Ladli Behna Yojana: 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख तक खाते में आ सकते हैं ₹1500

भोपाल 

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1500-1500 रुपए दिए जाते हैं। जून 2023 से मई 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है।

13 मई 2026 को नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी से सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। अब जून 2026 में 37वीं किस्त जारी की जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 जून के बीच सीएम द्वारा किस्त की राशि जारी की जा सकती है, हालांकि फाइनल तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

गौरतलब है कि मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरूआत की गई थी। 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।

वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह (18000 रु सालाना) दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

2 साल में महिलाओं के खातों में पहुंचे 47 हजार करोड़ से ज्यादा
लाडली बहना योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक बन चुकी है। शुरुआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दी। जनवरी 2024 से मई 2026 तक सरकार योजना के तहत 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेज चुकी है।

नए आवेदन अभी भी बंद, लाखों महिलाएं कर रही इंतजार
योजना में शामिल होने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं है। सरकार ने वर्ष 2023 के बाद से नए पंजीयन शुरू नहीं किए हैं और अभी तक आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है। ऐसे में नई पात्र महिलाओं को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

e-KYC नहीं कराया तो अटक सकती है किस्त
योजना का लाभ लगातार मिलता रहे, इसके लिए लाभार्थियों को e-KYC करवाना जरूरी है। जिन महिलाओं का भुगतान रुका हुआ है, वे समग्र पोर्टल पर जाकर आधार के माध्यम से e-KYC प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं। समय रहते यह प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर आगामी किस्त मिलने में परेशानी हो सकती है।

जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान
राज्य की 1.25 करोड़ से अधिक लाडली बहनें अब सरकार के आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रही हैं। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में 37वीं किस्त की तारीख को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। तब तक महिलाओं की निगाहें सरकार की घोषणा पर टिकी हुई हैं।

इन्हें मिलता है योजना का लाभ:

    मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो ।
    विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी योजना की पात्र हैं।
    महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष तक होनी चाहिए ।
    स्वयं का बैंक खाता और बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी होना चाहिए।
    समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई किया होना चाहिए ।

ये योजना से बाहर :

    स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।
    जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​
    जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।
    स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के
    शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/ संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो।

लाभार्थी सूची में कैसे चेक करें अपना नाम

    लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।
    वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर
    क्लिक करें।
    दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।
    कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
    मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।
    ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

किसान कल्याण वर्ष:चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की हुई अभूतपूर्व वृद्धि

किसान कल्याण वर्ष:चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की हुई अभूतपूर्व वृद्धि

मध्यप्रदेश, देश में सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर

भोपाल

मध्यप्रदेश आज कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि का विविधीकरण तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते है कि कृषि को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी समान महत्व देना आवश्यक है। विगत 4 वर्ष में प्रदेश के सब्जी उत्पादन में लगभग 21.58 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश देश में सब्जियों के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर सब्जी क्षेत्र विस्तार की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रदेश की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि, सिंचाई संसाधनों का विस्तार तथा किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के कारण सब्जी उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2022-23 में प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन 236.41 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 257.99 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि राज्य के कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र की सुदृढ़ प्रगति को दर्शाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर सब्जियों का कुल उत्पादन लगभग 2177 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें मध्यप्रदेश की भागीदारी लगभग 259 लाख मीट्रिक टन है। इससे स्पष्ट है कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रदेश के लाखों किसान सब्जी उत्पादन से अपनी आय भी बढ़ा रहे हैं और देश की बढ़ती मांग को भी पूरा कर रहे हैं।

प्रदेश में किसानों द्वारा प्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, फूल-गोभी, पत्ता-गोभी, हरी मटर, भिंडी, पालक, लौकी, अरबी, करेला, ककड़ी, मूली, तुरई (तोरी), गाजर, शकरकंद, शिमला मिर्च, परवल सहित अनेक प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। इनमें प्याज उत्पादन का विशेष स्थान है। प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्र प्याज की खेती के लिए उपयोग किया जाता है। वर्ष 2022-23 में प्याज का रकबा 2.17 लाख हैक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.30 लाख हैक्टेयर हो गया है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते विश्वास और बाजार में प्याज की मांग को दर्शाती है।

प्रदेश में छोटी जोत वाले किसानों को सब्जी फसलों के उत्पादन के लिये ओर प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। जिनसे कम भूमि में अधिक आय प्राप्त हो सके। सब्जी उत्पादन इस दृष्टि से सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक होने से ही किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की कार्य योजना में प्रदेश में 54 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 13 हजार 300 हैक्टेयर में आलू, 9 हजार 800 हैक्टेयर में टमाटर, 16 हजार 500 हैक्टेयर में प्याज, 3 हजार 500 हेक्टेयर में मटर, 3 हजार 500 हेक्टेयर में फूल-गोभी एवं पत्ता-गोभी, 01 हजार 200 हेक्टेयर में उच्च मूल्य वाली सब्जियां तथा 6 हजार 200 हैक्टेयर में कद्दूवर्गीय सब्जियों का विस्तार किया जाएगा। इस योजना से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा विपणन सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

किसान कल्याण वर्ष का मूल उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। सब्जी उत्पादन में वृद्धि से किसानों को वर्ष भर नियमित आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। साथ ही प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है। सब्जियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, परिवहन, भंडारण एवं विपणन से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के नेतृत्व में विभाग किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभागीय योजनाओं का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक मूल्य वाली सब्जियों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे कम भूमि में अधिक लाभ अर्जित कर सकें। आधुनिक तकनीक, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई तथा गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग से उत्पादन और उत्पादकता दोनों में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

मध्यप्रदेश में कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं, वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और किसान हितैषी नीतियों का परिणाम हैं। किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी उद्यानिकी राज्य बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समृद्ध किसान, समृद्ध कृषि और समृद्ध मध्यप्रदेश की अवधारणा को साकार करने में प्रदेश के सब्जी उत्पादक किसानों का योगदान आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

 

जयपुर से भी कम आबादी वाले देश के दौरे पर PM मोदी, जानिए तीन दिन की यात्रा का महत्व

नई दिल्ली

स्‍लोवाक‍िया, ज‍िसकी आबादी तकरीबन 55 लाख है, यानी जयपुर से भी कम. फ‍िर इस देश में ऐसा क्‍या है क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन द‍िन के दौरे पर जा रहे हैं. 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी वहां 14 से 16 जून तक रहेंगे. लगातार मीटिंग फ‍िक्‍स है. आपके मन में भी सवाल होगा क‍ि पीएम मोदी वहां इतना टाइम क्‍यों दे रहे हैं? वहां से क्‍या हास‍िल होने वाला है?

स्लोवाकिया आकार में भले छोटा देश हो, लेकिन भारत के लिए उसकी रणनीतिक, आर्थिक और ज‍ियोपाल‍िट‍िकल अहमियत लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि पीएम मोदी का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है। 

स्‍लोवाक‍िया क्‍यों है खास?
    लगभग 55 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग सेंटर में गिना जाता है. यहां Volkswagen, Kia, Jaguar Land Rover और Stellantis जैसी कंपनियों के बड़े प्लांट हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाना चाहता है। 

    स्लोवाकिया European Union का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत रिश्ते भारत को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच दिला सकते हैं. भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है। 

    रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देश अपने ड‍िफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मॉडर्न बना रहे हैं. स्लोवाकिया भी उनमें शामिल है. भारत अपनी डिफेंस कंपनियों और स्वदेशी वेपन स‍िस्‍टम का एक्‍सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में ड‍िफ‍ेंस पार्टनरश‍िप दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है। 

    स्लोवाकिया अपनी बिजली का बड़ा हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसलिए परमाणु तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं। 

    मध्य यूरोप में भारत अपनी मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक संतुलन बनाना चाहता है. स्लोवाकिया NATO और EU दोनों का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय राजनीति और सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली साझेदार बनने में मदद कर सकते हैं। 

दुन‍िया के ल‍िए मैसेज
पीएम मोदी यह दौरा दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन या फ्रांस जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं है. मोदी सरकार छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रही है। 

भारत में बढ़ा गर्मी का कहर! 13 साल में हीटवेव के दिन दोगुने, 100 से बढ़कर 200 पहुंचे

नई दिल्ली

जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत में साफ और बेहद खतरनाक रूप में दिखने लगा है. देश में पर्यावरण, वन्यजीव और मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आ रहे हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति हीटवेव की है, जिसके दिनों में पिछले कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत एक तरफ जहां गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और संरक्षण के जरिए इनसे निपटने की कोशिशें भी की जा रही हैं। 

हीटवेव का कहर: 13 साल में दोगुने हुए लू के दिन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्लाइमेट चेंज के कारण हीटवेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. अगर पिछले 13 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में हीटवेव के दिनों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. साल 2013 में जहां देश में लगभग 100 दिन हीटवेव के दर्ज किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 200 दिनों के पार पहुंच चुका है। 

सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में भारतीय क्षेत्र में रिकॉर्ड 554 हीटवेव दिन देखे गए, जबकि साल 2023 में यह संख्या 230 दिन थी. यानी सिर्फ एक साल के भीतर ही हीटवेव के दिनों में दोगुने से भी ज्यादा का उछाल आया है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय मौसमी बदलाव कितनी तेजी से भारत को अपनी चपेट में ले रहे हैं। 

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाए और यह स्थिति कम से कम दो दिन तक बनी रहे, तो उसे हीटवेव कहा जाता है. मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान हीटवेव की श्रेणी में आता है। 

हीटवेव सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि लू का रूप ले लेती है, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होती है. विशेष रूप से गरीब, मजदूर वर्ग, बुजुर्ग और बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 

13 सालों में दोगुनी हुई हीटवेव की संख्या
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि 2013 के मुकाबले अब हीटवेव के दिन दोगुने हो गए हैं. पहले जहां हीटवेव मुख्य रूप से अप्रैल-मई तक सीमित रहती थी, अब मार्च से जून तक और कभी-कभी जुलाई में भी इसका असर दिखने लगा है।  

उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता बढ़ गई है. 2024-2025 के ग्रीष्मकाल में कई राज्यों में 40-45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान कई हफ्तों तक बना रहा, जिसने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 

जलवायु परिवर्तन क्यों जिम्मेदार?
जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. भारत में औसत तापमान 0.6 से 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि) की बढ़ती मात्रा वायुमंडल को गर्म कर रही है. मानवीय गतिविधियां जैसे जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल, जंगलों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं. जलवायु मॉडल बताते हैं कि अगर ग्लोबल वार्मिंग यूं ही जारी रही, तो 2050 तक हीटवेव की संख्या और अवधि और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। 

क्षेत्रीय प्रभाव और हॉटस्पॉट
    उत्तर भारत और इंडो-गंगा प्लेन: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
    पश्चिम भारत: राजस्थान और गुजरात में लंबे समय तक 45-48 डिग्री तापमान रहता है.
    मध्य और दक्षिण भारत: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी नई हीटवेव हॉटस्पॉट बन रहे हैं.

शहरों में शहरी हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण रात का तापमान भी नहीं गिरता, जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता.

इंसानी सेहत पर असर
हीटवेव से हर साल हजारों लोग प्रभावित होते हैं. हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हार्ट अटैक और किडनी फेलियर के मामले बढ़ रहे हैं. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है. एक लंबा हीटवेव हजारों अतिरिक्त मौतें का कारण बन सकती है. 2015 की हीटवेव में 2000 से ज्यादा मौतें हुई थीं. अब स्थिति और बदतर हो रही है। 

कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर असर

    कृषि: गेहूं, चावल, फल और सब्जियों की पैदावार घट रही है. पशुधन भी प्रभावित हो रहा है.
    पानी: भूजल स्तर गिर रहा है और जल संकट बढ़ रहा है.
    अर्थव्यवस्था: मजदूरों की उत्पादकता घटती है. बिजली की मांग बढ़ती है. अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान होता है.

भारत में हीटवेव का दोगुना होना जलवायु संकट की घंटी है. 13 साल में 100 से 200 दिनों तक की बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत है. अगर हम अभी गंभीर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दशकों में यह संकट और भयावह रूप ले लेगा. हीटवेव अब कोई मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की स्थायी सच्चाई बन चुकी है। 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गृहिणी की मौत पर ₹30 हजार मासिक आय मानकर तय होगा मुआवजा

नई दिल्ली
एक्सीडेंट में जब किसी इंसान की मौत होती है, तब उसकी कमाई या सैलरी के हिसाब से मुआवजा तय होता है. लेकिन होम मेकर महिलाओं से जुड़े केस में यह मामला उलझ जाता है, क्योंकि होम मेकर महिलाओं की कोई तय कमाई नहीं होती. अब सुप्रीम कोर्ट ने होम मेकर (गृहिणियों) के मुआवजे को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते हुए उनके योगदान का आकलन आवश्यक है. अदालत ने कहा कि गृहिणियों का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वो मानव संसाधन और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  ऐसे में उन्हें केवल “होममेकर” कहने के बजाय “नेशन बिल्डर” कहा जाना चाहिए। 

होम मेकर की मौत पर 30 हजार रुपए मंथली के हिसाब से तय हो मुआवजा
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गृहिणी द्वारा किए जाने वाले घरेलू काम और देखभाल की सेवाओं का आर्थिक मूल्य है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दुर्घटना की शिकार गृहणियों के मामले में मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए होम मेकर महिलाओं की मौत पर 30 हजार रुपए महीना के हिसाब से मुआवजा तय करने की बात कही। 

एक्सीडेंट से जुड़े एक दावे की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 
वाहन दुर्घटना के दावों से जुड़ी एक अपील पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि घर संभालने वाली महिला (होममेकर) का योगदान सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि देश के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका होती है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा तय करते समय घर संभालने वाली महिला की मौत या अक्षमता के कारण परिवार को घरेलू देखभाल के मामले में जो नुकसान होता है, उसे अलग से मान्यता दी जानी चाहिए। 

जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसी उद्देश्य से घरेलू देखभाल के नुकसान (Loss of Domestic Care) का मूल्य ₹30,000 प्रति माह निर्धारित किया है. पीठ ने यह भी कहा कि यह सिद्धांत पहले दिए गए फैसले में निर्धारित मानकों के अतिरिक्त है। 
मुआवजा निर्धारण के लिए एक नया मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करता है। 

2001 में पंजाब की महिला की हादसे में मौत पर आया फैसला

यह फैसला पंजाब में एक मोटर एक्सीडेंट दावे से जुड़ी अपील पर आया, जिसमें नवंबर 2001 में रेशमा नाम की एक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. उसके पति और तीन बच्चों ने मुआवज़े के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का दरवाज़ा खटखटाया था. ट्रिब्यूनल ने 2003 में मुआवजा दिया, लेकिन यह मामला सालों तक मुकदमे में उलझा रहा, और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपील पर दिसंबर 2024 में जाकर फैसला सुनाया। 

दुर्घटना के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद इस तरह की देरी पर चिंता जताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के दाले पर आम तौर पर एक साल के अंदर फैसला हो जाना चाहिए. बेंच ने कहा ऐसे मामलों का फैसला आम तौर पर एक साल के अंदर हो जाना चाहिए। 

    कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों की मॉनिटरिंग करने और यह पक्का करने के लिए सही एडमिनिस्ट्रेटिव निर्देश जारी करने को कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा तय समय में हो जाए। 

    इस फैसले के दूरगामी असर होने की उम्मीद है क्योंकि पूरे भारत में कोर्ट आम तौर पर मृतक होममेकर्स के लिए मौजूदा न्यूनतम वेतन के आधार पर उन्हें एक काल्पनिक इनकम देकर मुआवजा तय करते हैं, और अक्सर उन्हें स्किल्ड या अनस्किल्ड वर्कर्स के बराबर मानते हैं। 
    सुप्रीम कोर्ट का फैसला उस तरीके से अलग है, यह मानते हुए कि घरेलू देखभाल के काम को पारंपरिक लेबर-मार्केट बेंचमार्क तक कम नहीं किया जा सकता। 

    कोर्ट की ये बातें उन मिसालों पर आधारित हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि होममेकर्स के योगदान की, बिना पेमेंट के भी, मापने लायक आर्थिक वैल्यू है। 

    कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2021) और अरुण कुमार अग्रवाल बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2010) सहित कई पिछले फैसलों में, सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने होममेकर्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को गैर-कानूनी मानने के खिलाफ चेतावनी दी थी। 
    अदालत का यह ताजा फैसला एक कदम और आगे बढ़कर घरेलू देखभाल के नुकसान का आकलन करने के लिए हर महीने ₹30,000 का एक ठोस न्यूनतम बेंचमार्क तय करता है। 

    यह बेंचमार्क नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम प्रणय सेठी (2017) में संविधान बेंच द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के साथ काम करेगा, जो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा तय करने के लिए एक मिसाल है। 

अधिक दर पर शराब बिक्री मामले में आबकारी उप निरीक्षक निलंबित

रायपुर,

राजधानी रायपुर की फाफाडीह स्थित विदेशी मदिरा दुकान में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बिक्री का मामला पकड़ में आने पर विक्रेता के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है, और संबंधित क्षेत्र के आबकारी उप निरीक्षक कौशल किशोर सोनी को कर्तव्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने  के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान फाफाडीह विदेशी मदिरा दुकान में कार्यरत विक्रेता अश्वन कुमार मेरिया द्वारा दो पाव ऑल सीजन गोल्डन कलेक्शन रिजर्व व्हिस्की निर्धारित मूल्य 240 रुपये प्रति पाव की दर से 480 रुपये के स्थान पर 500 रूपए में बेची जा रही है। इस प्रकार उपभोक्ता से कुल 20 रुपये अधिक वसूले जाने की पुष्टि हुई।

इसी आधार पर आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़ द्वारा आबकारी उपनिरीक्षक कौशल किशोर सोनी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय उप आयुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता रायपुर रहेगा। इस मामले में मदिरा दुकान में कार्यरत विक्रयकर्ता के विरूद्ध अधिक दर पर मदिरा विक्रय का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

जनसमस्या निवारण शिविर में घनश्याम दास साहू को मिला नि:शुल्क लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार 2026 शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल, सुगम और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।राजनांदगांव जिले में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाएं नागरिकों को उनके घर के समीप उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे लोगों को त्वरित लाभ मिल रहा है। इसी क्रम में राजनांदगांव शहर के मोहड़ वार्ड निवासी  घनश्याम दास साहू को जनसमस्या निवारण शिविर के माध्यम से नि:शुल्क लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा प्राप्त हुई।
          
घनश्याम दास साहू ने बताया कि वे मोहड़ स्कूल परिसर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें परिवहन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी मिली। उन्होंने वहीं पर लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका नि:शुल्क लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल जारी कर दिया गया।

स्थानीय स्तर पर मिली सुविधा, नहीं लगाना पड़ा कार्यालय का चक्कर
            
साहू ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए परिवहन विभाग के जिला कार्यालय जाना पड़ता, जिसमें समय और अतिरिक्त खर्च दोनों लगते। लेकिन सुशासन तिहार के अंतर्गत मोहड़ वार्ड में आयोजित शिविर के माध्यम से यह सुविधा उन्हें स्थानीय स्तर पर ही प्राप्त हो गई। इससे न केवल उनके समय की बचत हुई, बल्कि अनावश्यक आवागमन एवं खर्च से भी राहत मिली। उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से उनका कार्य शीघ्रता एवं सहजता से पूर्ण हो गया।

जनता और प्रशासन के बीच बढ़ रहा विश्वास
             
घनश्याम दास साहू ने कहा कि शासन की यह पहल आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। सुशासन तिहार के माध्यम से लोगों को विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है और छोटे-छोटे कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से प्रशासन जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहा है, जिससे शासन-प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
        
घनश्याम दास साहू ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार जैसी पहल से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल रही है तथा शासकीय सेवाएं सहज, सरल और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंच रही हैं। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक सेवाओं और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित हो रही है।

महिला सुरक्षा एवं गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की राज्य महिला आयोग ने की सराहना

भोपाल 

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव एवं सदस्य सुश्री साधना स्थापक ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा से महिला सुरक्षा, महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं बरामदगी तथा पीड़ित सहायता से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गुमशुदा बालिकाओं की बरामदगी के संबंध में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों में प्रभावी कार्रवाई तथा संवेदनशील पुलिसिंग को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं के प्रत्येक प्रकरण में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। आधुनिक तकनीक, साइबर विश्लेषण, अंतरराज्यीय समन्वय एवं विशेष पुलिस टीमों के माध्यम से गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं सुरक्षित बरामदगी के मामलों में निरंतर सफलता प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं अंतरराज्यीय गुमशुदगी के मामलों में भी समन्वित प्रयासों के माध्यम से बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की गई है। महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

बैठक में महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने, पीड़ित सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने तथा महिला एवं बालिका संबंधी मामलों में विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय बढ़ाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा के विशेष पुलिस महानिदेशक (SDG) श्री अनिल कुमार सहित महिला शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

इंदौर के डायल-112 हीरोज घर की राह भटकी 4 वर्षीय बालिका को सुरक्षित परिजन से मिलाया

भोपाल 

इंदौर जिले के थाना चन्दन नगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटकी 04 वर्षीय बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई सहायता से बालिका सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सकी।

10 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चन्दन नगर क्षेत्र अंतर्गत राजनगर स्थित सांवरिया टेंट हाउस के पास एक छोटी बच्ची अकेली मिली है, जो घर का रास्ता भटक गई है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल चन्दन नगर थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री विपिन रघुवंशी, आरक्षक श्री अनिल एवं पायलट श्री पंकज पांडे ने मौके पर पहुँचकर बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बच्ची से उसके परिजनों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु कम आयु होने के कारण वह अपने परिवार के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रही थी।

इसके बाद डायल-112 टीम ने बच्ची को सुरक्षित एफआरव्ही वाहन में साथ लेकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश के दौरान बच्ची के परिजन उसे खोजते हुए मिले। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बच्ची को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता : विगत एक माह में 1 हजार 136 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल बरामद

भोपाल

“देशभक्ति जनसेवा” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशभर में नागरिकों की गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को वापस दिलाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक, साइबर विशेषज्ञता, सीईआईआर (Central Equipment Identity Register) पोर्टल, साइबर हेल्प डेस्क तथा जिला पुलिस बलों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप विगत एक माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 1 हजार 136 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए गए हैं। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपये है। मोबाइल फोन वापस प्राप्त होने पर नागरिकों ने मध्यप्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया तथा पुलिस के प्रति उनका विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

विभिन्न जिलों की प्रमुख उपलब्धियां

इंदौर

क्राइम ब्रांच इंदौर ने सिटीजन कॉप एप्लीकेशन एवं सीईआईआर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से 230 गुम मोबाइल फोन खोजकर नागरिकों को लौटाए। जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रूपये है। इसके अतिरिक्त भंवरकुआं थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण एवं सतत प्रयासों से 13 मोबाइल फोन कीमत 3 लाख 60 हजार तथा विजय नगर थाना पुलिस ने मोबाइल दुकान में हुई लाखों रुपये की चोरी का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए 17 मोबाइल फोन, नगदी, मोबाइल एसेसरीज एवं अन्य सामग्री सहित लगभग 13 लाख रूपये का की संपत्ति जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इस प्रकार तीनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 260 मोबाइल फोन सहित लगभग 66 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की।

दमोह

पुलिस द्वारा चलाए गए “गुम मोबाइल खोज अभियान” के अंतर्गत 208 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया गया। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 41 लाख 60 हजार रुपये है।

शिवपुरी

तकनीकी विश्लेषण एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से पुलिस ने 120 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। बरामद मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये है।

खण्डवा

पुलिस ने “ऑपरेशन सहयोग” के तहत दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से 151 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 22 लाख 84 हजार रूपये से अधिक है।

भोपाल

जीआरपी भोपाल ने ट्रेनों में मोबाइल चोरी करने वाले बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन सहित 4 लाख 82 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं थाना हनुमानगंज पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 50 गुम मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए, जिनकी कीमत लगभग 12 लाख रूपये है।

दोनों कार्रवाइयों में कुल 60 मोबाइल फोन सहित लगभग 16 लाख 82 हजार मूल्य की संपत्ति बरामद की गई।

अशोकनगर

साइबर सेल के विशेष प्रयासों से 120 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 लाख 20 हजार रुपये है।

धार

जिला साइबर शाखा एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए लगभग 12 लाख रुपये से अधिक के 124 गुम मोबाइल फोन बरामद किए है।

छतरपुर

पुलिस ने “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत लवकुशनगर एवं बड़ामलहरा अनुभागों में कार्रवाई करते हुए 48 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 7 लाख 20 हजार रूपए है। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर एवं गृहणियां शामिल रहीं।

अनूपपुर

पुलिस ने थाना कोतमा एवं बिजुरी क्षेत्र से गुम हुए 22 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 3 लाख 30 हजार रूपये है। इसके अतिरिक्त जीआरपी अनूपपुर ने चोरी के मोबाइल बेचने की फिराक में घूम रहे एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 3 मोबाइल फोन कीमत 51 हजार रूपये जब्त किए।

इस प्रकार दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 25 मोबाइल सहित लगभग 3 लाख 81 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। 

सिवनी

पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 20 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर आवेदकों को लौटाए गए। इन मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 4 लाख रूपये है।

आधुनिक तकनीक और साइबर विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर तकनीक, सीईआईआर पोर्टल, डिजिटल विश्लेषण एवं अंतरराज्यीय समन्वय का प्रभावी उपयोग करते हुए गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को नागरिकों तक वापस पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में भी आमजन की संपत्ति की सुरक्षा तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए ऐसे प्रयास सतत जारी रहेंगे।

 

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