भारत को मिला नया ‘ब्रह्मास्त्र’! लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में करेगा तबाह, सफल रहा परीक्षण

नई दिल्ली

डिफेंस सेक्टर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में आज सुबह-सुबह एक बड़ी खबर तब सामने आई, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर बताया कि DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा का प्रदर्शन करने के लिए लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए. रक्षा मंत्री ने इस पोस्ट के साथ तीन मिसाइलों के परीक्षण की तस्वीरें भी साझा की है. रक्षा मंत्री के पोस्ट ने पोस्ट में यह भी लिखा कि DRDO के इस सफल परीक्षण से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिसके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को रोकने की क्षमता है. रक्षा मंत्री ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। 

डीआरडीओ को मिली यह सफलता पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ाने वाला है. इन दोनों देशों के साथ भारत के सीमा सहित कई मुद्दों पर विवाद लंबे समय से है. ऐसे में डीआरडीओ को मिली यह सफलता न केवल दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने वाला है. बल्कि दुश्मन देशों की ओर से होने वाले खतरनाक हमलों को भी रोकने वाला है। 

भारत की रक्षा अनुसंधान एंव विकास संगठन (DRDO) को मिली इस सफलता के बारे में एक्स पोस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा- DRDO ने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक टेस्ट किया है, जो दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों से निपटने में मदद करेंगी। 

उन्होंने आगे लिखा लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस वाले तीन फ़्लाइटों का टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए गए। 
रक्षा मंत्री ने लिखा कि इस टेस्ट में मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया. इंटरसेप्टर ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. इन सिस्टम को नई मिसाइल चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है। 

चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हुआ भारत
इन सफल परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों में ला खड़ा किया है जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता है. ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज’ के पहले फ़्लाइट-टेस्ट के दौरान मध्यम दूरी की एंटी-शिप सुरक्षा का प्रदर्शन किया गया. इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई। 

होर्मुज में बढ़ा तनाव: भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच ईरान ने कॉमर्शियल शिप्स की ओर दागे ड्रोन

 नई दिल्ली
भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कई ड्रोन दागे हैं. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी “वन-वे अटैक ड्रोन” मार गिराए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने ही होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर भी ड्रोन अटैक की कोशिश की थी। 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए कई अटैक ड्रोन लॉन्च किए थे. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने इन सभी ड्रोन को मार गिराया. बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह अहम समुद्री गलियारा पूरी तरह खुला हुआ है और जहाजों की आवाजाही जारी है। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया. अधिकारी के मुताबिक, ये ड्रोन कॉमर्शियल समुद्री यातायात के लिए खतरा बन सकते थे। 

ईरान कर रहा भारतीय जहाजों पर हमले
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं के बीच अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर किया गया ड्रोन हमला “पूरी तरह अस्वीकार्य” है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे जल्द अपने रवैये में बदलाव करना होगा। 

हालांकि, भारत या ईरान की तरफ से गुरुवार रात या उसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास किसी भारतीय ध्वज वाले जहाज पर ड्रोन हमले की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. दोनों देशों की तरफ से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। 

भारतीय जहाजों पर हमला और US राजनयिक तलब
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ने इसी सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया. भारत ने ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले तीन व्यापारी जहाजों पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया है, इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. इसको लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात भी की है और विरोध दर्ज किया है। 

हैदराबाद में दिल दहला देने वाली घटना: 6 महीने की बच्ची को गोद में लेकर छठी मंजिल से कूदी महिला इंजीनियर

 हैदराबाद

हैदराबाद के मियापुर इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक बहुमंजिला इमारत की छठी मंजिल से कूदने के कारण 37 साल की महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई. इस आत्मघाती कदम को उठाते वक्त महिला की गोद में उसकी 6 महीने की मासूम बच्ची भी थी. लेकिन जैसे ही उसने छलांग लगाई, बच्ची महिला की गोद से छिटक कर दूर जा गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। 

यह पूरी घटना मियापुर के मयूरी नगर में मौजूद ‘लक्ष्मी प्रेस्टीज अपार्टमेंट’ की है. मृत महिला की पहचान ईशा साहू के रूप में हुई है, जो पेशे से एक आईटी इंजीनियर थीं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ईशा अपनी 6 महीने की बेटी को सीने से लगाए हुए अचानक अपार्टमेंट की छठी मंजिल से नीचे कूद गईं. हालांकि, नीचे गिरते वक्त हवा में ही बच्ची अचानक मां के हाथों से फिसल गई. यही वजह रही कि ईशा की तो मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन मासूम बच्ची को सिर्फ मामूली चोटें आईं. हादसे के तुरंत बाद आस-पास के लोग मौके पर दौड़े और बच्ची को केपीएचबी के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। 

इस कदम के पीछे की जो वजह सामने आ रही है, वह मानसिक तनाव से जुड़ी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ईशा पिछले कई महीनों से इंसोमनिया यानी नींद न आने की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. वह रात-रात भर सो नहीं पाती थीं. जांच अधिकारियों का अनुमान है कि लंबे समय तक नींद न पूरी होने की वजह से वह गहरे डिप्रेशन में चली गईं, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। 

फिलहाल मियापुर थाना पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. पुलिस अपार्टमेंट के लोगों और परिवार से पूछताछ कर रही है,ताकि घटना की असली वजह का पता लगाया जा सके। 

बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल आयोग का बड़ा एक्शन

बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल आयोग का बड़ा एक्शन

डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई

जोखिमपूर्ण फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त, कुल 20 बच्चों को संरक्षण

दूसरे प्रदेशों के नाबालिगों का रेस्क्यू, बाल तस्करी के एंगल से होगी जांच

रायपुर, 
 विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण हेतु प्रदेशभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9 नाबालिग बच्चों, बिलासपुर में आरपीएफ के माध्यम से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू कर कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया।

इसी क्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में राजधानी रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में विशेष औचक छापामार कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर एवं जोखिमपूर्ण प्रकृति का कार्य कराया जा रहा था। मौके से 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया तथा उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है। मामले में संबंधित ठेकेदार, बच्चों को यहां लाने वाले अन्य व्यक्तियों तथा संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

प्रकरण में प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण एवं अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 एवं 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाल श्रम एवं संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य कराया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

MP Monsoon Update: कब आएगा मानसून? भीषण गर्मी से जूझ रहे जिलों को जल्द राहत, 60 Kmph तूफान का अलर्ट

भोपाल
 मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत और आफत दोनों एक साथ दरवाजे पर खड़ी हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके अगले 4 दिनों में मध्यप्रदेश में एंट्री करने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले ही प्रदेश का मौसम पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इन जिलों में ओलावृष्टि और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सिवनी जिलों में तेज हवाओं के साथ ओले गिरने की आशंका है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर और सागर समेत करीब 40 से अधिक जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।

दूसरी तरफ, पश्चिमी मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, धार और खरगोन जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना रहेगा।

एमपी में 4 दिन की देरी से आएगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल मध्यप्रदेश में मानसून अपने तय समय से 4 दिन की देरी से एंट्री करेगा। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से (बघेलखंड और महाकौशल के रास्ते) से 17-18 जून को मानसून दस्तक दे सकता है। इसके बाद अगले 10 से 15 दिनों में यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। तब तक प्रदेश में प्री-मानसून एक्टिविटीज का दौर इसी तरह जारी रहेगा।

मौसम का चल रहा खेल, कहीं भारी बारिश, कहीं सूखा
मौसम विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश का वितरण बेहद असमान है। पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्यप्रदेश के छतरपुर (गौरिहार में सबसे ज्यादा 56 मिमी), पन्ना, सतना और रीवा में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, सतना में सामान्य से 893% और छतरपुर में 601% अधिक वर्षा हो चुकी है।

इन इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात
इसके उलट, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम जैसे मध्य व पश्चिमी जिलों में अभी तक सूखे जैसे हालात हैं और लोग पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से रीवा और सतना में जहां रात का तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक गिर गया है, वहीं भोपाल-रायसेन में रातें अब भी गर्म हैं।

किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, बुआई में न करें जल्दबाजी
मौसम विशेषज्ञों ने खरीफ फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का) की तैयारी कर रहे किसानों को विशेष सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश मुख्यतः स्थानीय बादलों और प्री-मानसून का नतीजा है, यह व्यापक मानसूनी वर्षा नहीं है।

14 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

14 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेशवासियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अपील
“घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प को साकार करने में बनें सहयोगी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं।

टोल फ्री नंबर सुविधा

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

मोहन यादव के फैसले का इंतजार, लाखों कर्मचारियों की प्रमोशन फाइल पर टिकी निगाहें

भोपाल
 मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है. दरअसल प्रदेश में पिछले 10 सालों से थमी हुई प्रमोशन की प्रक्रिया अब एक बार फिर कानूनी फेरबदल के भंवर में फंस गई है. हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित होने के बाद भी, मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण के कारण अब नए सिरे से बेंच का गठन होगा और दोबारा सुनवाई की जाएगी. इससे न केवल सेवारत कर्मचारियों का इंतजार लंबा हो गया है, बल्कि राज्य की आगामी नई भर्तियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 

मई 2016 से पूरी तरह ठप है पदोन्नति व्यवस्था
मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति मई 2016 से पूरी तरह से रुकी हुई है. दरअसल हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त किए जाने के बाद से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है. सरकार ने प्रशासनिक काम सुचारू रूप से चलाने के लिए कई अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार तो सौंप दिया, लेकिन उन्हें इस पद का कोई वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ. पद रिक्त न होने के कारण नीचे के पदों पर नई नियुक्तियां भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। 

​नए नियम भी कोर्ट में उलझे, सामान्य वर्ग की आपत्ति
गौरतलब ​है कि, पदोन्नति का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार ने सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श कर नए नियम तैयार किए थे. हालांकि सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इन नए नियमों पर गहरी आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की. सरकार ने नए नियमों के पक्ष में कई मजबूत तर्क रखे और आखिरकार 17 फरवरी को अदालत ने इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। 

मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से फंसा पेच
कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी बताते हैं कि, ”​सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए फैसलों को 90 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए. इसी निर्देश के कारण कर्मचारियों में उम्मीद जागी थी कि जून के प्रथम सप्ताह में अंतिम निर्णय आ जाएगा. लेकिन इसी बीच मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो गई. नियमानुसार अब इस मामले की सुनवाई के लिए पहले नई बेंच का गठन किया जाएगा और नए सिरे से पूरी बहस सुनी जाएगी, जिसमें काफी समय लग सकता है। 

​ढाई लाख पदों की नई भर्तियों भी पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञ के अनुसार, इस कानूनी गतिरोध का सीधा असर राज्य सरकार के रोजगार लक्ष्यों पर भी पड़ रहा है. सरकार ने वर्ष 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. वर्तमान में 78 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने से 13 प्रतिशत पद पहले से रुके हैं. अब प्रमोशन रुकने से पुराने पद खाली नहीं होंगे, जिससे स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नई भर्तियां पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं। 

कपास किसानों को मोहन सरकार का बड़ा तोहफा, मंडी टैक्स आधा; ‘सफेद सोने’ की खेती को मिलेगा बढ़ावा

बुरहानपुर
 मध्यप्रदेश में कपास यानी सफेद सोना उगाने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने कपास उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है, कपास पर लागू मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत (एक रुपए प्रति सैकड़ा) से घटाकर 0.50 प्रतिशत (50 पैसे प्रति सैकड़ा) कर दिया गया है, बीतें दिनों विधायक अर्चना चिटनीस ने मुख्यमंत्री के सामने कपास पर मंडी शुल्क घटाने की मांग रखी थी. अब सीएम ने चिटनिस की मांग पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. उइससे कपास उत्पादक किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। 

फिर खिल उठेगा कपास उद्योग
मोहन यादव सरकार के इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों, व्यापारियों सहित कृषि आधारित उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग उठी है. किसानों ने बताया कि बुरहानपुर में करीब एक दशक से ज्यादा समय से कपास उद्योग प्रभावित हो चुका है, अधिकांश जिनिंग फैक्ट्रियां बंद करके उद्योगपतियों ने पलायन किया है, लेकिन अब मंडी शुल्क कम किए जाने से दोबारा कपास जिनिंग शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। 

प्रदेश के इन कपास उत्पादक क्षेत्रों को होगा फायदा
इस निर्णय का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जो उद्योग पलायन कर चुके हैं, वह दोबारा लौट सकते हैं. खास बात यह है कि मोहन यादव सरकार के इस फैसले से न सिर्फ बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, इंदौर, आलीराजपुर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, क्षेत्र बल्कि संपूर्ण प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों और कपास आधारित उद्योगों को लाभ होगा. मध्य प्रदेश का में उत्पादित कपास अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की जिनिंग, प्रेसिंग सहित प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचेगा, इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा होगा। 

मंडी शुल्क घटने से लाभ मिलेगा, रकबा बढ़ेगा
कपास उत्पादक किसान सुनील महाजन ने सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्णय को स्वागत योग्य बताया है. किसान सुनील ने कहा, ” इससे कपास उत्पादक किसानों को लाभ होगा, साथ ही जो उद्योग पलायन कर चुके है, अब मंडी शुल्क घटाए जाने के बाद दोबारा जीवित होंगे. अब तक मंडी शुल्क ज्यादा होने के कारण कपास फसल से किसानों का मोहभंग हो गया था, लेकिन अब कपास का रकबा दोबारा बढ़ेगा, इससे जिनिंग फैक्ट्री संचालको भी लाभ मिलेगा. सरकार से मांग है कि भारतीय कपास निगम (CCI) का खरीदी केंद्र बुरहानपुर में स्थापित किया जाए और किसानों का पंजीयन किया जाए, इससे किसानों को राहत मिलेगी। 

सीएम के सामने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा : अर्चना चिटनिस
बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया, ” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर में निमाड़ इंडस्ट्रियल मीट में शिरकत की थी, यहां उन्होंने उद्यमी संवाद कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित किया था, इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव से कपास पर मंडी शुल्क कम करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. हमने सीएम से कहा था कि महाराष्ट्र की तुलना में अधिक मंडी शुल्क होने से मध्य प्रदेश के किसान, व्यापारी सहित जिनिंग उद्योग प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना कर रहे हैं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मांग को गंभीरता से लिया, उन्होंने हाल ही में कैबिनेट की बैठक में शुल्क में कमी का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 

हैदराबाद में एमईएआई ‘माइनिंग 4.0’ राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

हैदराबाद में एमईएआई ‘माइनिंग 4.0’ राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

 अमिताभ मुखर्जी ने ‘स्मार्ट, सुरक्षित और सस्टेनेबल’ खनन का किया आह्वान

हैदराबाद,

माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई ) ने आज हैदराबाद में “माइनिंग
4.0: सुरक्षित और सस्टेनेबल खनन कार्यों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की
शुभारंभ की । इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने
उद्योग जगत के प्रमुख, खनन पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएमडीसी के निदेशक, तकनीकी एवं एमईएआई हैदराबाद चैप्टर के अध्यक्ष श्री विनय कुमार
ने की, इस शुभ अवसर पर श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) ,एनएमडीसी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित
थे ।
सम्मेलन के प्रथम दिन इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि किस प्रकार तकनीक खनन कार्यों को लगातार एक नया रूप
दे रही है । विभिन्न सत्रों में खनन सुरक्षा, प्रचालन दक्षता तथा पर्यावरण प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए
डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जियोस्पेशियल सिस्टम तथा स्मार्ट मॉनिटरिंग तकनीकों
के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमिताभ मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा: “खनन में सुरक्षा का एकमात्र स्वीकार्य
आंकड़ा ‘शून्य’ (जीरो) है । सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी दोनों एक साथ चलने चाहिए तथा तकनीक इन्हें मजबूत करने में
हमारी सहयोग कर रही है । आज डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन खनन कार्यों को बदल रहे हैं, जिससे वे अधिक सुरक्षित,
कुशल एवं जिम्मेदार बन रहे हैं । जिस प्रकार से लौह अयस्क, स्टील तथा महत्वपूर्ण खनिजों व क्रिटिकल मिनरल्स की
मांग बढ़ रही है, खनन उद्योग के सामने एक बड़ा अवसर प्राप्‍त हो रहा है । इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना
होगा कि यह विकास जिम्मेदार खनन, निरंतर नवाचार (इन्नोवेशन) तथा सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन व वैल्यू
क्रिएशन द्वारा संचालित हो । एमईएआई जैसे सम्मेलन हमें एक-दूसरे से सीखने, नए दृष्टिकोण हासिल करने तथा
भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में सहयोग करते हैं ।”
इस सम्मेलन का मुख्य विषय यह भी था कि अनुसंधान और नवाचार को केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रखकर
व्यावहारिक खनन कार्यों में लागू किया जाए, ताकि जमीनी पर वास्तविक बदलाव लाया जा सके ।
उद्घाटन समारोह के समापन पर खनन क्षेत्र और इसके बदलते तकनीकी परिदृश्य में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेशेवरों
और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया । सम्मानित होने वाले दिग्गजों में निम्‍नांकित शामिल थे:
 श्री एस. कृष्णमूर्ति ,पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी तथा पूर्व महासचिव, एमईएआई
 श्री अक्षय दत्त त्रिपाठी, पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी

 डॉ. के. श्रीनिवास, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी,
अन्ना विश्वविद्यालय
 डॉ. के. वी. शंकर, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी,
अन्ना विश्वविद्यालय
इस सम्मेलन में अपनी भागीदारी के माध्यम से, एनएमडीसी ने सुरक्षित और अधिक सस्टेनेबल संचालन के लिए नई
तकनीकों के उपयोग, नवाचार को बढ़ावा देने तथा जिम्मेदार खनन पद्धतियों को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित
किया । एनएमडीसी में खानों के प्रबंधन और प्रचालन के उपायों को सुगम व बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेटेड ड्रिल,
रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी आधुनिक प्रणालियाँ लागू की जा रही
हैं ।
यह सम्मेलन 13 जून तक भी जारी रहेगा, जिसमें तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों के साथ आपसी संवाद तथा खनन के भविष्य
को आकार देने वाले उभरते रुझानों व प्रवृत्ति पर चर्चा की जाएगी ।
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Zoho का बड़ा दांव! स्वदेशी सर्वर ‘Nathu La’ लॉन्च, विदेशी सर्वरों को मिलेगी कड़ी टक्कर; PM मोदी ने सराहा

नई दिल्ली

मैसेजिंग ऐप Arattai बनाने वाली स्वदेशी कंपनी Zoho ने ‘Nathu La’ नाम का एक नया सर्वर पेश किया है, जिसे लेकर टेक और पॉलिसी दोनों सर्कल में हलचल है. यह लॉन्च ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया भर में AI को लेकर होड़ तेज है और हर देश अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने में लगा है। 

भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता, लेकिन अब तक सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि देश को अपने AI सिस्टम चलाने के लिए विदेशी सर्वर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहना पड़ता है। 

Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु पिछले कुछ समय से AI पर ज्यादा निर्भर होने के खतरों को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं. हाल ही में UC Berkeley जैसे संस्थानों में कंप्यूटर साइंस के छात्रों के रिजल्ट और सीखने की क्षमता को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी थी. वेम्बु का कहना है कि छात्रों को AI पर ज्यादा भरोसा करने से पहले अपनी बेसिक समझ मजबूत करनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि AI आपको तेजी से स्मार्ट बना सकता है, लेकिन उतनी ही तेजी से आपको कमजोर भी बना सकता है. उनका मानना है कि अगर छात्र हर चीज के लिए AI पर निर्भर हो जाएंगे, तो उनकी सोचने और खुद समस्या सुलझाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। 

पीएम मोदी ने पीएमओ ऑफिशियल अकाउंट से इसे शेयर भी किया है.
वेम्बु ने यह भी कहा कि कई मामलों में छात्र AI से बेहतर सीख नहीं रहे, बल्कि उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रहे हैं. उनके मुताबिक AI एक सहारा बन सकता है, लेकिन अगर उसी पर पूरी तरह टिक गए तो यह आदत बन जाती है। 

पहला इन हाउस सर्वर Nathu La
Zoho ने टेक्नोलॉजी के हार्डवेयर क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना पहला इन-हाउस सर्वर प्लेटफॉर्म ‘Nathu La’ लॉन्च किया है. कंपनी का कहना है कि यह सर्वर खास तौर पर AI और क्लाउड से जुड़े काम के लिए बनाया गया है. चेन्नई स्थित कंपनी के मुताबिक इससे इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कम होगा, बिजली की खपत घटेगी और टेक्नोलॉजी पर कंपनी का कंट्रोल भी बढ़ेगा। 

इस सर्वर को नागपुर में Zoho की इंजीनियरिंग टीम ने Intel के साथ मिलकर तैयार किया है. इसमें Intel Xeon 6 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है और इसे कंपनी अपने डेटा सेंटर में इस्तेमाल करेगी। 

कम बिजली की खपत
Zoho का दावा है कि यह सिस्टम लगभग वही परफॉर्मेंस देता है, लेकिन बिजली की खपत 12 से 18 प्रतिशत तक कम कर देता है और कुल खर्च में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत कर सकता है। 
कंपनी के मुताबिक AI से जुड़े बढ़ते खर्च ही इस फैसले की बड़ी वजह हैं. Zoho पहले से दुनिया भर में 150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स को सेवा दे रहा है और उसके 16 से ज्यादा डेटा सेंटर हैं. ऐसे में AI इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च तेजी से बढ़ रहा है. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में वही सर्वर सेटअप अब 3 से 4 गुना महंगा हो चुका है। 
Zoho फिलहाल इस सर्वर को बाजार में बेचने की योजना नहीं बना रहा है. कंपनी इसे अपने ही काम के लिए इस्तेमाल कर रही है और धीरे-धीरे अपने सिस्टम में लागू कर रही है. अभी कुछ सौ Nathu La सर्वर इस्तेमाल में हैं और उम्मीद है कि साल के अंत तक इनकी संख्या करीब 2000 तक पहुंच सकती है। 

श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया पर भी बताया कि इस सर्वर को बनाने में कई साल की मेहनत लगी है. नागपुर की R&D टीम ने इस पर काम किया और अब इसे दुनिया भर के Zoho डेटा सेंटर में इस्तेमाल किया जाएगा. उनका कहना है कि इससे कंपनी को बिजली और पैसे दोनों की बचत होगी, और आगे पूरा सॉफ्टवेयर सिस्टम और ज्यादा कुशल बनाया जाएगा। 

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