उच्च शिक्षा मंत्री परमार की अध्यक्षता में “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025” को लेकर उच्च स्तरीय बैठक हुई

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में भोपाल स्थित मंत्रालय में “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025” के विभिन्न प्रावधानों एवं उसके संभावित प्रभावों के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक हुई।

बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों, उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता, गुणवत्ता आश्वासन, मानकीकरण, प्रत्यायन व्यवस्था, नियामकीय सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में यह विधेयक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे सहित विविध शिक्षाविद,विषय विशेषज्ञ, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए किए जा रहे विशेष प्रयत्नों से अवगत करवाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काउंसिल की बैठक में ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुशासन, समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब देंगे विकास को गति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश को नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा से पहले करने में सफलता मिली है। प्रदेश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज की जाएगी। युवाओं के विकास पर विशेष रूप से जोर रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बहनों और बेटियों की उन्नति, कृषक कल्याण, नए मेडीकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार कार्य को गुणवत्तापूर्ण बनाते हुए बेहतर कार्य हो रहा है। इसी तरह आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रसर है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की गई है। पीएम महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को अनेक संकायों और विषयों के अध्ययन से जोड़ा गया है। कौशल विकास और औद्योगिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं। देश में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क की धार जिले में स्थापना हुई है, यहां शीघ्र ही इकाइयों द्वारा रिकार्ड समय में कार्य प्रारंभ हो रहा है। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के वेस्ट को निष्पादित करने के साथ ही प्रदेश में जनकल्याण की दृष्टि से अनेक नए कार्य प्रारंभ करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में मुख्यत: ‘मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल’, ‘उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास’, ‘स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण’ एवं ‘सभी के लिए समानता और गरिमा’ से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

 

Gold Rate Fall: सिर्फ एक वजह से 6 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा सोना, अभी खरीदें या करें इंतजार?

 नई दिल्ली

सोने का भाव टूट (Gold Rate Fall) रहा है. न सिर्फ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और घरेलू मार्केट में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ये लगातार सस्ता हो रहा है. गुरुवार को सोने का भाव छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है. स्पॉट गोल्ड की कीमत 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर 4,022.09 डॉलर पर पहुंच गई. इसके अलावा डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर 4,116.20 डॉलर पर आ गए। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट को लेकर स्टोनएक्स के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन ने कहा, ‘Gold Rate 4,000 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) की ओर तेजी से बढ़ रहा है. बुधवार को जारी सीपीआई रिपोर्ट के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कोई खास तेजी नहीं आई। 

MCX पर भी टूटे सोना-चांदी 
न सिर्फ स्पॉट मार्केट में सोने की कीमत बिखरी है, बल्कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी गोल्ड-सिल्वर प्राइस में गिरावट आई है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate  गुरुवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही गिरकर 1.46 लाख रुपये पर आ गया. तो वहीं 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 किलो चांदी की कीमत गिरकर 2.30 लाख रुपये के करीब आ गई. इसमें ओपनिंग के साथ ही लगभग 5000 रुपये की गिरावट आई. इसके बाद अब चांदी अपने हाई से 2.26 लाख रुपये सस्ती मिल रही है। 

Gold में गिरावट की वजह क्या? 
अगर सोने में गिरावट के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा एक कारण नजर आता है और वो है महंगाई का जोखिम. अमेरिका में मई महीने की रिटेल महंगाई दर तीन साल के हाई 4.2% पर पहुंच गई है. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘I Love Inflation’. मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते एनर्जी प्रोडक्ट की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकियों पर महंगाई का बम फोड़ने का काम किया है। 

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, व्यापारी दिसंबर तक अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70% से ज्यादा संभावना जता रहे हैं. उधर ईरान के होर्मुज बंद के ऐलान के बाद अचानक तेल की कीमतों में उछाल आया है. महंगाई बढ़ने के जोखिम के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. बता दें कि गोल्ड को हमेशा महंगाई के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है, लेकिन हाई पॉलिसी रेट्स कीमती धातुओं पर दबाव डालते हैं। 

Gold में खरीदारी का मौका 
तमाम रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका में महंगाई और मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते के कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आई है. यह गिरावट निवेशकों के लिए एक खरीदारी का मौका (Gold Buying Opportunity) बन सकती है। 

संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप की घोषणा, रामलाल बरेठ समेत 7 दिग्गज कलाकारों को सम्मान

रायपुर.

संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, अकादमी रत्न, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कारों की घोषणा की है. फेलोशिप और पुरस्कारों के लिए छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों का चयन किया गया है.

संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए जिन सात कलाकारों का चयन किया गया है, उनमें से छत्तीसगढ़ के पंडित रामलाल बरेठ का नाम सबसे ऊपर है. उनका चयन कथक नृत्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए किया गया है. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद ने संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक, जनजातीय कलाओं और कठपुतली सहित विभिन्न क्षेत्रों के 108 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना है. इनमें छत्तीसगढ़ के अनूप रंजन पांडेय का चयन लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए किया गया है. वहीं 106 युवा कलाकारों का चयन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए किया गया है. इन युवा कलाकारों में छत्तीसगढ़ के आनंद कुमार पांडेय का चयन अभिनय (Acting) के लिए और घनश्याम साहू का चयन कथा लेखन (Play Writing) के लिए किया गया है.

पंडित रामलाल बरेठ, कथक नर्तक
संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए चयनित रामलाल बरेठ कथक नर्तक हैं. जिन्हें रायगढ़ के महाराज चक्रधर अपने दरबार के नर्तकों में कोहिनूर हीरा मानते थे. रामलाल ने अपनी पूरी जिंदगी नृत्य को समर्पित कर दी है. पंडित रामलाल बरेठ का जन्म 6 मार्च सन 1936 को हुआ था. संगीत परिवार में जन्में पंडित रामलाल की कथक नृत्य शिक्षा 5 साल की उम्र में अपने पिता के सानिध्य में शुरू हो गई थी. 10 वर्ष की छोटी आयु में ही वे रायगढ़ दरबार में कला के शौकीन लोगों के सामने नृत्य का प्रदर्शन करने लगे. जिसे देखकर महाराजा चक्रधर सिंह बहुत खुश हुए. इसके बाद महाराजा ने जयपुर के गुरू पंडित जयलाल महाराज से उनकी नृत्य शिक्षा की व्यवस्था करवाई. राजा चक्रधर सिंह खुद गायन, वादन एवं नृत्य के विद्वान भी थे.

वाद्य यंत्र और गायन में भी महारथी
पंडित रामलाल नृत्य के अलावा तबला वादन और गायन में भी पारंगत हैं. तबला की शिक्षा अपने पिता पंडित कार्तिकराम और पंडित जयलाल महाराज से ली और गायन की शिक्षा अपने पिता और उस्ताद हाजी मोहम्मद खां बांदावाले से ली है. पंडित रामलाल सन् 1949 में लखनऊ सम्मेलन में पहली बार मंच पर आए थे. जहां से इन्हें ख्याति मिलनी शुरू हुई. इसके बाद नृत्य प्रदर्शन का अनवरत सिलसिला शुरू हो गया. भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री प्रदान गया था.

अनूप रंजन पांडेय
अकादमी द्वारा लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए चयनित वरिष्ठ रंगकर्मी और लोक कलाकार पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में अपना एक अलग स्थान है. 21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय को बचपन में अपने माता-पिता से कला और संस्कृति के संस्कार विरासत में मिली. कला के प्रति उनके जुनून का नतीजा है कि उन्होंने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत में पीएचडी हासिल की. वर्ष 1988 में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से मुलाकात के बाद साल 1990 में वे उनके मशहूर ‘नया थियेटर’ से जुड़े और देश-विदेश के कई बड़े मंचों पर प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ी लोक रंगमंच को एक नई पहचान दिलाई. रंगमंच के जरिए केवल लोगों के मनोरंजन ही नहीं बल्कि जन जागरूकता का भी काम किया. 1989 से 1992 के दौरान उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश में चले ‘संयुक्त साक्षरता आंदोलन’ में भी अहम भूमिका निभाई.

बस्तर बैंड के जरिए दुर्लभ वाद्ययंत्रों का संरक्षण
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वे रायपुर आ गए और यहाँ साक्षरता के लिए ‘स्टेट रिसोर्स सेंटर’ (SRC) में भी कई वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं. अनूप रंजन पांडेय ने बस्तर के स्थानीय कलाकारों को साथ जोड़कर ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की, जिसके जरिए उन्होंने बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में संगीत के जरिए शांति और संस्कृति के संरक्षण का काम किया.

लोकगीतों-पांडुलिपियों का किया संकलन
उन्होंने करीब 60 दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्रों को विलुप्ति से बचाते हुए सहेजने का काम किया. इसके साथ छत्तीसगढ़ के 143 लोकगीतों और लोककथाओं की पांडुलिपियों का संकलन किया है. यही नहीं उन्होंने अपने व्यक्तिगत संग्रह के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र रायपुर स्थित संग्रहालय को दान भी किए हैं.

घनश्याम साहू, कथा लेखक
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और रंगमंचीय परंपरा को नई पहचान देने वाले युवा रंगकर्मी घनश्याम साहू आज नाटक लेखन, निर्देशन और सांस्कृतिक नेतृत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं. वर्ष 2007 से रंगमंच से सक्रिय रूप से जुड़े घनश्याम साहू ने अपने लेखन और निर्देशन के माध्यम से समाज, लोकजीवन और समकालीन सरोकारों को मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है. रायगढ़ जिले के सारंगढ़ के कतेली के रहवासी घनश्याम साहू द्वारा लिखित एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में अघनिया, चैती, लाल दुपट्टा, बाबागिरी, पहटिया और बिरसा शामिल हैं, जिनका मंचन देश के विभिन्न शहरों और सांस्कृतिक केंद्रों में हुआ है. विशेष रूप से “पहटिया” का मंचन दिल्ली, बैंगलोर, भोपाल, नागपुर, बालाघाट और चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में हुआ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

फ़िल्म लेखन एवं निर्देशन में योगदान
घनश्याम साहू ने रंगमंच के साथ-साथ सिनेमा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके द्वारा लिखित एवं निर्देशित फ़ीचर फिल्मों में कुरुक्षेत्र, झन जाबे परदेस, दंतेला, मुरली, असुर प्रमुख हैं.

डॉ. आनंद कुमार पांडेय, अभिनय
डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय ने वर्ष 2010 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से नाट्यकला में एमए करने के बाद डॉ. योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में “भारतीय रंगमंच में हबीब तनवीर के ‘नया थिएटर’ का योगदान” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है. वर्ष 2007 से हिंदी रंगमंच के संवर्धन और विकास के लिए निरंतर कार्यरत आनंद कुमार अपने अभिनय, निर्देशन और सांस्कृतिक गतिविधियों से नई पीढ़ी को रंगकर्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं.

जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का आयोजन
वर्तमान में वे जशपुर में रंगमंच को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. बीते दो सालों से वे सफलतापूर्वक “जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव” का आयोजन कर रहे हैं, जो क्षेत्र के कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. डॉ. पाण्डेय का यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जशपुर, छत्तीसगढ़ और समूचे हिंदी रंगमंच के लिए गौरव का विषय है. यह पुरस्कार उनके समर्पण, सृजनशीलता, कला के प्रति निष्ठा और रंगमंच के विकास हेतु किए गए अथक प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है.

बिलासपुर बायपास के लिए 75.73 करोड़ रुपये मंजूर, डिप्टी सीएम साव ने दिए तेजी से काम पूरा करने के निर्देश

रायपुर.

राज्य सरकार ने बिलासपुर में कोनी (सेंदरी)-मोपका बायपास सड़क के लिए 75 करोड़ 73 लाख रुपए की निविदा को मंजूरी दे दी है। इस राशि से 13.40 किलोमीटर फोरलेन सीमेंट क्रांकीट सड़क का निर्माण किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित समयावधि में काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मापदंडों के अनुरूप सड़क का निर्माण सुनिश्चित करने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्य का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्य किसी अन्य को सब-लेट (Sub-let) नहीं किया जाएगा। कार्य संपादन के लिए पावर-ऑफ-अटॉर्नी मान्य नहीं होगी। राज्य शासन ने अनुबंध से पहले ठेकेदार से एपीएस (Additional Performance Security) की राशि का एफडीआर (Fixed Deposit Receipt) प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं।

बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी

बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन

बस्तर में आमदनी दोगुनी करने का बड़ा संकल्प: तीन साल में हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य

नई दिल्ली
 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाकर निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमस्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ को नवाचार और निवेश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा। इससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि हो रही है।

लाडली बहना योजना: 37वीं किस्त का इंतजार खत्म? जानिए कब खाते में आएंगे ₹1500 और नए रजिस्ट्रेशन पर क्या है अपडेट

भोपाल 

मध्य प्रदेश की महिलाओं को जल्द ही जून महीने की अच्छी खबर मिलने वाली है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त की तारीख बस नजदीक आ गई है। हर महीने की तरह राज्य की 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आने वाले हैं। हालांकि इस बार लाभार्थी महिलाओं को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के लाडली बहना योजना के कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई ऐलान नहीं किया गया है।

जानकारी मिल रही है कि इस बार 37वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम 15 जून तक खिंच सकता है। पिछले महीने 13 मई को सीएम मोहन यादव ने महिलाओं के खाते में 1500-1500 रुपये भेज दिए थे। लेकिन अभी मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं के चलते इसमें देरी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। लाडली बहना योजना की अगली किस्त को लेकर औपचारिक ऐलान अगले 1-2 दिन में हो सकता है।

पिछले 2 साल में 47 हजार करोड़ ट्रांसफर
सीएम लाडली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जा रही है। पहले इस योजना के तहत 1000 रुपये दिए जाते थे। बाद में उसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। पिछले साल सीएम मोहन यादव ने इसमें बढ़ोतरी कर 1500 रुपये महीना कर दिया गया। जनवरी 2024 से मई 2026 तक लाडली बहनों के खाते में 47,775 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं।

लाडली बहना योजना ऑनलाइन आवेदन कब शुरू होंगे
लाडली बहना योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। अभी तक सरकार की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। इस योजना को लेकर नए रजिस्ट्रेशन 2023 से ही बंद पड़े हैं। फिलहाल जो जानकारियां मिल रही हैं, उसके मुताबिक इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब भी सरकार नए रजिस्ट्रेशन शुरू करेगी, उसके बाद ही लाडली बहना योजना के नए फॉर्म भरे जाने शुरू होंगे।

क्या eKYC की वजह से बंद हो गया लाडली बहना का पैसा
अगर ईकेवाईसी न कराने की वजह से आपका लाडली बहना योजना का पैसा बंद हो गया है तो अभी आपके पास वक्त है। इस काम को तुरंत करा लें। इसके लिए आपको समग्र पोर्टल पर जाना होगा और वहां आपको ईकेवाईसी करें का विकल्प दिखेगा। वहां जाकर आप अपने आधार कार्ड से ईकेवाईसी कर सकते हैं।

लाडली बहना योजना का स्टेटस कैसे चेक करें
आपके खाते में पैसा आया है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए आपको लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाना होगा। यहां आपको ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ पर क्लिक करना है। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डाल कर आप जानकारी हासिल कर सकती हैं।

 

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव

राज्य महिला आयोग ने केंद्रीय जेल भोपाल का किया निरीक्षण

भोपाल

सुधार गृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। महिला बंदियों को सम्मानजनक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। यह बात मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने केंद्रीय जेल भोपाल के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक महिला को उसके अधिकार, सम्मान और न्याय मिले।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोग ने जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।

आयोग ने महिला वार्ड, चिकित्सालय, रसोई घर, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कक्ष, आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का अवलोकन किया। सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों द्वारा संचालित ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने ऑर्केस्ट्रा की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में प्रभावी पहल बताया।

महिला बंदियों से संवाद के दौरान उनकी दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। आयोग ने बंदियों द्वारा आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन भी किया। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव ने महिला बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया

विशेष लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया

आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है

भोपाल 

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ क्षण ऐसे हैं जो केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतीक बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के देश की जनता के निरंतर विश्वास के साथ ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर दीर्घकाल तक राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त करना गौरवपूर्ण क्षण है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण के संकल्प, सेवा और सुशासन की विजय है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च साधन बनाया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी एक नई पहचान स्थापित की है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है और यह परिवर्तन प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच तथा निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है।

प्रधानमंत्री मोदी जी का देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित होना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, यह भारत की जनता के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। निरंतर जनसमर्थन किसी पद या प्रचार से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, पारदर्शिता, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्य शैली से अर्जित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को सदैव “प्रधान सेवक” के रूप में प्रस्तुत किया और गरीब, किसान, महिला, युवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि देश की जनता ने बार-बार उन पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, अथक कार्यशक्ति, दूरदर्शी सोच और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्पष्ट संकल्प करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है तथा उन्हें जन-जन का प्रिय नेता बनाता है।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, रक्षा क्षमता, अंतरिक्ष विज्ञान और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसे अनेक कार्यक्रमों से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शासन की योजनाएँ पहली बार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुँची हैं।

भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में रहेगा अंकित

भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का भी यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों की सदियों पुरानी आस्था की पूर्ति का क्षण था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्म गौरव का पुनर्स्थापन था। जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों ने राष्ट्रीय एकीकरण को नई मजबूती प्रदान की। विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर आज नए अवसरों की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति और स्पष्ट नीति के साथ कठिन से कठिन निर्णय भी राष्ट्रहित में लिए जा सकते हैं।

मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का निरंतर लाभ प्राप्त हुआ है

मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का लाभ निरंतर प्राप्त करता रहा है। प्रदेश में सड़क, रेल, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश एवं परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से गरीब, किसान, महिला और युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनेक योजनाओं का प्रभाव प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचा है। विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से मेरा गृह क्षेत्र रीवा भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बना है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। यह परियोजना प्रधानमंत्री जी के उस विजन का प्रतीक है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। आज रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विंध्य की पहचान नई संभावनाओं से जुड़ चुकी है। विंध्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, शिक्षा संस्थानों और आधारभूत संरचना के विस्तार ने विकास के नए द्वार खोले हैं। यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन की पहचान से आगे बढ़कर प्रगति और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सतत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मुझे यह अनुभव करने का अवसर मिला है कि प्रधानमंत्री जी की सोच केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ भारत के व्यापक निर्माण की है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। प्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री जी के इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व हमें यह विश्वास देता है कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक साकार होती राष्ट्रीय यात्रा है। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज प्रत्येक भारतीय गर्व के साथ कह सकता है कि उसका देश विश्व पटल पर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे ऐसे युग निर्माता नेतृत्व के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

भारतीय चिंतन में आदर्श नेतृत्व का आधार सदैव लोक कल्याण और राष्ट्रहित रहा है।

“प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।

नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥”

शासक का सुख प्रजा के सुख में और उसका हित प्रजा के हित में निहित होता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र प्रथम की यही भावना निरंतर परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश और विंध्य की जनता की ओर से मैं उनके प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र सेवा की अक्षुण्ण ऊर्जा प्रदान करें, ताकि उनके नेतृत्व में भारत विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहे।

· राजेन्द्र शुक्ल

 

जहां कभी था जहांगीर खान का दबदबा, उसी इलाके में हाफ पैंट पहन पुलिस ने निकाली परेड

कलकत्ता

एक समय जिस इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान का दबदबा और खौफ माना जाता था, वहीं अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जहागीर खान को हाफ पैंट पहनाकर सड़कों पर पैदल घुमाया, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मियों के बीच जहागीर खान सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर उस छवि से बिल्कुल उलट है, जिसमें कभी उनका रसूख और दबदबा चर्चा में रहता था और अब वही शख्स सरेआम इस तरह पेश किया जा रहा है। 

भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान
जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना ज़िले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था। 

डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। 

जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा: द राइज़’ के ‘झुकेगा नहीं’ मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी. उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था. इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे. जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी ‘शेर’ है, तो वह भी ‘पुष्पा’ है. वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे। 

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