मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को दी बधाई

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) की द्वितीय अवसर की परीक्षा- 2026 में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने प्रदेश के विद्यार्थियों के हित में ऐतिहासिक पहल करते हुए इस वर्ष पहली बार पूरक परीक्षा के स्थान पर ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ आयोजित की। अपेक्षित परीक्षा परिणाम प्राप्त न कर पाने पर विद्यार्थी इस अवसर का लाभ ले सकते हैं। श्रेणी सुधार के उद्देश्य से भी विद्यार्थी इस परीक्षा में सम्मिलित होते हैं। इसके अतिरिक्त गंभीर रूप से अस्वस्थ हो जाने या विभिन्न कारणों से मुख्य परीक्षा में शामिल न हो पाने वाले विद्यार्थी इस परीक्षा का लाभ लेने में सक्षम होते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित ” राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020″ के अंतर्गत मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों के हित में यह ऐतिहासिक पहल की गई है। इस पहल ने हजारों विद्यार्थियों के सपनों, आत्मविश्वास और भविष्य के लिए नया अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वितीय अवसर की परीक्षा में भाग लेने वाले कुल एक लाख 42 हजार विद्यार्थियों में से 84 हजार विद्यार्थियों को सफलता मिली है। विद्यार्थियों द्वारा लिए गए इस लाभ का उनकी भावी शिक्षा की दृष्टि से भी विशेष महत्व है।

 

उपभोक्ता आयोग के 34 कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लेते हुए राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोगों में कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को “स्थायी कर्मी” का दर्जा प्रदान करने की अनुमति दे दी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत के विशेष प्रयासों से लिए गए इस निर्णय से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायित्व, सेवा सुरक्षा तथा विभिन्न शासकीय सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

खाद्य मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस निर्णय के तहत राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग एवं जिला आयोगों में कार्यरत 29 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा 5 ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर पदों पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में मान्यता प्रदान की जाएगी। इस संबंध में विभाग द्वारा औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के वर्ष 2016 के परिपत्र के अनुसार 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ देने के लिए शासन की पूर्व अनुमति आवश्यक थी। राज्य सरकार ने इस मामले को विशेष परिस्थितियों वाला प्रकरण मानते हुए “वन टाइम रिलेक्सेशन” प्रदान किया है, जिससे लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव को 9 जून 2026 को आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके पश्चात खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने संबंधित कर्मचारियों को स्थायी कर्मी घोषित किए जाने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए आदेश जारी कर दिए।

 राजपूत ने कहा कि इस निर्णय से कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के साथ-साथ नियमानुसार वेतन निर्धारण, अन्य वित्तीय लाभ एवं सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम कर्मचारी हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और संवेदनशील प्रशासन का प्रमाण है।

वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए यह निर्णय नई आशा और विश्वास लेकर आया है। माना जा रहा है कि इस पहल से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा तथा वे अधिक उत्साह, निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। सरकार का यह निर्णय कर्मचारी कल्याण और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

यूरोप में बढ़ता तनाव और प्रवासियों पर हमले, क्या भारतीयों का ‘यूरोपियन ड्रीम’ खतरे में है?

लंदन 

कभी बेहतर पढ़ाई, अच्छी नौकरी और सुरक्षित भविष्य के सपने लेकर यूरोप जाने वाले प्रवासियों के लिए अब माहौल पहले जैसा नहीं रहा. ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड और कई दूसरे यूरोपीय देशों में पिछले कुछ सालों से प्रवासियों को लेकर बहस तेज होती जा रही है. ताजा हालात ये हैं कि कहीं सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, कहीं सरकारें वीजा नियम सख्त कर रही हैं और कहीं स्थानीय लोग अपने शहरों में बढ़ती आबादी और संसाधनों पर दबाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। 

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूरोप में प्रवासियों के खिलाफ यह गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? क्या भारतीय भी इसके निशाने पर हैं? और अगर हां, तो फिर इस माहौल का भारतीय छात्रों, कामगारों और परिवारों पर क्या असर पड़ सकता है? इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें कुछ साल पीछे जाना होगा। 

साल 2015 में सीरिया, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता की वजह से लाखों लोग यूरोप की ओर बढ़े. जर्मनी समेत कई देशों ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों को स्वीकार किया. उस समय इसे मानवीय कदम माना गया. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतते गए, कई देशों में लोगों को लगने लगा कि स्कूलों, अस्पतालों, मकानों और सरकारी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। 

बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी के लिए भारतीय भी बड़ी संख्या में यूरोप जाने लगे. शिक्षा से लेकर रहन-सहन, साफ हवा और परिवार के लिए बेहतर माहौल की तलाश में भारतीयों ने यूरोपीय देशों को चुना. इसी दौरान यूक्रेन युद्ध की वजह से भी लाखों लोग अन्य यूरोपीय देश पहुंचे. यहीं से प्रवास और शरणार्थियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। 

ब्रिटेन में क्यों भड़का लोगों का गुस्सा?
ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों से प्रवासी एक बड़ा मुद्दा रहा है. यहां कहावत है कि लोग इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आते हैं और संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं. जंगों और स्थानीय प्रताड़ना की वजह से जब लोग ब्रिटेन पुहंचते हैं और सरकार उन्हें स्वीकार करती हैं तो उनके रहने-सहने के लिए सरकारी इंतजाम भी किए जाते हैं। 

कहा जाता है कि सरकार इन लोगों को अस्थायी रूप से होटलों में ठहराती है. कई शहरों और कस्बों में स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना था कि उनके इलाके में पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों और आवास की कमी है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी खबरें और अफवाहें भी फैलती रही हैं, जिनसे तनाव बढ़ा. कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक भी हुए। 

कई मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि, इन प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा शरणार्थी नीति और अवैध प्रवास था, लेकिन माहौल ऐसा बना कि कई प्रवासी समुदायों को असुरक्षा महसूस होने लगी है। 

आयरलैंड में क्या हुआ, प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
कुछ साल पहले तक आयरलैंड को प्रवासियों के प्रति आमतौर पर एक उदार देश माना जाता था. लेकिन हाल के वर्षों में वहां भी हालात बदलने लगे हैं. डबलिन और दूसरे शहरों में मकानों की भारी कमी है. किराए आसमान छू रहे हैं. स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि बड़ी संख्या में नए लोगों के आने से दबाव और बढ़ा है. 2023 के आखिर में डबलिन में हुई हिंसा के बाद प्रवास और सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है. इसके बाद कई जगहों पर शरणार्थी केंद्रों और आवास योजनाओं के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले. ताजा हालात ये हैं कि शहर-शहर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। 

ताजा मामला उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक सूडानी शरणार्थी से जुड़ी चाकूबाजी से जुड़ा है, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. घटना के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. हालात को काबू में करने के लिए एंटी-राइट पुलिस, स्पेशल फोर्सेज और वॉटर कैनन की तैनाती की गई. प्रदर्शनकारियों पर ईंटें फेंकने और वाहनों में आग लगाने के आरोप हैं, जिसके बाद कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 

स्थानीय मीडिया की मानें तो कुछ दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े उपद्रवियों ने प्रवासियों और जातीय अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए कई इलाकों में घर-घर जाकर डराने-धमकाने की कोशिश भी की. इस दौरान कुछ मकानों और कारोबारों पर हमले किए गए और प्रदर्शनकारियों ने कई संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचाया। 

जर्मनी में प्रवासियों और शरणार्थिों पर बहस तेज
जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. यहां लाखों विदेशी काम करते हैं. भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन जर्मनी में भी प्रवास को लेकर राजनीतिक माहौल बदल रहा है. कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि देश को अपनी सीमाओं और शरणार्थी व्यवस्था पर ज्यादा नियंत्रण की जरूरत है। 

दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो प्रवासियों के समर्थन में सड़कों पर उतरते हैं. यानी जर्मनी में लड़ाई सिर्फ प्रवासियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटा हुआ नजर आ रहा है। 

नीदरलैंड और दूसरे देशों में क्या तस्वीर है?
यूरोप के अन्य देशों में भी प्रवास को लेकर बहस तेज हुई है. कहीं मुद्दा मकानों की कमी है, कहीं सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो कहीं सरकारों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे सीमाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहीं. इटली लंबे समय से भूमध्य सागर के रास्ते आने वाले प्रवासियों का मुख्य प्रवेश द्वार रहा है. वहीं फ्रांस में भी समय-समय पर प्रवास और राष्ट्रीय पहचान को लेकर प्रदर्शन देखे जाते हैं. यानी हर देश की अपनी कहानी है, लेकिन लगभग हर जगह कुछ समान कारण दिखाई देते हैं। 

दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में इस समय बड़े पैमाने पर पर्यटन के खिलाफ भी विरोध बढ़ रहा है. नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, फ्रांस, स्पेन और इटली के कई शहरों में भी स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे हैं. लोगों का कहना है कि पर्यटकों की वजह से मकानों के किराए और संपत्तियों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि सार्वजनिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा है।  

स्पेन में बार्सिलोना और कैनरी द्वीप समूह समेत 40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. वहीं इटली के वेनिस, फ्लोरेंस, रोम और मिलान में किराये वाले पर्यटन आवासों के खिलाफ अभियान और विरोध प्रदर्शन जारी हैं. फ्रांस में मार्सेई से लेकर पेरिस तक कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने क्रूज जहाजों और अत्यधिक पर्यटक भीड़ के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं. हालांकि, ये आंदोलन खासतौर से पर्यटन और आवास संकट को लेकर हैं, लेकिन इन्होंने प्रवास, स्थानीय संसाधनों की बढ़ती लागत पर चल रही बहस को भी और तेज कर दिया है। 

आखिर यूरोप के लोग नाराज क्यों हैं?
अगर आसान भाषा में समझें तो यूरोप के कई देशों में लोगों की नाराजगी के पीछे पांच बड़े कारण हैं. पहला, मकानों की कमी, जहां कई शहरों में घर मिलना मुश्किल होता जा रहा है. दूसरा बड़ा मुद्दा बढ़ती महंगाई है. लोगों को लगता है कि संसाधन सीमित हैं और कंपटीशन बढ़ रहा है. तीसरा, शरणार्थी व्यवस्था पर दबाव बनाने की रणनीति है. सरकारों को हजारों लोगों के रहने, खाने और कानूनी प्रक्रिया का खर्च उठाना पड़ता है। 

चौथा, सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बड़ा मुद्दा है. कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद पूरे प्रवासी समुदाय को लेकर बहस शुरू हो जाती है. पांचवां, सोशल मीडिया भी है जिसकी वजह से प्रदर्शनों को हवा मिलती है. कई बार अधूरी या गलत जानकारी बहुत तेजी से फैलती है और माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण हो जाता है। 

भारतीयों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
यूरोप में रहने वाले ज्यादातर भारतीय छात्र, आईटी प्रोफेशनल, डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर्स या बिजनेस करने वाले लोग हैं. वे कानूनी तरीके से वहां पहुंचे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं. फिर भी जब किसी देश में प्रवास विरोधी माहौल बनता है, तो उसका असर सभी विदेशी समुदायों पर पड़ सकता है। 

मान लीजिए किसी देश की सरकार प्रवास कम करने का फैसला करती है. ऐसे में वह सिर्फ शरणार्थियों पर ही नहीं, बल्कि स्टूडेंट वीजा, वर्क वीजा और परिवार को बुलाने के नियमों को भी सख्त कर सकती है. ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और उनके परिवारों को लेकर नियमों में बदलाव हुए हैं. इसका असर भारतीयों पर भी पड़ा है। 

हर साल हजारों भारतीय छात्र ब्रिटेन, आयरलैंड और यूरोप के दूसरे देशों में पढ़ने जाते हैं. लेकिन अगर राजनीतिक माहौल लगातार प्रवास विरोधी होता है, तो सरकारें विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने, पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट के नियम बदलने या वीजा प्रक्रिया को और कड़ा करने जैसे कदम उठा सकती हैं. इसका मतलब यह नहीं कि भारतीय छात्रों के लिए दरवाजे बंद हो जाएंगे, लेकिन पहले की तुलना में रास्ता मुश्किल हो सकता है। 

नौकरी करने वाले भारतीयों पर क्या असर होगा?
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, डॉक्टर और इंजीनियर यूरोप की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं. दिलचस्प बात यह है कि यूरोप की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. कई देशों में कर्मचारियों की कमी है. इसलिए उन्हें विदेशी स्किल्स की जरूरत भी है. यही वजह है कि एक तरफ कुछ राजनीतिक दल प्रवास कम करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कंपनियां और उद्योग विदेशी कर्मचारियों को बुलाने की मांग करते हैं. यानी भारतीय प्रोफेशन्स के लिए अवसर पूरी तरह खत्म होने वाले नहीं हैं. लेकिन वीजा और इमिग्रेशन प्रक्रियाएं ज्यादा सख्त और जांच-पड़ताल वाली हो सकती हैं। 

क्या हालिया प्रदर्शनों में भारतीयों को निशाना बनाया गया?
हाल के महीनों में ब्रिटेन, आयरलैंड और दूसरे यूरोपीय देशों में हुए अधिकांश बड़े प्रदर्शनों का केंद्र बिंदु शरणार्थी नीति, अवैध प्रवास, आवास व्यवस्था और सरकार की इमिग्रेशन नीतियां रही हैं. ऐसे प्रदर्शनों में प्रवासियों के खिलाफ नाराजगी जरूर दिखाई देती है, लेकिन रिपोर्ट्स और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हालिया बड़े विरोध प्रदर्शनों का मुख्य निशाना भारतीय समुदाय था। 

यूरोप इस समय एक मुश्किल संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. उसे एक तरफ अपनी सीमाओं और शरणार्थी व्यवस्था को संभालना है, तो दूसरी तरफ उसे विदेशी छात्रों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और कुशल कर्मचारियों की भी जरूरत है. भारतीयों के लिए सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल सीधा विरोध नहीं, बल्कि बदलती नीतियां हैं. वीजा नियम, नौकरी के अवसर, परिवार को साथ ले जाने की शर्तें और स्थायी निवास के नियम आने वाले वर्षों में ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं। 

हायर सेकंडरी द्वितीय परीक्षा में बेटियों ने मारी बाजी

भोपाल

माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश की  हायर सेकंडरी द्वितीय परीक्षा वर्ष-2026 का नियमित एवं स्वाथ्यायी विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम शुक्रवार को शाम 4 बजे घोषित कर दिया गया। इसमें बेटियों ने बाजी मारी है। इस परीक्षा में 62.31 प्रतिशत नियमित छात्राएं उत्तीर्ण हुई हैं , जबकि 57.36 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। विद्यार्थी परीक्षा परिणाम मंडल की आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।

हायर सेकंडरी की द्वितीय परीक्षा में प्रदेश से 1 लाख 42 हजार 468 नियमित विद्यार्थियों ने फॉर्म भरा था। इसमें से 1 लाख 42 हजार 467 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। शुक्रवार 12 जून को घोषित हुए परीक्षा परिणाम में 84 हजार 871 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।

33 हजार 334 स्वाध्यायी विद्यार्थियों ने भरा था फॉर्म

हायर सेकंडरी की द्वितीय परीक्षा में 33 हजार 334 स्वाध्यायी विद्यार्थियों ने फॉर्म भरा था। परीक्षा में 33 हजार 315 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें 14 हजार 24 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। स्वाध्यायी विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम 42.10 प्रतिशत है। इसमें बेटियों के पास होने का प्रतिशत 44.7 है, जबकि छात्रों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 40.53 हैं।

 

खनिज संपदा से समृद्ध पंचायतों को मिले अधिक भागीदारी, पर्यावरण पुनरुद्धार को मिले प्राथमिकता : जयभान सिंह पवैया

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया ने खनिज विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में खनिज संपदा से प्रभावित क्षेत्रों के विकास, स्थानीय निकायों की भागीदारी तथा पर्यावरणीय पुनरुद्धार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज उत्खनन से प्रभावित पंचायतों को खनिज राजस्व से प्राप्त आय में अधिक प्रभावी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के अवसरों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदायों को विकास का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। बैठक में आयोग के सदस्य  के.के. सिंह तथा सदस्य सचिव  वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे।

आयोग के अध्यक्ष  पवैया ने खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला खनिज निधि के संसाधनों का उपयोग पर्यावरण पुनरुद्धार, हरित आवरण विस्तार, जल संरक्षण तथा पारिस्थितिकी सुधार संबंधी कार्यों को अधिकाधिक किया जाए, जिससे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके। खनिज विभाग के अधिकारियों ने आयोग को राज्य में खनिज राजस्व की वर्तमान स्थिति, राजस्व प्राप्ति के प्रमुख स्रोतों तथा वसूली की प्रगति से अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि खनिज क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और इससे प्राप्त राजस्व विकास कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) निधि के गठन, संचालन और वितरण व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोग को बताया गया कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, सामाजिक विकास तथा जनकल्याणकारी गतिविधियों के लिए जिला खनिज निधि का उपयोग किया जा रहा है। बैठक में खनिज राजस्व के न्यायसंगत उपयोग, प्रभावित समुदायों के हितों की सुरक्षा तथा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

खनिज विभाग ने भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित जिला खनिज प्रतिष्ठान नियमों एवं निधि प्रावधानों की जानकारी भी दी। अधिकारियों ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत स्थानीय निकायों की भूमिका और सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

 

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना अंतर्गत वैष्णो देवी जाएंगे श्रद्धालु

भोपाल

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना अंतर्गत नरेला विधानसभा क्षेत्र के श्रद्धालु 13 से 18 जून तक पवित्र वैष्णो देवी धाम की तीर्थ-यात्रा पर जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा संचालित तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने लाभार्थियों को यात्रा टिकट वितरित कर उनकी सुखद, सुरक्षित एवं मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मंत्री  सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देने वाली महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से उन्हें निःशुल्क तीर्थ-यात्रा का अवसर प्राप्त हो रहा है।

श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान कर रही सरकार

मंत्री  सारंग ने कहा कि अनेक श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी इच्छा होती है कि वे देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन करें, लेकिन आर्थिक अथवा अन्य कारणों से यह संभव नहीं हो पाता। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना ऐसे श्रद्धालुओं के सपनों को साकार करने का माध्यम बनी है। सरकार द्वारा यात्रा, भोजन, आवास, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

13 से 18 जून तक होगी यात्रा

मंत्री  सारंग के निर्देशानुसार श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। श्रद्धालु 13 जून को वैष्णो देवी धाम के लिए रवाना होंगे तथा 18 जून को वापस लौटेंगे। यात्रा के दौरान आवागमन, भोजन, ठहरने एवं सुरक्षा सहित संपूर्ण प्रबंध मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किया जाएगा ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण कर सकें।

श्रद्धालुओं ने जताया आभार

टिकट वितरण के दौरान लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण धार्मिक सपने को पूरा करने का अवसर प्रदान किया है। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह योजना वरिष्ठ नागरिकों एवं आमजन के लिए अत्यंत लाभकारी और प्रेरणादायी है।

जनकल्याण और आस्था के संगम का उदाहरण

मंत्री  सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक है। प्रदेश सरकार आगे भी जनहित और लोककल्याण की योजनाओं के माध्यम से नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

 

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर नरेला में महा-जनसंपर्क अभियान

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशव्यापी “विश्वास, विकास और जनकल्याण के 12 वर्ष” महा जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। नरेला विधानसभा क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग के नेतृत्व में व्यापक जनसंपर्क अभियान का आयोजन किया गया।

अभियान अंतर्गत मंत्री  सारंग ने नरेला विधानसभा के विभिन्न बूथों पर पहुंचकर नागरिकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और पिछले 12 वर्षों में देश में हुए परिवर्तन की जानकारी आमजन तक पहुंचाई।

घर-घर पहुंचकर योजनाओं की दी जानकारी

महा जनसंपर्क अभियान के दौरान मंत्री  सारंग ने कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों के साथ घर-घर जाकर नागरिकों से संपर्क किया तथा प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, जल जीवन मिशन, अमृत 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के हितलाभ की जानकारी दी।

जन-कल्याणकारी शिविरों में हितलाभ वितरण

मंत्री  सारंग के मार्गदर्शन में नरेला विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में जनकल्याणकारी शिविरों का भी आयोजन किया गया। शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। संबल योजना, स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई गईं तथा नागरिकों की समस्याओं का निराकरण भी किया गया।

विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने का अभियान

मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित किए हैं। देश की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह अभियान इन उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने तथा विकसित भारत के संकल्प को सशक्त बनाने का माध्यम है।

 

 

नरसिंहपुर पुलिस की बड़ी सफलत

भोपाल

धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नरसिंहपुर पुलिस ने जैन मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा कर पांच सदस्यीय शातिर चोर गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जैन मंदिरों से चोरी की गई लगभग 250 वर्ष पुरानी अष्टधातु की दो दुर्लभ प्रतिमाएं, चांदी के 17 छत्र, दो चांदी के आसन, एक चांदी का मुकुट, चार बैटरियां, तीन इनवर्टर, दो रेफ्रिजरेटर, चार एलईडी टीवी, दो डीवीआर, दो पंखे, घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिल तथा नगदी सहित चोरी गई संपत्ति जब्त की है। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन धरोहरों की सुरक्षित बरामदगी पुलिस की संवेदनशील, पेशेवर एवं प्रभावी कार्यशैली को दर्शाती है।

नरसिंहपुर में विगत दो से तीन माह के दौरान ग्राम रामनिवारी, तेन्दूखेड़ा तथा करकबेल स्थित जैन मंदिरों सहित अन्य स्थानों पर चोरी की घटनाएं सामने आई थीं। धार्मिक स्थलों से जुड़ी इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना द्वारा तीन विशेष टीमों का गठन किया गया था। टीमों को अज्ञात आरोपियों की शीघ्र पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयास, तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी तथा वैज्ञानिक विवेचना के परिणामस्वरूप इस संवेदनशील प्रकरण का सफल खुलासा संभव हो सका।

पुलिस द्वारा प्रारंभ से ही सभी पहलुओं पर सूक्ष्मता एवं गंभीरता के साथ जांच की गई। घटनास्थलों का बारीकी से निरीक्षण कर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए गए तथा तकनीकी जानकारी, मुखबिर तंत्र एवं अन्य उपलब्ध सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया गया।

विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं के पैटर्न का भी विस्तृत अध्ययन किया। घटनाओं के समय, स्थान, वारदात के तरीके एवं संदिग्ध गतिविधियों के तुलनात्मक विश्लेषण से महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए। इसी क्रम में निगरानी बदमाश टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया की संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर उसकी गहन पतारसी की गई। तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य तथ्यों के आधार पर पूछताछ किए जाने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया।

पुलिस ने प्रकरण में टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया के साथ ज्ञानी प्रजापति, आशीष शर्मा, नितिन शर्मा तथा चोरी का सामान खरीदने वाले चिन्टू उर्फ मुकेश सोनी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने करकबेल जैन मंदिर, रामनिवारी स्थित जैन मंदिर, तेन्दूखेड़ा स्थित जैन मंदिर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई कुल पांच चोरी की घटना कारित करना स्वीकार की है।

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहरों एवं जनसुरक्षा की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस प्रकार अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

 

हैदराबाद में MEAI Mining 4.0 राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, अमिताभ मुखर्जी ने स्मार्ट और सस्टेनेबल खनन पर दिया जोर

हैदराबाद. 
माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई ) ने आज हैदराबाद में “माइनिंग 4.0: सुरक्षित और सस्टेनेबल खनन कार्यों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुभारंभ की । इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने उद्योग जगत के प्रमुख, खनन पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएमडीसी के निदेशक, तकनीकी एवं एमईएआई हैदराबाद चैप्टर के अध्यक्ष विनय कुमार ने की, इस शुभ अवसर पर जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) ,एनएमडीसी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।

सम्मेलन के प्रथम दिन इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि किस प्रकार तकनीक खनन कार्यों को लगातार एक नया रूप दे रही है । विभिन्न सत्रों में खनन सुरक्षा, प्रचालन दक्षता तथा पर्यावरण प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जियोस्पेशियल सिस्टम तथा स्मार्ट मॉनिटरिंग तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमिताभ मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा: “खनन में सुरक्षा का एकमात्र स्वीकार्य आंकड़ा ‘शून्य’ (जीरो) है । सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी दोनों एक साथ चलने चाहिए तथा तकनीक इन्हें मजबूत करने में हमारी सहयोग कर रही है । आज डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन खनन कार्यों को बदल रहे हैं, जिससे वे अधिक सुरक्षित, कुशल एवं जिम्मेदार बन रहे हैं । जिस प्रकार से लौह अयस्क, स्टील तथा महत्वपूर्ण खनिजों व क्रिटिकल मिनरल्स की मांग बढ़ रही है, खनन उद्योग के सामने एक बड़ा अवसर प्राप्‍त हो रहा है । इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास जिम्मेदार खनन, निरंतर नवाचार (इन्नोवेशन) तथा सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन व वैल्यू क्रिएशन द्वारा संचालित हो । एमईएआई जैसे सम्मेलन हमें एक-दूसरे से सीखने, नए दृष्टिकोण हासिल करने तथा भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में सहयोग करते हैं ।”

इस सम्मेलन का मुख्य विषय यह भी था कि अनुसंधान और नवाचार को केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक खनन कार्यों में लागू किया जाए, ताकि जमीनी पर वास्तविक बदलाव लाया जा सके । उद्घाटन समारोह के समापन पर खनन क्षेत्र और इसके बदलते तकनीकी परिदृश्य में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेशेवरों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया । सम्मानित होने वाले दिग्गजों में निम्‍नांकित शामिल थे एस. कृष्णमूर्ति ,पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी तथा पूर्व महासचिव, एमईएआई, अक्षय दत्त त्रिपाठी, पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी डॉ. के. श्रीनिवास, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय, डॉ. के. वी. शंकर, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय इस सम्मेलन में अपनी भागीदारी के माध्यम से, एनएमडीसी ने सुरक्षित और अधिक सस्टेनेबल संचालन के लिए नई तकनीकों के उपयोग, नवाचार को बढ़ावा देने तथा जिम्मेदार खनन पद्धतियों को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया । 

एनएमडीसी में खानों के प्रबंधन और प्रचालन के उपायों को सुगम व बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेटेड ड्रिल, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी आधुनिक प्रणालियाँ लागू की जा रही हैं । यह सम्मेलन 13 जून तक भी जारी रहेगा, जिसमें तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों के साथ आपसी संवाद तथा खनन के भविष्य को आकार देने वाले उभरते रुझानों व प्रवृत्ति पर चर्चा की जाएगी ।

एलन मस्क की दौलत ने देशों को छोड़ा पीछे! ताइवान, आयरलैंड और इजरायल से भी अमीर, क्या बनेंगे पहले खरबपति?

वाशिंगटन

एलन मस्क खरबपति बनने से केवल 29 अरब डॉलर दूर हैं। उनकी संपत्ति में गुरुवार को आया 274 अरब डॉलर का उछाल उनके SpaceX के आईपीओ से आया है।एलन मस्क अब ताईवान (976.72 अरब डॉलर) आयरलैंड (779.38 अरब डॉलर), बेल्जियम (776.73 अरब डॉलर), स्वीडन (760.48 अरब डॉलर), इजरायल (719.85 अरब डॉलर), अर्जेंटीना (688.38 अरब डॉलर) जैसे देशों से भी अमीर हो गए हैं। उनका कुल नेटवर्थ इन देशों की जीडीपी से भी अधिक है।

कैसे बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक एलन मस्क की कुल दौलत 971 अरब डॉलर हो गई है। जबकि, फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक अब वह 982 अरब डॉलर के मालिक हैं। रॉयटर्स के अनुमान के अनुसार शेयर मार्केट में स्पेसएक्स की लिस्टिंग के बाद मस्क की दौलत एक ट्रिलियन डॉलर के पार चली जाएगी और वह दुनिया के पहले खरबपति बन जाएंगे।

SpaceX का सबसे बड़ा IPO
SpaceX ने अपने IPO में 75 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी के शेयर 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर जारी किए गए हैं, जिससे कंपनी का बाजार मूल्य करीब 1.77 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 152 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है।

SpaceX क्यों है इतना खास?
2002 में शुरू हुई SpaceX आज रॉकेट लॉन्च, स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। निवेशक इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक और स्पेस कंपनियों में गिन रहे हैं। IPO को संस्थागत और रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

भारत के सबसे अमीर लोगों से कितने आगे?
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अडानी की संपत्ति लगभग 115 अरब डॉलर और मुकेश अंबानी की संपत्ति उससे भी कम है। ऐसे में मस्क की संभावित 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ भारत के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति से कई गुना अधिक होगी।

निवेशकों की नजर लिस्टिंग पर
अब पूरी दुनिया की नजर SpaceX की लिस्टिंग पर है। अगर शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी आती है तो एलन मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन सकते हैं। इस साल 2026 में मस्क की संपत्ति में 351 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है यानी कुल 56.7% की बढ़ोतरी। इसमें गुरुवार को 274 अरब डॉलर की उछाल शामिल है, जो भारत के कई राज्यों के वार्षिक बजट से कई गुना अधिक है। यह राशि भारत की कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप के बराबर है।

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