राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अधिवक्ता के तौर पर नियुक्त हैं।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने अभी तक जांच के निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया है। 16 जून को अगली पेशी जिला कोर्ट में है, तब कोई रिपोर्ट प्रस्तुत करने की संभावना जताई जा रही है। मामले में आरोपी बनाए गए पति समर्थ सिंह और सास पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों की अगली पेशी 16 जून को होना है।

लैपटॉप की जांच पूरी, अब मोबाइल पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने ट्विशा के लैपटॉप की तकनीकी जांच पूरी कर ली है। निजी जानकारियां, फोटो और मृतका की पुरानी कंपनी से जुड़े कामकाजी दस्तावेज खंगाले गए हैं। अब सीबीआई ट्विशा के मोबाइल को खंगाल रही है।

पॉर्लर में नजर आए वकील से पूछताछ
केस का एक अहम घटनाक्रम था ट्विशा का मौत से पहले पॉर्लर में जाना। वहां के सीसीटीवी फुटेज में वह बहुत ही सहज नजर आई थी। सीसीटीवी फुटेज सामने आए जिसमें तीन अधिवक्ता पॉर्लर के सोफे पर बैठे नजर आ रहे हैं। इन्हीं में से एक अधिवक्ता से सीबीआइ ने पूछताछ की है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि संबंधित लोगों के पॉर्लर जाने का उद्देश्य क्या था और उन्हें किसने वहां भेजा था।

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