Amazon के विज्ञापन पर विवाद: आर्यभट्ट के कथित मजाक से नाराज हिंदू संगठन, भेजा लीगल नोटिस

नई दिल्ली

 ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन (Amazon) के एक विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठन ने आपत्ति जताई है. हिंदू संगठन का कहना है कि अमेजन के एक एड में प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का आपत्तिजनक ढंग से उपहास उड़ाया गया. इस मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है. सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिंदू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा भेजी गई इस नोटिस में मांग की गई है कि अमेजन 48 घंटे के भीतर भारतीय जनता से सार्वजनिक माफी मांगे और इस विवादित विज्ञापन को तुरंत वापस ले. मांग पूरी न होने पर अमेजन के विरुद्ध फौजदारी और दीवानी मुकदमा दर्ज किया जाएगा, ऐसा स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है। 

हिंदू संगठन के मुताबिक इस विज्ञापन को लेकर देश भर के राष्ट्रप्रेमी नागरिकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर ‘अमेज़न का बहिष्कार करो’ (#Boycott_Amazon) अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है। 

आयभट्ट जैसी वेशभूषा में मजाकिया तंज
यह विवाद ‘अमेज़न नाऊ’ (Amazon Now) के प्रचार अभियान से जुड़ा है. जिसमें आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को ‘‘जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक” के रूप में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि जिस महान ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक ने दुनिया को ‘शून्य’ की अमूल्य अवधारणा दी और वैश्विक स्तर पर भारत का वैज्ञानिक परचम लहराया, उन्हें केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ‘कॉर्पोरेट मस्कट’ बनाकर उनकी क्रूर थट्टा उड़ाना भारत की महान ज्ञान-विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का जानबूझकर किया गया अपमान है। 

पहले भी अमेजन के एड विवादों में आए
नोटिस में ध्यान दिलाया गया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिंदू प्रतीकों का अपमान करने का अमेजन का यह पुराना इतिहास रहा है. इससे पहले भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी) के चित्रों वाले पायदान, टॉयलेट सीट कवर बेचे जाने और ‘तांडव’ वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके लिए भारी विरोध के बाद कंपनी को माफी मांगनी पड़ी थी। 

केवल व्यावसायिक मुनाफे के लिए भारतीय महापुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा 196 व 197 (वैमनस्य फैलाना और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित करना) तथा धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है। 

48 घंटे में विज्ञापन हटाकर मांगे माफी नहीं तो केस
इस पृष्ठभूमि में हिंदू जनजागृति समिति ने अमेज़न को अपनी शर्तें पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. इसके तहत ‘आर्यभट्ट – अमेज़न नाऊ’ विज्ञापन को यु-ट्यूब, इन्स्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टीवी सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्थाई रूप से हटाना होगा. साथ ही, कंपनी को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट के होमपेज और देश के अग्रणी समाचार पत्रों में हिंदू समाज और भारतीय संस्कृति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी होगी, तथा भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों या महापुरुषों का अपमान न करने का एक लिखित वचन पत्र भी देना होगा. अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दी गई अवधि में कार्रवाई न होने पर अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा। 

रवि किशन का रिएक्शन: रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से फिर चर्चा में आई पुरानी भोजपुरी फिल्म

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धु्रंधर के दोनों पार्ट पर दुनियाभर के लोगों ने जमकर प्यार लुटाया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर चुन-चुनकर रिकॉर्ड तोड़ डाले. अब इस फिल्म के बीच एक्टर रवि किशन की भी मौज हो गई. इसके पीछे की वजह खुद एक्टर ने बताई है.

दरअसल साल 2014 में आई रवि किशन की फिल्म ‘धुरंधर: द शूटर’, रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर के आने के बाद से अचानक सुर्खियों में आ गई. उस दौरान भोजपुरी ‘धुरंधर’ के सीन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे थे. लोगों ने तो इसे ही बॉलीवुड की धुरंधर का रीमेक तक बता दिया. अब इस पर रवि किशन ने रिएक्ट किया है.

रवि किशन ने क्या कहा?
धमाल 4 के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान रवि किशन से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए अपनी बात रखी. रवि किशन ने अपने खास और देसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा, ‘हां भाई, मुझे इस बात की पूरी खबर है. मेरी जिंदगी में ऐसी धमाकेदार और अजीबोगरीब चीजें अक्सर होती रहती हैं.’ उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने बहुत पहले ‘धुरंधर’ नाम की फिल्म में काम किया था और उसका जोन भी कुछ वैसा ही था, जैसी 2025-26 में आई बॉलीवुड वाली ‘धुरंधर’ है. हालांकि, उनकी फिल्म भोजपुरी में थी और उसे एक सीमित बजट के साथ बनाया गया था.

हंसते हुए रवि किशन ने आगे कहा कि आज के समय में बॉलीवुड की ‘धुरंधर’ को ढूंढने के चक्कर में या फिर उस फिल्म की जबरदस्त लहर की वजह से लोगों ने उनकी पुरानी भोजपुरी ‘धुरंधर’ को भी पूरा देख डाला. इसके लिए उन्होंने दर्शकों का हंसते हुए शुक्रिया अदा किया. मजाकिया लहजे में चुटकी लेते हुए रवि किशन बोले, ‘मेरी इस फिल्म के जो प्रोड्यूसर्स और राइट्स होल्डर्स हैं, वो तो इस चक्कर में रातोरात अचानक करोड़पति बन गए हैं.’

बता दें कि भोजपुरी फिल्म धुरंधर: द शूटर को दीपक तिवारी ने डायरेक्ट किया था. इसमें रवि किशन ने पुलिस ऑफिसर का रोल किया था. उनके किरदार का नाम रणवीर था.

धमाल 4 का ट्रेलर हुआ रिलीज
बीते दिन मुंबई के पास एक एम्यूजमेंट पार्क में जब फिल्म ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान मूवी की स्टारकास्ट जुटी. इस खास मौके पर अजय देवगन, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, उपेंद्र लिमये और मशहूर भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के साथ-साथ बाल कलाकार रियांश डाभी और अक्षरा पडवाल भी मौजूद रहे. फिल्म के प्रोड्यूसर भूषण कुमार, अशोक ठकेरिया और डायरेक्टर इंद्र कुमार ने भी इस इवेंट में शिरकत की. फिल्म 10 जुलाई को रिलीज होने वाली है.

अभिषेक बनर्जी के घर आधी रात पुलिस का छापा, ताला तोड़कर घुसी टीम; मदन मित्रा के आवास पर भी दबिश

कोलकत्ता 
पश्चिम बंगाल की राजनीति शनिवार को पूरी तरह गरमा गई। एक तरफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी टीम ने छापेमारी की, तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है।

पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के समन और पूछताछ का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने और कोलकाता पुलिस के अधिकारी तड़के करीब तीन बजे के बाद अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित घर के बाहर पहुंचे। कुछ ही समय बाद केंद्रीय बलों के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली, जबकि पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और पूरे घर की तलाशी ली। घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंच गईं। इस पूरे अभियान को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार घर का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी।

टीएमसी नेता की शिकायत पर की गई कार्रवाई
यह सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित राय पर टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस तड़के तीन बजे अभिषेक के घर पहुंची और करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया।

भागी-भागी आईं ममता बनर्जी
इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंचीं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसके सारे रिकॉर्डिंग हैं, हमने जांच में पूरा सहयोग किया है।

चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी
गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक बनर्जी इस वक्त चौतरफा कानूनी मुकदमों से घिरे हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही सीआईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें रविवार (14 जून) को फिर पेश होना है।

इसके अलावा, सोमवार (15 जून) को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ईडी ने समन किया है और मंगलवार (16 जून) को धमकी मामले में सीआइडी के सामने उन्हें पेश होना है। इन सबके बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने राज्य की राजनीति गरमा दी है।

यह तलाशी अभियान चार घंटे से अधिक समय तक चला। सुबह तक पुलिस और अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे। बाद में कुछ अधिकारी बाहर निकलते और फिर अंदर जाते देखे गए। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर का ताला तोड़ा और हर कमरे की गहन तलाशी ली। उन्होंने कहा, “उन्होंने ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की जांच की।” हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

शनिवार को ही पश्चिम बंगाल में दूसरा बड़ा घटनाक्रम नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ा सामने आया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन की जांच के तहत की गई।

ईडी की टीम ने मदन मित्रा और उनसे जुड़े करीब सात परिसरों को निशाना बनाया। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और वे पहले राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में भर्ती के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई। यह रिश्वत नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए दी और ली गई। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से मदन मित्रा के संबंध होने की बात सामने आई है।

ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इस घोटाले की शुरुआत स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान हुई थी। उस समय ईडी ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिले थे। वहीं से नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच आगे बढ़ी।

बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने लगे, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई।

इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसी बीच कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रशासनिक शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई थीं, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मदन मित्रा ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों से इस घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की अपील भी की।

इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति को तनावपूर्ण मोड़ पर ला दिया है, जहां एक तरफ सत्ता पक्ष के नेताओं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

रायपुर 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश की जेलों में बड़ा बदलाव, 58 साल पुराने बंदी नियमों में संशोधन की तैयारी

भोपाल
राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे।
आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित
दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी।

भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा
भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा।

पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी।

संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे।

रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी
रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो।

कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर
नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।

एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी
मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं।

जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा।

पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने पर उन्हें निर्धारित समय से पहले बैरक से बाहर निकलने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए मुख्य प्रहरी की मंजूरी आवश्यक होगी। हालांकि यह सुविधा केवल अल्प अवधि की सजा काट रहे बंदियों को ही दी जाएगी। कपड़ों की सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब प्रत्येक बंदी को नियमित रूप से साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। कपड़े, कंबल और बिस्तरों की समय-समय पर धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती कैदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में जरूरत के अनुसार वाशिंग मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

मध्य प्रदेश की जेलों में वर्तमान में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। राज्य की 132 जेलों में करीब 45 हजार से 48 हजार कैदी निरुद्ध हैं जबकि कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 30 हजार के आसपास है। इनमें बड़ी संख्या विचाराधीन बंदियों की है। भीड़भाड़ के कारण स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार चुनौतियां सामने आती रही हैं। जेल विभाग का मानना है कि नए संशोधन जेल प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। साथ ही बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन स्तर में भी सुधार होगा। आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान से सुरक्षा प्रबंधन मजबूत होगा जबकि भोजन और सफाई संबंधी नए नियम जेलों को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने में सहायक साबित हो सकते हैं।

धर्मेंद्र प्रधान का ऐलान: 21 जून को दोबारा होगी NEET परीक्षा, छात्रों से कहा- पढ़ाई पर रखें पूरा फोकस

भोपाल 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शुक्रवार रात भोपाल पहुंचे। भोपाल एयरपोर्ट पर दैनिक भास्कर ने प्रधान से पूछा कि नीट पेपरलीक मामले में लगातार आपके इस्तीफे की मांग हो रही है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- नीट की परीक्षा दोबारा 21 जून को होगी। 

21 जून को बहुत व्यवस्थित तरीके से नीट की परीक्षा की जाएगी। मैं आपके माध्यम से अपील करता हूं सभी समाज का सहयोग चाहिए। एनटीए ने परीक्षार्थियों को 15 मिनट का और एक्स्ट्रा टाइम देने का तय किया है।

प्रधान बोले- टीएमसी कोई पार्टी नहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस में लगातार हो रही टूट पर धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा- वो तो उनका अंदरुनी मामला है वो कह पाएंगे क्या हो रहा है वहां तो बंगाल की जनता ने बीजेपी को बहुत बड़ा आशीर्वाद दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया।

हमारे नए मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लोगों का दिल जीत रहे हैं बंगाल की भूमि को एक बार फिर नई ऊंचाई तक ले जाने का काम कर रहे हैं। तृणमूल तो कोई पार्टी नहीं दो परिवार की एक व्यवस्था थी उनके बारे में वो जानें।

नीट यूजी का एग्जाम का टाइम 15 मिनट बढ़ा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने NEET UG रीएग्‍जाम में कुछ बदलाव किए हैं। नए नोटिस के तहत, परीक्षा का समय अब 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है। इसके अलावा आंसर शीट में रफ वर्क के लिए भी जगह बढ़ाई गई है। NEET UG 2026 इस साल पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया गया था। रीएग्‍जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाना है जिसे लेकर नए बदलाव किए गए हैं।

NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने इसे रद्द कर दिया। मामले की जांच CBI कर रही है और अब 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा होगी।

लॉकडाउन में रहेंगे पेपर सेटर्स
एग्जाम होने तक पेपर सेटर्स को कड़े प्रतिबंध का पालन करना होगा। उन्‍हें 21 जून तक लॉकडाउन में रखा जाएगा ताकि पेपर लीक होने की आशंका न रहे। एग्जाम आयोजन के लिए देश भर के 551 शहर और विदेशों में 14 शहरों को चुना गया है।

पेपर ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल
अधिकारियों के अनुसार एग्जाम से संबंधित सभी काम जैसे प्रश्नों की सेटिंग, ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सरकार द्वारा क्वेश्चन पेपर से संबंधित सभी सामान ले जाने के लिए इंडियन एयरफोर्स एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।

डिजिटल क्षेत्र में अधिकारी 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग पर नजर जमाए हुए हैं ताकि फेक क्वेश्चन पेपर, गलत सूचनाओं और संदिग्ध गतिविधियों को एग्जाम से दूर रखा जा सके।

एक्सपर्ट को खुद पता नहीं होगा कि किस एग्जाम के पेपर बना रहे हैं
NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की नई योजना के तहत अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट्स सिर्फ प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें करीब 10 हजार प्रश्न हो सकते हैं। बाद में टेक्निक की मदद से इन प्रश्नों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा।

NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।

इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं।

भोपाल में ATS का बड़ा खुलासा: कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़, मोहम्मद फराज गिरफ्तार

भोपाल

मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल से एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान, देवबंद, डार्क ऐप्स, जिहादी साहित्य, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जाते बताए जा रहे हैं. पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को एजेंसी एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है, जिसे कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था. निर्देश साफ थे. हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो. जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग के बाद दुनिया के दूसरे देशों में भी जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी।

पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें
MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

जानकारी के अनुसार फराज भोपाल में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था. बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है. ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था।

जांच के दौरान ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है. एजेंसी अब उसके डिजिटल डेटा, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध ग्रुप्स की परतें खोल रही है।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी
सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था. वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था. एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है।

ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई. एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था. ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा. इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया।

मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई
जांच के दौरान देवबंद के एक मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है. एजेंसियां अब इन संपर्कों की भूमिका की जांच कर रही हैं. ATS यह पता लगाने में जुटी है कि फराज किन-किन लोगों के संपर्क में था, क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था और क्या स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही थी।

जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया. उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा. ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था।

शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह Telegram और WhatsApp के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था. जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था।

युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने का काम
ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था. उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके ।

जांच एजेंसी के मुताबिक फराज ने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था. वह अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाने के लिए तैयार था. एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि क्या उसकी विदेश यात्रा की कोई तारीख, रूट या फंडिंग चैनल भी तय किया गया था।

ATS सूत्रों के अनुसार युवाओं को भड़काने के लिए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कथित प्रशिक्षण वीडियो, जिहादी साहित्य और डिजिटल दस्तावेज साझा किए जा रहे थे. फराज के मोबाइल से बरामद कथित सामग्री को एजेंसी उसके बयानों की पुष्टि करने वाला अहम डिजिटल सबूत मान रही है।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की. आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया।

इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है।

भोपाल पुलिस तक को नहीं थी इस एक्शन की जानकारी
आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी. ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा।

अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल रही हैं. फराज के फोन, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, पासपोर्ट, विदेशी संपर्कों, देवबंद लिंक, डार्क ऐप्स और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भोपाल से पकड़ा गया फराज सिर्फ एक कट्टरपंथी युवक था या फिर सीमा पार से रिमोट कंट्रोल हो रहे एक बड़े इंटरस्टेट मॉड्यूल का हिस्सा. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में देश के किन-किन शहरों से युवा जुड़े थे और क्या कोई बड़ा हमला अंजाम देने की तैयारी जमीन तक पहुंच चुकी थी. फराज फिलहाल 16 जून तक ATS रिमांड पर है. पूछताछ में एजेंसी के सामने तीन बड़े सवाल हैं. पाकिस्तान में बैठा हैंडलर कौन है, इंटरस्टेट ग्रुप में कितने लोग जुड़े हैं और क्या लोन वुल्फ हमलों की तैयारी सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक थी या उससे आगे भी बढ़ चुकी थी।

AI पर अमेरिका का बड़ा फैसला! दुनियाभर के यूजर्स के लिए बंद हुई यह लोकप्रिय सर्विस

वाशिंगटन

अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. अब अमेरिका ने AI कंपनी एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. नए नियम के तहत विदेशी नागरिकस, कर्मचारियों और किसी भी गैर- अमेरिकी संस्था को एंथ्रोपिक के एडवांस्ड AI प्रोग्राम तक के एक्सेस देने पर रोक लगा दी गई है। 

अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण के तहत एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके बाद एंथ्रोपिक का बयान भी सामने आया है. साथ ही कंपनी ने बताया है किन मॉडल को नए नियम के दायरे में रखा है. कंपनी ने बताया है कि आगे गलतफहमी को दूर करके दोबारा सर्विस शुरू करेंगे। 

एंथ्रोपिक ने अपना बयान जारी किया 

एंथ्रोपिक ने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश जारी किए हैं। 

नए निर्देश के तहत अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक के लिए Fable 5 और Mythos 5 के एक्सेस को सस्पेंड करने का ऑर्डर दिया है. फिर चाहें वह एंथ्रोपिक के विदेशी नागरिक कर्मचारी ही क्यों ना हो। 

कंपनी ने आगे बताया है कि अमेरिकी सरकार के आदेश का सीधा असर यह है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद करनी पड़ रही हैं। 

अन्य सर्विस पर कोई असर नहीं 
अमेरिकी आदेश के तहत Claude के अन्य सभी मॉडल्स की पहुंच पर कोई असर नहीं होगा. कंपनी ने आगे बताया है कि इस आदेश की वजह से प्रभावित होने वाली परेशानी के लिए अपने कस्टमर से माफी चाहते हैं। 

कंपनी का अनुमान है कि यह किसी प्रकार की गलतफहमी है और जल्द से जल्द अपनी सर्विस को दोबारा शुरू करने की कोशिश करेंगे। 

एंथ्रोपिक का मिथोस चर्चा में क्यों? 
एंथ्रोपिक ने हाल ही में मिथोस AI लेवल का AI मॉडल लॉन्च किया है, जिसका एक्सेस आम लोगों को भी मिलेगा. कंपनी ने इसको Fable 5 नाम दिया है. मिथोस की लॉन्चिंग के समय कंपनी ने बताया था कि इसको खासतौर से सरकारी और चुनिंदा कंपनियों के लिए तैयार किया है. मिथोस को विशेष रूप से साइबर सिक्योरिटी और जटिल सॉफ्टवेयर कोड का पता करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

MP में तीसरी संतान वाले अफसर की नौकरी गई, CM के बयान के 3 दिन बाद विभाग ने किया बर्खास्त

भोपाल
मध्यप्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी नियमों और राजनीतिक घोषणाओं के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी, लेकिन उनकी घोषणा के बाद ही सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस नियम के तहत कार्रवाई हुई, उसी नियम को लेकर सरकार बदलाव के संकेत दे चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री राहत का संदेश दे चुके थे, तब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की?

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया।

CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था।

मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म
दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिका
यत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था।

दरअसल, अशोक सिंह परिहार पर आरोप था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए और दस्तावेजों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच रिपोर्ट के बाद पंजीयन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।

दिलचस्प बात यह है कि परिहार ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि 1992 से सरकारी सेवा में रहने वाला कर्मचारी नियमों से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकता।

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही
जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।

अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं
जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री की घोषणा केवल भविष्य की नियुक्तियों के लिए थी या वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होनी थी? यदि सरकार नियम बदलना चाहती थी तो विभागों को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या एक अधिकारी की नौकरी उस समय चली गई जब सरकार उसी नियम को बदलने की तैयारी में थी?

फिलहाल पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अभी तक कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की है। वहीं अशोक सिंह परिहार के पास अब विभागीय अपील और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है।

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की नौकरी का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की उस खाई का भी है, जहां एक तरफ राजनीतिक घोषणा होती है और दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था के आधार पर फैसले जारी रहते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

जोरहाट एयरबेस पर IAF विमान हादसे का शिकार, लैंडिंग के बाद विमान में लगी भीषण आग

जोरहाट 

असम के जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायु सेना के एक विमान के क्रैश होने की खबर है. बताया जा रहा कि विमान में लैंडिंग के बाद आग लग गई. जो विमान क्रैश हुआ है वह वायु सेना का AN-31 विमान बताया जा रहा है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-31 श्रेणी का मालवाहक विमान था, जिसका उपयोग आपूर्ति परिवहन के लिए किया जाता है. यह दुर्घटना विमान के वायुसेना बेस पर लैंडिंग के दौरान हुई. हादसे में पायलट के मारे जाने की आशंका है. हालांकि अभी तक किसी  के हताहत होने की वायु सेना ने पुष्टि नहीं की है। 

जानकारी के मुताबिक विमान लैंडिंग स्ट्रिप पर नहीं लैंड कर सका था, बल्कि एयरसबेस के उबड़-खाबड़ और घास वाले हिस्से में उसकी लैंडिंग हुई. बता दें कि असम के जोरहाट स्थित ​रौरिया एयर फोर्स स्टेशन (Rowriah Air Force Station) पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायु सेना के प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक है. यह एयरबेस असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में वायु अभियानों, सैन्य रसद आपूर्ति और रणनीतिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान बीच से दो हिस्सों में बंट गया. इसमें सवार क्रू और अन्य वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। 

AN-32 अब तक 22 दुर्घटनाओं का शिकार
वर्ष 1986 से अब तक AN-32 विमान भारत में लगभग 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है. इसकी सबसे हालिया दुर्घटना वर्ष 2025 में दर्ज की गई थी. दुर्घटनाओं के इतिहास के बावजूद AN-32 भारतीय वायु सेना के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले परिवहन विमानों में शामिल है और देशभर में लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैनिकों की आवाजाही तथा विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में आज भी इसकी अहम भूमिका बनी हुई है। 

इसी साल मार्च में भारतीय वायु सेना का एक सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई थी. विमान ने जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी. यह हादसा असम के कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था, जो जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। 

IAF का भरोसेमंद कार्गो विमान है AN-32
भारतीय वायु सेना का Antonov AN-32 एक दो इंजन वाला कार्गो प्लेन है, जिसे मूल रूप से सोवियत संघ की एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने डेवलप किया था. यह विमान AN-26 का अपग्रेडेड वर्जन है और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों, गर्म मौसम और कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. भारतीय वायु सेना ने 1980 के दशक से AN-32 को अपने कार्गो फ्लीट का अहम हिस्सा बनाया हुआ है। 

भारतीय वायु सेना AN-32 का उपयोग सैनिकों, हथियारों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के लिए करती है. यह विमान हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में रसद आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह छोटे रनवे पर भी टेक ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम है. विमान लगभग 6.7 टन तक का भार ले जा सकता है और इसमें 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाने की क्षमता है। 

भारतीय वायु सेना के पास लंबे समय तक 100 से अधिक AN-32 विमान रहे हैं. समय-समय पर इनका अपग्रेडेशन भी किया गया है. इसमें मॉडर्न एवियोनिक्स, नेविगेशन और सिक्योरिटी सिस्टम का अपग्रेडेशन शामिल है. हालांकि, लंबे समय से सेवा में रहने के कारण इन विमानों को चरणबद्ध तरीके से नए परिवहन विमानों से बदलने की योजना पर भी काम चल रहा है. इसके बावजूद AN-32 आज भी भारतीय वायु सेना के सबसे भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है और आपदा राहत, सैन्य अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

शुरुआती जानकारी के​ विमान, विमान की लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई. सूत्रों के मुताबिक, घटना जोरहाट एयरबेस के भीतर हुई. एयरबेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए। 

फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान में सवार क्रू और अन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. भारतीय वायुसेना घटना की जांच में जुट गई हैं. इस घटना को लेकर वायुसेना की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है। 

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