मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया।

रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना, सांसद  शंकर लालवानी तथा सु कविता पाटीदार, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के मती रीना सतीश मालवीय, विधायक मती मालिनी गौड़, सु उषा ठाकुर,  रमेश मेंदोला,  मधु वर्मा तथा  गोलू शुक्ला,  सावन सोनकर,  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा,  श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर प्रवास का असर, नल जल योजना से पानी नहीं मिलने की शिकायतों पर दो ईई से मांगा स्पष्टीकरण

रायपुर

 जल जीवन मिशन के तहत संचालित नल जल योजनाओं से पानी नहीं मिलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने कोंडागांव और दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंताओं से स्पष्टीकरण मांगा है। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के हाल ही में बस्तर प्रवास के दौरान कोंडागांव जिले के ग्राम बेड़मा तथा दंतेवाड़ा जिले के टेकनार में जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री से ग्रामीणों ने पानी नहीं आने की शिकायत की थी। इस पर  साव ने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता  के.के. मरकाम ने कोडांगांव के कार्यपालन अभियंता  वीरेन्द्र पाण्डेय से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए जारी नोटिस में कहा है कि विगत 5 जून को ग्राम बेड़मा, विकासखण्ड केशकाल, जिला कोण्डागांव में उप मुख्यमंत्री तथा विभागीय मंत्री  अरुण साव के प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल अर्पण समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह के दौरान उप मुख्यमंत्री द्वारा गांववालों से नवनिर्मित योजना के संचालन-संधारण के संबंध में चर्चा के दौरान ग्रामवासियों ने शिकायत की थी कि योजना के सुचारू रूप से कार्यरत नहीं होने के कारण नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है एवं योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

विभाग ने ग्रीष्म ऋतु के दौरान नवनिर्मित योजना से जलापूर्ति नहीं होने की शिकायत को गंभीर मानते हुए कार्यपालन अभियंता को शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने व गुणवत्तापरक कार्य संपादन नहीं होना माना है। कार्यपालन अभियंता की कार्यप्रणाली से तत्समय अप्रिय एवं असहज़ स्थिति निर्मित हुई, जिससे विभाग की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

प्रमुख अभियंता ने दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता  एस.पी. मण्डावी को भी स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए जारी नोटिस में कहा है कि विगत 7 जून को दंतेवाड़ा जिले के ग्राम टेकनार में उप मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान आयोजित जल अर्पण समारोह में उप मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित नल जल योजना के संचालन-संधारण के संबंध में ग्रामीणों से चर्चा की थी। इस दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि योजना के सुचारू रूप कार्यरत नहीं होने के कारण गांव के एक मोहल्ले के कुछ घरों में जलापूर्ति नहीं हो रही है जिससे मोहल्लेवासियों को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

प्रमुख अभियंता ने नोटिस में कहा है कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान नवनिर्मित योजना से समग्र रूप से तकनीकी रूपांकन अनुसार जलापूर्ति नहीं होना कार्यों के तकनीकी मापदण्ड अनुसार क्रियान्वयन नहीं किया जाना दर्शाता है। कार्यपालन अभियंता की कार्यप्रणाली से तत्समय अप्रिय एवं असहज स्थिति निर्मित हुई, जिससे विभाग की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दोनों कार्यपालन अभियंताओं से 7 दिनों में अपना स्पष्टीकरण उचित माध्यम से प्रमुख अभियंता कार्यालय को प्रेषित करना सुनिश्चित करने को कहा है। स्पष्टीकरण विलंब से या प्राप्त नहीं होने की स्थिति में या समाधान कारक न होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी जिसके लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे।

छत्तीसगढ़ में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की 27वीं क्षेत्रीय बैठक संपन्न

रायपुर

केंद्रीय न्यासी बोर्ड, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय 27वीं बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता ने की।  गुप्ता ने निर्देश दिए है कि मृत्यु प्रकरणों में तेजी से ईएसआईसी के साथ समन्वय कर उद्योगों में होने वाले आकस्मिक मृत्यु प्रकरणों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देकर तत्काल निपटाया जाए। सचिव ने कहा कि निष्क्रिय भविष्य निधि खातों के लाभार्थियों की पहचान कर उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में प्रत्येक माह की 27 तारीख को आयोजित निधि आपके निकट कार्यक्रम में जिला …
[18:53, 11/6/2026] +91 94255 58741: राज्यपाल से परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट

रायपुर, 11 जून 2026/ राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक  सुब्रत साहू के नेतृत्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल  डेका ने परिवीक्षाधीन अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और कहा कि अपना कर्तव्य भली-भांति निभाते हुए देश और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करें। आम आदमी को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दें साथ ही अपने अधीनस्थों के प्रति भी संवेदनशील रहें।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संचालक छत्तीसगढ प्रशासनिक अकादमी  टी सी महावर, प्रशिक्षण निदेशक  प्रणव सिंह सहित परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी  गोकुल आर. के.,  वदथ्यवथ यशवंत नाइक एवं  इशांत जायसवाल उपस्थित थे।

राज्यपाल से परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट

रायपुर

राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक  सुब्रत साहू के नेतृत्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल  डेका ने परिवीक्षाधीन अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और कहा कि अपना कर्तव्य भली-भांति निभाते हुए देश और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करें। आम आदमी को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दें साथ ही अपने अधीनस्थों के प्रति भी संवेदनशील रहें।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संचालक छत्तीसगढ प्रशासनिक अकादमी  टी सी महावर, प्रशिक्षण निदेशक  प्रणव सिंह सहित परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी  गोकुल आर. के.,  वदथ्यवथ यशवंत नाइक एवं  इशांत जायसवाल उपस्थित थे।

आदिवासियों की करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम खरीदने का मामला, कलेक्टर ने बैठाई जांच

छिंदवाड़ा

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर भारिया जनजाति के परिवार की 6.60 करोड़ की 11 एकड़ जमीन मात्र छह लाख रुपये में खरीद ली। प्रमुख पर्यटन स्थल तामिया में यह जमीन चौरा पठार और पातालकोट व्यू पॉइंट के पास सड़क किनारे स्थित है, जिसे तत्कालीन तहसीलदार उमराव वारले की पत्नी प्रियंका वारले, बीएमओ जितेंद्र शाह और जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता दिलीप सिंह (सभी आदिवासी) के नाम पर खरीदा गया है। शिकायत पर कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने जांच के आदेश दिए हैं।
पहले मांगी, फिर साजिश कर ई-केवाईसी के बहाने ले ली जमीन

दरअसल, भारिया परिवार की यहां 22 एकड़ पुश्तैनी जमीन है। पिता नान्हों भारती की मौत के बाद पुत्री विप्पा भारती और सिमिना बाई के बीच सीमांकन और बंटवारे को लेकर सालों से विवाद चल रहा था। दोनों की मौत के बाद वारिस बढ़े तो विवाद भी गहरा गया। इसी बीच सिमिना बाई के पुत्र रामदास भारती ने 11 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करा दी।

पीड़ित परिवार के सदस्य बिसन लाल भारती का आरोप है कि जुन्नारदेव एसडीएम पिछले साल उनके घर जमीन मांगने आई थीं। मना करने पर तत्कालीन पटवारी लेखराम यदुवंशी और कोटवार ने सरकारी योजना के लिए ई-केवाईसी के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठे और दस्तखत ले लिए। बाद में उनका इस्तेमाल कर जमीन का बंटवारा करवा दिया। बता दें कि तहसील ऑफिस में दो मई 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन पहुंचा और 30 मई को नामांतरण हो गया। दो जुलाई 2025 को रजिस्ट्री हो गई। इसके बाद अधिकारियों के परिवार के नाम जमीन हो गई।
60 लाख रुपये प्रति एकड़ है जमीन की वास्तविक कीमत

तामिया स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य 60 लाख रुपये प्रति एकड़ और शासकीय गाइडलाइन में करीब 27 लाख रुपये प्रति एकड़ है। यानी व्यावसायिक उपयोग की यह 11 एकड़ जमीन करीब 6.60 करोड़ रुपये होती है, जिसे छह लाख रुपये (तीन लाख चेक और तीन लाख नकद) में खरीदा गया है।

 

वर्ल्ड चैंपियनशिप्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे मध्यप्रदेश के अजय अहिरवार

भोपाल

मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभागी अजय अहिरवार ने इंडिया स्किल्स नेशनल कंपीटिशन 2025- 26 में ब्रिक लेइंग स्किल में स्वर्ण पदक प्राप्त कर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारत की ओर से वर्ल्ड स्किल्स कंपीटिशन 2026 के लिए हुआ है, यह कंपीटिशन सितंबर 2026 में शंघाई, चीन में आयोजित होगी।

अजय अहिरवार का चयन

ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 के लिए भी हुआ है, जिसका आयोजन 23 से 29 जून 2026 तक ऑस्ट्रेलिया में किया जाएगा। प्रतियोगिता में वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वर्तमान में अजय अहिरवार कानपुर में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।

अजय की यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। सीमित संसाधनों के बीच अपनी मेहनत, लगन और कौशल के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के माध्यम से युवा वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।

अजय की उपलब्धियों और उनकी तैयारी को प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे वे आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें।

मध्यप्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहे हैं। राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

 

मध्य प्रदेश के ग्रामीणों को बड़ी राहत, गांवों में मकान और दुकान की रजिस्ट्री होगी निःशुल्क

भोपाल

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए निःशुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया गया है। इसके तहत सरकार अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट दे सकती है।

अधिकार पत्र के बाद भी नहीं मिल रहा था लोन, इसलिए बनी नई योजना

प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया, जिसमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन्हें अधिकार पत्र तो दे दिए गए लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बैंकों ने इसके आधार पर ऋण नहीं दिया। उन्हें रजिस्ट्री चाहिए, इसलिए सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ बनाई।

अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी, मानसून सत्र में आएगा विधेयक

चूंकि, नियम में शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया गया है। इससे सरकार को अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट देने का अधिकार मिल गया। अभी ग्रामीण क्षेत्र में रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत पंचायत उपकर और आधा प्रतिशत सेस लगता है।

इसी तरह मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। दोनों संशोधनों के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत होंगे।

 

खजराना गणेश मंदिर का भव्य मास्टर प्लान: गर्भगृह के सामने सभा मंडप होगा नीचे, बनेगा दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर

इंदौर
 देश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के बड़े केंद्र, प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के कायाकल्प का काम अब मास्टर प्लान के अनुसार शुरू होने जा रहा है। मंदिर में भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या और उनकी सुविधा को देखते हुए पहले चरण के विकास कार्यों को हरी झंडी दे दी गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट को इस तरह प्लान किया गया है कि मंदिर आने वाले भक्तों को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो।

पहले चरण में गर्भगृह का द्वार होगा चौड़ा
विकास कार्य के पहले चरण में सबसे पहले खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार (गेट) की चौड़ाई को बढ़ाया जाएगा। इसके लिए द्वार पर लगी करीब 150 किलो चांदी को सुरक्षित निकालकर सरकारी खजाने (ट्रेज़री) में जमा करा दिया गया है। चांदी हटाने के बाद द्वार की मजबूती और बनावट की जांच इंदौर के एसजीएसआईटीएस (SGSITS) कॉलेज द्वारा की गई है। कॉलेज की तकनीकी रिपोर्ट आ चुकी है, जिसके सुझावों के आधार पर अगले एक-दो दिनों में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

रात में होगा काम, दर्शन व्यवस्था नहीं होगी प्रभावित
श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए एक खास रणनीति बनाई गई है। गर्भगृह के आगे एक पारदर्शी प्लास्टिक शीट लगाई गई है ताकि काम की धूल अंदर न जाए। इसके अलावा, सारा निर्माण कार्य रात के समय किया जाएगा, जब मंदिर आम जनता के लिए बंद रहता है। पहले चरण के इन कामों पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जिसे एक दानदाता और उनके सहयोगियों की मदद से पूरा किया जा रहा है।

सभा मंडप को ढाई फीट नीचे किया जाएगा
अक्सर देखा जाता है कि आगे खड़े लोगों की वजह से पीछे कतार
में लगे भक्तों को भगवान के दर्शन ठीक से नहीं हो पाते। इस समस्या को दूर करने के लिए गर्भगृह के सामने बने सभा मंडप को करीब दो से ढाई फीट नीचे (गहरा) किया जाएगा। इससे पीछे खड़े लोग, वीआईपी मेहमान और नवविवाहित जोड़े बिना किसी बाधा के बप्पा के दर्शन कर सकेंगे।

बनेगा दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर
भक्तों की भारी भीड़ को सुव्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए मंदिर परिसर में एक दो मंजिला (टू-स्टोरी) दर्शन कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें मजबूत रेलिंग लगी होंगी। इसके साथ ही मुख्य गर्भगृह के सामने ‘स्टेप दर्शन’ (सीढ़ीनुमा) व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि कतार में खड़े हर आखिरी व्यक्ति को भगवान साफ नजर आएं। इसके अलावा परिसर में मौजूद 33 छोटे मंदिरों में से कुछ झुके हुए मंदिरों को ठीक करके एक कतार में व्यवस्थित किया जाएगा।

पार्किंग, प्रवेश द्वार और नई गाड़ियों की पूजा की भी होगी व्यवस्था
पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, अगले चरण में पार्किंग सहित मास्टर प्लान के अन्य कामों को पूरा किया जाएगा। इसके तहत पार्किंग क्षेत्र का विकास, पार्किंग तक पहुंचने के लिए रोटरी निर्माण, नई गाड़ियों की पूजा के लिए अलग व्यवस्था और मंदिर परिसर में मौजूद प्रसाद दुकानों के ऊपर शेड लगाए जाएंगे।

इसके अलावा बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र, हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए पेड़-पौधों का रोपण और अन्य सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

पंडित भट्ट ने बताया कि मान्यता के अनुसार, खजराना गणेश मंदिर परमारकालीन और काफी प्राचीन मंदिर है। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने और जरूरतों के अनुसार मंदिर का स्वरूप भी बदलता और विकसित होता गया है।

भगवान बुद्ध के करुणा, शांति और वैश्विक बंधुत्व के संदेश को विश्वभर में आगे बढ़ा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी : मंत्री परमार

भोपाल 

भगवान गौतम बुद्ध के परम शिष्यों  सारिपुत्र एवं  महामोद्गलायन के पवित्र अस्थि अवशेष मंगोलिया के दस दिवसीय आध्यात्मिक प्रवास के उपरांत गुरुवार को भोपाल स्थित राजा भोज विमानतल पहुंचे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा श्रद्धा, सम्मान एवं गरिमा के साथ स्वागत समारोह आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं एवं गणमान्य अतिथियों ने पुष्पवर्षा कर पवित्र अवशेषों का आत्मीय अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी, साँची के पूज्य बान गल उप तिस्स नायक थेरो एवं बान गल विमल तिस्स थेरो, संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव  शिवशेखर शुक्ला, संचालक संस्कृति  एन.पी. नामदेव तथा मंगोलिया प्रवास पर गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा प्रदत्त शांति, करुणा और मानव कल्याण का संदेश आज भी विश्व को दिशा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के माध्यम से इसी मानवीय और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों तक भगवान बुद्ध का संदेश पहुंचा है, वहां भारत के साथ सांस्कृतिक आत्मीयता और आध्यात्मिक जुड़ाव की मजबूत आधारशिला निर्मित हुई है।

अपर मुख्य सचिव संस्कृति  शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के विशेष प्रयासों से भगवान बुद्ध एवं उनके प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेषों के दर्शन विश्व के बौद्ध समुदायों को उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगोलिया के गंदन मठ में आयोजित प्रदर्शनी के दौरान एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र अवशेषों के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

महाबोधि सोसायटी, साँची के पूज्य बान गल उप तिस्स नायक थेरो ने भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन प्रयासों से विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अवशेषों के दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा पवित्र अवशेष महाबोधि सोसायटी एवं जिला प्रशासन रायसेन को विधिवत सौंपे गए। कार्यक्रम के अंत में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के संचालक कर्नल यश सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।

मंगोलिया में एक लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

पवित्र अस्थि अवशेष 28 मई 2026 को भोपाल से मंगोलिया रवाना किए गए थे। मंगोलिया की राजधानी उलानबातर स्थित गंदन तेगचेनलिंग मठ में 31 मई से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए गए। दस दिनों तक चली इस आध्यात्मिक प्रदर्शनी में मंगोलिया के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

भारत और मंगोलिया बौद्ध धर्म की साझा सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जुड़े हुए हैं। पवित्र अवशेषों की यह यात्रा, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। 10 जून को भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन पवित्र अवशेषों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पुनः भारत लेकर आयेंगे।

 

Hormuz LPG Crisis: भारत पर नया ऊर्जा संकट! होर्मुज से आई बुरी खबर, LPG और ईंधन कीमतों पर बढ़ेगा दबाव

नई दिल्ली

 भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इससे भारत की एलपीजी और तेल सप्लाई पर एक बार फिर असर पड़ सकता है। 

दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर के गिराए जाने से अमेरिका गुस्से में है. अमेरिका दो दिनों से ईरान पर लगातार अटैक कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने अब होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है. होर्मुज के रास्ते भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है. इतना ही नहीं, वैश्विक स्तर पर करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी होर्मुज के रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है। 

होर्मुज बंद होने से मचेगा हाहाकार
होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचेगा. इसकी झलक पूरी दुनिया पिछले कुछ समय में देख चुकी है. ईरान ने जब पहली बार होर्मुज बंद किया तो पूरी दुनिया में एलपीजी से लेकर तेल की किल्लत हो गई. मगर बात में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद होर्मुज खुल गया था. मगर अब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला किया है. अगर होर्मुज फिर से लंबे वक्त तक बंद रहता है तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। 

भारत के लिए कितनी चिंता की बात
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, LNG का करीब 60% हिस्सा और LPG की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं. भारत क्योंकि एलपीजी और तेल का आयातक देश है, तो इसकी भी निर्भरता होर्मुज पर ही है। 

एलपीजी सप्लाई पर बढ़ेगा दबाव
अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. भारत में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और LPG का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है.  ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है. वैसे भी अब भी भारत में एलपीजी सप्लाई पहले की तरह नॉर्मल नहीं हो पाया है। 

तेल के भी बढ़ेंगे दाम?
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार है। 

फर्टिलाइजर की आपूर्ति भी होगी प्रभावित
इतना ही नहीं, होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है. भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में लंबे समय तक संकट रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है। 

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