मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, राज्यसभा नामांकन रद्द करने वाली याचिका खारिज

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने मीनाक्षी की राज्यसभा उम्मीदवारी खारिज होने पर दखल देने से कर दिया इनकार. सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस नेता की याचिका खरिज करते हुए कहा कि हम इसमें दखल नहीं दे सकते हैं. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस चंदूकर की पीठ ने ये फैसला सुनाया। 

सिंघवी ने दी थी दलीलें 
इससे पहले मीनाक्षी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसा हुआ है जो शॉकिंग है. उन्होंने कहा कि एक निजी शिकायत पर नोटिस हुआ है. सिंघवी ने कहा कि ये एक निजी शिकायत है, जिसमें संज्ञान नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि आरपी एक्ट कहता  है कि कम से कम आरोप तय होने चाहिए। 

मीनाक्षी को हाईकोर्ट जाने का दिया सुझाव 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका के जरिए मीनाक्षी नटराजन हाईकोर्ट जा सकती हैं. सिंघवी ने दावा किया कि ये केस 2022 का है जब मीनाक्षी तेलंगाना की इंचार्ज नहीं थी. मामले का संज्ञान भी नहीं लिया गया था. यह मामला तेलंगाना की एक अदालत में 2022 के पार्टी के अंदरूनी मसले से जुड़ी एक निजी शिकायत से संबंधित है. अदालत ने किसी अपराध का वास्तविक संज्ञान लेने से पहले नटराजन को केवल एक प्रारंभिक सिविल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था. सिंघवी ने कहा कि अगर रिटर्निंग ऑफीसर मनमाने ढंग से काम करता किसी एक पार्टी को जिससे फायदा होता है तो उसमें कोर्ट दखल दे सकता है. सिंघवी ने सवाल उठाए कि नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन नतीजे क्यों घोषित किए गए? हालांकि, शीर्ष अदालत उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ और उनके मुवक्किल मीनाक्षी की याचिका खारिज कर दी। 

बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को ये बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच (स्क्रूटनी) के दौरान खारिज कर दिया गया था. इसके साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला समाप्त हो गया और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया. बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार पर नामांकन एफिडेविट में आपराधिक मामला छिपाने का आरोप लगाया था। 

जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने हलफनामे में एक अदालती शिकायत का जिक्र नहीं किया था. इस वजह से उनका नामांकन पत्र अधूरा माना गया और उसे रद्द कर दिया गया. विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने इस बारे में चुनाव अधिकारी के सामने एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने तेलंगाना में अपने खिलाफ दर्ज एक अदालती मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है। 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता. अदालत ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो। 

अदालत ने सिंघवी से पूछा सवाल 
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यतः इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है. क्या इस अदालत का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो? नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो. उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे। 

सिंघवी की दलील- गलत तरीके से खारिज हुई उम्मीदवारी 
सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया. राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक कोर्ट में शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया। 

क्या था मामला 
मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है. इसी के आधार पर चुनाव अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। 

BRICS Agriculture Summit: इंदौर में जुटे 20 देशों के कृषि मंत्री, शिवराज बोले- छोटे किसानों को सशक्त बनाना समय की मांग

 इंदौर

इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय BRICS कृषि सम्मेलन का शुक्रवार को चौथा दिन है। आज केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक कृषि सहयोग, खाद्य सुरक्षा और छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि भारत “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ दुनिया को एक परिवार मानता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शांति, समन्वय और साझेदारी आधारित विकास के लिए काम कर रहा है।

उधर, दोपहर 3 बजे विदेशी डेलीगेट्स को मांडू किले का भ्रमण कराया जाएगा और रात भव्य गाला डिनर का आयोजन होगा।

छोटे किसानों को मजबूत बनाना जरूरी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा करते हैं। ऐसे में BRICS देशों को मिलकर इनके समाधान तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होंगे तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।

कृषि उत्पादन में भारत की बड़ी उपलब्धियां
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश का खाद्यान्न उत्पादन करीब 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं मछली उत्पादन भी 19 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है।

87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत
शिवराज ने कहा कि देश के करीब 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और सहायता मिल रही है।

प्राकृतिक खेती और मिट्टी बचाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने “खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और नई तकनीकें पहुंचाई जा रही हैं।

महिला और युवा बदल रहे कृषि की तस्वीर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। वहीं “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव का उदाहरण हैं। उन्होंने युवाओं से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप, नवाचार और डिजिटल तकनीकों के जरिए आगे आने का आह्वान किया।

BRICS देशों से सहयोग की अपील
उन्होंने BRICS देशों से छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उनका कहना था कि अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग से वैश्विक कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है।

सम्मेलन में कृषि, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती, कृषि नवाचार, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक कृषि सहयोग जैसे अहम विषयों पर मंथन किया जा रहा है। आयोजन को भारत और मध्यप्रदेश के लिए कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

13 जून को होगी कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक
13 जून को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग मजबूत करने, खाद्य हानि कम करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श होगा। बैठक के अंत में साझा सहमति और सुझावों पर आधारित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तैयार किया जाएगा।

चार प्रमुख विषयों पर रहेगा फोकस

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार विषयों पर चर्चा केंद्रित रहेगी।
    खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका।
    कृषि व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
    जलवायु अनुकूल और टिकाऊ कृषि।
    कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी।

‘ब्रिक्स वाटिका’ बनेगी
सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए विशेष ‘ब्रिक्स वाटिका’ विकसित की जाएगी। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सामूहिक पौधारोपण करेंगे। यह पहल प्रकृति संरक्षण और सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।

मध्यप्रदेश को मिलेगा वैश्विक मंच
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मेलन केवल अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश को वैश्विक कृषि, निवेश और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने का बड़ा अवसर भी है। इससे प्रदेश की कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात संभावनाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

‘वेलकम टू द जंगल’ ट्रेलर पर बंटे दर्शक, कॉमेडी और स्टारकास्ट पर उठे सवाल

अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर डिस्कशन का हॉट टॉपिक बन गया है. हालांकि चर्चा सिर्फ फिल्म की नहीं, बल्कि ट्रेलर में दिखाए गए कई ऐसे सीन्स और कॉमेडी की भी हो रही है, जिन पर लोग सवाल उठा रहे हैं.

कहानी में है कहानी!
4 मिनट 10 सेकंड के ड्यूरेशन में लगभग पूरी फिल्म की कहानी बता देने वाली इस फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत ही एक ऐसे क्लिप से होती है, जिसमें फिल्म को ‘2 हजार करोड़ कमाने वाली पहली फेक फिल्म’ जिक्र किया जाता है. ये भारतीय सिनेमा का शायद पहला ऐसा ट्रेलर होगा जिसे देखते हुए बीच में लगेगा कि कब खत्म होगा. कोई सीन किसी से कनेक्ट होता नहीं दिखता है. क्योंकि फिल्म के अंदर ही फिल्म चल रही है और इसकी कहानी भी यही है.

ट्रेलर में सबसे ज्यादा एक्टर्स एक दूसरे पर किसी कॉमेडी स्किट की तरह पर्सनल कमेंट्स तक पास तक करते दिखे हैं. सुनील शेट्टी जहां अक्षय की फ्लॉप फिल्मों का मजाक उड़ाते हैं, तो वहीं जैकलीन फर्नांडिस को तो सीधे मुंह एक्ट्रेस की जगह ग्लैमर फेस कह दिया गया है. इसके अलावा दिशा को भी सिर्फ फिल्म की दिशा भटकाते हुए देखा गया. हालांकि अक्षय की नकल करते हुए सुनील खुद ही हेलिकॉप्टर से लटकते…खुद को भला-बुरा कहते दिखे. तो वहीं दलेर मेहंदी को ट्रेलर मे चमकाने के लिए इतना बड़ा डायलॉग दे दिया कि पकड़ में ही नहीं आ पाया.

अक्षय का भोजपुरी भौकाल!
इसी के साथ फिल्म में एक भोजपुरी गाना ‘घिस घिस घिस’ भी जोड़ा गया है, जिसमें अक्षय कुमार अक्षरा के साथ नॉटी होते दिखे हैं. गाने में खिलाड़ी बिल्कुल ही नए अंदाज में दिखे हैं,  जिसे पचा पाना ही फैंस के लिए मुश्किल हो गया था. हालांकि ये गाना जबरदस्त हिट हो चुका है. तो क्या भोजपुरी दर्शक और अक्षरा के फैंस को थियेटर्स तक खींचने का मेकर्स का प्लान भी काम करेगा- ये भी सवाल फिल्म रिलीज के साथ ही तय होगा.   

दर्शकों का एक वर्ग इसे कहानी का हिस्सा कम और सिर्फ शोर मचाने वाला हुक ज्यादा मान रहा है. कई लोगों का कहना है कि फिल्म की असली कहानी क्या है, ट्रेलर उसे साफ करने में नाकाम रहा. थोड़ा और दिखा देते तो फिल्म का क्लाइमैक्स भी पता चल ही जाता.  

इतने स्टार्स कि पोस्टर छोटा पड़ जाए!
ट्रेलर में सबसे ज्यादा स्क्रीन टाइम स्टार कास्ट को दिखाने में खर्च होता नजर आता है. फिल्म में सुनील शेट्टी, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस, दिशा पाटनी, परेश रावल, जॉनी लीवर, अरशद वारसी, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी समेत 20 से ज्यादा कलाकार मौजूद हैं. इतना ही गोरिल्ला तक को अलग से मेंशन किया गया है. लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि इतनी बड़ी भीड़ में आखिर चमकेगा कौन? स्क्रीनटाइम में किसके साथ जस्टिस हो पाएगा?

कॉमेडी के नाम पर ट्रेलर में जोर-जोर से चिल्लाने वाले सीन, ओवर-द-टॉप रिएक्शन और 2026 में भी गेंडा, मेंढक, बस-रिक्शा जैसे जोक्स से हंसाने की कोशिश और एक साथ कई कलाकारों की मौजूदगी दिखाई गई है. लेकिन ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की पहचान रहे स्मार्ट ह्यूमर और यादगार किरदारों की झलक कई दर्शकों को मिसिंग लगी. हालांकि ये ओरिजिनल नहीं बल्कि टॉम क्रूज की 2008 में आई ट्रॉपिक थंडर की डुप्लिकेट बताई जा रही है. लेकिन 18 साल पहले आई सुपर हिट फिल्म की कहानी को अब भी पुराने ढर्रे से परोसने का दाव मेकर्स के लिए कितना काम कर पाएगा!

ट्रेलर ने बढ़ाए सवाल

वैसे तो अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी, क्योंकि अनसर्टेनिटी के दौर में कई बार ट्रेलर कितना भी खराब निकला हो, फिल्म अच्छी साबित हुई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सिर्फ स्टार पावर और नॉस्टैल्जिया के दम पर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा पाएगी? या फिर ये भी उन फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी, जहां कलाकारों की संख्या कहानी से बड़ी हो जाती है.

कुछ फैंस इसे फुल-ऑन एंटरटेनर बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि ट्रेलर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. अब 26 जून को रिलीज के बाद ही पता चलेगा कि ‘वेलकम टू द जंगल’ दर्शकों को सच में हंसा पाती है या फिर ट्रेलर की तरह सवालों के घेरे में ही रह जाती है.

सोना-चांदी में जोरदार उछाल! शांति समझौते की उम्मीद से चमके भाव, एक्सपर्ट ने बताया खरीदने-बेचने का सही समय

इंदौर 

शेयर मार्केट में तूफानी तेजी के बाद कमोडिटी मार्केट में भी बड़ी हलचल देखी जा रही है. पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद सर्राफा बाजार ने यू-टर्न लिया है. ग्लोबल मार्केट में आई मजबूती की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता की बात कही है, नतीजन निवेशकों ने स्टॉक मार्केट के साथ गोल्ड-सिल्वर में खरीदारी पर जोर दिया है. इस दमदार वापसी ने ना केवल ग्लोबल मार्केट के निवेशकों बल्कि भारतीय निवेशकों को भी खुश कर दिया है। 

एमसीएक्स की बात करें तो सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी आई. सोना जहां 0.66% यानी 979 रुपये की बढ़त के साथ 1,49,902 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. वहीं चांदी 2,597 रुपये महंगी होकर 2,42,143 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रही है. इस हफ्ते में पहली बार कमोडिटी मार्केट हरे निशान में ट्रेड करता दिखा है। 

किस लेवल्स पर खरीदें और बेचें?
निवेशकों के मन में एक सवाल इस समय सबसे ज्यादा आ रहा है कि सोने में तेजी तो है पर किस लेवल पर इसे खरीदा जाए. साथ ही किस लेवल पर इसे निकाल दिया जाए. इसके लिए एनडीटीवी की टीम ने केडिया एडवाइजरी से बात की. उन्होंने बताया कि 1.40 लाख से 1.42 लाख पर निवेशक खरीद सकते हैं. साथ ही इसका ऊपरी लेवल 1.60 से 1.62 लाख पर जा सकता है. अगर स्टॉप लॉस की बात करें तो वो 1.35 से 1.36 लाख के बीच सेट कर सकते हैं. हालांकि केडिया एडवाइजरी के अनुसार ये लेवल्स 6 महीने के निवेश को ध्यान में रखकर बनाए हैं। 

इंटरनेशनल मार्केट में भी दिखी तेजी
एमसीएक्स के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निवेशक खूब सोने-चांदी में पैसा लगा रहे हैं. इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड एक बार फिर 4,200 डॉलर प्रति औंस के बड़े लेवल पर पहुंच गया है. मालूम हो कि जंग के पहले दिन से सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 28 फीसदी तक लुढ़क चुका है। 

क्यों बढ़ा सोना-चांदी?
सोने-चांदी में आई इस बढ़ते के पीछे की वजह देखें तो कई ऐसे फैक्टर्स रहे, जिन्होंने इन कीमती धातुओं को मजबूत बनाया है. ट्रंप के शांति फॉर्मूले के साथ, कच्चे तेल की कम होती कीमतों ने कमोडिटी मार्केट में एक नई जान फूंकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान के साथ शांति समझौता बहुत करीब है, ऐसे में दुनियाभर के बाजारों में जंग को लेकर आशंकाएं कम हुई हैं. नतीजन डॉलर से निवेशक खिसक कर अब शेयर मार्केट और सोने-चांदी की तरफ रुख कर रहे हैं। 

इसके अलावा उम्मीद है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जल्द ही कोई अच्छा समाधान हो सकता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आईं हैं. कच्चा तेल सस्ता होने से दुनियाभर के निवेशक अमेरिकी बाजार से सेफ हेवन कहे जाने वाले सोने में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं। 

राज्यसभा चुनाव में NDA की बढ़ी ताकत, बीजेपी की बल्ले-बल्ले; जानें नया नंबर गेम और विजेताओं की पूरी सूची

नई दिल्ली
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के अलावा भाजपा नेता सतीश पूनिया और तरुण चुघ सहित 24 उम्मीदवार गुरुवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। राज्यसभा की 27 सीटों में से 24 सीटों का फैसला निर्विरोध हो गया। इनमें 19 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि शेष पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।

आंध्र प्रदेश: एनडीए ने चारों सीटों पर जमाया कब्जा
आंध्र प्रदेश की चारों राज्यसभा सीटों पर एनडीए उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख पार्टी टीडीपी के सना सतीश बाबू, भाष्यम रामकृष्ण और चिंतकायाला विजय के साथ जनसेना पार्टी के लिंगमनेनी रमेश राज्यसभा पहुंचे. विधानसभा में भारी बहुमत के कारण विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस कोई चुनौती नहीं दे सकी. खास बात यह रही कि जनसेना पार्टी को पहली बार राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिला. यह नतीजा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की राजनीतिक ताकत का संकेत माना जा रहा है। 

गुजरात: भाजपा ने किया क्लीन स्वीप, कांग्रेस का सफाया
गुजरात में राज्यसभा की चारों सीटों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. जितेंद्र कंजारिया, मानसिंह परमार, राजेश शुक्ला और मुकेश राठवा उच्च सदन पहुंचे. विधानसभा में भाजपा के भारी बहुमत और कांग्रेस की कमजोर स्थिति के चलते मुकाबले की नौबत ही नहीं आई. सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल के कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा. भाजपा ने आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े चेहरों को आगे बढ़ाकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी की है। 

मेघालय: एनपीपी के जेम्स संगमा निर्विरोध जीते
मेघालय की एकमात्र राज्यसभा सीट पर नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के जेम्स संगमा निर्विरोध निर्वाचित हुए. मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली सरकार के उम्मीदवार जेम्स संगमा के खिलाफ विपक्ष ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा. विधानसभा में एनपीपी गठबंधन के बहुमत को देखते हुए उनकी जीत पहले से तय मानी जा रही थी. पूर्व मंत्री रह चुके जेम्स संगमा अब अगले छह वर्षों तक राज्यसभा में मेघालय का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनके निर्वाचन से संसद में एनपीपी की उपस्थिति और मजबूत हुई है। 

राजस्थान: भाजपा को दो, कांग्रेस को एक सीट
राजस्थान में तीनों राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. भाजपा की ओर से अलका गुर्जर और सतीश पूनिया विजयी रहे, जबकि कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेता नीरज डांगी को दोबारा राज्यसभा भेजने में सफल रही. विधानसभा में भाजपा के बहुमत का असर चुनावी नतीजों में साफ दिखा, लेकिन कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने के लिए एक सीट सुरक्षित रख ली. सतीश पूनिया का राज्यसभा पहुंचना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, वहीं नीरज डांगी का पुनर्निर्वाचन कांग्रेस के लिए राहत की खबर है। 

मध्य प्रदेश: कांग्रेस खाली हाथ, भाजपा की तीनों सीटों पर जीत
मध्य प्रदेश में भाजपा के तीनों उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द हो गया, जिसके बाद मुकाबला खत्म हो गया. परिणामस्वरूप भाजपा ने तीनों सीटों पर कब्जा कर लिया और कांग्रेस राज्यसभा चुनाव में पूरी तरह खाली हाथ रह गई. हालांकि कांग्रेस ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई होनी है. फिलहाल यह नतीजा भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है। 

महाराष्ट्र: महायुति की ताकत के आगे विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार
महाराष्ट्र में राज्यसभा की रिक्त सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राजेंद्र जैन निर्विरोध निर्वाचित हुए. यह सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. विधानसभा में महायुति गठबंधन के मजबूत बहुमत को देखते हुए विपक्ष ने उम्मीदवार ही नहीं उतारा. भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन ने बिना किसी मुकाबले के सीट अपने नाम कर ली. यह नतीजा दिखाता है कि राज्य की राजनीति में महायुति फिलहाल मजबूत स्थिति में बनी हुई है और विपक्ष उसके सामने प्रभावी चुनौती खड़ी नहीं कर पा रहा है। 

कर्नाटक: कांग्रेस ने दिखाई ताकत, खरगे और पवन खेड़ा फिर राज्यसभा पहुंचे
कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. कांग्रेस ने अपनी विधानसभा में मजबूत स्थिति का फायदा उठाते हुए पार्टी अध्यक्ष मल्‍ल‍िकार्जुन खरगे और प्रवक्ता पवन खेड़ा को फिर से राज्यसभा भेजा. वहीं भाजपा के प्रोफेसर एम. नागराज भी उच्च सदन पहुंचे. किसी उम्मीदवार के खिलाफ पर्याप्त संख्या में प्रतिद्वंद्वी नहीं होने के कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी. कर्नाटक का नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ी राहत माना गया, क्योंकि यहां पार्टी ने अपना प्रतिनिधित्व बरकरार रखा। 

झारखंड: INDIA गठबंधन का दबदबा, JMM और कांग्रेस को फायदा
झारखंड की दो सीटों पर सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन का पलड़ा भारी रहा. विधानसभा में बहुमत होने के कारण झारखंड मुक्‍ति‍ मोर्चा और कांग्रेस ने सीटों का बंटवारा किया. एक सीट JMM और दूसरी कांग्रेस के खाते में जाने की तस्वीर पहले से लगभग साफ थी. भाजपा यहां अपनी एक सीट बचाने की कोशिश में थी, लेकिन विधानसभा गणित INDIA गठबंधन के पक्ष में रहा। 

अरुणाचल प्रदेश: भाजपा के ताई टागक निर्विरोध जीते
अरुणाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता ताई टागक निर्विरोध निर्वाचित हुए. उनके खिलाफ किसी अन्य दल ने उम्मीदवार नहीं उतारा. यह नतीजा राज्य में भाजपा की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. विधानसभा में भाजपा के भारी बहुमत के कारण चुनाव पहले से ही एकतरफा माना जा रहा था। 

मणिपुर: भाजपा ने बरकरार रखी सीट
मणिपुर की एकमात्र राज्यसभा सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति शासन जैसे हालातों के बावजूद भाजपा अपना प्रभाव बनाए रखने में सफल रही. विपक्ष कोई प्रभावी चुनौती खड़ी नहीं कर सका और सीट भाजपा के खाते में चली गई. यह नतीजा पूर्वोत्तर में भाजपा की रणनीतिक बढ़त को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। 

 

इन सीटों पर होगा चुनाव
झारखंड की दो सीटों पर, जहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, तथा मिजोरम की एक सीट पर चुनाव 18 जून को कराया जाएगा। दस राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव तथा महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को की गई। निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने जीत का प्रमाण-पत्र सौंप दिया।

रोमांचक होगा मुकाबला
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव कराया जाएगा, जहां तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल हैं। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निदेशक हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन के 56 विधायक हैं और जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

वहीं, भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू), लोजपा (रामविलास) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन का एक-एक विधायक है।

मिजोरम से एकमात्र राज्यसभा सीट के चुनाव के लिए, सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (JPM) के प्रवक्ता के लालतलुआंगकिमा और मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) से ज़ोथानसांगी हमार चुनावी मैदान में हैं।

MP में हुआ बड़ा खेला
मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे समेत चार उम्मीदवारों को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इनमें एक भाजपा उम्मीदवार है। खरगे के अलावा, अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों में कांग्रेस सचिव मंसूर अली खान, खेड़ा और भाजपा के एम नागराज शामिल हैं। राज्य से मौजूदा चार राज्यसभा सदस्यों इरन्ना कडाडी और नारायण कोरागाप्पा (दोनों भाजपा से), कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवेगौड़ा का कार्यकाल 25 जून को खत्म हो रहा है और इन रिक्त पदों को भरने के लिए चुनाव की घोषणा की गई थी।

मेघालय: एनपीपी ने बचाई अपनी सीट
मेघालय की एकमात्र राज्यसभा सीट पर जेम्‍स संगमा निर्विरोध निर्वाचित हुए. सत्तारूढ़ नेशनल प‍ीपुल्‍स पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा. विधानसभा में एनपीपी गठबंधन के बहुमत के कारण उनकी जीत तय मानी जा रही थी. इस जीत से संसद में एनपीपी की मौजूदगी और मजबूत हुई है। 

अन्य राज्यों का हाल
राज्यसभा चुनाव के इस दौर के साथ ही, संसद में देवेगौड़ा की पांच दशकों से ज्यादा लंबी पारी खत्म हो जाएगी। गुजरात से चार सीट के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के सभी चारों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इनमें राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश से NDA के चारों उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए। निर्वाचित उम्मीदवारों में तीन तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और एक जनसेना से है। निर्वाचन अधिकारी आर वनिता रानी ने बश्याम रामकृष्ण, लिंगमनेनी रमेश, सी विजय और सना सतीश बाबू के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। रामकृष्ण, विजय और बाबू तेदेपा से हैं, जबकि रमेश जनसेना से हैं। विजय, आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी अय्यन्नापतरुदू के पुत्र हैं।

राजस्थान से भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया।

नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेम्स के संगमा मेघालय से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भाई जेम्स के संगमा को उच्च सदन के द्विवार्षिक चुनाव के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, क्योंकि मुकाबले में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था। वानवेइरॉय खरलुखी का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी।

मणिपुर में, भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमायुम शारदा देवी को राज्य से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता ताई तागाक अरुणाचल प्रदेश से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राजेंद्र जैन उपचुनाव में महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

ओडिशा में, भाजपा उम्मीदवार देवाशीष सामंतराय को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। बीजू जनता दल (BJD) छोड़ने और संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में इस्तीफा देने के बाद 26 मई को भाजपा में शामिल हुए सामंतराय इस उपचुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे। तमिलनाडु से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

अन्नाद्रमुक नेता सी षणमुगम ने अपना छह वर्षीय कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले ही सात मई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह वर्ष 2022 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के समर्थन से चक्रवर्ती ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। नौ जून को अधिकारियों ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया, जबकि 12 निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।

छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग का विशेष अभियान: 350 वाहनों की जांच, 5.50 लाख का जुर्माना वसूला

छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग का विशेष अभियान: 350 वाहनों की जांच, 5.50 लाख का जुर्माना वसूला

रायपुर, 
 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा को लेकर एक विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाना है। अभियान के दौरान अब तक लगभग 350 वाहनों की सघन जांच की जा चुकी है। नियमों की अनदेखी और विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर वाहन स्वामियों से 5.50 लाख रुपए का समन शुल्क (जुर्माना) वसूल किया गया है। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है।

स्लीपर बसों पर विशेष नजर, हटाए जा रहे अवैध केबिन

           परिवहन आयुक्त श्री एस. प्रकाश ने राज्य के सभी क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित यात्री बसों, विशेषकर स्लीपर कोच बसों की कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस विशेष अभियान के तहत मुख्य बिंदुओं पर रूप से कार्रवाई की जा रही है।

अवैध केबिन और स्लाइडर हटाना

         स्लीपर कोच बसों में चालक दल (क्रू) के लिए बनाए गए अनधिकृत विभाजनों (पार्टीशन) और स्लीपर बर्थ में लगाए गए अवैध स्लाइडरों को मौके पर ही हटाया जा रहा है।

अग्निशमन व्यवस्था
 
        सभी बसों में सुरक्षा के लिहाज से न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जा रही है। बसों में जीपीएस (GPS) की उपलब्धता और उसकी कार्यशीलता को परखा जा रहा है। साथ ही, निर्धारित मानकों के विपरीत बनी श्बस बॉडीश् के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

दस्तावेजों का सत्यापन

       बसों के वैध पंजीयन, फिटनेस, परमिट और एआईएस-119 मानकों के अनुरूप निर्माण की गहनता से जांच की जा रही है।

लापरवाही बरतने वालों पर होगी कठोर कानूनी कार्रवाई

       परिवहन आयुक्त ने सख्त लहजे में अधिकारियों से कहा है कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के चालान काटने, परमिट/लाइसेंस निलंबित करने जैसी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं। परिवहन आयुक्त ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

बस संचालकों की बैठक लेकर दी जा रही समझाइश

       सड़क पर प्रवर्तन कार्रवाई करने के साथ-साथ विभाग संवाद का रास्ता भी अपना रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में क्षेत्रीय व जिला परिवहन अधिकारियों द्वारा बस स्वामियों और संचालकों की बैठकें ली जा रही हैं। इन बैठकों में उन्हें तय नियमों और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत और समझाइश दी जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी संचालक को बख्शा नहीं जाएगा।

छत्तीसगढ़ कैटरर्स एसोसिएशन का गठन, कैटरिंग आयोजनों के लिए तय हुई नई समय-सीमा

रायपुर.

राज्य के हॉस्पिटैलिटी और कैटरिंग व्यवसाय को सुव्यवस्थित करने और इस क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए, राज्यभर के प्रमुख कैटरिंग दिग्गजों ने एकजुट होकर आधिकारिक तौर पर ‘छत्तीसगढ़ कैटरर्स एसोसिएशन’ (CCA) का गठन किया है।

इस ऐतिहासिक बैठक का नेतृत्व उद्योग के प्रमुख दिग्गजों ने किया, जिनमें बंटी नाथवानी (जलाराम कैटरर्स), विजय स्वामी (नीलम कैटरर्स) और लोकेश सिंघल (संस्कार कैटरर्स) शामिल थे। इस उच्च स्तरीय बैठक में क्षेत्र के कई अन्य बड़े नामों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें बाबूलाल पालीवाल, दीपेश जैन (भवधन फूड्स) ,तुषार भोजानी (जलाराम राजनांदगांव), सुशांत (टी.एफ.सी.), राजू (फूड सोल्यूशन्स), विजय शर्मा (मास्टरशेफ) और प्रशांत पारेख (श्रीजी कैटरर्स) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

12:30 बजे की समय-सीमा पर बनी सहमति
इस बैठक का मुख्य आकर्षण आयोजनों के समय को सीमित करने पर हुआ सामूहिक निर्णय था। कर्मचारियों के कल्याण, बेहतर लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और स्थानीय नियमों के पालन को ध्यान में रखते हुए, एसोसिएशन ने राज्य भर में सभी कैटरिंग कार्यक्रमों के लिए रात 12:30 बजे की सख्त समय-सीमा (डेडलाइन) तय करने का प्रस्ताव रखा है। चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा इवेंट की टाइमिंग के अलावा, बैठक में कैटरिंग उद्योग के सामने आ रही अन्य गंभीर चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की गई। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ:

  • सप्लाई चेन की दिक्कतें और कच्चे माल की बढ़ती महंगाई।
  • लेबर मैनेजमेंट और कुशल कारीगरों (स्टाफ) की कमी।
  • सभी वेंडर्स के बीच हाइजीन (सफाई) और सर्विस के मानकों को बेहतर बनाना।

सभी उपस्थित सदस्यों ने आपसी सहयोग, संसाधनों को साझा करने और सामूहिक रूप से इन परिचालन बाधाओं को दूर करने के रणनीतिक उपायों पर अपने विचार साझा किए।

आगे की रूपरेखा
इस शुरुआती बैठक को एक आधिकारिक कार्यकारी निकाय (एग्जीक्यूटिव बॉडी) का रूप देने के लिए, सदस्यों ने घोषणा की है कि जल्द ही एक औपचारिक समिति का गठन किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ कैटरर्स एसोसिएशन (CCA) का नेतृत्व करेगी। यह आगामी लीडरशिप टीम एसोसिएशन का संविधान तैयार करने, सरकारी स्तर पर कैटरर्स का प्रतिनिधित्व करने और नए नियमों का पालन सुनिश्चित कराने का काम करेगी। इस एसोसिएशन का गठन छत्तीसगढ़ के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, जिससे राज्य के कैटरिंग उद्योग को अधिक संगठित, विनियमित और एक सुरक्षित भविष्य मिलने की उम्मीद है।

ट्रंप ने किया डील का दावा, ईरान ने किया खारिज; बोला- रेड लाइन्स पर नहीं होगा कोई समझौता

वॉशिंगटन
 पश्चिम एशिया में भयंकर महायुद्ध का काउंटडाउन शुरू हो चुका था, रात के अंधेरे में ईरान में तबाही मचाने के लिए अमेरिकी फाइटर जेट्स और खतरनाक हथियार बिल्कुल तैयार थे, लेकिन अटैक से कुछ मिनट पहले अचानक बाजी पलट गई. जो अमेरिका और ईरान कल तक एक-दूसरे के खून के प्यासे थे, उनके बीच ऐन वक्त पर पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ी ‘डील’ फाइनल हो गई. इस सरप्राइज समझौते के बाद ट्रंप ने तुरंत अपना गुस्सा थूककर एक बड़ा यू-टर्न लिया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर महा-डील का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही ये भी हिंट दी कि इस बार उनकी बात सीधा ईरान के नए पावर सेंटर मोजतबा खामेनेई से हुई है। 

ट्रंप ने ऐन वक्त पर रोका ईरान पर अटैक
ट्रंप ने अपने सोशल अकाउंट ट्रूथ सोशल पर लिखा ‘इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ईरान के साथ बातचीत ईरानी नेतृत्व के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुच गई है और उसे मंजूरी मिल गई है, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर मैंने आज शाम ईरान के खिलाफ तय हमले और बमबारी रद्द कर दी है। 

ट्रंप ने आगे लिखा कि ‘बातचीत और आखिरी फैसले में चाहे वो मोटे तौर पर हों या विस्तार से, सभी संबंधित पक्षों ने मंजूरी दे दी है. इन पक्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल, सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देश शामिल हैं. जब तक ये समझौता पूरी तरह से तय नहीं हो जाता, तब तक नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी, समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय और जगह जल्द ही बताई जाएगी। 

Iran-US के बीच हो गई महा-डील, टॉप लीडर ने किया एप्रूव
इस पूरी डील में सबसे बड़ा ट्विस्ट ये रहा कि बातचीत को सीधे ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व, यानी वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति के स्तर पर ले जाया गया था. अब तक ईरान इस बात पर अड़ा हुआ था कि वो किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, लेकिन जब ट्रंप ने ‘आज ही रात’ पूरी ताकत से हमले की कसम खा ली तो तेहरान ने अचानक अमेरिका की शर्तें मान लीं। 

ईरानी लीडरशिप ने बंद कमरे में अमेरिकी प्रस्तावों की शर्तों को न सिर्फ पढ़ा, बल्कि उन पर पूरी तरह से रजामंदी भी दे दी. जैसे ही ये कन्फर्मेशन व्हाइट हाउस पहुंची, ट्रंप ने तुरंत अपने कमांडर्स को फोन घुमाया और उड़ने के लिए तैयार बमवर्षक विमानों को वापस लौटने का आदेश दे दिया। 

ट्रंप के दावों को ईरान ने बताया अटकलें
 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ डील वाले बयान के कुछ घंटों बाद ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और ऐसी खबरें सिर्फ अटकलें हैं. इसके अलावा उन्होंने हाल ही में भारतीय कमर्शियल जहाजों पर हुए अमेरिकी हमलों की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की अपील की। 

ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से बघई ने कहा, ‘ईरान ने अभी तक किसी भी समझौते पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. हम अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर कभी समझौता नहीं करेंगे। 

‘बारबार रुख बदल रहा है अमेरिका’
उन्होंने अमेरिका में बार बार रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘शांति वार्ता की स्थिति शुरू से ही हमारे सामने साफ थी. समझौते का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन अमेरिकी पक्ष बार-बार अपना रुख बदलता रहा है. इसी के कारण राजनयिक प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है। 

बघेई ने स्पष्ट किया कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज (Strait of Hormuz) में सुरक्षा कम होने के लिए भी पूरी तरह अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया है। 

क्या बोले ट्रंप
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से घोषणा की थी कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार निपटारा (Settlement) कर लिया है, जिसके दस्तावेज अगले कुछ दिनों में अंतिम रूप ले लेंगे. ट्रंप ने दावा किया था कि इस वीकेंड यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह हो सकता है, जिसमें उनकी तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे. ट्रंप ने ये भी कहा था कि इस समझौते के तहत ईरान कभी-भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि जैसे ही ईरान के साथ ये समझौता हस्ताक्षरित होगा, वैसे ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंद पड़े होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए आधिकारिक तौर पर दोबारा खोल दिया जाएगा. हालांकि, इसके बिल्कुल उलट ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अमेरिकी कार्रवाइयों और उनकी सैन्य हरकतों की वजह से होर्मुज का पूरा इलाका पहले के मुकाबले अब और भी कम सुरक्षित रह गया है। 

 

ट्रंप के फैसले से बाजार में जोश, सेंसेक्स 950 और निफ्टी 260 अंक की छलांग के साथ खुला

मुंबई 
भारतीय शेयर मार्केट हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गजब की तेजी के साथ खुले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान मसले पर यू-टर्न के बीच निवेशकों ने खरीदारी का माहौल पहले ही मिनट से बना दिया. नतीजन सेंसेक्स 950 अंकों की बंपर तेजी के साथ 74,788 लेवल पर और निफ्टी 260 अंक की उछाल के साथ 23,428 पर खुला। 

आईटी के साथ बैंकिंग सेक्टर ने दिखाया दम
निफ्टी आईटी के साथ निफ्टी फार्मा में भी कमाल की तेजी देखी गई. मजबूत शेयरों की बात करें तो इसमें एलएंडटी, ट्रेंट, इटरनल, इंडिगो और बजाज फाइनेंस शामिल रहे. इनके शेयरों में 2 से 3 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. उम्मीद के अनुसार बैंकिंग शेयर भी इस पॉजिटिव खबर के चलते कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं. एचडीएफसी बैंक हो या आईसीआईसीआई बैंक या फिर देश का सबसे बडा पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई ने मार्केट को तेजी दी. मार्केट की इस धमाकेदार शुरुआत से एक बात साफ दिखाई दे रही है कि ज्यादातर सेक्टर्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। 

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के यू-टर्न का असर
आज अगर भारतीय शेयर मार्केट में आई तेजी की वजह देखें तो वो सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति का वो बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जंग खत्म होने की बात कही थी. इसके बाद ही निवेशकों का भरोसा बाजार पर लौटा. दूसरी तरफ अमेरिकी मार्केट की भी गुरुवार को हालत सुधरी, जिसका सीधा असर देश के शेयर मार्केट पर आज दिखाई दे रहा है। 

अमेरिकी बाजार में भी रही तेजी
गुरुवार को अमेरिकी बाजार की बात करें तो डाउ जोन्स 1.86% चढ़ा, वहीं, एसएंडपी 500 में 1.75% की तेजी देखी गई. इसके अलावा नैस्डैक 2.5% उछलकर बंद हुआ. इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को अमेरिकी मार्केट में उठा-पटक का दौर था। 

एशियाई मार्केट में दिखा जोर
मिडिल ईस्ट में दिख रही शांति का असर एशियाई मार्केट पर भी दिखाई दिया. निक्केई 225 में 3% से ज्यादा तेजी आई. इसके साथ ही हैंग सेंग 1.5% ऊपर बंद हुआ. वहीं, शंघाई कंपोजिट में 1% की बढ़त रही. देश के शेयर मार्केट के साथ ग्लोबल मार्केट पिछले कारोबारी दिन (बुधवार) के मुकाबले गुरुवार को ज्यादा स्टेबल नजर आए। 

कच्चा तेल एक बार फिर 90 डॉलर के नीचे
शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे जा चुकी हैं. खबर लिखे जाने तक ब्रेट क्रूड ऑयल 88.59 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. वहीं WTI क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल पर है. कच्चा तेल सस्ता होना भारत के लिए गुड न्यूज है, इससे देश की महंगाई और इंपोर्ट बिल में कमी आती है। 

विदेशी निवेशकों को लेकर चिंता अभी भी
भारतीय बाजार में घरेलू निवेशक जमकर खरीदारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ विदेशी निवेशक की लागातर निकासी देश की के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. बीते दिन यानी 11 जून को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बाजार से करीब 1,987 करोड़ रुपये के शेयर निकाले. वहीं दूसरी तरफ घरेलू निवेशकों ने 4,224 करोड़ रुपये की खरीदारी की. एनएसडीएएल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक इस महीने जून में अभी तक 45,512 करोड़ रुपये भारतीय शेयर मार्केट से निकाल चुके हैं। 

TMC को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक का इस्तीफा, ममता बनर्जी के अब सिर्फ 9 सांसद बचे

कोलकत्ता 
 पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। तीन राज्यसभा सांसदों के जाने का दुख मना रही ममता को चौथा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक इस्तीफा दे चुके हैं। कोयल मल्लिक चौथी राज्यसभा सांसद हैं, जिन्होंने इस्तीफा दिया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि उन्होंने पार्टी से भी इस्तीफा दिया है या फिर नहीं।

बता दें, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी को लगातार झटके लगते जा रहे हैं। पहले तीन दर्जन से ज्यादा विधायकों ने ममता को राजनीतिक हाशिए पर धकेल दिया। इसके बाद एक दर्जन लोकसभा सांसदों ने भी काकोली घोष दास्तीदार के नेतृत्व में ममता का साथ छोड़ने का ऐलान किया था। 13 राज्यसभा सांसदों के साथ केंद्र सरकार को चुनौती देने वाली ममता बनर्जी की मुश्किलें अब राज्यसभा सांसदों ने भी बढ़ाना शुरू कर दी है। पहले शुखेंदु शेखर रे ने 8 जून को इस्तीफा देकर इसकी शुरुआत की और अब हालत यह है कि चार सांसद इस्तीफा दे चुके हैं।

सिर्फ दो महीने में अभिनेत्री से नेता बनी कोयल मल्लिक ने दिया इस्तीफा
गौरतलब है कि स्टार लोगों को राजनीति में लाने वाली ममता बनर्जी ने बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को इसी साल अप्रैल में राज्यसभा भेजा था। शपथ लेने के बाद उत्साहित नजर आ रही कोयल ने मीडिया से बात करते हुए देश सेवा की बात कही थी। उन्होंने कहा, “मैंने बेहद सोच समझकर यह फैसला लिया है। यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। देश की सेवा और लोगों की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है।

कौन हैं कोयल मल्लिक?
बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। दिग्गज बंगाली अभिनेता रंजीत मल्लिक के घर जन्मी कोयल ने शुरुआत से ही फिल्मों में अपना सफर शुरू करने की चाह रखी। 2003 में नाटेर गुरु नामक फिल्म से उन्होंने अपना फिल्मी करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने बंगाली फिल्म इंडस्ट्री पर राज करना शुरू कर दिया। युवाओं के बीच में मशहूर कोयल को ममता बनर्जी ने राज्यसभा जाने के लिए मनाया और अप्रैल 2026 में उन्हें राज्यसभ का सांसद बना दिया गया।

राज्यसभा सांसद बनाए जाने के बाद कोयल ने ममता बनर्जी के प्रति अपना लगाव भी जाहिर किया था। लेकिन 4 मई के बाद हालात बदल गए। लोकसभा के सांसदों के बागी होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसद पद छोड़ चुके थे। इसी क्रम में कोयल घोष ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, कोयल ने कोलकाता से ईमेल के जरिए अपना इस्तीफा संसद को सौंपा है।

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