रिटेल महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी; आम आदमी पर बढ़ा बोझ

नई दिल्ली

देश में खाने-पीने की चीजों के दाम मई महीने में बढ़े हैं. रिटेल महंगाई दर मई के महीने में बढ़कर 3.93 प्रतिशत पहुंच गई है. अप्रैल महीने में महंगाई दर 3.48 प्रतिशत थी. हालांकि, महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान 4 प्रतिशत से नीचे रही है। 

महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है. लगातार 16वें महीने महंगाई दर आरबीआई के लक्ष्य के नीचे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और ईरान युद्ध के कारण महंगाई दर बढ़ी है. जून के मॉनिटरी पॉलिसी में आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए महंगाई दर को सुधार करते हुए पहले के 4.6 प्रतिशत की तुलना में बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया था। 

ईरान, अमेरिका और इजरायल युद्ध के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रेशर बढ़ा है. करेंसी मार्केट पर भी इसका असर पड़ा है. हालांकि, इन सब झटकों के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है और देश की जीडीपी 7.8 प्रतिशत है. खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमत महंगाई दर को बढ़ा रही है. इसकी कारण CPI में तेजी आई है। 

अप्रैल के मुकाबले मई में दर्ज हुई बड़ी बढ़त
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मई महीने की खुदरा महंगाई दर ने अप्रैल के 3.48% के स्तर से एक लंबी छलांग लगाई है और यह सीधे 3.93% पर जा पहुंची है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) की गणना श्रृंखला में हाल ही में किए गए ढांचागत बदलावों के बाद से अब तक की यह सबसे बड़ी और उच्चतम रीडिंग दर्ज की गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर चुनिंदा खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई मौसमी तेजी को माना जा रहा है, जिसने खुदरा बाजार के रुख को बदल दिया है।

आरबीआई के निर्धारित बजटीय लक्ष्य के भीतर आंकड़े
महंगाई के इस बढ़ते ग्राफ के बीच आम आदमी और नीति निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी तसल्ली यह है कि यह आंकड़ा अब भी केंद्रीय बैंक के नियंत्रण दायरे में है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए खुदरा महंगाई दर को 4% के मानक स्तर से नीचे रखने का वैधानिक लक्ष्य सौंपा हुआ है, जिसमें परिस्थितियों के अनुसार 2% का ऊपरी और निचला मार्जिन (टोलरेंस बैंड) शामिल किया गया है। वर्तमान में 3.93% की दर पर होने के कारण यह केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) की समीक्षा करते समय बहुत अधिक आक्रामक रुख अपनाने के दबाव को कम करती है।

पश्चिम एशिया के संकट का घरेलू बाजार पर सीधा असर
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी सैन्य और राजनीतिक गतिरोध के चलते वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर माल ढुलाई की लागत में भारी इजाफा हुआ है। इस वैश्विक संकट के कारण भारत आयातित खाद्य तेलों, ईंधनों और अन्य आवश्यक कच्चे माल के लिए अधिक भुगतान कर रहा है, जिसका संचयी प्रभाव देश के भीतर खुदरा वस्तुओं के अंतिम मूल्य संवर्धन पर दिखाई दे रहा है। यदि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर यह तनाव और गहराता है, तो आगामी तिमाहियों में घरेलू बाजार के भीतर खुदरा महंगाई दर के इस 4% के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

 

‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारत में पहले होगी रिलीज, 17 जून से शुरू होगी एडवांस बुकिंग

स्पाइडर मैन को पसंद करने वाले फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीटर पार्कर की अगली फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारत में अपनी तय तारीख से पहले रिलीज होने जा रही है। जानें यह फिल्म कब रिलीज होगी और कब शुरू होगी इसकी एडवांस बुकिंग?

रिलीज की तारीख और एडवांस बुकिंग
फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ अब भारत में 30 जुलाई, 2026 को रिलीज होगी, जबकि दुनिया भर में यह फिल्म 31 जुलाई को रिलीज हो रही है। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग के लिए टिकटों की बुकिंग 17 जून से शुरू हो जाएगी। यह फिल्म भारत में 6 भाषाओं में रिलीज होगी- अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम।

क्या है फिल्म की कहानी?
यह फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: नो वे होम’ की कहानी के आगे से शुरू होगी। पिछली फिल्म के आखिर में पूरी दुनिया पीटर पार्कर को भूल गई थी। इस बार पीटर बिल्कुल अकेला है और बिना किसी पुराने सहारे के खुद अपनी जिंदगी की मुश्किलें संभाल रहा है। वह भावनात्मक रूप से परेशान है, फिर भी न्यूयॉर्क की रक्षा कर रहा है।

फिल्म की स्टार कास्ट
‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ में टॉम हॉलैंड (स्पाइडर-मैन), जेंडाया (एमजे) और जैकब बैटलन (नेड लीड्स) के किरदार में फिर साथ दिखेंगे। टॉम हॉलैंड लगभग 5 साल बाद अपनी सोलो स्पाइडर-मैन फिल्म में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में जॉन बर्न्थेल और ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ फेम की सैडी सिंक भी नजर आएंगी। इस फिल्म के निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन हैं, जिन्होंने ‘शांग-ची’ जैसी फिल्म बनाई है।

एक नया रिकॉर्ड
सोनी पिक्चर्स के मुताबिक, इस फिल्म के ट्रेलर को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिलाकर 1 अरब यानी 100 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाला यह दुनिया का पहला फिल्म ट्रेलर है।

बिहान योजना से बदली दूरपती की जिंदगी, सिलाई व्यवसाय से बनीं ‘लखपति दीदी’, 1.20 लाख की आय

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार 2026 ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानियां गढ़ रहा है। इसी कड़ी में सक्ती जिले के ग्राम कुसुमझर की निवासी दूरपती सिदार को जनसमस्या निवारण शिविर में ‘लखपति दीदी’ के रूप में सम्मानित किया गया।

ग्राम पंचायत खुरघटी में आयोजित समाधान शिविर में दूरपती को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। आर्थिक तंगी से जूझ रहीं दूरपती ने स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्राप्त आरएफ और सीआईएफ राशि से सिलाई मशीन खरीदी और अपना व्यवसाय शुरू किया।

बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर व्यवसाय का विस्तार किया। आज वह सिलाई कार्य के जरिए प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस सफलता ने उन्हें गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। दूरपती सिदार का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें रोजगार के साथ आत्मविश्वास और सम्मान भी दिया है। अब वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

राजा रघुवंशी मर्डर केस में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोला- सोनम बाहर है, सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा

इंदौर 

राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में राजा के भाई विपिन रघुवंशी एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब एक लड़की से जुड़े मामले में सीबीआई जांच हो सकती है, तो लड़के के मामले में क्यों नहीं। उनका तर्क है कि यह मामला भी बेहद चर्चित है और इसमें दूसरे राज्य का भी एंगल जुड़ा हुआ है। ऐसे में राजा रघुवंशी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।

बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून पर शिलांग गए थे। आरोप है कि वहां सोनम ने अन्य लोगों के साथ मिलकर राजा की हत्या कर दी और शव को खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने सोनम सहित सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल सोनम जमानत पर बाहर है।

ऐसे में राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए।

लड़के के मामले में सीबीआई जांच क्यों नहीं?
विपिन का कहना है कि इस मामले में जल्द से जल्द सीबीआई जांच होनी चाहिए। क्योंकि सोनम जमानत पर बाहर है और वह सबूतों को नष्ट कर सकती है। हमारी राज्य सरकार से यही मांग है कि इस मामले की भी सीबीआई जांच कराई जाए। सीबीआई जांच होने पर हमारे भाई राजा को जल्द न्याय मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि फिलहाल सोनम जमानत पर बाहर है, लेकिन यदि मामले की गहन जांच होती है तो सच्चाई सामने आएगी। विपिन ने कहा कि भोपाल में एक युवती की मौत के मामले में सीबीआई जांच कराई जा रही है, जबकि राजा की हत्या के मामले में अब तक सीबीआई जांच नहीं हुई है। जबकि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा है और इसमें दूसरे राज्य का भी एंगल जुड़ा हुआ है।

विपिन का कहना है कि सरकार को इस मामले में भी सहयोग करना चाहिए था। इतना बड़ा मामला होने के बावजूद यदि सोनम को जमानत मिल गई है, तो यह उनके परिवार के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि राजा को अभी तक न्याय नहीं मिला है और परिवार अब भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है।

माता मंदिर में रात्रि विश्राम के दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने लगाई जन चौपाल

माता मंदिर में रात्रि विश्राम के दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने लगाई जन चौपाल

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौध-रोपण

झाड़ू लगाकर दिया स्वच्छता का संदेश

ग्वालियर

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर देश भर में चल रहे महाअभियान के तहत उप नगर ग्वालियर के वार्ड नंबर 5 आनंद नगर स्थित बड़ा पार्क माता मंदिर परिसर में  रात्रि विश्राम के दौरान जन चौपाल के जरिए स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद किया। इस अवसर पर नागरिकों ने जनसुविधा से जुड़े कई मुद्दे उठाए, जिन पर ऊर्जा मंत्री तोमर ने सकारात्मक पहल और समाधान का आश्वासन दिया।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने संकल्प लिया कि क्षेत्र के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की समस्याओं का समाधान किया जाएगा और हर गली-मोहल्ले तक विकास पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और उनकी बात सुनना जनसेवक का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी हर जायज मांग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

रात्रि विश्राम के उपरांत शुक्रवार सुबह ऊर्जा मंत्री तोमर ने बड़ा पार्क में संचालित जिम में स्थानीय निवासियों के साथ संवाद करते हुए उनका हालचाल पूछा। तदोपरान्त पार्क और मंदिर परिसर में झाड़ू लगाकर स्वच्छता अभियान में शिरकत की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने संगठन के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान में शामिल होकर पौध-रोपण भी किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरूआत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को पर्यावरण से जोड़ना और व्यक्तिगत स्तर पर पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और अपनी माँ के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी पौधरोपण अभियान है। इस दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने बड़ा पार्क आनंद नगर में क्रिकेट खेला।

 

Good News: भारत की रफ्तार बरकरार! वर्ल्ड बैंक ने बताया दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था

 नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान युद्ध से गहराया मिडिल ईस्ट संकट हो या फिर कोई और ग्लोबल टेंशन, तमाम चुनौतियों के बाद भी भारत रुकने वाला नहीं है. विश्व बैंक ने भी इंडियन इकोनॉमी का लोहा माना है और अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन सबके बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यस्थाओं में बना रहेगा. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर (India Growth Rate) 6.6% होने की उम्मीद जताई गई है। 

इस रफ्तार से भागेगी इकोनॉमी
World Bank ने गुरुवार को जारी अपनी वैश्विक आर्थिक संभावनाओं पर रिपोर्ट में ये बड़ी बात कही है. विश्व बैंक ने कहा कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6 फीसदी की दर से ग्रोथ करते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. बीते साल इसकी रफ्तार 7.7 फीसदी रही थी, हालांकि ताजा अनुमान इससे काफी कम है। 

ग्रोथ में बीते साल के मुकाबले कमी आने के पीछे विश्व बैंक ने कारण बताते हुए कहा है कि मिडिल ईस्ट युद्ध से ऊर्जा की कीमतों आए उछाल और अन्य इनपुट लागतों के कारण निजी डिमांड में वृद्धि धीमी पड़ सकती है और इसका असर ग्रोथ रेट पर देखने को मिल सकता है। 

गिरावट के बाद उछाल की उम्मीद
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवा कर यानी GST रेट कट से उपभोक्ता मांग को कुछ हद तक समर्थन मिलना चाहिए. इसके साथ ही भारतीय अर्थव्वस्था की रफ्तार को लेकर वर्ल्ड बैंक ने आगे कहा कि 2026-27 में ग्रोथ में गिरावट के बाद अगले वित्त वर्ष 2027-28 में इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी होने की उम्मीद है. मतलब भारत रुकने वाला नहीं है. घरेलू डिमांड में मजबूती और निर्यात वृद्धि में तेजी के चलते अगले दो वित्तीय वर्षों में विकास दर में फिर से उछाल आने की उम्मीद है। 

युद्ध भी नहीं रोक पाया डिमांड
विश्व बैंक के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष से बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद, इस वर्ष 2026 की शुरुआत में भारत में आर्थिक गतिविधि मजबूत बनी रही, जिसे लचीली घरेलू मांग का सपोर्ट मिला था. इसमें कहा गया है कि प्राइवेट कंजंप्शन, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत रहा है, जबकि शहरी डिमांड में भी तेज सुधार देखने को मिल रहा है। 

घरेलू बिक्री से टैक्स कलेक्शन भी लगातार बढ़ा है. इसके बीच ऊर्जा की बढ़ती लागत के साथ-साथ कृषि उत्पादों, उर्वरकों की कमी से पैदा हुए दबाव को कम करने के लिए, भारत में फ्यूल टैक्ट कट समेत कई बड़े कदम भी उठाए हैं. इसके साथ ही विश्व बैंक ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती, तमाम देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) से मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण कमजोर बाहरी डिमांड को कम करने में मदद मिली है। 

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत
मीडिया से बातचीत में वर्ल्ड बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट आयहान कोसे ने कहा कि इस दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

भारत के आर्थिक प्रदर्शन और मध्य पूर्व संकट के असर के बारे में आईएएनएस के सवाल का जवाब देते हुए, कोसे ने कहा कि बेहतर अनुमान घरेलू मांग में “उम्मीद से अधिक मजबूत गति” को दिखाता है, जो अब तक मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बुरे असर की भरपाई से कहीं ज्यादा है।

क्षेत्रीय विकास दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत होने की उम्मीद 
वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बना रहेगा। हालांकि, एनर्जी की ज्यादा कीमतों और संघर्ष के व्यापक असर के कारण 2025 में क्षेत्रीय विकास दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

कोस ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारत के आर्थिक आधार मजबूत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, “भारत ने जरूरी नीतिगत उपाय लागू किए हैं। जब हम भारत की बड़ी तस्वीर को देखते हैं, तो उसमें अभी भी जबरदस्त गति दिखाई देती है।”

वर्ल्ड बैंक ने दी चेतावनी
वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण 2026 में वैश्विक विकास दर 2025 के 2.9 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे धीमी गति होगी। तेल की ज्यादा कीमतें बढ़ती महंगाई और कड़े वित्तीय हालात का असर दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की उम्मीद है।

इसके बावजूद, भारत उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक था जिनकी रेटिंग में सुधार हुआ। कोस ने कहा कि बेहतर आउटलुक की वजह घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में आई तेजी थी।

उन्होंने कहा, “घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में तेजी की वजह से उम्मीद से अधिक ग्रोथ हुई,” और इसी वजह से अनुमान को बढ़ाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लगातार विस्तार की वजह से दक्षिण एशिया दुनिया भर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बना रहेगा। इस साल सुस्ती के बाद, 2027 में क्षेत्रीय ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। 2028 में भारत की ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

भारत-China को छोड़ बाकी का बुरा हाल
विश्व बैंक का कहना है कि चीन और भारत को छोड़कर, विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति आय की धीमी रह सकती है. साउथ एशिया में विकास दर 2026 में घटकर 6.3 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट युद्ध के निगेटिव प्रभाव को दर्शाती है. इसमें एनर्जी कॉस्ट में तेजी, तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में कमी और पर्यटन  सेक्टर में व्यवधान शामिल हैं। 

‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ रिव्यू: मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग, लेकिन कहानी में रह गई कमी

1991 का आर्थिक संकट भारत के इतिहास के सबसे मुश्किल दौर में से एक था. इसी अहम अध्याय को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश करती है मनोज बाजपेयी स्टारर ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’. डायरेक्टर चिन्मय डी. मांडलेकर की ये फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी दिखाती है, जिसने देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई. दमदार विषय और अच्छे कलाकारों के बावजूद क्या फिल्म दर्शकों को बांधकर रख पाती है? आइए जानते हैं हमारे इस रिव्यू में.

फिल्म में ए. रामनन (मनोज बाजपेयी) को अचानक राष्ट्रीय बैंक का गवर्नर बनाया जाता है. वो भी तब जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. दिवालिया घोषित होने की कगार पर है. उनकी नियुक्ति पर सवाल उठते हैं क्योंकि उन्हें अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) का विशेषज्ञ नहीं माना जाता. लेकिन हालात ऐसे हैं कि देश को बचाने के लिए उन्हें बड़े और साहसी फैसले लेने पड़ते हैं. IMF से बातचीत, विदेशी कर्ज और देश के गोल्ड रिजर्व को गिरवी रखने जैसे फैसलों के जरिए कहानी आगे बढ़ती है.

डायरेक्शन: इरादा बड़ा, असर थोड़ा कम
डायरेक्टर चिन्मय डी. मांडलेकर ने एक बेहद महत्वपूर्ण विषय चुना है. इंस्पेक्टर जेंडे के बाद ये मनोज बाजपेयी और चिन्मय डी. मांडलेकर की साथ में दूसरी फिल्म है और दोनों की जोड़ी फिर से एक गंभीर विषय लेकर आई है. हालांकि, जहां कहानी में स्वाभाविक रूप से तनाव, राजनीतिक दबाव और सस्पेंस की भरपूर गुंजाइश थी, वहां फिल्म कई बार जरूरत से ज्यादा आसान और इंस्पायर करने वाली बन जाती है.

देश आर्थिक संकट में है, लेकिन स्क्रीन पर वो बेचैनी और घबराहट पूरी ताकत से महसूस नहीं होती. फिल्म कई बार ऐसे आगे बढ़ती है जैसे कोई मुश्किल पहेली धीरे-धीरे सुलझ रही हो, जबकि असल में हालात कहीं ज्यादा गंभीर थे.

स्क्रीनप्ले: दिलचस्प विषय, लेकिन कमजोर पकड़
फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका सब्जेक्ट है. आर्थिक संकट जैसी जटिल घटना को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की गई है, जिससे आम दर्शक भी कहानी से जुड़ सके. लेकिन स्क्रीनप्ले कई जगहों पर सतही महसूस होता है. कई अहम राजनीतिक और प्रशासनिक टकरावों को सिर्फ छूकर छोड़ दिया गया है. संकट से जूझ रही पूरी टीम की बजाय कहानी लगभग पूरी तरह गवर्नर और उनके डिप्टी के इर्द-गिर्द घूमती रहती है. यही वजह है कि फिल्म का दायरा बड़ा होने के बावजूद उसका प्रभाव सीमित रह जाता है.

एक्टिंग: मनोज बाजपेयी फिर भी संभाल लेते हैं मोर्चा
मनोज बाजपेयी अपने किरदार में पूरी ईमानदारी के साथ नजर आते हैं. दक्षिण भारतीय लहजे और बॉडी लैंग्वेज को पकड़ने की उनकी कोशिश दिखती है, हालांकि ये हर जगह एक जैसी नहीं लगती. फिर भी जब भी फिल्म कमजोर पड़ती है, बाजपेयी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से उसे संभालने की कोशिश करते हैं.

डिप्टी गवर्नर के किरदार में नौशाद मोहम्मद कुंजू काफी प्रभाव छोड़ते हैं. उनके और बाजपेयी के बीच के दृश्य फिल्म के मजबूत हिस्सों में गिने जा सकते हैं. मधु शाह को ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं मिला है, लेकिन वो अपने सीमित किरदार में सहज हैं. वहीं पत्रकार के रोल में अदा शर्मा का किरदार कहानी में बहुत खास योगदान नहीं दे पाता और कई बार गैरजरूरी सा महसूस होता है.

फिल्म के यादगार पल
फिल्म में कुछ छोटे लेकिन प्रभावशाली सीन हैं जो लंबे समय तक याद रहते हैं. ट्रैफिक सिग्नल पर एक बच्ची से पेन खरीदने वाला सीन हो या फिर ऑफिस के चपरासी की कर्ज मांगने की आदत से जन्म लेने वाला एक बड़ा आइडिया, ये पल कहानी में ‘ह्यूमन टच’ जोड़ते हैं और फिल्म को भावनात्मक गहराई देते हैं.

फाइनल वर्डिक्ट: देखने लायक लेकिन अधूरी उड़ान
‘गवर्नर’ एक महत्वपूर्ण और कम चर्चा वाले ऐतिहासिक अध्याय को सामने लाती है. फिल्म का प्लॉट दमदार है, कलाकारों की मेहनत भी नजर आती है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और कम महसूस होने वाला तनाव इसे एक बेहतरीन फिल्म बनने से रोक देता है.

अगर आपको भारत के आर्थिक इतिहास, राजनीतिक ड्रामा और मनोज बाजपेयी की परफॉर्मेंस पसंद है तो ये फिल्म देखी जा सकती है. लेकिन जिस रोमांच, गहराई और प्रभाव की उम्मीद इसके विषय से की जाती है, वहां ‘गवर्नर’ थोड़ी पीछे रह जाती है.

अमेरिका-ईरान तनाव थमता दिखा तो शेयर बाजार में जश्न, सेंसेक्स 1700 अंक उछला; निवेशकों ने कमाए 10 लाख करोड़

मुंबई 

सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली. यह तेजी तब आई, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने की खबर आई है. इस खबर के आने के बाद सेंसेक्‍स 1695 अंक या 2.30% चढ़कर 75,527.95 पर पहुंच गया. इसी तरह, निफ्टी 461.30 अंक या 1.99% चढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ। 

बैंक निफ्टी में और भी बड़ी रैली देखने को मिली, जो 1638 अंक या 2.97 फीसदी चढ़कर 56,800 के ऊपर बंद हुआ. पूरे मार्केट में तेजी के कारण सभी इंडेक्‍स ग्रीन जोन में रहे और निवेशकों ने मोटी रकम बना ली. बीएसई के टॉप 30 शेयरों की बात करें तो पावरग्रिड और टेक महिंद्रा को छोड़कर सभी शेयर शानदार तेजी पर बंद हुए. सबसे ज्‍यादा तेजी बजाज फाइनेंस में 5.62 फीसदी की रही. इसके बाद L&T, Indigo, Titan और एटर्नल जैसे शेयरों में 5 फीसदी तक की उछाल रही। 

आज 10 लाख करोड़ की कमाई 
मिड और स्‍मॉल कैप इंडेक्‍स में भी धुंआधार तेजी देखने को मिली, जिस कारण रिटेल से लेकर बड़े निवेशकों तक ने मोटी कमाई की. इस तेजी के कारण बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 452.66 लाख करोड़ रुपये से करीब 10 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 462 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया। 

शेयर बाजार में क्यों आई इतनी तेजी? 
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने बताया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में प्रतिबंधों को हटाना, होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करना और ईरान के चारों ओर तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी शामिल है. वहीं अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जंग समाप्‍त करने का समझौता करीब पूरा हो चुका है और इस सप्‍ताह भर में साइन किए जाएंगे. यह ऐलान ईरान के तेल इंडस्‍ट्री पर कंट्रोल करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों के बाद आई। 

इस खबर के आने के बाद अमेरिकी बाजारों में जबरदस्‍त तेजी देखने को मिली. अमेरिकी बाजार शानदार तेजी पर बंद हुए और आज इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है, जो शानदार तेजी के साथ कारोबार कर रहा है. इसके अलावा, कुछ और वजहों से भी मार्केट में तेजी रही। 

कच्‍चे तेल के दाम में गिरावट 
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 5 फीसदी गिरकर  86.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो दो महीने के निचले स्‍तर के करीब है. इस तेज गिरावट के कारण क्रूड ऑयल पर निर्भर शेयरों में तेजी देखने को मिली. वहीं एशियाई बाजारों में भी रैली रही. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्‍स 8 प्रतिशत से अधिक और जापान का निक्केई 225 इडेक्‍स 3 प्रतिशत से अधिक बढ़ा. चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्‍स भी पॉजिटिव रहा। 

रुपये में मजबूती
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 65 पैसे की मजबूती आई और यह 95.20 पर पहुंच गया. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, डॉलर के कमजोर होने और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान ने भी रुपये को मजबूती दी। 

‘बच्चों के हाथों में किताबें हों, मजदूरी नहीं’, बाल श्रम निषेध दिवस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का संदेश

रायपुर.

अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है, जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के अवसरों को छीन लेता है।

मंत्री राजवाड़े ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके हाथों में किताबें, खेल और रचनात्मक अवसर होने चाहिए, न कि श्रम का बोझ। किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना उसके सपनों और संभावनाओं को सीमित करने के समान है। बाल श्रम केवल सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

राजवाड़े ने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि किसी बच्चे से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा हो, उसे शिक्षा से वंचित रखा जा रहा हो अथवा उसके साथ किसी प्रकार का शोषण या दुर्व्यवहार हो रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और जागरूक समाज ही बच्चों को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य दे सकता है। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम में नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों के साथ विकसित हो, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका

फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका

रायपुर, 
फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

          राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।

          राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

          राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।

          कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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